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	<title>पावन वर्षायोग &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी संसघ का चातुर्मास दिल्ली में संभव: 2026 के पावन वर्षायोग के लिए दिल्ली के दिगंबर समाज के श्रेष्ठीजन कर रहे थे प्रयास  </title>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2026 11:58:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। जैसे ही संकेत प्राप्त हुए कि इस वर्ष का चातुर्मास का परम सौभाग्य दिल्ली नगर की जैन समाज को प्राप्त होने जा रहा है। समाज में उल्लास का वातावरण है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जैन श्रमण परंपरा में चातुर्मास’ का विशेष महत्व है। वर्षाकाल के चार महीनों में आचार्यश्री एक स्थान पर विराजकर धर्म-ध्यान, स्वाध्याय, तप एवं प्रवचनों के माध्यम से समाज को सत्य, अहिंसा, मैत्री एवं ‘जियो और जीने दो’ का संदेश देते हैं। आचार्यश्री के सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व में हजारों श्रावक-श्राविकाएं शिविर के माध्यम से आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। गुरु भक्त डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली समाज में भारी उत्साह है। राजधानी दिल्ली में 21वीं सदी के श्रमण संस्कृति के पट्टाचार्य श्री का चातुर्मास होना गौरव का विषय है। समाजजनों ने चातुर्मास की भव्य तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। विभिन्न समितियों का गठन कर व्यवस्था, आवास, आहार, विहार प्रवचन एवं धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा बनाई जा रही है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का परिचय</strong></p>
<p>आचार्य श्री विरागसागर महाराज के सुशिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज युवाओं के प्रेरणास्रोत’ एवं आगमानुसार आचरण करने वाले श्रमण संस्कृति आध्यात्मिक गुरु के रूप में पद प्रतिष्ठित हैं। उनका प्रमुख संदेश ’नमोस्तु शासन जयवंत हो’ जन-जन तक पहुंच रहा है। 31 मार्च 2007 को औरंगाबाद में महावीर जयंती के पावन अवसर पर उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया था। अभी तक लगभग दो लाख किमी तक का पदविहार कर चुके हैं। वर्तमान समय में आचार्य श्री द्वारा प्रणीत ग्रंथों को सबसे ज्यादा पढ़ा जा रहा है। आचार्यश्री द्वारा की जा रही धर्म प्रभावना से समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं अध्यात्म का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। दिल्ली चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रातः जिनेंद्र अभिषेक, नित्य नियम पुजन शांतिधारा, आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं तत्वचर्चा के कार्यक्रम होंगे। दिल्ली की सकल दिगंबर जैन समाज ने आचार्यश्री के चातुर्मास के संकेत को सहर्ष स्वीकार करते हुए पुण्यार्जन का लाभ लेने का संकल्प लिया है। इस वर्ष के वर्षायोग में देशभर से श्रद्धालुओं के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।</p>
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		<title>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के वचन सब कुछ करना मगर शंका मत करना : रामगंजमंडी में धर्म प्रभावना का स्तर बहुत उच्च है  </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Aug 2025 12:18:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज नगर में विराजित हैं। उनका पावन वर्षायोग यहां जारी है। नगर में आचायश्री की मंगल देशना से कई दिगंबर जैन समाज के परिवार पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म प्रभावना का स्तर बहुत उच्च है। लोगों को धर्म, शास्त्र आदि का ज्ञान मिल रहा है। सोमवार को आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज नगर में विराजित हैं। उनका पावन वर्षायोग यहां जारी है। नगर में आचायश्री की मंगल देशना से कई दिगंबर जैन समाज के परिवार पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म प्रभावना का स्तर बहुत उच्च है। लोगों को धर्म, शास्त्र आदि का ज्ञान मिल रहा है। सोमवार को आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा की सब कुछ कर लेना मगर शंका मत करना। किसी के प्रति शंका है तो कह दो तुरंत स्पष्ट बात कर लो। