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	<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2 से 7 दिसंबर तक होगा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि धर्म की कठिन साधना श्रावक धर्म की सरल राह है मोक्ष मार्ग : मुनि श्री प्रमाणसागरजी ने झारखंड में दी मंगल देशना </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;  रांची। झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। <span style="color: #ff0000">रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रांची।</strong> झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। पांचवें दिवस केवल ज्ञान कल्याणक के अवसर पर समवसरण में गणधर पीठ से प्रवचन देते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि आत्मकल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को मुनि धर्म का पालन करने का प्रयास करना चाहिए, जो व्यक्ति मुनि धर्म का पालन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए जैन धर्म में श्रावक धर्म की सुव्यवस्थित परंपरा का विधान किया गया है। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में बताया कि जैन मुनि 28 मूलगुणों का पालन करते हुए तेरह प्रकार के चारित्र को अंगीकार करते हैं। ये अट्ठाईस मूलगुण ही मुनिव्रत की आधारशिला हैं, जिनके बल पर मुनि कठोर साधना में स्थिर रहकर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं तथा अपने चारित्र की दृढ़ता बनाए रखते हैं,उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए मुनि व्रत धारण करना संभव नहीं है, इसलिए गृहस्थों के लिए श्रावक धर्म का मार्ग बताया गया है। श्रावक धर्म को तीन प्रमुख श्रेणियों—पाक्षिक, नैष्ठिक और साधक—में विभाजित किया गया है। पाक्षिक श्रावक वे होते हैं जो जिनमत में श्रद्धा रखते हुए कुलाचार का पालन करते हैं, देव-गुरु-धर्म की उपासना करते हैं तथा रात्रि भोजन का त्याग करते हैं। इसके बाद नैष्ठिक श्रावक अधिक निष्ठा के साथ धर्म का पालन करते हैं, जिनके जीवन में ग्यारह प्रतिमाओं का क्रमिक विकास होता है, जो आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ियाँ मानी जाती हैं। मुनि श्री ने कहा कि साधक श्रावक उच्च आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचकर संसार, शरीर और भोगों से विरक्त हो जाते हैं तथा पंच गुरु की शरण स्वीकार करते हैं। वे क्रमशः व्रतों और गुणों में वृद्धि करते हुए अंततः संलेखना (समाधि मरण) के माध्यम से शांतिपूर्वक देह का त्याग करते हैं,मुनि श्री ने कहा कि श्रावक अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार पाक्षिक से नैष्ठिक और आगे साधक अवस्था की ओर अग्रसर हो सकता है,जीवन भर कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए अंत में संलेखना द्वारा देह का परित्याग करना ही जीवन का वास्तविक सार है।</p>
<p>जैन धर्म की यह महान परंपरा स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर धर्म का पालन करते हुए आत्मशुद्धि के मार्ग पर अग्रसर होकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने किया उत्कृष्ट कैशलोंच</strong></p>
<p>आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी के शिष्य एवं मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के प्रभावक संघस्थ तपस्वी मुनि श्री संधान सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के चतुर्थ दिवस तप कल्याणक के अवसर पर बिरसा मुंडा फन पार्क के प्राकृतिक वातावरण में अद्वितीय तप का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सिर, दाढ़ी और मूंछों के केशों को स्वयं अपने हाथों से राख के सहारे उखाड़कर उत्कृष्ट कैशलोच किया। मुनिसंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रत्येक दो माह में इस प्रकार का कठोर कैशलोच करते हैं। इस अद्भुत तपस्या को देखने के लिए पंचकल्याणक स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्यस्त कार्यक्रम और भीड़भाड़ के बावजूद मुनि श्री प्रतिदिन अपर बाजार स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं रातू रोड स्थित बासुपूज्य जिनालय के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जो उनकी अटूट साधना और अनुशासन का प्रतीक है।</p>
