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	<title>पदमपुरा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>पदमपुरा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 10 वर्षों बाद छठी बार जयपुर में प्रवेश : नगर के 3 शिष्यों 35 पपिच्छी सहित मंगल प्रवेश के लिए पदमपुरा से हुआ विहार  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 13:39:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रमता जोगी बहता पानी को रोकने से भी नहीं रुकते हैं । यह पंक्तियां तब चरितार्थ हुई जब आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा से शिवदासपुरा की ओर मंगल विहार किया। पदमपुरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; पदमपुरा। उड़ गया पंछी रे हरी भरी डाल से, रोको ना रोको कोई गुरु को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रमता जोगी बहता पानी को रोकने से भी नहीं रुकते हैं । यह पंक्तियां तब चरितार्थ हुई जब आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा से शिवदासपुरा की ओर मंगल विहार किया। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> उड़ गया पंछी रे हरी भरी डाल से, रोको ना रोको कोई गुरु को विहार से। रमता जोगी बहता पानी को रोकने से भी नहीं रुकते हैं । यह पंक्तियां तब चरितार्थ हुई जब आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा से शिवदासपुरा की ओर मंगल विहार किया। इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सान्निध्य में पदमपुरा में भूगर्म से प्रगट मूल नायक चमत्कारी श्री पदमप्रभ भगवान का स्वर्ण कलशों से अभिषेक एवं शांतिधारा संघ सान्निध्य में प्रथम कलश बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या, परमीत, छोटू, राजेश पंचोलिया, बाबूलाल, निर्मल छाबड़ा, समर कंठाली आदि संघ परिवार ने किया। जहां देश होली मना रहा है वहीं बुधवार को पदमपुरा में संयोग बना कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल पानी,दूध, दही, धी केशर, पुष्प,सर्व औषधि,हल्दी चावल चूर्ण, सुगंधित जल,आदि रंग बिरंगे द्रव्यों से पुण्यार्जक समर कंठाली, दीपक प्रधान, लवीश पंचोलिया, ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या, राजेश पंचोलिया, पंडित अशोक ,सहित सैकड़ो भक्तों ने किया। संपूर्ण संघ के आहार के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मुनि श्री हितेंद्रसागरजी, श्री प्रभवसागरजी, श्री चिंतन सागर जी,श्री दर्शितसागरजी,श्री प्रबुद्ध सागरजी, श्री मुमुक्षुसागर जी,श्री प्रणीतसागरजी, श्री ध्येय सागर जी, श्री भुवन सागरजी, श्री गुणोदय सागरजी,आर्यिका श्री शुभमति जी,श्री चैत्यमतीजी, श्री विलोकमतिजी,श्री दिव्यांशुमति श्री पूर्णिमा मति,श्री मुदितमति ,श्री विचक्षणमति श्री समर्पित मति ,श्री निर्मुक्त मति,श्री विनम्रमति ,श्री दर्शनामति ,श्री देशना मति ,श्री महायशमति,श्री देवर्धिमति,श्री प्रणतमति,श्री निर्मोहमति,श्री पद्मयश मति ,श्री दिव्ययशमति,,श्री प्रेक्षामति,श्री जिनेश मति,ऐलक श्री हर्षसागर ,क्षुल्लक श्री प्राप्तिसागर ,श्री सुभग सागर , श्री सुगुप्त सागर जी आचार्य श्री, 10 मुनिराज, 20 आर्यिका, 1 ऐलक, 3 क्षुल्लक 34 साधु सहित 35 पिच्छी का 10 वर्षों के बाद जयपुर के लिए मंगल विहार बुधवार को 2.5 किमी विहार कर श्रीसंघ का रात्रि विश्राम अखिल भारतीय मानव कल्याण सेवा आश्रम संस्थान पदमपुरा में हुआ। गुरुवार को प्रातः 3.3 किमी विहार होकर आहार श्री खाटू श्याम कॉलेज शिवदास पूरा में होगी। पदमपुरा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष सुधीर जैन,हेमंत सोगानी मंत्री, राजकुमार कोठारी, सुरेश सबलावत, राजकुमार कोठारी, नरेश पाटनी, राजेश सेठी, महावीर पाटनी सहित जयपुर के अनेक मंदिरों के पदाधिकारियों ने अपने अपने मन्दिर के लिए निवेदन किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं जयपुर</strong></p>
