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	<title>पद्मपुराण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>पद्मपुराण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>कोटा में पद्मपुराण पर आधारित रामकथा का समापन : मुनि श्री जय कीर्ति जी ने सहयोगियों को सम्मानित किया </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Dec 2025 03:53:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ विशिष्ट रामकथाकार मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में रामकथा का वाचन कर रहे हैं। राम कथा का रविवार को 10 वां दिन था। अकलंक स्कूल परिसर में रामपुरा में श्री रविषेणाचार्य विरचित पद्म पुराण आधारित प्रवाहमान जैन-रामकथा का समापन हुआ। कोटा से पढ़िए, यह खबर.. कोटा। विशिष्ट रामकथाकार मुनि श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> विशिष्ट रामकथाकार मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में रामकथा का वाचन कर रहे हैं। राम कथा का रविवार को 10 वां दिन था। <span style="color: #ff0000">अकलंक स्कूल परिसर में रामपुरा में श्री रविषेणाचार्य विरचित पद्म पुराण आधारित प्रवाहमान जैन-रामकथा का समापन हुआ। कोटा से पढ़िए, यह खबर..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> विशिष्ट रामकथाकार मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में रामकथा का वाचन कर रहे हैं। राम कथा का रविवार को 10 वां दिन था। अकलंक स्कूल परिसर में रामपुरा में श्री रविषेणाचार्य विरचित पद्म पुराण आधारित प्रवाहमान जैन-रामकथा का समापन हुआ। इस अवसर पर रामकथा समापन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। अकलंक एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष जैन बज, सचिव अनिमेष जैन ने कि बताया मां जिनवाणी को पालकी में रखने का सौभाग्य महेंद्र कुमार जैन, मुन्नी जैन अतुल, शानू, लक्षिता पाटनी परिवार को मिला।</p>
<p>राजा श्रेणिक बनने का अवसर ऋषभ जैन सुनीता जैन चांदवाड़ परिवारजन को मिला। महेश जैन गंगवाल ने बताया कि मुनि श्री का पाद प्रक्षालन अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद शाखा कोटा के पदाधिकारियों ने किया। समापन के अवसर पर रामकथा को सफल बनाने में अपना अविस्मरणीय योगदान देने वाले श्रावक श्रेष्ठी का अभिनंदन किया गया। पीयूष बज, अकलंक स्कूल के समस्त स्टॉप, नवीन लुहाड़िया, महावीर ललित लुहाड़िया, महाराष्ट्र से आए विद्या सागर जैन संगीतकार, पारस जैन पार्श्वमणि, दस दिनों के पुण्यार्जक परिवार फोटो ग्राफर सन्मति जैन, सन्मति पाटनी का मुनि श्री ने करकमलों से सिर पर तिलक लगाकर स्वागत किया। राम सूत्र दिया।</p>
<p><strong>मनुष्य राम आदि के उत्तम प्रेरणादायी चरित्र को सुनते हैं</strong></p>
<p>अल्पाहार की व्यवस्था महावीर, ललित, नवीन लुहाड़िया परिवार तलवंडी की ओर से की गई। मंगलाचरण पाठ राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन &#8220;पार्श्वमणि&#8221; पत्रकार ने धर्म हो सच्चा साथी है जैसे दीपक बांती है सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। अकलंक स्कूल की दो बालिकाओं ने भक्ति पूर्ण नृत्य किया। मुनि श्री जयकीति जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कथानक को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जो मनुष्य राम आदि के उत्तम प्रेरणादायी चरित्र को सुनते हैं। उनके प्रति मन में अतिशय भक्ति एवं प्रमोद को धारण करते हैं। उनका चिरसंचित पापकर्म हजार टुकड़े होकर नष्ट हो जाता है। हे विवेकी चतुर पुरुषों ! अपने अशुभ कर्मों को नष्ट करने के लिए एवं समीचीन मार्ग की प्राति के लिए इस परम पवित्र चरित्र का पठन-पाठन करो।</p>