<p><strong>कैवल्यज्ञान कल्याणक पर गूंजा शंखनाद </strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिवस कैवल्य ज्ञान कल्याणक की भव्य पूजा हुई। प्रातःकाल मुनि वृषभ सागर महाराज की आहार चर्या के पश्चात दिन में भगवान के कैवल्यज्ञान से संबंधित समस्त क्रियाएं मुनिसंघ द्वारा शंखध्वनि के साथ संपन्न कराई गईं। समवसरण सभा में गणधर परमेष्ठी के रूप में मुनि श्री प्रमाणसागर जी, मुनि श्री संधान सागर जी महाराज एवं भावी मुनि श्री समादर सागर जी महाराज सहित ब्रह्मचर्य धारण करने वाले साधकों एवं प्रतिष्ठाचार्यों ने मुनि श्री से धार्मिक शंकाओं को रखा जिसे मुनि श्री ने तत्क्षण गूढ़ प्रश्नों के उत्तर देकर सभी को संतुष्ट किया।</p>
<p><strong>6 अप्रैल को मोक्ष कल्याणक, फिर सम्मेदशिखर जी की ओर मंगलविहार</strong></p>
<p>महामहोत्सव के अंतिम दिवस 6 अप्रैल को प्रातः बेला में भगवान के मोक्ष कल्याणक की पूजा संपन्न होगी। इसके उपरांत मुनिसंघ का मंगलविहार पावन तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी की ओर प्रारंभ होगा। इस मंगलविहार में शामिल होने हेतु रांची ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।</p>
<p><strong>सम्मेदशिखर में ऐतिहासिक जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव</strong></p>
<p>मुनिसंघ 15 अप्रैल को श्री सम्मेदशिखर जी में मंगल प्रवेश करेगा।16 एवं 17 अप्रैल को विभिन्न धार्मिक विधान एवं मांगलिक कार्यक्रम होंगे जबकि, 18 अप्रैल को गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज द्वारा पहली बार सम्मेदशिखर तीर्थराज पर जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य अवसर पर झारखण्ड़,मध्यप्रदेश, पश्चिमबंगाल,महाराष्ट्र, गुजरात एवं राजस्थान सहित पूरे देश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था</strong></p>
<p>गुणायतन परिवार द्वारा 17, 18 और 19 अप्रैल को तीन दिवसीय विशेष व्यवस्था की गई है। जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं शुद्ध भोजन की उत्तम व्यवस्था रहेगी।गुणायतन परिवार के पदाधिकारियों ने देशभर के श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दीक्षा महोत्सव के साक्षी बनने हेतु अवश्य पधारें एवं पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के लिए जैन महाविद्यालय परिसर में बनी अयोध्या नगरी : मुनि श्री विमलसागर महाराज, मुनि श्री अनंतसागर महाराज ससंघ का रविवार को होगा मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 10:40:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नवीन प्रतिमाओं का पंचकल्याणक महा महोत्सव 11 से 16 मार्च तक संत आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर जी, महाराज मुनि श्री संस्कार सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में होंगे। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नवीन प्रतिमाओं का पंचकल्याणक महा महोत्सव 11 से 16 मार्च तक संत आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर जी, महाराज मुनि श्री संस्कार सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में होंगे। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> 10वें तीर्थंकर भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी के चार कल्याणकों से पवित्र भूमि पर बनने जा रहे विशाल समवशरण के पंचकल्याणक की पूर्व भूमिका में शीतलधाम के अधिष्ठाता एवं नगर के इष्टदेव भगवान श्री आदिनाथ स्वामी बर्रो वाले भगवान के नवीन जिनालय में विराजमान होने जा रही सभी नवीन प्रतिमाओं का पंचकल्याणक महा महोत्सव 11 से 16 मार्च तक संत आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर जी, महाराज मुनि श्री संस्कार सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में होंगे। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि जैन महाविद्यालय के विशाल प्रांगण में 25 हजार वर्ग फिट के विशाल डोम के माध्यम से आयोध्या नगरी की रचना की गई है। जिसमें लगभग पांच हजार श्रावक-श्राविकाएँ एक साथ बैठकर भगवान जिनेन्द्र देव की पूजन करेंगे। प्रतिदिन भगवान के पंचकल्याणक अर्थात गर्भ, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान तथा मोक्ष कल्याणक की पूजा तथा जीवन से संबंधित सभी प्रमुख घटनाओं का सजीव चित्रण किया जाएगा।</p>
