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	<title>नवरात्रि &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>नवरात्रि &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>होम्बुज देवी में हर्षोल्लास से मनाया जाता है नवरात्र पर्व</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Oct 2020 15:00:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[तीर्थ यात्रा]]></category>
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					<description><![CDATA[धार्मिक संस्कृति से ओत-प्रोत भारत संसार का ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के पर्व और त्यौंहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी धर्मों के त्यौंहार और पर्व यहां बड़े उल्लास, उमंग और श्रद्धा से मनाए जाते हैं। नवरात्रि जैसा त्यौंहार तो सभी को आन्तरिक शक्ति से परिपूर्ण कर देता है। इस लेख में हम [&#8230;]]]></description>
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<p></p>



<p>धार्मिक संस्कृति से ओत-प्रोत भारत संसार का ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के पर्व और त्यौंहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी धर्मों के त्यौंहार और पर्व यहां बड़े उल्लास, उमंग और श्रद्धा से मनाए जाते हैं। नवरात्रि जैसा त्यौंहार तो सभी को आन्तरिक शक्ति से परिपूर्ण कर देता है। इस लेख में हम जानेंगे जैन धर्मावलम्बियों के प्रमुख तीर्थ होम्बुज देवी मंदिर के बारे में जानेंगे जहां नवरात्रि का पर्व बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है और यह प्रमाणित करता है कि जैन धर्म में नवरात्र  कितना महत्वपूर्ण अनुष्ठान व पर्व है &#8211;</p>



<h2 class="wp-block-heading">अतिशयकारी होम्बुज देवी</h2>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="720" height="480" src="https://abhisheksingh.space/news/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0018-1.jpg" alt="" class="wp-image-5007" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0018-1.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0018-1-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p>देश-विदेश से भक्तगण माता होम्बुज पद्मावती के दर्शनों के लिए आते हैं। होम्बुज पद्मावती कर्नाटक के मनोरम तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर चमत्कारी प्रभावों से आज भक्तों में बड़ा ही प्रसिद्ध हो गया है। सातवीं सदी में उत्तर मथुरा के उग्रवंशी जिनदत्त राय ने यहां अपने राज्य की स्थापना की थी। यह राजा जैन धर्मावलम्बियों की यक्षिणी पदमावती देवी के परम भक्त थे। यहां पर कुल दस मंदिर हैं, परन्तु मुख्य मंदिर अतिशयकारी पद्मावती जैन मंदिर है जो भगवान पार्शवनाथ मंदिर के साथ स्थित है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मनोरथ होते हैं यहां पूर्ण</h2>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="720" height="344" src="https://abhisheksingh.space/news/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0017-1.jpg" alt="" class="wp-image-5008" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0017-1.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0017-1-300x143.jpg 300w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p>यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और देवी के वर प्रसाद से  भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कहा जाता है कि यहां से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं गया और नवरात्रों में तो यहां देवी के दर्शनों के लिए भक्त उमड़ पड़ते हैं। माता की मू्र्ति जितनी मनोहारी है उतनी ही उनकी ख्याति है। यहां देवी पदमावती अपने चैतन्य और जीवन्त रूप में उपस्थित हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"> राजवंश को मिली श्रेष्ठ महिला शासक</h2>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="720" height="611" src="https://abhisheksingh.space/news/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0016-1.jpg" alt="" class="wp-image-5009" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0016-1.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2020/10/IMG-20201019-WA0016-1-300x255.jpg 300w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p>माता की भक्ति और शक्ति का ही प्रताप है कि इस राजवंश में श्रेष्ठ महिला शासकों चाकल देवी, कालल देवी और शासन देवी आदि जैसी कई शक्तिशाली महिला शासक मिली जिन्होंने शासन की बागडोर संभाली। होम्बुज की गुरुपरंपरा कुन्दकुन्दानवयांतर्गत नंदी संघ से सम्बन्धित है। इसके भट्टारक स्वामी देवेन्द्र कीर्ति के नाम से जाने जाते हैं जो समस्त क्षेत्र की व्यवस्था का प्रबन्धन करवाते हैं तथा साथ ही अनुष्ठान, धार्मिक कार्य और समारोह उन्हीं के सानिध्य में आयोजित होते हैं।</p>



<p></p>
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		<title>जैन शासन के देवी देवताओं का सम्मान पर्व नवरात्रि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संपादक]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Oct 2020 08:07:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[navratri]]></category>
		<category><![CDATA[parvati]]></category>
		<category><![CDATA[Tags-पद्मावती]]></category>
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		<category><![CDATA[नवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म में नवरात्रि नवरात्रि….नौ दिन तक मनाया जाने वाला दैविय अनुष्ठानों का पर्व। यह पर्व जैन दर्शन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और देवी देवताओं के सम्मान स्वरूप उनकी आराधना कर मनाया जाता है। जहां पर्यूषण पर्व आध्यात्मिक उर्जा वाला पर्व है, वहीं नवरात्रि दैवीय उर्जा वाला पर्व है। जैन दर्शन में नवरात्रि का [&#8230;]]]></description>
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<h2 class="wp-block-heading">जैन धर्म में नवरात्रि</h2>



