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	<title>धर्मनगरी सहारनपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>धर्मनगरी सहारनपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री विमर्शसागर जी का मंगल प्रवेश सुरेंद्रनगर में: उल्लास और भक्ति से अगवानी में डूबे भक्तजन  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 16:47:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्शसागर जी इस वर्ष के मंगल चातुर्मास के लिए धर्मनगरी सहारनपुर की ओर निरंतर पद विहार कर रहे हैं। मुजफ्फर नगर में जब से आचार्य संघ के आने की खबर मिली, तभी से संपूर्ण नगर में अभूतपूर्व उत्साह, भक्ति देखी जा रही है। शनिवार को आचार्य चतुर्विध संघ पदविहार करते हुए सुरेंद्र नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्शसागर जी इस वर्ष के मंगल चातुर्मास के लिए धर्मनगरी सहारनपुर की ओर निरंतर पद विहार कर रहे हैं। मुजफ्फर नगर में जब से आचार्य संघ के आने की खबर मिली, तभी से संपूर्ण नगर में अभूतपूर्व उत्साह, भक्ति देखी जा रही है। शनिवार को आचार्य चतुर्विध संघ पदविहार करते हुए सुरेंद्र नगर कालोनी में पधारे। <span style="color: #ff0000">सुरेंद्रनगर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सुरेंद्रनगर।</strong> मुजफ्फरनगर में 50 वर्षों के अंतराल बाद विशाल चतुर्विध संघ आचार्य पधारे। श्री भक्त समूह में जब-जब भक्ति की उत्तुंग लहरें उठती हैं तब-तब निर्ग्रन्य दिगंबर संतों के चरण रूपी सरिताएं उन भक्तसमूह की ओर बढ़ ही जाती हैं। आचार्य श्री विमर्शसागर जी इस वर्ष के मंगल चातुर्मास के लिए धर्मनगरी सहारनपुर की ओर निरंतर पद विहार कर रहे हैं। मुजफ्फर नगर में जब से आचार्य संघ के आने की खबर मिली, तभी से संपूर्ण नगर में अभूतपूर्व उत्साह, भक्ति देखी जा रही है। 17-18 जून को आचार्य ससंघ अतिशय क्षेत्र वहलना तथा 19-20 जून को प्रेमपुरी मुजफ्फर नगर में रहे। शनिवार को आचार्य चतुर्विध संघ सहित प्रातः काल की मंगल बेला में पदविहार करते हुए सुरेंद्र नगर कालोनी में पधारे। भक्तों ने आचार्य संघ की पलक-पांवड़े बिछाकर भव्यातिभव्य मंगल अगवानी की।</p>
<p><strong>तेरा लक्ष्य भगवान बनने का है</strong></p>
<p>सुरेंद्रनगर कॉलोनी में धर्मसभा में आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि जो गुरु दर्शन पाता है, मन उसका हर्षाता है। गुरु दर्शन गुण दर्शन है, वो गुणमय हो जाता है। गुरु गुण अभागी हो-हो-२, प्रभु गुणों को पाए रे&#8230; जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन की हमारी यह यात्रा भगवान बनने की है। इस यात्रा में हमारा सबसे पहला परिचय होता है गुरु से। गुरु ही हमें बताते हैं कि बेटा ! तेरा लक्ष्य भगवान बनने का है, बेटा। भगवान बनने के लिए ही तू इस मानव पर्याय में आया है। गुरु ही बताते हैं, भगवान का स्वरूप क्या है और तेरे अंदर भी भगवान बीज की तरह विद्यमान हैं। यह भी सद्गुरु ही हमें बताते हैं। हम सबके परम उपकारी, कल्याणकारी होते हैं। परम दिगम्बर वीतरागी संत गुरुवर। बंधुओ! आप जीवन भर अपने परिवार की चिंता में गंवा देते हैं और विचार करते हैं कि पूरे परिवार को भी मेरी चिंता रहती है। किन्तु ध्यान रखना, आपके परिवारी जन आपके नश्वर शरीर की चिंता कर सकते हैं किन्तु आपके अविनाशी शाश्वत आत्मा की चिता यदि किसी को है तो वे एकमात्र सद्गुरु ही हो सकते हैं।</p>
<p><strong>सुख स्वरूप मोक्ष स्थान में स्थापित कर दूं</strong></p>
<p>निर्ग्रन्थ वीतरागी दिगम्बर गुरु सदाकाल यह भावना-चितवन करते हैं कि ष्इस संसार में यह जीव दुःखों को भोग रहा है, मैं कब इसे इन दुःखों से निकालकर सुख स्वरूप मोक्ष स्थान में स्थापित कर दूं। बंधुओ ! आज आप सद्गुरु के न्यरगों में बैठकर जिनेंद्र भगवान की वाणी सुन रहे हैं तो विश्वास करिये कि अब आप भी निकट भविष्य में स्वयं ही भगवान बनने वाले हैं। आपका पुष्प था हमारा योग बना, बस यह संयोग आज बन गया है। गुरु जनों का संयोग भव्य जीवों के भाग्य से ही प्राप्त होता है।</p>
