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	<title>नामांकन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>नामांकन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>इंदौर में दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद चुनाव: सात ने भरा नामांकन : अध्यक्ष पद के लिए 1 व 2 मार्च को जमा हुए नामांकन, 5 मार्च तक नाम वापसी का अवसर </title>
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		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 07:01:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ में श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष पद के चुनाव हेतु सात प्रत्याशियों ने 1 व 2 मार्च को नामांकन दाखिल किए। नामांकन की अंतिम तिथि 2 मार्च रही, जबकि 5 मार्च तक नाम वापसी का अवसर रहेगा। इंदौर। श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शहर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> में श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष पद के चुनाव हेतु सात प्रत्याशियों ने 1 व 2 मार्च को नामांकन दाखिल किए। नामांकन की अंतिम तिथि 2 मार्च रही, जबकि 5 मार्च तक नाम वापसी का अवसर रहेगा।</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर शहर में सरगर्मी तेज हो गई है। 1 मार्च से नामांकन प्रक्रिया विधिवत प्रारंभ हुई, जो 2 मार्च तक जारी रही।</p>
<p>दो दिनों में अध्यक्ष पद के लिए सुशील पंड्या, दिलीप पाटनी, आनंद कुमार गोधा, प्रिंसिपल टोंग्या, आशीष जैन, योगेश गोठने तथा बाहुबली जैन ने चुनाव अधिकारी एन.के. जैन के समक्ष अपने नामांकन पत्र प्रस्तुत किए।</p>
<p>नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 2 मार्च निर्धारित थी। चुनाव प्रक्रिया के अनुसार प्रत्याशी 5 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। इसके बाद अधिकृत प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी और आगे की चुनावी प्रक्रिया संपन्न होगी।</p>
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		<title>प्रभु का संरक्षण :  सुख हो या दुख ईश्वर हर स्थिति में हमारे साथ हैं-प्रियंका संजय सेठी </title>
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		<pubDate>Sun, 03 Mar 2024 00:30:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कथा सागर में पढ़िए कहानी प्रभु का संरक्षण। इस कहानी का नैतिक मूल्य यही है कि सुख हो या दुख, ईश्वर हर स्थिति में हमारे साथ रहते हैं। अगर दुख में भी हम अपनी राह से भटकें नहीं तो वह हमें एक बच्चे की तरह दुलार देते हैं। प्रभु का संरक्षण एक संत रेत पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कथा सागर में पढ़िए कहानी प्रभु का संरक्षण। इस कहानी का नैतिक मूल्य यही है कि सुख हो या दुख, ईश्वर हर स्थिति में हमारे साथ रहते हैं। अगर दुख में भी हम अपनी राह से भटकें नहीं तो वह हमें एक बच्चे की तरह दुलार देते हैं।</strong></p>
<hr />
<p><strong>प्रभु का संरक्षण</strong><br />
एक संत रेत पर चले जे रहे थे। जब वह काफी आगे तक चले आए तो सहसा उनकी नजर पीछे की ओर चली गयी। उन्होंने पीछे मुडक़र देखा तो यह देखकर हैरान रह गए कि रेत पर तो वह अकेला चल रहे थे किंतु पीछे-पीछे चार पैरों के निशान थे। आश्चर्य से संत इधर-उधर देखने लगे और सोचने लगे। किसी के दर्शन नहीं हुए तो उन्होंने स्वयं से प्रश्न किया, जब मेरे कठिनाई भरे दिन थे, मैं अत्यंत मुसीबत में था, मुझसे कोई बात तक करना पसंद नहीं करता था। तब भी मैं अक्सर इस रेत पर चलता था और तब मुझे कभी भी अपने पीछे चार पैर नजर नहीं आये। रेत पर केवल मेरे पदचिह्नों की ही छाप होती थी। तो इसका क्या यह अर्थ हुआ कि मुसीबत में ईश्वर भी साथ छोड़ देता है। आज मैं सुखी और प्रसन्न हूं तो वह मेरे साथ-साथ चला आ रहा है।</p>
<p>यह विचार आते ही संत को आकाशवाणी सुनाई दी, ‘नहीं, बेटा नहीं, तुम गलत सोच रहे हो?’ आकाशवाणी की आवाज पर संत ने कहा, ‘तो फिर सच क्या है? आप ही बताइए।’ संत के कानों से आवाज टकरायी, ‘जब तू सुख में होता है, मैं तेरे साथ चलता हूं। ऐसे में दो पांव के निशान तुम्हारे और दो मेरे। मुसीबत में जब तुझे सब छोड़ गये थे, मैंने नहीं छोड़ा, उस समय मैं तुम्हें अपनी गोद में लेकर चलता रहा। तुम्हें मां जैसा प्यार और वात्सल्य देता रहा, तुम्हें सुख की छांव देता रहा। उस दुख के समय तुम्हारे पांव के निशान तो रेत पर पड़े ही नहीं। मैं तुझसे कभी विमुख नहीं हुआ, मुसीबत में भी नहीं।’ यह सुनकर संत के कानों से फिर आवाज़ टकरायी, ‘हां लेकिन इतना अवश्य याद रखना कि मुसीबत और पीड़ा में कभी हिम्मत न हारना, यह न कहना कि मेरे साथ कोई नहीं है। मैं हर पल तुम्हारे साथ हूं। दुख और पीड़ा जीवन का हिस्सा हैं, यदि तुम उन्हें धैर्य और शांतिपूर्वक सामान्य तरीके से हल करोगे तो जीवन में सफलता पाओगे और यदि विचिलत होकर गलत मार्ग पर बढ़ोगे तो मेरी गोद से गिर पड़ोगे, फिर तुम्हें मैं नहीं बचा पाऊंगा। मैं तब तक तुम्हारे साथ हूं जब तक तुम नेकी, ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करते हो।’ इसके बाद आकाशवाणी की गूंज समाप्त हो गयी।</p>
<p>इस कहानी का नैतिक मूल्य यही है कि सुख हो या दुख, ईश्वर हर स्थिति में हमारे साथ रहते हैं। अगर दुख में भी हम अपनी राह से भटकें नहीं तो वह हमें एक बच्चे की तरह दुलार देते हैं।</p>
<p><strong>प्रियंका संजय सेठी</strong></p>
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		<title>डॉ अनामिका जैन का प्रथम श्रेणी अधिकारी में चयन : परिवार और समाज को किया गौरवान्वित  </title>
