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	<title>पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री ने कहा सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है : निराला रंग विहार बना अयोध्या नगरी, होगा ध्वजारोहण </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:12:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर के 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए नगर में पधारे पट्टाचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने निराला रंग बिहार में धर्मसभा में कहा कि सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है। सत्य का जीवन अलौकिक आनंदमय है। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर के 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए नगर में पधारे पट्टाचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने निराला रंग बिहार में धर्मसभा में कहा कि सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है। सत्य का जीवन अलौकिक आनंदमय है। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर के 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए नगर में पधारे पट्टाचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने निराला रंग बिहार में धर्मसभा में कहा कि सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है। सत्य का जीवन अलौकिक आनंदमय है। सत्य अनंत अनंतानंत प्रकार का है जितनी भी पर्याय (शरीर) है द्रव्य अनंतानंत सिद्ध परमात्मा है वह सत्य है। उन्होंने कहा वाणी का सत्य प्राणी का सत्य मन का सत्य भावों का सत्य झूठ बोलते हुए भी सत्य विराजमान रहता है झूठ बोलते हुए भी सत्य विराजमान रहता है आज भगवान ऋषभदेव राम नहीं है लेकिन कभी थे नाम आया है तो यह सत्य है वस्तु वस्तु है सत्य सत्य है। पट्टाचारी विशुद्ध सागर महाराज ने आगे कहा कि शरीर को वस्त्रों की आवश्यकता नहीं जिसमें वासना है उसे वस्त्रों की आवश्यकता है। वस्त्रों की आवश्यकता होती तो निर्ग्रन्थ मुनि भी वस्त्र पहने हुए होते। प्रकृति पशु पछी को भी आवश्यकता नहीं बहुत सारी आवश्यकताएं किसी को नहीं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन मंदिर जाते हो एक बार श्मशान घाट भी चले जाया करो। वस्तु का मिलना पुण्य उदय है। वस्तु का भोगना पाप बंद है वस्तु का त्याग करना तपस्या है।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में कलश घटयात्रा 5 जून को</strong></p>
<p>पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सत्संग सानिध्य में 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर कलश घटयात्रा का आयोजन पैच नंबर 2 कुआं वाले जैन मंदिर से प्रातः काल 6.30 बजे होने जा रहा है। पार्षद मनोज जैन ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में प्रातः काल 6.30 बजे घटयात्रा में महिलाएं हाथों में कलश लेकर पेच नंबर 2 कुआं वाले जैन मंदिर से निकलेंगी, जो इटावा रोड जिला पंचायत वाली गली, देव नगर कॉलोनी, महावीर गंज होते हुए निराला रंग बिहार में बने अयोध्या नगरी पहुंचेंगी। जहां पर मंडप शुद्ध एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम होगा।</p>
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		<title>जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन: वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों की प्रस्तुति ने बांधकर रखा  </title>