<p><strong>यदि इस भव से निर्वाण को पाओ तो अच्छा है</strong></p>
<p>राम आदि द्वारा महेन्होदय उद्यान में जाकर सर्वभूषण केवली भगवान के मुखारबिंद से धर्मोपदेश सुनते हैं एवं विभीषण की जिज्ञासा शांत करते हुए भगवान् राम आदि के पूर्वभवों का वर्णन करते हैं। अपने पूर्वभव सुनकर कृतान्त वक्र सेनापति विरक्त हो जिनदीक्षा हेतु तत्पर होते हैं। राम उनसे कहते हैं कि तुम यदि इस भव से निर्वाण को पाओ तो अच्छा है यदि देव बनो तो संकट के समय मुझे प्रबोधन करने अवश्य आना तदनन्तर लक्ष्मण सीता आर्यिका माता को नमस्कार कर अनेक प्रकार से उनकी स्तुति एवं प्रशंसा करते हैं। इधर, भामंडल राज्य &#8211; विषय भोगों में प्रवृत्ति को ही मनुष्य जन्म की सार्थकता समझकर उसमें ही आसक्त रहते थे। एक दिन वज्रपात के आघात से मरण को प्राप्त होते हैं। संसारी जीव मैं ये कर चुका हूँ। ये कर रहा हूं और ये करूँगा ऐसा सदा सोचता रहता है परन्तु मैं मरूंगा इस बात पर विचार नहीं करता है।</p>
<p><strong>धर्मरत्न मुनिराज के भक्तियुक्त हो दर्शन करते है </strong></p>
<p>पुण्यशाली हनुमान कर्णकुण्डल नगर के जिनमदिर में विराजमान धर्मरत्न मुनिराज के भक्तियुक्त हो दर्शन करते है और विचार करते हैं कि इस संसार में मैंने करने योग्य समस्त कार्य कर लिए है अब मैं जिनपथ पर चलकर निज आत्मा का कल्याण करूंगा। जो जिनदर्शन-पूजा-में लीन है। ऐसे निर्मल चित्त के धारी मनुष्यों के लिए कोई भी कल्याण दुर्लभ नहीं है। उन्होंने 750 राजाओं सह जिनदिक्षा धारण की एवं मुक्ति पाई। सौधर्म इन्द्र के मुख से राम-लक्ष्मण के अटूट स्नेह की वार्ता सुन क्रीडा के रसिक दो देव कौतुहलवश लक्षमण को राम की मृत्यु की सूचना देता है। सुनते ही राम- अनुरागी लक्ष्मण मरण को प्राप्त होते हैं। यह देख दोनों देव विषाद युक्त हो पश्चाताप करते है। इज घटना से विरक्त लवकुश दीक्षा ले लेते हें..स्नेहासिक्त व्याकुल राम लक्ष्मण को सचेत करेने हेतु अनेक प्रयत्न करते हैं, मृत भाई को खिलाना &#8211; स्नान कराना- सजाना संगीत सुनाना आदि बालकवत चेष्टाएं करते हें.. जटायु एवं कृतान्तवक्र जो कि देव पर्याय में थे वे अविधज्ञान से राम कि चेष्टाए जान उनके पास आकर उन्हें प्रबोधित करते हैं जिससे राम शोक छोड सभी के साथ सरयु नदी के किनारे लक्ष्मण का दाह संस्कार करते हैं। मोह विरक्त राम का चित्त अनेक वैराग्यपूर्ण विचारों से युक्त हुआ। गुरुभक्ति युक्त राम सुव्रत मुनिराज से सुग्रीव आदि अनेक राजाओं के साथ जिनलिंग को धारण करते हैं एवं गुरु से अनुमति ले एकाकी विहार करते हैं।</p>
<p><strong>सीतेन्द्र ने केवली भगवान् से क्षमा मांगी</strong></p>
<p>निराबाध सुख की कामना से मुनि राम ने जो घोर तप किया उस तप का इस कलिकाल के मनुष्य ध्यान भी नहीं कर सकते हैं.सीता के जीव सीतेन्द्र द्वारा मोहवश योगिराज राम का ध्यान भंग करने के समस्त प्रयत्न विफल रहे एवं मुनिराज राम को केवलज्ञान की विभूति प्राप्त हुई। सीतेन्द्र ने केवली भगवान् से क्षमा मांगी आदि सुख -दुःख मय प्रेरक प्रसंगों का स्वरचित सुमधुर गीतों द्वारा वर्णन करते हुए गुरुदेव ने श्री राम आदि के चरित्र को सुनने एवं पढने का अद्भुत- अनुपम फल बताया।</p>
