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	<title>पदविहार &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>पदविहार &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री सुधासागरजी ससंघ का अभिनंदनोदय तीर्थ से पदविहार: मुनिसंघ का 27 को होगा जाखलौन में प्रवेश  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 16:29:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का अभिनंदनोदय तीर्थ से देवोदय तीर्थ देवगढ़ के लिए पद विहार हुआ। सैकडों की संख्या में श्रद्धालु पदविहार में सम्मलित हुए। श्रावकों ने रंगोली सजाई पादप्रक्षालन कर मुनि श्री से आर्शीवाद ग्रहण किया। इसके पूर्व मुनि श्री सुधासागर महाराज, मुनि श्री निरापद सागर महाराज एवं संघस्थ एलक क्षुल्लक महाराज ने अभिनंदनोदय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का अभिनंदनोदय तीर्थ से देवोदय तीर्थ देवगढ़ के लिए पद विहार हुआ। सैकडों की संख्या में श्रद्धालु पदविहार में सम्मलित हुए। श्रावकों ने रंगोली सजाई पादप्रक्षालन कर मुनि श्री से आर्शीवाद ग्रहण किया। इसके पूर्व मुनि श्री सुधासागर महाराज, मुनि श्री निरापद सागर महाराज एवं संघस्थ एलक क्षुल्लक महाराज ने अभिनंदनोदय तीर्थ के दर्शन किए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ का अभिनंदनोदय तीर्थ से देवोदय तीर्थ देवगढ़ के लिए पद विहार हुआ। सैकडों की संख्या में श्रद्धालु पदविहार में सम्मलित हुए। श्रावकों ने रंगोली सजाई पादप्रक्षालन कर मुनि श्री से आर्शीवाद ग्रहण किया। इसके पूर्व मुनि श्री सुधासागर महाराज, मुनि श्री निरापद सागर महाराज एवं संघस्थ एलक क्षुल्लक महाराज ने अभिनंदनोदय तीर्थ के दर्शन किए। इसके बाद गाजे बाजे के साथ पदविहार हुआ जिसमें गाजे बाजे के साथ नवयुवक सम्मलित हुए। बाल मंडल का दिव्यघोष, महिला मंडल में सैकडों की संख्या में मंगलगान करते हुए श्रविकाए मुनि श्री के साथ पद विहार कर रही थी। हाथी पर सवार श्रावक ध्वज पताकाए लेकर शोभायात्रा में सम्मलित रहे थे। शोभायात्रा अभिनंदनोदय तीर्थ से स्टेशन तिराहा होते हुए देवगढ़ की ओर आगे बढ़ी, जिनके साथ अपार जनसमुदाय रहा। देवगढ़ रोड स्थित मुडरा पेट्रोल पंप के सामने राजेन्द्र जैन,अंकित राजकल्प थनवारा की भूमि पर नवीन मंदिर संतशाला के निर्माण हेतु भूमि पूजन मुनिसंघ के आशीर्वाद और सानिध्य में हुआ। रात्रि में जिज्ञासा समाधान केपीएस महाविद्यालय परिसर में हुआ। जहां से प्रातःकाल मुनिसंघ का पदविहार जाखलौन के लिए होगा। जिसको लेकर जैन समाज में अपूर्व उत्साह है और अगुवाई की तैयारियां व्यापक स्तर से की गई हैं।</p>
<p><strong>मुनि श्री के पदविहार में प्रमुख रूप से शामिल रहे&#8230;</strong></p>
<p>जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, देवोदय तीर्थ अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री सीए संजीव जैन, प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक जैन दैलवारा, धन्यकुमार जैन एड, अखिलेश जैन गदयाना, राजीव जैन लकी, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, सौरभ जैन पीलू,नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, गौरव जैन टोनू, संजय रसिया, संजीव सौरया, जिनेन्द्र जैन डिस्को, संजीव जैन ममता स्पोर्ट्स, अविनाश जैन गदयाना, श्रयांस जैन, मनोज जैन बबीना, शिक्षक पुष्पेन्द्र जैन, विजय जैन कल्लू, मनोज जैन पत्रकार समेत सैकडों लोग शामिल रहे।</p>
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		<title>नगर में भव्य मंगल प्रवेश : सुख होने पर भी मन नहीं लगता, क्योंकि आप सुख की गहराई को पहचान नहीं रहे-मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:45:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं दया भावना गौ चिकित्सालय के प्रेरक मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी से पदविहार करते हुए अशोक नगर पहुंचे। थूवोनजी रोड स्थित नवीन बस स्टैंड पर प्रमुख जनों ने मुनिश्री की अगवानी की। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं दया भावना गौ चिकित्सालय के प्रेरक मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी से पदविहार करते हुए अशोक नगर पहुंचे। थूवोनजी रोड स्थित नवीन बस स्टैंड पर प्रमुख जनों ने मुनिश्री की अगवानी की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं दया भावना गौ चिकित्सालय के प्रेरक मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी से पदविहार करते हुए अशोक नगर पहुंचे। थूवोनजी रोड स्थित नवीन बस स्टैंड पर श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, विपिन सिंघई, सुलभ अखाई, हेमंत टडैया, सचिन एन.एस., टिकट जैन सहित अन्य प्रमुख जनों ने मुनिश्री की अगवानी की। इसके पश्चात मुनिश्री को बैंड-बाजे के साथ पार्श्वनाथ मंदिर ले जाया गया, जहाँ महिला मंडलों ने कलशों से उनका स्वागत किया।</p>
<p><strong>पार्श्वनाथ मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा</strong></p>
<p>श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में पार्श्वनाथ मंदिर से मुनिश्री का भव्य मंगल प्रवेश शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। शोभायात्रा में सबसे आगे श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला के बच्चे धर्म ध्वजा लेकर चल रहे थे। उनके पीछे युवा मंडल द्वारा दिव्य घोष वादन किया जा रहा था, तथा युवा वर्ग जय-जयकार के नारे लगाते हुए चल रहा था। यह शोभायात्रा पछाड़ीखेड़ा रोड, एफ.ओ.वी. पुल, गांधी पार्क, भगवान महावीर मार्ग, आचार्य श्री विद्यासागर द्वार होते हुए सुभाष गंज पहुँची। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पाद-प्रक्षालन, आरती एवं पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।</p>
<p><strong>आदिश्वर धाम में धर्मसभा एवं महाशांति धारा</strong></p>
<p>शोभायात्रा आदिश्वर धाम, सुभाष गंज पहुँचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। मुनिश्री के सान्निध्य में जगत कल्याण की कामना से महाशांति धारा का आयोजन किया गया, जिसका सौभाग्य विजय धुर्रा परिवार—ओमप्रकाश, देवेंद्र कुमार, पवन कुमार धुर्रा, राजेश कासल सहित अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। मुनिश्री के पाद-प्रक्षालन का सौभाग्य जैन समाज के मंत्री चक्रवर्ती राकेश कुमार एवं विवेक कुमार अमरोद को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>महावीर जन्म जयंती तक घर-घर गूंजेंगे भजन</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि परम पूज्य मुनिश्री झांसी (उत्तर प्रदेश) से पदविहार करते हुए अशोक नगर पधारे हैं। वर्तमान में भगवान आदिनाथ से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म जयंती तक का मंगलमय वातावरण घर-घर में भजनों के रूप में गूंज रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी 30 तारीख को भगवान महावीर जन्म जयंती समारोह परम पूज्य मुनिश्री के सान्निध्य में मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>नियमित धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने जानकारी दी कि अब प्रतिदिन प्रातः 8 बजे अभिषेक एवं महाशांति धारा का आयोजन होगा तथा उसके पश्चात मुनिश्री के मंगल प्रवचन होंगे। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जैन समाज के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के.टी., संयोजक पार्श्वनाथ मंदिर मनोज रन्नौद, संयोजक गंज उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, विपिन सिंघई, टिंकल जैन, सुलभ अखाई, सचिन एन.एस., सौरव जैन, निर्मल मिर्ची, हेमंत टडैया, रवि ट्रेडिंग, विनोद मोदी, सौरव वाझल सहित अनेक प्रमुख जनों ने श्रीफल भेंट कर ग्रीष्मकालीन वाचन का निवेदन किया।</p>
<p><strong>मुनिश्री का संदेश: आत्मपरिवर्तन ही सच्चा मार्ग</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने कहा कि जब तक हमारे कर्म नहीं बदलेंगे, तब तक हम स्वयं नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा कि हमारे सामने भी भगवान प्रत्यक्ष नहीं आए, लेकिन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज का सान्निध्य मिला और उसी के प्रभाव से जीवन में परिवर्तन संभव हुआ। उन्होंने कहा कि आज जो कुछ भी हम हैं, वह गुरुओं के आशीर्वाद का ही परिणाम है और यही आशीर्वाद वे सभी श्रद्धालुओं को देते हैं कि वे भी अपने जीवन में सच्चे सुख की अनुभूति करें।</p>
