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	<title>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>नीलांजना की आकस्मिक मृत्यु देख हुआ वैराग्य लिया दीक्षा का निर्णय : मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने सुनाई भगवान के वैराग्य की कथा </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 12:35:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ नीलांजना का दृश्य देखा, उसकी आकस्मिक मृत्यु और संसार की असारता का भान हुआ, तब प्रभु ने दीक्षा लेकर वन की ओर गमन किया। ये उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दीक्षा कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। नीलांजना का दृश्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> नीलांजना का दृश्य देखा, उसकी आकस्मिक मृत्यु और संसार की असारता का भान हुआ, तब प्रभु ने दीक्षा लेकर वन की ओर गमन किया। ये उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दीक्षा कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> नीलांजना का दृश्य देखा, उसकी आकस्मिक मृत्यु और संसार की असारता का भान हुआ, तब प्रभु ने दीक्षा लेकर वन की ओर गमन किया। ये उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दीक्षा कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किए।मुनि श्री ने बर्रो वाले बाबा के नए मंदिर में प्रवेश की घटना को कुंडलपुर के बड़े बाबा मंदिर की ऐतिहासिक घटना से जोड़ते हुए कहा कि जब बर्रो वाले बाबा को क्रेन के माध्यम से उठाने का प्रयास किया जा रहा था, तब दोपहर तीन बजे से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन बाबा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुए।समय लगभग पाँच बजे का हो रहा था, तभी एक अनजान व्यक्ति ने आकर उनके कान में कहा कि बर्रो वाले बाबा केवल आचार्य विद्यासागर जी की ही बात सुनते हैं, उन्हें स्मरण करो। मुनि श्री ने बताया कि जैसे ही उन्होंने आचार्य गुरुदेव का स्मरण किया, उसी क्षण बाबा अपने आसन से हिल गए और उनका गगन विहार प्रारंभ हो गया। यह दृश्य उसी प्रकार था जैसा कुंडलपुर में बड़े बाबा के गगन विहार के समय देखने को मिला था। इस अद्भुत दृश्य को केवल विदिशा के श्रद्धालुओं ने ही नहीं, बल्कि यूट्यूब चैनलों के माध्यम से हजारों लोगों ने भी देखा।</p>
<p><strong>बाबा की छवि कुछ अलग ही दिखाई दे रही थी</strong></p>
<p>जब सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ रहा था,उसी समय बर्रो वाले बाबा नए मंदिर में प्रवेश कर रहे थे। उस समय बाबा की छवि कुछ अलग ही दिखाई दे रही थी। मुनि श्री ने कहा कि पंचकल्याणक के प्रारंभिक दो दिनों गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक में भक्ति का उतना सैलाब नहीं आता, लेकिन बर्रो वाले बाबा के गगन विहार के बाद श्रद्धालुओं की भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। जिस दृश्य को देखने के लिए लोग वर्षों से उत्सुक थे, वह दृश्य सभी को देखने को मिला और उस भक्ति भाव को सभी ने अपने अंतर्मन में संजो लिया।</p>
<p><strong>अनगिनत अदृश्य भक्त भी वहां उपस्थित थे</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि इतने कम समय में सभी कार्य निरंतर और निर्विघ्न गुरुदेव के आशीर्वाद से आगे बढ़ रहे हैं। गुरुदेव हमेशा कहते थे कि अपना कर्तव्य करते रहो, यह मत सोचो कि हम ही कार्य करने वाले हैं। बड़े बाबा के भक्त केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देव भी हैं, जो ऐसे आयोजनों को सफल बनाने में अदृश्य रूप से सहयोग करते हैं।मुनि श्री ने कहा कि बर्रो वाले बाबा के भक्त तो दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनके अनगिनत अदृश्य भक्त भी वहां उपस्थित थे, जिन्होंने इस कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।</p>
<p><strong>भगवान के दीक्षा कल्याणक की पूजा कराई</strong></p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि जब सुबह नए मंदिर में जाकर बर्रो वाले बाबा के दर्शन किए, तो ऐसा लगा मानो बाबा मुस्करा रहे हों। नए मंदिर में उनकी मुस्कान कुछ अलग ही प्रतीत हो रही थी। अभी बाबा अकेले विराजमान हैं, लेकिन पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के बाद नव प्रतिष्ठित सभी भगवान भी उनके साथ समवसरण में विराजित होंगे।मुनि श्री ने कहा कि वे यहां केवल पंद्रह दिन के लिए समवसरण मंदिर की &#8216;चाबी&#8217; रखने आए थे लेकिन, गुरुदेव के आशीर्वाद से जो कार्य अधूरे थे, वे सभी पूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं और बर्रो वाले बाबा का नए मंदिर में विराजमान होना उनके लिए अत्यंत सुखद अनुभूति है।इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर जी महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर जी महाराज मंचासीन थे।</p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया एवं तरुण भैया (इंदौर) ने भगवान के दीक्षा कल्याणक की पूजा कराई।</p>
