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	<title>नांद्रे &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>नांद्रे &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि जयंत सागरजी का नांद्र में मनाया जाएगा अवतरण दिवस : सभी जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना कर रहे हैं मुनिश्री  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:56:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे(महा.)।</strong> मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील ने बताया कि देश की पावन वसुंधरा को अनेकों ऋषि मुनियों ने अपनी चरण धूलि से पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। 30 वर्ष पूर्व भिंड निवासी सौभाग्यशाली दंपती सुरेंद्रकुमार जैन एवं अनिता जैन के आंगन में खुशियां छाई थीं। 14 जून 1996 को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी और उस सुंदर बालक का माता-पिता ने नाम रखा विशाल। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के करकमलों से 6 नवंबर 2022 को रायपुर ( छत्तीसगढ ) में मुनि दीक्षा धारण कर आपका नाम जयंत सागर जी रखा गया। मुनिश्री जयंत सागर जी ने पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के आशीष से सभी जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना करते हुए हमेशा गुरु आज्ञा को सबकुछ माना है। आपके प्रत्येक प्रवचन जिसमें गुरु भक्ति मानो स्वर्णिम शिखर को छूती है। सरलता, सहजता, सौम्यता की आप प्रतिमूर्ति हो।</p>
<p>आप अधिकतम समय ध्यान में लीन रहते हैं, आपकी वाणी ओजस्वी है। आपके प्रवचनों की चर्चा चारों ओर है। ऐसे भविष्य के महावीर को प्रणाम करता हूं। अवतरण दिवस के इस शुभ अवसर पर हम सभी यही भावना भाते हैं कि मुनि श्री जयंत सागर जी आप ऐसे ही अपनी साधना से अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त करते रहें और हमें सदैव वात्सल्य, उपदेश एवं आशीष देते रहें। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री जयंत सागर जी के 30 वें अवतरण दिवस पर उनके पावन चरणों में समस्त परिवारजनों की ओर से,बारंबार नमोस्तु।</p>
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		<title>सिद्धत्व के लिए महावीर के पथ पर अग्रसर मुनि श्री सिद्धसागर जी: नांद्रे में मनाया जाएगा मुनिश्री का दीक्षा दिवस महोत्सव  </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 08:57:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का दूसरा दीक्षा दिवस नांद्रे में श्रद्धा भक्ति से मनाया जाएगा। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से भिंड में 15 अगस्त 2019 को मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर संघ में प्रवेश किया। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230; नांद्रे। मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का दूसरा दीक्षा दिवस नांद्रे में श्रद्धा भक्ति से मनाया जाएगा। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से भिंड में 15 अगस्त 2019 को मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर संघ में प्रवेश किया। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का दूसरा दीक्षा दिवस नांद्रे में श्रद्धा भक्ति से मनाया जाएगा। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि मध्यप्रदेश में चंबल संभाग के भिंड जिले में प्रसिद्ध रूर नगर की पावन धरा पर श्रेष्ठीवर्य कपूरचंद की धर्मपत्नी उषा जैन की कुक्षी से 7 सितंबर 2002 में जन्म लेकर ‘सिद्धम’ नाम प्राप्त किया। रूर की भूमि सदैव वंदनीय रही है क्योंकी, जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ। उसी घर में मुनि श्री सिद्धसागर जी का जन्म हुआ। