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	<title>नासिक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>नासिक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सात मंजिला भव्य समवशरण बना आस्था का केंद्र, णमोकार तीर्थ से नासिक की धार्मिक पहचान और मजबूत: उप-शीर्षक: 27 एकड़ में आकार ले रहा भव्य तीर्थ, डेढ़ वर्ष से जारी निर्माण कार्य; 108 फीट ऊँचा समवशरण श्रद्धालुओं का मुख्य आकर्षण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 07:06:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नासिक में 27 एकड़ में बन रहा णमोकार तीर्थ तेजी से आस्था का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सात मंजिला 108 फीट ऊँचा समवशरण, 51 फीट की चंद्रप्रभु प्रतिमा और स्वर्णमयी रथ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। संपादक रेखा जैन की विशेष रिपोर्ट नासिक । नासिक,जो पहले से ही तपोभूमि और संतों की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नासिक में 27 एकड़ में बन रहा णमोकार तीर्थ तेजी से आस्था का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सात मंजिला 108 फीट ऊँचा समवशरण, 51 फीट की चंद्रप्रभु प्रतिमा और स्वर्णमयी रथ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">संपादक रेखा जैन की विशेष रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नासिक ।</strong> नासिक,जो पहले से ही तपोभूमि और संतों की साधना के लिए जाना जाता है, अब एक और बड़ी पहचान की ओर बढ़ रहा है। यहां 27 एकड़ में बन रहा “णमोकार तीर्थ” शहर की धार्मिक महत्ता को नई ऊंचाई देने वाला है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99862" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0015-300x248.jpg" alt="" width="300" height="248" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0015-300x248.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0015.jpg 416w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>जैन धर्म में णमोकार मंत्र का बहुत बड़ा महत्व है, और उसी भावना को साकार करने के लिए यह पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। हर निर्माण धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मानकों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।</p>
<p>सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है 108 फीट ऊँचा सात मंजिला भव्य समवशरण। जैन मान्यता के अनुसार समवशरण वही पवित्र स्थान है जहाँ तीर्थंकर भगवान सभी जीवों को समान रूप से उपदेश देते हैं। यहां पहली मंजिल पर भूतकाल के 24 तीर्थंकर, दूसरी मंजिल पर वर्तमान के 24 और तीसरी मंजिल पर भविष्य के 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं। इस तरह कुल 72 प्रतिमाएँ यहां की शिल्पकला को जीवंत बना रही हैं।</p>
<p>समवशरण में मूलनायक 108 श्री चंद्रप्रभु भगवान की लगभग 51 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापित की जा रही है। साथ ही 27 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ, नवग्रह, पंचकल्याणक, यंत्र, महामंत्र और ज्ञान-विज्ञान से जुड़े प्रतीक भी यहां स्थापित किए जा रहे हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99863" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0016-300x186.jpg" alt="" width="300" height="186" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0016-300x186.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0016.jpg 414w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>यहाँ छह विशेष भव्य प्रतिमाएँ भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव, उनके पुत्र भरत और बाहुबली, साथ ही नेमिनाथ, महावीर स्वामी और पार्श्वनाथ की लगभग 31 फीट ऊँची प्रतिमाएँ एक ही पत्थर से तराशी गई हैं। ये विशाल पत्थर राजस्थान से लाए गए हैं और उन पर की गई बारीक नक्काशी देखने लायक है।</p>
<p>परिसर में 150 से ज्यादा आकर्षक मूर्तियाँ बनाई गई हैं। चारों दिशाओं में सहस्र जिनबिंब स्तंभ तैयार किए गए हैं। बाहर नौकाविहार के लिए तालाब और परिक्रमा के लिए विशेष मार्ग भी बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु आसानी से पूरे परिसर की परिक्रमा कर सकें।</p>