<p><strong> मुनिसंघ के चरणों में श्रीफल अर्पित किया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि दीक्षा कल्याणक के अवसर पर जबलपुर से श्राविका आश्रम की कई बहनें उपस्थित हुईं। उन्होंने मुनिसंघ के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दोपहर में आदिकुमार की बारात, राजपाट, राज्य व्यवस्था और प्रजा पालन के दृश्य प्रस्तुत किए गए। इसी दौरान राजदरबार में स्वर्ग की अप्सरा नीलांजना का नृत्य चल रहा था। नृत्य करते-करते अचानक उसकी आयु पूर्ण हो जाती है। देवताओं ने रंग में भंग न हो इसलिए तुरंत दूसरी नर्तकी भेज दी लेकिन, आदिकुमार संसार की असारता समझकर वैराग्य को प्राप्त हो जाते हैं।</p>
<p>वन गमन के दृश्य के पश्चात विधीनायक प्रतिमा पर मुनि श्री द्वारा संस्कार संपन्न किए गए। पंच कल्याणक के पात्र, कलाकारों की टीम और संगीत के साथ इन दृश्यों की प्रस्तुति प्रतिष्ठाचार्य के निर्देशन में की गई, जिसे देखकर उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।</p>
<p><strong>रविवार को केवल ज्ञान कल्याणक होगा</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि 15 मार्च (रविवार) को केवलज्ञान कल्याणक मनाया जाएगा। प्रातःकाल मुनि आदिकुमार की आहारचर्या संपन्न होगी तथा मध्याह्न में भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति के साथ समवसरण की रचना होगी। समवसरण में मुनिसंघ विराजमान होगा और भगवान की दिव्य वाणी सभी दिशाओं में प्रसारित होगी। पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष राजेश बोहरा, महामंत्री अनिरुद्ध सराफ, कोषाध्यक्ष अभय वैद्य, अनिल हजारी, स्वागताध्यक्ष संजय सेठ, दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष बड़ू चौधरी, शीतलधाम के अध्यक्ष सचिन वसंत जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय भंडारी एवं महामंत्री मोहन जैन ने विदिशा नगर के सभी श्रद्धालुओं से रविवार को केवल ज्ञान कल्याणक एवं सोमवार को अंतिम दिवस मोक्ष कल्याणक के अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की है।</p>
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		<title>मंदिर में जारी मंत्र अनुष्ठान का दिखा दिव्य प्रभाव : भगवान शांतिनाथ के छत्र अपने आप हिलने लगे </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 09:44:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में चल रहे 16 दिवसीय जाप अनुष्ठान के दौरान रात्रि बेला में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भगवान 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के ऊपर स्थापित छत्र अपने आप हिलने लगे, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंत्र अनुष्ठान की दिव्य ऊर्जा का प्रभाव बताया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में चल रहे 16 दिवसीय जाप अनुष्ठान के दौरान रात्रि बेला में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भगवान 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के ऊपर स्थापित छत्र अपने आप हिलने लगे, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंत्र अनुष्ठान की दिव्य ऊर्जा का प्रभाव बताया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> नगर में चल रहे 16 दिवसीय जाप अनुष्ठान के दौरान रात्रि बेला में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। भगवान 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के ऊपर स्थापित छत्र अपने आप हिलने लगे, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंत्र अनुष्ठान की दिव्य ऊर्जा का प्रभाव बताया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य श्री समय सागर जी के शिष्य मुनि श्री 108 निष्पक्ष सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 निस्पृह सागर जी महाराज की प्रेरणा से नगर में भगवान शांतिनाथ के समक्ष प्रतिदिन लगभग 12 घंटे का दिव्य मंत्र जाप अनुष्ठान किया जा रहा है।</p>
<p>इस अनुष्ठान में नगर के युवा, बच्चे, महिलाएँ और सभी समाज बंधु बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। देर रात 1 बजे तक श्रद्धालु इस पावन अनुष्ठान में मंत्र जाप कर अपनी आध्यात्मिक आहुति प्रदान कर रहे हैं।</p>
<p>इसी दौरान रात्रि लगभग 10 बजे से 12 बजे के बीच भक्तों ने देखा कि भगवान के ऊपर स्थापित छत्र अपने आप हिलने लगे। प्रारंभ में कुछ लोगों को विश्वास नहीं हुआ और यह अनुमान लगाया गया कि शायद पंखों या हवा के कारण ऐसा हो रहा होगा लेकिन, जब मंदिर के पंखे बंद कर दिए गए, तब भी छत्र का हिलना जारी रहा।</p>