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के पूर्वाश्रम के भतीजे हैं मुनि श्री सिद्धसागर जी। उन्होंने बताया कि सिद्धम भैया जी की लौकिक शिक्षा एचएससी तक हुई। देवपूजा, शास्त्र स्वाध्याय और तीर्थ यात्रा करना आपका मुख्य कर्तव्य था। मुनिराजों का विहार कराना, चातुर्मास कराना, वैयावृत्ति करना, आहार दान देना आदि में आप सदैव अग्रणी रहे। सिद्धम भैया ने धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से भिंड में 15 अगस्त 2019 को मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर संघ में प्रवेश किया। इसके पश्चात बाल ब्रह्मचारी सिद्धम भैया ने सन 2020 में पटना (बिहार) के चंडी गांव में द्वितीय प्रतिमा व्रत लिया। ओजस्वी वक्ता, ह्रदय के सच्चे, सरल व्यक्तित्व, गुरु भक्ति में निपुण सिद्धम भैया ने लगातार 4 वर्ष तक संघस्थ ब्रम्हचारी रहकर गुरु मुख से शास्त्रों का अध्ययन किया।</p>
<p><strong>बड़ौत में अपार जनसमूह के समक्ष मुनि दीक्षा ग्रहण की </strong></p>
<p>25 अक्टूबर 2023 का वह शुभ दिन आया, जब आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने आपकी योग्यता परखकर आपकी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढाते हुए बड़ौत में अपार जनसमूह के समक्ष मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि श्री सिद्धसागर जी कहकर पुकारा। मुनिश्री सिद्ध सागर जी महाराज का प्रथम मंगल वर्षायोग (चातुर्मास) वर्ष 2024 में नांदणी (महाराष्ट्र ) और सन 2025 का द्वितीय चातुर्मास नांद्रे में ही हो रहा है। मुनि श्री सिद्धसागर जी गुरु चरणों में रहकर निरंतर शास्त्रों का स्वाध्याय, ध्यान, उपवास में अपने समय का सदुपयोग करते रहते हैं।</p>
<p><strong>सतत धर्म प्रभावना में रत हैं मुनिश्री </strong></p>
<p>मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज का जीवन एक महान आदर्श है। आपके गृहस्थावस्था के भाई-बहन विकास जैन, पंकज जैन, सपना जैन और प्रीति जैन भी निरंतर धर्म साधना करते हुए शास्त्र-स्वाध्याय में लीन रहते हैं। समाज को आप जैसे मुनिराज पर गर्व है। आप गांव-गांव करते हुए जिनधर्म कि सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं।</p>
<p><strong> मुनिश्री के चरणों में मेरा शत-शत नमोस्तु</strong></p>
<p>धन्य हैं आपकी त्याग-तपस्या। आप स्वभाव के बडे मृदू, विनम्र एवं मितभाषी हैं। आपके प्रवचन प्रभावशाली होते हैं। मैं अपने आपको भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे मुनि श्री सिद्ध सागर जी के रुप में मुझे सच्चे गुरु एवं सच्चे मित्र मिले हैं। मेरी यही भावना है कि जीवन के अंतिम सांस तक गुरु-शिष्य का यह नाता बना रहे। आप के चरणों में मेरा शत-शत नमोस्तु। सिद्धत्व के लिए महावीर स्वामी के पथ पर सिद्ध सागर जी महाराज भगवान महावीर जी के सिद्धांत जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।</p>
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		<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने नारी पर्याय को किया सार्थक: अवतरण दिवस पर मुनिश्री जयंत सागर जी ने माताजी का किया गुणानुवाद </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Oct 2025 12:35:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इस दौरान यहां पर नित्य पूजा, आराधना और भक्ति के साथ ही मुनिराजों के प्रवचनों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इस दौरान यहां पर नित्य पूजा, आराधना और भक्ति के साथ ही मुनिराजों के प्रवचनों का दौर भी जारी है। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इस दौरान यहां पर नित्य पूजा, आराधना और भक्ति के साथ ही मुनिराजों के प्रवचनों का दौर भी जारी है। प्रवचनों के माध्यम से दिगंबर जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, ज्ञान और संस्कृति से परिचय करवाया जा रहा है। इस सिलसिले में मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज प्रवचन में कहा कि मनुष्य जन्म बड़ी दुर्लभता से प्राप्त होता है और बहुत पुण्य करने के बाद ही मिलता है। जो ये मनुष्य पर्याय में आकर भी उस मनुष्य जन्म को सार्थक नहीं करता, वह उस अंधे व्यक्ति के समान है, जिसे रत्नों का पिटारा सामने पड़ा दिखाई नहीं देता और आगे निकल जाता है, परंतु मनुष्य पर्याय को सार्थक कर सफलता के शिखर तक पहुंचने का किसी ने काम किया है तो वह हैं गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी।</p>
