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	<title>पंच कल्याणक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पंच कल्याणक में महामुनि आदिनाथ की प्रथम आहारचर्या: समवशरण की रचना कर जिज्ञासाओं का किया आचार्यश्री ने समाधान  </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:29:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भिंड। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के ज्ञान कल्याणक के दिन महा मुनिराज आदिकुमार को इच्छुक रस (गन्ने का रस) की विधि मिलने पर आहारचर्या विधि विधान से हुई। दोपहर को समवशरण की रचना की गई। जिसमें जिज्ञासुओं द्वारा प्रश्न करने पर समवशरण में विराजमान पट्टाचार्य श्री ने उनके प्रश्नों का समाधान किया। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भिंड।</strong> पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के ज्ञान कल्याणक के दिन महा मुनिराज आदिकुमार को इच्छुक रस (गन्ने का रस) की विधि मिलने पर आहारचर्या विधि विधान से हुई। दोपहर को समवशरण की रचना की गई। जिसमें जिज्ञासुओं द्वारा प्रश्न करने पर समवशरण में विराजमान पट्टाचार्य श्री ने उनके प्रश्नों का समाधान किया। पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने कहा कि महापुरुषों की महिमा निराली है। आत्मज्ञानी व्यक्ति के सामने क्रूर से क्रूर प्राणी शांत हो जाते हैं। जातिगत बैर भाव भी छोड़ देते हैं। देखो तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर स्वामी पर्यंत का इतिहास सर्व जगत को ज्ञात है। जहां-जहां भगवान का विहार होता था। वहां-वहां सुभिक्ष हो जाता था। गाय एवं सिंह मैत्री भाव से सरिता के एक ही घाट पर पानी पीते थे। उनके समवशरण में धर्मसभा में तीन गति के जीव अपने-अपने कोटे में बैठकर दिव्य वाणी, श्री जिन देशना का श्रवण करते थे। महापुरुषों की यही महिमा है, बिना अस्त्र-शस्त्र उठाए सर्व लोक को अपना बना लेना। उपसर्गकर्ता भी चरणों में आकर सम्यकत्व निधि को प्राप्त कर लेते हैं। घर-घर में आत्म विद्या उदघोषित हो, ऐसा पवित्र भाव रखो। अपने कसाए वासना पूर्ण विचारों के कारण किसी भी न प्रियांशु का विघात मत करो तथा भावों से देव एवं नारकियों की भी हत्या मत करो, स्वयं के परिणाम को संभालो।</p>
<p><strong>मरना तुम्हारा धर्म नहीं समाधि मरण करना ही धर्म </strong></p>
<p>पट्टचार्य ने आगे कहा कि देश राष्ट्र समाज धर्म एवं स्वयं पर के प्राणों की रक्षा करने के भाव हैं तो प्रत्येक सूत्र को अनेक श्रेणियां में देखना चाहिए। सर्व जगत पूर्ण शुद्ध नहीं जी रहा है। यह धु्रव सत्य है पर जी रहा है, जीते-जीते शुद्ध अवस्था होते-होते एक क्षण परम शुद्ध में प्रवेश कोई बिरला साधु-पुरुष ही करता है तब वह कर्मशून्य कृतकृत्य परमात्मा पद को प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि आपको लग सकता है कि इन सब जीवों की रक्षा से मुझे क्या लाभ आपको इनकी रक्षा से लाभ ही लाभ है। विवेक पूर्वक विचार करो बुद्धि खुल जाएगी। संसार का सर्व सुख तथा परमार्थ सब की रक्षा से ही संभव है। पंच स्थावर एवं त्रस जीवों की रक्षा के बिना मानव जीवन सुरक्षित नहीं है। सामान्य नागरिक जी रहे हैं। सभी के होने से पर उन्हें अपनी अल्प प्रक्रिया से समझ ही नहीं आ रहा है कि उनका जीवन किसके माध्यम से सुरक्षित है। पट्टाचार्य ने कहा कि आजकल लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर आत्महत्या कर रहे हैं। मरना तुम्हारा धर्म नहीं समाधि मरण करना ही धर्म है। आज इस सभा में सभी को संकल्प लेना है कि हम आत्महत्या नहीं करेंगे, सभी लोगों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया।</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद रहे </strong></p>
<p>इस अवसर पर विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक संजीवसिंह कुशवाह, भारत चतुर्वेदी, विश्वप्रताप सिंह विष्णु, पूर्व जिला अध्यक्ष रविसेन जैन, धर्मेंद्र जैन पोस्ट ऑफिस, प्रमोद जैन डब्बू, पार्षद मनोज जैन, यश जैन, बिट्टू जैन, देवेंद्र जैन, नरेश जैन, चक्रेश जैन, विनोद जैन, रविंद्र जैन, राकेश जैन, मनीष जैन, मोहन जैन, राजेंद्र जैन, रमेश जैन, सचिन जैन, पिंकू जैन उपस्थित थे।</p>