<p>एक खास आकर्षण है स्वर्णमयी रथ। करीब 25 किलो तांबे से बने इस रथ पर शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई है। धार्मिक प्रतीकों से सजा यह रथ आचार्यों और साधु-संतों के स्वागत में उपयोग किया जाएगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99864" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0017-300x203.jpg" alt="" width="300" height="203" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0017-300x203.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260213-WA0017.jpg 390w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 250 कमरों की धर्मशाला भी बनाई जा रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले भक्तों को ठहरने में कोई परेशानी न हो।</p>
<p>100 से ज्यादा राजस्थानी कारीगर पिछले डेढ़ साल से इस तीर्थ को आकार देने में लगे हुए हैं। हर भवन और प्रतिमा में राजस्थानी शिल्पकला की झलक साफ दिखाई देती है।</p>
<p>आने वाले समय में णमोकार तीर्थ नासिक ही नहीं, बल्कि पूरे देश के जैन समाज और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र बनने जा रहा है।</p>
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		<title>अंतरराष्ट्रीय जैन महाकुंभ 27 आचार्य महाश्रमण का महाराष्ट्र में समागम: नासिक स्थित मांगीतुंगी के मध्य णमोकार महातीर्थ पर होगा पंच कल्याणक और महामस्ताभिषेक  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 16:26:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव होगा। जनमंगलकारी महातीर्थ णमोकार तीर्थ जहाँ युगों की अखंड साधना, अनंत आस्था,और संस्कारों का दिव्य संगम और त्याग की भूमि, जहां प्रत्येक शिला जिनवाणी का संदेश देती है। नासिक से पढ़िए, राजीव सिंघाई की यह रिपोर्ट&#8230; नासिक। महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव होगा। जनमंगलकारी महातीर्थ णमोकार तीर्थ जहाँ युगों की अखंड साधना, अनंत आस्था,और संस्कारों का दिव्य संगम और त्याग की भूमि, जहां प्रत्येक शिला जिनवाणी का संदेश देती है। <span style="color: #ff0000">नासिक से पढ़िए, राजीव सिंघाई की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नासिक।</strong> महाराष्ट्र में जैन महाकुंभ भव्य अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव होगा। जनमंगलकारी महातीर्थ णमोकार तीर्थ जहाँ युगों की अखंड साधना, अनंत आस्था,और संस्कारों का दिव्य संगम और त्याग की भूमि, जहां प्रत्येक शिला जिनवाणी का संदेश देती है। जहां हर दिशा में संतों के आशीर्वाद की सुगंध बिखरती है। जहां हर शिला में श्रद्धा बसती है। जहां हर मार्ग धर्म की ओर ले जाता है।</p>
<p><strong>इन आचार्यों और साधुओं को सानिध्य मिलेगा </strong></p>
<p>यह दिव्य पावन धरा पर पाषाण को पूज्य बनाने का अनुष्ठान आचार्य श्री कुंथुसागर जी महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री देवनंदी जी महाराज, णमोकार तीर्थ प्रणेता के निर्देशन, मुनिश्री अमोघकीर्ति जी एवं मुनिश्री अमरकीर्ति जी के मार्गदर्शन में आचार्य परमेष्टि अभी‌‌क्ष्ण ज्ञानोपयोगी चारों दिशाओं से चार सौ से अधिक महाश्रमण, आचार्य श्री पुष्पदंतसागर जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री पद्मनंदी जी, आचार्य श्री गुणधरनंदी जी, आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी, आचार्य श्री सिद्धांतसागर जी, आचार्य श्री विनम्रसागर जी, आचार्य श्री प्रसन्नऋषि जी महाराज,आचार्य श्री डॉ प्रणाम सागर जी,आचार्यश्री सुविधिसागरजी, आचार्य श्री कुमुदनंदी जी, आचार्य श्री विद्यानंदी जी, आचार्य श्री तीर्थनंदी जी, आचार्य श्री गुलाबभूषण जी,आचार्य श्री श्रुतधरनंदीजी, आचार्य श्री गुणभद्रनंदी जी, आचार्य श्री सूर्यसागर जी, आचार्य श्री सुयशगुप्ती जी, आचार्य श्री दयाऋषी जी, उपाध्याय श्री विरंजनसागर जी, उपाध्याय श्री विभंजनसागर जी, क्षुल्लक श्रीसमर्पण सागर जी, क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी, योगभूषण जी, आर्यिका श्री सौभाग्यमती माता जी, आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी ससंघ 27 आचार्य संघों का समागम, श्री भट्टारक चारुकीर्ति जी श्रवणबेलगोला कर्नाटक, श्री भट्टारक जिनसेन जी नांदनी महा श्री भट्टारक चारूकीर्ति जी मूडबद्र कर्नाटक, स्वस्तिश्री रविन्द्र कीर्ति स्वामी जी सहित वृहद पावन सान्निध्य एक साथ एक मंच पर मुनिराजों के दर्शन करने का सौभाग्य मिलेगा। और ,बा.ब्र. वैशाली दीदी द्वारा वृहद संयोजन, प्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक नीलम अजमेरा, संतोष पैंढारी नागपुर की अध्यक्षता रहेगी। जहां तीर्थंकर भगवान के जन्म, दीक्षा,तप केवलज्ञान, निर्वाण जैसे जीवन-कल्याणकारी प्रसंग विधिपूर्वक सम्पन्न होंगे। भक्तों के प्रत्येक क्षण जिनशासन के प्रति समर्पण से साकार हो रहा।</p>