<p>इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जयपुर में सन 1969 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ वर्षायोग किया। आचार्य बनने के बाद वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सन 1999 में भट्टारक जी की नसिया में चातुर्मास किया। उसी वर्ष में क्षुल्लिका ओर आर्यिका दीक्षा श्री अचल मति को ओर श्री नमित सागरजी को ऐलक दीक्षा 3 दीक्षा हुई तथा आर्यिकाश्री अचल मति ओर आर्यिका श्री सरस्वती मति जी 2 साधुओं की समाधि हुई। वर्ष 2000 में नेमीनगर कॉलोनी में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा की। उसी में मुनि श्री देवेंद्रसागर और मुनि श्री देवेश सागर जी को मुनि दीक्षा प्रदान की। वर्ष 2014 में श्याम नगर जयपुर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हुई। वर्ष 2016 में बढ़के बालाजी में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं आर्यिका श्री गुप्तिमति जी की दीक्षा ओर आर्यिका श्री रिद्धि मति की समाधि हुई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मालवीय नगर जयपुर के पुत्रः एवं पिता को क्रमशः मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं मुनि श्री भुवन सागर दीक्षा देकर बनाया।आचार्य श्री ने जयपुर निवासी मुनि श्री विवर्जित सागर जी एवं जयपुर निवासी श्री मुन्नालाल टकसाली को दीक्षा देकर मुनि श्री गुणोदय सागर बनाया।</p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर जी ने सन 1932 में प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी ने सन 1956 सन 1957 में, द्वितीय पट्टाचार्य आचार्य श्री शिव सागर जी ने वर्ष 1956, 1957 1963 में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी ने सन 1956 ,1957 और 1969 में तथा चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजीत सागर जी ने सन 1963 में तथा पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सन 1969 में तथा वर्ष 1999 में जयपुर में वर्षायोग किया है इन सभी आचार्यों ने चातुर्मास और अन्य प्रवास पर पंच कल्याणक ओर दीक्षा दी हैं। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से जयपुर के निवासियों ने दीक्षा लेकर आत्म कल्याण किया है।आचार्य श्री शांति सागर जी ने जयपुर निवासी गुलाब बाई को सन 1932 में जयपुर में आर्यिका दीक्षा, जयपुर निवासी श्रीमती गेंद बाई को दीक्षा सन 1935 गोरल गुजरात में देकर क्षुल्लिका श्री सुमति मति हुई ,जयपुर की चांद बाई की दीक्षा मध्य प्रदेश के सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में सन 1934 में दीक्षा होकर क्षुल्लिका श्री वीर मति हुई।द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री वीरसागर जी ने संवत् 1995 में माधोराजपूरा क्षुल्लिका श्री वीरमती को दीक्षा देकर आर्यिका श्री वीरमति,श्रीमती सूरज बाई क्षुल्लिका श्री चंद्र मति , श्रीमती मोहरा बाई क्षुल्लिका दीक्षा लेकर श्री शांतमति नामकरण किया, जयपुर के श्री गुलाब चंद टोंग्या ने जयपुर में संवत 2013 में दीक्षा लेकर मुनि श्री जय सागर जी हुए। जयपुर निवासी श्रीमती गेंदा बाई को संवत् 1997 कचनेर में दीक्षा देकर आर्यिका श्री पार्श्व मति बनाया। इसी प्रकार जयपुर की लाडबाई 2014 जयपुर में दीक्षा लेकर आर्यिका श्री वासुमति जयपुर के क्षुल्लक श्री धर्म सागर दीक्षा लेकर मुनि अजित सागर जी हुए।जयपुर की कल्ली बाई को आचार्य धर्मसागर जी ने आर्यिका दीक्षा श्री सिद्ध ममति के रूप में संवत 2029 को था बैराड़ जयपुर की मन फुल बाई को दीक्षा देकर आर्यिका श्री निर्मल मति बनाया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री का सामान्य परिचय</strong></p>
<p>आचार्य श्री संघ से जुड़े गुरु भक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि धर्म नगरी सनावद में पर्युषण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर एक प्रतिभा शाली कुल परिवार नगर का मान बढ़ाने वाले यशस्वी बालक यशवंत का जन्म माता मनोरमा देवी जैन की उज्जवल कोख से प्रसवित हुआ। आपके पिता कमलचंद जैन उपजाति पोरवाड़ से है। 18 सितम्बर 1950 भाद्रपद शुक्ल सप्तमी संवत 2006 को अवतरित होनहार भाग्यशाली सौभाग्यशाली पुत्र के पूर्व 8 पुत्र 4 पुत्रियां असमय काल का ग्रास हुई ।आपके माता पिता ने रिश्तेदारों की सलाह अनुसार आप माता की कोख में थे,तब माता पिता ने महावीर जी में मंदिर की 108 परिक्रमा लगाकर मंदिर की दीवाल पर उल्टे स्वस्तिक बनाकर यह मन्नत ली कि हम बालक का मुंडन यही कराएंगे। मुझे ऐसा महसूस होता है कि जैसे गर्भ कल्याणक की क्रिया हुई। 13 का अशुभ अंक शुभ बना। बालक यशवंत के रूप में 13 वी संतान का जन्म हुआ। पावन पर्युषण पर्व के आर्जव धर्म दिवस जन्म होना जैसे जन्म कल्याणक हुआ हो। उस समय बालों का मुंडन नही हुआ।तो संयोग ऐसा बना कि आपकी मुनि दीक्षा श्री महावीर जी मे हुई और आपके दीक्षा पर केशलोचन हुए।जब बालक यशवंत 1 वर्ष के हुए तो 5 वर्ष की उम्र तक आपको ननिहाल बगैर माता पिता के रखा गया।जब आपकी उम्र मात्र 12 वर्ष की थी तब आपकी माताजी का असामायिक निधन हुआ।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा</strong></p>