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		<title>श्रमणों के विहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है प्रशासन : आचार्यश्री विशद सागर जी ससंघ का पिपलाई में पहली बार प्रवेश </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 06:50:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विशद सागर जी ससंघ का पिपलाई की धरा पर पहली बार प्रवेश होने पर यहां की जनता धन्य हो गई। पिपलाई प्रवेश पर दिगंबर जैन मंदिर के प्रवक्ता बृजेंद्रकुमार जैन एवं मंदिर की कमेटी के सभी पदाधिकारियों को पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बामनवास से पढ़िए, यह रिपोर्ट&#8230; बामनवास। आचार्यश्री विशद सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री विशद सागर जी ससंघ का पिपलाई की धरा पर पहली बार प्रवेश होने पर यहां की जनता धन्य हो गई। पिपलाई प्रवेश पर दिगंबर जैन मंदिर के प्रवक्ता बृजेंद्रकुमार जैन एवं मंदिर की कमेटी के सभी पदाधिकारियों को पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">बामनवास से पढ़िए, यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बामनवास।</strong> आचार्यश्री विशद सागर जी ससंघ का पिपलाई की धरा पर पहली बार प्रवेश होने पर यहां की जनता धन्य हो गई। पिपलाई प्रवेश पर दिगंबर जैन मंदिर के प्रवक्ता बृजेंद्रकुमार जैन एवं मंदिर की कमेटी के सभी पदाधिकारियों को पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वर्ष 2006 में दिगंबर जैन मंदिर के जीर्णाेद्धार के समय मुख्य वेदी भगवान महावीर स्वामी के पंच कल्याणक भी आचार्यश्री विशद सागर जीे ससंघ ने जयपुर के महारानी फॉर्म के गायत्री नगर में किया था। उन्हीं श्रमण ससंघ का पिपलाई विहार करते हुए आना गांव में पहली बार आना बड़े सौभाग्य का विषय है। पिपलाई में प्रवेश के बाद श्रमणों ने दिगंबर जैन मंदिर में वर्तमान शासन नायक के भगवान महावीर स्वामी, भगवान पार्श्वनाथ और भगवान शांतिनाथ के दर्शन कर ध्यान किया।</p>
<p><strong>विहार धाम के लिए श्रमणों का मिला आशीर्वाद</strong></p>
<p>राजस्थान सरकार के संकल्प पत्र की घोषणा के आधार पर अल्पसंख्यक वर्ग जैन समुदाय श्रमणों के पैदल विहार के समय ठहरने और चातुर्मास के दौरान आहार, निहार और प्रवचन करने के लिए चिन्हित की गई भूमि का आचार्य श्री विलक्ष्य सागर जी और विशाल सागर जी ने पिपलाई में मौका स्थिति का निरीक्षण कर विहार धाम बनाने का आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>आर्यिका भक्ति भारती के दिया विद्यार्थियों को प्रवचन</strong></p>
<p>आचार्यश्री विशद सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री भक्ति भारती माताजी ने राजकीय उच्च माधमिक विद्यालय खेड़ली के बालक-बालिकाओं को प्रवचन के माध्यम से आगामी भविष्य में करियर के चुनाव के बहुत से विकल्पों के बारे में चर्चा की। इसके अलावा विद्यार्थियों को तनाव को दूर करने तरीके बताने के साथ देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव का शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान के बारे में बच्चों को जानकारी दी।</p>
<p><strong>पिपलाई और खेड़ली के लोगो को मिला इन श्रमणों का आशीष</strong></p>
<p>समाधि सम्राट आचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज, मुनिश्री विपिन सागर जी महाराज, श्रमण विलक्ष्यसागर जी महाराज, मुनिश्री विभोर सागर जी महाराज, मुनिश्री विशाल सागर जी महाराज, आर्यिका भक्ति भारती माता जी, क्षुल्लक विसोम सागर जी, क्षुल्लिका वात्सल्य भारती माता जी, आस्था जी माताजी का पावन सान्निध्य पिपलाई और खेड़ली के श्रावकों को मिलने के साथ उनका आशीष प्राप्त हुआ जिससे वे इससे बड़े हर्षित हुए।</p>
<p><strong>श्रमणों के विहार में मुख्य कड़ी भूमिका में प्रशासन</strong></p>
<p>अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय के श्रमणों (साधु-साध्वियों) के पैदल विहार एवं उनके ठहरने, निहार एवं उनकी और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करने में सवाईमाधोपुर जिले का प्रशासन महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए देखकर आचार्यश्री विशद सागर जी का संघ बहुत प्रसन्न हुआ। उन्होंने जिले और प्रदेश के निरंतर उन्नति और खुशहाली का आशीष दिया।</p>
