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	<title>पंचकल्याणक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>पंचकल्याणक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्राचीन प्रतिमा का होगा पंचकल्याणक नई भव्य प्रतिमा की होगी स्थापना : श्री 1008 शांतिनाथ शान्तोदय तीर्थक्षेत्र चांदपुर जहाजपुर में 8 से 13 अप्रैल तक पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 10:27:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य और मंगल आशीर्वाद में आगामी अप्रैल में जनपद ललितपुर की पावन धरा पर भव्य, नव्य और दिव्य श्री पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह महा महोत्सव 8 से 13 अप्रैल तक चलेगा। ललितपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; ललितपुर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य और मंगल आशीर्वाद में आगामी अप्रैल में जनपद ललितपुर की पावन धरा पर भव्य, नव्य और दिव्य श्री पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह महा महोत्सव 8 से 13 अप्रैल तक चलेगा। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री समयसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य और मंगल आशीर्वाद में आगामी अप्रैल में जनपद ललितपुर की पावन धरा पर भव्य, नव्य और दिव्य श्री पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह महा महोत्सव 8 से 13 अप्रैल तक प्राचीन एवं मूर्तिकला के केंद्र श्री शांतोदय तीर्थक्षेत्र, चांदपुर जहाजपुर (ललितपुर) में होगा। जिसमें प्राचीन प्रतिमा का पंच कल्याणक तथा नवीन भव्य प्रतिमा की स्थापना होगी। संचालन प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया जी सुयश (अशोकनगर) के निर्देशन तथा श्री जैन समाज पंचायत समिति ललितपुर के संयोजन में किया जाएगा।</p>
<p><strong>इन समाज जनों का पात्र के रूप में चयनित किया</strong></p>
<p>इसी क्रम में 16 मार्च, सोमवार को श्री अभिनंदनोंदय तीर्थक्षेत्र क्षेत्रपाल जैन मंदिर, ललितपुर में मुनि श्री के सानिध्य में पंचकल्याणक महामहोत्सव के लिए मुख्य पात्रों का चयन किया गया। नवीन मंदिर निर्माण, भगवान की प्रतिमा विराजमान एवं तिलक दानकर्ता के रूप में श्री सुनीलकुमार समैया, नीलेश कुमार (नीलू) समैया तथा समस्त रंग वाले समैया परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान के माता-पिता की भूमिका देवेन्द्र जैन सराफ, गुलशन सराफ, गौरव जैन, दक्ष जैन तथा समस्त निहारिका साड़ी सराफ परिवार को मिली।</p>
<p><strong>इन पात्रों का चयन किया</strong></p>
<p>सौधर्म इन्द्र के रूप में उमादेवी धन्य कुमार एड़, अमित जैन चंदन, आलोक जैन, प्रियंका जैन एवं श्रद्धा जैन (सैदपुर परिवार) को चयनित किया गया। महायज्ञ नायक के रूप में विकास जैन, मालती देवी, रुबी जैन, डॉ. वर्षा एवं हिमांशी जैन (करमई परिवार) को जिम्मेदारी सौंपी गई। धनपति कुबेर इन्द्र के रूप में सेठ अनुपम जैन (अंतू अनौरा) तथा समस्त अनौरा परिवार को चयनित किया गया।</p>
<p><strong>इनको भी मिला यह दायित्व</strong></p>
<p>भरत चक्रवर्ती इन्द्र के रूप में कीर्तिशेष राजेन्द्र जैन चौधरी के सुपुत्र आलोक कुमार, नीलेश कुमार एवं समस्त चौधरी परिवार को यह दायित्व मिला।</p>
<p>बाहुबली इन्द्र के रूप में प्रेमचंद्र जैन, नीरज जैन, अमित जैन, आशीष जैन तथा समस्त चड़रऊ परिवार को चयनित किया गया। राजा श्रेयांस की भूमिका श्री राजेन्द्र जैन थनवारा के सुपुत्र अंकित जैन (मोनू) को तथा राजा सोम के रूप में राजकुमार, आनंद कुमार, अरविन्द कुमार, अंकुर (सतपुरिया कुम्हैड़ी परिवार) को चयनित किया गया।</p>
<p><strong>इनका भी हुआ है चयन</strong></p>
<p>इसके अतिरिक्त ध्वजारोहणकर्ता के रूप में चंद्रकला जैन, डॉ. रमेशचंद्र एवं डॉ. सौरभ जैन (धौर्रा वाले), विधि नायक के रूप में मनोरमा जैन, डॉ. अरविन्द जैन (अध्यक्ष), अलका जैन, अमित प्रिय जैन, अनु जैन एवं अंश जैन (ऑप्टिकल्स परिवार) को जिम्मेदारी दी गई।</p>
<p>इसी प्रकार ईशान इन्द्र के रूप में वीणा जैन, डॉ. अजय जैन, काजल जैन, डॉ. अनिमेष जैन (गौना परिवार), सानतकुमार इन्द्र के रूप में धर्मेन्द्र जैन, संजीव जैन, सजल जैन (गुड़ वाले परिवार), माहेन्द्र इन्द्र के रूप में अजय कुमार, सुनील कुमार, सुधीर कुमार जैन परिवार तथा ब्रह्मेन्द्र इन्द्र के रूप में जितेन्द्र जैन, रागिनी जैन, सम्यक जैन (शिवाजी परिवार) को चयनित किया गया।</p>
<p><strong>देशभर से आएंगे श्रद्धालु</strong></p>
<p>महोत्सव में सम्पूर्ण पूजन द्रव्य सामग्री भेंटकर्ता के रूप में सेठ सुमंत चंद्र एवं श्रीमती संतोष सराफ, विशाल जैन, सोनिया जैन, सौरभ जैन, रूही जैन सहित समस्त सत्यवादी सराफ परिवार को पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहीं भोजनशाला के पुण्यार्जक के रूप में सेवानिवृत्त सीएमओ डॉ. महेन्द्र जैन (धौर्रा वाले) तथा ईख रस वितरण की सेवा सेठ वीरेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र कुमार, प्रदीप कुमार (बल्लू जैन), राजीव (राजू) एवं अभिषेक कुमार (अनौरा परिवार) द्वारा की जाएगी।</p>