<p><strong>अशोक नगर के चातुर्मास की महिमा का किया स्मरण</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि अशोक नगर में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का भव्य चातुर्मास हुआ था, जो यहां के श्रद्धालुओं के वर्षों के समर्पण और साधना का परिणाम था। उन्होंने कहा कि उस चातुर्मास की महक आज भी इस नगर की फिजाओं में व्याप्त है और यह यहां के धर्मप्रेम का प्रतीक है।</p>
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		<title>पदविहार करते हुए क्षेत्र की ओर हैं अग्रसर : अर्हम गुरु प्रणम्य सागर महाराज के सिंगोली आगमन को लेकर संपूर्ण मेवाड़ प्रांत पलक-पांवड़े बिछाए आतुर </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:10:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संपूर्ण विश्व में जैन धर्म की ध्वजा पताका अर्हम योग के माध्यम से फहराने वाले आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य, अर्हम योग प्रणेता अर्हम गुरु मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज मेवाड़ प्रांत की धरती सिंगोली (मध्यप्रदेश) की ओर पदविहार करते हुए अग्रसर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संपूर्ण विश्व में जैन धर्म की ध्वजा पताका अर्हम योग के माध्यम से फहराने वाले आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य, अर्हम योग प्रणेता अर्हम गुरु मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज मेवाड़ प्रांत की धरती सिंगोली (मध्यप्रदेश) की ओर पदविहार करते हुए अग्रसर हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सिंगोली।</strong> संपूर्ण विश्व में जैन धर्म की ध्वजा पताका अर्हम योग के माध्यम से फहराने वाले आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य, अर्हम योग प्रणेता अर्हम गुरु मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज मेवाड़ प्रांत की धरती सिंगोली (मध्यप्रदेश) की ओर पदविहार करते हुए अग्रसर हैं।</p>
<p>मुनि श्री के आगमन को लेकर केवल सिंगोली नगर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मेवाड़ प्रांत में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। समाज के श्री भरत जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि यद्यपि गुरुदेव का आगमन सिंगोली में हो रहा है, लेकिन संपूर्ण मेवाड़ प्रांत उनके स्वागत के लिए पलक-पांवड़े बिछाकर आतुर है। नगर में जगह-जगह गुरुदेव के आगमन के स्वागत में होर्डिंग्स और पोस्टर लगाए गए हैं। इन्हें देखकर गुरुदेव के प्रति श्रद्धा, आस्था और उत्साह का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।</p>
<p>श्री भरत जैन ने बताया कि मुनि श्री के सान्निध्य में 2 अप्रैल 2026 से 7 अप्रैल 2026 तक भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होने जा रहा है, जिसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण दिगंबर जैन समाज सिंगोली सभी श्रद्धालुओं से अपील करता है कि इस भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में पधारकर पुण्य अर्जन करें और धर्म लाभ प्राप्त करें।</p>
<p><strong>कई राजनीतिक एवं जानी-मानी हस्तियाँ होंगी शामिल</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि यह महोत्सव अत्यंत विशाल और भव्य होने जा रहा है, जिसमें राजनीतिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों के भी आने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के भी इस महोत्सव में पधारकर धर्म लाभ प्राप्त करने तथा गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद लेने की संभावना है।</p>
<p><strong>जन्म कल्याणक महोत्सव के होंगे कई आकर्षण</strong></p>
