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	<title>पंचामृत &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पच्चखान देकर जन्मदिवस पर ली गुरु दक्षिणा : अजितनाथ भगवान का वासक्षेप, पंचामृत एवं औषधि से शक्रस्तव अभिषेक किया </title>
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		<pubDate>Sat, 09 Aug 2025 14:00:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साध्वी कुसुमलता श्रीजी मसा का जन्मदिवस 7 अगस्त (गुरुवार) को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। प्रातः 6 बजे श्रीसंघ द्वारा श्री अजितनाथ भगवान का वासक्षेप, पंचामृत एवं औषधि से शक्रस्तव अभिषेक किया गया। टांडा (धार) से पढ़िए, यह खबर&#8230; टांडा (धार)। नगर में तत्वचिंतन चातुर्मास उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साध्वी कुसुमलता श्रीजी मसा का जन्मदिवस 7 अगस्त (गुरुवार) को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। प्रातः 6 बजे श्रीसंघ द्वारा श्री अजितनाथ भगवान का वासक्षेप, पंचामृत एवं औषधि से शक्रस्तव अभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">टांडा (धार) से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टांडा (धार)।</strong> नगर में तत्वचिंतन चातुर्मास उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है। इस चातुर्मास में श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीजी महाराजसा के पट्टधर, विशाल गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीजी महाराजसा तथा आचार्य जय रत्न सूरीजी महाराजसा की आज्ञानुवर्ती, पूज्य साध्वी तत्वलता श्रीजी आदि ठाणा 4 का चातुर्मास चल रहा है। इस क्रम में पूज्य साध्वी स्नेहलता श्रीजी की शिष्या साध्वी कुसुमलता श्रीजी मसा का जन्मदिवस 7 अगस्त (गुरुवार) को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। प्रातः 6 बजे श्रीसंघ द्वारा श्री अजितनाथ भगवान का वासक्षेप, पंचामृत एवं औषधि से शक्रस्तव अभिषेक किया गया। अभिषेक का लाभ मनोज कुमार कांतिलाल डूंगरवाल परिवार ने लिया। इसके पश्चात महिलाएं जय जयकार के साथ साध्वीजी को उपाश्रय लेकर आईं। संतोष कुमार उम्मेदमल बाफना परिवार द्वारा अक्षत से एवं सुरेश कुमार शांतिलाल कोठारी परिवार द्वारा केसर के छींटों से बधामना की गई। इस अवसर पर पूज्य गुरुणी तत्वलता श्रीजी ने अपनी शिष्या साध्वी कुसुमलता श्रीजी की दीक्षा एवं उनके 22 वर्षों के संयम जीवन पर प्रकाश डाला।</p>
<p>साध्वी कुसुमलता श्रीजी ने प्रवचन में टांडा संघ की धर्मललक की प्रशंसा की और कहा कि चातुर्मास के प्रारंभ से ही यहाँ विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है, विशेषकर तपस्या के प्रति। साध्वीजी ने गुरु दक्षिणा के रूप में संघ के सदस्यों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक स्वाध्याय करें एवं धर्ममार्ग पर चलें। आपने मंदिर विधि, अष्टप्रकारी पूजन, दोहे, प्रतिक्रमण सूत्र आदि को कंठस्थ करने के लिए पच्चखान दिए। दोपहर में महिलाओं द्वारा सामूहिक सामायिक की गई।</p>
<p>इस अवसर पर आराधना भवन को भव्य रूप से सजाया गया था। कार्यक्रम का संचालन निर्मल श्रीश्रीमाल ने किया। लड्डू की प्रभावना मनोज कुमार कांतिलाल डूंगरवाल परिवार ने वितरित की। प्रवचन की प्रभावना सुगनबाई श्रावक रत्न रतनलाल श्रीश्रीमाल परिवार ने लाभ लिया।</p>
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		<title>भगवान से बड़ा है गुरु का पद, जो उनके निकट ले जाते हैं: सनावद में विनयांजलि और गुणानुवाद सभा हुई </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 10:36:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में हेमंत काका, वीरेंद्र बाबा, प्रवीण जैन, सुनील पांवणा, नवनीत जैन, सुरेश मुंशी ,सुनील मास्टर साब, हर्षित जैन ने श्री जी का पंचामृत अभिषेक कर शांति धारा की। संत निलय में समाधि दिवस एवं अवतरण दिवस पर सभा का शुभारंभ आचार्य विराग सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष प्रदीप पंचोलिया, कमल केके, सुदेश जटाले, प्रशांत जैन, संगीता पाटोदी ने दीप प्रज्वलन कर किया। मंगलाचरण प्रदीप पंचोलिया ने किया।</p>