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		<pubDate>Mon, 26 Feb 2024 16:59:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डॉ. अनामिका जैन तीन वर्ष की पदस्थापना के बाद, प्रथम श्रेणी अधिकारी के रूप में चयनित हुई हैं. इस खबर से जैन समाज में ख़ुशी की लहर है, जैन मिलन संस्था ने डॉ. अनामिका जैन और पूरे परिवार को शुभकामना दी है । पढ़िए मनीष शास्त्री विद्यार्थी की रिपोर्ट ।  सागर । इंजी. महेश जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>डॉ. अनामिका जैन तीन वर्ष की पदस्थापना के बाद, प्रथम श्रेणी अधिकारी के रूप में चयनित हुई हैं. इस खबर से जैन समाज में ख़ुशी की लहर है, जैन मिलन संस्था ने डॉ. अनामिका जैन और पूरे परिवार को शुभकामना दी है । <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष शास्त्री विद्यार्थी की रिपोर्ट । </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर ।</strong> इंजी. महेश जैन रिटायर्ड एसडीओ PHE सागर की सुपुत्री डॉ. अनामिका जैन का बचपन से ही लक्ष्य था कि डॉक्टर बनना है और उन्होंने अपनी मेहनत से एमबीबीएस, एमएस कर शासकीय मेडिकल ऑफिसर के पद पर चयनित होकर परिवार एवं समाज को गौरवान्वित किया। आपके पति डॉ. अभिनव जैन प्रथम श्रेणी मेडिकल ऑफिसर गाडरवारा जिला नरसिंहपुर में पदस्थ है। डॉ. अनामिका जैन तीन वर्ष की पदस्थापना के बाद, प्रथम श्रेणी अधिकारी के रूप में चयनित हुई।</p>
<p>इस मौके पर जैन मिलन के सभी पदाधिकारी ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं, सुरेश जैन आईएएस भोपाल, कपिल मलैया सागर,एड. कमलेंद्र जैन राष्ट्रीय मंत्री, अरुण चंदेरिया क्षेत्रीय अध्यक्ष, संजय जैन शक्कर, कमल डेवडिया शाहगढ़, सुरेश जैन बीज निगम सागर,राजेश रागी बक्सवाहा, दिलेश जैन दमोह, मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर आदि नाम शामिल हैं ।</p>
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		<title>पात्रकेसरी की कथा :  सम्‍यग्‍दर्शन का उद्योत करने वाले थे पात्रकेसरी आचार्य </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/story_of_patrakesari_patrakesari_acharya_was_the_originator_of_samyagdarshan/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Feb 2024 10:53:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कथा सागर की इस विशेष प्रस्तुति में आराधना कथा कोश में से पात्रकेसरी की कथा आपके समक्ष है । इस कोश में ब्रह्मचारी श्री नेमिदत्त द्वारा रचित जैन धर्म पर आधारित कथाएँ हैं, इन्हीं में से है पात्रकेसरी की कथा की कथा। पढ़िए राखी जैन की प्रस्तुति। कथा भगवान के पंचकल्‍याणों से पवित्र और सब [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कथा सागर की इस विशेष प्रस्तुति में आराधना कथा कोश में से पात्रकेसरी की कथा आपके समक्ष है । इस कोश में ब्रह्मचारी श्री नेमिदत्त द्वारा रचित जैन धर्म पर आधारित कथाएँ हैं, इन्हीं में से है पात्रकेसरी की कथा की कथा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राखी जैन की प्रस्तुति।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कथा</strong><br />
भगवान के पंचकल्&#x200d;याणों से पवित्र और सब जीवों को सुख के देने वाले इस भारत वर्ष में एक मगध नाम का देश है । वह संसार के श्रेष्&#x200d;ठ वैभव का स्&#x200d;थान है । उसके अन्&#x200d;तर्गत एक अहिछत्र नाम का सुन्&#x200d;दर शहर है । उसकी सुन्&#x200d;दरता संसार को चकित करने वाली है ।</p>
<p>नगर वासियों के पुण्&#x200d;य से उसका अवनिपाल नाम का राजा बड़ागुणी था, सब राजविद्याओं का पंडित था । अपने राज्&#x200d;य का पालन वह अच्&#x200d;छी नीति के साथ करता था । उसके पास पाँच सौ अच्&#x200d;छे विद्वान् ब्राह्मण थे । वे वेद और वेदांग के जानकार थे । राजकार्य में वे अवनिपाल को अच्&#x200d;छी सहायता देते थे । उनमें एक अवगुण था, वह यह कि उन्&#x200d;हें अपने कुल का बड़ा घमण्&#x200d;ड था । उससे वे सबको नीची दृष्टि से देखा करते थे । वे प्रातः काल और सायंकाल नियम पूर्वक अपना सन्&#x200d;ध्&#x200d;यावन्&#x200d;दनादि नित्&#x200d;यकर्म करते थे । उनमें एक विशेष बात थी, वह यह कि वे जब राजकार्य करने को राज सभा में जाते, तब उसके पहले कौतूहल से पार्श्&#x200d;वनाथ जिनालय में श्री पार्श्&#x200d;वनाथ की पवित्र प्रतिमा का दर्शन कर जाया करते थे ।</p>
<p>एक दिन की बात है वे जब अपना सन्&#x200d;ध्&#x200d;यावन्&#x200d;दनादि नित्&#x200d;यकर्म करके जिन मन्दिर में आये तब उन्&#x200d;होंने एक चारित्र भूषण नाम के मुनिराज को भगवान के सम्&#x200d;मुख देवागम नाम का स्&#x200d;तोत्र का पाठ करते देखा । उन सब में प्रधान पात्रकेसरी ने मुनि से पूछा, क्&#x200d;या आप इस स्&#x200d;तोत्र का अर्थ भी जानते हैं ? सुनकर मुनि बोले—मैं इसका अर्थ नहीं जानता । पात्रकेसरी फिर बोले-साधुराज, इस स्तोत्र को फिर तो एक बार पढ़ जाइये । मुनिराज ने पात्रकेसरी कहे अनुसार धीरे-धीरे और पदान्&#x200d;त में विश्राम पूर्वक फिर देवागम को पढ़ा , उसे सुनकर लोगों का चित्त बड़ा प्रसन्&#x200d;न होता था ।</p>
<p>पात्रकेसरी की धारणा शक्ति बड़ी विलक्षण थी । उन्&#x200d;हें एक बार के सुनने से ही सब का सब याद हो जाता था । देवागम को भी सुनते ही उन्&#x200d;होंने याद कर लिया । अब वे उसका अर्थ विचारने लगे । उस समय दर्शनमोहनीयकर्म के क्षयोपशम से उन्&#x200d;हें यह निश्&#x200d;चय हो गया कि जिन भगवान ने जो जीवा- जीवादिक पदार्थों का स्&#x200d;वरूप कहा है, वही सत्&#x200d;य है और सत्&#x200d;य नहीं है । इसके बाद वे घर पर जाकर वस्&#x200d;तु का स्वरूप विचारने लगे । सब दिन उनका उसी तत्&#x200d;वविचार में बीता । रात को भी उनका यही हाल रहा । उन्&#x200d;होंने विचार किया—जैन धर्म में जीवादिक पदार्थों को प्रमेय-जानने योग्&#x200d;य माना है और तत्&#x200d;वज्ञान-सम्&#x200d;यज्ञान को प्रमाण माना है । पर क्&#x200d;या आश्&#x200d;चर्य है कि अनुमान प्रमाण का लक्षण कहा ही नहीं गया । यह क्&#x200d;यों ? जैन धर्म के पदार्थों में उन्&#x200d;हें कुछ सन्&#x200d;देह हुआ, उससे उनका चित्त व्&#x200d;यग्र हो उठा । इतने ही में पद्मावती देवी का आसन कम्&#x200d;पायमान हुआ । वह उसी समय वहाँ आई और पात्रकेसरी से कहा-आपको जैन धर्म के पदार्थों में कुछ सन्&#x200d;देह हुआ है, पर इसकी आप चिन्&#x200d;ता न करें । आप प्रातःकाल जब जिनभगवान के दर्शन करने को जायँगे तब आपका सब सन्&#x200d;देह मिटकर आपको अनुमान प्रमाण का निश्&#x200d;चय हो जायगा । पात्रकेसरी से इस प्रकार कहकर पद्मावती जिन मंदिर गई और वहाँ पार्श्&#x200d;वजिन की प्रतिमा के फण पर एक श्&#x200d;लोक लिखकर वह अपने स्&#x200d;थान पर चली गई । वह श्&#x200d;लोक यह था &#8212;</p>
