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	<title>निवाई &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>निवाई &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रुत को वर्धमान कर शीतल करने का स्वर्णिम सफर : जल के अतिरिक्त शेष सभी आहार सामग्री का त्याग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 12:33:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी के अंतिम मुनि शिष्य आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी से माध सुदी पंचमी वर्ष 1972 में दीक्षित 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति ने आचार्य श्री वर्धमान सागर के समक्ष जल के अतिरिक्त सभी पदार्थों का त्याग निवाई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी के अंतिम मुनि शिष्य आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी से माध सुदी पंचमी वर्ष 1972 में दीक्षित 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति ने आचार्य श्री वर्धमान सागर के समक्ष जल के अतिरिक्त सभी पदार्थों का त्याग निवाई में 19 जनवरी को किया। आर्यिका श्री शीतल मति माताजी ने आचार्य श्री एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमायाचना की। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई</strong>। 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति जी के माघ सुदी 5 पंचमी सन 1972 अनुसार 54 वें दीक्षा वर्ष दिवस पर कोटिश वंदामि। आचार्य श्री शांतिसागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी के अंतिम मुनि शिष्य आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी से माध सुदी पंचमी वर्ष 1972 में दीक्षित 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति ने आचार्य श्री वर्धमान सागर के समक्ष जल के अतिरिक्त सभी पदार्थों का त्याग निवाई में 19 जनवरी को किया। आर्यिका श्री शीतल मति माताजी ने आचार्य श्री एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमायाचना की। इस अवसर पर आर्यिका श्री शीतल मति जी ने संक्षिप्त उद्बोधन में सभी पूर्वाचार्यों को ,दीक्षागुरु आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी को स्मरण आचार्य भक्ति पूर्वक कहा कि मैं आचार्य शिवसागर जी के समय से संघ में हूं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संल्लेखना भावना रूपी नैया पार करा दो। गुरु संघ सानिध्य में सभी प्रकार के परिग्रह का त्याग कर धार्मिक भक्ति संग्रह गुटका रखूंगी। अगले आहार में मात्र जल ही लूंगी। संघ में 60 वर्ष हो गए हैं। किसी के प्रति राग द्वेष कषाय मोह उत्पन्न हुआ हो, कोई गलती हुई हो तो आचार्य श्री एवं समस्त साधुओं सहित सबसे क्षमा याचना करती हूं। आचार्य पद पर आचार्य श्री को 36 साल हो गए हैं। गुरुवर के सानिध्य में मेरी समाधि हो, आत्मा की उन्नति हो, आचार्य श्री मुझे क्षमा करें।</p>
<p><strong>गुरु की शरण में मृत्यु पर विजय का मार्ग प्राप्त होता है</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने श्री शीतलमति जी को संबोधित कर बताया कि श्रीमद् जैन धर्म में जन्म के बाद मृत्यु को कैसे विजय प्राप्त कर वरण किया जाता है, इसका वर्णन है। गुरु की शरण में मृत्यु पर विजय का मार्ग प्राप्त होता है। भव्य जीव दीक्षा लेकर आत्मा को परम पावन करता है। उपसर्ग, रोग के कारण शरीर के प्रति ममत्व हटाकर अनेक आत्म साधकों ने आत्मा को सिद्ध करने का प्रयास किया है। श्री शीतलमति जी भी संल्लेखना समाधि की आत्मसाधना कर रही है। उनके दीक्षा गुरु श्री श्रुतसागर जी ने भी आत्म साधना धैर्य पूर्वक की थी। माता जी के समक्ष भी अनेक साधकों ने जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ किया है। आज के बाद माताजी केवल आहार में जल लेगी। अन्य सभी पदार्थों का उन्होंने त्याग कर दिया है। आत्म साधकों की भावना उत्कृष्ट होती है। अंतरंग और बहिरंग तप में साधक ममत्व, मोह और कषाय को हटाता है। संघ परंपरा में आचार्य धर्मसागर जी सहित अनेक साधकों ने क्रमशः त्याग किया है। माताजी ने सभी साधकों को निकट से देखा है। माता जी की साधना शांतिपूर्वक सफल हो ऐसी मंगल भावना करते हैं।</p>