<p>व्यक्ति पुरुष बनने के बाद कार्य करने में सोचता है, निर्णय करने में सोचता है, लेकिन ज्ञानमती माताजी ने एक नारी पर्याय में छोटी सी उम्र में जब लड़‌कियां अपने जीवन में क्या करना क्या नहीं करना उसका निर्णय नहीं कर पाती थीं। लड़‌कियां सजती संवरती थीं परंतु ज्ञानमति माताजी ने छोटी सी उम्र में दिगंबर परंपरा में जिन दीक्षा को धारण कर लिया और दीक्षा के बाद अध्ययन आदि करके ऐसे अनेकों ग्रंथों पर जो महान-महान ग्रंथ है। उन पर टीका की और उन पर कार्य किया और तो और अनेकों प्राचीन तीर्थ क्षेत्र का निर्माण एवं नवीन निर्माण कराके हमारे संस्कृति को आगे बढ़ाया है। आज 92 वें वर्ष वर्धन दिवस पर भी अपनी तप-साधना में निरंतर तल्लीन हैं। हमारी यही भावना है कि माताजी ने ये संयम को जिस शिखर तक पहुंचाने के लिए दीक्षा ली। उस शिखर तक निरंतर ऐसे ही तप-साधना में लीन रहते हुए कलश विराजमान करें।</p>
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		<title>आचार्यश्री शांतिसागर जी का समाधि दिवस पर दी भावांजलि: णमो जिणाणं श्री शांतिसागराचार्य नमः के जयकारों से गूंजा परिसर  </title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 07:34:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री शांतिसागर जी के समाधि दिवस पर मुनिराजों के सानिध्य में गुणानुवाद किया गया। पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागरजी महाराज के सानिध्य में आचार्यश्री को भावांजलि अर्पित की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री शांतिसागर जी के समाधि दिवस पर मुनिराजों के सानिध्य में गुणानुवाद किया गया। पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागरजी महाराज के सानिध्य में आचार्यश्री को भावांजलि अर्पित की गई। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नांद्रे।</strong> भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री शांतिसागर जी के समाधि दिवस पर मुनिराजों के सानिध्य में गुणानुवाद किया गया। पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागरजी महाराज के सानिध्य में आचार्यश्री को भावांजलि अर्पित की गई। मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज कहा कि बीसवीं सदी के एक दूर-दृष्टा, अलौकिक व्यक्तित्व, वीतरागी श्रमण संस्कृती के उन्नायक सद्गुरु दिगंबराचार्य शांतिसागर जी ने विस्मृत मुनि मुद्रा से जनजन, उनके लिए दिगंबरत्व का तप, त्याग, संयम से प्रभाव दिखाकर अशांति, हिंसा आदि कर्माें में जीने वाले लोगों को शांति तथा अहिंसा की स्वमुद्रा से एवं स्व ज्ञानामृत वाणी से बोध कराकर वीतराग मार्ग पर श्रद्धा को स्थापित किया है।</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि आचार्य भगवंत शांतिसागर जी पंथ परंपराओं, अंध रूढियों से परे, विशद विचार, समीचीन सोच के धारक थे। वे एक ओजस्वी, तपस्वी साधक थे। या कहूं जन जन को सद्बोध देनेवाले आध्यात्मिक सद्गुरु, जिनकी विशेषता थी कि वह सभी को अपने लगते थे। आज आचार्य भगवंत की पुण्यतिथि का अवसर हमारे पाप पुण्य कारिणी विद्या का विनाश बने तथा निर्वाण प्राप्ति में सहयोग बने। यही मंगल भावना के साथ आचार्य भगवंत की सिद्ध श्रुत आचार्य भक्ति पूर्वक केवलज्ञान के ज्ञेय प्रमाण वंदना करता हूं।</p>
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		<title>प्रीति है तो लोग आपका सहयोग करेंगे : प्रीति के माध्यम से संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर  </title>