<p><strong>गुर्जर समाज का जैन समुदाय ने जताया आभार</strong></p>
<p>आचार्यश्री विशद सागरजी का ससंघ पिपलाई प्रवेश के बाद आहार एवं ठहरने की व्यवस्था खेड़ली गांव में सोन्या गुर्जर और दिलीप गुर्जर के आवास पर की गई और गांव के लोगों ने इसमें बहुत सहयोग दिया। इसके लिए अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय ने गुर्जर समुदाय का आभार माना।</p>
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		<title>मप्र की सीमा पर मुनि श्री सुधासागरजी की होगी अगवानी : मुनिश्री ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के बाद दुधई होते हुए मप्र की ओर कदम बढ़ाए  </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 13:28:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ुनि श्रीसुधासागरजी ने चांदपुर शांतोदय पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के बाद दुधई होते हुए मध्यप्रदेश की ओर कदम बढ़ा दिए है। मुनि श्री प्राचीन तीर्थ क्षेत्र दुधई, जिसका नामकरण श्री समयोदय तीर्थ दुधई (पाली) वालावेट भरचा निवारी होते भानगढ़ (मुंगावली) से कल रविवार को मप्र में भव्य मंगल प्रवेश करने जा रहे हैं। अशोकनगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ुनि श्रीसुधासागरजी ने चांदपुर शांतोदय पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के बाद दुधई होते हुए मध्यप्रदेश की ओर कदम बढ़ा दिए है। मुनि श्री प्राचीन तीर्थ क्षेत्र दुधई, जिसका नामकरण श्री समयोदय तीर्थ दुधई (पाली) वालावेट भरचा निवारी होते भानगढ़ (मुंगावली) से कल रविवार को मप्र में भव्य मंगल प्रवेश करने जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से यह खबर पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर</strong>। मुनि श्रीसुधासागरजी ने चांदपुर शांतोदय पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के बाद दुधई होते हुए मध्यप्रदेश की ओर कदम बढ़ा दिए है। मुनि श्री प्राचीन तीर्थ क्षेत्र दुधई, जिसका नामकरण श्री समयोदय तीर्थ दुधई (पाली) वालावेट भरचा निवारी होते भानगढ़ (मुंगावली) से कल रविवार को मप्र में भव्य मंगल प्रवेश करने जा रहे हैं। अंचल के भक्त भरचा भानगढ़ मुंगावली मार्ग पर अंचल के जैन समाज द्वारा मुनि संघ की भव्य आगवानी की जाएगी। मप्र महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि इसके लिए मुंगावली, अशोक नगर, शाढ़ौरा, बहादुरपुर, बंगला चौराहे के साथ ही खिमलशा, बीना, सागर, खुरई कुरवाई सहित अंचल के भक्तों का मुनि श्री के चरणों में बारंबार निवेदन पहुंच रहा है। मध्यप्रदेश में मंगल प्रवेश पर पूर्व मंत्री राव ब्रजेंद्र सिंह यादव, सांसद प्रतिनिधि मनीष मोदी, जैनसमाज अध्यक्ष चंद्रेश मोदी, अशोक नगर जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल के नेतृत्व में सर्व समाज अगवानी करेंगे।</p>
<p><strong>निर्वाण कल्याणक पर किया लाड़ू समर्पित</strong></p>
<p>इसके पहले शनिवार को सुभाष गंज मंदिर में जैन दर्शन के सत्रहवे तीर्थंकर भगवान श्री कुन्थुनाथ स्वामी का निर्वाण कल्याणक जैन समाज के मंत्री शैलेंद्र श्रागर के मधुर भजनों के साथ मंगलाष्टक के साथ पूरे भक्ति भाव के साथ मनाया। इस दौरान जगत कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। जिसका सौभाग्य राजेश कांसल, कपिल मिर्ची, आनंद कटपीस, निकलेश जैन रिक्कू भारत सहित अन्य भक्तों को मिला। इसके बाद भगवान को निर्वाण कल्याणक पर लाड़ू समर्पित किया गया। जिसका सौभाग्य कुबेर अभिलाषा शैलेंद्र दददा, रिक्कू भारत, कांसल परिवार से संजीव कांसल सहित अन्य भक्तों को मिला। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम इस भावना के साथ महाशांति धारा कर रहे हैं कि श्रमण मुनि श्री सुधासागरजी ससंघ का प्रदेश के साथ अशोक नगर में मंगल अगवान हो।</p>
<p><strong>मुनि श्री ने किया समयोदय तीर्थ दुधई से किया विहार</strong></p>