<p>समाज के लोगों ने बताया कि यह महामहोत्सव पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव और श्रद्धा का विषय है तथा इसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।</p>
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		<title>तीर्थ चक्रवर्ती मुनिसंघ के सान्निध्य में देवोदय तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्र चयनित : धर्म ही सहारा, जिस पर संशय करना अहितकारी -मुनि सुधासागर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 15:07:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म मार्ग ही सबसे श्रेयस्कर मार्ग है। धर्म पर संशय करना अत्यंत अहितकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मनुष्य का एकमात्र सहारा है, जो पतित को पावन बनने का मार्ग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म मार्ग ही सबसे श्रेयस्कर मार्ग है। धर्म पर संशय करना अत्यंत अहितकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मनुष्य का एकमात्र सहारा है, जो पतित को पावन बनने का मार्ग दिखाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र, क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि धर्म मार्ग ही सबसे श्रेयस्कर मार्ग है। धर्म पर संशय करना अत्यंत अहितकारी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मनुष्य का एकमात्र सहारा है, जो पतित को पावन बनने का मार्ग दिखाता है। धर्म के माध्यम से व्यक्ति को अच्छे और बुरे का ज्ञान होता है तथा वह पापों से बचकर अपने जीवन का कल्याण कर सकता है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में प्रत्येक क्षण उतार-चढ़ाव और परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए हमें अपने कर्मों को सद्कार्यों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने धर्म के मार्ग को कल्याणकारी और श्रेयस्कर बताते हुए कहा कि वास्तव में कोई भी वस्तु पूर्णतः अच्छी या बुरी नहीं होती। श्रावक जीवन में व्यक्ति कई बार पापों से नहीं बच पाता और भूलवश पापों में फँस जाता है, किंतु वास्तविक शांति धर्म में ही निहित है।</p>
<p>धर्मसभा के शुभारंभ में मुनि श्री सुधासागर महाराज का पादप्रक्षालन आशीष कुमार नितन जैन, गौसलपुर द्वारा किया गया। महिला मंडल द्वारा संगीतमय पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तिभाव से अर्घ समर्पित किए गए। इससे पूर्व प्रातःकाल प्रभु अभिषेक के उपरांत शांतिधारा संदीप सर्राफ (अलंकार ज्वैलर्स), निर्मल कुमार जैन एडवोकेट (कुम्हैंडी), डॉ. अक्षय टडैया तथा अशोक जैन (दैलवारा परिवार) द्वारा संपन्न की गई।</p>
<p>धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन (एवी गैस) ने किया। मुनि संघ के सान्निध्य में आगामी 28 मार्च से देवोदय तीर्थ में आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के संयोजन में किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर सुलोचना जैन एवं अखिलेश जैन गदयाना को भगवान के माता-पिता, संजीव जैन एवं राजीव जैन ‘लकी’ को सौधर्म इन्द्र तथा सुरेशचंद जैन एवं संजीव जैन (सीए) को महायज्ञनायक के रूप में चयनित किया गया।</p>
<p>इसके अतिरिक्त धनपति कुबेर के रूप में सुनीता जैन एवं अशोक जैन (जाखलौन), भरत चक्रवर्ती के रूप में मनीषा जैन एवं जितेंद्र जैन (मुच्छड़, लागौन), बाहुबली इन्द्र के रूप में विनीत जैन एवं सुधा जैन (वीके गंगचारी), राजा श्रेयांस के रूप में अनीता एवं अनिल जैन (अंचल), राजा सोम तथा ध्वजारोहणकर्ता के रूप में संदीप सम्यक सर्राफ (अलंकार ज्वैलर्स) का चयन किया गया।</p>
<p>विधिनायक के रूप में ज्योति जैन, राकेश एवं अंशुल जैन (वडकुल), ईशान इन्द्र के रूप में रूबी जैन एवं संजय मोदी, सानत इन्द्र के रूप में देवेंद्र सर्राफ एवं गुलशन जैन (निहारिका साड़ी), ब्राह्मेन्द्र के रूप में विजय कुमार एवं गौरव जैन ‘टोनू’ (चिगलौआ), लानत्व इन्द्र के रूप में कोमलचंद एवं शैलेन्द्र जैन ‘वीटू’, ब्रह्मोत्तर इन्द्र के रूप में पवन जैन एवं मयंक (इलेक्ट्रॉनिक), तथा शुक इन्द्र के रूप में सनत कुमार एवं चंद्रेश जैन (मंडी बामौरा परिवार) चयनित हुए। इसके अतिरिक्त अनेक श्रावकों ने भी इन्द्र-इन्द्राणी के रूप में महोत्सव में सम्मिलित होने की अपनी स्वीकृति प्रदान की। धर्मसभा में प्रमुख रूप से चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी के अध्यक्ष हुकुमचंद ‘काका’, भागचंद जैन (सांगानेर), जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन (खजुरिया), मंदिर प्रबंधक पंकज जैन मोदी, अशोक दैलवारा, धार्मिक आयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन ‘रिंक’, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेन्द्र जैन (धनवारा), मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, संजीव जैन (ममता स्पोर्ट), जिनेन्द्र जैन (डिस्को), संजीव जैन (सीए), गौरव जैन ‘टोनू’, नरेन्द्र जैन ‘छोटे पहलवान’, मुकेश सर्राफ, सतीश जैन ‘बंटी’, मनोज जैन (बबीना), अजय जैन (साइकिल), अभिषेक अनौरा, वीणा जैन, अनीता मोदी, सुषमा जैन, सुधा सिमरैया, ममता मोहनी, संगीता नायक सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में आयोजित किया गया, जिसमें अनेक श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज से प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने धर्म से जुड़ने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी। महामंत्री आकाश जैन के अनुसार 16 मार्च को प्रातः 8:30 बजे आगामी 8 अप्रैल से शांतोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पात्रों का चयन किया जाएगा।</p>