<p><strong>अन्&#x200d;यथानुपपन्नत्वं यत्र तत्र त्रयेण किम् ।</strong><br />
<strong>नान्&#x200d;यथानुपपन्&#x200d;नत्&#x200d;वं यत्र तत्र त्रयेण किम् ।।</strong></p>
<p>अर्थात्-जहाँ पर अन्&#x200d;यथानुपपत्ति है, वहाँ हेतु के दूसरे तीन रूप मानने से क्&#x200d;या प्रयोजन है ? तथा जहाँ पर अन्&#x200d;यथानुप&#x200d;पत्ति नहीं है, वहाँ हेतु के तीन रूप मानने से भी क्&#x200d;या फल है । भावार्थ—साध्&#x200d;य के अभाव में न मिलने वाले को ही अन्&#x200d;यथानुपपन्&#x200d;न कहते हैं । इसलिये अन्&#x200d;यथानुपपत्ति हेतु का असाधारण रूप है । किन्&#x200d;तु बौद्ध इसको न मानकर हेतु के १- पक्षेसत्&#x200d;व, २- सपक्षेसत्&#x200d;व, ३- विपक्षाद्वयावृत्ति ये तीन रूप मानता है, सो ठीक नहीं हैं । क्योंकि कहीं-कहीं पर त्रैरूप्&#x200d;य के न होने पर भी अन्&#x200d;यथानुपपत्ति के बल से हेतु सद्धेतु होता है, और कहीं-कहीं पर त्रैरूप्&#x200d;य के होने पर भी अन्&#x200d;यथानुपपत्ति के न होने से हेतु सद्धेतु नहीं होता । जैसे एक मुहूर्त के अनन्&#x200d;तर शकटका उदय होगा, क्&#x200d;योंकि अभी कृतिका का उदय है। और यहाँ पर पक्षेसत्&#x200d;व न होने पर भी अन्&#x200d;यथानुपपत्ति के बल से हेतु सद्धेतु होता है । और ‘गर्भस्&#x200d;थ पुत्र श्&#x200d;याम होगा, क्&#x200d;योंकि यह मित्र का पुत्र है । यहाँ पर त्रैरूप्&#x200d;य के रहने पर भी अन्&#x200d;यथानुपपत्ति के न होने से हेतु सद्धेतु नहीं होता ।&#8217;</p>
<p>जब वे प्रात: काल जैन मंदिर गये और श्री पार्श्&#x200d;वनाथ की प्रतिमा पर उन्&#x200d;हें अनुमान प्रमाण का लक्षण लिखा हुआ मिला तब तो उनके आनन्&#x200d;द का कुछ पार नहीं रहा । उसे देखकर उनका सब सन्&#x200d;देह दूर हो गया । जैसे सूर्योदय होने पर अन्&#x200d;धकार नष्&#x200d;ट हो जाता है ।</p>
<p>इसके बाद ब्राह्मण-प्रधान, पुण्&#x200d;यात्&#x200d;मा और जिन धर्म के परम श्रद्धालु पात्रकेसरी ने बड़ी प्रसन्&#x200d;नता के साथ अपने हृदय में निश्&#x200d;चय कर लिया कि जिनभगवान् ही निर्दोष और संसाररूपी समुद्र से पार करने वाले देव हो सकते है और जिन धर्म ही दोनों लोक में सुख देने वाला धर्म हो सकता है । इस प्रकार दर्शनमोहनी कर्म के क्षयोपशम से उन्&#x200d;हें सम्&#x200d;यक्&#x200d;त्&#x200d;वरूपी परम रत्&#x200d;न की प्राप्ति हो गई-उससे उनका मन बहुत प्रसन्&#x200d;न रहने लगा ।</p>
<p>अब उन्&#x200d;हें निरन्&#x200d;तर जिनधर्म के तत्&#x200d;वों की मीमांसा के सिवा कुछ सूझने ही न लगा-वे उनके विचार में मग्&#x200d;न रहने लगे । उनकी यह हालत देखकर उनसे उन ब्राह्मणों ने पूछा—आज कल हम देखते हैं कि आपने मीमांसा, गीतमन्&#x200d;याय, वेदान्&#x200d;त आदिका पठन-पाठन बिलकुल ही छोड दिया है और उनकी जगह जिनधर्म के तत्&#x200d;वों का ही आप विचार किया करते हैं, यह क्&#x200d;यों ? सुनकर पात्रकेसरी ने उत्&#x200d;तर दिया-आप लोगों को अपने वेदों का अभिमान है, उन पर ही आपका विश्&#x200d;वास है, इसलिये आपकी दृष्टि सत्&#x200d;य बात की ओर नहीं जाती । पर मेरा विश्&#x200d;वास आपसे उल्&#x200d;टा है, मुझे वेदों पर विश्&#x200d;वास न होकर जैन धर्म पर विश्&#x200d;वास है, वही मुझे संसार में सर्वोत्&#x200d;तम धर्म दिखता है । मैं आप लोगों से भी आग्रह पूर्वक कहता हूँ, कि आप विद्वान हैं, सच झूठ की परीक्षा कर सकते हैं, इसलिये जो मिथ्&#x200d;या हो, झूठा हो, उसे छोडकर सत्&#x200d;य को ग्रहण कीजिये और ऐसा सत्&#x200d;य धर्म एक जिनधर्म ही है, इसलिये वह ग्रहण करने योग्&#x200d;य है ।</p>
<p>पात्रकेसरी के इस उत्&#x200d;तर से उन ब्राह्मणों को सन्&#x200d;तोष नहीं हुआ । वे इसके विपरीत उनसे शास्&#x200d;त्रार्थ करने को तैयार हो गये । राजा के पास जाकर उन्&#x200d;होंने पात्रकेसरी के साथ शास्&#x200d;त्रार्थ करने की प्रार्थना की । राजाज्ञा के अनुसार पात्रकेसरी राजसभा में बुलवाये गये । उनका शास्&#x200d;त्रार्थ हुआ । उन्&#x200d;होंने वहाँ सब ब्राह्मणों को पराजित कर संसारपूज्&#x200d;य और प्रजा को सुख देने वाले जिनधर्म का खूब प्रभाव प्रगट किया और सम्&#x200d;यग्&#x200d;दर्शन की महिमा प्रकाशित की ।</p>
<p>उन्&#x200d;होंने एक जिनस्&#x200d;तोत्र बनाया, उसमें जिनधर्म के तत्&#x200d;वों का विवेचन और अन्&#x200d;यमतों के तत्&#x200d;वों का बड़े पाण्डित्&#x200d;य के साथ खण्&#x200d;डन किया गया है । उसका पठन-पाठन सबके लिये सुखका कारण है । पात्रकेसरी के श्रेष्&#x200d;ठ गुणों और अच्&#x200d;छे विद्वानों द्वारा उनका आदर सम्&#x200d;मान देखकर अवनिपाल राजा ने तथा उन ब्राह्मणों ने मिथ्&#x200d;यामत को छोड़कर शुभ भावों के साथ जैनमत को ग्रहण कर लिया ।</p>
<p>इस प्रकार पात्रकेसरी के उपदेश से संसार समुद्र से पार करने वाले सम्&#x200d;यग्दर्शन को और स्&#x200d;वर्ग तथा मोक्ष के देने वाले पवित्र जिनधर्म को स्&#x200d;वीकार कर अवनिपाल आदि ने पात्रकेसरी की बड़ी श्रद्धा के साथ प्रशंसा की कि द्विजोत्तम, तुमने जैन धर्म को बड़े पाण्डित्&#x200d;य के साथ खोज निकाला है, तुम्&#x200d;हीं ने जिन भगवान् के उपदेशित तत्&#x200d;वों के मर्म को अच्&#x200d;छी तरह समझा है, तुम ही जिन भगवान् के चरण कमलों की सेवा करने वाले सच्&#x200d;चे भ्रमर हो, तुम्&#x200d;हारी जितनी स्&#x200d;तुति की जाय थोड़ी है । इस प्रकार पात्रकेसरी के गुणों और पाण्डित्&#x200d;य की हृदय से प्रशंसा करके उन सबने उनका बड़ा आदर सम्&#x200d;मान किया ।</p>
<p>जिस प्रकार पात्रकेसरी ने सुख के कारण, परम पवित्र सम्&#x200d;यग्&#x200d;दर्शन का उद्योतकर उसका संसार में प्रकाश कर राजाओं के द्वारा सम्&#x200d;मान प्राप्&#x200d;त किया उसी प्रकार और भी जो जिनधर्म का श्रद्धानी होकर भक्ति पूर्वक सम्&#x200d;यग्&#x200d;दर्शन का उद्योत करेगा वह भी यशस्&#x200d;वी बनकर अंत में स्&#x200d;वर्ग या मोक्ष का पात्र होगा ।</p>