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					<description><![CDATA[नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है और उनके प्रवचनों से स्थानीय समाजजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहां प्रवचन में मुनि महाराज जीवन के गहन रहस्यों से गुरु भक्तों को अवगत करवा कर धर्म देशना दे रहे हैं। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230; नांद्रे। नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है और उनके प्रवचनों से स्थानीय समाजजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहां प्रवचन में मुनि महाराज जीवन के गहन रहस्यों से गुरु भक्तों को अवगत करवा कर धर्म देशना दे रहे हैं। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है और उनके प्रवचनों से स्थानीय समाजजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहां प्रवचन में मुनि महाराज जीवन के गहन रहस्यों से गुरु भक्तों को अवगत करवा कर धर्म देशना दे रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर जी महाराज यहां विराजित हैं। मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन का मूल है प्रेम, प्रीति, स्नेह, वात्सल्य। जिसके जीवन में प्रीति का अभाव हो गया है वह मानव कितने भी प्रयास करे वह कभी संबंध नहीं बना सकता है।</p>
<p>संबंध का मूल है तो वह प्रीति है। जहां प्रीति है वहां संबंध है। जहां संबंध है वहां प्रीति है। जितनी प्रीति है। उतना ही संबंध है। प्रीति में अपनापन होता है एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की शक्ति प्राप्त होती है। प्रीति है तो लोग आपका सहयोग करेंगे और नही है तो आपके संकटों में सहारा कोई नहीं, आप स्वयं ही होंगे। जब भी प्रीति करें तो वर्तमान से करें। यदि भूत से प्रीति करते हो तो हाथ में कुछ भी लगने वाला नहीं है। वर्तमान भी खराब हो जाएगा। साथ में भविष्य भी खराब होगा।</p>
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		<title>एक छोटा सा व्यसन जीवन को नष्ट करने को काफी: मुनिश्री ने संयमित जीवन बनाने की दी सीख  </title>
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		<pubDate>Fri, 22 Aug 2025 14:11:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>नांद्रे नगर में चातुर्मासरत मुनिराजों के प्रवचन और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समाजजन आ रहे हैं। रोज यहां धर्मसभा में अनमोल वचनों का लाभ लिया जा रहा है। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्यों की धर्मदेशना से यहां पर धर्म प्रभावना प्रबल स्तर पर है। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> नगर में चातुर्मासरत मुनिराजों के प्रवचन और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समाजजन आ रहे हैं। रोज यहां धर्मसभा में अनमोल वचनों का लाभ लिया जा रहा है। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्यों की धर्मदेशना से यहां पर धर्म प्रभावना प्रबल स्तर पर है। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर विराजित रहकर नित्य प्रवचन में लोगों को धर्म मार्ग बता रहे हैं।</p>
<p>शुक्रवार को मुनि श्री जयंत सागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में जब भी कोई काम करो उसको सोचकर विचार कर करो कि ये जो कार्य हम करेंगे उसका फल क्या होगा? परिणाम क्या भुगतना होगा हमें? मित्र भी ऐसे बनाओ जो हमें बुरे कार्याे से बुरी हरकतांे से रोके। ऐसे मित्रो की संगत मत करो, जो हमें व्यसनों की ओर ले जाएं क्योंकि, आज के युवा एवं युवतियों की नई उम्र है और जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। अगर हमने मजाक मंे ही कोई व्यसन किया, ये सोच कर कि रोज तो नहीं करना है, आज ही तो करना है बस समझ जाओ आपने अपने व्यसनी होने का बीज डाल दिया है क्योंकि, एक छोटे से कीड़े से पूरा वृक्ष समाप्त हो जाता है अगर उसको अलग नहीं किया तो। इसलिए ऐसे व्यसन मत करो जो आपको नशा करने पर आतुर कर दे और नशे की लत अगर किसी को लग गई, व्यक्ति को नष्ट और समाप्त करके ही मानती है। इसलिए जो कार्य करो, जिससे भी मित्रता करो, सोच समझकर करो।</p>