<p>इस दौरान मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने अति प्राचीन तीर्थ क्षेत्र दुधई तीर्थ का नामकरण समयोदय तीर्थ क्षेत्र किया। इस दौरान मुनि श्री सुधासागरजी ने कहा कि तुम किसी भी वस्तु को पकड़ो मत किसी को छोड़ो मत वह स्वतंत्र है किन्तु आपस में निमित्त नैमेतिक संबंध है। अरिहंतों को भी जन्म लेने के लिए माता-पिता का आश्रय लेना पड़ा। हवा वह रही है आप ऑक्सीजन ले रहे हैं, सूरज निकल रहा है, आप प्रकाश ले रहे हैं। तुम जब किसी से आश्रय लेने जाते हो तो बह तुम्हें दीन समझता है और जब तुम भगवान के पास गुरु के पास आश्रय लेने जाते हो तो वह तुम्हे परम पुण्यशाली परम भव्य मानता है। वह आपको आश्रय लेने वाला नहीं आश्रय देने वाला बना देता है। वह आपको स्वयं की तरह पूज्य बना देता है। अभव्य जीव के भाव कभी भी गुरु और प्रभु से आश्रय लेने के नहीं बनते। इस सभा में बैठा प्रत्येक जीव भव्य और पुण्यशाली है और भगवान बनने की तैयारी में है। बंदे तत् गुण लब्ध ये जो गुण आपने प्राप्त किए हैं वे मेरे अंदर भी आएं।</p>
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		<title>प्राचीन मंदिरों का संरक्षण जीर्णाेद्धार अधिक महत्वपूर्ण : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तीर्थों और मंदिरों की सुरक्षा पर दिया बल  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 08:02:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है लेकिन, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। देश के राज्यों और नगरों में मंदिरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वास्तव में वहां बैठकर आत्म चिंतन करना चाहिए। सुरेश सबलावत के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि भगवान मंदिर में विराजमान हैं। उन्होंने तप, त्याग और साधना से अपने कर्मों का नाश कर अनंत गुण प्राप्त किए लेकिन, हम 5 मिनट भी शांति से बैठकर यह विचार नहीं कर पाते कि हमें अपने जीवन को कैसे सुधारना है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104664" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>सिर्फ मंदिर बनाना ही धर्म नहीं है,मंदिर में समय देकर धार्मिक क्रियाओं, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, तप से आत्मा की ओर लौटना ही सच्चा धर्म है। इसके पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने उपदेश में सुख और दुःख की विवेचना की। मध्यप्रदेश धार जिले के अतिशय क्षेत्र कागदीपुरा में पंच कल्याणक के लिए विहार करने के लिए विनय छाबड़ा, इंजीनियर आशीष जैन, अजित छाबड़ा, श्रेणिक गंगवाल सहित अनेक श्रावकों ने दर्शन कर श्रीफल भेंट किया।</p>
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		<title>पंच कल्याणक में प्रतिदिन 2500 आगंतुक कर रहे प्रसादी ग्रहण : दिगंबर जैन परवार सोशल ग्रुप इंदौर के 15 सदस्यों की टीम कर रही सेवा  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:15:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दलाल बाग छत्रपति नगर में 3 से 9 अप्रैल तक चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आने वाले आगंतुक श्रद्धालुओं के सम्मान में महोत्सव समिति ने प्रतिदिन दोपहर 11 से 2 बजे तक निःशुल्क वात्सल्य भोजन प्रसादी की व्यवस्था की है। महोत्सव स्थल पर निर्मित अस्थाई भोजन शाला में प्रतिदिन 2000 से अधिक आगंतुकप्रसादी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दलाल बाग छत्रपति नगर में 3 से 9 अप्रैल तक चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आने वाले आगंतुक श्रद्धालुओं के सम्मान में महोत्सव समिति ने प्रतिदिन दोपहर 11 से 2 बजे तक निःशुल्क वात्सल्य भोजन प्रसादी की व्यवस्था की है। महोत्सव स्थल पर निर्मित अस्थाई भोजन शाला में प्रतिदिन 2000 से अधिक आगंतुकप्रसादी ग्रहण कर अभिभूत हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दलाल बाग छत्रपति नगर में 3 से 9 अप्रैल तक चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आने वाले आगंतुक श्रद्धालुओं के सम्मान में महोत्सव समिति ने प्रतिदिन दोपहर 11 से 2 बजे तक निःशुल्क वात्सल्य भोजन प्रसादी की व्यवस्था की है। महोत्सव स्थल पर निर्मित अस्थाई भोजन शाला में प्रतिदिन 2000 से अधिक आगंतुकप्रसादी ग्रहण कर अभिभूत हो रहे हैं। महोत्सव के दौरान 6 दिनों में 12 हजार से अधिक आगंतुक वात्सल्य भोज में प्रसादी ग्रहण कर चुके हैं। सुचारू भोजन व्यवस्था के लिए दिगंबर जैन परवार सोशल ग्रुप इंदौर के 15 सदस्यों की टीम लगी है। टीम के प्रमुख संयोजक