<p><strong>तीन भोजनशाला बनाई</strong></p>
<p>प्रतिदिन प्रातः6 बजे से रात्री 10 बजे तक पंचकल्याणक सम्वंधित सभी मांगलिक कार्यक्रम होंगे। कार्यक्रम स्थल पर 11 अस्थायी दुकानें लगाई गयी हैं।,जिसमें हथकरघा, शांतीधारा तथा विभिन्न रोजमर्रा की वस्तु विक्रय हेतु उपलब्ध रहेंगी। इसके साथ ही तीन भोजनशाला जिसमें एक भोजनशाला सामान्य सभी श्रद्धालुओं के लिये तथा दूसरी भोजनशाला में इंद्र- इंद्राणिओं के लिये तथा तीसरी भोजनशाला त्यागी वृति प्रतिमाधारियों के लिये बनाई गयी है। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिये माधवगंज स्थित शीतल भवन एवं शीतलधाम पर रुकने की व्यवस्था की गयी है।</p>
<p><strong>प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें</strong></p>
<p>सभी व्यवस्थाओं के लिये विभिन्न समितियां बनाई गयी है जिससे किसी को कोई दिक्कत न हो। इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि यह विदिशा बालों का पुण्य है कि उनको भगवान का यह पंचकल्याणक देखने का सुअवसर मिल रहा है। इसलिये सभी लोग अपने अपने पुण्य की सराहना करें और इस दौरान प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि गंज बासोदा से मुनि श्री विमलसागरजी महाराज एवं मुनि श्री अनंतसागरजी महाराज ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। शनिवार की आहार चर्या गुलाब गंज में हुई। रविवार को प्रातः विदिशा शहर में मंगल अगवानी की संभावना है।</p>
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		<title>मोह मिथ्यात्व और अज्ञान ही जीव के भटकाव का मूल कारण : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ने बताया सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 14:11:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; बुढ़ार। नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। <span style="color: #ff0000">बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बुढ़ार।</strong> नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। मुनि श्री ने कहा कि इस अनादि संसार में जीव चारों गतियों और 84 लाख योनियों में निरंतर भटक रहा है,उसके इस भटकाव का मूल कारण उसके अंतर में पलने वाला मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान है। उन्होंने नरक गति का वर्णन करते हुए कहा कि वहाँ जीव को असहनीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं। कभी उसे कड़ाही में डाला जाता है तो कभी तलवार की तीक्ष्ण धार का सामना करना पड़ता है, मानो हजारों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मार दिए हों। नरक से निकलकर जीव कभी एक इंद्रिय, कभी द्वि-इंद्रिय, फिर तिर्यंच गति में भ्रमण करता हुआ मनुष्य जन्म प्राप्त करता है किंतु, मनुष्य जीवन में भी वह कभी भिखारी बनकर कष्ट भोगता है। मुनि श्री ने कहा कि मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान आत्मा के प्रबल शत्रु हैं। इन्हीं के कारण जीव अपने आत्मस्वरूप से दूर होकर पंचेंद्रिय विषयों तथा क्रोध, मान, माया, लोभ जैसी कषायों में फँसकर पाप और दुर्गतियों का भागी बनता है।</p>
<p><strong>सम्यक दर्शन ही धर्म का मूल</strong></p>
<p>समवसरण में विराजमान मुनि श्री प्रसाद सागरजी, मुनि श्री शीतलसागर जी, मुनि श्री संधानसागर जी तथा</p>
<p>क्षुल्लक श्री समादर सागर जी महाराज, बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया,बाल ब्रह्मचारी अभय भैया</p>
<p>ने भी धार्मिक प्रश्न प्रस्तुत किए। जिनका समाधान मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने औंकार ध्वनि के साथ किया। उन्होंने कहा कि जब तक जीव अपने आत्मस्वरूप को नहीं समझेगा तब तक उसे सम्यक दर्शन की प्राप्ति नहीं हो सकती। भव-बन्धन से मुक्ति का एकमात्र उपाय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र रूपी रत्नत्रय की पूर्णता है। दर्शन मूलो धम्मो का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार है। बिना सम्यक्त्व के न ज्ञान शुद्ध होता है और न चरित्र।</p>