<p>तृतीय पट्टाधिश नूतन आचार्यश्री धर्मसागर जी महाराज ने श्री महावीर जी में फागुन शुक्ला 8 संवत 2025 24 फरवरी 1969 को ब्रह्मचारी यशवन्त मुनि दीक्षा धारण कर मुनि श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज बन गए ।</p>
<p>जयपुर खानिया में प्रभु भक्ति से बिना डॉक्टरी ईलाज के नेत्र ज्योति वापस आना।</p>
<p><strong>उपसर्ग नेत्र ज्योति जाना</strong></p>
<p>श्री महावीर जी से आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज का विहार जयपुर खानिया जी हुआ ज्येष्ठ शुक्ला 5 पंचमी संवत 2025 सन 1969 को अनायास नव दीक्षित मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज की नेत्रों की रोशनी चली जाती है। उस समय उम्र मात्र 19 वर्ष की उसी समय डॉक्टर बुलाये गए अगले दिन डॉक्टरों ने नेत्रों का परीक्षण किया। डॉक्टरों ने परामर्श दिया कि बिना इंजेक्शन लगाए नेत्र ज्योति आना नामुमकिन है। संघ में विचार विमर्श होने लगा कि मात्र 19 वर्ष की उम्र में इतना उपसर्ग ? क्या किया जाए? दीक्षा छेद कर डॉक्टरी इलाज कराने की भी चर्चा चली। मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज के कानों में चर्चा पहुँचने पर उन्होंने कहा कि हम इंजेक्शन नही लगवायेगे प्रसंग आने पर समाधि ले लेंगे।</p>
<p><strong> प्रभु की भक्ति से चमत्कार होता हैं,</strong></p>
<p>नेत्र ज्योति जाने के 49 घंटे के बाद मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने 1008 श्री चंद्र प्रभु की वेदी पर मस्तक रख कर पूज्य पाद रचित श्री शांति भक्ति का पाठ स्तुति प्रारम्भ की। लगातार 3 घंटे शांति भक्ति के प्रभाव से 52 घण्टे बाद प्रभु भक्ति के प्रभाव से बिना डॉक्टरी इलाज के नेत्र ज्योति वापस आ जाती है। उस घटना के समय आचार्य श्री धर्म सागर जी सहित 17 मुनि 25 आर्यिका,4 क्षुल्लक एवं 1 क्षुल्लिका सहित 47 साधु विराजित थे।</p>
<p>आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी जी आकाश गमनी विद्या से आकाश में गमन कर रहे थे। सूर्य की प्रचंड तेज रोशनी से आचार्य श्री की नेत्र ज्योति जाने पर श्री पूज्य पाद स्वामी ने श्री शांति भक्ति की रचना कर नेत्र ज्योति वापस पाई थी। उसी पवित्र शांति भक्ति के पाठ से मुनि श्री वर्धमान सागर जी महाराज की नेत्र ज्योति वापस आई। इन पवित्र नेत्रों से जब गुरुदेव का वात्सल्य मय आशीर्वाद मिलता है तो भक्तों का मानव जीवन सफल हो जाता है।</p>
<p><strong> आचार्य पद</strong></p>
<p>आचार्य श्री अजित सागर जी के लिखित आदेश से 24 जून 1990 को आचार्य पद पारसोला में दिया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी गुरुदेव ने अभी तक मुनि दीक्षा,43 आर्यिका दीक्षा, 46 ऐलक दीक्षा, 2क्षुल्लक दीक्षा,18 क्षुल्लिका दीक्षा 14 सहित 123 दीक्षा दी हैं।</p>
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		<title>तृतीय पट्टाधीश आचार्य धर्मसागर जी का 58वां आचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव श्रद्धा से मनाया : अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में हजारों भक्तों की मौजूदगी में भक्ति, विधान और विनयांजलि का भव्य आयोजन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/dharm_sagar_58th_acharya_coronation_mahotsav_padmupra/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:30:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी का 58वां आचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। गुरु गुणानुवाद और महामंडल विधान विशेष आकर्षण रहा। पदमपुरा से राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट पदमपुरा (जयपुर) । अतिशय क्षेत्र पदमपुरा राजस्थान में तृतीय पट्टाधीश का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी का 58वां आचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। गुरु गुणानुवाद और महामंडल विधान विशेष आकर्षण रहा। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा (जयपुर) ।</strong> अतिशय क्षेत्र पदमपुरा राजस्थान में तृतीय पट्टाधीश का 58वां आचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। विशाल पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100649" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0032.