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		<title>नवीन जैन ने दाखिल किया राज्यसभा के लिए नामांकन: निर्विरोध निर्वाचित होने की पूर्ण संभावना </title>
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		<pubDate>Wed, 14 Feb 2024 12:08:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रसिद्ध उद्योगपति नवीन जैन आगरा ने आज लखनऊ में राज्य सभा के लिए नामांकन दाखिल किया । नामांकन जमा करते समय श्री जैन के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ एवम उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक विशेष रूप से उपस्थित थे। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट ।  [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रसिद्ध उद्योगपति नवीन जैन आगरा ने आज लखनऊ में राज्य सभा के लिए नामांकन दाखिल किया । नामांकन जमा करते समय श्री जैन के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ एवम उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक विशेष रूप से उपस्थित थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट । </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा ।</strong> उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रसिद्ध उद्योगपति नवीन जैन आगरा ने आज लखनऊ में राज्य सभा के लिए नामांकन दाखिल किया । नामांकन जमा करते समय श्री जैन के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ एवम उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक विशेष रूप से उपस्थित थे । उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए 10 सदस्यों का निर्वाचन होना हैं । जिसमें भाजपा के 7 सदस्यों का निर्वाचन पक्का माना जा रहा है । अभी हाल ही में भाजपा द्वारा राज्यसभा निर्वाचन के लिए 7 प्रत्याशियों की सूची जारी की गई ।</p>
<p>जिसमें सातवें नंबर पर आगरा के सुप्रसिद्ध उद्योगपति, पी एन सी ग्रुप आगरा के चेयरमैन, पूर्व मेयर नवीन जैन का नाम समिल्लित किया गया था । वर्तमान में विधायकों की संख्या के हिसाब से देखा जाए तो राज्यसभा के लिए भाजपा के 7 एवम सपा के 3 प्रत्याशियों का निर्वाचित होना निश्चित है । इसी लिए सपा ने 3 और भाजपा ने 07 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं । यदि इन 10 उम्मीदवारों के अतिरिक्त कोई अन्य उम्मीदवार नहीं आता है तो उपरोक्त सभी का निर्विरोध निर्वाचित होना निश्चित है । यदि कोई 11वा उम्मीदवार मैदान में आता है तो 27 फरवरी को मतदान द्वारा उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा ।</p>
<p><strong>वर्तमान में उत्तर प्रदेश का स्वर्णिम काल</strong></p>
<p>नामांकन दाखिल करने के पश्चात राज्यसभा प्रत्याशी नवीन जैन ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि इस समय उत्तर प्रदेश का स्वर्णिम काल चल रहा है । पहिले यू पी में गुंडों, बदमाशों का बोलबाला था । प्रदेश में न महिलाएं सुरक्षित थी, न व्यापारी सुरक्षित थे । वर्तमान में देश में प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में प्रदेश में अमन चैन कायम हैं । आज व्यवसाई निर्भीक होकर व्यवसाय कर सकता है, महिलाएं निडर होकर कहीं भी आ जा सकती हैं । देश एवम उत्तर प्रदेश निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर हो रहा है ।</p>
<p>ज्ञातव्य हो कि आगरा के पूर्व महापौर नवीन जैन उत्तर प्रदेश की पी एन सी कंट्रक्सन प्राइवेट लि. कंपनी के डायरेक्टर प्रदीप जैन के लघु भ्राता हैं । श्री जैन का पूरा परिवार मृदुभाषी होकर जनमानस की सेवा में तत्पर रहता है । श्री नवीन जैन लगभग 40 वर्षों से भाजपा में रहकर शीर्ष नेतृत्व के चहेते बने हुए हैं । श्री जैन ने आगरा में मेयर रहते हुए महानगर की तस्वीर ही बदल दी थी । अपने ग्रीन आगरा -नवीन आगरा का नारा देकर काफी विकास किया था ।</p>
<p><strong>जानिए नवीन जैन का अब तक का सफर</strong></p>
<p><strong>राजनीतिक सफर </strong></p>
<p>नवीन जैन ने 40 साल पहले भारतीय जनता पार्टी के प्राथमिक सदस्य के तौर पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। 1980 में वो बीजेपी की ओर से वार्ड अध्यक्ष बने और 1989 में उन्होंने पहली बार, भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ा। नवीन जैन 1989 में पहली बार पार्षद चुनकर आगरा नगर निगम पहुंचे फिर 1995 में दूसरी दफा उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1997 में नवीन जैन को आगरा का डिप्टी मेयर चुना गया था संगठन में भी उनकी पकड़ मजबूत रही। ब्रजक्षेत्र के साथ ही वह प्रदेश में सहकोषाध्यक्ष बने।</p>
<p><strong>मेयर बनने के बाद संभाली ये जिम्मेदार</strong></p>
<p>वर्ष 2017 में मेयर चुने जाने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया मेयर काउंसिल के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। पार्टी ने उनके नाम की घोषणा अल्पसंख्यक कोटे को तो पूरा किया है और जातिगत समीकरणों को भी साध लिया है।</p>
<p><strong>मेयर के रूप में रहे सफल </strong></p>
<p>मेयर के रूप में जनता से जुड़े रहने वाले नवीन जैन ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे कार्य किए जो आज भी याद किए जाते हैं। ऑल इंडिया मेयर काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने आगरा का मान बढ़ाया था। संगठन में भी उनकी साफ सुथरी छवि है। इसको देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-55717" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013.jpg" alt="" width="960" height="640" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013.jpg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240214-WA0013-187x124.jpg 187w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" />शहर में कराए विकास कार्य</strong></p>
<p>पूर्व मेयर नवीन जैन ने नवीन आगरा के नाम से अभियान शुरू कर शहर में विकास कराया था। उनके द्वारा मेयर के रूप में किए गए शहर के सुंदरीकरण के प्रयासों को आज भी सराहा जाता है। वैश्य समाज में उनकी अच्छी पकड़ है। शालीनता और सभी के साथ मिलकर चलने की उनकी छवि से पार्टी में भी सकारात्मक रुख था।</p>