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		<title>मध्यान्ह में हुआ केवलज्ञान कल्याणक : पंचकल्याणक स्थल पर मुनि वृषभसागर महाराज की इक्षुरस से आहारचर्या संपन्न </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 11:53:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के पाँचवें दिवस रविवार को प्रातःकाल मुनि श्री वृषभसागर महाराज की आहारचर्या संपन्न हुई तथा मध्यान्ह में केवलज्ञान कल्याणक का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। विदिशा के शीतलधाम के अधिष्ठाता बर्रो वाले बड़ेबाबा भगवान आदिनाथ के नए मंदिर में विराजमान प्रतिमाओं एवं बेदी प्रतिष्ठा सहित सभी नवीन जिनबिंबों की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के पाँचवें दिवस रविवार को प्रातःकाल मुनि श्री वृषभसागर महाराज की आहारचर्या संपन्न हुई तथा मध्यान्ह में केवलज्ञान कल्याणक का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। विदिशा के शीतलधाम के अधिष्ठाता बर्रो वाले बड़ेबाबा भगवान आदिनाथ के नए मंदिर में विराजमान प्रतिमाओं एवं बेदी प्रतिष्ठा सहित सभी नवीन जिनबिंबों की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का यह भव्य आयोजन जैन महाविद्यालय परिसर में संपन्न हो रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के पाँचवें दिवस रविवार को प्रातःकाल मुनि श्री वृषभसागर महाराज की आहारचर्या संपन्न हुई तथा मध्यान्ह में केवलज्ञान कल्याणक का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। विदिशा के शीतलधाम के अधिष्ठाता बर्रो वाले बड़ेबाबा भगवान आदिनाथ के नए मंदिर में विराजमान प्रतिमाओं एवं बेदी प्रतिष्ठा सहित सभी नवीन जिनबिंबों की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का यह भव्य आयोजन जैन महाविद्यालय परिसर में संपन्न हो रहा है। यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज तथा विद्यानिधि आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद और निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर महाराज के सान्निध्य में चल रहा है। प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया सम्राट एवं तरुण भैया, इंदौर के निर्देशन में सभी धार्मिक गतिविधियाँ संपन्न कराई जा रही हैं।</p>
<p>रविवार प्रातः 6 बजे से मांगलिक क्रियाएँ प्रारंभ हुईं तथा प्रातः 8:30 बजे मुनि श्री वृषभसागर महाराज की आहारचर्या सम्पन्न हुई। लगभग 400 दिनों के उपवास के उपरांत संपन्न हुई इस आहारचर्या में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूर्ण शुद्धता और श्रद्धाभाव के साथ इक्षुरस (गन्ने का रस) से आहार दान दिया। हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस और राजा सोम के पात्रों द्वारा नवधा भक्ति के साथ पढ़गाहन किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक मुनि श्री संभवसागर महाराज एवं मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने भगवान ऋषभदेव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दीक्षा के पश्चात प्रभु ने छह माह तक योग निरोध कर कठोर तपस्या की। जब वे आहार के लिए नगर में निकले, तब उस समय लोगों को जैन मुनिराज को आहार देने की विधि का ज्ञान नहीं था। लोग श्रद्धावश हाथी, घोड़े, सोना-चाँदी आदि भौतिक वस्तुएँ अर्पित करते थे, किंतु मुनिराज भौतिक वस्तुओं से विरक्त होने के कारण उन्हें स्वीकार किए बिना आगे बढ़ जाते थे।</p>
<p>इस प्रकार प्रभु नगर-नगर विहार करते हुए सात माह नौ दिन तक निराहार रहे। अंततः हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस और राजा सोम को जातिस्मरण से ज्ञान हुआ और उन्होंने नवधा भक्ति के साथ शुद्ध इक्षुरस से प्रभु को आहार अर्पित किया। इसी ऐतिहासिक घटना का प्रतीकात्मक आयोजन पंचकल्याणक महोत्सव में किया गया।</p>
<p>मध्यान्ह में मुनि संघ के सान्निध्य में विधीनायक प्रतिमा सहित सभी प्रतिमाओं पर अंकन्यास एवं कैवल्यज्ञान विधि मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई गई। शुभ मुहूर्त में भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति का विधान किया गया। इस अवसर पर कृत्रिम समवसरण की रचना भी की गई, जिसमें देव-देवियाँ विमान से उतरकर तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की पूजा करते हुए दर्शाए गए।</p>
<p>समवसरण में गणधर रूप में निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज तथा मुनि श्री संस्कार सागर महाराज विराजमान हुए और उपस्थित श्रावकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। सांयकाल प्रमुख पात्रों द्वारा समवसरण की आरती संपन्न की गई।</p>