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>पंचम पट्टाधीश का सानिध्य</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य की परंपरा के पंचम पट्टाधीश इन दिनों पदमपुरा में 33 पीछी विराजित हैं। आचार्य संघ, गणिनी आर्यिका श्री सरस्वतीमति माताजी, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में यह महोत्सव सम्पन्न हुआ।</p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना में 58 अंक का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए कहा कि 5 और 8 का योग 13 होता है। आगम अनुसार दिगंबर मुनियों के 13 प्रकार के चारित्र बताए गए हैं, जो मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ने का आधार हैं।</p>
<p><strong>गुरु गुणानुवाद – शिष्य का धर्म</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि गुरु का गुणानुवाद करना शिष्य का परम कर्तव्य है। हम जो भी हैं, वह गुरु की शिक्षा, ज्ञान और स्नेह का परिणाम है।</p>
<p>आचार्य श्री शांतिसागर जी ने श्रावक समाज और मुनियों को आदर्श मार्ग दिखाया और स्वयं उस पर चलकर धर्म की प्रभावना की। 36 दिन की कुंथलगिरि में संलेखना लेकर उन्होंने जीवन को साधना का संदेश दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100648" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0034.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>परंपरा का गौरवपूर्ण क्रम</strong></p>
<p>समाधि के पश्चात प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी तथा उनके बाद श्री शिव सागर जी द्वितीय पट्टाचार्य बने। धर्म प्रभावना हेतु आचार्य श्री धर्मसागर जी ने पृथक विहार किया और अनेक भव्य जीवों को दीक्षा-शिक्षा दी। समाज ने कई बार उन्हें आचार्य पद स्वीकार करने का आग्रह किया, किंतु उन्होंने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार किया।</p>
<p><strong>1969 का ऐतिहासिक प्रसंग</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संस्मरण सुनाते हुए बताया कि ब्रह्मचारी अवस्था में वे सहित 11 भव्य जीवों ने दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाया था। उसी समय द्वितीय पट्टाचार्य अस्वस्थ हो गए। उन्होंने कहा कि यदि वे दीक्षा न दे सके तो वरिष्ठ मुनि धर्मसागर जी दीक्षा देंगे। गुरु के इन वचनों ने मानो भावी आचार्य को मनोनीत कर दिया। उनकी समाधि के पश्चात तृतीय पट्टाधीश के रूप में आचार्य श्री धर्मसागर जी की प्रतिष्ठा हुई। यह मूल बाल ब्रह्मचारी परंपरा की निरंतरता रही।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100653" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035-1320x990.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260224-WA0035.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>गुणों की जीवंत मिसाल</strong></p>
<p>आचार्य श्री धर्मसागर जी के वितराग, सरल, परोपकारी और निस्पृह व्यक्तित्व के अनेक संस्मरण सुनाए गए। सन 1974 में देहली में आयोजित श्री महावीर स्वामी निर्वाण महोत्सव में उन्होंने दिगंबर समाज की मर्यादाओं की रक्षा की।</p>
<p><strong>महामंडल विधान का भव्य दृश्य</strong></p>
<p>पंडित धर्मचंद शास्त्री के निर्देशन में महामंडल विधान सम्पन्न हुआ। सौधर्म इंद्र श्री दीपक, श्रीमती पूनम पाटनी (कोलकाता), कुबेर इंद्र, महायज्ञ नायक डॉ. जगमोहन-श्रीमती वर्षा हुमड (कनाडा), यज्ञ नायक श्री आशीष-श्रीमती मनीषा धार सहित सैकड़ों इंद्र परिवारों ने पूजन में भाग लिया।</p>
<p>महामंडल की रचना विभिन्न धान-अनाज से की गई। 58 जल कलश, 58 चंदन कलश, 58 अक्षत थाल, 58 प्रकार के देश-विदेश के पुष्प, 58 नैवेद्य, 58 दीपक, 58 धूप, 58 फल एवं 58 अर्घ्य अर्पित किए गए। मंत्रोच्चार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, आर्यिका श्री महायश मति एवं अन्य साधु-साध्वियों द्वारा हुआ।</p>
<p><strong>विनयांजलि और वर्षायोग के निवेदन</strong></p>
<p>विनयांजलि सभा में भरत जैन इंदौर ने वर्ष 2027 के वर्षायोग हेतु निवेदन किया। वर्ष 2026 के लिए किशनगढ़, सीकर, जयपुर (बड़के बालाजी), निवाई सहित विभिन्न स्थानों से सैकड़ों भक्तों ने आग्रह रखा। भींडर जैन समाज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हेतु निवेदन प्रस्तुत किया।</p>