<p>इसके बाद वहाँ उपस्थित धर्मनिष्ठ श्रावक, हाल ही में संपन्न पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में भगवान के पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले जयकुमार जैन शुद्ध वस्त्र धारण कर मंदिर के गर्भ गृह में पहुँचे। उन्होंने स्वयं इस दृश्य को करीब से देखा और उसका वीडियो भी बनाया । उन्हीं के साथ उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी इसे स्पष्ट रूप से अनुभव किया। श्रद्धालुओं का मानना है कि जब भक्ति, आराधना और मंत्र जाप शुद्ध भावनाओं एवं दिव्य तरंगों के साथ किया जाता है तो उसका प्रभाव पंचम काल में भी प्रकट होता है। यह घटना उसी का एक जीवंत उदाहरण मानी जा रही है।</p>
<p>धर्मप्रेमियों का विश्वास है कि संतों का आशीर्वाद, गुरुजनों की प्रेरणा और समाज का सामूहिक सहयोग जब एक साथ जुड़ता है, तब उसकी शुद्ध ऊर्जा दिव्य प्रभाव उत्पन्न करती है। यह घटना इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि जिस पवित्र उद्देश्य से यह अनुष्ठान प्रारंभ हुआ है, वह निश्चित ही निर्विघ्न और अत्यंत मंगलमय रूप से संपन्न होगा।</p>
<p>इस प्रकार की दिव्य अनुभूतियाँ समाज में धर्म, आस्था और श्रद्धा को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य करती हैं।</p>
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		<title>वर्धमान सोसायटी महावीर स्वामी जिनालय का प्रथम पाटोत्सव : शिखर पर किया ध्वज परिवर्तन  </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 09:52:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के एक वर्ष पूर्व होने के उपलक्ष में शनिवार को प्रातः सकल जैन समाज के संयोजन में प्रथम पाटोत्सव मनाया गया। पढ़िए, यह खबर&#8230; सागवाड़ा। पुनर्वास कॉलोनी मडकोला बस स्टैंड के समीप स्थित वर्धमान सोसायटी के भगवान महावीर स्वामी जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के एक वर्ष पूर्व होने के उपलक्ष में शनिवार को प्रातः सकल जैन समाज के संयोजन में प्रथम पाटोत्सव मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> पुनर्वास कॉलोनी मडकोला बस स्टैंड के समीप स्थित वर्धमान सोसायटी के भगवान महावीर स्वामी जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के एक वर्ष पूर्व होने के उपलक्ष्य में शनिवार को प्रातः सकल जैन समाज के संयोजन में धनराज गोवाडिया परिवार द्वारा प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया के तत्वावधान में मूलनायक जैन आगम की वर्तमान चौबीसी के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का विविध द्रव्य पूरित कलशों से महाभिषेक कर विश्व शांति कामनार्थ शांतिधारा की गई। इसके बाद अष्ट द्रव्य से भगवान की पूजा कर अर्घ्य समर्पित किए गए।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में जिनालय के शिखर पर प्रतिष्ठाचार्य पगारिया के मंत्रोच्चारण के साथ वैभव गोवाडिया रौनक गोवाडिया द्वारा ध्वजदण्ड पर ध्वजा परिवर्तित की गई। इस अवसर पर पवन गोवाडिया, नरेंद्र, अमित, वंश, जश, मौर्य गोवाडिया, देवेंद्र शाह, नलिनी, दिया, शिवानी, रंजना गोवाडिया, पूजा पगारिया समेत अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।</p>
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		<title>ध्वजारोहण घटयात्रा से हुआ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा- गर्भ के संस्कार ज्ञान से जीवन का निर्माण होकर निर्वाण होता हैं  </title>
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		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 17:13:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा जयपुर।</strong> प्रतिमा चाहे पाषाण,या रत्न रन की हो, उसमें भगवान के गुणों का संस्कार का आरोपण किए जाते हैं। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के समय भोग भूमि थी। बाद में कर्म भूमि प्रारंभ हुई। श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। आचार्य श्री ने आगे कहा कि माता जब संस्कारित होगी तभी वह बच्चों को संस्कारित कर सकती है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने गर्भस्थ शिशु को रात्रि भोजन त्याग के उदाहरण से बताया कि माता के गर्भ में दिए धार्मिक ज्ञान संस्कार से ही तीर्थंकर,मुनि, महापुरुष और लौकिक एडवोकेट, डाॅक्टर, सीए इंजीनियर बनते हंै।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100297" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-200x300.jpg" alt="" width="200" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-768x1152.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-1024x1536.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032-990x1485.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0032.jpg 1066w" sizes="(max-width: 200px) 100vw, 200px" /></p>