<p>16 मार्च, सोमवार को प्रातः 6 बजे से मांगलिक क्रियाएँ प्रारंभ होंगी। प्रातः 6:45 बजे कैलाश पर्वत से भगवान का मोक्षकल्याणक विधान किया जाएगा। इसके पश्चात प्रमुख पात्रों एवं इंद्र परिवार द्वारा मोक्षकल्याणक की पूजन, विश्व शांति हेतु हवन तथा पूर्णाहुति संपन्न होगी।</p>
<p>इसके बाद प्रातः 9 बजे गज एवं रथ के साथ श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा के उपरांत नए मंदिर में बेदी प्रतिष्ठा के साथ बर्रो वाले बाबा भगवान श्री आदिनाथ स्वामी सहित सभी प्रतिमाओं का मस्तकाभिषेक किया जाएगा। विश्व शांति के लिए शांतिमंत्रों के साथ शांतिधारा होगी तथा मुनि श्री की देशना के साथ छह दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का समापन किया जाएगा। अंत में कार्यकर्ताओं का सम्मान एवं आभार प्रदर्शन किया जाएगा।</p>
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		<title>शीतलधाम में नए जिनबिम्बों का पंचकल्याणक अगले माह संभव: आचार्य गुरुदेव की जयजयकार के साथ घोषणा का स्वागत </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:38:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में विराजमान बर्राे वाले बड़े बाबा को उच्चस्थान पर विराजमान कराने एवं नवीन जिनबिम्बों का पंचकल्याणक कराने के लिए मार्च माह की संभावना है। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में विराजमान बर्राे वाले बड़े बाबा को उच्चस्थान पर विराजमान कराने एवं नवीन जिनबिम्बों का पंचकल्याणक कराने के लिए मार्च माह की संभावना है। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में विराजमान बर्राे वाले बड़े बाबा को उच्चस्थान पर विराजमान कराने एवं नवीन जिनबिम्बों का पंचकल्याणक कराने के लिए मार्च माह की संभावना है। सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया नगर में विराजमान मुनिश्री संभव सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री सकल दि. जैन समाज एवं श्री शीतलविहार न्यास के समस्त ट्रस्टियों एवं विभिन्न जिनालयों के पदाधिकारियों तथा मुनिसेवक संघ एवं समस्त महिला मंडलों की बैठक में जैसे ही मुक्तागिरी से पधारे प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया ने यह घोषणा की कि अगले माह मार्च में पंचकल्याणक एवं नवीन बेदी पर बर्राे बाले बाबा विराजमान हो सकते हैं। हर्ष ध्वनि के साथ आचार्य गुरुदेव की जयजयकार के साथ घोषणा का स्वागत किया गया गुरुदेव से आशीर्वाद लेने हेतु तुरंत मुक्तागिरी जाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर मुनि श्री सम्भवसागर महाराज एवं मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज के सानिध्य में हुई इस बैठक में सभी पदाधिकारियों ने नवीन जिनबिंब के पंचकल्याणक हेतु आचार्य श्री एवं विराजमान मुनिसंध से निवेदन किया तथा समाज ने संयुक्त रूप से इस कार्य को वृहद रूप से कराने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद तो आपके पर बरस ही रहा</strong></p>
<p>मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ने कहा कि जिस प्रतिमा की स्वयं गुरुदेव ने आकर मंगल अगवानी की है। वह प्रतिमा कोई साधारण प्रतिमा नहीं है। भगवान श्री आदिनाथ बर्राे वाले बाबा आपके नगर के इष्ट देवता है और उनको अपने नये आसन पर विराजमान करने के लिये पूरे विदिशा जिले को कमर कसकर तैयार हो जाना चाहिए। उन्होंने स्मरण कराते हुए कहा कि जैसे विदिशा वालों ने 2006 में कुंडलपुर में जाकर जिस प्रकार से बड़े बाबा को नये आसन पर विराजमान कराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी तो यह तो आपके अपने विदिशा नगर के ही बर्राे वाले बड़े बाबा की बात है। अतः सभी को तन मन और धन से अपने आपको तैयार करना है। आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद तो आपके पर बरस ही रहा है।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक हेतु निवेदन हेतु भक्तगण मुक्तागिरी के लिये रवाना हुए</strong></p>
<p>साथ ही साथ मुक्तागिरी में विराजमान वर्तमान आचार्यश्री समयसागर जी महाराज ने भी विदिशा वालों पर अपनी करुणा को बरसाई है। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया ने कहा कि बर्राे वाले बाबा का जो रूप हम सभी के सामने है। वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। आचार्य गुरुदेव के सामने जब 2008 में नये मंदिर में बड़े बाबा को विराजमान करने के लिये मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज से आशीर्वाद के लिए यह निश्चय किया गया कि श्री शीतलविहार न्यास कमेटी तथा श्री सकल दि. जैन समाज आचार्य गुरुदेव से पंचकल्याणक हेतु निवेदन हेतु भक्तगण मुक्तागिरी के लिये रवाना हुए।</p>
<p><strong>जितने संसाधन बढे़ है वह दुःख को बढाने वाले हैं</strong></p>
