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	<title>द्वितीय समाधि दिवस &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस मनाया&#039;: आचार्य छत्तीसी विधान कर आचार्यश्री के उपकारों पर प्रकाश डाला </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:54:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन विधानाचार्य अजीत शास्त्री के निर्देशन में किया गया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;   </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन विधानाचार्य अजीत शास्त्री के निर्देशन में किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि विधान में सौधर्म इंद्र बनकर वीरेंद्र सुनंदा अजमेरा ने विधान पूजा करवाई। इस अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा, उपाध्यक्ष अरुण शाह, मंत्री राजेश बोहरा, वरिष्ठ एडवोकेट विमल कुमार जैन, वरिष्ठ समाज सेवी अनिल गदिया, अशोक जैन विधानसभा वाले, अशोक जैन कासलीवाल एचपीसीएल वाले, बसंत बाकलीवाल, संतोष बाकलीवाल, सुनील जैन तिजारा वाले, कमल मालपुरा वाले आदि महिला-पुरुषों उपस्थित होकर विधान पूजा की। विधानाचार्य पंडित अजीत शास्त्री ने आचार्य श्री के उपकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूज्य आचार्य श्री जन-जन के परम आराध्य आचार्य थे, उन्होने जनजन के लिए अनेकों उपकार किए। सभी का आभार मंदिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अरुण शाह ने माना।</p>
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		<title>मड़ावरा में विमानों के साथ निकली आचार्य चरण शोभायात्रा: जैन आचार्य विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि दिवस दानवीर विरधीचंद्र जैन की 50वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर दो दिवसीय कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 04:25:54 +0000</pubDate>
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<p><strong>समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस व कस्बा मड़ावरा सहित सम्पूर्ण जनपद में अपने सरल सौम्य, धर्मपरायणता एवं दानवीर के रूप में पहचाने जाने वाले वर्णी नगर मड़ावरा गौरव भामाशाह विरधीचंद्र लक्ष्मी देवी जैन की 50 वीं वर्षगांठ को सकल दिगंबर जैन समाज एवं परिवारजनों ने उल्लास से मनाया। <span style="color: #ff0000">मडावरा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मड़ावरा(ललितपुर)।</strong> समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस व कस्बा मड़ावरा सहित सम्पूर्ण जनपद में अपने सरल सौम्य, धर्मपरायणता एवं दानवीर के रूप में पहचाने जाने वाले वर्णी नगर मड़ावरा गौरव भामाशाह विरधीचंद्र लक्ष्मी देवी जैन की 50 वीं वर्षगांठ को सकल दिगंबर जैन समाज एवं परिवारजनों ने उल्लास से मनाया। दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार को कस्बे में भव्य विमान एवं आचार्य भगवन विद्यासागर जी के प्रतीक चरण चिन्हों की शोभायात्रा निकाली गई। जो 1008 श्री पार्श्वनाथ युगल मंदिर से शुरू हुई। शोभायात्रा में भव्य सुसज्जित विमानों में श्री जी की प्रतिमाओं को विराजमान कर श्रद्धालुजन भक्तिभाव पूर्वक लेकर चल रहे थे तो वहीं झांकी के रूप में सुसज्जित की गई टेक्सी में आचार्य श्री के चरणों को विराजमान किया गया। साथ ही शोभायात्रा के आगे आगे चल रहा डीजे वाहन भक्तिमय सुमधुर संगीत से वातावरण को धर्ममय बना रहा था। महिला, पुरुष श्रद्धालु विमानों के पीछे पंक्तिबद्ध होकर भक्तिगीत गाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा के अपने नियत आयोजन स्थल पहुंचने पर विमानों में विराजमान भगवान जिनेंद्र देव को मंच पर उच्चासन पर विराजमान किया गया। विधि-विधान पूर्वक रिद्धि सिद्धिदायक मंत्रों के मंत्रोच्चारण के साथ श्रीजी का अभिषेक पूजन किया गया।</p>