<p>श्रवण बेलगोला जैन मठ के भट्टारक एवं अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी द्वारा प्रेषित विनयांजलि का वाचन मुनि श्री हितेंद्रसागर जी एवं मुनि श्री प्रभवसागर जी ने किया।</p>
<p><strong>सम्मान और विमोचन</strong></p>
<p>आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन में श्री राजेंद्र कटारिया, राजेश शाह (अहमदाबाद), विवेक काला, सुनील अग्रवाल, सुरेश सबलावत (जयपुर), गजराज गंगवाल (देहली), विमल पाटनी, संजय पापड़ीवाल (किशनगढ़), कमलेश मालवीय (सलूंबर), भरत जैन (इंदौर) सहित अनेक श्रद्धालु सहभागी बने।</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य श्री धर्मचंद शास्त्री एवं वसंत वेद (किशनगढ़) ने किया। प्रतिष्ठाचार्य श्री धर्मचंद शास्त्री का सम्मान हुआ तथा आचार्य श्री धर्मसागर अभिवंदन ग्रंथ का विमोचन किया गया।</p>
<p>राजस्थान, मध्यप्रदेश, देहली, कलकत्ता, अहमदाबाद, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक सहित अनेक राज्यों से हजारों भक्त इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भगवान के जन्म तप कल्याणक पर दीक्षित हुईं मनोरमा जैन: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा में दी दीक्षा </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 09:41:45 +0000</pubDate>
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<p><strong>दीक्षा का अर्थ है, इच्छाओं का दमन दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना। दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना। विचारों में क्रांति को दीक्षा कहते हैं, आमूलचूल परिवर्तन को दीक्षा कहते हैं। यह मंगल देशना पदमपुरा में दीक्षा के अवसर पर आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> दीक्षा का अर्थ है, इच्छाओं का दमन दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना। दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना। विचारों में क्रांति को दीक्षा कहते हैं, आमूलचूल परिवर्तन को दीक्षा कहते हैं। यह मंगल देशना पदमपुरा में दीक्षा के अवसर पर आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। उन्होंने कहा कि जैनियों की दीक्षा रागद्वेष निवृत्ति के लिए होती है। दीक्षा पूर्व संस्कार को तोड़ने का नाम है। दीक्षा संसार से मुख मोड़कर अंतर्मुख दृष्टि हो जाने को कहते हैं। अलौकिकता से दूर आध्यात्मिक नगर के नजदीक रहना दीक्षा है। भगवान श्री वासु पूज्य के जन्म और तप कल्याणक दिवस पर आचार्य श्री ने दीक्षा दी। 72 वर्षीय मनोरमा जैन का मनोरथ पूरा हुआ। दीक्षा के बाद हुईं क्षुल्लिका श्री वासुपूज्य मति। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सोमवार को अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में मनोरमा देवी संपतलाल अजमेरा बूंदी को भी क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान की। इनका नूतन नाम क्षुल्लिका श्री वासु पूज्यमति माताजी किया।</p>
<p><strong>दीक्षार्थी ने की आचार्य श्री से दीक्षा की याचना </strong></p>
<p>सौभाग्यशाली परिवार की महिलाओं ने चौक पूरण की क्रिया की। दीक्षार्थी ने आचार्य श्री से दीक्षा की याचना की तथा आचार्य श्री एवं समस्त साधुओं, दीदी, भैया, श्रावक-श्राविकाओं तथा समाज से क्षमायाचना की। इस बेला में आचार्य श्री संघ गणिनी आर्यिका श्रीसरस्वती मति, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी सानिध्य में आचार्य श्री ने दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किए तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किए इसके बाद आचार्य श्री ने मनोरमा का दीक्षा उपरांत नूतन नाम क्षुल्लिका श्री वासु पूज्यमति किया।</p>
<p><strong>पदमपुरा में पहली बार हुई दीक्षा </strong></p>
<p>पुण्यार्जक अजमेरा परिवार बूंदी द्वारा पिच्छी कमंडल शास्त्र एवं कपड़े भेंट किए गए। आचार्य श्री मुनि श्री हितेंद्रसागर जी एवं अन्य साधुओं ने दीक्षार्थी के केशलोचन किए। परिजनों एवं अन्य भक्त, जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। वह अपने को पुण्यशाली मान रहे थे। इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 42 मुनि, 45 आर्यिका, 2 ऐलक, 16 क्षुल्लक और 13 क्षुल्लिका 118 दीक्षा दी थी। यह 19 वीं दीक्षा है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा में किसी भी पूर्वाचार्य ने पदमपुरा में दीक्षा नहीं दी। पदमपुरा में पहली बार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दीक्षा दी।</p>