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		<title>जिनभक्ति से बढ़कर संसार में अन्य कोई पुण्य नहीं मुनिश्री जयकीर्ति जी ने किया श्री जैन राम कथा का भाव पूर्ण प्रस्तुति करण            </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 12:25:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विशिष्ट राम कथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा कोटा में विराजमान हैं। 30 नवंबर तक पद्मपुराण पर आधारित जैन श्रीराम कथा भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ चल रही है। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; कोटा। विशिष्ट राम कथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा कोटा में विराजमान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विशिष्ट राम कथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा कोटा में विराजमान हैं। 30 नवंबर तक पद्मपुराण पर आधारित जैन श्रीराम कथा भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ चल रही है। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> विशिष्ट राम कथाकार अनुष्ठान विशेषज्ञ मुनि श्री जयकीर्ति जी रामपुरा कोटा में विराजमान हैं। 30 नवंबर तक पद्मपुराण पर आधारित जैन श्रीराम कथा भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ चल रही है। कथा के दूसरे दिन मुनिश्री को जिनवाणी भेंट करने का अवसर चांदमल विमलादेवी, महेश मीना प्रमोद वर्षा, डॉ. सुरभि, अवि, लक्ष्य, डॉ. भव्य गंगवाल परिवार गुलाबवाड़ी, प्रथम श्रोता राजा श्रेणिक ओम प्रकाश साधना, विकास नेहा, विश्वास अंजू पाटोदी गुलाबवाड़ी को मिला। अकलंक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष जैन ने बताया कि विशेष आकर्षण आज श्रीरामकथा के पूर्व अकलंक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा गुरुदेव का पाद प्रक्षालन करना रहा। नन्हें बच्चों ने जब गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया तो सभी लोग भाव विभोर हो गए। कहते हैं बचपन में दिए गए सद् संस्कार जीवन में पचपन की दहलीज तक पहुंचने पर भी ज्यों कर त्यों बने रहते हैं। यह सार्वभौमिक सत्य है, इसे नाकारा नहीं जा सकता। मंगलाचरण पाठ परेश जैन ने किया। महेश गंगवाल ने बताया कि समाज के श्रेष्ठी जेके जैन, नरेश वेद, एमके जैन, प्रकाश पापड़ीवाल, भागचंद लोहड़िया, दीपचंद पहाड़िया, चेतन प्रकाश जैन, अनिल श्रीमाल, कैलाश जैसवाल, राहुल जैसवाल, गुलाबचंद लुहाड़िया, जंबू बडजात्या आदि गणमान्यों की उपस्थिति रही। इन्होंने द्वीप प्रज्वलन एवं गुरुदेव की फोटो का अनावरण किया।</p>
<p><strong>भावविभोर करने वाले प्रसंगों को सुनकर भक्त विह्वल हो गए </strong></p>
<p>अति सुंदर शैली में मुनिश्री ने राम कथा का वाचन किया। आज कई सारे प्रसंग भाव विभोर कर देने वाले थे। वास्तव में प्रभु श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम यूं ही नहीं कहते हैं। पिता द्वारा माता कैकेई को दिए गए वचन को पूर्ण करने के लिए पिता की आज्ञा को सर्वाेपरि मानते हुए राम का वन की ओर प्रस्थान किया। साथ में सीता और लक्ष्मण भी हठ करके चल पड़े। दशरथ का वैराग्य एवं दीक्षा का वर्णन, होनी को भला कौन टाल सकता है.। राह में अनेक विषम परिस्थितियों को पार करते हुए आगे बढ़ रहे थे। राम से क्षण भी दूर नहीं रहने वाले भरत को राम के वियोग से अत्यंत दुःख हुआ। उनको भी संसार से वैराग्य हो गया.। किंतु धुती आचार्य के श्री मुख से गृहस्थ धर्म का महत्व सुनकर अणुव्रत धारण कर सद गृहस्थ बन गए। संसार में जितने भी जीव सिद्ध मुक्त हुए हैं वे सभी जिनधर्म की शरण में आकर ही हुए हैं।</p>