<p><strong>पिता चलाते थे चाय की दुकान</strong></p>
<p>14 अक्टूबर 1962 को आगरा में जन्मे नवीन जैन बताते हैं कि उनके पिता एलआईसी बिल्डिंग के पास चाय की दुकान चलाते थे और चाय वाले जैन साहब के नाम से उनके पिता की दुकान मशहूर थी। नवीन जैन ने आगरा में रहकर ही अपनी शिक्षा दीक्षा पूरी की और बड़े भाइयों के साथ मिलकर नए कारोबार की शुरुआत की। नवीन जैन का कारोबार और कंपनी देश की प्रतिष्ठित कंस्ट्रक्शन कंपनियों में से एक है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्यसभा भेजे जाने वाले सदस्यों की सूची जारी होने के बाद से ही नवीन जैन के कमला नगर स्थित घर पर प्रशंसकों का तांता लगा हुआ है।</p>
<p><strong>इतनी है नेट वर्थ</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश नगर निगम चुनाव 2017 के दौरान घोषित की गई संपत्ति के अनुसार नवीन जैन के पास कुल 409 करोड़ की संपत्ति है। नवीन जैन की नेट वर्थ 2017-2018 के दौरान नवीन जैन ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए अपनी आय 67,40,139 रुपए दिखाई है। उनके पास कुल 4,09,80,30,044 यानी की 409 करोड़ की संपत्ति है। 366 करोड़ का खुद के नाम से, 1 करोड़ का पत्नी के और डिपेन्डेन्ट 1 और 2 को मिला कर 94 करोड़ रुपए के कंपनियों में बांड, डिबेंचर और शेयर जैन ने ले रखे हैं। उनके पास 94 लाख के मूल्य की तो उनकी पत्नी के पास 4 करोड़ के मूल्य की ज्वेलरी है जबकि उनके ऊपर आश्रित दोनों व्यक्तियों के पास सम्मिलित रूप से 51 लाख रुपए के मूल्य के गहने हैं।</p>
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		<title>सम्‍यक्चारित्र का उद्योत करने वाले चक्रवर्ती की कथा : स्वर्ग और मोक्ष-सुख देने वाले थे श्री सनत्कुमार </title>
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		<pubDate>Sun, 11 Feb 2024 00:30:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कथा सागर की इस विशेष प्रस्तुति में आराधना कथा कोश में से सनत्कुमार चक्रवर्ती की कथा आपके समक्ष है । इस कोश में ब्रह्मचारी श्री नेमिदत्त द्वारा रचित जैन धर्म पर आधारित कथाएँ हैं, इन्हीं में से है सनत्कुमार चक्रवर्ती की कथा। पढ़िए राखी जैन की प्रस्तुति। अनन्तवीर्य भारत वर्ष के वीतशोक नामक शहर के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कथा सागर की इस विशेष प्रस्तुति में आराधना कथा कोश में से सनत्कुमार चक्रवर्ती की कथा आपके समक्ष है । इस कोश में ब्रह्मचारी श्री नेमिदत्त द्वारा रचित जैन धर्म पर आधारित कथाएँ हैं, इन्हीं में से है सनत्कुमार चक्रवर्ती की कथा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राखी जैन की प्रस्तुति।</span></strong></p>
<hr />
<p>अनन्तवीर्य भारत वर्ष के वीतशोक नामक शहर के राजा थे। उनकी महारानी का नाम सीता था। हमारे चरित्रनायक सनत्कुमार इन्हीं के पुण्य के फल थे। वे चक्रवर्ती थे । सम्यग्दृष्टियों में प्रधान थे। उन्होंने छहों खण्ड पृथ्वी अपने वश कर ली थी। उनकी विभूति का प्रमाण ऋषियों ने इस प्रकार लिखा है- नवनिधि, चौदहरत्न, चौरासी लाख हाथी, इतने ही रथ, अठारह करोड़ घोड़े, चौरासी करोड़ शूरवीर, छयानवें करोड़ धान्य से भरे हुए ग्राम, छयानवें हजार सुन्दरियाँ और सदा सेवा में तत्पर रहने वाले बत्तीस हजार बड़े-बड़े राजा, इत्यादि संसार श्रेष्ठ सम्पत्ति से वे युक्त थे । देव विद्याधर उनकी सेवा करते थे। वे बड़े सुन्दर थे, बड़े भाग्यशाली थे । जिनधर्म पर उनकी पूर्ण श्रद्धा थी। वे अपना नित्य नैमित्तिक कर्म श्रद्धा के साथ करते, कभी उनमें विघ्न नहीं आने देते। इसके सिवा अपने विशाल राज्य का वे बड़ी नीति के साथ पालन करते और सुखपूर्वक दिन व्यतीत करते ।</p>
<p>एक दिन सौधर्म स्वर्ग का इन्द्र अपनी सभा में पुरूषों के रूप सौन्दर्य की प्रशंसा कर रहा था । सभा में बैठे हुये एक विनोदी देव ने उनसे पूछा- प्रभो ! जिस रूप गुण की आप बेहद तारीफ कर रहे हैं, भला, ऐसा रूप भारतवर्ष में किसी का है भी या केवल यह प्रशंसा ही है ? उत्तर में इन्द्र ने कहा- हाँ, इस समय भी भारतवर्ष में एक ऐसा पुरूष है जिसके रूप की मनुष्य तो क्या देव भी तुलना नहीं कर सकते उसका नाम है सनतकुमार चक्रवर्ती ।</p>
<p>इन्द्र द्वारा देव दुर्लभ सनतकुमार चक्रवर्ती के रूपसौन्दर्य की प्रसंशा सुनकर मणिमाल और रत्नचूल नाम के दो देव चक्रवर्ती की रूपसुधा के देखने की लालसा को किसी तरह नहीं रोक सके और भेष बदलकर भारत आ गए और स्नान करते हुए चक्रवर्ती का वस्त्रालंकार रहित, पर उस हालत में भी त्रिभुवन प्रिय और सर्वसुन्दर रूप को देखकर मानना पड़ा कि चक्रवर्ती का रूप वैसा ही सुन्दर है, जैसा इन्द्र ने कहा था और सचमुच यह रूप देवों के लिये भी दुर्लभ है। इसके बाद उन्होंने अपना असली वेष बनाकर पहरेदार से कहा तुम जाकर अपने महाराज से कहो कि आपके रूप को देखने के लिये स्वर्ग से दो देव आये हुए हैं। पहरेदार ने जाकर महाराज से देवों के आने का हाल कहा । चक्रवर्ती ने इसी समय अपने श्रृंगार भवन में पहुँचकर अपने को बहुत अच्छी तरह वस्त्राभूषणों से सिंगारा । इसके बाद वे सिंहासन पर आकर बैठे और देवों को राजसभा में आने की आज्ञा दी ।</p>
<p>देव राजसभा में आये और चक्रवर्ती का रूप उन्होंने देखा। देखते ही वे खेद के साथ बोल उठे, महाराज ! क्षमा कीजिये; हमें बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है कि स्नान करते समय वस्त्राभूषणरहित आपके रूप में जो सुन्दरता, जो माधुरी हमने छुपकर देख पाई थी, वह अब नहीं रही। इससे जैन धर्म का यह सिद्धान्त बहुत ठीक है कि संसार की सब वस्तुएँ क्षण-क्षण में परिवर्तित होती हैं सब क्षणभंगुर हैं।</p>
