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	<title>पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का 37 वां चातुर्मास आरंभ: पार्श्वगिरी क्षेत्र में हुई कलश स्थापना  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 10:12:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्ष 2025 में पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर प्रथम बार चातुर्मास होने जा रहा है। जिसमें आचार्य श्री कुंथूसागरजी की शिष्या गणिनी आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ 2 पिच्छी का 37 वां और पार्श्व गिरी क्षेत्र पर प्रथम बार चातुर्मास करवाने का मौका मिला हैै। लगभग 24 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र का निर्माण आचार्य श्री सन्मति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्ष 2025 में पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर प्रथम बार चातुर्मास होने जा रहा है। जिसमें आचार्य श्री कुंथूसागरजी की शिष्या गणिनी आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ 2 पिच्छी का 37 वां और पार्श्व गिरी क्षेत्र पर प्रथम बार चातुर्मास करवाने का मौका मिला हैै। लगभग 24 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र का निर्माण आचार्य श्री सन्मति सागरजी के निर्देशन और आशीर्वाद से शुरू हुआ था। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> बड़वानी और बावनगजा क्षेत्र के मध्य सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र, जहां पर मनोज्ञ मनोकामना पूर्ण चैतन्य चमत्कारी चतुर्थ कालीन श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा विराजित हैं। लगभग 24 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र का निर्माण आचार्य श्री सन्मति सागरजी के निर्देशन और आशीर्वाद से शुरू हुआ था। जिसे एक वर्ष में पूर्ण किया था। इस श्री क्षेत्र के निर्माण के 23 वर्ष पूर्ण होने पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई। इस वर्ष 2025 में पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर प्रथम बार चातुर्मास होने जा रहा है। जिसमें आचार्य श्री कुंथूसागरजी की शिष्या गणिनी आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ 2 पिच्छी का 37 वां और पार्श्व गिरी क्षेत्र पर प्रथम बार चातुर्मास करवाने का मौका मिला हैै। पार्श्व गिरी अतिशय क्षेत्र की कमेटी इसमें अध्यक्ष कमल गोधा लोहारी, उपाध्यक्ष निलेश बड़जात्या कुक्षी, गौरवजी कासलीवाल सिंघाना, हेमंत जी रावका बाकानेर, महामंत्री गौरव पहाड़िया, मंत्री सौरभ काला और कोषाध्यक्ष रूपेश जैन एवं सभी आजीवन सदस्यगण इस पहला चातुर्मास होने से उत्साहित हैं। बुधवार को पार्श्वगीरी क्षेत्र में वर्ष 2025 के चातुर्मास कलश की स्थापना भव्यता पूर्वक संपन्न हुई। पार्श्व गिरी क्षेत्र कमेटी ने इस अवसर पर तीन कलश स्थापित किए जिनके नाम रत्नत्रय के सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र हैं।</p>
<p><strong> कलश स्थापना का इनको मिला सौभाग्य </strong></p>
<p>सम्यक दर्शन कलश विराजमान करने का सौभाग्य भीकनगांव निवासी चंदा अशोक झांझरी परिवार को प्राप्त हुआ। सम्यक ज्ञान कलश विराजमान करने का सौभाग्य लोहारी निवासी कमल गोधा को प्राप्त हुआ। सम्यक चारित्र कलश विराजमान करने का सौभाग्य बेड़ियां निवासी पंकज जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। क्षेत्र कमेटी ने तीनों पुण्यार्जक परिवार का सम्मान तिलक, माला पहना कर किया गया। इस अवसर पर बड़वानी नगर में चातुर्मास करने वाली आर्यिका विकूंदन श्री माताजी ससंघ 2 पिच्छी भी इस कार्यकम के लिए पद विहार कर पार्श्व गिरी क्षेत्र पर पहुंची। दोनों संघों की आहारचर्या हुई।</p>
<p><strong>इन नगरों और कस्बों से आए समाजजन </strong></p>
<p>इस अवसर पर बड़वानी, कुक्षी,पिपलिया, लोहारी, सिंघाना,बाकानेर, राणापुर, लोनारा, बेड़ियां, भीकनगांव, उज्जैन, पूना और इंदौर सहित अनेक स्थानों से साधर्मी पधारे। कार्यकम के बाद सभी के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन भी रखा गया था। साथ ही क्षेत्र के लगभग 80-90 आदिवासी बच्चों को भी भोजन करवाया गया। सभी अतिथियों का आभार क्षेत्र के महामंत्री गौरव पहाड़िया ने माना।</p>