<p><strong>पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने बताया कि तीर्थंकर कुल, जैन धर्म, उच्च मनुष्य गति में माता के विचार, भाव खानपान अच्छा होना चाहिए। गर्भपात कराने के दुष्परिणाम होते हैं। प्राचीन पदमप्रभ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा बाड़ा मंदिर में नूतन चैबीसी का पंच कल्याणक, विश्वशांति महायज्ञ एवं पदम वल्लभ नूतन शिखर पर कलश एवं ध्वज आरोहण कार्यक्रम प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी परंपरा के आचार्य श्री धर्मसागर जी से सन 1969 में दीक्षित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित अनेक साधुओं के पावन सानिध्य में 5 दिवसीय पंच कल्याणक महा महोत्सव बुधवार से शताधिक महिलाओं की कलश घटयात्रा, ध्वजारोहण, भूमि शुद्धि, मंडप उद्घाटन मंगल श्री जी विराजमान मंगल कलश स्थापना, अभिषेक पूजन समस्त आचार्य आर्यिका संघ के मंचासीन होने पर प्रारंभ हुआ। एडवोकेट सुधीर, हेमंत सोगानी, सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित हसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में पांच दिवसीय आयोजन में भगवान के पांच कल्याणकों के माध्यम से पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी। बुधवार को प्रातः विशाल घटयात्रा अहिंसा सर्कल से निकाली गई। जिसमें जिनेंद्र प्रभु को प्रतिमा के साथ अश्व, हाथी, बैंड,108 मंगल कलश के साथ हजारों श्रावकगण नगर के मुख्य मार्गो से होकर प्रतिष्ठा स्थल मैदान में बने अयोध्या नगरी नाभिराय पांडाल में पहुंचे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100298" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-200x300.jpg" alt="" width="200" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-768x1152.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-1024x1536.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031-990x1485.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0031.jpg 1066w" sizes="(max-width: 200px) 100vw, 200px" /></p>
<p><strong>इन सौभाग्यशालियों ने लिया धर्मलाभ </strong></p>
<p>ध्वजारोहणकर्ता पुष्पा, विवेक आशा काला जयपुर परिवार ने ध्वजारोहण किया। पांडाल उदघाटन सुधांशु ऋतु कासलीवाल परिवार ने किया। मंगलाचरण कीर्ति दीदी ने किया। चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन कमल,नरेश चांदवाड परिवार, मंगल कलश स्थापना शकुंतला, अशोक परिवार ने किया। हेमंत सोगानी ने स्वागत उद्बोधन में मंदिर का प्राचीन इतिहास बताया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री, मनोज शास्त्री, पंडित भागचंद, पंडित विशाल का सम्मान किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी नेमिचंद्र छाबड़ा नलवाड़ी परिवार ने भेंट की। इस परिवार को संपूर्ण पंच कल्याणक की पूजन सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य भी मिला हैं। मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक दान दाता परिवारों का सम्मान किया। संचालन राकेश सेठी ने किया। तत्पश्चात भगवान के माता-पिता, सौधर्म कुबेर, यज्ञनायक सहित मुख्य इंद्र-इंद्राणी, प्रतिंद्र एवं मुख्य पात्रों द्वारा यागमंडल विधान पूजा की गई। दोपहर में गर्भ कल्याणक संस्कार, गोद भराई, रात्रि में आरती के बाद महिला मंडल के मंगलाचरण के बाद अष्टकुमारी द्वारा माता की सेवा आदि कार्यक्रम हुए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।</p>
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		<title>ध्वजारोहण घटयात्रा से हुआ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा- गर्भ के संस्कार ज्ञान से जीवन का निर्माण होकर निर्वाण होता हैं  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 11:00:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा जयपुर।</strong> प्रतिमा चाहे पाषाण,या रत्न रन की हो, उसमें भगवान के गुणों का संस्कार का आरोपण किए जाते हैं। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के समय भोग भूमि थी। बाद में कर्म भूमि प्रारंभ हुई। श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी और श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं। दोनों स्थानों पर पंडित हँसमुख के साथ चैबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर धर्मसभा में प्रगट की। आचार्य श्री ने आगे कहा कि माता जब संस्कारित होगी तभी वह बच्चों को संस्कारित कर सकती है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने गर्भस्थ शिशु को रात्रि भोजन त्याग के उदाहरण से बताया कि माता के गर्भ में दिए धार्मिक ज्ञान संस्कार से ही तीर्थंकर,मुनि, महापुरुष और लौकिक एडवोकेट, डाॅक्टर, सीए इंजीनियर बनते हंै।</p>