<p><strong>स्वर्णिम वर्षगाँठ का हो रहा आयोजन</strong></p>
<p>बता दें कि कस्बा मड़ावरा सहित संपूर्ण जनपद में अपनी सरलता एवं धर्मपरायणता व दान के लिए प्रसिद्ध कस्बे के डॉ. विरधीचंद्र लक्ष्मीदेवी जैन की 50 वीं वैवाहिक वर्षगांठ को सकल समाज और जनता क्लिनिक परिवार मना रहा है। आयोजन समिति ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम में आचार्य श्री के द्वितीय समाधि दिवस की पूर्व मंगलवार शाम को 6 बजे से प्रतिभा स्थली ललितपुर एवं जैन समाज मड़ावरा की समस्त सामाजिक संस्थाओं के सौजन्य से विद्याविनयांजलि एवं युग श्रेष्ठ आचार्य विद्यासागर जी की 1008 दीपकों से महामंगलिक आरती की गई। साथ ही द्वितीय दिवस 18 फरवरी समाधि दिवस पर प्रातः 6 बजे से श्री आचार्य परमेष्ठी विधान एवं 12 बजे से सकल जैन समाज, क्षेत्रीय समाज एवं अतिथिगणों का वात्सल्य भोज एवं सायंकाल में 6. 30 बजे से समृद्धि संध्या शुभकामना समारोह किया जाएगा। कार्यक्रम में डॉ. राकेश जैन, डॉ. विकास जैन (जनता चाइल्ड क्लिनिक) डॉ. विशाल जैन, अभिनंदन जैन, डीके जैन, राजू सौंरया, सुरेंद्र दुकानवाले, चेतन जैन, प्रियंक सराफ, नितिन जैन सहित दिगंबर जैन समाज मड़ावरा की सभी सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता मिल रही है।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस: मुनि श्री योगसागरजी के सानिध्य में आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति हुई  </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 08:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। जो सुरेशकुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया दोतडा वाला परिवार द्वारा किया गया। उन्हें महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण स्वरा जैन ने किया। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पूजन विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से किया गया। इस अनुपम बेला में पूरा पंडाल भक्तों से भरा हुआ था। इन मांगलिक क्षणों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रकल्प गौशाला, इंडिया नहीं भारत बोलो, स्वालंबन के लिए हथकरघा इंडिया नहीं भारत बोलो को नाटकीय रूपांतरण के माध्यम से दर्शाया गया। इस अनुपम बेला में दूरदराज से भक्त भी पधारे। साथ ही मीडिया भी मौजूद रही। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं रूपचंद लाडवा ने भी महाराज श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री साधना के हिमालय थे </strong></p>
<p>इसके बाद गणिनी आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बताया आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी श्रद्धा विद्धमान है वे कहते हैं बीमार है आचार्य श्री का नाम लेंगे ठीक हो जाएंगे। मुनिश्री निर्भीक सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री साधना के हिमालय थे, जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। एक गीत के माध्यम से कहा- ‘गुरु मात पिता गुरु बंधु सखा तेरे चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।’ मुनिश्री निरामय सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री भेद विज्ञानी अध्यात्म के सरोवर थे। मुनिश्री निर्माेह सागरजी महाराज ने कहा कि हमारे जो भी थे वही थे, जो कुछ छोड़ा था। उन्हीं के लिए छोड़ा था। उनकी पूर्ति नहीं हो सकती। गुरु मिट्टी से सोना बनाते हैं। गुरु के प्रति सच्ची आस्था श्रद्धा है। गुरु कही भी बिठा सकता। गुरु हमारे लिए जीवंत भगवान थे।</p>
<p><strong>आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है</strong></p>
