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	<title>पिपलाई &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>पिपलाई &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रमण संघ के आगमन पर दिखा सामाजिक समरसता का अनोखा संयोग : आचार्य 108 श्री इन्द्रनन्दी जी महाराज का पिपलाई में हुआ ससंघ प्रवेश </title>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2026 07:19:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री पदम नन्दी जी महाराज के आचार्य श्री इन्द्रनन्दी जी महाराज का ससंघ निवाई से श्री महावीरजी के लिए चल रहे मंगल विहार के तहत पिपलाई में मंगल प्रवेश हुआ। बामनवास से पढ़िए, यह खबर&#8230; बामनवास। आचार्य श्री पदम नन्दी जी महाराज के आचार्य श्री इन्द्रनन्दी जी महाराज का ससंघ निवाई से श्री महावीरजी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री पदम नन्दी जी महाराज के आचार्य श्री इन्द्रनन्दी जी महाराज का ससंघ निवाई से श्री महावीरजी के लिए चल रहे मंगल विहार के तहत पिपलाई में मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">बामनवास से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास।</strong> आचार्य श्री पदम नन्दी जी महाराज के आचार्य श्री इन्द्रनन्दी जी महाराज का ससंघ निवाई से श्री महावीरजी के लिए चल रहे मंगल विहार के तहत पिपलाई में मंगल प्रवेश हुआ। उनके साथ परम पूज्य श्रमण उत्कृष्ठ नन्दी जी और नाभिनन्दी जी महाराज का भी मंगल प्रवेश समुदाय को हर्षित करने वाला पल रहा। पिपलाई कस्बे में प्रवेश के पूर्व दिगम्बर जैन मन्दिर के पदाधिकारियों ने श्रमण गौरव को श्रीफल भेंट किया। पिपलाई में प्रवेश के बाद श्रमण संघ ने दिगम्बर जैन मन्दिर में भगवान के दर्शन कर ध्यान की मुद्रा में विशेष पूजा अर्चना की। इसके बाद श्रमण संघ के सानिध्य में विश्वशांति के लिए वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। जिसके करने का सौभाग्य मन्दिर के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन को मिला। जिससे मन्दिर में आध्यात्मिक ऊर्जा की लहरों की हिलोरें उठने लगी। सभी श्रावक मंत्रमुग्ध होकर इसका लाभ उठा रहे थे।</p>
<p><strong> प्रशासनिक समन्वय से श्रमण संघों के हो रहे है मंगल विहार</strong></p>
<p>एक बार फिर पिपलाई में गुर्जर समुदाय ने उदारता दिखाते हुए निरंतराय आहार चर्या संपन्न करवाने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया। आहार चर्या में ज्योति शिक्षण संस्थान स्कूल के निदेशक अखलेश गुर्जर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आहार चर्या में श्रावक और श्राविकाओं ने बढ़ -चढ़ कर भाग लिया। श्रमण संघ के पैदल विहार एवं उनके ठहरने,निहार और हीटवेब को देखते हुए उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा के उपखण्ड स्तरीय प्रशासन ने महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी भूमिका का कुशल निर्वहन किया। जिसके लिए अल्पसंख्यक वर्ग ने जैन समुदाय ने उपजिला कलेक्टर और उपखण्ड स्तर के सभी पदाधिकारियों एवं गुर्जर समुदाय का आभार प्रकट किया।</p>
<p><strong>महावीर जी में होगा वात्सल्य मूर्ति और गणिनी शिरोमणि अदभुत मिलन</strong></p>
<p>आचार्य 108 श्री इन्द्र नन्दी जी महाराज का ससंघ आर्यिका 105 विशुद्धमति और पट्टगणिनी 105 विदुषमति एवं पट्टगणिनी 105 विज्ञमति माताजी का ससंघ श्रीमहावीरजी में अदभुत मिलन होगा। जो बहुत ही सुन्दर और मनोहारी दृश्य होगा।</p>
<p>इस अवसर पर संघपति महेन्द्र जैन चंवरिया अध्यक्ष अग्रवाल समाज चौरासी संभाग,शैलेन्द्र पाटनी,गुणमाला चंवरिया,इंद्रा चंवरिया,प्रेम जी लावा,इन्दु झिलाय,रानू जैन,रेखा जैन,दीपशिखा चंवरिया,मुन्नी भांजा,शोभा पाटनी,मंजुला कला, प्रेमा कसलीवाल,बीना बड़गांव,मुकेश जी बनेठा वाले,नवरत्न नानेर,धर्मचंद लावा,सुनील जैन, मुकेश जैन,सुमनलता जैन,राजुल जैन,वर्धमान कोचिंग सेन्टर की निदेशक एकता जैन,अभिनन्दन जैन,मेघा जैन आदि सहित बड़ी संख्या में श्रावक -श्राविकाएं उपस्थित थे।</p>