<p>श्री जैन ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत जन्म कल्याणक महोत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें राजस्थानी वेशभूषा में सुसज्जित कलाकार, गजराज, अश्व रथ आदि आकर्षण का केंद्र होंगे। शोभायात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर एवं ड्रोन के माध्यम से पुष्पवृष्टि की जाएगी। इसके साथ ही नासिक से आए ढोल तथा पंजाबी बैंड सहित कई सांस्कृतिक आकर्षण इस भव्य शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संपूर्ण भारतवर्ष की निगाहें सिंगोली में होने जा रहे इस पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव पर टिकी हुई हैं, जो अपने आप में अलौकिक और अद्वितीय होने जा रहा है।</p>
<p>मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज चमत्कारजी तीर्थ से पदविहार करते हुए सिंगोली तीर्थ की ओर अग्रसर हैं। उनके इस पदविहार में सिंगोली के युवा और बुजुर्गों के साथ संपूर्ण मेवाड़ प्रांत के श्रद्धालु भी उत्साहपूर्वक सहभागी बन रहे हैं।</p>
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		<title>मुनिराजों का अंबाह से पोरसा तक पदविहार: नगर में मंगल प्रवेश पर समाजजनों ने की भव्य अगवानी  </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 12:01:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन संत मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज ने दो दिवसीय अंबाह प्रवास के बाद गुरुवार सुबह पोरसा की ओर पद विहार किया। संत श्री ने प्रातः 6 बजे अंबाह से प्रस्थान कर 8 बजे पोरसा पहुंचकर नगर में प्रवेश किया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन संत मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज ने दो दिवसीय अंबाह प्रवास के बाद गुरुवार सुबह पोरसा की ओर पद विहार किया। संत श्री ने प्रातः 6 बजे अंबाह से प्रस्थान कर 8 बजे पोरसा पहुंचकर नगर में प्रवेश किया। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> जैन संत मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज ने दो दिवसीय अंबाह प्रवास के बाद गुरुवार सुबह पोरसा की ओर पद विहार किया। संत श्री ने प्रातः 6 बजे अंबाह से प्रस्थान कर 8 बजे पोरसा पहुंचकर नगर में प्रवेश किया। संतों के साथ अंबाह के अनेक श्रद्धालु पदविहार में सम्मिलित रहे। पोरसा पहुंचने पर जैन समाज के लोगों ने संत श्री की भव्य अगवानी की।</p>
<p>नगर प्रवेश द्वार पर समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संत श्री विलोक सागर जी एवं विबोध सागर जी महाराज पोरसा में प्रवास कर समाज के लोगों को धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन देंगे। उनके आगमन से पोरसा नगर में धार्मिक उत्साह का वातावरण बन गया है। जैन समाज ने संतों के दर्शन का लाभ लेकर स्वयं को धन्य महसूस किया।</p>
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		<title>आस्था और संकल्प के आगे मौसम नतमस्तक: वर्षा और ठंडी हवा के बीच जैन संतों ने किया अम्बाह तक पद विहार, श्रद्धालुओं ने भी दिया साथ </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Oct 2025 14:15:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इन दिनों क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा और ठंडी हवाओं के बीच भी जैन संतों की अटूट आस्था देखने को मिल रही है। कठोर संयम और दृढ़ संकल्प के प्रतीक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना पैदल पोरसा की ओर पदविहार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इन दिनों क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा और ठंडी हवाओं के बीच भी जैन संतों की अटूट आस्था देखने को मिल रही है। कठोर संयम और दृढ़ संकल्प के प्रतीक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना पैदल पोरसा की ओर पदविहार कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> इन दिनों क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षा और