<p>देवों की विस्मय उत्पन्न करने वाली बात सुनकर राजकर्मचारियों तथा और उपस्थित सभ्यों ने देवों से कहा- हमें तो महाराज के रूप में पहले से कुछ भी कमी नहीं दिखती, न जाने तुमने कैसे पहली सुन्दरता से इसमें कमी बतलाई है है। सुनकर देवों ने सबको उसका निश्चय कराने के लिये एक जल भरा हुआ घड़ा मँगवाया और उसे सबको बतलाकर फिर उसमें से तृण द्वारा एक जल की बूँद निकाल ली। उसके बाद फिर घड़ा सबको दिखलाकर उन्होंने उनसे पूछा—बतलाओ पहले जैसे घड़े में जल भरा था अब भी वैसा ही भरा है, पर तुम्हें पहले से इसमें कुछ विशेषता दिखती है क्या ? सबने एक मत होकर यही कहा कि नहीं। तब देवों ने राजा से कहा- महाराज, घड़ा पहले जैसा था, उसमें से एक बूँद जल की निकाल ली गई तब भी वह इन्हें वैसा ही दिखता है। इसी तरह हमने आपका जो रूप पहले देखा था, वह अब नहीं रहा। वह कमी हमें दिखती है, पर इन्हें नहीं दिखती । यह कहकर दोनों देव स्वर्ग की ओर चले गये ।</p>
<p>चक्रवर्ती ने इस चमत्कार को देखकर विचारा- स्त्री, पुत्र, भाई, बन्धु, धन, धान्य, दासी, दास, सोना, चाँदी आदि जितनी सम्पत्ति है, वह सब बिजली की तरह क्षणभर में देखते-देखते नष्ट होने वाली है और संसार दुःख का समुद्र है। यह शरीर भी, जिसे दिनरात प्यार किया जाता है, घिनौना है, संताप को बढ़ाने वाला है, दुर्गन्धयुक्त है और अपवित्र वस्तुओं से भरा हुआ है। तब इस क्षणविनाशी शरीर के साथ कौन बुद्धिमान् प्रेम करेगा ? ये पाँच इन्द्रियों के विषय ठगों से भी बढ़कर ठग है। इनके द्वारा ठगाया हुआ प्राणी एक पिशाचिनी की तरह उनके वश होकर अपनी सब सुधि भूल जाता है और फिर जैसा वे नाच नचाते हैं नाचने लगता है मिथ्यात्व जीव का शत्रु है, उसके वश हुए जीव अपने आत्महित के करने वाले, संसार के दुःखों से छुटाकर अविनाशी सुख के देने वाले, पवित्र जिनधर्म से भी प्रेम नहीं करते। सच भी तो है- पित्तज्वर वाले पुरूष को दूध भी कड़वा ही लगता है। परन्तु मैं तो अब इन विषयों के जाल से अपने आत्मा को छुड़ाऊँगा। मैं आज ही मोहमाया का नाशकर अपने हित के लिये तैयार होता हूँ। यह विचार कर वैरागी चक्रवर्ती ने जिनमंदिर में पहुँचकर सब सिद्धि की प्राप्ति कराने वाले भगवान् की पूजा की, याचकों को दयाबुद्धि से दान दिया और उसी समय पुत्र को राज्यभार देकर आप वन की ओर रवाना हो गये; और चारित्रगुप्त मुनिराज के पास पहुँचकर उनसे जिन-दीक्षा ग्रहण कर ली, जो कि संसार का हित करने वाली है। इसके बाद वे पंचाचार आदि मुनिव्रतों का निरतिचार पालन करते हुए कठिन से कठिन तपश्चर्या करने लगे। उन्हें न शीत सताती है और न आताप सन्तापित करता है। न उन्हें भूख की परवा है और न प्यास की। वन के जीव-जन्तु उन्हें खूब सताते हैं, पर वे उससे अपने को कुछ भी दुखी ज्ञान नहीं करते। वास्तव में जैन साधुओं का मार्ग बड़ा कठिन है, उसे ऐसे ही धीर वीर महात्मा पाल सकते हैं। साधारण पुरूषों की उसके पास गम्य नहीं । चक्रवर्ती इस प्रकार आत्मकल्याण के मार्ग में आगे-आगे बढ़ने लगे ।</p>
<p>एक दिन की बात है कि वे आहार के लिये शहर में गये। आहार करते समय कोई प्रकृति- विरूद्ध वस्तु उनके खाने में आ गई। उसका फल यह हुआ कि उनका सारा शरीर खराब हो गया, उसमें अनेक भयंकर व्याधियाँ उत्पन्न हो गई और सबसे भारी व्याधि तो यह हुई कि उनके सारे शरीर में कोढ़ फूट निकला। उससे रूधिर, पीप बहने लगा, दुर्गन्ध आने लगी। यह सब कुछ हुआ पर इन व्याधियों का असर चक्रवर्ती के मन पर कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने कभी इस बात की चिन्ता तक भी नहीं की कि मेरे शरीर की क्या दशा है ? वे शरीर से सर्वधा निर्मोही रहे और बड़ी सावधानी से तपश्चर्या करते रहे- अपने व्रत पालते रहे ।</p>
<p>एक दिन सौधर्म स्वर्ग का इन्द्र अपनी सभा में धर्म-प्रेम के वश हो मुनियों के पाँच प्रकार के चारित्र का वर्णन कर रहा था। उस समय एक मदनकेतु नामक देव ने उससे पूछा- प्रभो ! जिस चारित्र का आपने अभी वर्णन किया उसका ठीक पालने वाला क्या कोई इस समय भारतवर्ष में है ? उत्तर में इन्द्र ने कहा, सनत्कुमार चक्रवर्ती हैं। वे छह खण्ड पृथ्वी को तृण की तरह छोड़कर संसार, शरीर, भोग आदि से अत्यन्त उदास हैं और दृढ़ता के साथ तपश्चर्या तथा पंच प्रकार का चारित्र पालन करते हैं।</p>
<p>मदन केतु सुनते ही स्वर्ग से चलकर भारत वर्ष में जहाँ सनत्कुमार मुनि तपश्चर्या करते थे, वहाँ पहुँचा । उसने देखा कि उनका सारा शरीर रोगों का घर बन रहा है, तब भी चक्रवर्ती सुमेरू के समान निश्चल होकर तप कर रहे हैं। उन्हें अपने दुःख की कुछ परवा नहीं है। वे अपने पवित्र चारित्र का धीरता के साथ पालन कर पृथ्वी को पावन कर रहे हैं। उन्हें देखकर मदनकेतु बहुत प्रसन्न हुआ। तब भी वे शरीर से कितने निर्मोही हैं, इस बात की परीक्षा करने के लिये उसने वैद्य का वेष बनाया और लगा वन में घूमने। वह घूम-घूम कर यह चिल्लाता था कि &#8220;मैं एक बड़ा प्रसिद्ध वैद्य हूँ, सब वैद्यों का शिरोमणि हूँ। कैसी ही भयंकर से भयंकर व्याधि क्यों न हो उसे देखते-देखते शरीर को क्षणभर में मैं निरोग कर सकता हूँ।&#8221; देखकर सनत्कुमार मुनिराज ने उसे बुलाया और पूछा तुम कौन हो ? किसलिये इस निर्जन वन में घूमते फिरते हो? और क्या कहते हो ? उत्तर में देव ने कहा- मैं एक प्रसिद्ध वैद्य हूँ। मेरे पास अच्छी से अच्छी दवायें है। आपका शरीर बहुत बिगड़ रहा है, यदि आज्ञा दें तो मैं क्षणमात्र में इसकी सब व्याधियाँ खोकर इसे सोने सरीखा बना सकता हूँ। मुनिराज बोले- हाँ तुम वैद्य हो ? यह तो बहुत अच्छा हुआ जो तुम इधर अनायास आ निकले। मुझे एक बड़ा भारी और महाभयंकर रोग हो रहा है, मैं उसके नष्ट करने का प्रयत्न करता हूँ पर सफल प्रयत्न नहीं होता। क्या तुम उसे दूर कर दोगे ?</p>
<p>देवने कहा- निःसंदेह मैं आपके रोग को जड़ मूल से खो दूँगा। वह रोग शरीर से गलने वाला कोढ़ ही है न । मुनिराज बोले- नहीं, यह तो एक तुच्छ रोग है। इसकी तो मुझे कुछ भी परवा नहीं। जिस रोग की बाबत में तुमसे कह रहा हूँ, वह तो बड़ा ही भयंकर है। देव बोला- अच्छा, तब बतलाइये वह क्या रोग है, जिसे आप इतना भयंकर बतला रहे हैं ?</p>