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		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 10:37:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदार सागर जन कल्याण तीर्थ क्षेत्र पर पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत रात में वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों ने जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल एवं बालिका मंडल के मंगलाचरण से हुआ। बड़ागांव धसान से पढ़िए, यह खबर&#8230; बड़ागांव धसान। उदार सागर जन कल्याण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उदार सागर जन कल्याण तीर्थ क्षेत्र पर पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत रात में वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों ने जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल एवं बालिका मंडल के मंगलाचरण से हुआ। <span style="color: #ff0000">बड़ागांव धसान से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ागांव धसान।</strong> उदार सागर जन कल्याण तीर्थ क्षेत्र पर पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत रात में वर्धमान बाल विधा निकेतन बड़ागांव के नन्हें बच्चों ने जैसी करनी वैसी भरनी नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल एवं बालिका मंडल के मंगलाचरण से हुआ। जैसी करनी वैसी भरनी एक बहुत पुरानी कहावत है जिसका अर्थ है कि जो भी कार्य हम करते हैं, उसका फल हमें वैसा ही मिलता है। अगर हम अच्छे कार्य करेंगे तो हमें अच्छा फल मिलेगा और अगर हम गलत कार्य करेंगे तो उसका बुरा परिणाम हमें ही भुगतना पड़ेगा। हमारे जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम दूसरों का बुरा करते हैं या गलत रास्ता अपनाते हैं, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि समय के साथ उन्हीं कार्यों का परिणाम हमें मिल जाता है। महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा आप अपने लिए चाहते हो। यदि हम ईमानदारी, परिश्रम और सदाचार के मार्ग पर चलते हैं तो सफलता और सम्मान हमारा साथ देंगे।</p>
<p>देश-दुनिया के सच्चे उदाहरण भी यही सिखाते हैं कि कर्मों का फल अवश्य मिलता है। रावण का अंत भी उसके बुरे कर्मों के कारण हुआ। वहीं रामचंद्र जी को उनके अच्छे कार्यों का सुखद फल मिला। इसलिए हमें हमेशा अच्छे कार्य ही करने चाहिए, क्योंकि कर्मों का फल सबको मिलता है। जैसी करनी, वैसी भरनी यह प्राकृतिक नियम है। कुशल निर्देशन नरेंद्रसिंह परमार, केपी सिंह बुंदेला, अशोक जैन डूडा, वंदना जैन का रहा।</p>
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		<title>ज्ञान का कार्य है जानना, श्रद्धान का काम विश्वास करना: आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सान्निध्य में मनाया ज्ञान कल्याणक  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 13:03:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सान्निध्य में हो रहे पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव की बेला में प्रतिदिन की भांति श्री जी का अभिषेक कर शांतिधारा हुई। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज के सान्निध्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सान्निध्य में हो रहे पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव की बेला में प्रतिदिन की भांति श्री जी का अभिषेक कर शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज के सान्निध्य में हो रहे पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव की बेला में प्रतिदिन की भांति श्री जी का अभिषेक कर शांतिधारा हुई। इस बेला में आचार्य श्री ने ज्ञान के विषय में प्रकाश डाला। आचार्य श्री ने कहा कि ज्ञान का कार्य जानना और विश्वास करना श्रद्धा का काम है। जानी हुई वस्तु पर श्रद्धा कैसी है, विश्वास कैसा है। इसे ही लाभ प्राप्त होता है। सोने का उदाहरण देते हुए कहा कि सोने को जानना और उस पर श्रद्धा करना होता है। सुनार भी उसे कसौटी पर कसता है, पीतल कीमती वस्तु है, उस पर श्रद्धान नहीं करता। कोई भी निर्णय श्रद्धा के बाद होता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धान ज्ञान में बड़ी भूमिका निभाता है। सही जगह श्रद्धान होना चाहिए। मेहनत परिश्रम तप साधना करते हैं। तब जाकर पुण्य प्राप्त होता है। इसका मतलब तब जाकर केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है। झोली फैलाओ और शुभ भावनाओं भाओ कि केवलज्ञान की प्राप्ति हो। यदि यह हो जाएगा तो कल्याण निश्चित है।</p>