<p>प्रातः प्रवचन सभा में मुनि श्री ने कहा कि संसार के मकरजाल से ऊपर उठोगे तभी आप अपने जीवन का उद्धार कर सकते है। उन्होंने कहा कि काम भोग में क्षणिक सुख है, लेकिन बहु काल तक दुःख ही दुःख है। जिसको संसार अच्छा लगता है वह परिग्रह को बढाने में ही लगा रहता है। उन्होंने कहा कि कितनी भी धन संपत्ति बढ़ा लो वह आपके काम आने वाली नहीं है और जिनके लिये आप बड़ा रहे हो वह भी उसका उपभोग कर पायेंगे यह भी पक्का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मशीनी युग है। हमारा वैभव हमारा दिखावा ही दूसरों को चोरी करने के लिये उकसा रहे हैं। सभी अनर्थों का मूल्य यह परिग्रह ही है। जितने संसाधन बढे़ है वह दुःख को बढाने वाले हैं।</p>
<p><strong>हम रील लाइफ में अपनी रियल लाइफ को ही भूल चुके</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि हम रील लाइफ में अपनी रियल लाइफ को ही भूल चुके हैं। आजकल तो यह पता ही नहीं चलता कि कौन का किससे क्या संबंध है? मुनि श्री ने एक सत्य घटना बताते हुए कहा कि मेरे संपर्क में एक लड़का था। उसकी सगाई हो गई वह लड़का परेशान था। उसने आकर अपनी परेशानी बताई और कहा है कि जिससे हमारी सगाई हुई वह मेरा फोन नहीं उठाती। उसका फोन हमेशा बिजी आता है। हमने उसको समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन, उसके मन में जो संदेह का जन्म हुआ। उससे उनकी सगाई टूट गई। मुनि श्री ने कहा कि जितने संसाधन बढ़े हैं। उनकी भौतिक चकाचौंध में दुःख के कारण इतने अधिक हो गए है कि सुख कहीं दिखाई ही नहीं देता।</p>
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		<title>इंदौर में होगा श्री मञ्जिनेन्द्र 1008 श्री नेमीनाथ एवं चौबीस जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव: 15 से 20 मार्च 2026 तक नरीमन सिटी में भव्य आयोजन, महापात्र-पात्र एवं इन्द्र-इन्द्राणी बनने का सुअवसर </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 09:02:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजेश जैन ने बताया कि इंदौर के नरिमन सिटी स्थित श्री सुपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में 15 से 20 मार्च 2026 तक श्री मञ्जिनेन्द्र 1008 श्री नेमीनाथ एवं चौबीस जिनबिंब का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। 22 फरवरी को पात्र चयन कार्यक्रम रखा गया है। इन्दौर ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट  इंदौर। जैन समाज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजेश जैन ने बताया कि इंदौर के नरिमन सिटी स्थित श्री सुपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में 15 से 20 मार्च 2026 तक श्री मञ्जिनेन्द्र 1008 श्री नेमीनाथ एवं चौबीस जिनबिंब का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। 22 फरवरी को पात्र चयन कार्यक्रम रखा गया है। <span style="color: #ff0000">इन्दौर ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का अवसर आने वाला है। नरिमन सिटी स्थित श्री सुपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में रविवार, 15 मार्च से शुक्रवार, 20 मार्च 2026 तक श्री मञ्जिनेन्द्र 1008 श्री नेमीनाथ भगवान एवं चौबीस जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>यह महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्वितीय संगम होगा। पंचकल्याणक के पावन अवसर पर जिनबिंबों की प्रतिष्ठा, विविध धार्मिक अनुष्ठान, अभिषेक, पूजन एवं विशेष विधान संपन्न होंगे। यह आयोजन मुनि श्री आदित्य सागर महाराज के सानिध्य में किया जाएगा ।</p>
<p><strong>पात्र चयन कार्यक्रम</strong></p>
<p>महोत्सव में महापात्र, पात्र एवं इन्द्र-इन्द्राणी बनने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए रविवार, 22 फरवरी 2026 को प्रातः 9:30 बजे पात्र चयन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के पश्चात वात्सल्य भोज भी रखा गया है।</p>
<p><strong>आयोजन स्थल</strong></p>
<p>श्री सुपार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर, नरिमन सिटी, इंदौर (मध्यप्रदेश) में या आयोजन होगा । इस आयोजन</p>
<p>श्री दिगम्बर जैन मंदिर धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट, नरिमन सिटी, इंदौर किया जाएगा ।</p>
<p>मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रदीप बिलाला,मंत्री प्रवीण जैन,कोषाध्यक्ष निलेश मोदी द्वारा समाज के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया है।</p>
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		<title>छोटे-छोटे नियम की शक्ति से आत्मा को परमात्मा बना सकते : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 14:49:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभता से प्राप्त होता है। श्री आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी के तीर्थंकर कुल में आप सब ने जन्म लिया है। पदम प्रभ भगवान भी छठे तीर्थंकर हैं। उन्होंने भी राज्य का संचालन किया। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में चौथी बार प्रवेश के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभता से प्राप्त होता है। श्री आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी के तीर्थंकर कुल में आप सब ने जन्म लिया है। पदम प्रभ भगवान भी छठे तीर्थंकर हैं। उन्होंने भी राज्य का संचालन किया। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में चौथी बार प्रवेश के अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभता से प्राप्त होता है। श्री आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी के तीर्थंकर कुल में आप सब ने जन्म लिया है। पदम प्रभ भगवान भी छठे तीर्थंकर हैं। उन्होंने भी राज्य का संचालन किया। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में चौथी बार प्रवेश के अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि विरक्ति होने से वैराग्य धारण किया। तीर्थंकर भगवान जन्म से मति, श्रुत और अवधि ज्ञान के धारी होते हैं। दीक्षा लेने के बाद उन्हें मन् पर्यय ज्ञान भी प्राप्त हो जाता है। तप, तपस्या के बल पर 8 कर्मों को नष्ट कर केवलज्ञान प्राप्त होता है और वह सर्वज्ञ हो जाते हैं।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक 18 से 22 फरवरी तक संघ सान्निध्य में होगा</strong></p>
<p>वर्तमान में आप लोग मोबाइल हाथ में रखने से यह समझते हैं कि दुनिया हमारी मुट्ठी में हो गई है ,जबकि त्याग संयम कर भगवान बनने से दुनिया मुठ्ठी में होती है। सन 1969 में हमारी मुनि दीक्षा होने के बाद दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ प्रथम बार पदमपुरा दर्शन करने आए। उसके बाद सन 1980 में आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज के साथ हमारा वर्षायोग पदमपुरा में हुआ। उसके बाद वर्ष 2015 में भी पंच कल्याणक हमारे सानिध्य में हुआ। सन 1980 में श्री श्रुत सागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से रामचंद जी कोठारी ने पदमप्रभ भगवान की खड्गासन प्रतिमा निर्मित कराई थी। समाज ने प्रेरणा पाकर अब श्रीजी की चौबीसी का निर्माण कराया है। जिसका पंचकल्याणक 18 से 22 फरवरी तक संघ सान्निध्य में होगा।</p>
<p><strong>आर्यिकाश्री स्वस्ति भूषण माताजी ने संघ ने अगवानी की </strong></p>
<p>पंचकल्याणक में नीचे बैठकर देखने से आनंद नहीं आता है। मंच पर बैठकर पंचकल्याणक में भगवान की पूजन आदि धार्मिक क्रिया करने से आनंद आता है छोटे-छोटे नियम लेने से शक्ति मिलती है। जिससे आप आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए आगे बढ़ सकते हैं। धर्म देशना के पूर्व आचार्य श्री ने पद्म प्रभा भगवान के दर्शन संघ सहित किए। आचार्य संघ के आगमन पर पूर्व से विराजित आर्यिकाश्री स्वस्ति भूषण माताजी ने संघ सहित मंदिर के पदाधिकारी ,पंचकल्याणक समिति के साथ अगवानी कर चरण वंदना की। 9 फरवरी को आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी और आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी पदमपुरा दर्शन हेतु आ रहे हैं।</p>
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		<title>भामाशाह अशोक पाटनी आरके मार्बल ने आचार्यश्री के दर्शन किए : आचार्य श्री से अनेक धार्मिक विषयों पर चर्चा कर मार्गदर्शन लिया </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:14:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का निवाई से पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में होने वाले पंचकल्याणक के लिए मंगल विहार जारी है। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में 18 से 22 फरवरी तक श्रीमद् चौबीसी जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्यश्री वर्धमान सागर जी के प्रमुख सानिध्य में होगा। निवाई से राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; निवाई। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का निवाई से पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में होने वाले पंचकल्याणक के लिए मंगल विहार जारी है। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में 18 से 22 फरवरी तक श्रीमद् चौबीसी जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्यश्री वर्धमान सागर जी के प्रमुख सानिध्य में होगा। <span style="color: #ff0000">निवाई से राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का निवाई से पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में होने वाले पंचकल्याणक के लिए मंगल विहार जारी है। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में 18 से 22 फरवरी तक श्रीमद् चौबीसी जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्यश्री वर्धमान सागर जी के प्रमुख सानिध्य में होगा। बुधवार को भामाशाह अशोक पाटनी आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के रामपुरा में विहार के दौरान सड़क पर दर्शन किए। उन्होंने आचार्य श्री से अनेक धार्मिक विषयों पर चर्चा कर मार्गदर्शन लिया। इस अवसर पर पदमपुरा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के पदाधिकारी और टोंक, निवाई, जयपुर अन्य नगरों के समाजजन भी उपस्थित रहे। अशोक पाटनी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल विहार में जैन ध्वज लेकर नंगे पैर पैदल भी चले। उल्लेखनीय है कि अशोक जी पाटनी दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा पंच कल्याणक महा महोत्सव के परम शिरोमणि संरक्षक भी है।</p>