<p>आचार्य विराग सागर जी महाराज का पूजन किया गया। जिसमें समाज के सभी उम्र वर्ग के सदस्यों ने अलग-अलग क्रम में अर्घ्य समर्पित किए। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी का अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य मधु निर्मलचंद भूच परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिराजों के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने सौभाग्य अक्षयकुमार सराफ एवं संजयकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>समाजजनों ने किया गुणानुवाद </strong></p>
<p>इस अवसर पर राजेंद्र जैन महावीर ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के प्रति अपनी विनयांजलि एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज के प्रति अपना गुणानुवाद प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस प्रकार विश्व को सूर्य राह दिखाता है। सूर्य पथ प्रदर्शित करता है। ऐसे ही मुनि विश्व सूर्य सागर जी महाराज अपनी चर्या के माध्यम से साम्य स्थापित करते हुए हम सब को उपदेश दे रहे है। जैन ने आचार्य विराग सागर जी के जीवन पर प्रकाश डाल अपने अनुभव साझा किए। इसी क्रम में नरेंद्र भारती,अनुभव जैन, संगीता पाटोदी, प्रशांत जैन ने भी अपनी विनयांजलि एवं मुनिश्री का गुणानुवाद किया।</p>
<p><strong>आपके नगर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री साध्य सागर जी ने कहा की आज वो दिन है। जिसमें जैन धर्म की धरोहर में वृद्धि हुई थी। आज के दिन हमारे जैन धर्म की धरोहर मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का अवतरण दिवस है। आज विराग सागर जी के आशीर्वाद से मुनिश्री ने दीक्षा लेकर आपके नगर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। आचार्य विराग सागर जी ने जीवन काल में इतनी अच्छी रचना की। जिसमें सभी साधुओं को अपनी अपनी योग्यता के अनुसार पद देकर आज जैन धर्म के झंडे को बुलंद कर रहे हैं। इनमें से एक हैं मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी, जो आप अपने ज्ञान के प्रकाश को चहुं ओर फैला रहे हैं।</p>
<p><strong>गुरु का उपकार भुलाए नहीं भूलाता </strong></p>
<p>मुनि श्री विश्वसूर्य सागर ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज को अपनी विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा कि आचार्य श्री ने जो उपकार हमारे ऊपर किए हैं। उनको हम नहीं भुला सकते है। हमारे गुरु की महिमा अपरंपार है। मुनिश्री ने कहा की गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पांव, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय की लाइनों को चरितार्थ करते हुए गुरु ही वह व्यक्ति है जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। ऐसे गुरुदेव को हम बारम्बार नमोस्तु करते हैं। आचार्य वर्धमान सागर युवा संघ के द्वारा प्रभावना वितरण की गई। संचालन प्रशांत चौधरी ने किया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को विनयांजलि अर्पित की: पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 08:02:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। 4 जुलाई गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज का 73 वां अवतरण दिवस पर का आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय में कार्यक्रम हुए।</p>
<p>प्रातः 7 बजे से पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनि संघ के सानिध्य में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रातः 8.30 बजे से गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज का विशेष पूजन मुनिश्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, पिच्छी परिवर्तन, विनयांजलि सभा में मुनिद्वय ने आशीर्वचन दिए। प्रातः 10 बजे आहारचर्या हुई।</p>