पंकज पिंकी जैन एमके जैन सीए, देवेंद्र जैन जनता के निर्देशन में संदीप जैन गिन्नी, अरविंद सोधिया, डीके जैन, प्रदीप जैन, आलोक शरद कोल, सुनील जैन नवीन जैन, जितेंद्र जैन आगंतुकों को वात्सल्य से मनुहार पूर्वक भोजन सामग्री परोसने में महती भूमिका निभा रहे हैं। राजेश जैन दादू ने बताया कि त्यागी वृत्तियों एवं महोत्सव के पात्र एवं इंद्र-इंद्राणियों के लिए अलग से शोले के भोजन की व्यवस्था की गई है। जहां प्रतिदिन 200 से अधिक पात्र भोजन ग्रहण करते हैं। ग्रुप के अध्यक्ष दिनेश जैन चेतक, महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजीव जैन बंटी भैया एवं परवार समाज के अध्यक्ष राजेश जैन लारेल एवं महामंत्री राजू अलबेला भी भोजन शाला में भोजन सामग्री आगंतुको को ग्रहण कराते हैं।</p>
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		<title>पंच कल्याणक महामहोत्सव जन्माभिषेक भव्य शोभायात्रा सोमवार को : शोभायात्रा महोत्सव स्थल दलाल बाग से प्रारंभ होगी </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:28:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री विमल सागर जी, मुनि श्री अनंत सागर जी ससंघ के सानिध्य में एवं वाणीभूषण, प्रतिष्ठा सम्राट विनय भैया के कुशल निर्देशन में 6 अप्रैल सोमवार को प्रातःकाल सुबह 6:40 बजे भगवान का अवतरण (जन्म) होगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। आचार्य श्री विद्यासागर जी, नवाचार्य श्री समय सागर जी महाराज के पावन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री विमल सागर जी, मुनि श्री अनंत सागर जी ससंघ के सानिध्य में एवं वाणीभूषण, प्रतिष्ठा सम्राट विनय भैया के कुशल निर्देशन में 6 अप्रैल सोमवार को प्रातःकाल सुबह 6:40 बजे भगवान का अवतरण (जन्म) होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी, नवाचार्य श्री समय सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से मुनि श्री विमल सागर जी, मुनि श्री अनंत सागर जी ससंघ के सानिध्य में एवं वाणीभूषण, प्रतिष्ठा सम्राट विनय भैया के कुशल निर्देशन में 6 अप्रैल सोमवार को प्रातःकाल सुबह 6:40 बजे भगवान का अवतरण (जन्म) होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि तत्पश्चात नित्य क्रियाएं संपन्न होंगी। जन्म के बाद अतिभव्य जन्माभिषेक शोभायात्रा प्रातः ठीक 8 बजे महोत्सव स्थल दलाल बाग से प्रारंभ होगी। महोत्सव अध्यक्ष राजीव जैन बंटी ने बताया कि भव्य शोभायात्रा कालानी नगर चौराहे से होकर पुनः महोत्सव स्थल दलाल बाग पर समाप्त होगी। समाज अध्यक्ष राजेश लारेल ने कहा कि अति भव्य जुलूस में उदयपुर का बैंड, 6 बड़े रथ, 40 बग्गिया, 50 ढोल-नगाड़े,लवाजमा एवं सुप्रसिद्ध संगीतकार रोबिन जैन की स्वर लहरिया गुंजायमान होगी।</p>
<p>राजु अलबेला ने समस्त समाज से आह्वान करते हुए कहा कि आप सभी समाज जन की सहभागिता इस जुलूस को भव्यता में परिवर्तित करेगी। साथ ही आपके पुण्य का वर्धन भी करेगी। शोभायात्रा संयोजक संजय अहिंसा, नवनीत जैन, प्रदीप बल्ला, सुदीप जैन, अखिलेश सोधिया, मुकेश जैन यसबोस, प्रदीप मामा हैं। आयोजक श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन परवार समाज धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट इंदौर हैं।</p>
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		<title>तीर्थंकर भगवान के माता-पिता की हुई गोद भराई : महिलाओं ने भजन-कीर्तन और मंगल गीत गाए </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 13:40:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समीपस्थ दिगंबर जैन मंदिर लार में आयोजित होने वाले श्रीमज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंच कल्याणक मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के तत्वावधान में स्थानीय जैन समाज द्वारा भगवान तीर्थंकर के माता-पिता की गोद भराई की रस्म पूरी की गई। बड़ागांव धसान से पढ़िए, मुकेश जैन लार की यह खबर&#8230; बड़ागांव धसान। समीपस्थ दिगंबर जैन मंदिर लार में आयोजित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>समीपस्थ दिगंबर जैन मंदिर लार में आयोजित होने वाले श्रीमज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंच कल्याणक मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के तत्वावधान में स्थानीय जैन समाज द्वारा भगवान तीर्थंकर के माता-पिता की गोद भराई की रस्म पूरी की गई। <span style="color: #ff0000">बड़ागांव धसान से पढ़िए, मुकेश जैन लार की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ागांव धसान</strong>। समीपस्थ दिगंबर जैन मंदिर लार में आयोजित होने वाले श्रीमज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंच कल्याणक मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के तत्वावधान में स्थानीय जैन समाज द्वारा भगवान तीर्थंकर के माता-पिता की गोद भराई की रस्म पूरी की गई।</p>
<p>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में भगवान तीर्थंकर के माता-पिता बनने का परम सौभाग्य शोभा जैन, सवाई चौधरी ज्ञानचन्द्र जैन को प्राप्त हुआ। जैन समाज की महिलाओं ने भजन-कीर्तन के साथ मंगल गीत गाए। साथ ही नारियल, काजू, बादाम, किशमिश, मखाने एवं मावा से भगवान के माता-पिता की गोद भराई की। रस्म बड़े ही भक्ति भाव उल्लासपूर्वक की गई एवं तिलक, पगड़ी व शॉल पहनाकर सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय जैन मंदिर में किया गया।</p>
<p><strong>यह मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर नरेन्द्र जैन, दिनेश जैन, कमलकुमार शास्त्री, वीरेंद्र जैन, पवन जैन, संतोष सेठ, महेन्द्र दद्दा, डॉ शिखरचंद्र जैन, पुष्पेंद्र सिंघई, दयाचंद्र जैन, नीरज वेद सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रचारमंत्री मुकेश जैन ने बताया कि 28 मार्च से 2 अप्रैल तक होने वाले श्रीमज्जिनेन्द्र जिन बिम्ब पंच कल्याणक मानस्तम्भ प्रतिष्ठा, गजरथ महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ की तैयारी जोरों पर शुरू हो गई है।</p>
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		<title>पंच कल्याणक मेला और मनोरंजन स्थल नहीं हैं : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दी मंगल देशना </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/panch_kalyanak_is_not_a_fair_or_a_place_of_entertainment/</link>
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		<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 16:38:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति माताजी, गणनी आर्यिका श्री स्वस्तीभूषण माताजी संघ सहित 42 साधुओं के संघ सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ गरिमामय पूर्ण हुआ। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति माताजी, गणनी आर्यिका श्री स्वस्तीभूषण माताजी संघ सहित 42 साधुओं के संघ सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ गरिमामय पूर्ण हुआ। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति माताजी, गणनी आर्यिका श्री स्वस्तीभूषण माताजी संघ सहित 42 साधुओं के संघ सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ गरिमामय पूर्ण हुआ। एडवोकेट सुधीर अध्यक्ष, हेमंत सोगानी मंत्री, राजकुमार कोठारी कोषाध्यक्ष ने बताया कि रविवार को प्रात: श्रीजी का अभिषेक पूजन के बाद श्री ऋषभदेव को केवलज्ञान के बाद प्रात निर्वाण मोक्ष हुआ। मोक्ष कल्याणक के बाद अग्नि कुमार देव द्वारा सत्कार विधि, दीक्षार्थी मुन्नालाल की दीक्षा,125 फिट के नव निर्मित शिखर पर कलश और ध्वज का आरोहण, 111 फिट की धर्म ध्वजा की स्थापना, नूतन चौबीसी पर अभिषेक हुआ। सुरेश सबलावत ने बताया कि धर्म सभा में सुप्रसिद्ध भामाशाह श्रेष्ठि अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी,आरके मार्बल किशनगढ़, राजेंद्र कटारिया, राजेश शाह ने भगवान श्री पदम प्रभ और प्रथमाचार्य शांति सागर जी के चित्रों का अनावरण, दीप प्रज्वलन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की।</p>
<p><strong>संसारी प्राणी की भांति गर्भ में आते हैं</strong></p>
<p>इस अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गर्भकल्याणक से प्रारंभ हुई। रविवार को भगवान को मोक्ष हो गया। तीर्थंकर भगवान भी हमारे ही तरह संसारी प्राणी की भांति गर्भ में आते हैं। जन्म लेते हैं, राज्य का संचालन भी करते हैं और निमित पाकर वैराग्य संयम धारण कर आत्मा पर लगे। कर्मों को तप ,ध्यान रूपी अग्नि से भस्मीभूत नष्ट कर गुण स्थान में बढ़ते हुए केवल ज्ञान प्राप्त कर शेष 85 कर्म प्रकृति नष्ट कर 14 गुण स्थान से सिद्ध हो जाते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्री आदिनाथ भगवान सहित सभी 24 तीर्थंकरों के निर्वाण पर प्रकट किए।</p>