<p><strong>पदम प्रभु के दर्शन के लिए आचार्य संघ भी उत्साहित</strong></p>
<p>इसके पूर्व 4 फरवरी को आचार्य श्री संघ की आहार चर्या शर्मा तोल कांटा वेयर हाउस कोठून पर हुई। दोपहर को 6.4 किमी मंगल विहार कर रात्रि विश्राम ओमप्रकाश के परिसर बालाजी मंदिर रामपुरा जयपुर रोड पर हुआ। 5 फरवरी को आचार्यश्री वर्धमान सागर जी का 3 किमी विहार होगा तथा नाथू लाल जैन के परिसर चाकसू रोड पर आहरचर्या होगी। परमीत जैन, पवन बोहरा, मोहित चंवरिया, आशीष के अनुसार मंगल विहार में निवाई, जयपुर, टोंक ,बोली, किशनगढ़ आदि अनेक नगरों के पुरुष और महिलाएं चल रही है। राजनीतिक, सामाजिक पदाधिकारी भी आचार्य श्री का दर्शन कर रहे हैं। पदमपुरा के श्री पदम प्रभु के दर्शन के लिए आचार्य संघ भी उत्साहित है।</p>
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		<title>हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा के बीच तीरथंकर बालक का दिव्य जन्म; हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम : सौधर्म इंद्र हुए भावुक, 1008 कलशों से हुआ भगवान का अभिषेक – पीपलदा बना आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र </title>
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		<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 11:42:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पीपलदा में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन तीरथंकर बाल जन्म के अवसर पर भव्य शोभायात्रा, 1008 कलशों से अभिषेक और हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई। सौधर्म इंद्र भावविभोर हो उठे। हजारों श्रद्धालुओं ने दिव्यता का अनुभव किया। श्रीफल साथी राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट पीपलदा । पीपलदा, सवाई माधोपुर — आज का दिन इतिहास में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पीपलदा में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन तीरथंकर बाल जन्म के अवसर पर भव्य शोभायात्रा, 1008 कलशों से अभिषेक और हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई। सौधर्म इंद्र भावविभोर हो उठे। हजारों श्रद्धालुओं ने दिव्यता का अनुभव किया। <span style="color: #ff0000">श्रीफल साथी राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपलदा ।</strong> पीपलदा, सवाई माधोपुर — आज का दिन इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में पंचकल्याणक के दूसरे दिन तीरथंकर बालक का जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया।</p>
<p><strong>सौधर्म इंद्र हाथी पर सवार, विशाल शोभायात्रा निकली</strong></p>
<p>तीर्थंकर बालक श्री चंद्र कुमार के जन्म पर सौधर्म इंद्र हाथी पर सवार होकर निकले। उनके साथ अन्य इंद्र हाथियों और बग्घियों पर विराजमान हुए। शोभायात्रा नगर भ्रमण के बाद पाण्डुक शिला पहुंची जहां प्रथम कलश किया गया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95592" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251129-WA0008-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /> 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक</strong></p>
<p>दिव्य मंत्रोच्चार, वाद्यध्वनि और जयकारों के बीच 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक हुआ। चयनित पुण्यार्जक परिवारों ने बोली में चयन के बाद सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p><strong>जब सौधर्म इंद्र हुए भावुक…</strong></p>
<p>कहते हैं तीरथंकर बालक का रूप ऐसा होता है कि आंखें देखती रह जाएं। आज वही दृश्य पीपलदा में देखने को मिला—</p>
<p>सौधर्म इंद्र ने जैसे ही तीरथंकर बालक को अपनी बाहों में लिया, उनके नेत्र भर आए।</p>
<p>उनकी भावनाएं इतनी पवित्र थीं कि श्रद्धालु भी भावविभोर हो उठे।</p>
<p><strong>पहली बार हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा</strong></p>
<p>जन्म कल्याणक की खुशी में समर, पूर्वा, प्रमथेश, सावन और स्पर्श सहित इंद्र परिवार ने हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर वातावरण को स्वर्णिम बना दिया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संदेश</strong></p>
<p>प्रवचन में आचार्यश्री ने बताया—</p>
<p>“लोग जन्मदिन मनाते हैं, लेकिन तीरथंकरों का जन्म कल्याणक मनाया जाता है, क्योंकि वे अविनाशी ज्ञान, करुणा और अहिंसा के प्रतीक होते हैं।”</p>
<p>उन्होंने बताया कि भगवान जन्म से ही मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान और अवधि ज्ञान के धारी होते हैं और उनके 34 अतिशय होते हैं।</p>
<p><strong> पालना महोत्सव: पुण्य अर्जन का अवसर</strong></p>
<p>अभिषेक के बाद पालना महोत्सव हुआ जिसमें सबसे पहले इंद्र परिवार ने पालना झुलाया, फिर समाज के लोगों ने पालने का लाभ लिया।</p>
<p><strong>आगे होगा तपकल्याणक</strong></p>
