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	<title>पारणा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>पारणा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>कार्य ऐसा करो कि संसार में आना और जाना छूट जाए: मुनिश्री विशालसागर जी महाराज ने की कठिन साधना, पारणा कर अन्न किया ग्रहण  </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 10:43:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर मुनि श्री विशाल सागर जी ने 72 दिवसीय त्रिकाल चौबीसी व्रत किया। इसमें मात्र 26 दिन जल, मट्ठा मुनुक्का, छेना लिया। उनोदर तप का पारणा कर 13 सितंबर को अन्न ग्रहण किया। इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; इंदौर। सुदामा नगर में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री विशद सागर जी के संघस्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर मुनि श्री विशाल सागर जी ने 72 दिवसीय त्रिकाल चौबीसी व्रत किया। इसमें मात्र 26 दिन जल, मट्ठा मुनुक्का, छेना लिया। उनोदर तप का पारणा कर 13 सितंबर को अन्न ग्रहण किया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> सुदामा नगर में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री विशद सागर जी के संघस्थ मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज ने लगातार 72 दिन के त्रिकाल चौबीसी व्रत-उपवास की साधना के बाद 13 सितंबर को 72 दिनों के बाद अन्न और सभी रस फल आहार में लिए। इसके पूर्व 72 दिन में कभी-कभी 3 निर्जल उपवास किए। इनमें भी मात्र 26 दिनों में केवल जल, मुनक्का, छेना और बादाम उनोदर अल्प आहार लिया। अजय पंचोलिया इंदौर ने बताया कि मुनि श्री विशाल सागर जी ने इस अवसर पर पारणा के पूर्व कहा कि उपवास करने से शरीर हल्का हो गया। अभी 10 लक्षण पर्व में 12 दिनों में मैं 9 दिन निर्जल उपवास कर वैशाली नगर, सुदामा नगर, कांच मंदिर मल्हारगंज, 20 पंथी मंदिर मंदिरों के दर्शन कर वैशाली नगर की यात्रा की। भगवान से एनर्जी मिलती है।</p>
<p>कार्य ऐसा करो कि संसार में आना और जाना छूट जाए। श्रद्धा से भगवान को स्मरण करने से रोग पीड़ा भी दूर हो जाते हैं। कल डॉक्टर ने परीक्षण किया, सब कुछ उन्हें नॉर्मल मिला। मुनि श्री ने 3 जुलाई से 12 सितंबर 72 दिवसीय उपवास साधना में गेहूं, चावल, चना, मूंग आदि सभी प्रकार के अनाज, सभी प्रकार के फल, हरी सब्जी, मिर्च-मसालों, घी, नमक, दूध, बूरा, तेल, दही आदि छहों रस, सूखे मेवे, छुआरा, अखरोट, मखाना, काजू आदि ड्राई फूड का त्याग कर 48 घंटे, 72 घंटे के निर्जल उपवास के बाद भी सभी प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों को छोड़कर नीरस, अल्प आहार लेकर ऊनोदर तप की साधना की। व्रत साधना में मात्र छेना, मट्ठा, दाख जल आदि सीमित खाद्य सामग्री ही ली।</p>
<p><strong>सम्मेद शिखर की 25वीं टोंक की 300 बार चरण वंदना की </strong></p>
<p>जयपुर नगर गौरव 52 वर्षीय सन 2005 में आचार्य श्री विशद सागर जी से दीक्षित मुनि श्री विशाल सागर जी ने गृहस्थ और मुनि अवस्था के 26 वर्षों में 51 प्रकार के व्रतों में अभी तक 5 हजार 325 उपवास पूर्ण किए हैं। इसमें प्रमुख रूप से तीस चौबीसी के 720 व्रत उपवास, चतुर्दशी के 344 उपवास, सोलह कारण के 512 आदि पूर्ण कर सहस्र नाम के 410 उपवास होकर व्रत जारी हैं। काय क्लेश तप साधना में 5 बार से अधिक 100 से अधिक घंटे का तप, अधिकतप 157 घंटे का तप सम्मेद शिखर जी में किया है। सम्मेद शिखर की 25वीं टोंक की 300 बार चरण वंदना मात्र 10 माह में की और साथ ही प्रत्येक टोंक की 1008 परिक्रमा भी लगाई। सम्मेद शिखर की 55 किमी संपूर्ण पर्वत की 5 बार वंदना की। अन्य अनेक तीर्थ अतिशय क्षेत्र पर भी कठोर तपस्या की। इस अवसर पर सैकड़ों भक्तों ने महा पारणा में तपस्वी मुनिराज को आहार देकर पुण्य अर्जित किया। आहार के पूर्व मुनि श्री ने उपदेश में बताया कि प्रभु की भक्ति से शक्ति मिलती है।</p>