<p>मुनिराज ने कहा- सुनो, वह रोग है संसार का परिभ्रमण । यदि तुम मुझे उससे छुड़ा दोगे तो बहुत अच्छा होगा । बोलो क्या कहते हो ? सुनकर देव बड़ा लज्जित हुआ। वह बोला, मुनिनाथ ! इस रोग को तो आप ही नष्ट कर सकते हैं। आप ही इसके दूर करने को शूरवीर और बुद्धिमान हैं । तब मुनिराज ने कहा- भाई, जब इस रोग को तुम नष्ट नहीं कर सकते तब मुझे तुम्हारी आवश्यकता भी नहीं । कारण विनाशीक, अपवित्र निर्गुण और दुर्जन के समान इस शरीर की व्याधियों को तुमने नष्ट कर भी दिया तो उसकी मुझे जरूरत नहीं। जिस व्याधि का वमन के स्पर्शमात्र से ही जब क्षय हो सकता है, तब उसके लिये बड़े-बड़े वैद्य-शिरोमणि की और अच्छी- अच्छी दवाओं की आवश्यकता ही क्या है? यह कहकर मुनिराज ने अपने वमन द्वारा एक हाथ के रोग को नष्टकर उसे सोने-सा निर्मल बना दिया। मुनि की इस अतुल शक्ति को देखकर देव भौंचकसा रह गया। वह अपने कृत्रिम वेष को पलटकर मुनिराज से बोला- भगवन् ! आपके विचित्र और निर्दोष चारित्र की तथा शरीर में निर्मोहपने की सौधर्मेन्द्र ने धर्मप्रेम के वश होकर जैसी प्रशंसा की थी, वैसा ही मैंने आपको पाया। प्रभो ! आप धन्य हैं, संसार में आप ही का मनुष्य जन्म प्राप्त करना सफल और सुख देनेवाला है। इस प्रकार मदनकेतु सनत्कुमार मुनिराज की प्रशंसा कर और बड़ी भक्ति के साथ उन्हें बारम्बार नमस्कार कर स्वर्ग में चला गया।</p>
<p>इधर सनत्कुमार मुनिराज क्षणक्षण में बढ़ते हुए वैराग्य के साथ अपने चारित्र को क्रमशः उन्नत करने लगे, अंत में शुक्लध्यान के द्वारा घातिया कर्मों का नाश कर उन्होंने लोकालोक का प्रकाशक केवल ज्ञान प्राप्त किया और इन्द्र धरणेन्द्रादि द्वारा पूज्य हुए ।</p>
<p>इसके बाद वे संसार दुःखरूपी अग्नि से झुलसते हुए अनेक जीवों को सद्धर्मरूपी अमृत की वर्षा से शान्त कर उन्हें युक्ति का मार्ग बतलाकर, और अन्त में अघातिया कर्मों का भी नाशकर मोक्ष में जा विराजे, जो कभी नाश नहीं होने वाला है।</p>
<p>उन स्वर्ग और मोक्ष-सुख देने वाले श्रीसनत्कुमार केवली को हम भक्ति और पूजन करते हैं, उन्हें नमस्कार करते हैं। वे हमें भी केवलज्ञानरूपी लक्ष्मी प्रदान करें।</p>
<p>जिस प्रकार सनत्कुमार मुनिराज ने सम्यक्चारित्र का उद्योत किया उसी तरह सब भव्य पुरूषों को भी करना उचित है। वह सुख का देने वाला है।</p>
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		<title>धर्म प्रभावना की दिशा में श्रीफल जैन न्यूज का कदम : व्यक्तित्व’ में मिलवाएंगे जैन समाज के प्रेरकों से  </title>
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		<pubDate>Fri, 26 Jan 2024 03:13:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म प्रभावना की दिशा में श्रीफल जैन न्यूज का नया कदम है ‘व्यक्तित्व’.इसमें हम आपको मिलवाएंगे जैन समाज के उन व्यक्तियों से जिन्होंने परिवार, समाज और देश के लिए ऐसा कुछ किया, कि वे सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गए।  इंदौर। धर्म प्रभावना की दिशा में श्रीफल जैन न्यूज का नया कदम है ‘व्यक्तित्व’.इसमें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्म प्रभावना की दिशा में श्रीफल जैन न्यूज का नया कदम है ‘व्यक्तित्व’.इसमें हम आपको मिलवाएंगे जैन समाज के उन व्यक्तियों से जिन्होंने परिवार, समाज और देश के लिए ऐसा कुछ किया, कि वे सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गए। </strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> धर्म प्रभावना की दिशा में श्रीफल जैन न्यूज का नया कदम है ‘व्यक्तित्व’.इसमें हम आपको मिलवाएंगे जैन समाज के उन व्यक्तियों से, जिन्होंने परिवार, समाज और देश के लिए ऐसा कुछ किया, कि वे सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गए। व्यक्तित्व की पहली कड़ी में 28 जनवरी को हम आपका परिचय इंदौर के नरेंद्र वेद से करवाएंगे, जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत अचार की कैरी और ठेले पर कपड़ा बेचने से की। आज वह इंदौर जैन समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में हैं और इंदौर जैन समाज के अध्यक्ष भी हैं । उनके जीवन के धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन के पहलुओं से आपका परिचय करवाएंगे ।</p>
<p><span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की रेखा जैन ने उनसे साक्षात्कार लिया। 28 जनवरी को आप श्रीफल जैन न्यूज के यूट्यूब चैनल</span> पर पूरा वीडियो देख सकते है । चैनल का लिंक नीचे दिया गया है, इस पर क्लिक कर आप पूरा साक्षात्कार देखें और नरेंद्र वेद के जीवन से प्रेरणा लें ।</p>
<p>लिंक &#8211;</p>
<p><a href="https://youtube.com/@Shreephalnews?si=L7jyNuvUQaTf1Vcu">https://youtube.com/@Shreephalnews?si=L7jyNuvUQaTf1Vcu</a></p>
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		<title>पंचकल्याणक महोत्सव के मुख्य पात्रों का अभिनंदन : कामां में 10 से 15 फरवरी तक होगा आयोजन  </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Jan 2024 05:01:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कामां नगर में काफी लम्बे अंतराल के बाद आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में 10 फरवरी से 15 फरवरी तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है । आयोजन के लिए पंचकल्याणक महोत्सव के मुख्य पात्रों का अभिनंदन किया गया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट । कामां । [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कामां नगर में काफी लम्बे अंतराल के बाद आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में 10 फरवरी से 15 फरवरी तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है । आयोजन के लिए पंचकल्याणक महोत्सव के मुख्य पात्रों का अभिनंदन किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कामां ।</strong> नगर में काफी लम्बे अंतराल के बाद आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में 10 फरवरी से 15 फरवरी तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है । आयोजन समिति कामां के तत्वाधान में सकल दिगंबर जैन समाज कामां एवं शांतिनाथ दिगंबर जैन दीवान मंदिर समिति द्वारा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के मुख्य पात्र महायज्ञनायक पारस जैन व मीरा जैन बड़जात्या जयपुर निवासी का अभिनंदन कर निमंत्रण दिया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-54909" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/01/IMG-20240125-WA0004-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>पंचकल्याणक समिति के महामन्त्री संजय जैन बड़जात्या ने बताया कि शांतिनाथ दिगंबर जैन दीवान मंदिर से बैंड बाजों और भेंट की सामग्री लेकर सकल दिगंबर जैन समाज कामां अजीत जैन बड़जात्या के निवास पर पहुचे वहां पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के महायज्ञ नायक पारस जैन व मीरा जैन बड़जात्या जयपुर निवासी को फल,मेवा,मिठाई एवं वस्त्र,मुकुट आदि भेंट कर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का आमंत्रण दिया गया।</p>
