<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>पंचांग &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Mon, 17 Nov 2025 07:15:37 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>पंचांग &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>जैन धर्म में जानें पंचांग का महत्व : धार्मिक कार्यों, व्रतों, तपस्या और साधना की सही दिशा और समय की पहचान करता है पंचांग </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/know_the_importance_of_panchang_in_jainism/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/know_the_importance_of_panchang_in_jainism/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Nov 2024 09:17:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Fast]]></category>
		<category><![CDATA[Festival श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Panchang]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[त्योहार]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक सभा]]></category>
		<category><![CDATA[पंचांग]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[व्रत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=70284</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह न केवल समय की गणना करने का माध्यम है, बल्कि यह धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों, पर्वों और तिथियों का पालन करने के लिए एक आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। पढ़िए यह विशेष आलेख जैन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है क्योंकि यह धार्मिक कार्यों, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह न केवल समय की गणना करने का माध्यम है, बल्कि यह धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों, पर्वों और तिथियों का पालन करने के लिए एक आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p>जैन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है क्योंकि यह धार्मिक कार्यों, व्रतों, पूजा-पाठ, और अन्य अनुष्ठानों के लिए समय और तिथियों की सही जानकारी प्रदान करता है। पंचांग जैन धर्म के धार्मिक कैलेंडर की तरह कार्य करता है, जिसमें तिथियां, वार, योग, नक्षत्र, तिथि विशेष, और अन्य खगोलीय घटनाएं शामिल होती हैं। इनका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में विस्तार से समझा जा सकता है:</p>
<p><iframe title="Evening bulletin 23। पंचांग को नहीं माने वाले आगम का तो  विरोध नहीं कर रहे है। #shreephal_jain_news" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/fYKQspej5Tc?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>1. धार्मिक व्रतों और अनुष्ठानों की सही तिथि का निर्धारण  </strong></p>
<p>पंचांग जैन धर्म में व्रतों और धार्मिक अनुष्ठानों की तिथि निर्धारित करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, पउमल, व्रत, उत्सव, त्योहार आदि की तिथियाँ पंचांग में दी जाती हैं। खासकर जैन धर्म में पुज्जा, प्रवचन, और पश्चाताप जैसी क्रियाएँ तिथियों और नक्षत्रों पर आधारित होती हैं। इससे श्रद्धालु सही समय पर धार्मिक कार्य कर सकते हैं।</p>
<p><strong>2. महत्वपूर्ण तिथियां और त्योहार  </strong></p>
<p>जैन पंचांग में जैन धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियां और त्योहारों का विशेष ध्यान रखा जाता है। जैसे:</p>
<p>&#8211; क्षमावाणी दिवस</p>
<p>&#8211; महावीर जयंती</p>
<p>&#8211; दीपावली (जो जैन धर्म में महावीर निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है)</p>
<p>&#8211; दसलक्षण पर्व। इन दिनों को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से खास महत्व दिया जाता है, और पंचांग इनका सही समय और दिन बताता है।</p>
<p><strong>3. नक्षत्र और योग का प्रभाव  </strong></p>
<p>जैन पंचांग में नक्षत्रों, योगों और तिथियों का विश्लेषण किया जाता है, जो व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। इन खगोलीय घटनाओं का ध्यान रखना जैन धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि माना जाता है कि सही नक्षत्र और योग के समय किए गए कार्य अधिक फलदायी होते हैं।</p>
<p><strong>4. तिथि और काल के अनुसार व्रतों का पालन  </strong></p>
<p>जैन धर्म में विभिन्न व्रतों का पालन तिथियों और समय के अनुसार किया जाता है। जैसे आलस दिवस या तपस्या के दिन, जैन धर्म के अनुयायी उपवासी रहते हैं और विशेष पूजा करते हैं। पंचांग इन विशेष तिथियों की जानकारी प्रदान करता है, ताकि लोग अपने व्रतों और तपस्या को सही तरीके से पालन कर सकें।</p>
<p><strong>5. समाज में सामाजिक और धार्मिक अनुशासन  </strong></p>