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		<title>दमदम कोलकाता के संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की साधना पूर्ण : आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी के सानिध्य में किया पारणा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 13:30:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में नगर में अनेक तपस्या हुईं। यहां तक कि बाहर से आए भक्तों ने भी तप आराधना की। इसी कड़ी में दमदम कोलकाता निवासी 60 वर्षीय संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की तप साधना पूर्ण की। रामगंजमंडी से पढ़िए, यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में नगर में अनेक तपस्या हुईं। यहां तक कि बाहर से आए भक्तों ने भी तप आराधना की। इसी कड़ी में दमदम कोलकाता निवासी 60 वर्षीय संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की तप साधना पूर्ण की। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में नगर में अनेक तपस्या हुईं। यहां तक कि बाहर से आए भक्तों ने भी तप आराधना की। इसी कड़ी में दमदम कोलकाता निवासी 60 वर्षीय संजय जैन सेठी ने 16 उपवास की तप साधना पूर्ण की। विगत एक माह से निरंतर गुरु चरणों में रहकर तन-मन-धन समर्पित करते हुए यह साधना पूर्ण की। इससे पूर्व वर्ष 2024 में उन्होंने आचार्य श्री के कोलकाता के प्रवास के दौरान दसलक्षण पर्व पर 10 उपवास की साधना पूर्ण की। उसके बाद ही उन्होंने मन बना लिया था, जहां भी आचार्य श्री रहेंगे, वहां रहकर 16 उपवास की साधना करूंगा।</p>
<p><strong> आचार्य श्री के सानिध्य कठिन साधना भी लगी रूई जैसी </strong></p>
<p>सेठी ने कहा कि संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया, उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया, महामंत्री राजकुमार गंगवाल, मंत्री राजीव बाकलीवाल एवं सभी समाज बंधुओं और मेरी बहन-बहनोई सारिका मनोज चांदवाड ने मुझे पूरा सहयोग किया। सेठी अपनी धर्मपत्नी शोभा सेठी के सहयोग से यह तप आराधना की। तप आराधना पूर्ण होने के बाद सेठी ने तप आराधना के विषय में आचार्य श्री के आशीर्वाद को सर्वाेपरि मानते हुए कहा कि धर्म हमारी आत्मा को पावन-निर्मल बनाता है।</p>
<p><strong>एक अलौकिक अनुभूति का अहसास </strong></p>
<p>16 कारण पर्व धर्म का एक उत्कृष्ट रूप है। उन्होंने कहा कि मैं आचार्य श्री की तप साधना की प्रेरणा और आशीर्वाद से यह तपस्या निर्विघ्न पूर्ण कर पाया। इस तप साधना के दौरान मुझे एक अलग तरह की उर्जा और एक अलौकिक अनुभूति हुई। जिसे शब्दों में वर्णन कर पाना असीमित है। आचार्य श्री के सानिध्य में 16 उपवास जैसी कठिन साधना में मुझे रूई जैसी हल्की प्रतीत हुई।</p>
<p><strong>सभी का आभार जताया </strong></p>
<p>बिना किसी आकुलता के आनंद के साथ पूरे व्रत धर्मध्यान पूर्वक संपूर्ण हुए सुबह से ध्यान, अभिषेक, शांतिधारा, आहार देना, तत्त्वार्थसूत्र, प्रतिक्रमण ये सारी दिनचर्या मेरे जीवन का सबसे अनमोल समय था। जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री और संपूर्ण संघ का ही मेरे ऊपर आशीर्वाद और वात्सल्य रहा। साथ ही ब्रह्मचारी भैयाजी और ब्रह्मचारी दीदियों के साथ रामगंजमंडी के प्रत्येक जन ने मेरा संबल बढ़ाया और जिसका मैं शब्दों रूपी सुमन से आभार प्रेषित करता हूं।</p>