<p><strong>पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने बताया कि तीर्थंकर कुल, जैन धर्म, उच्च मनुष्य गति में माता के विचार, भाव खानपान अच्छा होना चाहिए। गर्भपात कराने के दुष्परिणाम होते हैं। प्राचीन पदमप्रभ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा बाड़ा मंदिर में नूतन चैबीसी का पंच कल्याणक, विश्वशांति महायज्ञ एवं पदम वल्लभ नूतन शिखर पर कलश एवं ध्वज आरोहण कार्यक्रम प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी परंपरा के आचार्य श्री धर्मसागर जी से सन 1969 में दीक्षित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित अनेक साधुओं के पावन सानिध्य में 5 दिवसीय पंच कल्याणक महा महोत्सव बुधवार से शताधिक महिलाओं की कलश घटयात्रा, ध्वजारोहण, भूमि शुद्धि, मंडप उद्घाटन मंगल श्री जी विराजमान मंगल कलश स्थापना, अभिषेक पूजन समस्त आचार्य आर्यिका संघ के मंचासीन होने पर प्रारंभ हुआ। एडवोकेट सुधीर, हेमंत सोगानी, सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित हसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में पांच दिवसीय आयोजन में भगवान के पांच कल्याणकों के माध्यम से पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं की जाएगी। बुधवार को प्रातः विशाल घटयात्रा अहिंसा सर्कल से निकाली गई। जिसमें जिनेंद्र प्रभु को प्रतिमा के साथ अश्व, हाथी, बैंड,108 मंगल कलश के साथ हजारों श्रावकगण नगर के मुख्य मार्गो से होकर प्रतिष्ठा स्थल मैदान में बने अयोध्या नगरी नाभिराय पांडाल में पहुंचे।</p>
<p><strong>इन सौभाग्यशालियों ने लिया धर्मलाभ </strong></p>
<p>ध्वजारोहणकर्ता पुष्पा, विवेक आशा काला जयपुर परिवार ने ध्वजारोहण किया। पांडाल उदघाटन सुधांशु ऋतु कासलीवाल परिवार ने किया। मंगलाचरण कीर्ति दीदी ने किया। चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन कमल,नरेश चांदवाड परिवार, मंगल कलश स्थापना शकुंतला, अशोक परिवार ने किया। हेमंत सोगानी ने स्वागत उद्बोधन में मंदिर का प्राचीन इतिहास बताया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री, मनोज शास्त्री, पंडित भागचंद, पंडित विशाल का सम्मान किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी नेमिचंद्र छाबड़ा नलवाड़ी परिवार ने भेंट की। इस परिवार को संपूर्ण पंच कल्याणक की पूजन सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य भी मिला हैं। मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक दान दाता परिवारों का सम्मान किया। संचालन राकेश सेठी ने किया। तत्पश्चात भगवान के माता-पिता, सौधर्म कुबेर, यज्ञनायक सहित मुख्य इंद्र-इंद्राणी, प्रतिंद्र एवं मुख्य पात्रों द्वारा यागमंडल विधान पूजा की गई। दोपहर में गर्भ कल्याणक संस्कार, गोद भराई, रात्रि में आरती के बाद महिला मंडल के मंगलाचरण के बाद अष्टकुमारी द्वारा माता की सेवा आदि कार्यक्रम हुए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।</p>
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		<title>हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे ? : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बागरौद में दी मंगल देशना, सच्चे मित्रों की बताई पहचान  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 09:23:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। बागरौद से पढ़िए, यह खबर&#8230; बागरौद विदिशा। सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">बागरौद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बागरौद विदिशा।</strong> सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक तुम्हारे पास धन पैसा है तो ऐसे मित्र मिल जाएंगे जो तुम्हारे परम हितैषी बनेंगे और तुम्हारे अंदर बुरी आदतों का समर्थन करेंगे लेकिन, जैसे ही तुम्हारा धन समाप्त होगा और बुरा बक्त शुरु होगा तो वह तुमसे किनारा कर लेंगे लेकिन, जो तुम्हारे हितैषी मित्र भाई बंधु होते हैं। वह संकट आने पर तुम्हारा सहयोग भी करते हैं और तुम्हें महसूस भी नहीं होंने देते। इस विषय पर गुरुदेव कहते हैं कि ‘हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे? मुनि श्री ने कहा कि व्यवहारिक जीवन में हमें अनेक लोगों के संपर्क और संसर्ग में रहना पड़ता है। जिन्हें अक्सर हम अपना मित्र या बंधु कहते हैं, लेकिन क्या वास्तव में वह हमारे सच्चे मित्र या बंधु हैं?</p>
<p><strong>विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि रक्त संबंधित भाई ही आपका बंधु है, कभी-कभी देखने में आता है कि जिससे हमारा कोई संबंध नहीं कोई स्वार्थ नहीं लेकिन, विपत्ति के समय पर हमारा ऐसा सहयोग दिया कि उससे रक्त से बढ़कर रिलेशन बन गया। मुनि श्री ने कहा कि सच्चा मित्र या बंधु बुराइयों में न तो खुद लगते हैं और न हीं दूसरों को लगने देते हैं। मुनि श्री ने कहा कि जो हमें दोषों और बुराइयों से बचाए और विपत्ति में साथ दे वही हमारा सच्चा मित्र है और जो विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु है।</p>
<p><strong>मुनिश्री शनिवार को सुबह राहतगढ़ में करेंगे मंगल प्रवेश </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की राहतगढ़ में मंगल अगवानी 22 नवंबर को प्रातःकालीन बेला में होगी। आपके साथ मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक एवं बालब्रह्मचारियों का संघ है।यहां पर 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक नवीन जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव होने जा रहा है।</p>