<p><strong>इस तरह रहेंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>6 से 25 फरवरी तक पावन महामहोत्सव का हिस्सा बनें। दीक्षार्थीयों की बिनोली 5 तारीख को शाम 7 बजे जलूस निकलेगा। प्रतिष्ठानायक 351 जिनबिंब का 6 तारीख को सुबह 8 बजे श्री मंगल कलश यात्रा 7 तारीख को सुबह 10 बजे घटयात्रा 1008 कलशों के साथ, जन्माभिषेक भव्य जुलूस 8 तारीख को सुबह 10.30 बजे एवं 13 फरवरी को सुबह 9.30 बजे भव्य जिनबिंब रथयात्रा, आपकी उपस्थिति मानवता के महामंगल का निमित्त बनेगी। ऐसा हम सभी का परम विश्वास है।</p>
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		<title>णमोकार तीर्थ पर उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ : ऐतिहासिक जिनबिंब पंच कल्याणक महामहोत्सव में उमडेंगे देश-विदेश से श्रद्धालुगण  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 13:00:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नासिक में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ से पहले ही जिले की पावन धरती पर एक और आस्था का महासागर उमड़ने जा रहा है। ऐतिहासिक जिनबिंब पंचकल्याणक महामहोत्सव चांदवड तहसील के मालसाने स्थित विश्व प्रसिद्ध णमोकार तीर्थ में फरवरी 2026 में होने जा रहा है। चांदवड़ से पढ़िए, यह खबर&#8230; चांदवड़। नासिक में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नासिक में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ से पहले ही जिले की पावन धरती पर एक और आस्था का महासागर उमड़ने जा रहा है। ऐतिहासिक जिनबिंब पंचकल्याणक महामहोत्सव चांदवड तहसील के मालसाने स्थित विश्व प्रसिद्ध णमोकार तीर्थ में फरवरी 2026 में होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">चांदवड़ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चांदवड़।</strong> नासिक में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ से पहले ही जिले की पावन धरती पर एक और आस्था का महासागर उमड़ने जा रहा है। ऐतिहासिक जिनबिंब पंचकल्याणक महामहोत्सव चांदवड तहसील के मालसाने स्थित विश्व प्रसिद्ध णमोकार तीर्थ में फरवरी 2026 में होने जा रहा है। जैन धर्म के विश्व स्तरीय ऐतिहासिक जिनबिंब पंचकल्याणक महामहोत्सव महाकुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 6 से 25 फरवरी तक चलने वाले इस ऐतिहासिक जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव न केवल जैन समाज, बल्कि संपूर्ण भारत एवं देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय आध्यात्मिक पर्व सिद्ध होने वाला है। आचार्यश्री देवनंदी महाराज का स्वप्न साकार हो रहा है। आचार्य श्री देवनंदिजी महाराज ने वर्षों पूर्व कोल्हापुर महाराष्ट्र के समीप कुंथूगिरी में जिस भव्य तीर्थ की परिकल्पना की थी। वह अब पूर्णता की ओर अग्रसर हो चुका है। भगवान श्रीराम के पदचिह्नों से पावन रामटेकडी (मालसाने) की लगभग 12 हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक भूमि पर 27 एकड़ में फैला यह विशाल तीर्थ, आस्था और स्थापत्य का अनुपम संगम बन रहा है।</p>
<p><strong>समवशरण में 24 तीर्थंकर जिनालय स्थापित होंगे </strong></p>
<p>2014 में शुरू हुआ निर्माण कार्य अब अपने जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव के लिए तैयार हो गया है।णमोकार तीर्थ के अध्यक्ष नीलम अजमेरा और बाल ब्रह्मचारी वैशाली दीदी के अनुसार, यह महोत्सव अपने स्वरूप और भव्यता में अब तक का अद्वितीय विशाल आयोजन होगा। दद्दू ने बताया कि 108 फीट ऊंचा विशाल समवशरण होगा। 5.5 एकड़ में फैले इस भव्य समवशरण में त्रिकाल चौबीसी, सहस्रकूट जिनालय और 24 तीर्थंकर जिनालय स्थापित होंगे। इस महामहोत्सव में 3000 से अधिक जिनबिंब प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा होगी।</p>
<p><strong>36.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को मंजूरी </strong></p>
<p>महामहोत्सव के लिए 36.35 करोड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। पूरे भारत एवं देश-विदेश से अनुमानित 15 लाख श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 36.35 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत पक्की सड़कें, बिजली-पानी की व्यवस्था, हेलीपैड, विशाल पार्किंग और 450 शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्य समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हों। कार्यक्रम तैयारी अंतिम चरण में है और वर्ष 2026 में यहां जैन धर्म समाज संस्कृति के महाकुंभ का साक्षी बनने का दुर्लभ अवसर संपूर्ण जैन समाज को मिलने जा रहा है।</p>
<p><strong>आयोजन की अन्य विशेषताएं</strong></p>