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		<title>कोकिला सेठ के सोलह कारण के 16 उपवास का पारणा 9 सितंबर को: निज निवास से बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी  </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Sep 2025 14:41:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा से सोलह कारण पर्व के उपलक्ष्य में 16 उपवास कर्ता कोकिला धर्म पत्नी डॉ.विमल जैन (सेठ) के उपवास पूर्ण होने पर पारणा समारोह 9 सितंबर मंगलवार सुबह होगा। सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230; सागवाड़ा। दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा से सोलह कारण पर्व के उपलक्ष्य में 16 उपवास कर्ता कोकिला धर्म पत्नी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा से सोलह कारण पर्व के उपलक्ष्य में 16 उपवास कर्ता कोकिला धर्म पत्नी डॉ.विमल जैन (सेठ) के उपवास पूर्ण होने पर पारणा समारोह 9 सितंबर मंगलवार सुबह होगा। <span style="color: #ff0000">सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा से सोलह कारण पर्व के उपलक्ष्य में 16 उपवास कर्ता कोकिला धर्म पत्नी डॉ.विमल जैन (सेठ) के उपवास पूर्ण होने पर पारणा समारोह 9 सितंबर मंगलवार सुबह होगा। प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ने बताया कोकिला सेठ ने 24 अगस्त से निराहार रहकर इस सोलह कारण व्रत की साधना की जा रही थी, जो सोमवार को पूर्ण हुई। पारणे के अवसर पर मंगलवार प्रातः जिनालयों मे निज आवास से बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा के मंदिर लाया जाएगा। जहां पोसारा अष्ट द्रव्य भेंट किया जाएगा। इसके बाद महामंत्र णमोकार स्मरण कर हस्त प्रक्षालन मुख शुद्धि विधि के साथ पारणा होगा।</p>
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		<title>स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक का पंचमेरू व्रत : निर्जला उपवास का पारणा 2 सितंबर को  </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 05:36:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी का पंचमेरू व्रत का सोमवार को 5 वां निर्जला उपवास है। कल मंगलवार को पारणा नांदणी में है। पंचमेरु व्रत, जिसे पुष्पांजलि व्रत या पंचमेरु पूजा भी कहते हैं। नांदणी से पढ़िए, यह खबर&#8230; नांदणी। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी का पंचमेरू व्रत का सोमवार को 5 वां निर्जला उपवास है। कल मंगलवार को पारणा नांदणी में है। पंचमेरु व्रत, जिसे पुष्पांजलि व्रत या पंचमेरु पूजा भी कहते हैं। <span style="color: #ff0000">नांदणी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांदणी।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी का पंचमेरू व्रत का सोमवार को 5 वां निर्जला उपवास है। कल मंगलवार को पारणा नांदणी में है। पंचमेरु व्रत, जिसे पुष्पांजलि व्रत या पंचमेरु पूजा भी कहते हैं। जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसमें पंचमेरु नामक जैन तीर्थों की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। इस व्रत को पांच वर्ष तक करने का विधान है और अंत में उद्यापन किया जाता है। इसमें जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिमाओं को पुष्पों से पूजकर, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए विभिन्न नियमों का पालन किया जाता है। नांदणी स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी मठ का इतिहास 1300 वर्ष पुराना है। नांदणी मठ के आधिपत्य में दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक के 743 गांव समाविष्ट है।</p>
<p>इन सभी गांव में जैन धर्म के सभी धार्मिक महोत्सव, विधि विधान, पंचकल्याणक, धर्म का प्रसार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के आदेश से और आशीर्वाद से होते है। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी उम्र में सबसे युवा भट्टारक जी हैं।</p>