<p><strong>महोत्सव का आरंभ बेहद सुंदर </strong></p>
<p>इस अवसर पर महोत्सव के अन्य पात्र सोधर्म इंद्र शचि इंद्राणी के साथ अन्य इंद्र एवं पात्रों के द्वारा भी महायज्ञनायक को भेंट दी गई। इस अवसर पर महायज्ञ नायक बने पारस जैन बड़जात्या ने कहा कि मैं जैन समाज कामां के इस आथित्य से बड़ा ही गदगद और प्रसन्नचित हूं।महोत्सव का इतना सुंदर आगाज हो रहा है वह महोत्सव आचार्य सुनील सागर महाराज के सानिध्य में बड़ा ही विशाल होगा। इस अवसर पर जैन समाज के पदाधिकारी के साथ-साथ प्रमुख गणमान्य महानुभाव एवं महिलाएं उपस्थित रही।</p>
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		<title>गणतन्त्र दिवस पर होगा झंडा वंदन : दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन का आयोजन  </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Jan 2024 04:59:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[76 वें गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर परंपरा अनुसार दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के तत्वावधान में फेडरेशन के मुख्य कार्यालय पर झंडा वंदन किया जाएगा। फेडरेशन हमेशा अपनी राष्ट्रीय और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करती है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू और संजीव जैन संजीवनी की रिपोर्ट।   इंदौर। 76 वें गणतंत्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>76 वें गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर परंपरा अनुसार दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के तत्वावधान में फेडरेशन के मुख्य कार्यालय पर झंडा वंदन किया जाएगा। फेडरेशन हमेशा अपनी राष्ट्रीय और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू और संजीव जैन संजीवनी की रिपोर्ट।  </span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> 76 वें गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर परंपरा अनुसार दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के तत्वावधान में फेडरेशन के मुख्य कार्यालय पर झंडा वंदन किया जाएगा। फेडरेशन के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू और संजीव जैन संजीवनी ने बताया की दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन हमेशा अपनी राष्ट्रीय और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करती है।</p>
<p>इस वर्ष भी झंडा वंदन सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर महावीर ट्रस्ट, कीर्ति स्तंभ, रीगल चौराहे पर किया जाएगा। इस अवसर पर समस्त रीजन, समस्त सोशल ग्रुप और शिखर ग्रुप के निर्देशन में झंडा वंदन करेंगे।</p>
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		<title>तीन जगह होंगे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव : आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का सान्निध्य होगा प्राप्त  </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Jan 2024 04:56:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन ससंघ के सानिध्य में तीन अलग अलग जगह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होंगे । वर्तमान में मुनि श्री का अणु नगरी रावतभाटा के लिए मंगल विहार चल रहा है । पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट । इंदौर । श्री 108 विशुद्ध सागर महामुनिराज ससंघ के पावन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन ससंघ के सानिध्य में तीन अलग अलग जगह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होंगे । वर्तमान में मुनि श्री का अणु नगरी रावतभाटा के लिए मंगल विहार चल रहा है । <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर ।</strong> श्री 108 विशुद्ध सागर महामुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य में तीन अलग अलग जगहों पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा भक्ति और समर्पण के साथ आयोजित होंगे। सबसे पहले राणा प्रताप, मीरा और पन्नाधाय के तप त्याग और साधना की पावन वसुंधरा राजस्थान के मेवाड़ प्रांत की अणु नगरी रावतभाटा जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) में 6 से 10 फरवरी 2024 तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। उसके बाद श्री दिगम्बर जैन शीतल तीर्थ रतलाम ( म.प्र.) 22 से 26 फरवरी 2024 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। आखिर में 6 से 11 मार्च, 2024 तक जैन मंदिर गोधा एस्टेट गाँधीनगर इन्दौर (म०प्र०) में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा।</p>
<p><strong>विहार कर दौरान श्री महावीर जी अतिशय तीर्थ क्षेत्र पर आएँगे मुनिश्री </strong></p>
<p>गुरुदेव का विहार ऐसी कड़ाके की सर्दी में भी निरंतर चल रहा है। अभी दिनांक 25 जनवरी 2024 को आचार्य श्री महावीर जी अतिशय तीर्थ क्षेत्र पर आयेगे। यहां पर कोटा और निवाई से सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुगण उन्हें श्रीफल भेंट करने आएंगे। श्री अतिशय क्षेत्र महावीर जी से लालसोट-सवाईमाधोपुर-केशवरायपाटन-गिरधरपुरा-होते हुए काशी धर्म प्राण नगरी कोटा होते हुए अणु नगरी रावतभाटा के लिए मंगल विहार करेंगे। गुरुदेव अभी तक सैंकड़ों किलोमीटर की अहिंसा शाकाहार पद यात्रा कर सत्य अहिंसा और जियो और जीने का अमर संदेश लोगो को दे रहे हैं ।</p>
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