ठंडी हवाओं के बीच भी जैन संतों की अटूट आस्था देखने को मिल रही है। कठोर संयम और दृढ़ संकल्प के प्रतीक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना पैदल पोरसा की ओर पदविहार कर रहे हैं। मंगलवार को इलाके में वर्षा और सर्द हवाओं के बावजूद संतों का विहार अनवरत जारी रहा। उनके साथ श्रद्धालु भी मौजूद थे। भक्तों ने बताया कि भीषण ठंड और लगातार हो रही वर्षा से संतो को बचाने के लिए हमने प्लास्टिक की त्रिपाल का सहारा लिया है जिसे छाता का रूप देकर संतों को बारिश से बचाने का प्रयास हम भक्तों ने किया है वही इस दौरान संत धीरे-धीरे विहार करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। ज्ञात रहे कि जैन धर्म में दिगंबर संतों का जीवन अत्यंत अनुशासित और तपस्या प्रधान माना जाता है। वे संपूर्ण रूप से संयम, त्याग और अहिंसा के मार्ग पर चलते हैं। चाहे धूप हो, वर्षा या सर्दी कृ वे सदैव नंगे पांव पैदल विहार करते हैं। किसी भी परिस्थिति में वाहन का उपयोग नहीं करते। यह जीवनशैली आत्मशुद्धि और अध्यात्म के उच्चतम आदर्श का प्रतीक है।</p>
<p><strong>धर्म का सार अहिंसा है इसे कर्म और वचन से भी निभाएं </strong></p>
<p>वही अंबाह आगमन पर नगर के जैन समाज ने संतों का स्वागत अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से किया। संतों का श्री परेड चौराहा स्थित जैन मंदिर में आगमन हुआ, जहां उन्होंने भगवान के दर्शन कर भक्तों को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। संतों के स्वागत के लिए समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं और बच्चे सभी उपस्थित रहे। मंदिर प्रांगण में आयोजित संक्षिप्त प्रवचन में मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज ने कहा कि “जीवन का वास्तविक सुख भोग में नहीं, बल्कि संयम और आत्मबल में निहित है। जो मनुष्य अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण पा लेता है, वही सच्चे अर्थों में विजेता होता है। उन्होंने आगे कहा कि धर्म का सार अहिंसा है, और अहिंसा केवल कर्म से नहीं, बल्कि वचन और विचार से भी पालन करनी चाहिए।</p>
<p><strong>संतों के जीवन से प्रेरणा लेें</strong></p>
<p>मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मबल को बनाए रखना ही सच्ची साधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपनी जीवनशैली में सरलता, संयम और करुणा को स्थान दें। इस अवसर पर जैन समाज के प्रमुख सदस्यों ने बताया कि संतों का विहार केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज को संयम, सादगी और अनुशासन का संदेश देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि संतों के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें भी भौतिकता से दूर रहकर आंतरिक शांति की ओर बढ़ना चाहिए।</p>
<p><strong>पुष्पवर्षा और जयकारों से माहौल धर्ममय </strong></p>
<p>वर्षा के बीच जब संतों ने अपने पदचिह्न नगर की गलियों में छोड़े तो वह दृश्य अत्यंत भावपूर्ण था। श्रद्धालु हाथ जोड़कर दोनों ओर खड़े होकर दर्शन करते रहे। कई लोगों ने अपने घरों से बाहर आकर पुष्पवृष्टि की और “जय जिनेन्द्र” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। आज जैन संतों का पोरसा की ओर पद विहार होगा, जहां स्थानीय समाज के लोगों द्वारा उनका अगला स्वागत और धर्मसभा होगी।</p>
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		<title>सुंदरता आभूषणों से नहीं, वीतरागता से आती है : आचार्यश्री विमर्श सागर जी पहली बार 33 पिच्छी धारियों के साथ पधारे बहलना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 14:02:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्श सागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (33 पिच्छी) के साथ पदविहार करते हुए उत्तरप्रदेश के अतिशय क्षेत्र ‘बहलना’ पहुंचे। अतिशय क्षेत्र बहलना के समीपस्य धर्मनगरी मुजफ़्फ़रनगर के संपूर्ण जैन समाज ने आचार्य संघ का उत्साह पूर्वक अतिशय क्षेत्र पर प्रवेश कराया। आचार्य श्री ने सर्वप्रथम