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	<title>पांच सिद्धांत &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>पांच सिद्धांत &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान महावीर के उपदेश प्राणी के लिए प्रेरणास्रोत: 22 मई को होगी तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 May 2025 09:41:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। महावीर स्वामी ने अहिंसा, संयम और तप को ही धर्म बताया है। भगवान महावीर कहते हैं, जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। महावीर स्वामी ने अहिंसा, संयम और तप को ही धर्म बताया है। भगवान महावीर कहते हैं, जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। यह प्रेरक प्रवचन मुनिश्री विलोकसागरजी ने मुरैना की धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> भगवान महावीर स्वामी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। महावीर स्वामी ने अहिंसा, संयम और तप को ही धर्म बताया है। भगवान महावीर कहते हैं, जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। आज के समय में भगवान महावीर की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। हिंसा, लालच और झूठ से भरी दुनिया में उनके सिद्धांत मानवता के कल्याण के लिए आवश्यक हैं। अहिंसा और सत्य का पालन कर हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं। उनकी शिक्षाएं हमें आत्मसंयम, सह-अस्तित्व और दयाभाव सिखाती हैं। भगवान महावीर के विचारों को आत्मसात करने पर हमें शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने हमें प्रेम, करुणा, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। यदि हम उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं, तो यह संसार अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध हो सकता है। भगवान महावीर के उपदेश न केवल जैन समुदाय के लिए, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उक्त उद्गार बड़े जैन मंदिर में विराजमान दिगंबर मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p><strong>भगवान महावीर के मुख्य पांच सिद्धांत</strong></p>
<p>भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय के सिद्धांतों पर जोर दिया। उनके ये उपदेश जैन धर्म के मूलभूत आधार हैं। ‘अहिंसा परमो धर्मः’ भगवान महावीर का सबसे महत्वपूर्ण संदेश अहिंसा था। उन्होंने कहा कि किसी भी जीव को शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। उनका मानना था कि सभी जीवों में आत्मा होती है और हमें हर जीव के प्रति करुणा रखनी चाहिए। ‘सत्य’- भगवान महावीर ने कहा कि सत्य को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। झूठ बोलना केवल दूसरों को ही नहीं, बल्कि स्वयं को भी धोखा देने के समान है। ‘अपरिग्रह’ उन्होंने सांसारिक वस्तुओं से मोह त्यागने पर बल दिया। मनुष्य को अपनी इच्छाओं और भौतिक सुख-सुविधाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। ‘ब्रह्मचर्य’ ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपने विचारों, शब्दों और कर्मों में संयम रखना। भगवान महावीर ने इसे आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण मार्ग बताया। ‘अस्तेय’ उन्होंने कहा कि हमें कभी भी दूसरों की वस्तु या अधिकार का हनन नहीं करना चाहिए। दूसरों की संपत्ति को बिना अनुमति लेना भी चोरी के समान है।</p>
<p><strong>जैन कौन कहलाते हैं ? </strong></p>
<p>जैन शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘जिन’ से हुई है। यह किसी व्यक्ति-विशेष का नाम नहीं है, वरन जो लोग आत्म-विकारों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं, जो अपनी इंद्रियों को वशीभूत कर लेते हैं, ऐसे आत्मजयी व्यक्ति ‘जिन’ कहलाते हैं। जैन धर्म का सही नाम जिन धर्म है जिसका अर्थ मन और इंद्रियों को जीतने वाला अर्थात आत्मजयी होता है। जैन धर्म भारत श्रमण परम्परा से निकला प्राचीन धर्म और दर्शन है। जैन अर्थात् कर्मों का नाश करनेवाले ‘जिन भगवान’ के अनुयायी कहलाते हैं।</p>
<p><strong>22 मई को होगी तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता</strong></p>
<p>प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. मनोज जैन ने बताया कि मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज की प्रेरणा से भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र पर आधारित 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की प्रतियोगिता 22 मई को शाम 7 से 8 बजे तक बड़े जैन मंदिर में होगी। जिसमें जैन-अजैन कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है। प्रतियोगिता का उद्देश्य आमजन को भगवान महावीर के जीवन चरित्र एवं सिद्धांतों से अवगत कराना है। परीक्षा के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लगभग 100 प्रतियोगियों को अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, रवींद्र जैन गोसपुर, प्रेमचंद जैन वंदना साड़ी, राकेश जैन टायर वाले,पंकज जैन मेडिकल, एडवोकेट महेंद्र जैन, डालचंद जैन एवं अन्य समाजसेवियों के सहयोग से पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।</p>