<p>आप गांव-गांव भ्रमण करते हुए जिनधर्म कि सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं। धन्य हैं आपकी त्याग- तपस्या। आप स्वभाव के बडे विनम्र एवं मितभाषी हैं। आपके प्रवचन प्रभावशाली होते हैं। मैं अपने आपको भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे जिनसेन महास्वामी जी के रूप में मुझे सच्चे गुरु एवं सच्चे मित्र मिले हैं। मेरी यही भावना है कि जीवन के अंतिम सांस तक गुरु-शिष्य का यह नाता बना रहे।</p>
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		<title>जन्मोत्सव का पारणा (झूला) झुलाने की मची होड़: समाजजनों ने भजनों पर भक्ति का लिया आनंद </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Apr 2025 08:29:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर दाहोद के युवाओं ने पारणा सजाया। भगवान को झूला झुलाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। युवाओं ने अपनी कल्पना शक्ति से 16 दिव्य स्वप्न और अन्य दृश्यों को बखूबी साकार किया। दाहोद से पढ़िए यह खबर&#8230; दाहोद। भगवान श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक पर शाम के समय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर दाहोद के युवाओं ने पारणा सजाया। भगवान को झूला झुलाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। युवाओं ने अपनी कल्पना शक्ति से 16 दिव्य स्वप्न और अन्य दृश्यों को बखूबी साकार किया। <span style="color: #ff0000">दाहोद से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दाहोद।</strong> भगवान श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक पर शाम के समय नगर में जन्मोत्सव का पारणा (झूला) झुलाने का कार्यक्रम किया गया। जैन धर्म में इस पर्व का खास महत्व है और यह त्योहार जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थांकर भगवान महावीर को समर्पित है। उनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता का नाम रानी त्रिशला था। उनके जन्म के समय जैसा दृश्य होगा। ऐसा ही नगर के समीर दोषी, मनन सरैया, कुणाल दोषी, पूर्वी सेठ ने नवीन अद्भुत झूला तैयार किया। जिसमें भगवान के जन्म से पूर्व माता त्रिशला को दिखे 16 दिव्य स्वप्न का चित्रण खूब सुंदर तरीके से किया गया था। साथ ही भगवान महावीर के समय काल में शेर और गाय एक घाट से पानी पीते थे।</p>
<p>भगवान महावीर स्वामी का संदेश अहिंसा परमो धर्मः का उल्लेख करते हुए सभी समाजजन कार्यक्रम में मौजूद रहे। प्रसिद्ध भजन गायक कलाकार तरुण भाई के भजनों पर भक्तिं करते हुए आनंद उल्लास से भगवान का जन्मोत्सव मनाया। समाज के सभी बड़े, बुजुगर्, महिलाओं और बालकों ने उत्साह के साथ झुलाया। दिगंबर बीस पंथी ट्रस्ट के ट्रस्टी शैलेश भाई सरैया ने चारों युवाओं, यंग दिगंबर ग्रुप और उपस्थित सभी समाजजनों का आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>भक्तामर महामंडल विधान पूजन आराधना के दूसरे दिन हुए नित्य कार्यक्रम : पुण्यार्जक परिवार विधान पूजन में ले रहे धर्म लाभ </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Jan 2025 07:17:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धरियावद में प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन एवं संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, ब्रह्मचारी विकास भैया के निर्देशन में प्रतिदिन मुनि पुण्यसागर महाराज के श्रीमुख से भक्तामर स्त्रोत के 48 काव्यों का मंत्रोच्चार पूर्वक अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग भाग ले रहे हैं। पढ़िए धरियावद से अशोक जेतावत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धरियावद में प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन एवं संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, ब्रह्मचारी विकास भैया के निर्देशन में प्रतिदिन मुनि पुण्यसागर महाराज के श्रीमुख से भक्तामर स्त्रोत के 48 काव्यों का मंत्रोच्चार पूर्वक अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग भाग ले रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से अशोक जेतावत की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> 1008 श्री महावीर स्वामी दिगम्बर जैन मंदिर में वात्सल्य वारिधि दिगंबर जैन आचार्य वर्धमानसागर महाराज के संघस्थ वात्सल्य मूर्ति दिगंबर जैन मुनि पुण्यसागर महाराज ससंघ (19 पिच्छी) सानिध्य में 1008 श्री भक्तामर महामंडल विधान पूजन आराधना के दूसरे दिन नित्य प्रति कार्यक्रम हुए। जिसमें प्रतिदिन चार-चार पुण्यार्जक परिवार विधान पूजन में भाग लेकर धर्म लाभ ले रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संहितासूरी प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन एवं संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, ब्रह्मचारी विकास भैया के निर्देशन में प्रतिदिन भक्तिमान से मुनि पुण्यसागर महाराज के श्रीमुख से भक्तामर स्त्रोत के 48 काव्यों का उच्चारण करते हुए मंत्रोच्चार पूर्वक अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72035" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005.jpg" alt="" width="1040" height="780" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005.jpg 1040w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250105-WA0005-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1040px) 100vw, 1040px" />यह नित्य कार्यक्रम होगा</strong></p>
<p>सुबह श्रीजी का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, भक्तामर स्त्रोत आराधना, विधान मंडल पूजन, जाप्य, जयमाला, पूर्णार्घ्य आदि कार्यक्रम के साथ सुबह मुनि पुण्यसागर महाराज के प्रवचन का लाभ श्रावक-श्राविकाओं एवं समाज को प्राप्त हो रहा है। विधान पूजन में श्री मानतुंग आचार्य देव द्वारा रचित भक्तामर स्त्रोत विधान पूजन में आदिनाथ भगवान की स्तुति एवं गुणानुवाद करते हुए भक्ति भाव से पूजन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>मुनिश्री महाराज की चल रही है साधना</strong></p>
<p>मुनिश्री पुण्यसागर महाराज संघस्थ तपस्वी शिष्य मुनिश्री महोत्सवसागर महाराज का त्रिलोक सार व्रत (30 उपवास एवं 11 पारणा) की साधना और धरियावद नगर और दिगंबर जैन दसा नरसिंहपुरा समाज के गौरव परम तपस्वी मुनिश्री उदितसागर महाराज के सिंह निष्क्रीडित व्रत (60 उपवास एवं 20 पारणा) की साधना निरंतर चल रही है। इन तपस्वी मुनियों के तप की अनुमोदना स्वरूप भक्त श्रावक श्राविकाओं समाज भक्तामर विधान मंडल पूजन का नित्य प्रति आयोजन कर मुनियों के निर्विघ्न साधना की कामना कर रहे हैं।</p>
<p><strong>पारणा 14 जनवरी को संभावित</strong></p>
<p>मुनि भक्त भरतकुमार रत्नावत ने बताया कि स्थानीय श्रावक श्रेष्ठी मुनि भक्त सुरेश कुमार पचौरी के भी 36 उपवास की साधना मौन पूर्वक निरंतर चल रही है। पचौरी भैया चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर महाराज के 36 वर्ष के मुनि दीक्षा काल के 36 उपवास की साधना निरंतर चल रही है। जिन का पारणा आगामी 14 जनवरी को संभावित है।</p>
<p><strong>पारणोत्सव 6 फरवरी को</strong></p>
<p>दिगंबर जैन दसा नरसिंहपुरा समाज के श्रेष्ठी भंवरलाल दिनेश कुमार जेकणावत एवं उप जिला प्रमुख सागरमल बोहरा ने बताया कि दोनों तपस्वी महा मुनिराजों का पारणा महोत्सव मुनिश्री पुण्यसागर महाराज ससंघ सानिध्य एवं आशीर्वाद से आगामी 6 फरवरी को स्थानीय महावीर वाटिका में राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा।</p>
<p><strong>मुनिश्री से की विनती</strong></p>
<p>जिसमें चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर महाराज की परंपरा के वर्तमान आचार्य पंचम पट्टाधीश आचार्य रत्न वात्सल्य वारिधि वर्धमानसागर महाराज ससंघ का सानिध्य, आशिर्वाद, मंगल मार्गदर्शन प्राप्त होने की पूर्ण संभावना है। स्थानीय समाज आचार्य महाराज से विनती कर जरूर इस कार्यक्रम में सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त करेगा।</p>