<p>मुनि श्री निरोग सागरजी महाराज ने आचार्य श्री ने कहा कि जीवन लग जाए तभी भी हम गुणमाला नहीं लिख पाएंगे। आचार्य श्री शारीरिक दृष्टि से हमारे बीच नहीं लेकिन, आत्मा से हमेशा जुड़े रहेंगे। आचार्य श्री ने अपनी चर्या में दोष नहीं लगे और किसी के दोष नहीं दिखे। मुनि श्री योगसागरजी महाराज ने कहा कि मुझे हर्ष हो रहा है कि आचार्य परंपरा में साधु बना, मैं नहीं सोच सकता था। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है। जब में गृहस्थ अवस्था में था, 5 साल का था तब उन्होंने मुझे नमोकर मंत्र सिखाया। इसीलिए आचार्य श्री 65 साल से मेरे धर्म गुरु हैं। गुरु आज्ञा बड़ी चीज है इसी से नैया पार होगी।</p>
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		<title>गुरुदेव भगवान बनकर आए थे तीर्थंकर बनने चले गए : कुंडलपुर में आचार्यश्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस मनाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_came_as_a_divine_being_and_departed_to_become_a_tirthankara/</link>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, मुनिराजों और माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान हुआ। कुंडलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, मुनिराजों और माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान हुआ। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, मुनिराजों और माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान, आचार्य छत्तीसी विधान (पुण्यार्जक भामाशाह परिवार श्राविका श्रेष्ठी सुशीला पाटनी किशनगढ़), अभिषेक, शांतिधारा, ऋद्धि कलश हुआ। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि दोपहर में स्थानीय विद्याभवन में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज ने विनयांजलि व्यक्त करते वह कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी ने संपूर्ण बुंदेलखंड पूरे भारत देश में जैन धर्म की जो अलख जगाई है। उनके द्वारा अनेक तीर्थ का निर्माण हुआ। अनेक संतों अनेक आगम शास्त्रों का उद्भव हुआ। जिनधर्म को आगे बढ़ाने की उन्होंने कोशिश की उनकी प्रेरणा रही। जब तक उनका जीवन रहा तब तक उन्होंने जन-जन के कल्याण के लिए बहुत अच्छे कार्य किए। कितने दूर दृष्टि रहे गुरुदेव उन्होंने साधकों के साथ-साथ लोगों को धर्म मार्ग में लगाया। ऐसे महान संत जिनकी छवि क्या नेता क्या अभिनेता, जैन, अजैन सभी के दिलों में बसी हुई है। ऐसे आचार्य श्री विद्यासागर जी डोंगरगढ़ क्षेत्र में समाधिस्थ हुए।</p>
<p><strong>हम सभी हृदय में बसे हैं और सभी के अंतस में रहेंगे</strong></p>
<p>सभी उनका समाधि दिवस अत्यंत भक्ति भाव से मनाते हैं। संतों का दीक्षा दिवस, समाधि दिवस अवश्य मानना चाहिए और यही भावना रहे हमारा अंतिम मरण समाधि मरण पूर्वक हो। यही भावना बड़े बाबा के चरणों में बैठकर हम सभी भाते हैं। आचार्य विद्यासागर आचार्यों में चमकने वाले सूर्य थे। आचार्य श्री आगे-आगे चलते गए और कारवां बढ़ता गया। साधना बढ़ाते चले गए और साधना के पुण्य प्रताप से सभी कार्य होते चले गए। वे जंगल, तीर्थक्षेत्र एकांत में साधना करते थे। हमारे आराध्य हमारे बीच से चले गए लेकिन, हम सभी हृदय में बसे हैं और सभी के अंतस में रहेंगे। हमें उनके आदर्शों को प्राप्त करना है। आप सभी ने जो भी सुना ग्रहण किया, उसे जीवन में उतारना है।</p>
<p><strong>आचार्य भगवन जीवन जीने की कला सिखा गए</strong></p>
<p>इस अवसर पर सभी मुनि राजों ने, आर्यिका माता ने, दीदी, भैयाजी ने भावांजलि व्यक्त करते हुए कहा आचार्य भगवन जीवन जीने की कला सिखा गए। मरण की कला भी हम सबको सिखा गए। हम सबने सोचा भी नहीं था। छोटे बाबा आचार्य गुरुदेव की सबसे प्रिय तपोभूमि कुंडलपुर बड़े बाबा के चरणों में उनका समाधि दिवस मनाने का हमें अवसर प्राप्त होगा। हम सबकी यही भावना है कि आचार्य श्री के जैसा समाधिमरण हम सबका हो। पंचम काल में आप गुरुदेव भगवान बनकर आए थे। 24 तीर्थंकरों में तीर्थंकर बनने चले गए।</p>