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		<title>भगवान महावीर के जीवन दर्शन को समझना वर्तमान मे बेहद जरूरी: विश्व शांति के लिए भगवान महावीर ने दिया था अहिंसा का संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Apr 2023 13:17:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Bamnawas श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwan Mahaveer JanmKalyank Mahotsav]]></category>
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		<category><![CDATA[विश्व शांति संदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अहिंसा के अवतार युगदृष्टा और जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2622 वां जन्म कल्याणक महोत्सव सोमवार को उत्साह और उमंग एवं उल्लास के साथ मनाया गया। पढ़िए जिनेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230; बामनवास। अहिंसा के अवतार युगदृष्टा और जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2622 वां जन्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अहिंसा के अवतार युगदृष्टा और जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2622 वां जन्म कल्याणक महोत्सव सोमवार को उत्साह और उमंग एवं उल्लास के साथ मनाया गया।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए जिनेन्द्र जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास।</strong> अहिंसा के अवतार युगदृष्टा और जैन धर्म के 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2622 वां जन्म कल्याणक महोत्सव सोमवार को उत्साह और उमंग एवं उल्लास के साथ मनाया गया। बामनवास ब्लॉक के सभी जैन मन्दिरों मे भगवान का मस्तकाभिषेक व अष्ट द्रव्यों से पूजा अर्चना की गई। दिगम्बर जैन मन्दिर पिपलाई में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान महावीर का जन्मभिषेक और विशेष पूजा विधान किया गया।</p>
<p><strong>दुनिया को सच्चा मार्ग दिखाया</strong><br />
भगवान महावीर ने क्षत्रिय राजकुमार होने के बावजूद भी कभी विश्व विजय का सपना नहीं देखा। जिस समय भगवान महावीर का अवतरण हुआ दुनिया में हिंसा और अत्याचार का बोलबाला था। महावीर ने विषम परिस्थितियों में सच्चा मार्ग दुनिया को दिखलाया और प्राणी मात्र के सुख के लिए जिओ और जीने दो का अमूल्य मंत्र दिया। भगवान महावीर के पांच सिद्दान्त अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह सभी का जीवन बदलने वाले हैं।</p>
<p><strong>महावीर स्वामी सम्पूर्ण मानव समाज की धरोहर</strong></p>
<p>इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया कि विश्ववंदनीय भगवान महावीर के जीवन एवं दर्शन का गहराई से अध्ययन करने पर हम पाते है कि वे किसी एक जाति या सम्प्रदाय के न होकर सम्पूर्ण मानव समाज के अमूल्य धरोहर है। वह सबके थे और सब उनके थे। उन्हें केवल जैनों या जैन मंदिरों तक सीमित करना उनके उद्दात एवं विराट व्यक्तित्व के प्रति अन्याय है। वे जैन नहीं, जिन थे। किसी का भी कल्याण जैन बनकर नहीं, जिन बनकर ही हो सकता है।</p>
<p><iframe title="विश्व शांति के लिए भगवान महावीर ने दिया था अहिंसा का संदेश" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/_2Xuc-TO58c?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>तभी संस्कृति और विरासत की होगी रक्षा</strong><br />
सकल दिगम्बर जैन समाज पिपलाई के प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार जैन ने बताया कि जन मानस को भगवान महावीर के जीवन दर्शन को समझना वर्तमान में बेहद जरूरी है। दुनिया में सुख शांति की स्थापना करने के लिए हमें हर कीमत पर भगवान महावीर के बताये मार्ग पर चलना होगा तभी भारत की प्राचीन संस्कृति और विरासत की रक्षा होगी। भारत ने कभी हिंसा में विश्वास नहीं किया। हमारा विश्वास भगवान महावीर के सिद्दान्तों पर चलकर दूसरों की जान लेकर नहीं वरन अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों की रक्षा करने में है। अलगावाद, साम्राज्यवाद, तानाशाही से विश्व मुक्त हो, इसके लिए भगवान महावीर द्वारा बताए मार्ग का अनुसरण करने में ही सबका कल्याण होगा। इस अवसर पर सुनील कुमार जैन, आशीष जैन,सुमन लता जैन, आशा जैन, रजनी जैन, सपना जैन, एकता जैन आदि कई श्रावक &#8211; श्राविकाएं उपस्थित थे।</p>
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