<p><strong>राजा सोम राजा श्रेयांश परिवार के यहां हुए आदिनाथ प्रभु के आहार </strong></p>
<p>इसी क्रम में एक वर्ष तक आदिनाथ प्रभु को विधि नहीं मिली और किसी को नवधा भक्ति विधि आहार की विधि भी नहीं पता थी और आहार चर्या का सौभाग्य राजा सोम राजा श्रेयांश परिवार को मिला, जो संजय ममता बाक़लीवाल एवं राजीव मनीषा बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। इसी के साथ प्रभु की दिव्य ध्वनि खिरी प्रभु को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई और प्रभु का पारणा गन्ने ईक्षु रस गन्ने से हुआ। दोपहर की बेला में समवशरण की रचना हुई। समवशरण के प्रथम दर्शन कराने एवं विमोचन करने का सौभाग्य कमल कुमार उमा देवी शामगढ़ निवासी को प्राप्त हुआ एवं इन्हीं के परिवार को ही समवशरण की प्रथम आरती का सौभाग्य मिला। समवशरण में दिव्य उपदेश हुआ। आचार्य श्री ने द्रव्यों के वर्णन को बताया। उन्होंने कहा कि संसार में 6 द्रव्य हैं, जिसमें जीव चेतन है, उसे अनुभूति है उसे सुख-दुख का अनुभव है।</p>
<p><strong>आचार्य के 36 मूलगुण उपाध्याय के 25 मूलगुणों का मार्ग बताया</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने बताया कि भगवान ने दो धर्म का प्रतिपादन किया श्रावक धर्म और मुनि धर्म भगवान ने हमें महाव्रत धारण करके तप साधना का मार्ग बताया श्रावक के छह आवश्यक आठ मुलगुणों का पालन करने के साथ व्यसन त्याग का विस्तृत वर्णन किया।</p>
<p>भगवान ने आचार्य के 36 मूलगुण उपाध्याय के 25 मूलगुणों का मार्ग बताया। जन्म जरा मृत्यु पर्याय तक हमारी है। कर्म बंधन के कारण जीव कभी मनुष्य कभी देव कभी नरक पर्याय में जन्म लेता है।</p>
<p><strong>भगवान की दिव्यध्वनि सर्वांग से खिरती है </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने भगवान की दिव्य ध्वनि के विषय में सभी को बताया। उन्होंने कहा कि जब दिव्या ध्वनि खिर रही थी। संपूर्ण संसार में मेघ गर्जन प्रचारित हो रही थी। उन्होंने कहा कि दिव्य ध्वनि जिनेंद्र वाणी है। जो सर्वांग से खिरती है। भगवान ने दिव्य ध्वनि के माध्यम से आगम को समझाया। केवल ज्ञान की महिमा अनंत है। केवलज्ञानी अनंत पर्याय को देखता है। यह केवल ज्ञान की महिमा है। संपूर्ण कार्यक्रम में छायाचित्र में सक्रिय सहयोग आशु जैन कटनी, सन्नी जैन कटनी एवं उनकी टीम ने किया। बुधवार को पिच्छिका परिवर्तन एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा।</p>
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		<title>घटयात्रा ध्वजारोहण सकलीकरण से पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू : मुख्य पंडाल में श्री जी को विराजमान कर अभिषेक शांतिधारा की  </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Nov 2025 09:58:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। रामगंजमंडी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। साथ ही नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए घटयात्रा भी निकली। घटयात्रा में भी अपार उत्साह देखने को मिल रहा था। इसके उपरांत मुख्य पंडाल में श्री जी को विराजमान कर अभिषेक शांतिधारा की गई। वेदी शुद्धि, मंडप शुद्धि आदि की क्रियाएं की गई।</p>
<p>आयोजन की शुरुआत में ध्वजारोहण किया गया। यह भगवान स्वरूप पदमकुमार नीरजकुमार देवरी खानपुर वाले परिवार की ओर से किया गया। मंदिर जी का वातावरण भक्ति से ओतप्रोत रहा। इसी क्रम में इंद्र प्रतिष्ठा सकलीकरण आदि की क्रियाएं की गई। साथ ही याग मंडल विधान किया गया। दोपहर की बेला में भगवान की माता की गोद भराई की गई एवं भगवान के गर्भ कल्याण की खुशियां मनाई गई। इस महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सुधा जयकुमार डूंगरवाल परिवार को प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>हमें तीनों लोकों को ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। </strong></p>