<p><strong>इन साधुवृंदों और माताजी ने विनयांजलि प्रस्तुत की </strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विशालसागर जी, मुनि श्री विभोरसागर जी, मुनि श्री विलक्ष्य सागर जी, मुनि श्री विपिन सागर जी ,आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रथमसागर जी, मुनि श्री प्रणेयसागर जी, मुनि श्री योग्यसागर जी, मुनि श्री मनोज्ञ श्रमण जी, मुनिश्री सौम्यसागर जी, मुनि श्री जयंद् सागर जी, आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विभाश्वर सागर जी, मुनि श्री शुद्धोपयोग सागर जी ,मुनि श्री श्रीसागर जी, मुनि श्री श्रम सागर जी, आर्यिका श्री भक्तिभारती जी, आर्यिका श्री सुवंदन माताजी, क्षुल्लिका श्री वासल्य भारती जी, डॉ. सुनयश्री माताजी, क्षुल्लिका श्री सुमनश्री माताजी एवं दीदीजी ने आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी के प्रति अपनी अपनी विनयांजलि की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन अजय भैया झापन तमूरा वालों ने किया।</p>
<p><strong>भक्तामर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री का पूजन संगीत की स्वर लहरियों के बीच झूमते-नाचते प्रत्येक अर्घ्य चढ़ाकर भक्ति प्रकट की। सांयकाल भक्तामर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई। संयम स्वर्ण कीर्ति स्तंभ पर एक दीप गुरु समीप सभी श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर आचार्य श्री की महाआरती कर गुरु चरणों में नमन किया।</p>
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		<title>श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस : जिनवाणी आगम को जीवन का मार्ग बनाने वाले संत आचार्य श्री विद्यासागर जी  </title>
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		<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 09:11:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आचार्य श्री जी का देह का विसर्जन भले ही हुआ हो, पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का तप, संयम, साधना, देशना, उनका तप और करुणा जब-तक सूरज चांद रहेगा तब तक सदा अमर रहेंगे। जिनवाणी आगम को जीवन का मार्ग बनाने वाले इस वसुंधरा के महामहिम युगप्रवर्तक संत का समाधि दिवस हमें आत्मशुद्धि, अहिंसा और वैराग्य की प्रेरणा देता है। उनके उपदेश मानवता को सही दिशा दिखाते रहेंगे। विश्व वंदनीय आचार्य श्री के चरणों में श्रद्धा, समर्पण और शत-शत नमन। महाराज श्री के समाधि दिवस पर कोटि-कोटि त्रिबार नमोस्तु, नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
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		<title>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छा पूरी करना धर्म: मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में दिए मंगल आशीर्वचन  </title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:34:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>विदिशा।