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		<title>औरंगाबाद बुलढाना से विहार कर आए मुनिसंघ का मंगल प्रवेशः बड़वानी विधायक ने अगवानी कर लिया आशीर्वाद </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 06:37:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी में मुनि श्री विवर्धन सागर जी, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी हैं। बैंडबाजों के साथ ससंघ की अगवानी कर विधायक राजन मंडलोई ने आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पाद प्रक्षालन भी हुआ। आरती उतारी गई। इस अवसर पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़वानी में मुनि श्री विवर्धन सागर जी, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी हैं। बैंडबाजों के साथ ससंघ की अगवानी कर विधायक राजन मंडलोई ने आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पाद प्रक्षालन भी हुआ। आरती उतारी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे। मुनिराजों ने धर्मसभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;       </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> सिलावद की ओर से शुक्रवार को सिद्ध नगर बड़वानी में आचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य मुनि श्री विवर्धन सागर जी एवं मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी पधारी हैं। मुनि संघ की अगवानी बड़वानी विधायक राजन मंडलोई और समाज जन ने की। महाराज के पाद प्रक्षालन और श्रीफल भेंटकर विधायक मंडलोई ने आशीर्वाद प्राप्त किया। समाज के महिला और पुरुषों ने अपने अपने घरों पर मुनि संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। श्रीफल चढ़ाकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। बैंडबाजे के साथ अंजड़ नाके से कारंजा चौराहा, मोटी माता मंदिर, महात्मा गांधी मार्ग, रणजीत चौक होते हुए जैन मंदिर पर शोभा यात्रा समाप्त हुई। मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई।</p>
<p><strong>हमें अष्ट मूल गुण का पालन करना चाहिए</strong></p>
<p>दोपहर को जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विश्वनायक सागर जी ने अपनी देशना में कहा कि जैन धर्म अनादिकाल से चला आ रहा है। अपने तीर्थ क्षेत्र, धर्म क्षेत्र को ऋषि मुनियों ने अपने उपदेशों और शास्त्र और आगम के माध्यम से हमारे जीवन तथा इस धर्म को सींचा है। बड़वानी वाले तो बड़े सौभाग्यशाली हैं। जिनको आचार्य आदिसागर जी, महावीर कीर्ति जी, विमल सागर जी, सन्मति सागर जी का समागम मिला और उनसे संस्कार मिले। उन महान आचार्यों ने अच्छे संस्कार को रोपित किया। जैन संस्कारों में रात्रि भोजन, जमीकंद, शूद्र जल का त्याग होना चाहिए और अष्ट मूल गुण का पालन होना चाहिए। ये जैन धर्म सबसे दुर्लभ है। जिसको पाने के लिए देव भी तरसते हैं।</p>
<p><strong>अहंकार को छोड़कर बड़े बने होते तो योनियों में नहीं भटकते</strong></p>
<p>मुनिश्री विवर्धन सागर जी ने बताया कि गुरु आचार्यश्री विराग सागर जी ने संयम का पथ दिखलाया और जीवन को सफल बनाने के लिए मोक्ष मार्ग की राह दिखलाई। मुनि श्री ने बड़वानी को परिभाषित करते हुए कहा कि बड़वानी कह रहा है हमंे भी बड़ा बनना है और हमें घर, समाज और देश में बड़े नहीं बनना बल्कि हमें तो अपने गुणों से बड़ा बनना है। हम अपने अहंकार को छोड़कर बड़े बने होते तो इतनी योनियों में नहीं भटकते और सिद्धालय में विराजित होते, यहां नहीं बैठे होते। जो छल कपट कर रहे हैं तो वो कब तक बड़ा बनेगा। आपका छल कपट किसी से भी छिप जाए लेकिन, कर्म बांध रहे हो और कर्म बंध तो निश्चित ही है और ये आप सब घर, परिवार, समाज, देश से छिपा सकते हो लेकिन, यह पाप कर्म निश्चित नियम से उदय में आएगा। .लौकिकता में बड़े बनने से कोई फायदा नहीं है। अपने भावों से बड़े बनना है। अपने अहंकार और अंदर की गलत भावना को छोड़ना होगा।</p>
<p><strong>संघ संचालकों का सम्मान किया</strong></p>
<p>सभा के प्रारंभ में मंगलाचरण बबीता काला ने किया। आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन समाज के वरिष्ठ जन ने किया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन युवा साथियों ने किए और शास्त्र भेंट महिला मंडल ने किया। इस अवसर पर मुनि संघ का औरंगाबाद, बुलढाना से पद विहार करवाकर साथ आ रहे संघ संचालकों का पुष्पहार पहनाकर तिलक लगाकर और अंग वस्त्र भेंट कर समाज के वरिष्ठों ने सम्मान किया। संचालन मनीष जैन ने किया। कार्यक्रम में समाज के युवा, बच्चे, महिला, पुरुष उपस्थित रहे। धर्मसभा के पश्चात मुनि संघ का विहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा के लिए हुआ। रात्रि विश्राम पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर हुआ।</p>
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