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज नगर में विराजित हैं। उनका पावन वर्षायोग यहां जारी है। नगर में आचायश्री की मंगल देशना से कई दिगंबर जैन समाज के परिवार पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म प्रभावना का स्तर बहुत उच्च है। लोगों को धर्म, शास्त्र आदि का ज्ञान मिल रहा है। सोमवार को आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा की सब कुछ कर लेना मगर शंका मत करना। किसी के प्रति शंका है तो कह दो तुरंत स्पष्ट बात कर लो। मुझे ऐसा लग रहा आप ऐसे हैं यदि वो कह दे मैं ऐसा नहीं हूं तो मान लो क्यों अपना दिमाग खराब करते हो। हम स्वीकार नहीं कर पाते, कहते है कि तुम झूठ बोल रहे हो। दिमाग में फितूर आ जाता है कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है। ऐसा करते-करते कई परिवार बिगड़ते चले गए बिगड़ते चले गए और आश्चर्य तब होने लगता है 18 वर्ष के बच्चे हमारे पास आकर कहते हैं कि महाराज श्री पापा मम्मी को समझाओ कि वह शंका न करें। कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा यह कोई अच्छी बात नहीं।</p>
<p>18 साल का बच्चा जिसकी शादी की आप तैयारी कर रहे हैं 25 साल का बच्चा जिसका आप बायोडाटा निकाल रहे हैं। उसके सामने दोनों लड़ रहे हैं यह केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि, आपस में दोनों में विश्वास नहीं है। जब बच्चा झूले में झूल रहा था तब तक लड़ाई ठीक है। अब बच्चा झूले में नहीं है अब बच्चा सब समझता है। कम से कम इतनी मर्यादा तो बना लो अपने बच्चों के सामने मत लड़ो। अगर मां बाप आपस में लड़ेंगे तो बच्चे भी शादी होने के बाद आपस में लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि आप गृहस्थ जीवन में हो तो उसका भी आनंद उठाओ ऐसा नहीं है कि गृहस्थ जीवन में आनंद नहीं है। गृहस्थ जीवन बड़ा विचित्र है व्यक्ति अर्थ ,सामाजिकता का अभाव होने पर भी आनंद उठा लेता है। हमारी आस्था क्या है हमारी कल्पना क्या है उसी हिसाब से सुकून मिलता है जिंदगी की कीमत होती है मुर्दे की नहीं।</p>
<p>इंसान के पास सब कुछ है लेकिन सुकुन नहीं है। सब कुछ तुम्हारे पास है लेकिन सुकुन तुम्हे अपने पुरुषार्थ से ही पाना होगा। अगर तुम्हारा पुरुषार्थ सही जगह होगा तो सुकुन अनुभव जरूर होगा। घर मकान एवम घर में साम्रगी सबके पास भरपूर है लेकिन सुकुन नहीं है। अच्छा खाना अच्छा भोजन अच्छा आवास होने के बावजूद आपके पास सुकुन नहीं हैं तो आपसे गया बीता कोन है। यह आपकी कमी है। अमृत जिव्हा पर है फ़िर भी आप स्वाद नहीं ले पा रहे हैं। लेकिन हम एहसास नहीं करते अगर एहसास करें तो सुकुन जरूर मिलेगा। विकल्पों में साधनों की असंतुष्टि में जिओगे तो सुकुन कभी मिलने वाला नहीं है।</p>
<p><strong>संसारी जीव की समस्या का समाधान उसी के पास </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा सारे जीवन में असंख्यात समस्या आने वाली है जिसके पास पहुंचेंगे। किस किस का समाधान किस-किस के पास जाकर खोजोगे। जिसके पास भी जाओगे क्या वह तुम्हारी समस्या का समाधान कर देगा नहीं कर सकता। आचार्य श्री ने हिरण का उदाहरण देते हुए कहा कि हिरण की नाभि में कस्तूरी होती है लेकिन वह रेगिस्तान में जंगल में खोजती है कि सुगंध कहां से आ रही है इधर-उधर ढूंढती है थक जाती है, और हार कर प्राण खो देती है। इतनी सी बात समझ नहीं पाती कि यह सुगंध मेरी नाभि में से आ रही है। यही बात संसारी जीव को भी समझ में नहीं आ रही है कि मेरी समस्या का समाधान मैं ही हूं। कोई दूसरा नहीं है। न कोई संत, न कोई महंत न कोई देवता, न कोई तंत्र, न कोई मंत्र सिर्फ मात्र जीव अपनी समस्या का समाधान कर सकता है।</p>
