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	<title>दो दीक्षाएं &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>दो दीक्षाएं &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में मोक्ष कल्याणक मनाया : बही पार्श्वनाथ मंदसौर में हुईं दो दीक्षाएं </title>
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		<pubDate>Sun, 20 Apr 2025 13:31:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सिद्धहस्त कर कमलों से शनिवार को दीक्षा दी। ब्रह्मचारी राजेश भैया मेड़ता दीक्षा बाद मुनिश्री ध्येय सागर जी, ब्रह्मचारी सुरेश शाह जयपुर मुनिश्री भुवनसागर जी महाराज बने। मंदसौर से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया और राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; मंदसौर। आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाधीश आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सिद्धहस्त कर कमलों से शनिवार को दीक्षा दी। ब्रह्मचारी राजेश भैया मेड़ता दीक्षा बाद मुनिश्री ध्येय सागर जी, ब्रह्मचारी सुरेश शाह जयपुर मुनिश्री भुवनसागर जी महाराज बने। <span style="color: #ff0000">मंदसौर से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया और राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मंदसौर।</strong> आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सिद्धहस्त कर कमलों से शनिवार को दीक्षा दी। ब्रह्मचारी राजेश भैया मेड़ता दीक्षा बाद मुनिश्री ध्येय सागर जी, ब्रह्मचारी सुरेश शाह जयपुर मुनिश्री भुवनसागर जी महाराज बने। संयम साधना से साध्य को सिद्ध किया जाता है। पंचकल्याणक क्या होते हैं। किस प्रकार मनाए जाते हैं। यह कार्यक्रम आप विगत पांच दिनों से भगवान के गर्भ,जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान, मोक्ष कल्याणक के माध्यम से देख रहे हैं। विषय भोगों से मुक्त होकर भगवान की आत्मा सिद्धालय में विराजित हो गई है। आप 84 लाख योनियों में भ्रमण करते हैं। जिसमें जन्म और मरण दोनों होता है। मृत्यु को सभी देखते हैं शरीर का श्रृंगार सब करते हैं किंतु, आत्मा का श्रंगार तप संयम को भूल जाते हैं। भगवान का शरीर मोक्ष कल्याणक के साथ लुप्त हो गया। केवल नख और बाल शेष रहते हैं जबकि, संसारी प्राणी की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा शरीर से निकल जाती है और मृत शरीर संसार में रहता है।</p>
<p>हर संसारी शरीर में प्रभु और आत्मा है। संसारी प्राणी पर्याय में शरीर को अपना समझकर आत्मा को भूल गए हैं। इसलिए संयम धारण कर साधना से साध्य को सिद्ध करके सिद्ध बनने के लिए दीक्षा धारण कर तप से कर्मों की निर्जरा कर सिद्धालय में विराजित होते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने भगवान के मोक्ष कल्याणक और दो दिगंबर जैनेश्वरी मुनि दीक्षा के पावन प्रसंग पर प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि दीक्षा आमूल चूल परिवर्तन है।</p>
<p><strong>संयम के पुरुषार्थ से आत्मिक सुख मिलता है</strong></p>
<p>संयम और ध्यान से आत्मा को संसारी प्राणी समझने का प्रयास करते हैं। असंयमी प्राणी ध्यान नहीं कर सकते हैं आज दो भव्य प्राणी आप की ही तरह परिवार में माता-पिता, पत्नी, बेटा-बेटी परिजन का लालन-पालन कर संसार की असारता को समझ कर वैराग्य धारण करने के लिए गुरु की शरण में आए हैं क्योंकि, उन्हें पता है कि गुरु शरण में ही शांति और मुक्ति का मार्ग मिलता है। आदिनाथ भगवान ने भी आत्मा को साधना में लगाया शादी की साधना कर साध्य को उन्होंने भी सिद्ध किया भगवान ने भी आत्म साधना कर सिद्ध अवस्था प्राप्त की सभी का लक्ष्य सिद्धालय होना चाहिए सुरेश जी शाह ने बेटे वर्तमान के मुनि हितेंद्र सागर का लालन-पालन किया फिर गुरु शरण में गए और बेटे के संयम मार्ग का अनुसरण किया पिता के लिए पुत्र आदर्श बन गए। उन्होंने काफी समय तक दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाया पंचकल्याणक में मोक्ष कल्याणक के पावन दिन मुक्ति लक्ष्मी पाने के लिए दीक्षा ले रहे हैं।</p>
<p><strong>भगवान ने भी सभी आठ कर्मों को नष्ट किए</strong></p>