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		<title>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित मंगल विहारः 21 फरवरी को खूंता होगा मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Feb 2025 12:26:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के आदिनाथ भगवान अतिशयकारी हैं। 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं। धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के आदिनाथ भगवान अतिशयकारी हैं। 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं। धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि पर प्रस्तावित योजना के बारे में आचार्यश्री से मार्ग दर्शन एवं आशीर्वाद चाहा। आचार्यश्री को धरियावद आने हेतु श्रीफल भेंट किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> नगर की समाज गुरु भक्त समाज है। नगर के आदिनाथ भगवान अतिशय कारी हैं। अध्यक्ष करनमलजी ने बताया कि 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। अभी बागड़ धरियावद खूंता होकर जाएंगे। अनुकूलता रही तो पुनः भी आ सकते हैं। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष करण मल मैदावत ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि पर प्रस्तावित योजना के बारे में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से मार्ग दर्शन एवं आशीर्वाद चाहा। सभा में खूंता समाज सहित प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जी धरियावद ने आचार्यश्री को धरियावद आने हेतु श्रीफल भेंट किया ।</p>
<p><strong>मुंगाणा में विहार हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर काफी नगरों के भक्त उपस्थित रहे। प्राचीन अतिशययुक्त चमत्कारी श्रीआदिनाथ भगवान दिगंबर मंदिर एवं श्रीअजीतनाथ भगवान जिनालय तथा नगर गौरव मुनि सुदृढ ़सागर, सुरम्य सागर, आर्यिका प्रीतिमती, आ श्रीसुप्रज्ञमति, क्षु श्रीसुभव सागरजी, क्षुल्लिका श्री सुगंधमति, क्षु श्री अटलमति की जन्म और कर्मभूमि मुंगाणा में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, 9 मुनिराज 20 आर्यिका माताजी और 2 क्षुल्लक साधु सहित 20 फरवरी को विहार हुआ। करणमल मैदावत, अनिरुद्ध अनुसार आचार्यश्री संघ सानिध्य में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक पूजन धार्मिक अनुष्ठान हुए।</p>
<p><strong>चरण प्रक्षालन आरती कर विदाई दी </strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया, राजेश पंचोलिया के अनुसार  आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनि चिन्मय सागरजी, हितेंद्र सागरजी, प्रशम सागरजी, प्रभव सागरजी, चिंतन सागरजी, दर्शित सागरजी, प्रबुद्ध सागरजी, मुमुक्षु सागरजी, प्रणित सागरजी आर्यिकाश्री शुभमतिजी, शीतलमतिजी, चैत्यमतिजी, वत्सलमतिजी, विलोकमतिजी, दिव्यांशुमतिजी, पूर्णिमामति मुदितमतिजी, विचक्षणमतिजी, समर्पितमतिजी, निर्मुक्तमतिजी, विनम्रमतिजी, दर्शनामतिजी, देशनामतिजी, महायशमतिजी, देवर्धिमतिजी, प्रणतमतिजी, निर्माेहमतिजी, पद्मयशमतिजी, दिव्ययशमतिजी, प्रेक्षामतिजी, जिनेशमति, क्षुल्लक विशाल सागरजी, क्षुल्लक प्राप्ति सागरजी, संघ का 20 फरवरी को मंगल विहार हुआ। समाजजनों ने निवास के सामने चरण प्रक्षालन आरती कर विदाई दी। रात्रि विश्राम नाड़ की राजकीय स्कूल में होगा।</p>
<p><strong>आचार्य संघ का प्रवेश व आहारचर्या खूंता में </strong></p>
<p>21 फरवरी को आचार्य संघ का प्रवेश श्री आदिनाथ दिगम्बर मन्दिर, खूंता होगा संघ की आहारचर्या खूंता में होगी। इस अवसर पर पारसोला से भी काफी भक्त उपस्थित रहे।</p>