<p><strong>नूतन चौबीसी पर प्रतिमाएं विराजित की</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे बताया कि आज बालब्रह्मचारी श्री मल्लीनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस है। पूज्य होने से पूज्यता को प्राप्त होते है। 70 से 100 की उम्र होने पर भी वैराग्य के भाव परिणाम नहीं होते हैं। पंच कल्याणक मेला या मनोरंजन स्थल नहीं हैं। जीवन में परिवर्तन लाने से, जीवन धर्ममय होने से जीवन सार्थक होगा। सुरेश सबलवात के अनुसार भगवान के मोक्ष कल्याणक के बाद अग्नि कुमार देव द्वारा सत्कार विधि, दीक्षार्थी मुन्नालाल की दीक्षा, 125 फिट के नव निर्मित शिखर पर कलश ओर ध्वज का आरोहण देश के प्रसिद्ध भामाशाह श्रेष्ठि अशोक, सुरेश, विमल सुशीला, शांता, तारिका पाटनी आरके मार्बल किशनगढ़ ने किया। 111 फिट की धर्म ध्वजा की स्थापना ताराचंद जैन पोल्याका सुनील, नीलम परिवार ने की। श्री जी की रथ यात्रा के बाद नूतन चौबीसी पर पुण्यार्जक परिवारों ने प्रतिमाएं विराजित की।</p>
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		<title>पदमपुरा में 18 फरवरी से पंच कल्याणक की तैयारियां : धार्मिक कार्यक्रम की समितियों को दी जिम्मेदारी  </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:30:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा( जयपुर)। प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>पदमपुरा( जयपुर)।</strong> प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। नूतन चौबीसी की मंगल प्रेरणादाता आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण जी भी विराजित हैं। अध्यक्ष सुधीर जैन दौसा, मानद मंत्री हेमंत सोगानी, और कोषाध्यक्ष राजकुमार कोठारी ने बताया कि श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा की प्रबंध समिति</p>
<p>के तत्वावधान में पंच कल्याणक होगा। सुचारू कार्य व्यवस्था के लिए श्री पदमपुरा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन किया गया है।</p>
<p><strong>समितियों में इन समाजजनों को दी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>पदमपुरा पंचकल्याणक महोत्सव के लिए सुधीर जैन को समारोह अध्यक्ष, हेमंत सोगानी को महामंत्री, राजकुमार कोठारी को संयोजक,न्यायाधिपति नरेंद्र जैन को स्वागत समिति,मंदिर निर्माण समिति में राजकुमार कोठारी, साधुओं की आहार व्यवस्था समिति में महावीर प्रसाद पाटनी, सुरेश सबलावत को प्रचार-प्रसार एवं प्रकाशन समिति का संयोजक बनाया गया है। सुरेश सबलावत प्रचार-प्रसार संयोजक ने बताया कि इसकेअतिरिक्त वित्त, कलश आबंटन, वित्तीय प्रबंधन लेखा, पांडाल, आवास, मंदिर, भोजन , जल,विद्युत, सुरक्षा, भंडार ,पूजन निर्माण,चिकित्सा ,सांस्कृतिक कार्यक्रम , यातायात, पार्किंग, कार्यालय,जुलूस, प्रदर्शनी इन्द्र व्यवस्था, मंच माइक संचार व्यवस्था सहित अनेक समिति गठित कर उनके सदस्य मनोनीत किए गए हैं।</p>
<p><strong>महोत्सव के लिए पात्रों का चयन किया</strong></p>
<p>मंदिर समिति के राजकुमार कोठारी ने बताया कि श्री पदमप्रभ भगवान की खड़गासन प्रतिमा के पास नवनिर्मित 24 तीर्थंकरों की चौबीसी, नूतन शिखर का निर्माण हो चुका है। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी (32 पिच्छी)के प्रमुख निर्देशन में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी( 5 पिच्छी) एवं अन्य संघ सानिध्य में संहितासुरी पंडित हंसमुख शास्त्री धरियावद द्वारा धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नव निर्मित शिखर पर कलश एवं ध्वजा आरोहण भामाशाह अशोक सुशीला पाटनी, सुरेश, शांता, विमल तारिका पाटनी आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ द्वारा किया जाएगा। पंच कल्याणक के लिए महावीर शशि पहाड़िया को माता-पिता, सुरेंद्र जैन पांड्या मृदुला जैन सौधर्म इंद्र, पारस पूजा पाटनी कुबेर इंद्र सहित अनेक पात्रों का चयन हो गया है।</p>