<p>या तो वो कर्म निर्जरा करके कर सकता है या फिर शुभ कर्मों को उदय में लाकर कर सकता है या फिर पाप कर्मों को पुण्य के संक्रमण में लाकर कर सकता है किसी के भी सामने झोली फैला ली। इससे कुछ नहीं होगा और कर्म बंधते जाएंगे। समस्या का अंबार लगा देगे लेकिन, उस मृग के समान समाधान हमारे पास होते हुए भी हम समाधान को बाहर खोज रहे हैं। अपने भावों को शुद्ध बनाएंगे विशुद्धि को बढ़ाएंगे पुण्य होगा सब काम अपने आप होंगे।</p>
<p><strong> सभी के प्रति समान दृष्टि रखना अनुकंपा है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने अनुकंपा के विषय पर भी प्रकाश डाला और कहा कि सब जीवो पर समान दृष्टि रखना परिवार का सदस्य हो पड़ोसी हो देश-विदेश में हो सब पर समान दृष्टि रखना कोई भेद नहीं होना अपना पराया नहीं होता। इसे अनुकंपा कहा जाता है। अनुकंपा स्वार्थ अनुकंपा नहीं होना चाहिए। जहां हमें आवश्यक है वहां अनुकंपा दिखाएं जहां नहीं हैं वहां नहीं दिखाएं। समान रूप से अनुकंपा होनी चाहिए। हमारे द्वारा किसी जीव को कष्ट पीड़ा ना हो यह भाव होना चाहिए। अपने आप पर भी और दूसरे पर भी अनुकंपा करें। उन्होंने कहा जहां पर भाव होता है वहीं सच्ची आस्था होती है। जहां पर भाव नहीं होता वहां आस्था नहीं होती। भाव की जरूरत है, भाव होगा तो आस्तिक गुण प्रकट होगा जैसा विश्वास बाहर की चीजों पर है वैसा विश्वास देव शास्त्र गुरु पर करें।</p>
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		<title>आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी का चातुर्मास खेरवाड़ा में: माताजी का भव्य नगर प्रवेश 7 जुलाई को </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 12:10:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य सुनीलसागर की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ का पावन वर्षायोग इस बार खैरवाड़ा के नेमीनाथ जिनालय में होगा। चातुर्मास को सफल बनाने के लिए चौका व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, जुलूस व्यवस्था समिति गठित कर महिला मंच, युवा मंच की ओर से हर घर जैन ध्वजा लगाने, ड्रोन से पुष्प वर्षा सहित वर्षायोग को भव्य बनाने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य सुनीलसागर की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ का पावन वर्षायोग इस बार खैरवाड़ा के नेमीनाथ जिनालय में होगा। चातुर्मास को सफल बनाने के लिए चौका व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, जुलूस व्यवस्था समिति गठित कर महिला मंच, युवा मंच की ओर से हर घर जैन ध्वजा लगाने, ड्रोन से पुष्प वर्षा सहित वर्षायोग को भव्य बनाने की तैयारियां की जा रही है। माताजी ससंघ का नगर प्रवेश 7 जुलाई को होगा। <span style="color: #ff0000">खैरवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खैरवाड़ा।</strong> आचार्य सुनीलसागर की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी ससंघ का पावन वर्षायोग इस बार खैरवाड़ा के नेमीनाथ जिनालय में होगा। दशा हुमड़ समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र बखारिया ने बताया कि 37 वर्षों बाद किसी दिगंबर जैन संत का चातुर्मास नेमीनाथ जिनालय में होने जा रहा है। माताजी के वर्षायोग के लिए आचार्य श्री सुनीलसागर का आशीर्वाद समाज को प्राप्त हुआ है। संरक्षक बाबूलाल सराफ की अध्यक्षता में हुई समाज की बैठक में चातुर्मास को सफल बनाने के लिए चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र पंचोली के नेतृत्व में चौका व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, जुलूस व्यवस्था समिति गठित कर महिला मंच, युवा मंच की ओर से हर घर जैन ध्वजा लगाने, ड्रोन से पुष्प वर्षा सहित वर्षायोग को भव्य बनाने की तैयारियां की जा रही है।</p>