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		<title>अखंड चावल चढ़ाने से अखंड सुख की प्राप्ति होती है: श्रावक-श्राविकाओं संस्कार शिविर में मुनिश्री हितेंद्र सागर ने दिया प्रबोधन </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Feb 2025 12:20:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागर संघ सहित विराजित हैं। आचार्य संघ सानिध्य में प्रतिदिन पंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, स्वाध्याय श्रावक-श्राविकाओं संस्कार शिविर चल रहा है। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन भाग ले रहे हैं। श्रावक संस्कार शिविर में मुनिश्री हितेंद्र सागर महाराज ने श्रावकों को मंदिर में भगवान की स्तुति क्यों करते हैं, इसकी विवेचना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागर संघ सहित विराजित हैं। आचार्य संघ सानिध्य में प्रतिदिन पंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, स्वाध्याय श्रावक-श्राविकाओं संस्कार शिविर चल रहा है। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन भाग ले रहे हैं। श्रावक संस्कार शिविर में मुनिश्री हितेंद्र सागर महाराज ने श्रावकों को मंदिर में भगवान की स्तुति क्यों करते हैं, इसकी विवेचना की। पूजा का महत्व बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुंगाणा से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुंगाणा।</strong> अनेक साधुओं की जन्म एवं कर्म भूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागर संघ सहित विराजित हैं। आचार्य संघ सानिध्य में प्रतिदिन प्रातःपंचामृत अभिषेक, शास्त्र प्रवचन, दोपहर को स्वाध्याय, शाम को श्रावक-श्राविकाओं संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। इसमें बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग ले रहे हैं। श्रावक संस्कार शिविर में मुनिश्री हितेंद्र सागर महाराज ने श्रावकों को मंदिर में भगवान की स्तुति क्यों करते हैं, इसकी विवेचना में बताया कि भगवान के दर्शन कर भगवान का गुणानुवाद दर्शन स्तुति के माध्यम से करते हैं। भगवान के दर्शन करने से सुख शांति मिलती है। श्रीजी के दर्शन खाली हाथ से नहीं करना चाहिए। अच्छे द्रव्य चावल, श्रीफल, फल ले जाकर भगवान के दर्शन करना चाहिए क्योंकि, खाली हाथ जाओगे तो मंदिर से खाली हाथ ही वापस आना होगा। चावल अक्षत होता है, उससे लाभ अक्षय प्राप्त होता है। हमें भी संसार के आवागमन से मुक्त होने के लिए प्रतीक रूप से चावल चढ़ाना चाहिए।</p>
<p><strong>पर्वताकार चावल का पुंज सकारात्मक ऊर्जा देता है</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि मुनिश्री हितेंद्र सागर ने बताया कि जन्म, जरा, मृत्यु के दुखों से छुटकारा पाने के लिए भगवान की तीन परिक्रमा लगाई जाती है। पंच परमेष्टि अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु को नमन करते हुए चावल के 5 पुंज और जिनवाणी के समक्ष प्रथमानुयोग, चरणानुयोग, करणानुयोग, द्रव्यानुयोग चार पुंज चढ़ाए जाने चाहिए। गुरु के समक्ष रत्नत्रय के प्रतीक तीन पुंज चढ़ाना चाहिए। चावल का क्या महत्व होता है। इसे सरल भाषा में समझाया सर्वप्रथम चावल ही क्यों चढ़ाया जाता है। इसकी विवेचना सरल शब्दों में कर बताया कि चावल अखंड होता है, धवल होता है, अक्षय होता है, मंगलकारी है, इसलिए मंदिर में चावल चढ़ाए जाते हैं। भारत देश में चावल के अलग-अलग नाम हो सकते हैं। मंदिर में मुट्ठी भर कर भगवान को चावल चढ़ाने से पर्वताकार चावल का पुंज सकारात्मक ऊर्जा देता है। अखंड चावल अर्पित करने से अखंड सुख मिलता है, धवल सामग्री से परिणाम में विशुद्धता आती है।</p>
<p><strong>आर्यिका देवर्धी मति के उपदेश हुए</strong></p>
<p>समाज के अध्यक्ष करणमल, अनिरुद्ध ने बताया कि आचार्य संघ के आने से काफी धर्म प्रभावना हो रही हैं। सुबह भगवान के अभिषेक पूजन के बाद आर्यिका देवर्धी मति के उपदेश हुए। शाम को भगवान और आचार्य वर्धमान सागर की आरती की जाती है।</p>
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