<p>पंचांग जैन समाज में सामाजिक और धार्मिक अनुशासन बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह प्रत्येक सदस्य को समय की सही जानकारी देता है, जिससे लोग सामूहिक रूप से धार्मिक कार्यों में भाग ले सकते हैं और समाज में एकजुटता बनी रहती है।</p>
<p><strong>6. तपस्या और संयम के नियम  </strong></p>
<p>पंचांग के अनुसार जैन धर्म में तपस्या, संयम और साधना के दिन निर्धारित किए जाते हैं। विशेष रूप से आद्याशा, तपोव्रत और आध्यात्मिक साधनाएँ समय और तिथियों के हिसाब से तय होती हैं, और पंचांग इनकी सही दिशा प्रदान करता है।</p>
<p><strong>7. मौन व्रत और उपवास  </strong></p>
<p>कुछ व्रतों में मौन और उपवास का पालन किया जाता है। पंचांग इस संदर्भ में यह निर्धारित करता है कि किन विशेष तिथियों पर उपवास या मौन व्रत करना शुभ रहेगा। जैन धर्म में उपवास और मौन का पालन बहुत महत्वपूर्ण होता है, और पंचांग इसका सही मार्गदर्शन करता है।</p>
<p><strong>8. समय और स्थान के अनुसार पूजा विधि  </strong></p>
<p>पंचांग में समय के अनुसार पूजा विधियां भी बताई जाती हैं। जैसे किसी खास नक्षत्र में पूजा करने के लिए विशेष विधियाँ होती हैं। जैन धर्म में पूजा का समय और विधि बहुत मायने रखती है, ताकि व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सके।</p>
<p><strong>9. ध्यान और साधना का समय  </strong></p>
<p>पंचांग के माध्यम से साधक यह भी जान सकते हैं कि किस समय ध्यान और साधना करने से अधिक लाभ होगा। विशेष नक्षत्र या योग में ध्यान और साधना करना जैन धर्म में खास महत्व रखता है।</p>
<p>जैन धर्म में पंचांग का महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह न केवल समय की जानकारी देता है, बल्कि धार्मिक कार्यों, व्रतों, तपस्या और साधना की सही दिशा और समय की पहचान करता है। इसे ध्यान में रखते हुए, जैन अनुयायी अपनी धार्मिक यात्रा को और भी अधिक फलदायी और प्रभावशाली बना सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/know_the_importance_of_panchang_in_jainism/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ज्योतिष : चौघड़िया और उनसे जुड़ी खास बातें, जानें किस चौघड़िया में क्या करें काम </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/chaughadiya-aur-unase-judee-khaas-baaten-jaanen-kis-chaughadiya-mein-kya-karen-kaam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Apr 2023 23:30:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ज्योतिष और वास्तु]]></category>
		<category><![CDATA[काल]]></category>
		<category><![CDATA[चौघड़िया]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>
		<category><![CDATA[पंचांग]]></category>
		<category><![CDATA[मूर्हत]]></category>
		<category><![CDATA[रोग]]></category>
		<category><![CDATA[लाभ]]></category>
		<category><![CDATA[शुभ]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=25282</guid>

					<description><![CDATA[किसी भी कार्य को करने के पहले शुभ लग्न और मुहूर्त को देखा जाता है। इसके अंतर्गत वार, तिथि, माह, वर्ष लग्न, योग, नक्षत्र को देखा जाता है। इस क्रम में किसी भी वार को कौन सा समय शुभ है यह देखा जाता है। चौघड़िया समय का वह हिस्सा है जो शुक्ष या अशुभ हो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>किसी भी कार्य को करने के पहले शुभ लग्न और मुहूर्त को देखा जाता है। इसके अंतर्गत वार, तिथि, माह, वर्ष लग्न, योग, नक्षत्र को देखा जाता है। इस क्रम में किसी भी वार को कौन सा समय शुभ है यह देखा जाता है। चौघड़िया समय का वह हिस्सा है जो शुक्ष या अशुभ हो सकता है। पंचांग के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
जिस तरह वर्ष के दो हिस्से है उत्तरायण और दक्षिणायन, माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। उसी तरह किसी वार या दिवस के दो हिस्से हैं दिन व रात। इसमें भी सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य को दिन का चौघड़िया कहा जाता है व सूर्यास्त और अगले दिन सूर्योदय के मध्य के समय को रात्रि का चौघड़िया कहते है। प्रत्येक दिन का हर पहर एक ग्रह की गति से जुड़ा होता है जो उसके अनुसार शुभ व अशुभ बनाता है। हर दिन की कुछ अच्छी समयावधि और बुरी समय अवधि होती है। जो कि शुभ या अशुभ चरण चौघड़िया तालिका के साथ निर्धारित होते है।<br />
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में सूर्योदय से सूर्यास्त व सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच के समय को 30-30 घटी में बांटा है। चौघड़िया मुहूर्त के लिए उसी 30 घटी की समय अवधि को 8 भागों में विभाजित किया है। जिसके परिणामस्वरूप दिन और रात के दौरान 8-8 चौघड़िया मुहूर्त होते है। एक घटी लगभग 24 मिनट की होती है। एक चौघड़िया 4 घटी (लगभग 96 मिनट) का होता है। प्रत्येक चौघड़िया मुहूर्त लगभग 4 घटी का होता है, इसलिए इसे चौघड़िया = चौ (चार) + घड़िया (घटी) के नाम से जाना जाता है। इसे चतुर्श्तिका मुहूर्त कहते है।</p>