<p><strong>मंगल द्रव्य दान की विशेष महिमा बतलाइ</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जिनेंद्र भगवान की शरण ही अचिंत्य फलों को देने वाली है। उन्होंने जिन दर्शन, अष्ट द्रव्य से पूजन, अभिषेक की महिमा, चार प्रकार के दान, मंदिर में रंगोली, छत्र, चावर, दर्पण आदि मंगल द्रव्य दान की विशेष महिमा बतलाई। राजा वज्र कर्ण की जिनेंद्र भगवान के प्रति अटल श्रद्धा का विशद वर्णन किया। पारस जैन ने कहा कि जीवन में इस अविस्मरणीय रामकथा को अवश्य सुनें। देखे महापुरुषों के जीवन चरित्र सुनने से जीवन जीवंत हो जाता है। विपरित परिस्थितियों में दृढ़ता आती है। परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति अंतर्मन में पैदा हो जाती है। ऐसा दुर्लभ अवसर हाथ से नहीं जाने दें।</p>
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		<title>अहिंसा और सहअस्तित्व की भावना से ही हिंसा मिटाई जा सकती है : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने पद्मपुराण के अंशों का वाचन कर दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 13:15:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अधर्म पर धर्म की,असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की, पाप पर पुण्य की,अत्याचार पर सदाचार की, अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है यह दशहरा। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। अवधपुरी भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230; अवधपुरी (भोपाल)। अधर्म पर धर्म की,असत्य पर सत्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अधर्म पर धर्म की,असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की, पाप पर पुण्य की,अत्याचार पर सदाचार की, अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है यह दशहरा। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी (भोपाल)।</strong> अधर्म पर धर्म की,असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की, पाप पर पुण्य की,अत्याचार पर सदाचार की, अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है यह दशहरा। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब-जब हमारी आत्मा किसी अन्य पर मुग्ध होती है तो वह विवेक (अंतरात्मा) की बात को सुना अनसुना कर अविवेक की ओर चल देती है। मुनि श्री ने जैन रामायण पद्ममपुराण के अंशों को सुनाते हुए सीता हरण के दृश्यों को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम जानते थे कि मृग सोने का नहीं होता फिर भी जब बार-बार सीताजी ने कहा कि जाओ उस स्वर्ण मृग को लेकर आओ तो रामजी उस स्वर्ण मृग को लेने उसके पीछे जाना पड़ा और जंगल में जाते ही वह मायावी मृग गायब हो गया। वही माया के माध्यम से लक्ष्मण बचाओ की आवाज सुनकर सीता जी ने लक्ष्मण को भी उधर ही भेज दिया, आगे की कथा आप सभी जानते हैं।</p>
<p><strong>अपने अंदर के सोए हुए आत्मराम को जगाओ </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब-जब मर्यादा की लक्ष्मण रेखा से सीता बाहर गई है। उनका अपहरण ही हुआ है। आज हर व्यक्ति अपनी सीमाओं को लांघ रहा है और अपने अंदर की सीता (शांति) का हरण कर रहा है। उन्होंने आध्यात्मिकता के पक्ष को जगाते हुए कहा कि अपने अंदर के आत्म राम को जगाने का उद्यम कर, तभी तेरे अंदर के रावण का अंत हो पाएगा तथा जीवन में परिवर्तन आएगा। मुनि श्री ने कहा अभी तो हर व्यक्ति के अंदर का राम सोया पड़ा है तथा वह उनकी सीता( शांति) का हरण हो रहा है। जाओ और अपने अंदर के सोए हुए आत्मराम को जगाओ तभी आपकी सीता(शांति) वापस मिलेगी। मुनि श्री ने कहा कि आजकल लोग नाम तो राम का लेते हैं और काम रावण के करते हैं तो बताओ काम कैसे बनें? उन्होंने कहा कि अपने अंदर की चेतना को जगाए बिना जीवन का कल्याण नहीं हो सकता। जैसे प्रकृति में दो पक्ष होते है शुक्ल पक्ष और कृष्णपक्ष। श्रीराम धर्म नीति और मर्यादा के प्रतीक होकर शुक्ल पक्ष के रूप में हो जो क्रमशः हमारी आत्मा का गुणात्मक विकास कर पूर्णिमा की पूर्ण कलाओं से युक्त होकर चेतना को परिपूर्णता प्रदान करते हैं। वहीं रावण अधर्म, अनीति, और अमर्यादा तथा अन्याय का घोतक है, जो कृष्ण पक्ष का प्रतीक होकर हमारी चेतना को कलुषित कर अंत में हमारे जीवन को कलंकित कर देता है।</p>
<p><strong> हिंसा रावण का ही रौद्र रूप है </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आज 2 अक्टूबर का दिन है और विश्व में अहिंसा दिवस के रूप में मनाते हुए महात्मा गांधी को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि हिंसा रावण का ही रौद्र रूप है। आज के दिन हम सभी को हिंसा मिटाने के लिए अहिंसा और सहअस्तित्व की भावना को जगाने का प्रयास करना होगा तभी हम संसार को हिंसा मुक्त कर सकते है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 4 अक्टूबर शनिवार से बहुप्रतीक्षित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ होने जा रहा है जिसमें 1024 अर्घ्य समर्पित करते हुए सिद्ध प्रभु की आराधना की जाएगी।</p>
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		<title>संसार का वैभव नाशवान है-मुनि श्री सुयश सागर जी: छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में चल रहे प्रवचन  </title>
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		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 09:50:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुयशसागर जी के प्रवचन प्रतिदिन प्रात 9 बजे छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में हो रहे हैं। यहां पर बड़ी संख्या में धर्मानुरागी उपस्थित रहकर धर्म लाभ ले रहे हैं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। जब तक जीव को संसार के सुख कीमती लग रहे हैं तब तक उसे सम्यक दर्शन, सम्यक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सुयशसागर जी के प्रवचन प्रतिदिन प्रात 9 बजे छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में हो रहे हैं। यहां पर बड़ी संख्या में धर्मानुरागी उपस्थित रहकर धर्म लाभ ले रहे हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जब तक जीव को संसार के सुख कीमती लग रहे हैं तब तक उसे सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, और सम्यक चारित्र की ना तो कीमत समझ में आएगी और ना ही इन त्रय रत्नोकी प्राप्ति हो पाएगी। यह उद्गार छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में चातुर्मास कर रहे पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ने ग्रंथ राज पद्मपुराण की गाथाओं पर प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने आगे कहा कि संसार का वैभव नाशवान है और पर द्रव्यों पर दृष्टि संसार बढ़ाने वाली है।</p>
<p>इसलिए जीव को संसार से विरक्त होने के लिए परिग्रह एवं जड़ आभूषणों का त्याग कर चैतन्य आभूषणों को प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री के प्रवचन प्रतिदिन प्रात 9 बजे छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में हो रहे हैं। धर्मसभा में तरुण भैया, संजय बाकलीवाल, डॉ.जैनेंद्र जैन, शांतिलाल बड़जात्या, महेश जैन डॉ.वंदना जैन आदि उपस्थित थे।</p>
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