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	<title>पंच कल्याणक महा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>पंच कल्याणक महा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पंच कल्याणक महा महोत्सव इससे होती है पुण्य की प्राप्ति : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बोली में मुनियों की जन्म स्थली को पुण्यधरा बताया  </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 14:08:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंच कल्याणक प्रतिष्ठा सामान्य कार्यक्रम नहीं होकर महा महोत्सव होता है। जिसमें नर को नारायण, पाषाण को भगवान बनाया जाता है। पंचकल्याणक कार्यक्रम से संस्कार प्राप्त होते हैं तथा सभी को पुण्य की प्राप्ति होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, मुनिश्री भुवनसागर जी की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा सामान्य कार्यक्रम नहीं होकर महा महोत्सव होता है। जिसमें नर को नारायण, पाषाण को भगवान बनाया जाता है। पंचकल्याणक कार्यक्रम से संस्कार प्राप्त होते हैं तथा सभी को पुण्य की प्राप्ति होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, मुनिश्री भुवनसागर जी की जन्मस्थली बोली नगर में प्रवेश के अवसर दी। <span style="color: #ff0000">बोली से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बोली।</strong> पंच कल्याणक प्रतिष्ठा सामान्य कार्यक्रम नहीं होकर महा महोत्सव होता है। जिसमें नर को नारायण, पाषाण को भगवान बनाया जाता है। पंचकल्याणक कार्यक्रम से संस्कार प्राप्त होते हैं तथा सभी को पुण्य की प्राप्ति होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, मुनिश्री भुवनसागर जी की जन्मस्थली बोली नगर में प्रवेश के अवसर दी। उन्होंने कहा कि नगर के मूल नायक सिर्फ पारसनाथ भगवान का आशीर्वाद सेवा भक्ति का फल था कि यहां के धर्मात्मा जीव को पारसनाथ भगवान के पंचकल्याणक में साधु परमेष्ठी बनने का सौभाग्य मिला। आपके नगर के सुरेश चंद शाह दीक्षा लेकर मुनि श्री भुवन सागर जी बने। इसके पूर्व इनके गृहस्थ अवस्था के पुत्र महेंद्र भी मुनि श्री हितेंद्र सागर जी होकर संघ में विद्यमान हैं।</p>
<p><strong>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा 28 नवंबर से </strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि 3 वर्ष पूर्व दिसंबर माह में संघ का बोली आगमन हुआ था तब अनायास संघ के मुनि श्री श्रेयस सागर जी की समाधि हुई। लोकेश गजराज टोंक के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि 3 वर्ष पूर्व पीपल्दा के प्राचीन मंदिर की स्थिति देखकर बहुत पीड़ा हुई थी। संघ के आशीर्वाद और प्रेरणा से 3 वर्षों में नया मंदिर बनकर तैयार हो गया है। जिसकी पंच कल्याणक प्रतिष्ठा 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक होगी। पंच कल्याणक कार्यक्रम संपूर्ण सवाई माधोपुर जिले का हैं सभी को शक्ति और भक्ति अनुसार योगदान देना चाहिए।</p>
<p><strong>मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बचपन की अनेक यादें साझा की </strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि 900 वर्ष से ज्यादा प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कर नवीन मंदिर की प्रतिष्ठा हमारे द्वारा कराई गई। अनेकों प्रतिष्ठा में यह पहली बार होगी। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री भुवन सागर जी एवं मुनि श्री हितेंद्र सागर जी के प्रवचन हुए। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बचपन की अनेक यादें संस्मरण को साझा कर बताया कि श्री भुवन सागर जी महाराज को वैराग्य का बीजारोपण प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी के दर्शन से हुआ। वह धरा पुण्यशाली होती है, जहां साधु परमेष्ठी का जन्म होता है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र को धारण करने से मोक्ष मार्ग मिलता है।</p>
<p><strong>मंगलाचरण महिला मंडल ने किया </strong></p>
<p>समाज अध्यक्ष बाबूलाल शाह सुनीता शाह एवं महेश मित्तल ने बताया कि आचार्य श्री संघ के प्रवचन के पूर्व श्री पारसनाथ भगवान एवं आचार्य श्री शांति सागर जी तथा सभी पूर्वाचार्य के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन का सौभाग्य बाहर से आए अतिथियों एवं मंदिर समिति ने किया। मंगलाचरण महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन और जिनवाणी भेंट का सौभाग्य को प्राप्त हुआ। आहार चर्या के बाद दोपहर को आचार्य श्री संघ का पीपल्दा के लिए 7 किमी मंगल विहार कर रात्रि विश्राम हंसराज मीणा के मकान के पास हुआ। 24 नवंबर को संघ की आहार चर्या यही होगी।</p>
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		<title>राहतगढ़ में पंच कल्याणक महा महोत्सव 27 नवंबर से : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने सफलता के लिए सार्थकता और नैतिकता जरूरी बताई  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 11:07:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। अवधपुरी से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति को सबसे पहले अपनी कमियों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति अपने दायित्वों को सही ढंग से निभाता है, तभी जीवन सार्थक होता है। उन्होंने पिता के कर्तव्यों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब आप पिता बनते हैं, तो आपके ऊपर बहुत-सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। बच्चों को संस्कारित बनाना, उन्हें उत्तम शिक्षा दिलाना और सेवा-भाव जगाना यही सच्चे पिता का धर्म है।</p>
<p><strong>श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता</strong></p>
<p>एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने कहा सरलता को समझने के लिए व्यक्ति का भीतर और बाहर दोनों से सरल होना आवश्यक है। जिसका जीवन खुली किताब की तरह होता है, उसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने श्रद्धा और समर्पण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता, बल्कि वह समर्पण के भाव से भरकर काम को त्वरित गति से करती है। युवाओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए पहले लक्ष्य बनाओ, फिर पुरुषार्थ जगाओ, और पुरुषार्थ में कभी कमी मत आने दो। हमारा पुरुषार्थ तभी फलता है जब हम उसे पूरी शक्ति और निष्ठा से करते हैं।</p>
<p><strong>गुरु को हृदय में स्थान दो, सदा तुम्हारे साथ रहेंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ इन दिनों अवधपुरी में विराजमान हैं। 27 नवंबर से राहतगढ़ में श्री 1008 भगवान जिनेंद्र के पंच कल्याणक महा महोत्सव का आयोजन ससंघ सान्निध्य में होगा। जिसके लिए शीघ्र ही मुनिसंघ का विहार राहतगढ़ की ओर संभावित है। गुरुकुलम् के 180 छात्र मुनि श्री के सान्निध्य में रह रहे हैं, उनके संभावित विहार से भावुक दिखाई दिए। मुनि श्री ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु से राग होना अच्छा है, लेकिन मोह नहीं होना चाहिए। साधु आपके पास कुछ समय के लिए आते हैं, फिर उन्हें आगे बढ़ना ही होता है। गुरु को हृदय में स्थान दो, तो वे सदा तुम्हारे साथ रहेंगे। उन्होंने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने गुरुकुल तथा गुरुदेव की मान-मर्यादा का सदैव ध्यान रखें।</p>
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