<p><strong><span style="color: #008000;">चौघड़िया के नाम &#8211; अमृत, रोग, लाभ, शुभ, चर, काल उद्वेग।</span></strong></p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>वार से जुड़ा है चौघड़िया मुहूर्त &#8211;</strong></span><br />
चौघड़िया मुहूर्त वार और ग्रह से जुड़ा है और प्रत्येक चौघड़िया वार से। जैसे रविवार का सूर्य ग्रह है जिसका चौघड़िया उद्वेग से प्रारंभ होता है। इस तरह सोमवार का चन्द्रमा अमृत से, मंगलवार का मंगल रोग से, बुधवार का बुध लाभ से, गुरुवार को गुरु शुभ से, शुक्रवार का शुक्र से, शनिवार का शनि काल से प्रारंभ होता है। अर्थात जिस दिन जो वार होता है उस दिन का प्रारंभ उक्त चौघड़िया होता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>जाने कौन सा चौघड़िया शुभ है &#8211;</strong></span><br />
किसी शुभ कार्य को प्रारंभ करने के लिए अमृत, शुभ, लाभ और चर, ये चार चौघड़ियाओं को उत्तम माना गया है व रोग, काल और उद्वेग तीन चौघड़ियाओं श्रेष्ठ नहीं माना गया है। चौघड़िया मुहूर्त का चयन करते समय, वार वेला, काल वेला, राहु काल और काल रात्रि के समय को छोड़ दिया जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस समय कोई भी मंगल कार्य करना फलदायी नहीं होता है। वार वेला और काल वेला दिन के दौरान प्रचलित है जबकि रात के दौरान काल रात्री प्रचलित है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>उद्वेग चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
ज्योतिष में सूर्य के प्रभाव को आमतौर पर अशोक माना गया है, इसलिए इसे उद्योग के रूप में चिन्हित किया जाता है। हालांकि इस चौघड़िया में सरकारी कार्यों को किया जाता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>चर चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
शुक्र को एक शुभ और लाभकारी ग्रह माना जाता है इसलिए इसे चर्या चंचल रूप में चिन्हित किया गया है। शुक्र के चार प्रकृति के कारण चर्चा बढ़िया को यात्रा उद्देश्य के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>लाभ चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
बुध ग्रह भी शुभ और लाभदायक है इसलिए इसे लाभ के रूप में चिन्हित किया गया है। लाभ के चौघड़िया में शिक्षा या किसी विद्या को सीखने का कार्य प्रारंभ किया जाता है तो वह फलदायी होता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>अमृत चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
चंद्र ग्रह अति शुभ और लाभकारी ग्रह है इसलिए इसे अमृत के रूप में चिन्हित किया गया है। अमृत चौघड़िया को सभी प्रकार के कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>काल चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
शनि एक पापी ग्रह माना गया है इसलिए इसे काल के रूप में चिन्हित किया गया है। काल चौघड़िया के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में धनोपार्जन हेतु की जाने वाली गतिविधियों के लिए यह लाभदायक सिद्ध हो सकता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>शुभ चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
बृहस्पति अत्यंत ही शुभ ग्रह है और यह लाभकारी ग्रह माना गया है। इसलिए इसे शुभ के रूप में चिन्हित किया जाता है। शुभ चौघड़िया को विशेष रूप से विवाह समारोह आयोजित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>रोग चौघड़िया &#8211;</strong></span><br />
मंगल एक क्रूर और अनिष्टकारी ग्रह है इसलिए इसे रोग के रूप में चिन्हित किया गया है। रोग चौघड़िया के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। लेकिन युद्ध में शत्रु को हराने के लिए रोग चौघड़िया की अनुशंसा की जाती है।</p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>यह भी जाने &#8211;</strong></span><br />
कोई लोहे या तेल से संबंधित व्यापार शुरू कर रहा हो तो उसके लिए शनि के प्रभाव वाला काल का चौघड़िया उत्तम फलदाई सिद्ध हो सकता है। उसी तरह किसी व्यक्ति को पूर्व दिशा में यात्रा करनी है और वह अमृत के चौघड़िए में यात्रा प्रारंभ करता है तो वह उसके लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती है। इसका कारण है अमृत चौघड़िया का स्वामी चंद्र है और चंद्र पूर्व दिशा में दिशाशूल का कारक है। जो परेशानी और बाधाएं उत्पन्न करता हैं। जिस चौघड़िए का स्वामी जिस दिशा में दिशाशूल का कारक हो उस दिशा में यात्रा करना वर्जित माना गया है।<br />
इसके साथ ही कुछ बातों को छोड़ दें तो सामान्य रूप से चौघड़िया मुहूर्त उत्तम और अभिजीत फलदायी भी हो सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