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		<title>पदमपुरा में 18 फरवरी से पंच कल्याणक की तैयारियां : धार्मिक कार्यक्रम की समितियों को दी जिम्मेदारी  </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:30:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा( जयपुर)। प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा( जयपुर)।</strong> प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। नूतन चौबीसी की मंगल प्रेरणादाता आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण जी भी विराजित हैं। अध्यक्ष सुधीर जैन दौसा, मानद मंत्री हेमंत सोगानी, और कोषाध्यक्ष राजकुमार कोठारी ने बताया कि श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा की प्रबंध समिति</p>
<p>के तत्वावधान में पंच कल्याणक होगा। सुचारू कार्य व्यवस्था के लिए श्री पदमपुरा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन किया गया है।</p>
<p><strong>समितियों में इन समाजजनों को दी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>पदमपुरा पंचकल्याणक महोत्सव के लिए सुधीर जैन को समारोह अध्यक्ष, हेमंत सोगानी को महामंत्री, राजकुमार कोठारी को संयोजक,न्यायाधिपति नरेंद्र जैन को स्वागत समिति,मंदिर निर्माण समिति में राजकुमार कोठारी, साधुओं की आहार व्यवस्था समिति में महावीर प्रसाद पाटनी, सुरेश सबलावत को प्रचार-प्रसार एवं प्रकाशन समिति का संयोजक बनाया गया है। सुरेश सबलावत प्रचार-प्रसार संयोजक ने बताया कि इसकेअतिरिक्त वित्त, कलश आबंटन, वित्तीय प्रबंधन लेखा, पांडाल, आवास, मंदिर, भोजन , जल,विद्युत, सुरक्षा, भंडार ,पूजन निर्माण,चिकित्सा ,सांस्कृतिक कार्यक्रम , यातायात, पार्किंग, कार्यालय,जुलूस, प्रदर्शनी इन्द्र व्यवस्था, मंच माइक संचार व्यवस्था सहित अनेक समिति गठित कर उनके सदस्य मनोनीत किए गए हैं।</p>
<p><strong>महोत्सव के लिए पात्रों का चयन किया</strong></p>
<p>मंदिर समिति के राजकुमार कोठारी ने बताया कि श्री पदमप्रभ भगवान की खड़गासन प्रतिमा के पास नवनिर्मित 24 तीर्थंकरों की चौबीसी, नूतन शिखर का निर्माण हो चुका है। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी (32 पिच्छी)के प्रमुख निर्देशन में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी( 5 पिच्छी) एवं अन्य संघ सानिध्य में संहितासुरी पंडित हंसमुख शास्त्री धरियावद द्वारा धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नव निर्मित शिखर पर कलश एवं ध्वजा आरोहण भामाशाह अशोक सुशीला पाटनी, सुरेश, शांता, विमल तारिका पाटनी आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ द्वारा किया जाएगा। पंच कल्याणक के लिए महावीर शशि पहाड़िया को माता-पिता, सुरेंद्र जैन पांड्या मृदुला जैन सौधर्म इंद्र, पारस पूजा पाटनी कुबेर इंद्र सहित अनेक पात्रों का चयन हो गया है।</p>
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		<title>आचार्यश्री संघ का दिव्य मिलन देख भक्त जन अभिभूत: अगवानी के दौरान जयकारों की गूंज से वातारण धर्ममय हुआ  </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:31:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज का विहार चाकसू होते हुए पदमपुरा के लिए चल रहा है। चाकसू में पूर्व से विराजित आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने संघ सहित आकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की चरण वंदना की। चाकसू से पढ़िए, यह खबर&#8230; चाकसू। आचार्यश्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p style="text-align: left"><strong>आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज का विहार चाकसू होते हुए पदमपुरा के लिए चल रहा है। चाकसू में पूर्व से विराजित आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने संघ सहित आकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की चरण वंदना की। <span style="color: #ff0000">चाकसू से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p style="text-align: left"><strong>चाकसू।