<p>कल यानी 30 नवंबर को तपकल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा जिसमें राज्याभिषेक, वैराग्य दर्शन, गृह त्याग और हवन होगा।</p>
<p>रात्रि में महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।</p>
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		<title>बड़ागांव धसान में पंचकल्याणक महोत्सव का जन्मकल्याणक उत्सव धूमधाम से सम्पन्न : पांडुक शिला पर हुआ बालक आदिकुमार का जन्माभिषेक, शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 16:48:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़ागांव धसान में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तीसरे दिन जन्मकल्याणक का पावन उत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। शोभायात्रा पांडुक शिला पहुंची जहां सौधर्म इन्द्र सहित श्रद्धालुओं ने बालक आदिकुमार का जन्माभिषेक किया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… उदार सागर जनकल्याण तीर्थ क्षेत्र बड़ागांव धसान में आचार्य श्री उदार सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में चल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़ागांव धसान में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तीसरे दिन जन्मकल्याणक का पावन उत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। शोभायात्रा पांडुक शिला पहुंची जहां सौधर्म इन्द्र सहित श्रद्धालुओं ने बालक आदिकुमार का जन्माभिषेक किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>उदार सागर जनकल्याण तीर्थ क्षेत्र बड़ागांव धसान में आचार्य श्री उदार सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का तीसरा दिन मंगलवार को जन्मकल्याणक के नाम रहा। सुबह से ही नित्य नियम पूजा के उपरांत बालक आदिकुमार के दिव्य जन्म का संपूर्ण क्रम प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत द्वारा संपन्न करवाया गया।</p>
<p>पूरे दिन में इन्द्र सभा, शची सौधर्म वार्ता, सौधर्म इन्द्र का अवधिज्ञान द्वारा तीर्थंकर के जन्म को जानना, कुबेर इन्द्र व सौधर्म इन्द्र के बीच संवाद, सौधर्म इन्द्र का सप्तसेना सहित अयोध्या प्रस्थान, अयोध्या परिक्रमा, माता को मायामयी निद्रा में सुलाने से लेकर मायावी बालक का निर्माण और प्रसूति गृह से जिनबालक को सौधर्म इन्द्र को सौंपने तक की सभी विधियाँ पूर्ण धार्मिक विधि-विधान से आयोजित की गईं।</p>
<p>इसके बाद कलशाभिषेक के उपरांत जन्मकल्याणक की शोभायात्रा निकाली गई, जो मंगल विहार के विभिन्न मार्गों से होती हुई पांडुक शिला पहुंची। वहां सौधर्म इन्द्र सहित अन्य इन्द्रों और श्रद्धालुओं ने बालक आदिकुमार का जन्माभिषेक किया। भजनों की पावन ध्वनि — ‘आया मंगल दिन मंगल अवसर…’, ‘अमृत से गगरी भरो…’, ‘रोम रोम से निकले प्रभुवर नाम तुम्हारा…’ — के बीच श्रद्धालु भक्ति और आनंद में सराबोर हो गए। त्रिलोकीनाथ के जन्माभिषेक के इस पावन दृश्य ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। चारों ओर जयकारों की गूंज, भक्ति का वातावरण और दिव्य अनुष्ठान का प्रभाव पूरे तीर्थ क्षेत्र में छाया रहा।</p>
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		<title>मुनि भक्त समर कंठाली का मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने अभिनंदन किया : आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ के सान्निध्य में पंचकल्याणक में सौधर्म इंद्र बने थे  </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 10:36:08 +0000</pubDate>
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<p><strong>पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। कंठाली को तिलक लगाकर मोती की माला, पुष्पहार, दुपट्टा और पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। साथ ही सम्मान पत्र, श्रीफल व और शॉल भेंट की गई। इंजीनियर समर कंठाली विदेश में जॉब कर रहे थे लेकिन, उनका मोह विदेशी नौकरी से भंग हुआ और भारत लौट आए। प्रदेश की उद्योग नगरी इंदौर आए। यहीं उन्होंने अपना इनवेस्मेंट कंपनी खोलकर बिजनेस चालू किया। साथ ही खेती करना आरंभ किया। वे नई तकनीकी से खेती करवा रहे हैं और धीरे-धीरे धर्म की ओर अग्रसर हुए। उनकी माताजी ने आर्यिका दीक्षा ली। संघ में सेवाएं दीं। चातुर्मास में संत सेवा के लिए आहार चौका लगाया। अब पूर्णकालीन आहार चौका लगाने का संकल्प लेकर कार्य प्रारंभ किया। पुण्य जगा सौधर्म इंद्र बनने का आचार्य गुरु का आशीर्वाद मिला।</p>
<p>यह सभी गुरदेव के आशीर्वाद संत सेवा का फल है। इस दौरान ट्रस्ट सदस्य अजय जैन, महाप्रबंधक शशि श्रीवास्तव, मैनेजर कविता तोमर, भोजन प्रभारी प्रभुलाल स्वामी भी उपस्थित थे। सम्मान पत्र का वाचन दीपक प्रधान ने किया। इस अवसर उन्हें श्रावक श्रेष्ठी से अलंकृत किया गया। जैन मंदिर पहुंचकर अध्यक्ष महेश जैन, सुशीला जैन, सुरक्षा अजय जैन, राकेश जैन, नीलेश जैन, लोकेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष धीरेन्द्र जैन, प्रिया नीलेश जैन, महेंद्र टेंट मामी आदि समाजजनों की उपस्थिति में सम्मान किया गया।</p>
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