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		<title>आचार्यश्री ने कहा-कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास जरूरी : पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में मना तप कल्याणक </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_said_that_practice_is_necessary_before_doing_any_work/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 11:12:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजन किया गया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में पंच कल्याणक महोत्सव के तृतीय दिवस तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजन किया गया। जन्म कल्याणक का हवन आदि किया गया। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी का प्रवचन हुआ। आचार्य श्री ने कहा कि कोई भी कार्य करने से पहले अभ्यास करना होता है। अभ्यास बहुत जरूरी है, व्यक्ति चतुर तो बनता है लेकिन अभ्यास नहीं करता है तो वह फेल हो जाता है। फेल हो जाने के बाद वह परेशान और पछताता है। आचार्य श्री ने कहा कि कोई कार्य में कार्य से ज्यादा अभ्यास में परिश्रम होता है। यदि अभ्यास होता है तो कार्य में परेशानी नहीं आती। उन्होंने कहा कि दिगंबर मुद्रा का अभ्यास केशलोच से शुरू होता है। शरीर टेंपरेरी व्यवस्था है। आज है वह कल नहीं रहेगा। दिगंबर मुद्रा में सबसे पहले अभ्यास कराया जाता है और सबसे पहले केशलोच कराया जाता है।</p>
<p><strong>हमें आध्यात्मिकता की ओर भी अभ्यास शुरू करना चाहिए</strong></p>
<p>उन्होंने मनुष्य के विषय में कहा कि मनुष्य में विशेषता होती है कि वह जैसा चाहे वैसा परिवर्तन कर सकता है। अच्छे को बुरा कर सकता है और बुरे को अच्छा कर सकता है। अभ्यास से कुछ भी संभव हो सकता है। उन्होंने कहा की लौकिक कार्यों का तो भरपूर अभ्यास करते हैं लेकिन, हमें आध्यात्मिकता की ओर भी अभ्यास शुरू करना चाहिए। पूजा पाठ अनुष्ठान से धर्म और अध्यात्म का विकास है। अध्यात्म में हमें वस्तु स्वरूप को जानना होगा और उसमें आनंद उठाना होगा अध्यात्म को समझते हुए यदि हम वस्तु स्वरूप को नहीं समझेंगे तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।</p>
<p><strong>संस्कार और संस्कृति अच्छी तो पड़ाव भी अच्छा </strong></p>
<p>धर्म में जिसकी जितनी आस्था और ताकत है, वह उसे उतना ही लूट सकता है। धार्मिक अनुष्ठानों में लूटोगे तो पुण्य होगा। संस्कार और संस्कृति के विषय में बोलते हुए गुरुदेव ने कहा कि संस्कार और संस्कृति अच्छी होती है तो पड़ाव भी अच्छा होता है। यदि यह अच्छा नहीं है तो पड़ाव भी अच्छा नहीं होगा, थोड़ा सा बदलना है अध्यात्म से जुड़े महामंत्र से जोड़े मंत्र वाक्य से जोड़ेंगे तो मैं लिख कर देता हूं कि अपन स्वर्ग में मिलेंगे।</p>
<p><strong>ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन हुआ पूजन </strong></p>
<p>ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में विनायक यंत्र पूजन किया गया। राजकुमार आदिकुमार का विवाह हुआ। जिसमें आदिकुमार की बारात निकाली गई। जिसमें उत्साह भरपूर दिखा। बग्गी में भगवान के माता-पिता बने सुधा जयकुमार डूंगरवाल, सौधर्म इंद्र-इंद्राणी मयंक विजया सांवला, कुबेर इंद्र मनीष सिंघल बैठे हुए थे। 32 हजार मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, राज्याभिषेक आदि हुआ। साथ ही भरत बाहुबली संवाद हुआ। राज्यसभा में भगवान आदिनाथ ने सभी को आसि मसी कृषि का संदेश दिया अपनी दोनों पुत्री ब्राह्मी सुंदरी को शिक्षा प्रदान की।</p>
<p><strong>तीर्थंकर आदिनाथ का राज्याभिषेक हुआ </strong></p>
<p>तीर्थंकर आदिनाथ का राज्याभिषेक हुआ। राज्य सभा में जैसे ही नीलांजना नृत्य हुआ। राजकुमार आदिनाथ को वैराग्य हो गया और वह दीक्षा लेने चले गए। उस समय का क्षण काफी भावुक था। इसी क्रम में आचार्य श्री के सानिध्य में दीक्षाभिषेक दीक्षा विधि हुई और प्रतिमाओं पर दीक्षा विधि के संस्कार किए गए। आचार्य श्री ने भी तप कल्याणक का महत्व समझाया। एक दिन पूर्व जन्म कल्याणक की रात्रि में बेला में तीर्थंकर बालक का जन्म कल्याणक मनाते हुए पालना झुलाया गया एवं बाल क्रीड़ा की गई।</p>
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		<title>भगवान का मोक्ष 24 तीर्थंकरों सहित 1008 भगवान को दिया सूर्य मंत्र : नित्य नियम का पूजन और हवन हुआ </title>