<p>नवरात्रि….नौ दिन तक मनाया जाने वाला दैविय अनुष्ठानों का पर्व। यह पर्व जैन दर्शन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और देवी देवताओं के सम्मान स्वरूप उनकी आराधना कर मनाया जाता है। जहां पर्यूषण पर्व आध्यात्मिक उर्जा वाला पर्व है, वहीं नवरात्रि दैवीय उर्जा वाला पर्व है। जैन दर्शन में नवरात्रि का प्रादुर्भाव भरत चक्रवर्ती के काल से होता है। इसका प्रमाण आदि पुराण और भरतेश वैभव में मिलता है।<br> भरत चक्रवर्ती जब छह खण्ड का राज्य विजय कर लौटे तो इस दिग्विजय के काल में उनके राज्य, चक्ररत्नों व निधियों की रक्षा करने वाले अधिष्ठाता देवी देवताओं की सम्मानपूर्वक पूजा की गई। नवनिधि के रक्षकों के सम्मान का क्रम नौ दिन तक चला। तभी से जैन परम्परा में नवरात्रि का पर्व अनवरत मनाया गया है।<br> </p>



<h2 class="wp-block-heading">यह सम्मान है मिथ्यात्व नहीं।</h2>



<p> क्षणिक सम्यकदृष्टि भरत चक्रवर्ती जब चक्ररत्नों की पूजा कर अधिष्ठाता देवी देवताओ की पूजा कर सकते है।  जो उस भव से मोक्षगामी हुए और जिनके पिता वर्तमान चैबीसी के प्रथम तीर्थंकर हुए तो हम क्यों नहीं। यह कैसे मिथ्यात्व हो सकता है, क्योंकि अगर वे मिथ्यादृष्टि होते तो मोक्ष के अधिकारी भी नहीं होते।<br> नचरात्रि के इन नौ दिनों में चैबीस तीर्थंकरों के यक्ष यक्षणियों व अन्य देवी देचताओं की पूजा कर उनका यथायोग्य सम्मान करते हैं। तीर्थंकर तो वीतरागी हैं। वे तो आपकी मनोकामना पूर्ण नहीं करते। आपकी मनोकामना तो केवल उनके यक्ष यक्षणी ही पूर्ण करते हैं। नवरात्रि में विभिन्न अनुष्ठान होते है, क्योंकि इस समय उनकी उर्जा का प्रभाव अत्यधिक होता है और इसीलिए यह फलदायी होता है। संकट के समय आप जिनेन्द्र भगवान के आगे स्तुति कर संकट दूर करने की गुहार लगाते हैं, वह संकट भी यही देवी देवता दूर करते हैं। जो संसार के निर्वहन और सांसरिक सुखों की प्राप्ति में आपका सहयोग कर रहे हैं उनका सम्मान मिथ्यात्व कैसे हो सकता है। मिथ्यात्व तो जिनेन्द्र भगवान से की गई सांसारिक याचनाएं हैं।<br> </p>



<h2 class="wp-block-heading">कैसे हो अनुष्ठान और पूजा<br> </h2>



<p>जैन धर्म में नवरात्रि धर्म सम्मत थी, है और रहेगी। किसी भी अनुष्ठान से पूर्व जिनेन्द्र भगवान की नित्य नियम की पूजा के बाद जैन शासन के देवी देवताओं की पूजा होती है। इन्हीं का नवरात्रि अधिक महत्व है। देवी देवताओं की आराधना के बाद विघान भी अलग अलग प्रकार के किए जा सकते हैं। अलग- अलग देवी देवताओ की पूजा और आराधना में अलग-अलग रंग, माला आसन का प्रयोग कर जाप या अनुष्ठान किए जाते हैं।<br> </p>



<h2 class="wp-block-heading">पद्मावति का महत्व<br> </h2>



<p>नवरात्रि में देवी पद्मावती की आराधना समान्य तौर पर होती है,  क्योंकि उनकी पूजा की सारी विधि सहजता से उपलब्ध होती है और मंदिरों में कई स्थानों पर वे विराजमान भी हैं। पदमावती के 108 नामों में एक नाम दुर्गा भी है। कर्नाटक के हुमचा, दिल्ली के लालमंदिर, मालेगांव, गुवाहटी, पुष्पगिरी, बांसवाडा, आणिंदा पाश्र्वनाथ, कुंथगिरी, इंदौर, गुजरात, राजस्थान के कई शहरों में पद्मावती की पूर्जा अर्चना प्रमुखता से होती है।<br> उत्साह के साथ नवरात्रि का त्योंहार मनाएं ओैर जैन शासन के देवी देवताओं को सम्मान दें जो तीर्थंकरों के यक्ष यक्षिणी है।</p>
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