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		<title>सदैव याद रखें मुझे भगवान की खोज करना है: आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने दी देशना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jun 2025 17:08:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA["Life is a drop of water" epic]]></category>
		<category><![CDATA["जीवन है पानी की बूंदे" महाकाव्य]]></category>
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		<category><![CDATA[आचार्यश्री विमर्श सागर जी महाराज]]></category>
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		<category><![CDATA[धर्मनगरी सहारनपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[33 पिच्छीधारी दिगंबर साधु-साध्वी के साथ पधारे आचार्यश्री विमर्श सागर जी के आगमन से खतौली धर्मनगरी की धरा पावन हुई। यहां का कण-कण गुरु भक्ति में सराबोर हुआ। खतौली से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; खतौली। 33 पिच्छीधारी दिगंबर साधु-साध्वी के साथ पधारे आचार्यश्री विमर्श सागर जी के आगमन से खतौली धर्मनगरी की धरा पावन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>33 पिच्छीधारी दिगंबर साधु-साध्वी के साथ पधारे आचार्यश्री विमर्श सागर जी के आगमन से खतौली धर्मनगरी की धरा पावन हुई। यहां का कण-कण गुरु भक्ति में सराबोर हुआ। <span style="color: #ff0000">खतौली से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खतौली।</strong> 33 पिच्छीधारी दिगंबर साधु-साध्वी के साथ पधारे आचार्यश्री विमर्श सागर जी के आगमन से</p>
<p>खतौली धर्मनगरी की धरा पावन हुई। यहां का कण-कण गुरु भक्ति में सराबोर हुआ। आबाल-वृद्ध समुदाय में एकत्रित होकर 12 जून की प्रातः बेला में खतौली से से सलावा अतिशय क्षेत्र पहुंच गया। &#8220;जीवन है पानी की बूंदे&#8221; महाकाव्य के मूल रचियता आचार्य श्री विमर्श सागर जी महअपने चतुर्विध संघ की विशालता लिए हुए धर्मनगरी खतौली में पधारे। ज्ञात हो आचार्य श्री ससंघ 2025 के मंगल चातुर्मास के लिए धर्मनगरी सहारनपुर की ओर बढ़ रहे हैं। 12 जून को खतौली नगर का अतिशय पुण्य जागा। जो आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ खतौली में पधारे। मंगल पदार्पण के बाद उपस्थित जनसमुदाय के मध्य आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा हमें यह मनुष्य जीवन मिला है मात्र भगवान बनने के लिए।</p>
<p><strong>आज यहां आपने पंचेन्द्रिय की पर्याय प्राप्त कर ली है</strong></p>
<p>इस संसार में जीव नामक पदार्थ की कभी भी उत्पत्ति नहीं होती, जीव नामक पदार्थ अक्षय अनंत की संख्या में इस लोक में अनादि से विद्यमान हैं। हम और तुम भी अनादि काल से इसी लोक में स्थित रहे हैं। अनंत काल तो हम सभी ने निगोद की पर्याय में बिता दिया। वहां एकेन्द्रिय की वृक्ष आदि की पर्याय में कर्म फल चेतना को ही भोगते हुए अनंत काल बिता दिया। वहां क्या गर्मी, क्या सर्दी और क्या बरसात सबकुछ मात्र सहा ही सहा है, किसी का भी प्रतिकार करने की शक्ति आप में नहीं थी। आज यहां आपने पंचेन्द्रिय की पर्याय प्राप्त कर ली है तो यहां आत्म हित के लिए किंचित् भी प्रतिकूलता सहज भाव से सहन नहीं कर माते, घोड़ी सी गर्मी अथवा सर्दी में कितने विचलित- व्याकुलन्चित्त हो जाते हो। जब यह जीव तुच्छ हीन पर्यायों में दुःखों को भोगता है तो भावना करता हैं, मुझे भी मनुष्य पर्याय प्राप्त हो और मैं भी भगवान बनने के मार्ग पर अग्रसर हो सकूं।</p>
<p><strong>धर्म को तथा भगवान भूल जाते हो</strong></p>
<p>जन्मों जन्मों के संचित पुण्यों से मनुष्य जन्म प्राप्त हो गया। आज आप अपने पूर्व जन्मों के दुःखों को भूल गए और वर्तमान में प्राप्त भोगों को प्राप्तकर मदहोश हो जाते हो और धर्म को तथा भगवान भूल जाते हो । यदि प्रत्येक मानव यह प्रतिदिन स्मरण करे कि मुझे यह जन्म एक मात्र भगवान की खोज करने के लिए मिला है। तो आपके कदम कभी शराबखाने की ओर नहीं बढ़ सकते। आचार्य संघ के चरणों में खतौली समाज में निवेदन पर आचार्यश्री में 4-5 दिवस का मंगल आशीर्वाद खतौली समाज को प्रदान किया।</p>
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