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		<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 17:09:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावागिरी सिद्ध क्षेत्र में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिन विशुद्ध सागर जी महाराज ने ससंघ भगवान आदिनाथ के अंक न्यास और सूर्य मंत्र देकर प्रतिष्ठित किया। हवन में अग्नि प्रज्वलित अग्नि कुमार देवों ने की। आचार्य श्री के दर्शन के लिए शनिवार को खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के सांसद गजेंद्रसिंह पटेल ने श्रीफल भेंटकर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावागिरी सिद्ध क्षेत्र में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिन विशुद्ध सागर जी महाराज ने ससंघ भगवान आदिनाथ के अंक न्यास और सूर्य मंत्र देकर प्रतिष्ठित किया। हवन में अग्नि प्रज्वलित अग्नि कुमार देवों ने की। आचार्य श्री के दर्शन के लिए शनिवार को खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के सांसद गजेंद्रसिंह पटेल ने श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">ऊन से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> ऊन</strong>। पावागिरी सिद्ध क्षेत्र में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिन विशुद्ध सागर जी महाराज ने ससंघ भगवान आदिनाथ के अंक न्यास और सूर्य मंत्र देकर प्रतिष्ठित किया। यह सारे कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्मचंद शास्त्री के निर्देशन में पंडित जिनेश, पंडित नितिन झांझरी, बाल ब्रह्मचारी अक्षय भैया के सहयोग से हुई। सुबह भगवान के अभिषेक, शांतिधारा,नित्य नियम का पूजन और हवन हुआ। जिसमें सुधर्म इंद्र, कुबेर, ईशान, महेंद्र, यज्ञ नायक, महा यज्ञ नायक ने आहुतियां दी। हवन में अग्नि प्रज्वलित अग्नि कुमार देवों ने की। भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत अष्टापद से महा निर्वाण को प्राप्त किया और भगवान ने योग निरोध करके निर्वाण को प्राप्त किया। तब भगवान के नाखून और केश मात्र रह जाते हैं। जिसका अग्नि संस्कार सौधर्म इंद्र अशोक झांझरी ने किया। निर्वाण कांड का वाचन कर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। आचार्य श्री के दर्शन के लिए शनिवार को खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के सांसद गजेंद्रसिंह पटेल ने श्रीफल चढ़ा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कमेटी के पदाधिकारियों ने तिलक, दुपट्टा, श्रीफल प्रदान कर सांसद का सम्मान किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के ऊर्जावान समर्पित महामंत्री अशोक झांझरी सौधर्म इंद्र भी है को तीर्थ भक्त की उपाधि से सम्मानित कर सम्मान पत्र, शॉल, श्रीफल, माला पहना कर स्वागत किया गया। साथ ही पंडित धर्मचंद्र शास्त्री और सह प्रतिष्ठाचार्य का सम्मान किया गया। बैंडबाजों के साथ धूमधाम से चतुर्विध संघ के साथ भगवान को तलहटी मंदिर तक ले कर आए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78999" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250412-WA0043-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /> आत्मा की विशुद्धि के लिए लाभ कषाय परिग्रह छोड़ना पड़ेगा</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि योग निरोध क्यों किया जाता है? आचार्य श्री ने बताया कि आत्मा विकास शील है। जैन आगम जिन शासन जैन सिद्धांत आत्मा को नहीं स्वीकारता अंतरात्मा ही परमात्मा होता है। जीव अनादि विद्या के बस हुआ मिथ्या का सेवन कर संसार का रस लेता रहा और मिथ्यात्व के तीन टुकड़े कर दिए। गुणस्थान के बारे में बताया कि कौन से गुण स्थान में क्या और कैसे मिलता है। आगे बताया कि मुनि को मुनि बनना चाहिए मुनीम नहीं बनना चाहिए। अपनी आत्मा की विशुद्धि के लिए लाभ कषाय परिग्रह छोड़ना पड़ेगा। अपने संघों में होने से मोक्ष नहीं होता निःसंघ होने से मोक्ष होता है। इस देह से भी मोह हटाना पड़ेगा जो गृहस्थ और मुनि धन धन में लिप्त है। वो अपनी ही हत्या कर रहे है। संसार में जो कीमत विशुद्धि की है वो पैसे की भी नहीं है। जैन मुनि ने वो विशुद्धि है और वो ही भगवान बनते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि शब्द ब्रह्म है साधन है। एक पाषाण की प्रतिमा अंक न्यास, विधि न्यास किया गया। धार्मिक, पूजन आदि के काल में मौन रखना चाहिए। भक्तामर आदि जो भी शास्त्र है वह एक शब्द ब्रह्म ही है।</p>
<p><strong>अभागे भागी का द्रव्य भी गलत जगह लगेगा</strong></p>
<p>जैसे भजन गाते-गाते जो भोजन बनता है वो अमृत के समान होता है और सुपाच्य हो जाता है। भोजन वही काम आता है विशुद्ध,शुद्धि हो, वही अमृत का काम करता है और साधु संतों को साधना करने में सहायक होता है। जो शब्द ब्रह्म का उपयोग भावना से करते है पुण्य करते हैं। आचार्य श्री ने बताया कि अभागे भागी का द्रव्य भी गलत जगह लगेगा और पुण्यातमा जीव का द्रव्य अच्छे कार्य जिनवाणी, मंदिर बनाने में लगेगा, चंदोवा में लगेगा और पापियों का द्रव्य कूलर, पंखे में लगेगा।पुण्यात्मा जीव को श्रेष्ठ नाम मिलते है । शब्द में ब्रह्मांड को हिलाने की शक्ति रहती है। शब्दों के माध्यम से पुल,पहाड़ चट्टान टूटती है और दिव्य ध्वनि से कर्मों के पुल टूटते हैं।</p>
<p><strong>शब्द ब्रह्म,आत्म ब्रह्म को जागृत करता है</strong></p>