</strong> आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज का विहार चाकसू होते हुए पदमपुरा के लिए चल रहा है। चाकसू में पूर्व से विराजित आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने संघ सहित आकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की चरण वंदना की। दोनों आचार्य संघ के मिलन को देखकर जनता बहुत आह्लादित अभिभूत हुई और दोनों संघ के दर्शन करने के लिए समाज जन काफी संख्या में मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align: left">समाज ने श्री चंद्रप्रभु भगवान, आचार्य श्री शांतिसागर महाराज, आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के जयकारों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया। भक्तों ने अगवानी कर चरण वंदना कर परिक्रमा लगाई। स्टेज पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को विराजित कर दूध, केसर, रत्नों पुष्प से चरण प्रक्षालन किए। आचार्य श्री ने आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी को आशीर्वाद दिया। दोनों आचार्य मंचासीन हुए।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पदमपुरा के लिए मंगल विहार : समाज ने दी अश्रुपूरित नेत्रों से दी विदाई </title>
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		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 15:53:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[31 साधुओं सहित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शीतकालीन प्रवास में काफी धर्म प्रभावना कर आर्यिका श्री पूर्णिमा मति की जन्म धर्मनगरी निवाई से 2 फरवरी की दोपहर को जयपुर के पास दिगंबर अतिशय क्षेत्र पदमपुरा के लिए विहार किया। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; निवाई। अभी ना जाओ छोड़कर कि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>31 साधुओं सहित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शीतकालीन प्रवास में काफी धर्म प्रभावना कर आर्यिका श्री पूर्णिमा मति की जन्म धर्मनगरी निवाई से 2 फरवरी की दोपहर को जयपुर के पास दिगंबर अतिशय क्षेत्र पदमपुरा के लिए विहार किया। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> अभी ना जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं, बहता पानी रमता योगी रोके ना रुके। यह उस समय कहावत चरितार्थ हुई, जब 31 साधुओं सहित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शीतकालीन प्रवास में काफी धर्म प्रभावना कर आर्यिका श्री पूर्णिमा मति की जन्म धर्मनगरी निवाई से 2 फरवरी की दोपहर को जयपुर के पास दिगंबर अतिशय क्षेत्र पदमपुरा के लिए विहार किया। उनके साथ मुनिश्रीहितेंद्रसागरजी मुनिश्री प्रभवसागरजी ,मुनिश्री चिंतनसागर जी, मुनिश्री दर्शितसागरजी, मुनिश्री प्रबुद्ध सागरजी, मुमुक्षुश्री सागरजी, मुनिश्री प्रणीतसागरजी, मुनिश्री ध्येयसागरजी, मुनिश्री भुवन सागरजी, आर्यिका शुभमति, चैत्यमती, विलोकमति, दिव्यांशुमति ,पूर्णिमामति, मुदितमति, विचक्षणमति, समर्पितमति, निर्मुक्तमति, विनम्रमति, दर्शनामति, देशनामति, महायशमति, देवर्धिमति, प्रणतमति, निर्माेहमति, पद्मयशमति, दिव्ययशमति, प्रेक्षामति जिनेशमति, ऐलकश्री हर्षसागरजी ,क्षुल्लकश्री प्राप्तिसागरजी ने विहार किया।</p>
<p><strong>पुरुषार्थ कर मानव जीवन को सफल बनाएं</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने विहार के पूर्व उपदेश में बताया कि जिस प्रकार लौकिक धन संपत्ति को आप सुरक्षित लाकर, तिजोरी में रखते हैं, इस प्रकार देव शास्त्र गुरु के सानिध्य में प्राप्त धर्म से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे हृदय रूपी तिजोरी में सुरक्षित रखें। इसकी रक्षा कुगुरु, कुदेव कुशास्त्र मिथ्यात्व से रक्षाकर रत्नत्रय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर मानव जीवन को सफल बनाएं। संघ की आपने अभी तक प्रवास में भक्ति पूर्वक विनय की है। ऐसी श्रद्धा और विनय देव शास्त्र गुरु के प्रति बनाकर रखें। देश में चार करोड़ से अधिक जैनों की जनसंख्या 40 लाख तक हो गई है। धर्म के प्रति समाज की उदासीनता ठीक नहीं है।</p>
<p><strong>घर- घर आचार्य श्री की आरती कर चरण प्रक्षालन किए</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि हम शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम इसलिए देते हैं कि आपका जीवन भी उन्नत शील और शुद्ध बने। भविष्य में आप अणुव्रती महाव्रती बने ताकि निकट भविष्य में तीर्थंकर कुल में जन्म लेकर तीर्थंकर बन सकें। इसलिए कुल की शुद्धि हमेशा बना कर रखना चाहिए। विहार के दौरान समाज के घर- घर आचार्य श्री की आरती कर चरण प्रक्षालन किए गए। समाज के सभी उम्र के भक्तों के नेत्रों से अश्रुधारा प्रवाहित हो रही थी। जिनोदय युवा संघ जिनकी दिनचर्या श्री जी आचार्य संघ के दर्शन अभिषेक पूजन जाप, स्वाध्याय से प्रारंभ होती थी। अनेकों भावविहल थे। आचार्य श्री संघ सानिध्य में प्रातः श्री जी का भव्य विभिन्न रसों से पंचामृत अभिषेक ओर शांति धारा ज़िनोदय युवा संघ द्वारा की गई। सकल जैन समाज द्वारा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का भव्य पूजन हुआ। मंत्रोच्चार आर्यिका श्री महायश मति ने किए।</p>