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		<title>विश्व णमोकार दिवस पर सामूहिक जाप :  आत्म शांति से विश्व शांति की ओर ले जाता है णमोकार महामंत्र </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2025 04:27:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई एवं बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों में महामंत्र प्रेमियों द्वारा सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया गया। श्रावक-श्राविकाओं द्वारा आत्मशांति एवं विश्व शांति के लिए विश्व णमोकार दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का संकल्प किया गया। बामनवास से पढ़िए जिनेंद्र जैन की खबर&#8230; बामनवास। भगवान् की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई एवं बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों में महामंत्र प्रेमियों द्वारा सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया गया। श्रावक-श्राविकाओं द्वारा आत्मशांति एवं विश्व शांति के लिए विश्व णमोकार दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का संकल्प किया गया। <span style="color: #ff0000">बामनवास से पढ़िए जिनेंद्र जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास।</strong> भगवान् की आराधना ‘वन्दे तद्गुण लब्धये’ अर्थात् उनके गुणों की प्राप्ति के लिए की जाती है। जैनधर्म में मुख्य मंत्र &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217;। इसे हिन्दी में नमस्कार महामंत्र कहते हैं। इससे लाखों मंत्रों की उत्पत्ति हुई। प्राकृत भाषा में निबद्ध जैन धर्म का यह नमस्कार महामंत्र पूरे विश्व के इतिहास में एक ऐसा मंत्र अथवा एक ऐसी प्रार्थना या वंदना है जिसका संबंध किसी व्यक्ति की पूजा से नहीं,अपितु गुणों की पूजा से है। व्यक्ति में विद्यमान गुणों की स्तुति के रूप में यह णमोकार मंत्र दिगम्बर, श्वेताम्बर यहां तक कि जैनधर्म में स्नेह रखने वाले अन्य सभी जैनेतर बंधु भी अत्यन्त श्रद्धापूर्वक बोलते हैं। यह महामंत्र अनादि से पूरे विश्व में व्याप्त है।</p>
<p><strong> अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का संकल्प</strong></p>
<p>इस वर्ष महावीर जन्म कल्याणक दिवस के ठीक एक दिन पूर्व जैन अंतरराष्ट्रीय संस्था और अन्य जैन संगठनों के आह्वान पर वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई एवं बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों, घरों और णमोकार महामंत्र प्रेमियों द्वारा सामूहिक रूप से एक साथ प्रातः 8:01 से लेकर 9:36 बजे तक णमोकार महामंत्र का जाप किया गया। इस अवसर पर श्रावक-श्राविकाओं द्वारा आत्मशांति एवं विश्व शांति के लिए विश्व णमोकार दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का संकल्प किया गया। एक विश्व, एक दिन और एक पवित्र महामंत्र और उसका पवित्र उच्चारण एक साथ पूरे भूमंडल पर व्याप्त हुआ है। जो आत्मशांति से ही विश्वशांति की ओर बेहतर कदम है।</p>
<p><strong>महामंत्र प्राकृत भाषा में रचित है</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार श्रीमाल ने विश्व णमोकार दिवस पर णमोकार महामंत्र के महत्व और उसके रोचक तथ्य के बारे में बताया कि यह महामंत्र अनादि और अनिधन शाश्वत है । यह सनातन है तथा श्रुति परंपरा में यह हमेशा से रहा है। यह महामंत्र प्राकृत भाषा में रचित है। इसमें कुल पांच पद,पैतीस अक्षर,अन्ठावन मात्राएँ,तीस व्यंजन और चौतीस स्वर हैं एवं लिखित रूप में इसका सर्वप्रथम उल्लेख सम्राट खारवेल के भुवनेश्वर (उड़ीसा)स्थित सबसे बड़े शिलालेख में मिलता है।</p>
<p><strong>सभी मंगलों में प्रथम मंगल है</strong></p>
<p>‘ॐ’ प्रणवमंत्र में अरहंत,सिद्ध, आचार्य,उपाध्याय और सर्व साधु ये पांचों परमेष्ठी समाविष्ट हैं। अरिहंत का प्रथम अक्षर ‘अ,अशरीर (सिद्ध) का ‘अ’,आचार्य का ‘आ’,उपाध्याय का ‘उ’, और मुनि (साधु) का ‘म्’ इस प्रकार पंचपरमेष्ठियों के प्रथम अक्षर (अ + अ + आ + उ + म्) को लेकर‘ ॐ’ शब्द बना है। यह महामंत्र सभी पापों का नाशक तथा सभी मंगलों में प्रथम मंगल है।</p>
<p>इस अवसर पर वर्धमान दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में मुकेश कुमार जैन, आशा देवी जैन, सुमनलता जैन, राजुल जैन, मेघना जैन, दक्षिता जैन, भव्य जैन, अयांश ने भी सामूहिक णमोकार महामंत्र के जाप में योगदान प्रदान किया गया l</p>