<p>मंत्री कुलदीप जैन ने बताया कि आर्यिका संघ में आर्यिका सुप्रज्ञमति माताजी, आर्यिका श्री अगममति माताजी, क्षुल्लिका समभाव मति माताजी ससंघ का नगर प्रवेश 7 जुलाई को होगा। जहां खैरवाड़ा की सीमा पर बैंडबाजे के साथ संघ का जोरदार स्वागत किया जाएगा। साथ ही बस स्टैंड, सदर बाजार होते हुए माताजी संघ को जिन मंदिर लाया जाएगा। बैठक का संचालन समाज के महामंत्री पंकज जैन ने किया तथा सभी समाजजनों का आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके शिष्यों का पावन वर्षायोग : समूचे भारत वर्ष में करेंगे जैन धर्म की प्रभावना </title>
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		<pubDate>Thu, 22 Jun 2023 15:18:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके शिष्यों का पावन वर्षायोग देश के अलग-अलग राज्यों में होगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज, उनके संघस्थ मुन और उनके प्रभावक शिष्य देश भर में अलग-अलग स्थानों पर चातुर्मास करेंगे। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज संघस्थ मुनियों श्रमण मुनि श्री सुव्रतसागर जी,. श्रमण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर महाराज और उनके शिष्यों का पावन वर्षायोग देश के अलग-अलग राज्यों में होगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज, उनके संघस्थ मुन और उनके प्रभावक शिष्य देश भर में अलग-अलग स्थानों पर चातुर्मास करेंगे। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज संघस्थ मुनियों श्रमण मुनि श्री सुव्रतसागर जी,. श्रमण मुनि श्री अनुत्तरसागर जी, श्रमण मुनि श्री प्रणेय सागर जी, श्रमण मुनि श्री प्रणव सागर जी, श्रमण मुनि श्री सर्वार्थसागर जी, श्रमण मुनि श्री साम्यसागर जी, श्रमण मुनि श्री सौम्य सागरजी, श्रमण मुनि श्री सारस्वत सागर जी, श्रमण मुनि श्री संजयंत सागर जी, श्रमण मुनि श्री यशोधर सागर जी, श्रमण मुनि श्री यतीन्द्र सागर जी, श्रमण मुनि श्री निर्ग्रन्थ सागर जी, श्रमण मुनि श्री निसंग सागर जी, श्रमण मुनि श्री निर्विकल्प सागर जी, श्रमण मुनि श्री जयन्द्र सागर जी, श्रमण मुनि श्री जितेन्द्र सागर जी, श्रमण मुनि श्री जयन्त सागर जी, श्रमण मुनि श्री सुभगसागर जी के साथ, बड़ौत, बागपत (उत्तरप्रदेश)में चातुर्मास करेंगे। वहीं उनके शिष्य श्रमण मुनि श्री मनोज्ञसागर जी, श्रमण मुनि श्री विश्वलोक सागर जी, मधुवन सम्मेद शिखर जी (झारखण्ड) में, श्रमण मुनि श्री प्रशमसागर जी, श्रमण मुनि श्री साध्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री संयत सागर जी मध्यप्रदेश के बड़नगर जिला उज्जैन में, श्रमण मुनि श्री सुप्रभ सागरजी, श्रमण मुनि श्री प्रणत सागर जी फ्रीगंज, उज्जैन (म.प्र.), श्रमणमुनि श्री सुयशसागर जी, क्षुल्लक श्री श्रुत सागर जी, क्षुल्लक श्री सोहं सागर जी झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखण्ड) में, श्रमण मुनि श्री अनुपमसागर जी, श्रमण मुनि श्री समत्व सागर जी सारंगपुर (उ.प्र.) में, श्रमण मुनि श्री अरिजित सागर जी नलवाड़ी (असम) में, श्रमण मुनि श्री आदित्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री अप्रमितसागर जी, श्रमण मुनि श्री सहज सागर जी वस्त्रों की नगरी भीलवाड़ा (राजस्थान) में, श्रमण मुनिश्री आस्तिक्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री सुकुल सागर जी कटनी (म.प्र.) में, श्रमण मुनि श्री आराध्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री सुहित सागर जी पंचशील नगर, भोपाल में, श्रमण मुनि श्री प्रणीत सागर जी,</p>
<p>श्रमण मुनि श्री निर्मोह सागर जी गोंदिया, (महाराष्ट्र) में, श्रमण मुनि श्री प्रणुत सागर जी, श्रमण मुनि श्री यत्न सागर जी बड़ौदरा (गुजरात) में, श्रमण मुनि श्री संकल्प सागर जी, श्रमण मुनि श्री सद्‌भाव सागर जी अजमेर (राजस्थान) में और श्रमण मुनि श्री साक्ष्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री योग्य सागर जी, श्रमण मुनि श्री निवृत सागर जी छीपीटोला, आगरा (उ.प्र.) में गुरुआज्ञा से चातुर्मास करेंगे।</p>
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