<p>गुरु दीक्षार्थी शिष्य की अनेक स्तर पर परीक्षा लेते हैं पहले कर पात्र में दीक्षार्थी शिष्य आहार लेता है फिर दीक्षार्थी का केशलोचन होता है इस दृढ़ता के आधार पर गुरु उन्हें दीक्षा देते हैं। भगवान आदिनाथ ने भी एक वर्ष के उपवास के बाद आहार लिया। संसारी प्राणी के लिए परिवार का मोह छोड़कर ,गुरु से नाता जोड़ना,मोह की प्रबलता के कारण मुश्किल होता है। भगवान ने भी सभी आठ कर्मों को नष्ट कर आठ गुणों को प्रकट कर सिद्धालय में विराजित हुए आपको दीक्षा देखकर यह भावना भाना चाहिए कि हम भी परिवार का मोह छोड़कर संयम को धारण करें संयम के पुरुषार्थ से आत्मिक सुख मिलता है तभी मनुष्य जीवन सार्थक होता है।</p>
<p><strong>पिच्छी कमंडल शास्त्र माला भेंट किए गए </strong></p>
<p>सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं द्वारा चोक पूरण की क्रिया की गई। इस बेला में आचार्य श्री द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किये गए तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किये गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया। 7 प्रतिमा धारी ब्रह्मचारी राजेश भैया मेड़ता का दीक्षा उपरांत नूतन नाम मुनि श्री ध्येय सागर किया गया। 75 वर्षीय श्री सुरेश शाह का नूतन नाम मुनि श्री भुवन सागर जी किया गया। पुण्यार्जक परिवार द्वारा पिच्छी कमंडल शास्त्र माला भेंट किये गए।</p>
<p><strong>श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया</strong></p>
<p>कार्यक्रम प्रभावशाली संचालन आर्यिका श्री महायशमति जी ने किया। दीक्षार्थी के केशलोच हो रहे थे, तब सभी वैराग्यमयी पलों से सभी द्रवित हो रहे थे।परिजनों के दोनों नेत्रों में एक नेत्र में खुशी के आंसू दूसरे नेत्र में दु:ख के आंसू भी थे। भक्तों के भजनों से वातावरण वैराग्यमय हो रहा। आचार्य श्री मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम् अन्य साधुओं ने दीक्षार्थी के केशलोचन किए। परिजनों एवं अन्य भक्त जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। वह अपने को पुण्यशाली मान रहे थे। प्रातःकाल दीक्षाथियो ने श्रीजी के दर्शन कर पंचामृत अभिषेक पूजन किया। इसके पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन कर उनके चरणों का प्रक्षालन किया। दोनों दीक्षार्थियों के केशलोचन साधुओं ने किए। इसके पश्चात दीक्षार्थियों ने हल्दी लगाकर मंगल स्नान किया। आचार्य संघ सानिध्य में दोनों दीक्षार्थियों ने श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया।</p>
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		<title>पावागिरी ऊन में पंच कल्याणक महोत्सव में जन्म कल्याणक मनाया: आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि नवीनता ही आनंद है </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 13:11:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और ंतीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। गुरुवार को दीक्षाएं होंगी। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और ंतीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। गुरुवार को दीक्षाएं होंगी। <span style="color: #ff0000">ऊन खरगोन से दीपक प्रधान की यह खबर पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>ऊन (खरगोन)। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और तीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। कुबेर ने रत्नों की वृष्टि की। प्रातः आचार्य संघ तलहटी मंदिर के दर्शन कर बैंडबाजों के साथ मंचासीन हुए। आर्यिका विशिष्टमति जी माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया और आचार्य श्री विराग सागर जी को याद करते हुए भाव विह्वल हो गईं। होने वाले आचार्य के पट्टशिष्य आचार्य श्री से निवेदन किया कि हमें और हमारे पूरे संघ को अब आप ही संभालना। आप ही सिखाना। अब आप ही हमारे गुरु, हमारे पिता ,हमारी माता आप ही हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि मुनि राज क्यों मुस्कुराते हैं ? आचार्य श्री ने बताया के मुनि इस लिए मुस्कुराते है कि वो रोज नवीनता लिए होते हैं। रोज नया प्राप्त करते है मुनिराज को रोज नया घर, नया मोहल्ला, नया नगर, नया श्रावक मिलता है जो कि आहार, निहार, विहार करवाता है। अतः नवीनता ही आनंद है। पुराना उनको देखना अच्छा नहीं लगता जो नवीन को देखना ही नहीं चाहते। नया तो नया ही है।</p>