<p><strong>माताजी का सामान्य परिचय</strong></p>
<p>गामड़ी जिला डुंगरपुर में झकुदेवी श्रेष्ठी न्यालचंद जी धाटलिया की पुत्री गेंदी देवी का जन्म सन 1943 में हुआ। आपका विवाह गोवर्धनलाल पचौरी से हुआ। आप द्वितीय पट्टाचार्य आचार्य श्री अजित सागर जी के समय से संघ में आर्यिका श्री ज्ञानमती जी की प्रेरणा से शामिल हुईं। आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और 2 प्रतिमा के नियम आचार्य श्री शिव सागर जी से ग्रहण किए। आपने दीक्षा गुरु आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी से 1971 में क्षुल्लिका और सन 1972 में आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री शीतल मति हुई। आपके शिक्षा गुरु आचार्य श्री अजित सागर जी हैं। आप आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघस्थ हैं, विगत वर्षों से क्रमश आहार की सामग्री में त्याग कर 19 जनवरी 2026 से दो उपवास के बाद मात्र जल ले रही हैं। आप संल्लेखना समाधि की ओर दृढ़ता से अग्रसर हैं।</p>
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		<title>सिद्ध चक्र विधान में पूजन से सिद्ध भगवान का किया जाता है गुणानुवाद : प्रथम दिन रथ यात्रा, मंगल कलश यात्रा, ध्वजारोहण से सिद्ध चक्र अनुष्ठान प्रारंभ </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 15:46:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के सान्निध्य में सिद्ध चक्र महामंडल का आयोजन किया गया। प्रथम दिन बड़ा मंदिर से श्री पार्श्वनाथ भगवान की रथयात्रा, कलश यात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई संत भवन पारस उद्यान नसिया में पहुंची। स्थान स्थान पर श्री जी की मंगल आरती की गई। आयोजन 28 दिसंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के सान्निध्य में सिद्ध चक्र महामंडल का आयोजन किया गया। प्रथम दिन बड़ा मंदिर से श्री पार्श्वनाथ भगवान की रथयात्रा, कलश यात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई संत भवन पारस उद्यान नसिया में पहुंची। स्थान स्थान पर श्री जी की मंगल आरती की गई। आयोजन 28 दिसंबर तक चलेगा। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित निवाई में विराजित है। नगर के सन्मति, महिपाल मोहित चांवरिया परिवार द्वारा सिद्ध चक्र महामंडल का आयोजन किया गया है। प्रथम दिन बड़ा मंदिर से श्री पार्श्वनाथ भगवान की रथयात्रा, कलश यात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई संत भवन पारस उद्यान नसिया में पहुंची। स्थान स्थान पर श्री जी की मंगल आरती की गई। नगर में 22 से 28 दिसंबर तक यह आयोजन चलेगा। सिद्धचक्र मंडल विधान के प्रथम दिवस 8 अर्घ्य समर्पित किए गए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पूजन के दौरान चढ़ा द्रव्यों का कारण उन गुणों बाबद सरल भाषा में बताया। जो सिद्ध भगवान का गुणागुवाद किया जाता है। जो संसार के बंधनों से छूट गए हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि सिद्धचक्र विधान में ज्ञानावरणीय कर्म के नष्ट होने से अनंतज्ञान, दर्शनावरणीय कर्म के नष्ट होने से अनंत दर्शन, वेदनीय कर्म के नष्ट होने से अव्यावाधत्व गुण, मोहनीय कर्म के नष्ट होने से अनंत सुख, नाम कर्म के नष्ट होने से सूक्ष्मत्व गुण, गोत्र कर्म के नष्ट होने से अगुरु लघुत्व गुण, अन्तराय कर्म के नष्ट होने से अनंत वीर्य गुण, आयु कर्म के नष्ट होने से अवगाहनत्व गुण, प्रकट होता है।</p>