<p>परमीत, पवन बोहरा, मोहित, हेमंत ने बताया कि सोमवार को 5 किमी विहार कर रात्रि विश्राम प्रथमाचार्य श्री शांति सागर भवन श्री सुशील नीरा पाइप फैक्टरी परिसर चैनपुरा रेलवे फाटक के पास हुआ। 3 फरवरी को प्रातः विहार 3.9 किमीहोकर संघ की आहार चर्या संदीपन स्कूल मुंडिया ग्राम में होगी। आचार्य संघ को पुनः पदमपुरा संघ सहित पधारने का निवेदन करने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा दिगंबर जैन मंदिर पंच कल्याणक कमेटी के संयुक्त प्रतिनिधि राजकुमार कोठारी, सुरेश सबलावत, सुधीर दौसा, महेंद्र अनूप अनोपडा, योगेश, टोडरका, राम पाटनी, मोहित, शैल बाला, ईश्वरलाल, महावीर पाटनी, राकेश सेठी सहित अनेक पदाधिकारी पधारे।</p>
<p><strong>परंपरा का इतिहास </strong></p>
<p>आचार्य संघ का आचार्य श्री वीरसागर जी, श्री शिव सागर जी, श्री धर्म सागर जी से सन 1955 के पूर्व से आत्मीय भावनात्मक संबंध रहा। सन 1955 में रत्नत्रय के प्रतीक तीनों भावी आचार्यों का पदार्पण हुआ था तब 41 फिट के मान स्तंभ की प्रतिष्ठा संपन्न हुईं थी। उसके बाद आचार्यकल्प श्री श्रुतसागर जी, श्रीअजितसागर जी, श्री वर्धमान सागर जी, आर्यिका श्री आदिमति आदि अनेकों बार पधारे चातुर्मास भी किया। आचार्य श्री के संघ मंगल सानिध्य में 18 से 22 फरवरी तक नूतन चौबीसी सहित अन्य जिन बिंब प्रतिमाओं का भव्य पंच कल्याणक अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में होगा। इसक पूर्व भी पदमपुरा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी अनेक बार गए हैं।</p>
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		<title>चकवाड़ा में आचार्य वसुनंदी जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश : महिलाओं ने मंगल कलशों से भव्य अगवानी की </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Apr 2025 18:12:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चकवाड़ा में आचार्य वसुनंदी जी महाराज ससंघ का मंगलवार देर शाम भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्म गुणामृत के ट्रस्टियों सहित सकल जैन समाज चकवाड़ा ने बैंडबाजों के साथ जयकारे लगाते हुए मुनि संघ का भव्य मंगल प्रवेश कराया। समाजजनों ने पाद प्रक्षालन किया। फागी से पढ़िए राजाबाबू गोधा की खबर&#8230; फागी। धर्म गुणामृत ट्रस्ट गुणस्थली [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चकवाड़ा में आचार्य वसुनंदी जी महाराज ससंघ का मंगलवार देर शाम भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्म गुणामृत के ट्रस्टियों सहित सकल जैन समाज चकवाड़ा ने बैंडबाजों के साथ जयकारे लगाते हुए मुनि संघ का भव्य मंगल प्रवेश कराया। समाजजनों ने पाद प्रक्षालन किया। <span style="color: #ff0000">फागी से पढ़िए राजाबाबू गोधा की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>फागी।</strong> धर्म गुणामृत ट्रस्ट गुणस्थली चकवाड़ा में आचार्य वसुनंदी जी महाराज ससंघ का मंगलवार देर शाम भव्य मंगल प्रवेश हुआ। गुणस्थली चकवाडा के प्रवक्ता जयकुमार गंगवाल एवं एडवोकेट विनोद जैन ने बताया कि यह संघ बाडा पदमपुरा, शिवदासपुरा, माधोराजपुरा, फागी होता हुआ चकवाड़ा ग्राम की सीमा पर पहुंचा। जहां धर्म गुणामृत ट्रस्ट के ट्रस्टियों सहित सकल जैन समाज चकवाड़ा ने बैंडबाजों के द्वारा जयकारों के साथ मुनि संघ का भव्य मंगल प्रवेश कराया। महिलाओं ने मंगल कलशों से भव्य अगवानी कर पाद प्रक्षालन करने के बाद आरती कर संत भवन में ठहराया। मुनि संघ की भव्य आहारचर्या होने के बाद संघ ने मोजमाबाद के लिए मंगल विहार किया।</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद थे</strong></p>
<p>जैन महासभा के प्रतिनिधि राजाबाबू गोधा ने बताया कि इस अवसर पर एडवोकेट विनोद कुमार जैन, जयकुमार गंगवाल, महेंद्रकुमार कासलीवाल, हरकचंद गंगवाल, टीकमचंद गंगवाल सहित सभी श्रावक श्राविकाएं मौजूद थे।</p>
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