<p><strong>सब्जी, दाल नहीं तो पानी से ही रोटी खा लेना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने आगे कहा कि आपको अपने जीवन में भोजन में भी रोटी अवश्य खाना ही चाहिए और साधु को तो कम से कम छः रोटी खाना चाहिए। सब्जी, दाल नहीं तो पानी से ही रोटी खा लेना। यदि आप फलों और रसों पर रहोगे तो गोली खाना ही पड़ेगी। आपको बल भोजन से ही मिलेगा और रोटी का अभिप्राय समझिए भोजन सिर्फ बल देता है और आप आत्मा के आश्रित वीर हो ,और यदि वीर नहीं हो तो बल कुछ नहीं कर सकता ,जिन शासन के श्रावक को अपने जिन शासन के मौसम का त्याग नहीं करना चाहिए ।आप में यदि उत्साह शक्ति नहीं है तो हम भगवान केसे बन सकते है ,आगे बताया कि इस पंच कल्याणक कार्यक्रम को प्रतिष्ठाचार्य सम्पन्न कराता है और कब किस वस्तु की आवश्यकता है वो प्रतिष्ठाचार्य ही व्यवस्था करवाता है अतः प्रतिष्ठाचार्य को समीकदृष्टि होना चाहिए इस कार्यक्रम में नमक की डली से लेकर सांप की बामी की मिट्टी अन्य मिट्टी वनस्पति, औषधि आदि लगती है। याने किसी भी चीज का अभिप्राय आने से वस्तु बदल जाती है जैसे खेत की मिट्टी को देख कर कुंभकार, किसान,वैद्य,हाकिम, व्यापारी की दृष्टि बदल जाती है।</p>
<p><strong>विधायक ने श्रीफल किया भेंट </strong></p>
<p>ट्रस्ट के प्रचार मंत्री आशीष जैन एवं मनीष दोषी ने बताया कि आज आचार्य के दर्शनार्थ पंधाना विधायक छाया मोरे और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तोताराम महाजन ने श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। ट्रस्ट कमेटी ने अतिथियों का सम्मान किया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन अर्पित अशोक कासलीवाल ने किया जबकि जन्मभिषेक का प्रथम अभिषेक हेमचंद झंझरी इंदौर ने किया। पश्चात सौधर्म इंद्र शची इंद्राणी अशोक चंदा झांझरी और अन्य इंद्र कुबेर और श्रावक श्राविकाओं ने तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक पर विशाल शोभा यात्रा निकाली जो कि पांडुक शीला पर तीर्थंकर बालक के जन्माभिषेक किए और खूब आनंद भक्ति उल्लास के साथ नृत्य कर के चल रहे थे। मुनि संघ की आहार चर्या के बाद दोपहर को बाल क्रीड़ा, दीक्षार्थी की मेंहदी, गोद भराई हुई, तीर्थंकर बालक को पालने में झुलाने का कार्यक्रम आरती हुई।</p>
<p><strong>दो दीक्षाएं संपन्न होगी</strong></p>
<p>गणिनी आर्यिका विशिष्ट मति माताजी एवं आचार्य श्री के सानिध्य में जयश्री दीदी छतरपुर एवं क्षुल्लिका विपथ श्री माताजी की दीक्षा संस्कार विधि दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। सुबह केशलोच क्रिया होगी। गुरुवार को दीक्षा कल्याण के अंतर्गत सुबह अन्नप्राशन विधि, तीर्थंकर बाल क्रीड़ा, दोपहर में विवाह ,राज दरबार 32 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट, राज्याभिषेक, नीलांजना का नृत्य वैराग्य एवं दीक्षा कल्याणक की समस्त क्रियाएं होंगी।</p>
<p><strong>दीक्षार्थीयो का परिचय</strong></p>
<p>1- पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत पावागिरी ऊन के इतिहास में पहली बार महावीर जयंती के दिन हो रही भव्य जैनेश्वरी दीक्षा ले रही दीक्षार्थी जयश्री दीदी का अदभुत संयोग है कि उनका जन्म 60 वर्ष पूर्व महावीर जयंती के दिन हुआ था और महावीर स्वामी के दरबार में महावीर जयंती के दिन ही जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा होने जा रही है। संपन्न परिवार से संबंध रखने वाली दीदी का भरा पूरा परिवार है। तीन बच्चों की मां होने के बाद अपने गृहस्थ परिवार का पालन करने के बाद संसार की असारता को देखते हुए 2014 में आचार्य विराग सागर जी से व्रत प्रतिमा के नियम ले लिए। तब ही से निरंतर वैराग्य पथ पर अग्रसर होती जा रही हैं। विशेष बात यह है कि जयश्री दीदी तीन बार भाजपा की जिला महामंत्री पद पर रह चुकी हैं। साथ ही नगर पालिका छतरपुर की पार्षद रहने के साथ ही खजुराहो जैन समाज की मंत्री भी रह चुकी हैं। इतने सब पदों पर रहकर भी भरा पूरा परिवार छोड़कर दीक्षा की राह अपना रही हैं।</p>
<p>2- दूसरी दीक्षार्थी क्षुल्लिका विपथ श्री माताजी का गृहस्थ नाम पुष्पा जैन था। यह बृजपुर जिला पन्ना की रहने वाली हैं। मात्र 5 वीं तक शिक्षा प्राप्त क्षुल्लिका के पति भी संघ में क्षुल्लक विश्वतीर्ण सागरजी के नाम से साधनारत हैं।सात भाई बहन एवं दो पुत्रों को छोड़कर 2013 में विराग सागर जी से वीरागोदय क्षेत्र में क्षुल्लिका दीक्षा 13 फरवरी को हुई थी, ऐसी दीक्षार्थी को क्षुल्लिका से आर्यिका दीक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
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