<p>पंचकल्याणक नगर 125 एकड़ में फैला विशाल परिसर, 1 लाख वर्गफुट का भव्य मंडप और 108 फीट ऊंचा श्श्री देवकीर्तीश् विशाल ध्वज फहराया लगाया जाएगा। वैदिक उपस्थिति में 300 से अधिक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ संस्कार किया जाएगा। 2000 श्रद्धालुओं के लिए 300 सुइट्स, 700 अस्थायी कक्ष और 50 डोरमैटरी की व्यस्था की जाएगी। महोत्सव की तैयारियां अंतरराष्ट्रीय समिति के मार्गदर्शन में युद्धस्तर पर चल रही हैं। संतोष पेंढारी (राष्ट्रीय अध्यक्ष), दिनेश शेठी (कोषाध्यक्ष), कमल ठोल्या (सचिव), पारस लोहाड़े (राष्ट्रीय प्रचार संयोजक), विनोद पाटणी और जमणालाल हपावत (कलश आवंटन समिति) इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।</p>
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		<title>आगरा में बीजेएस राष्ट्रीय अध्यक्ष का मंगल आगमन: समाज जनों ने किया अभिनंदन  </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 16:54:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय जैन संघटना के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकिशोर जैन साखला नासिक का मंगल आगमन शनिवार को आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के संत निलय में हुआ। जहां संघटना के पदाधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। सकल जैन समाज की महत्वपूर्ण समाज सेवी राष्ट्रीय संस्था भारतीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतीय जैन संघटना के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकिशोर जैन साखला नासिक का मंगल आगमन शनिवार को आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के संत निलय में हुआ। जहां संघटना के पदाधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा</strong>। सकल जैन समाज की महत्वपूर्ण समाज सेवी राष्ट्रीय संस्था भारतीय जैन संघटना के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकिशोर जैन साखला नासिक का मंगल आगमन शनिवार को आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के संत निलय में हुआ। जहां भारतीय जैन संघटना आगरा के पदाधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। जिसके बाद राष्ट्रीय महामंत्री पंकज जैन, राष्ट्रीय मंत्री प्रदीप जैन संचेती दिल्ली, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तथा उत्तरी भारत विस्तारक विजय जैन ने उत्तर प्रदेश मे संगठन को मजबूती एवं विस्तार के उद्देश्य के लिए उत्तर प्रदेश मे संगठन को मजबूती एवं विस्तार के उद्देश्य से एक सभा का आयोजन किया गया।</p>
<p>जिसमें भारतीय जैन संघटना के उप्र राज्याध्यक्ष रोहित जैन अहिंसा एवं राज्य महामंत्री सुरेंद्र जैन और राज्य कोषाध्यक्ष यशपाल जैन जी को बनाया गया। इस अवसर पर भारतीय जैन संघटना आगरा के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संचालन भारतीय जैन संघटना के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोज जैन बाकलीवाल ने किया।</p>
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		<title>जैनाचार्य श्री 108 प्रबल सागर जी महाराज का वर्षायोग : मांगीतुंगी जी सिद्धक्षेत्र पर हुआ भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Jul 2023 10:43:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मांगीतुंगी(महाराष्ट्र) (राजीव सिंघाई) । प्रबल पुरुषार्थी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से बीते 5 जुलाई को दिगंबर जैनाचार्य श्री 108 प्रबल सागर जी महाराज का मांगीतुंगी जी सिद्धक्षेत्र पर भव्य मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। आचार्य श्री शिरपुर अंतरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ मालेगांव वाशिम से 25 जून से लगभग 352 कि.मी. का विहार संपूर्ण कर वर्षायोग -2023 स्थापित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मांगीतुंगी(महाराष्ट्र) (राजीव सिंघाई) ।</strong> प्रबल पुरुषार्थी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से बीते 5 जुलाई को दिगंबर जैनाचार्य श्री 108 प्रबल सागर जी महाराज का मांगीतुंगी जी सिद्धक्षेत्र पर भव्य मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। आचार्य श्री शिरपुर अंतरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ मालेगांव वाशिम से 25 जून से लगभग 352 कि.मी. का विहार संपूर्ण कर वर्षायोग -2023 स्थापित करने पहुंचे हैं।</p>
<p>वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह आगामी 9 जुलाई को दोपहर 1:35 बजे से मांगलिक क्रियाओं से शुरू होगा। श्री मांगीतुंगी तीर्थ ट्रस्ट जिला नाशिक (महाराष्ट्र) ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का निवेदन किया है।</p>
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