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		<title>जैन शब्द जातिवाचक नहीं गुणवाचक : आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी का पिपलाई तहसील बामनवास में मंगल प्रवेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jul 2024 05:02:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की तृतीय पट्टाचार्य आचार्य धर्मसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी का सुबह पिपलाई तहसील बामनवास में मंगल प्रवेश हुआ, जिसका सुनील जैन चैनपुरा दिगम्बर जैन समुदाय ने स्वागत किया l इस अवसर पर दिनेश चवरियां ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की तृतीय पट्टाचार्य आचार्य धर्मसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी का सुबह पिपलाई तहसील बामनवास में मंगल प्रवेश हुआ, जिसका सुनील जैन चैनपुरा दिगम्बर जैन समुदाय ने स्वागत किया l इस अवसर पर दिनेश चवरियां ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी को दीक्षा लिए लगभग 51 वर्ष हो चुके हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जिनेंद्र जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास l</strong> आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की तृतीय पट्टाचार्य आचार्य धर्मसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी का सुबह पिपलाई तहसील बामनवास में मंगल प्रवेश हुआ, जिसका सुनील जैन चैनपुरा दिगम्बर जैन समुदाय ने स्वागत किया l इस अवसर पर दिनेश चवरियां ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी को दीक्षा लिए लगभग 51 वर्ष हो चुके हैं। इनके पिताजी भी श्रमण हुए हैं।</p>
<p>ये निवाई नगर से श्री शान्तिवीर नगर श्री महावीरजी पहुंचेगी, इस वर्ष माताजी का चातुर्मास श्रीमहावीरजी में होगाl सुनील जैन चैनपुरा ने बताया कि आर्यिका श्री श्रुतमति और श्री सुबोधमति माताजी की आहार व्यवस्था पिपलाई में मुखराम गुर्जर के यहां एवं प्रवास की व्यवस्था सीतोड में अजय गुर्जर के यहां की गई l इस व्यवस्था के लिए पिपलाई के जैन समुदाय ने गुर्जर समुदाय का आभार प्रकट किया l आर्यिका श्री श्रुतमति माता जी ने बताया कि पुराने समय में आज की भांति जाति प्रथा नहीं थी आचरण से ही व्यक्ति की पहचान होती थी l</p>
<p>उन्होंने ने बताया कि जैन इट इच ए नॉट ए कॉस्ट बट इट इच ए मेन्टेलिटि l जैन जाति नहीं यह मनोवृत्ति का नाम है l जैन शब्द जातिवाचक नहीं गुणवाचक है l इस अवसर पर अशोक भांजा, उर्मिला भांजा, त्रिलोक रजवास, संजय जैन श्रीमहावीर जी, सुरेन्द्र जैन शान्ति नगर, विमल एवं भाग्यवती पहाड़ी , नेमी सीरस, चंद्रेश जैन शिवाड़, संगीता एवं शोभा जैन, सलोचना जैन नल वाले, मधु चैनपुरा, बृजेन्द्र जैन, विनोद जैन, सुनील जैन, जिनेन्द्र जैन, रजनी जैन, आशा जैन, आशीष जैन, सुमनलता जैन, एकता जैन,अभिनन्दन जैन आदि कई श्रावक &#8211; श्राविकाएं उपस्थित थे l</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का समाधिमरण :  विद्या और दौलत की भावपूर्ण विनयांजलि </title>
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		<pubDate>Mon, 26 Feb 2024 06:51:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिन शासन के दो महान जैनाचार्य की विनयांजलि सभा का आयोजन बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों में आयोजित किया गयाl। इस अवसर पर दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में कई श्रावक-श्राविकाओं के द्वारा संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 श्री विद्यासागर जी मुनिराज एवं जैनाचार्य श्री दौलत सागर जी महाराज साहब को समतापूर्वक समाधि संल्लेखना पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जिन शासन के दो महान जैनाचार्य की विनयांजलि सभा का आयोजन बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों में आयोजित किया गयाl। इस अवसर पर दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में कई श्रावक-श्राविकाओं के द्वारा संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 श्री विद्यासागर जी मुनिराज एवं जैनाचार्य श्री दौलत सागर जी महाराज साहब को समतापूर्वक समाधि संल्लेखना पर पुष्प चढ़ाकर भावपूर्ण विनयांजलि अर्पित करते हुए परम उपकारी दोनों गुरुदेवों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कीl <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास l</strong> श्रमण परम्परा के सूर्य और चांद व सतत संयम तप पूर्वक आत्मा में रमने वाले एवं भारत की पवित्र धरा पर पिछले कई दशकों से उन्मुक्त विचरण करने वाले जिन्होंने स्वयं के कल्याण के साथ हम जैसे जीवों के कल्याण के लिए शाश्वत मोक्षमार्ग की शिक्षा देकर हम सभी पर परम उपकार किया और लोकोत्तर यात्रा पर निकल गये, ऐसे जिन शासन के दो महान जैनाचार्य की विनयांजलि सभा का आयोजन बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों में आयोजित किया गयाl जिनमें एक सूर्य की तरह तेजस्वी पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज और दूसरे चांद की तरह शीतल पूज्य आचार्य दौलत सागर जी महाराज हैं, इन दोनों का मिलन महाविदेह में सूरज और चांद के मिलन की भांति है l इस अवसर पर दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में कई श्रावक-श्राविकाओं के द्वारा संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 श्री विद्यासागर जी मुनिराज एवं जैनाचार्य श्री दौलत सागर जी महाराज साहब को समतापूर्वक समाधि संल्लेखना पर पुष्प चढ़ाकर भावपूर्ण विनयांजलि अर्पित करते हुए परम उपकारी दोनों गुरुदेवों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कीl</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-56211" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.27-PM.jpeg" alt="" width="960" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.27-PM.jpeg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.27-PM-300x300.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.27-PM-150x150.jpeg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.27-PM-768x768.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.27-PM-65x65.jpeg 65w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" /><br />
<strong>चलती-फिरती पाठशाला</strong></p>
<p>इस अवसर पर दिगम्बर जैन समाज पिपलाई के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन ने संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 श्री विद्यासागर जी मुनिराज के बारे में बताया कि संयम और ज्ञान की चलती फिरती महापाठशाला विद्यासागर जी ऐसे अनोखे आचार्य थे, जो न सिर्फ कवि, साहित्यकार और विभिन्न भाषाओं के वेत्ता थे बल्कि न्याय, दर्शन, अध्यात्म और सिद्धांत के महापंडित भी थे। ज्ञान के क्षेत्र में जितने ऊंचे थे, उससे कहीं अधिक ऊंचे वैराग्य, तप, संयम की आराधना में थे। ऐसा मणि-कांचन संयोग सभी में सहज प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि विद्यासागर सिर्फ उनका नाम नहीं था, यह उनका जीवन था। वे चलते फिरते पूरे एक विशाल विश्वविद्यालय थे। वे संयम, तप, वैराग्य, ज्ञान विज्ञान की एक ऐसी नदी थे, जो हजारों लोगों की प्यास बुझा रहे थे। कितने ही भव्य जीव इस नदी में तैरना और तिरना दोनों सीख रहे थे। कितने ही उन्हें पढ़कर व सुनकर और देख कर जानते थे और न जाने ऐसे कितने लोग थे जो उन्हें जीने की कोशिश करके उन्हें जानने का प्रयास कर रहे थे।<br />
इन सबके बाद भी आज बहुत से लोग ऐसे हैं जो कुछ नया जानना चाहते हैं , जीवन दर्शन को समझना चाहते हैं और जीवन के कल्याण की सच्ची विद्या सीखना चाहते हैं उन्हें इस सदी के महायोगी दिगम्बर जैन आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन और दर्शन अवश्य देखकर,पढ़कर और जीकर सीखना चाहिए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-56212" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.26-PM-1.jpeg" alt="" width="620" height="620" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.26-PM-1.jpeg 620w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.26-PM-1-300x300.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.26-PM-1-150x150.jpeg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-26-at-12.15.26-PM-1-65x65.jpeg 65w" sizes="(max-width: 620px) 100vw, 620px" />कर्म से जैन</strong></p>