<p>आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का महत्व समझाया। उन्होंने कहा हम अपने परमात्मा का गर्भकल्याणक मना रहे हैं। इसकी विशेषता है यह सामान्य नहीं है, इन क्षणों में तीनों लोक क्षण-क्षण के लिए सुकून प्राप्त करते हैं। ऐसे महान जीवों का हम गर्भ कल्याणक मनाते हैं। तीनों लोकों का ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। आचार्य श्री ने कहा यदि हमें तीनों लोकों को ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। हमे ही नहीं बनना पड़ता जन्मदाता को और गर्भधारण करने वाले को भी विशेष बनना पड़ता है।</p>
<p><strong>गर्भ कल्याणक ही आज मदर्स डे है </strong></p>
<p>उन्होंने गर्भ कल्याणक के विषय में कहा कि आज मदर्स डे है क्योंकि, गर्भ कल्याणक ही मां दिवस है। तीर्थंकर को गर्भ में धारण करने की योग्यता चाहिए। यह सबके बस की बात नहीं होती जो तीर्थंकर भगवान की अनंत भक्ति करते हैं। ऐसे जीव तीर्थंकर भगवान को गर्भ में धारण कर पाते हैं। परमात्मा से गले मिलकर नहीं जोड़ा जाता, परमात्मा को अपनी आस्था को जोड़ा जाता है। इतनी गहराई से जुड़ जाता है कि मनुष्य बने तो तीर्थंकर बन जाए महापुरुष बन जाए और महिलाएं हैं तो तीर्थंकर की माता बन जाए ऐसे जुड़ना चाहिए। आचार्य श्री ने पंचकल्याणक महोत्सव के लिए कहा कि यह पंचकल्याणक के 5 दिन आपके लिए अनमोल हैं। यह क्षण अमूल्य है आपके लिए तीन लोकों की संपत्ति एक तरफ है यदि आपका भाव कल्याणक के प्रति है, तीर्थंकर भगवान के पांचों कल्याणक हमारे भावों में हमारी क्रियाओं में चलने-फिरने में मात्र उनके कल्याणक और कुछ भी नहीं चाहिए, फिर देखो आनंद।</p>
<p><strong>झोली फैला रहे तो छोटी क्यों फैला रहे?</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने एक कथन के माध्यम से कहा कि यदि हम झोली फैला रहे हैं तो छोटी क्यों फैला रहे हैं ? इस विषय पर गुरुजी ने कहा कि इतनी बड़ी फैलाओं की देने वाला थक जाए, ऐसा मांगों की देने वाला सोच में पड़ जाए। लोग भगवान शांतिनाथ के समक्ष आकर कहते हैं कि मेरी दुकान नहीं चल रही, मेरी दुकान चल जाए। भगवान के समक्ष झोली इतनी बड़ी कर दो कि जैसे आप हो वैसा ही होना हमें जो आपके पास है वैसा का वैसा ही हमें चाहिए। उसमें सुई की नोक के बराबर भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं भगवान के सामने छोटा भिखारी बनकर नहीं जाता। मैं बड़ा भिखारी बनकर जाता हूं। भावना ही भा रहे हो तो ऐसी भाव की अदभुत हो। वह भावना अपनी आत्मा में ऐसी दस्तक दे दे ऐसा हस्ताक्षर दे दे कि आप भी तीर्थंकर हो, आप भी केवली हो। ऐसी भावना भाओ कमजोर भावना भाने से मतलब क्या है।यदि कमजोर भावना भाएंगे तो धराशाई हो जाएंगे। रामगंजमंडी के लोग कमजोर नहीं है। 5 दिनों में यही काम करना है कि अपनी भावनाओं को इतना ऊपर ले जाना है कि हमें अगर इच्छा हो तो भावना हो तो मोक्ष की हो तीर्थंकर पद की हो, मोक्ष की हो, अनंत चतुष्टय की हो।</p>
<p><strong>आज जो मैं हूं आचार्य श्री विराग सागर जी की वजह से हूं </strong></p>
<p>आचार्य श्री के गुरु आचार्य श्री विराग सागर महाराज के आचार्य</p>
<p>पदारोहण दिवस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज में जो कुछ भी हूं आचार्य श्री विराग सागर की वजह से हूं। अगर गुरुदेव नहीं होते तो मैं भी नहीं होता। मैं नहीं होता तो मेरे पास भी कुछ भी नहीं होता। सारी की सारी कृपा उनकी है और यह सारा आशीर्वाद उन्हीं का है। मनुष्य पर्याय को सार्थक करने के लिए आचार्यश्री विराग सागर जी ने मुझे वरदान दिया कि मुझे दिगंबर बनाया। उनके उपकारों को हम सिर्फ स्मरण कर सकते हैं। रविवार की बेला में जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। जन्म की खुशियां मनाई जाएगी। जन्म कल्याण की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचेगी, जहां बनी पांडुक शिला पर श्रीजी का अभिषेक होगा।</p>
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		<title>उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजन :  मोक्ष कल्याणक महोत्सव के साथ संपन्न हुआ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव </title>