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		<title>श्रद्धा से शक्ति स्वयं ही आ जाती है : मुनि श्री जयंत सागर जी ने प्रेम, श्रद्धा और आस्था का बताया महत्व </title>
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		<pubDate>Thu, 21 Aug 2025 09:55:51 +0000</pubDate>
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<p><strong>मुनि श्री जयंत सागर जी ने गुरुवार को अपने प्रवचन में कहा कि धर्म के प्रति श्रद्धा है तो स्वतः ही अंदर में शक्ति आ जाती है।<span style="color: #ff0000"> नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> मुनि श्री जयंत सागर जी ने गुरुवार को अपने प्रवचन में कहा कि धर्म के प्रति श्रद्धा है तो स्वतः ही अंदर में शक्ति आ जाती है। जहाँ और जिससे व्यक्ति को प्रीति होती है तो व्यक्ति कितना भी अस्वस्थ हो, परंतु कोई उसका करीबी आ जाए तो व्यक्ति जिसको बिस्तर से उठने की ताकत नहीं थी परंतु प्रिय मित्र के आने पर उसको शक्ति स्वतः ही आ जाती है और जहाँ श्रद्धा होती है वहाँ किसी को कोई कार्य करने को कहना नहीं पड़ता। वह कार्य करने का और धर्म करने की स्वयं ही इच्छा होने लगती है। इसलिए जीवन में श्रद्धा बढ़ाओ, प्रीति बढ़ाओ। जहाँ प्रीति प्रेम होता है वहाँ सब आपके बन जाते हैं। हर जगह सम्मान मिलता है, आदर मिलता है। जिनके अंदर श्रद्धा, आस्था, स्नेह, प्रेम, प्रीति नहीं होती उनका संसार बहुत न्यून ही होता है।संसार में उसका कोई आदर सम्मान नहीं करता और फिर ऐसे व्यक्ति को जीवन की इच्छा ही नहीं होती।</p>
<p>इसलिए जीवन में श्रद्धा है, आस्था है, प्रीति है तो हमें कभी किसी के सामने कुछ कहने की आवश्यकता नहीं होती। अपने अंदर शक्ति स्वयं ही आ जाती है। उल्लेखनीय है कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर जी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में विराजमान हैं।</p>
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		<title>मन शांत होगा तो इंद्रियां अपने आप शांत रहेंगी: मुनिश्री सिद्ध सागर जी ने मन को चंचल और तीव्र धावक बताया  </title>
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		<pubDate>Thu, 31 Jul 2025 13:31:34 +0000</pubDate>
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<p><strong>नांद्रे। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनिराजों का चातुर्मास नांद्रे के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जारी है। यहां पर उनके प्रवचन रोज हो रहे हैं। इस प्रवचन में स्थानीय और आसपास के लोग बड़ी संख्या में आकर धर्मलाभ ले रहे हैं। मुनिश्री सिद्धसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में मन पर नियंत्रण करने की सीख देते हुए इंद्रियों पर भी नियंत्रण के प्रति लोगों को जाग्रत किया। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनिराजों का चातुर्मास नांद्रे के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जारी है। यहां पर उनके प्रवचन रोज हो रहे हैं। इस प्रवचन में स्थानीय और आसपास के लोग बड़ी संख्या में आकर धर्मलाभ ले रहे हैं। मुनिश्री सिद्धसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में मन पर नियंत्रण करने की सीख देते हुए इंद्रियों पर भी नियंत्रण के प्रति लोगों को जाग्रत किया। उल्लेखनीय है कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, विराजित हैं और यहां पर धर्म प्रभावना प्रस्तुत कर रहे हैं। गुरुवार को मुनि श्री सिद्ध सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी ग्रंथराज इष्टोपदेश में बता रहे हैं, आत्म ध्यान की सिद्धि इंद्रिय विषयों में लीन जीव के लिए संभव नहीं है।</p>