<p><strong>‘भगवान महावीर द्वार’ का ऐतिहासिक शिलान्यास</strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर एक और ऐतिहासिक क्षण जुड़ा जब प्रातःकाल मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की मंगलमय उपस्थिति में भगवान महावीर द्वार का विधिवत शिलान्यास हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक जय सिंह मरावी, नगर परिषद अध्यक्षा शालिनी सरावगी एवं परिषद सदस्यों ने श्रद्धा-भक्ति के साथ शिलान्यास किया। धर्ममय वातावरण में जयघोष गूँज उठा। मुनि श्री ने कहा कि</p>
<p>जब कोई नगर में भगवान के नाम के साथ प्रवेश करता है तो उसके सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। ‘भगवान महावीर द्वार’ केवल निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक बनेगा। इस अवसर पर राज्यमंत्री दिलीप जयसवाल, कलेक्टर केदार सिंह तथा अन्य गणमान्य जनों ने समवसरण में श्रीफल समर्पित किया। भागवत कथा वाचक डॉ. मदनमोहन मिश्र (चित्रकूट धाम) भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है: राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित होगा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव  </title>
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		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 13:47:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु सान्निध्य के बाद भी जिनके अंदर भक्ति भाव नहीं उभर पाता। उनका कभी उद्धार नहीं हो सकता। हमने न केवल गुरु को पाया अपितु गुरु ने हमारे ऊपर कृपा बरसा कर हमें अपना प्रतिनिधि बनाया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ का यह अल्पप्रवास है उनको राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के लिये जाना है। अतः यह बीच का समय विदिशा नगर को मिल गया। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों पर 1992 से जो गुरु कृपा बरसी वह फिर लगातार बरसती रही और इस शहर को जैन धर्म के दशवंे तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ के नाम से पहचान दी।</p>
<p><strong>भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए</strong></p>
<p>जब मैं वर्ष 1992 में विदिशा आया था तब मैंने अनेक ग्रंथों को पढ़ा और शोध किया था तब यह बात प्रमाणिक हो गयी थी कि वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है। यहां पर तीन शिलालेख साक्ष्य प्राप्त हुए थे। जिसमें सबसे पहला श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्री पारसनाथ भगवान के पादमूल में 500 साल पुराना शिलालेख है। दूसरा विदिशा के एक प्राचीन कुएं में भद्दिलपुर लिखा मिला जो लगभग 800 साल पुराना है तथा तीसरा राजस्थान के चांदखेड़ी के एक शिलालेख में विदिशा का नाम भद्दिलपुर अंकित है। उसी समय पर एक किताब भी छपी थी। ‘पावन कल्याणक भूमि भद्दिलपुर पर एक अध्ययन’। मुनि श्री ने कहा कि भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए। ,क्षेत्र का विकसित होंना बुरा नहीं है पर जन्मभूमि तो एक ही है और यह तुम्हारा भद्दिलपुर है।</p>
<p><strong>एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे</strong></p>
<p>जहां गुरुदेव की कृपा बरसी और यह उतुंग समवशरण तुम लोगों के बीच में है। काम अपनी गति से चल रहा है और आप लोगों ने इसमें बहूत कुछ लगाया भी है लेकिन, अब जबकि कार्य पूर्णतः की ओर है। उसमें पूरी तरह लगे रहने की जरूरत भी है। जितना उत्कृष्ट कार्य आप कर सकते हैं। उतना उत्कृष्ट कार्य आप लोग कीजिए। उन्होंने कहा कि प्रण कर लो और पूरी समाज मिलजुलकर एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे। मुनि श्री ने कहा कि इतना उतंग समवशरण पूरे भारत में कहीं नहीं बना। आप सभी लोग कमर कसके तैयार हो जाइये। उन्होंने कहा कि मुनिश्री संभवसागरजी महाराज जी यहां पर हैं ही उनके मार्गदर्शन में वह जैसा कहें इस काम को आगे बढ़ाओ। सभी लोग सकारात्मक एवं सहयोगात्मक दृष्टि रखकर बाकी बातें गौण करें।</p>
<p><strong>ागवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री संभवसागर महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में जो सूखा क्षेत्र था आचार्य गुरुदेव की ऐेसी कृपा हुई कि सूखा क्षेत्र हरियाली में परिवर्तित हो गया। उन्होंने कहा कि यह जो विशाल समवशरण देख रहे हैं। यह विदिशा वालों की गुरु भक्ति का प्रदर्शन ही है। भगवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है। यह मध्यप्रदेश का ऐसा पहला क्षेत्र है जहां पर भगवान के चार कल्याणक हुए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकृपा का आशीर्वाद है, जो हम सभी पर बरसा एवं 25 वर्ष तक लगातार संयोग मिला। उन्होंने कहा कि भले ही आज गुरुदेव नहीं है लेकिन, हम सभी के बीच में आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि बड़े भाई प्रमाणसागर महाराज आए हैं। हम सभी को बहूत अच्छा लगा और हम सभी उनको ही सुनने के लिये आतुर है।</p>