क्षेत्र के मूलनायक श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्श सागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (33 पिच्छी) के साथ पदविहार करते हुए उत्तरप्रदेश के अतिशय क्षेत्र ‘बहलना’ पहुंचे। अतिशय क्षेत्र बहलना के समीपस्य धर्मनगरी मुजफ़्फ़रनगर के संपूर्ण जैन समाज ने आचार्य संघ का उत्साह पूर्वक अतिशय क्षेत्र पर प्रवेश कराया। आचार्य श्री ने सर्वप्रथम क्षेत्र के मूलनायक श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान के संघ सहित दर्शन किए। <span style="color: #ff0000">बहलना से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बहलना (उप्र)।</strong> भारतीय वसुंधरा सदा से ही निर्गन्ध दिगंबर वीतरागी श्रमणों की पवित्र पदरज से पावन होती रही है। वर्तमान संत परंपरा के परम प्रवाहक ‘जीवन है पानी की बूंदे’ महाकाव्य के मूल रचनाकार, ‘जिनागम पंथ जयवंत हो’ के पवित्र नारे से जैन एकता का शंखनाद करने वाले आचार्य श्री विमर्श सागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (33 पिच्छी) के साथ पदविहार करते हुए उत्तरप्रदेश के अतिशय क्षेत्र ‘बहलना’ पहुंचे। अतिशय क्षेत्र बहलना के समीपस्य धर्मनगरी मुजफ़्फ़रनगर के संपूर्ण जैन समाज ने आचार्य संघ का उत्साह पूर्वक अतिशय क्षेत्र पर प्रवेश कराया। आचार्य श्री ने सर्वप्रथम क्षेत्र के मूलनायक श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान के संघ सहित दर्शन किए। अतिशयकारी भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का अभिषेक, शांतिधारा के बाद उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिनवर जैसा रूप नहीं, साधु समा स्वरूप नहीं। राग-द्वेष निन्ना चुगली, जैसा रूप कुरूप नहीं।</p>
<p><strong>पारस क्षमा की हो-हो-2, हो मूरत कहलाए रे जीवन है पानी की बूंदे, कब मिट जाये रे&#8230;.</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में अनेक की अच्छाइयां और बुराइयों को देखता है। अब आप पर निर्भर है कि आप क्या-क्या देखना चाहते हैं? यदि आपके अंदर अच्छाइयां होंगी तो आपको हर तरफ अच्छाइयां ही अच्छाइयां दिखाई देंगी और यदि आप बुराइयों के संग्रहालय होंगे तो आपको चारों ओर बुराइयां ही दिखाई देंगी। बंधुओ ! आपकी दृष्टि ही यह निर्णय करेगी कि आप बुराइयों के संग्रहालय हैं या अच्छाइयों के। विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा- प्रिय धर्मप्रेमी बंधुआंे। यह बतलाओ आप सुंदर हो या भगवान पार्श्वनाथ स्वामी सुंदर हैं? आप तो अपने शरीर का हर पल साज-श्रृंगार करते रहते हैं, तेल फुलेल इत्र आदि से सुगंधित करते रहते हो, वस्त्र-आभूषणों से सदैव अपने को सुंदर दिखाने का प्रयास करते रहते हो, फिर भी सच-सच बताना- आप सुंदर हैं या भगवान ? आप सबका एक ही जबाव आ रहा है कि ‘भगवान ही सबसे अधिक सुंदर हैं’। बन्धुओं ! संसारी जीवों में राग-द्वेष-काम-क्रोध-लोभ-मोह-प्राणक्ति आदि दुर्गुण सदा हरे-भरे बने रहते हैं। इसलिए साज-श्रृंगार करते हुए भी आप सुंदर नहीं बन सकते, जबकि जिनेंद्र भगवान ने राग-द्वेष-क्रोध-लोभ आदि 18 दोषों का नाश कर दिया है, नारी-कर जिनेंद्र भगवान की सुंदरता वीतरागता की सुंदरता है, जो कभी फीकी नहीं पड़ती। सच तो ये है कि जिनेंद्र भगवान के सच्चे भक्त को भी वैसी ही वीतरागता की सुंदरता प्राप्त हो जाया करती है। आज मैं संघ सहित बहलना आया हूं। पहली बार आया हूं। पार्श्व प्रभु के दर्शन कर मन अत्यंत आनंदित है, प्रफुल्लित है। आचार्य गुरुवर विमर्श सागर जी का मंगल विहार 2025 के चातुर्मास के लिए धर्मनगरी सहारनपुर की ओर चल रहा है। आचार्य श्री के मंगल प्रवचन के बाद स्थानीय अतिशय क्षेत्र कमेटी ने गुरुवर के चरणों में अपने प्रवास को और आगे बढ़ाने का विनम्र निवेदन किया। फिलहाल 17-28 जून आचार्य संघ अतिशय क्षेत्र में प्रवासरत हैं। 19 जून की प्रातः बेला में आचार्य श्री ससंघ एवं आचार्य श्री भारतभूषण जी धर्मनगरी मुज़फ्फरनगर में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे।</p>
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