<p>सूर्य के प्रताप से अंधकार नष्ट होता और प्रभु का नाम लेने से कई भवों के कष्टमई अंधकार नष्ट होते है। आचार्य श्री ने शब्द ब्रह्म की विस्तृत व्याख्या की और बताया कि शब्द ब्रह्म,आत्म ब्रह्म को जागृत करता है ।</p>
<p>यह जानकारी ट्रस्टी मनीष जैन और प्रचार मंत्री आशीष जैन लोनारा ने प्रदान की।</p>
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		<title>आचार्य श्री सुंदर सागर जी का मंगल प्रवेश 15 को: आचार्यश्री ससंघ का धरियावद की ओर विहार  </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 16:47:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ का शनिवार 15 मार्च को धरियावद में मंगल प्रवेश होगा। आचार्यश्री ससंघ का सागवाड़ा में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के बाद धरियावद की ओर विहार हो रहा है। यहां पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ और मुनि श्री पुण्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ का शनिवार 15 मार्च को धरियावद में मंगल प्रवेश होगा। आचार्यश्री ससंघ का सागवाड़ा में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के बाद धरियावद की ओर विहार हो रहा है। यहां पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ और मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ का मिलन होगा। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ का शनिवार 15 मार्च को मंगल प्रवेश होगा। आचार्यश्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ का सागवाड़ा में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के बाद धरियावद में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के दर्शनार्थ विहार हो रहा है। दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने बताया कि आचार्य श्री सुंदर सागर जी सागवाड़ा से नयागांव, साबला, गामड़ी, निठाउवा, पारसोला, मांडवी होते हुए 15 मार्च को सुबह नगर में प्रवेश करेंगे।</p>
<p>यहां पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ससंघ और मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ का मिलन होगा। आचार्य सुंदर सागर जी ससंघ का गुरुवार को रात्रि विश्राम भरकुंडी में हुआ। शुक्रवार को सुबह पारसोला में आहारचर्या के बाद रात्रि विश्राम मांडवी में होगा।</p>
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		<title>पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु भूमि पूजन सम्पन्नः 3 से 5 मार्च तक आचार्य सुन्दर सागरजी के सानिध्य में होगा </title>
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		<pubDate>Wed, 12 Feb 2025 11:46:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बर जैन समाज, सागवाडा तथा पुनर्वास कॉलोनी के संयोजन मे आचार्य सुन्दर सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु भूमि पूंजन आज प्रातः प्रतिष्ठाचार्य के तत्वावधान मे सम्पन्न हुआ। पढ़िए सागवाडा से विनोद पगारिया की यह खबर&#8230; सागवाडा। दिगम्बर जैन समाज, सागवाडा तथा पुनर्वास कॉलोनी के संयोजन मे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बर जैन समाज, सागवाडा तथा पुनर्वास कॉलोनी के संयोजन मे आचार्य सुन्दर सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु भूमि पूंजन आज प्रातः प्रतिष्ठाचार्य के तत्वावधान मे सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सागवाडा से विनोद पगारिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सागवाडा।</strong> दिगम्बर जैन समाज, सागवाडा तथा पुनर्वास कॉलोनी के संयोजन मे सागवाडा नगर के डूगरपुर रोड स्थित वर्धमान सोसायटी में आगामी 3 से 5 मार्च पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। आचार्य सुन्दर सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य आयोजित इस पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु प्रतिष्ठा महोत्सव स्थल वर्धमान सोसायटी मे भूमि पूजन बुधवार को प्रातः प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया विरल के तत्वावधान मे सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>शिला की स्थापना हुई </strong></p>
<p>जैन युवा मंच के अध्यक्ष वैभव गोवाडिया ने बताया कि इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य पगारिया द्वारा कार्यक्रम स्थल पर भूमि शुद्धि, मंगलाष्टक, दिगबन्धन, मंगल कलश स्थापना, भूमि पूजा के साथ विधि सम्पन करायी गयी। स्थल पर वेदी निर्माण हेतु शिला की स्थापना धनराज गोवाडिया परिवार द्वारा की गयी।</p>
<p><strong>उपस्थिति वंदनीय रही</strong></p>
<p>इस अवसर पर पवन गोवाडिया, नरेन्द्र, अशोक, विरेन्द्र, सुनील, अमित, रौनक, जश गोवाडिया, शरद बोबडा, देवेन्द्र शाह, अनिल आजणिया, दुष्यन्त सोमपुरा, वासुदेव सुथार सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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