<p>मोहित,पवन बोहरा और हेमंत ने बताया कि विधान पुण्यार्जक परिवार सन्मति चवरिया परिवार द्वारा झंडारोहण किया गया। जिसमें आचार्य श्री वर्धमान सागर ससंघ द्वारा मंगल आशीर्वाद दिया गया। उसके बाद विधान में पहुंचकर विधान में भगवान पार्श्वनाथ को विराजमान करके चवरिया परिवार द्वारा अभिषेक किया गया और मंडल शुद्धि विधान में बैठने वालों का सकलीकरण किया गया। आचार्य श्री के दर्शन करने निवाई विधायक रामसहाय वर्मा एव नगर पालिका चेयरमेन दिलीप इसरानी भी पधारे।</p>
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		<title>आचार्य संघ सान्निध्य में होगा 22 दिसंबर से सिद्धचक्र महामंडल विधान: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विधान का महत्व बताया  </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 15:39:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक जिले के निवाई में संघ सहित विराजित है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में चवरिया परिवार की ओर से 22 से 30 दिसंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक जिले के निवाई में संघ सहित विराजित है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में चवरिया परिवार की ओर से 22 से 30 दिसंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ होगा। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक जिले के निवाई में संघ सहित विराजित है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में चवरिया परिवार की ओर से 22 से 30 दिसंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ होगा। बहुत पुण्य और सौभाग्य से सिद्धचक्र महा मंडल की पूजन करने, पूजन देखने ओर पूजन में चढ़ाए जाने वाले अर्ध्य में सिद्ध प्रभु का गुणानुवाद सुनने का अवसर मिलता है। विधान में पूजन में भावों और परिणामों की निर्मलता जरूरी है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संत भवन में सिद्ध चक्र मंडल विधान के पुण्यार्जक परिवार को आशीर्वाद देकर प्रकट की। आचार्य श्री ने प्रतिदिन सिद्धचक्र विधान में समर्पित किए जाने वाले अर्घ्य के समय भगवान के गुणों का विस्तार से वर्णन कर बताया कि सिद्ध चक्र विधान की पूजा में मुख्य रूप से 2040 अर्घ्य चढ़ाए जाते हैं। सिद्ध चक्र विधान की पहली पूजा में मुख्य 8, दूसरी पूजा में 16, तीसरी पूजा में 32, चौथी में 64, पांचवीं में 128 और छठी पूजा में 256 अर्घ्य चढ़ाए जाते हैं।</p>
<p>आगे सातवीं पूजा में 512 आठवीं पूजन में 1024 अर्ध्य चढ़ाए जाएंगे। महिपाल एवं मोहित चवरिया ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 33 साधुओं के सान्निध्य में सिद्ध चक्र मंडल विधान का शुभारंभ 22 दिसंबर जिनेंद्र, आचार्य आज्ञा, मंगल कलश और रथ यात्रा के साथ होगा। रथयात्रा बड़ा मंदिर से प्रारंभ होगी। इसका समापन संत निवास पार्श्वनाथ उद्यान में होगा। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी संघ सान्निध्य में सन्मति, कमलेश देवी, सुकुमाल, नीलम, शालू एवं परिवार ध्वजारोहण करेंगे। विमल जोला विधानाचार्य के निर्देशन में मंडप स्थल शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा, सकलीकरण अंकुरारोपण होगा। सभी समाज जनों को विधान में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने का सादर अनुरोध किया गया।</p>
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		<title>आचार्य वर्धमान सागर जी शीतकालीन प्रवास निवाई में करेंगे : 26 पिच्छीधारी त्यागी संतों के साथ 18 नवंबर को होने जा रहा मंगल प्रवेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 12:16:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ का निवाई शहर में 18 नवंबर को भव्य मंगल प्रवेश होगा।आचार्य संघ टोंक से 15 नवंबर को मंगल विहार करके सोहेला बरुणी पहाड़ी नेशनल हाईवे होते हुए 17 नवंबर को कल्याण कॉलेज में ठहराव करेंगे। निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230; निवाई। कहते [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ का निवाई शहर में 18 नवंबर को भव्य मंगल प्रवेश होगा।