<p>इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया कि आगम ग्रन्थों का प्रकाश फैलाने वाले संघ स्थाविर श्री सागर समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति, दीर्घ संयमी परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री दौलत सागर सूरीश्वर जी म.सा.जन्म से जैन नहीं थे, लेकिन जैन धर्म के प्रति उनके मन में गहरा लगाव होने के कारण मात्र 18 वर्ष की उम्र में घर से भागकर दीक्षा लेने वाले आचार्य श्री 85 वर्षों तक साधु धर्म का पालन करते हुए सबसे अधिक दीक्षा पर्याय वाले आचार्य भगवंत बने l पूज्य श्री ने जैन जन्म से नहीं कर्म से बना जाता है, इस बात को प्रमाणित किया l जन्म से अजैन होने के बावजूद भी वर्तमान समय में संघ स्थाविर पद पर विराजित हुए l इतना ही नहीं वर्तमान में 45 आगम कंठस्थ करने वाले वे एकमात्र आचार्य थे लगभग 900 साधु, साध्वी उनकी आज्ञा में थे। हाथ में माला, हृदय में आगम और होटों पर प्रभु वचन आचार्य श्री इस त्रिकुटी के साक्षात्कार थे l इतने बड़े सर्वोच्च पद पर आसीन होने के बाद भी उनका व्यवहार सहज व सरल था। उनका वियोग होना देश एवं समाज के लिए बहुत बड़ी क्षति है एवं ऐसे संत धरती पर बरले ही पैदा होते हैं।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर सुनील जैन, मुकेश जैन, विनोद जैन, आशीष जैन, आशा जैन, राजुल जैन, सुमनलता जैन, रजनी जैन, एकता जैन, सपना जैन, अभिनन्दन जैन सहित कई श्रावक- श्राविकाएं उपस्थित थे l</p>
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		<title>तीर्थस्थलों को नष्ट करने पर जताई चिंता : आचार्य निपूर्णनन्दी जी महाराज का पिपलाई की धरा पर मंगल प्रवेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 May 2023 14:18:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Nipurnanandi]]></category>
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					<description><![CDATA[आचार्य इन्द्रनन्दी जी महाराज के परम शिष्य बालाचार्य 108 श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज का ससंघ पिपलाई की धरा पर मंगल प्रवेश हुआ l इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सकल दिगम्बर जैन समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि समूचे देश एवं प्रदेश में अति प्राचीन धार्मिक धरोहरों एवं तीर्थ स्थलों को विनष्ट करने के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य इन्द्रनन्दी जी महाराज के परम शिष्य बालाचार्य 108 श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज का ससंघ पिपलाई की धरा पर मंगल प्रवेश हुआ l इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सकल दिगम्बर जैन समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि समूचे देश एवं प्रदेश में अति प्राचीन धार्मिक धरोहरों एवं तीर्थ स्थलों को विनष्ट करने के कुप्रयास दिन -प्रतिदिन निरन्तर बढ़ते जा रहे हैंl <span style="color: #ff0000;">पढ़िए जिनेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास l</strong> आचार्य इन्द्रनन्दी जी महाराज के परम शिष्य बालाचार्य 108 श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज का ससंघ पिपलाई की धरा पर मंगल प्रवेश हुआ l पिपलाई को यह सौभाग्य मुनि श्री की ससंघ शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी की पद वन्दना करते हुए डिग्गी मालपुर के लिए जाते समय प्राप्त हुआ l इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज पिपलाई ने उनका स्वागत किया l दिगम्बर जैन समाज पिपलाई के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि मुनि श्री का पीपलदा में मन्दिर निर्माण के लिए भूमि पूजन में सानिध्य प्राप्त होगा तथा निवाई में अपने परम पूज्य गुरूदेव इन्द्रनन्दी जी महाराज से महामंगल मिलन होगा l</p>
<p><strong>हर राज्य में हो श्रमण संस्कृति बोर्ड</strong></p>