<p><strong>पारणोत्सव की तैयारी जारी</strong></p>
<p>समाज के दिनेश कुमार जेकणावत ने बताया कि पारणोत्सव को भव्यता पूर्वक करने के लिए स्थानीय दिगंबर जैन दसा नरसिंहपुरा समाज के सभी सदस्यों की कमेटी बनाकर इस समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर धर्म प्रभावना हो ऐसा आयोजन करने के लिए तैयारियों में जुटी हुई है। महावीर वाटिका के नव निर्माण का कार्य जोरों पर चल रहा है।</p>
<p><strong>शीघ्र बनाई जाएगी कमेटी</strong></p>
<p>इस आयोजन को लेकर सकल दिगंबर जैन समाज में उत्साह का वातावरण है। मुनिश्री पुण्यसागर महाराज सानिध्य में शीघ्र कमेटी का गठन कर कार्य को द्रुत गति प्रदान की जाएगी।</p>
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		<title>एकान्तर उपवास के सामूहिक होते है पारणे : भीषण गर्मी में सामूहिक वर्षीतप आराधना जारी </title>
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		<pubDate>Mon, 27 May 2024 13:09:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म धरा थांदला में धर्म का अनूठा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सूर्य की तपिश शरीर में उष्णता पैदा कर मन को अशांत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जैन धर्मावलंबी तन को तपा देने वाली भीषण गर्मी में भी दुष्कर वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। संघ अध्यक्ष भरत भंसाली, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्म धरा थांदला में धर्म का अनूठा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सूर्य की तपिश शरीर में उष्णता पैदा कर मन को अशांत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जैन धर्मावलंबी तन को तपा देने वाली भीषण गर्मी में भी दुष्कर वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। संघ अध्यक्ष भरत भंसाली, सचिव प्रदीप गादिया व प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि तप प्रधान जिन शासन में धर्म तीर्थ प्रणेता प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म व दीक्षा कल्याणक दिवस कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी से जैन धर्मावलंबी में वर्षीतप की आराधना प्रारम्भ करने का विधान है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जीवन लाल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थांदला।</strong> धर्म धरा थांदला में धर्म का अनूठा प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सूर्य की तपिश शरीर में उष्णता पैदा कर मन को अशांत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जैन धर्मावलंबी तन को तपा देने वाली भीषण गर्मी में भी दुष्कर वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। संघ अध्यक्ष भरत भंसाली, सचिव प्रदीप गादिया व प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि तप प्रधान जिन शासन में धर्म तीर्थ प्रणेता प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म व दीक्षा कल्याणक दिवस कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी से जैन धर्मावलंबी में वर्षीतप की आराधना प्रारम्भ करने का विधान है।</p>
<p>करीब 13 माह 13 दिन तक चलने वाले इस तप को करने वाले आराधक एक दिन के अंतर से केवल गर्म अथवा धोवन पानी के आधार पर निराहार रहकर उपवास तप करते हैं, जो दूसरे वर्ष वैशाख के शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया/ आखा तीज) के दिन पूर्ण होती है। ऐसे में जिन शासन गौरव जैनाचार्य पूज्य श्रीउमेशमुनिजी के शताब्दी वर्ष में करीब 72 आराधकों द्वारा समूहिक वर्षीतप की आराधना की जा रही है। ललित जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष रवि लोढ़ा, सचिव सन्दीप शाहजी व मीडिया प्रभारी समकित तलेरा ने बताया कि श्रीसंघ में वर्षीतप की पहली बार आराधना हो रही है, जिसको लेकर सभी आराधकों में जबरदस्त उत्साह है।</p>