<p>इंद्रियों को वश करने के लिए मन को वश करना पड़ेगा। जिस प्रकार घोडे को वश करने के लिए लगाम लगानी पड़ती है। उसी प्रकार इंद्रियों को वश करने के लिए मन जो घोडे से भी तेज दौड़ता है, इस पर लगाम लगा दो तो इंद्रिया स्वमेव ही वश में हो जाएंगी। विकारों का उद्भव इंद्रियों में नहीं होता, इंद्रिया तो विकारों की पूर्ति में लग जाती हैं। सर्वप्रथम मन में ही विकार उत्पन्न होता है। आज व्यक्ति संसार में सुख खोजने में लगा हुआ है, वैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नए-नए अविष्कार करने में लगे हैं। कूलर, पंखा, एसी, टीवी, मोबाइल, ट्रेन, प्लेन न जाने कितने अविष्कार किए हैं कि व्यक्ति को कष्ट न हो सके, फिर भी व्यक्ति सुखी नहीं हो पा रहा है क्योंकि, सुख बाह्य वस्तु में नहीं है।</p>
<p>सुख तो हमारे अंदर ही है। अपनी इच्छाओं को कम कर लो मन की चंचलता को कम कर लो आनंद आने लगेगा। शरीर की गंदगी को हटाने के लिए आप पानी का प्रयोग करते हो, ऐसे ही मन की गंदगी को हटाने के लिए जिनवानी का प्रयोग करो। देव, शास्त्र, गुरु की शरण में जाने से मन की गंदगी हट जाती है। मन को शांत कर लोगे तो इंद्रियां भी शांत हो जाएंगी।</p>
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		<title>गुरु के प्रति होना चाहिए समर्पण का भाव : मुनिश्री सारस्वत सागर जी के प्रवचन में गुरु शिष्य संबंधों का बखान  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/there_should_be_a_sense_of_devotion_towards_the_guru/</link>
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		<pubDate>Wed, 30 Jul 2025 16:36:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में नित्य मुनिराजों के प्रवचनों ने अलग-अलग विषयों पर धर्म देशना प्रदान की जा रही है। बुधवार को भी यहां मुनिश्री सारस्वतसागर जी के प्रवचन में गुरु शिष्य के आंतरिक संबंधों को बड़ी ही स्पष्टता से प्रस्तुत किया गया। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230; नांद्रे। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में नित्य मुनिराजों के प्रवचनों ने अलग-अलग विषयों पर धर्म देशना प्रदान की जा रही है। बुधवार को भी यहां मुनिश्री सारस्वतसागर जी के प्रवचन में गुरु शिष्य के आंतरिक संबंधों को बड़ी ही स्पष्टता से प्रस्तुत किया गया। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नांद्रे।</strong> भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में नित्य मुनिराजों के प्रवचनों ने अलग-अलग विषयों पर धर्म देशना प्रदान की जा रही है। बुधवार को भी यहां मुनिश्री सारस्वतसागर जी के प्रवचन में गुरु शिष्य के आंतरिक संबंधों को बड़ी ही स्पष्टता से प्रस्तुत किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज जी का नगर में चातुर्मास जारी है। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान मुनिराजों के प्रवचन हो रहे हैं। मुनि श्री सारस्वत सागर महाराज जी ने प्रवचन में कहा कि एक बार शिष्य आश्रम के मंदिरांे में घूम रहा था तभी वहां एक हस्त रेखा विज्ञानी आया और वह शिष्य से पूछता है कि गुरुजी कहां हैं? तो शिष्य कह देता है कि गुरुजी अभी श्रुताभ्यास कर रहे हैं। आपको थोड़ी प्रतीक्षा करनी होगी। वह हस्तरेखा विज्ञानी ने शिष्य से बातचीत करते हुए प्रतीक्षा काल को पूरा करने का निर्णय किया तभी गुरु को गले-गले कफ आया और वे कफ विसर्जन के लिए खिड़की पर आए। तभी उन्होंने शिष्यों को हस्त रेखा विज्ञानी को हाथ दिखवाते हुए देखा। देखकर कफ का विसर्जन कर पुनः अपने श्रुताभ्यास में लीन हो गए। ज्योतिषी शिष्य से कहते हैं तू अपने गुरुजी से भी आगे निकलेगा। यह बात सुनकर शिष्य के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। तभी गुरु का द्वार खुलता है और वह हस्त रेखा विज्ञानी गुरु के दर्शन करने को चला जाता है।</p>