<p><strong>आहार चर्या का सौभाग्य अर्जित किया </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ ने दोपहर में समवशरण मंदिर का अवलोकन किया। भविष्य में विदिशा को एक नई पहचान देगा। यह कला एवं स्थापत्य का अदभुत उदाहरण है। मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज को निरंतराय आहार कराने का सौभाग्य बसंत जैन, सचिन जैन परिवार को मिला। वहीं मुनि श्री संभवसागरजी महाराज के आहार का सौभाग्य शीतल महिला मंडल को मिला।</p>
<p><strong>मंगलवार को यह होंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>द्वय मुनि संघ के मंगल सानिध्य में मंगलवार को चतुर्दशी पर प्रातः7.30 से 1008 भगवान आदिनाथ बर्राे बाले बाबा का महा मस्तकाभिषेक होगा तथा मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा होगी। 8.30 बजे से मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 10 बजे आहार चर्या शीतलधाम से संपन्न होगी। शीतलविहार न्यास एवं श्री सकल दिगंबर जैन समाज सभी धर्मश्रदालुओं से निवेदन करता है कि समय पर पधारें और धर्मलाभ लें।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव 16 से: आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी ससंघ के सान्निध्य में होगा भव्य आयोजन  </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 15:06:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ श्री बाबूलाल ताराबाई जैन धर्मार्थ ट्रस्ट, बीटीआई आरटी परिसर, सिरोंजा, सागर में आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया के निर्देशन में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। यह आयोजन 16 से 21 नवंबर तक होगा। सागर से पढ़िए, यह खबर&#8230; सागर। श्री बाबूलाल ताराबाई जैन धर्मार्थ ट्रस्ट, बीटीआई आरटी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> श्री बाबूलाल ताराबाई जैन धर्मार्थ ट्रस्ट, बीटीआई आरटी परिसर, सिरोंजा, सागर में आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया के निर्देशन में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। यह आयोजन 16 से 21 नवंबर तक होगा। <span style="color: #ff0000">सागर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> श्री बाबूलाल ताराबाई जैन धर्मार्थ ट्रस्ट, बीटीआई आरटी परिसर, सिरोंजा, सागर में आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया के निर्देशन में, पंडित सनत कुमार जैन, पंडित विनोद कुमार जैन के प्रतिष्ठाचार्यत्व में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव 16 से 21 नवंबर तक होने जा रहा है। महोत्सव कराने का पुण्यार्जन सिंघई सुरेंद्रकुमार संतोषकुमार जैन ‘घड़ी’, शैलेंद्र सिंघई, डॉ. सत्येंद्र जैन, संदीप जैन बीटीआई आरटी परिवार सागर को प्राप्त हुआ है। महोत्सव की तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं। महोत्सव के प्रचार संयोजक डॉ. सुनील संचय ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारी संबंधी बैठक रखी गई।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94161" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034.jpg" alt="" width="1280" height="851" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251110-WA0034-990x658.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> इसमें जन प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों को आयोजक संतोष जैन घड़ी, स्वागत अध्यक्ष विधायक शैलेंद्र जैन सागर ने महोत्सव संबंधी जानकारी दी। इस मौके पर आयोजन स्थल का भी अवलोकन किया गया। आयोजन में सम्मिलित होने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई भी परेशानी न हो।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी : पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2 से 7 दिसंबर तक होगा </title>