<p>थांदला संघ के उदारमना दानदाताओं के सहयोग से व नित्य एक लाभार्थी परिवार के सहयोग से सबके सामूहिक पारणे महावीर भवन पर हो रहे हैं। आज 28वें पारणे का लाभ स्व. मनोहरलाल शाहजी की स्मृति में मालतिदेवी शाहजी परिवार द्वारा लिया गया। मालती देवी, प्रेमलता सेठिया, अंजू खारीवाल, सारिका मेहता, मौनिका चौधरी, सुशीला बहन चौरड़िया, पुष्पा नवलखा आदि शाहजी परिवार व इनकी बहन बेटियों ने सभी आराधकों को पारणा करवाते हुए तिलक निकालकर प्रभावना प्रदान की।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61215" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012.jpg" alt="" width="899" height="1121" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012.jpg 899w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012-241x300.jpg 241w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012-821x1024.jpg 821w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0012-768x958.jpg 768w" sizes="(max-width: 899px) 100vw, 899px" /><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61216" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011.jpg" alt="" width="899" height="1245" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011.jpg 899w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011-217x300.jpg 217w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011-739x1024.jpg 739w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240527-WA0011-768x1064.jpg 768w" sizes="(max-width: 899px) 100vw, 899px" /> ये हैं वर्षीतप तपस्या में शामिल तप आरधक</strong></p>
<p>संघ अध्यक्ष भरत भंसाली इस बार लगातार 19 वां व आशा झमकलाल श्रीमाल 13 वां वर्षीतप पवन नाहर के निरंतर 1008 एकासन सहित 4 एकासन वर्षीतप के बाद उपवास से वर्षीतप किया जा रहा है। वहीं वीर माता-पिता स्नेहलता अशोक मोदी, वीर माता द्वय अशुका लोढ़ा, आशा नाहटा, वीर पिता बाबूलाल छाजेड़, स्वाध्यायी सहित 4 जोड़े क्रमशः अनुपमा एवं मंगलेश संग पिता नानालाल श्रीश्रीमाल, रेखा एवं रवि लोढ़ा, कला व अभय खींमेसरा, मंजुला सूरजमल श्रीमाल, रानी विवेक लुणावत, गादिया परिवार की तीन बहुएं सुनीता लोकेश गादिया, रंजना श्रेणीक गादीया व अमिता प्रदीप गादीया, 6 देराणी जेठानी अनिता व मंगला लोढ़ा, मनोरमा व स्नेहलता चौधरी, राजल व इंदु कुवाड़, हेमा व रजनी मेहता, सरोज व सुधा शाहजी, रीटा, अलका व सपना व्होरा, मां-बेटे हंसा व अंशुल रुनवाल, कामिनी रुनवाल, श्वेता चौधरी, अर्चना गादीया, नीता छाजेड़, सुनीता घोड़ावत, राजल तलेरा, प्रीति चौरड़िया, शकुंतला शाहजी, स्नेहलता व्होरा, मंजूबाला नाहर, चंदा भंसाली, सुनीता श्रीश्रीमाल, प्रियंका डांगी, विनोद श्रीमाल, दीपक चौधरी, प्रवीणा सेठिया, किरण पावेचा, विभा श्रीमाल, शोभा नाग सेठिया, नम्रता कटारिया, अंगूरबाला लुणावत, संगीता लोढ़ा, कल्पना पालरेचा, स्मिता घोड़ावत, रीटा बोथरा, ममता तलेरा, विनोद श्रीमाल, भावना शाहजी, पिंकी पावेचा, ममता चौरड़िया, किरण शाहजी, सरिता लोढ़ा, मंजू चौरड़िया, अनिता पोरवाल नेहा लोढ़ा मंजू डुंगरवाल आदि तप आराधक दृढ़ भावों के साथ वर्षीतप की आराधना कर रहे हैं। सभी आराधकों के पारणें करवाने में पुष्पा घोड़ावत, प्रवीण पालरेचा, संजय व्होरा, मुकेश चौधरी, हेमंत श्रीमाल, महावीर घोड़ावत, राजेश सेठिया, विजय लोढ़ा, कमलेश कुवाड़, नीलेश पावेचा, हितेश शाहजी, राकेश श्रीमाल आदि नवयुवक मंडल की सेवा सराहनीय हैं।</p>
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