आचार्य संघ टोंक से 15 नवंबर को मंगल विहार करके सोहेला बरुणी पहाड़ी नेशनल हाईवे होते हुए 17 नवंबर को कल्याण कॉलेज में ठहराव करेंगे। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>निवाई।</strong> कहते हैं कई जन्मों का पुण्य उदय जब जीवन में आता है तब जाकर एक साथ 27 संतों का सानिध्य मिल पाता है। रक्तांचल पर्वत की हसीन वादियों में बसी प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण धर्म प्राण नगरी में सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ का निवाई शहर में 18 नवंबर को भव्य मंगल प्रवेश होगा। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन &#8220;पार्श्वमणि&#8221; को बताया कि 18 नवंबर को आचार्य श्री वर्धमान सागरजी संघ के लगभग 26 पिच्छीधारी त्यागी तपस्वी दिगम्बर जैन संत निवाई में शीतकालीन प्रवास के लिए मंगल पदार्पण करेंगे।</p>
<p>राकेश संघी ने बताया कि आचार्य संघ टोंक से 15 नवंबर को मंगल विहार करके सोहेला बरुणी पहाड़ी नेशनल हाईवे होते हुए 17 नवंबर को कल्याण कॉलेज में ठहराव करेंगे। मीडिया प्रभारी सुनील भाणजा एवं विमल जौंला ने बताया कि कल्याण कॉलेज से आचार्य संघ 18 नवंबर को सुबह पद विहार करते हुए निवाई शहर में मंगल प्रवेश करेंगे। इस दौरान आचार्य संघ शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए संत निवास नसियां जैन मंदिर जाएंगे। जहां भगवान 1008 शांतिनाथ के दर्शन करते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को चातुर्मास के लिए किया श्रीफल भेंट: विभिन्न शहरों, नगरों से पहुंच रहे हैं गुरु भक्त </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Jan 2025 16:50:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पारसोला। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज विशाल संघ सहित पारसोला नगर में विराजित हैं। चातुर्मास समाप्ति के बाद प्रतिदिन राजस्थान सहित अनेक राज्यों के गुरु भक्तों ने पधारकर अपने नगर की ओर मंगल विहार करने के लिए श्रीफल भेंटकर निवेदन है। इसी कड़ी में शनिवार को निवाई टोंक जिले के सैकडों गुरु भक्तों ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पारसोला।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज विशाल संघ सहित पारसोला नगर में विराजित हैं। चातुर्मास समाप्ति के बाद प्रतिदिन राजस्थान सहित अनेक राज्यों के गुरु भक्तों ने पधारकर अपने नगर की ओर मंगल विहार करने के लिए श्रीफल भेंटकर निवेदन है। इसी कड़ी में शनिवार को निवाई टोंक जिले के सैकडों गुरु भक्तों ने आकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से संघ सहित वर्ष 2025 का वर्षायोग निवाई में करने का निवेदन किया है।</p>
<p><strong> वर्षा योग के लिए निवेदन</strong></p>
<p>इसके पूर्व किशनगढ़ के गुरु भक्त विमल महेंद्र पाटनी उरसेवा वालों ने भी गुण स्थली चकवाड़ा में चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट किया है। धरियावद, भींडर, बांसवाड़ा ,सीकर सहित अनेक नगरों ने भी वर्षायोग के लिए निवेदन किया।</p>
<p><strong>आचार्य पद शताब्दी महोत्सव के लिए निवेदन</strong></p>
<p>जयंतीलाल कोठारी एवं ऋषभ पचोरी वर्षायोग समिति ने बताया कि इसके पूर्व सकल दिगम्बर जैन समाज पारसोला ने भी वर्ष 2025 का वर्षायोग पारसोला में पुनः करने तथा आचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव का समापन करने के लिए निवेदन किया है।</p>
<p><strong>पट्टाचार्य कार्यक्रम के लिए आग्रह</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार सुमति धाम इंदौर के मनीष सपना गोधा ने अप्रैल 2025 में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के पट्टाचार्य कार्यक्रम के लिए संघ सहित पधारने का निवेदन किया है।</p>
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