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		<title>अंतरराष्ट्रीय जैन महाकुंभ 27 आचार्य महाश्रमण का महाराष्ट्र में समागम: नासिक स्थित मांगीतुंगी के मध्य णमोकार महातीर्थ पर होगा पंच कल्याणक और महामस्ताभिषेक  </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:26:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव होगा। जनमंगलकारी महातीर्थ णमोकार तीर्थ जहाँ युगों की अखंड साधना, अनंत आस्था,और संस्कारों का दिव्य संगम और त्याग की भूमि, जहां प्रत्येक शिला जिनवाणी का संदेश देती है। नासिक से पढ़िए, राजीव सिंघाई की यह रिपोर्ट&#8230; नासिक। महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव होगा। जनमंगलकारी महातीर्थ णमोकार तीर्थ जहाँ युगों की अखंड साधना, अनंत आस्था,और संस्कारों का दिव्य संगम और त्याग की भूमि, जहां प्रत्येक शिला जिनवाणी का संदेश देती है। <span style="color: #ff0000">नासिक से पढ़िए, राजीव सिंघाई की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नासिक।</strong> महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव होगा। जनमंगलकारी महातीर्थ णमोकार तीर्थ जहाँ युगों की अखंड साधना, अनंत आस्था,और संस्कारों का दिव्य संगम और त्याग की भूमि, जहां प्रत्येक शिला जिनवाणी का संदेश देती है। जहां हर दिशा में संतों के आशीर्वाद की सुगंध बिखरती है। जहां हर शिला में श्रद्धा बसती है। जहां हर मार्ग धर्म की ओर ले जाता है।</p>
<p><strong>इन आचार्यों और साधुओं को सानिध्य मिलेगा </strong></p>
<p>यह दिव्य पावन धरा पर पाषाण को पूज्य बनाने का अनुष्ठान आचार्य श्री कुंथुसागर जी महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री देवनंदी जी महाराज, णमोकार तीर्थ प्रणेता के निर्देशन, मुनिश्री अमोघकीर्ति जी एवं मुनिश्री अमरकीर्ति जी के मार्गदर्शन में आचार्य परमेष्टि अभी‌‌क्ष्ण ज्ञानोपयोगी चारों दिशाओं से चार सौ से अधिक महाश्रमण, आचार्य श्री पुष्पदंतसागर जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री पद्मनंदी जी, आचार्य श्री गुणधरनंदी जी, आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी, आचार्य श्री सिद्धांतसागर जी, आचार्य श्री विनम्रसागर जी, आचार्य श्री प्रसन्नऋषि जी महाराज,आचार्य श्री डॉ प्रणाम सागर जी,आचार्यश्री सुविधिसागरजी, आचार्य श्री कुमुदनंदी जी, आचार्य श्री विद्यानंदी जी, आचार्य श्री तीर्थनंदी जी, आचार्य श्री गुलाबभूषण जी,आचार्य श्री श्रुतधरनंदीजी, आचार्य श्री गुणभद्रनंदी जी, आचार्य श्री सूर्यसागर जी, आचार्य श्री सुयशगुप्ती जी, आचार्य श्री दयाऋषी जी, उपाध्याय श्री विरंजनसागर जी, उपाध्याय श्री विभंजनसागर जी, क्षुल्लक श्रीसमर्पण सागर जी, क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी, योगभूषण जी, आर्यिका श्री सौभाग्यमती माता जी, आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी ससंघ 27 आचार्य संघों का समागम, श्री भट्टारक चारुकीर्ति जी श्रवणबेलगोला कर्नाटक, श्री भट्टारक जिनसेन जी नांदनी महा श्री भट्टारक चारूकीर्ति जी मूडबद्र कर्नाटक, स्वस्तिश्री रविन्द्र कीर्ति स्वामी जी सहित वृहद पावन सान्निध्य एक साथ एक मंच पर मुनिराजों के दर्शन करने का सौभाग्य मिलेगा। और ,बा.ब्र. वैशाली दीदी द्वारा वृहद संयोजन, प्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक नीलम अजमेरा, संतोष पैंढारी नागपुर की अध्यक्षता रहेगी। जहां तीर्थंकर भगवान के जन्म, दीक्षा,तप केवलज्ञान, निर्वाण जैसे जीवन-कल्याणकारी प्रसंग विधिपूर्वक सम्पन्न होंगे। भक्तों के प्रत्येक क्षण जिनशासन के प्रति समर्पण से साकार हो रहा।</p>
<p><strong>इस तरह रहेंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>6 से 25 फरवरी तक पावन महामहोत्सव का हिस्सा बनें। दीक्षार्थीयों की बिनोली 5 तारीख को शाम 7 बजे जलूस निकलेगा। प्रतिष्ठानायक 351 जिनबिंब का 6 तारीख को सुबह 8 बजे श्री मंगल कलश यात्रा 7 तारीख को सुबह 10 बजे घटयात्रा 1008 कलशों के साथ, जन्माभिषेक भव्य जुलूस 8 तारीख को सुबह 10.30 बजे एवं 13 फरवरी को सुबह 9.30 बजे भव्य जिनबिंब रथयात्रा, आपकी उपस्थिति मानवता के महामंगल का निमित्त बनेगी। ऐसा हम सभी का परम विश्वास है।</p>
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