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		<pubDate>Mon, 18 Nov 2024 06:23:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर बगदा के आर.पी. जैन फार्म हाउस में 12 नवंबर से चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का समापन 17 नवंबर को मोक्ष कल्याणक के साथ हुआ। इस आयोजन में मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक की विधि संपन्न हुई। पढ़िए शुभम जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर बगदा के आर.पी. जैन फार्म हाउस में 12 नवंबर से चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का समापन 17 नवंबर को मोक्ष कल्याणक के साथ हुआ। इस आयोजन में मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक की विधि संपन्न हुई।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> शमशाबाद रोड स्थित बरौली अहीर बगदा के आर.पी. जैन फार्म हाउस में 12 नवंबर से चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का समापन 17 नवंबर को मोक्ष कल्याणक के साथ हुआ। इस आयोजन में मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक की विधि संपन्न हुई। महोत्सव का शुभारंभ प्रतिष्ठाचार्य डॉ. अभिषेक जैन शास्त्री और सह प्रतिष्ठाचार्य डॉ. आकाश जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में हुआ। इंद्रों ने श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा के साथ पूजा की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69969" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1.jpeg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-18-at-11.50.05-AM-1-1320x879.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />इसके बाद श्री चंद्रप्रभु भगवान को श्री सम्मेद शिखरजी से निर्वाण की प्राप्ति के पश्चात अग्नि कुमार देवों ने नख केश का अग्नि संस्कार करते हुए मोक्ष कल्याणक की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं। आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और भगवान चंद्रप्रभु के चित्र का अनावरण आचार्य विद्यासागर नवयुवक मंडल के अध्यक्ष रोहित जैन और राहुल जैन &#8220;राहुल विहार&#8221; द्वारा किया गया। दीप प्रज्ज्वलन निर्मल जैन &#8220;मोठया&#8221; और अशोक जैन द्वारा किया गया। तत्पश्चात सभी उपस्थित इंद्र-इंद्राणियों ने प्रतिष्ठाचार्य जी के निर्देशन में विश्व शांति के लिए हवन में आहुति दी और विश्व शांति महायज्ञ की कामना की।</p>
<p>इस प्रकार, छह दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ। महोत्सव के दौरान, उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ने प्रभु के मोक्ष कल्याणक के महत्व को सभी भक्तों को समझाया। इसके बाद सौभाग्यशाली परिवारों ने आर.पी. जैन फार्म हाउस से 37 प्रतिमाओं को नवनिर्मित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, बगदा में लाया। यहां, उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज के मंत्रोच्चारण के साथ सभी प्रतिमाओं को नवीन वेदी पर विधिपूर्वक विराजमान किया गया। महोत्सव के समापन पर, भक्तों ने भगवान चंद्रप्रभु और भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं को रथ पर विराजमान कर श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर बगदा से उपाध्याय श्री के सानिध्य में बैंड बाजों के साथ श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर राहुल विहार तक शोभायात्रा निकाली।</p>
<p>इस अवसर पर सुधीर कुमार जैन, अनंत कुमार जैन, महेशचंद जैन, प्रदीप जैन, सुरेशचंद जैन, मनोज जैन, सुमन जैन, विवेक जैन, विशाल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, राहुल जैन सहित बेलनगंज, छीपीटोला, कमला नगर, सेक्टर 4, मोती कटरा और सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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