</strong> मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े बच्चों को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने उन सभी बच्चों के साथ उनके माता पिता को समझाते हुये कहा कि आप लोगों को भी यह ख्वाब नहीं देखना चाहिये कि मेरा बच्चा किस कंपनी में कितने बड़े पैकेज पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सब कुछ धन ही नहीं होता धन से भी बढ़कर बच्चों में अंदर के संस्कार होते है। बचपन में जो संस्कार पड़ जाते है वह ही उनका भविष्य बनाते है। मुनि श्री ने कहा कि धन की चिंता मत करो जिसने चोंच दी है वह दाना भी देगा उन्होंने कहा कि आपने अपने बच्चे को पढ़ाई करने विदेश भेज दिया अथवा इंजीनियर बनाकर विदेश में अथवा महानगरों में पहुंचा दिया। बच्चे में यदि संस्कार होंगे तो वह मां बाप की परवाह करेगा अन्यथा जिन कागज के नोटों के लिये आपने उसे विदेश भेजा था उस धन को कमाने में वह इतना व्यस्त हो जाता है कि फिर उसके पास इतना समय ही नहीं होता कि वह भारत आकर अपने बूढे मां बाप की सेवा कर सके।</p>
<p><strong>बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में है! </strong></p>
<p>उन्होंने बच्चों को एक सच्ची घटना सुनाते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय जैन परिवार में दो बेटों का जन्म होता है। मां बाप दोनों बच्चों को उच्च शिक्षा के लिये विदेश भेजते हैं। बच्चे शिक्षा के साथ साथ वहीं सेटिल हो जाते हैं। कुछ दिनों तक उनकी मोबाइल पर बातचीत होती रहती है और वह भी बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में उच्च पदों पर हैं। बच्चे थोड़े संस्कारित थे तो वह अपने माता-पिता को धन भी भेजते रहते थे। उनका विवाह हो गया और वह वहीं सैटल हो गए। इधर, बूढे मां-बाप अकेले थे और अपने बच्चों की याद करते करते उसकी मां बीमार पड़ जाती है तो पिता बच्चों को संदेश भेजते हैं कि तुम्हारी मां बीमार है और अपने बच्चे बहु नाती पोतों से मिलना चाहती है तो उधर से संदेश आता है कि आप उनका अच्छे से अच्छा अस्पताल में इलाज कराओ हमारे पास अभी समय नहीं है और मां का देहांत हो जाता है। इसकी सूचना पिता अपने दोनों बेटों को देता है तो उनके अंतिम संस्कार में छोटा बेटा अकेले पहुंचता है। पिता उससे पूछता है कि बड़का नहीं आया तो छोटा जबाब देता है कि भैया ने कहा है कि इस बार तुम चले जाओ अगली बार मैं चला जाऊंगा। जब पिता अपने यह संदेश सुनता है तो वह दुःखी होकर सुसाइड कर लेता है।</p>
<p><strong>सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा है</strong></p>
<p>एक और सच्ची घटना सुनाते हुये मुनि श्री ने कहा कि दो भाई थे। एक तो पढ़-लिखकर आईएएस अफसर बन गया और किसी महानगर में पहुंच गया। छोटा थोड़ा पढ़ने में कमजोर था सो उसने पढ़ाई की और अपनी पुस्तैनी दुकान संभाल ली और अपने माता-पिता की सेवा करता और साथ में रहता था लेकिन उसके माता-पिता तो बड़े बेटे बहू की ही तारीफ किया करते थे। इस बात से छोटे बेटे बहू को बहूत तकलीफ होती थी। वह कहता पिताजी सेवा तो आपकी हम ही करते हैं लेकिन, तारीफ आप हमेशा बड़े की करते हैं। ऐसी घटनाएं आजकल हर परिवार में आम हो गई है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा करने का ही होना चाहिए। जिन्होंने कितने कष्टों के साथ हमारा लालन-पालन किया और काबिल बनाया।</p>
<p><strong>50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी के द्वितीय समाधि दिवस 27 जनवरी को आ रहा है। उसके पूर्व 8 जनवरी गुरुवार को विदिशा नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों तथा समस्त आंगनवाड़ियों के माध्यम से श्री सकल दि. जैन समाज के महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता उन स्कूलों में जाकर 50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी। आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से पूर्णायु जबलपुर एवं दयोदय गौशाला बीना वारह के सहयोग से तैयार की गई है। इसके लिए रविवार दोपहर तीन बजे कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई। जिसमें उन सभी कार्यकर्ताओं को दवा पिलाने का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
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