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		<pubDate>Thu, 28 Nov 2024 13:29:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंबर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंबर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंम्वर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया, नितिन भैया, अनिल भैया के निर्देशन में श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर के पास वैभव नगर में धर्म प्रभावना समिति के नवरत्न परिवार के साथ संपन्न होने जा रहा है। जिसका मुख्य संयोजक हर्ष जैन महामंत्री धर्मप्रभावना समिति को बनाया गया है।</p>
<p><strong>2 दिसंबर सुबह 7 बजे निकलेगी घटयात्रा</strong></p>
<p>2 दिसंबर को प्रातः7 बजे घटयात्रा श्रीजी की शोभायात्रा के साथ गोयलनगर जिनालय से प्रारंभ होकर कार्यक्रम स्थल वैभवनगर तक आएगी। यंहा पर ध्वजारोहण तथा मंडप उदघाटन, मंडप शुद्धि होकर सकलीकरण एवं इंद्र प्रतिष्ठा होगी। दोपहर 1 बजे से याज्ञमंडल विधान एवं हवन होगा एवं रात्रि 8.30 बजे से सौधर्म इंद्र का दरबार लगेगा। जिसमें तत्वचर्चा, कुबेर द्वारा रत्नवृष्टी माता के सोलह स्वप्नअष्ठ कुमारी देवियों द्वारा माता की सेवा आदि दृश्य दिखाऐ जाऐंगे।</p>
<p><strong>सभी धर्म श्रद्धालुओं से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में पधारने का किया अनुरोध</strong></p>
<p>3 दिसंबर को गर्भ कल्याणक उत्तरार्ध एवं 4 दिसंबर को जन्म कल्याणक की क्रियायें संपन्न होंगी। 5 दिसंबर को तप कल्याणक एवं 6 दिसंबर को ज्ञान कल्याणक एवं 7 दिसंबर को मोक्षकल्याणक मनाया जाएगा। धर्मप्रभावना समिति के सभी नवरत्न भरतमोदी, मुकेश पाटौदी, नवीनगोधा, अशोक डोसी, हर्ष जैन, रमेश निर्वाणा, सुनील विलाला, योगेंद्र सेठी, धर्मेन्द्र जैन सहित सकल दिगंबर जैन समाज इंदौर सभी धर्म श्रद्धालुओं से निवेदन करती है कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव कार्यक्रम में पधार कर पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
<p><strong>उपभोक्तावादी सोच ने आज सभी संबंधों को भी समाप्त कर दिया है &#8211; मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी</strong></p>
<p>मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी ने नेमीनगर दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुये चार बातें- आसक्ति, अत्यासक्ति, अनासक्ति और विरक्ति पर चर्चा करते हुये कहा कि &#8220;वस्तु, व्यक्ति, धन संपत्ति अथवा देहआकर्षण के प्रति लगाव ही आसक्ति और अनासक्ति को जन्म देता है और वह दुःख प्रदान करता है। मुनि श्री ने कहा कि सबसे ज्यादा हमारा आकर्षण देह के प्रति होता है &#8220;पहले तो माता बहनें ही ब्यूटी पार्लर जाती थीं लेकिन आजकल तो पुरुष भी जाने लगे हैं&#8221; मुनि श्री ने कहा कि अपने शरीर के प्रति जागरूकता रखो लेकिन उसके प्रति इतने आसक्त मत हो जाओ कि देह के पीछे उस विदेही को ही भूल जाओ। उन्होंने कहा कि शरीर एक साधन है, विवेकहीन मनुष्य इस शरीर के माध्यम से जंहा संसार को पुष्ट करते हैं वहीं विवेकवान पुरुष इस शरीर के माध्यम से अपनी आत्मा को पुष्ट करते हैं। जो व्यक्ति संसार, शरीर और भोगों की वास्तविकता को समझता है वह इसमें रमता नहीं, उसे शरीर की क्षणभंगुरता का अहसास होता है और वह वैराग्य को धारण कर अपने जीवन का उद्धार कर लेता है। जो इसमें उलझा रहता है वह अपने संसार को और बढाता है।&#8221; मुनि श्री ने कहा कि पुरानी पीढ़ी में पैसा को जोड़ने की कला थी। वह अनावश्यक खर्च नहीं करते थे। वहीं नयी पीढ़ी में धन की कमी तो है नहीं, खूब कमाते हैं और सब कुछ भोगों में खर्च कर देते हैं। भोगासक्ति की इस आदत से पिज्जा, बर्गर आदि फास्ट फूड और तरह-तरह की वस्तुऐं आनलाईन मंगा लेते हैं तथा बीमारियों से घिरे रहते हैं। वर्तमान समय में उपभोक्तावादी सोच ने आज सभी संबंधों को भी समाप्त कर दिया है तथा व्यक्ति देह आकर्षण में उलझ कर रह गया है। धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया दोपहर 1.30 बजे मुनिसंघ गुमास्ता नगर, सुदामा नगर इंद्रलोक आदि कालोनियों के जिनालयों के दर्शन करने गये। सांयकाल का शंका समाधान एवं रात्रि विश्राम नेमीनगर में ही हुआ।</p>
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