<p>इस अवसर पर बालाचार्य 108 श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज ने सकल दिगम्बर जैन समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि समूचे देश एवं प्रदेश में अति प्राचीन धार्मिक धरोहरों एवं तीर्थ स्थलों को विनष्ट करने के कुप्रयास दिन -प्रतिदिन निरन्तर बढ़ते जा रहे हैंl जैन धर्म की धरोहरों पर अनैतिक एवं अवैध तरीके से कब्जे अतिक्रमण हो रहे हैंl समुदाय के लोगों को धमकियां मिल रही हैंl विगत दो दिन पहले इंदौर की घटना है, जिसमें दिगम्बर जैन समुदाय के प्रसिद्ध तीर्थ गोम्मटगिरि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जा करने की साजिश सरकार के एक मंत्री द्वारा रचि गई, जो कि निन्दनीय हैl इतना ही नहीं, जैन श्रमण संस्कृति पर आए दिन कुठाराघात हो रहे हैं और सरकारें कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपा पोती कर रही हैंl</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-43676" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230507-WA0038.jpg" alt="" width="810" height="1080" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230507-WA0038.jpg 810w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230507-WA0038-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230507-WA0038-768x1024.jpg 768w" sizes="(max-width: 810px) 100vw, 810px" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि जैन संतों पर भी आये दिन उपसर्ग किये जा रहे हैंl इसलिए प्रत्येक राज्य में आन्ध्र प्रदेश सरकार की तरह अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय की संस्कृति धार्मिक सम्पत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षण,जैन आचार्यों एवं संतों और साध्वियों की सुरक्षा एवं चर्या के संरक्षण हेतु वर्तमान परिपेक्ष्य में &#8221; श्रमण संस्कृति बोर्ड &#8221; के गठन की महती आवश्यकता है l इस अवसर पर सुनील कुमार जैन, मुकेश चन्द जैन, विनोद जैन, आशु जैन, सुमनलता जैन, सपना जैन, एकता जैन आदि उपस्थित थे l</p>
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		<title>कलशों से किया गया भगवान का अभिषेक : जन्म जयन्ती को तीर्थंकर जन्म कल्याणक के रूप में मनाया </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Mar 2023 17:24:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Adinath Bhagwan]]></category>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में तीर्थंकर जन्म कल्याणक मनाया गया l इस अवसर पर समुदाय के युवाओं के द्वारा कलशों से श्री भगवान 1008 ऋषभदेव स्वामी का अभिषेक कर 64 ऋद्धी -सिद्धी मंत्रों के साथ वृहद शांति धारा की गई l पढ़िए जिनेंद्र जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230; बामनवास l जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में तीर्थंकर जन्म कल्याणक मनाया गया l इस अवसर पर समुदाय के युवाओं के द्वारा कलशों से श्री भगवान 1008 ऋषभदेव स्वामी का अभिषेक कर 64 ऋद्धी -सिद्धी मंत्रों के साथ वृहद शांति धारा की गई l <span style="color: #ff0000;">पढ़िए जिनेंद्र जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास l</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री ऋषभदेव स्वामी के जन्म कल्याणक को संत शिरोमणी आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनी पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज के आदेशानुसार दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में तीर्थंकर जन्म कल्याणक के रूप में मनाया गया l इस अवसर पर समुदाय के युवाओं के द्वारा कलशों से श्री भगवान 1008 ऋषभदेव स्वामी का अभिषेक कर 64 ऋद्धी -सिद्धी मंत्रों के साथ वृहद शांति धारा की गई l सकल दिगम्बर जैन समाज के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि भगवान ऋषभदेव ने असि, मसि, कृषि के मूल्यवान सिद्धांतों का प्रतिपादन कर व्यक्ति के अंतरंग और बहिरंग दोनों ही तलो पर उन्नयन की शिक्षा प्रदान की थी। इन्हें दिगम्बर संस्कृति का जनक कहा जाता हैl</p>
<p>समाज में स्त्रीशिक्षा के महत्व को स्थापित करने के लिए भगवन ऋषभदेव ने अपनी पुत्री ब्राह्मी को लिपि लिखने का एवं सुन्दरी को इकाई, दहाई आदि अंक विद्या सिखाई और अपने पुत्र भरत, बाहुबली को सभी विद्याओं का अध्ययन कराया तथा जीवन में कलाओं के महत्व को स्थापित करने के लिए 72 कलाओं का उपदेश दियाl</p>
<p>इस अवसर पर रमेश चन्द जैन, विनोद जैन, मुकेश जैन, सुनील जैन, आशु जैन, जिनेन्द्र जैन, सुमनलता जैन, एकता जैन, आशा जैन, राजुल जैन, ललिता जैन, रजनी जैन, सपना जैन आदि श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।</p>
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