<p><strong>कभी गुरु आज्ञा का उल्लंघन न हो </strong></p>
<p>मुनिश्री ने बताया कि शिष्य अपने होश-हवाश खो बैठा और अपने गुरुजी की आज्ञा का उल्लंघन करने लगा। उनका अपमान करने लगा। ऐसा करते हुए एक माह हो गया। पुनः वो ज्योतिषी आया, शिष्य ने ज्योतिषी को अपना हाथ दिखाया ज्योतिषी हाथ देखकर चकित हो गया। अब आप गुरु भक्ति नहीं करते हो। अनुशासन में नहीं रहते हो। गुरु के प्रति समर्पित भाव नहीं है। अब इसका हाथ पूरा विपरीत बोल रहा है। शिष्य ज्योतिषी की सारी बात समझ गया और वह गुरुजी से क्षमा मांगने लगा। गुरुजी ने उसे क्षमा कर दिया और वह शिष्य पहले जैसा जीने लगा। आगे जाकर वह एक श्रेष्ठ गुरू के रूप में उभरा।</p>
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		<title>मद को खत्म कर दिया तो भगवान बनने योग्य हो जाओगे: मुनिश्री जयंतसागर जी ने प्रवचन में मद-अहंकार त्यागने पर दिया जोर  </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Jul 2025 14:22:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों चातुर्मास कर रहे मुनिराजों के नित्य प्रवचन हो रहे हैं। प्रवचन के पूर्व भगवान की पूजा-अर्चना और भक्तिमय आराधना का दौर चल रहा है। इसका बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मानुरागी जन भाग लेकर पुण्य जाग्रत कर रहे हैं। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230; नांद्रे। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों चातुर्मास कर रहे मुनिराजों के नित्य प्रवचन हो रहे हैं। प्रवचन के पूर्व भगवान की पूजा-अर्चना और भक्तिमय आराधना का दौर चल रहा है। इसका बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मानुरागी जन भाग लेकर पुण्य जाग्रत कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नांद्रे।</strong> स्थानीय भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों चातुर्मास कर रहे मुनिराजों के नित्य प्रवचन हो रहे हैं। प्रवचन के पूर्व भगवान की पूजा-अर्चना और भक्तिमय आराधना का दौर चल रहा है। इसका बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मानुरागी जन भाग लेकर पुण्य जाग्रत कर रहे हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि</p>
<p>पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वतसागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी और क्षुल्लक श्री श्रुतसागरजी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजित हैं। मंगलवार को धर्मसभा में मुनि श्री जयंत सागरजी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में विचार तो बहुत हैं परंतु, विचार उसी के बारे में करता है जिससे प्रीति होती है। जीव कभी भी अपरिचित के बारे में विचार नहीं करता। ऐसा ही हमारा जीवन चल रहा है पर के पीछे।</p>
<p>स्व के बारे में विचार करना भूल जाता है। पर-पर करके जीवन को बर्बाद कर दिया और अहंकार करता है कि मैंने सब किया। मैं ही सब कर रहा हूं। मैं नहीं हूआ तो कुछ नहीं होगा। अरे ! भाई ये आपका भ्रम है और इसी भ्रम में रहकर व्यक्ति मद करता है और मद करते-करते समाप्त हो जाता है। अगर ये मद अहंकार को छोड देता तो पता चल जाता कि कौन किसका होता है इस संसार में। कोई भी किसी का नहीं होता, जहां तक जिस शरीर काया को आप दिन रात सजाते रहते हो, महकाते रहते हो वह शरीर भी आपका नहीं है। एक दिन यह शरीर भी छोड के चला जाएगा और मिट्टी में मिल जाएगा। जीव इस मिट्टी के शरीर में मिट्टी का पदार्थ लगाकर मद करते है कि मैं ही मैं हूं और कोई नहीं है। इस मद को खत्म कर दिया तो सब भगवान बनने योग्य हो जाओगे।</p>
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