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	<title>देशना &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया : आचार्यश्री ने आपदा से मुक्ति से बचाव के उपाय बताए  </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Jul 2025 10:04:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आत्मा की रक्षा, इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें। साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करें। यह प्रेरणादायी वाणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी। टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने जीवन में आपदा और कष्ट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आत्मा की रक्षा, इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें। साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करें। यह प्रेरणादायी वाणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी। <span style="color: #ff0000">टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने जीवन में आपदा और कष्ट क्यों आते है, इससे बचने के क्या उपाय हैं, कर्माे का क्या प्रभाव शरीर आत्मा पर होता है, अहिंसा , सत्य धर्म का जीवन में क्या महत्व है? इसकी प्रवचन में विवेचना की। संसारी प्राणी को आपदा या कष्ट से निराशा होती है और निराशा दूर करने की वह खोज करता है रोग बीमारी की आपदा डॉक्टर से, चोरी होने पर पुलिस की मदद लेता है। वर्तमान में गरीबी दरिद्रता भी आपदा कष्ट है। यह देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की।</p>
<p>राजेश पंचोलिया ने कहा कि आचार्य श्री ने प्रवचन में प्रबोधन में बताया श्री आदिनाथ भगवान से लेकर श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों ने कष्ट आपदा से दूर होने के लिए धर्म का उपाय बताया है। धर्म उपदेश को सुनकर, धारण कर ग्रहण करना चाहिए। जिस प्रकार धन उपार्जन करने के लिए आप मेहनत करते हैं पसीना बहाते है ,गर्मी और कष्ट भी महसूस नहीं होता है, उसी प्रकार धर्म धारण करते समय संयम और तप से कष्ट नहीं होता है।</p>
<p><strong>धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है </strong></p>
<p>संत आत्मा के कल्याण के लिए संयम धारण करते हैं। आचार्य श्री ने 148 कर्मों की चर्चा कर बताया कि जिस प्रकार इंजीनियर मकान बनाता हैं उसी प्रकार निर्माण ,नाम ओर आयु कर्म शरीर को निर्धारित करते हैं संसार में जन्म मरण से छुटकारे का उपाय धर्म से प्राप्त होता हैं जीवन में अहिंसा का महत्व है राग द्वेष विषय भोगों से आत्म धर्म को हिंसा से बचाने का पुरुषार्थ करना चाहिए। इसका उपाय बताया कि कछुआ जिस प्रकार संकट आने पर शरीर के अंगों को संकुचित नियंत्रित कर शरीर को कठोर बनाता हैं। उसी प्रकार आपको भी 5 इंद्रियों को संकुचित और नियंत्रित कर तप संयम से आत्मा की रक्षा करना चाहिए। धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है जीवन में प्राप्त तीर्थंकर कुल से जीवन को उच्च बनाकर मानव जीवन सफल करे</p>
<p><strong>पुण्यवान व्यक्ति को आपदा, विपदा नहीं आती</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी के प्रवचन हुए। आपने अमीर गंज को धन धान्य और पुण्य से अमीर बताया। इसी पुण्य के कारण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का चातुर्मास टोंक समाज को मिला है। उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म का पुरुषार्थ करो सर्वाेच्च गुणों की संपदा युक्त मानव जीवन बनाना चाहिए। गुणों की संपदा में उदारता ,दानशीलता, करुणा, संवेदना ,सहानुभूति की भावना होना चाहिए। पुण्यवान व्यक्ति को आपदा, विपदा नहीं आती है। भाग्य रूठने से ओर पुण्य कमजोर होने से संचित धन भी नष्ट हो जाता है।दान तन,मन और धन से किया जाता हैं। नदी देती हैं तो पानी मीठा होता हैं सागर समुद्र लेता है। इस कारण उसका पानी खारा होता हैं और नाला पानी का संग्रह करता हैं उसका पानी सड़ांध देता हैं इसी प्रकार आपको भी धर्म कार्य में दान देना चाहिए। दान और त्याग में त्याग बड़ा होता हैं।</p>
<p>धर्म प्रचारक प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन अहिंसा सर्किल जिनालय के श्रावक व श्राविकाओं ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। इस मौके पर झाड़ोल से पधारे कलाकार भाई गोरधन के भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं अष्टद्रव्य समर्पित किया एवं सुनील सर्राफ ने पूजन व्यवस्था में सहयोग किया। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को कूलर व ऐसी का त्याग देकर नियम दिलाया। आचार्य श्री संघ के आहार के चौके लगाने के लिए बाहर के नगरों से काफी भक्त पधार रहे हैं। टोंक सहित इंदौर, पारसोला, निवाई के चौके लगे हैं। कोलकाता वालांे को आचार्य श्री का आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का मार्गदर्शन किया प्राप्त </strong></p>
<p>गुरुवर दोपहर को टोंक विधायक पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैन नसिया आमीररगंज पधारे। वहां आदिनाथ जिनालय में श्रीफल भेंटकर दर्शन किए। आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर अनेक विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर आशीर्वाद लिया एवं आचार्य श्री ससंघ की दिनचर्या से बहुत प्रभावित हुए। समाज के लोगों ने उनको 24 घंटे में एक बार आहार व जल ग्रहण करने पर वो भी विधि पूर्वक ओर अनेक चर्या के बारे में बताया। इससे पायलट बहुत प्रभावित हुए। आचार्य श्री ने उनको पुस्तक आचार्य शांतिसागर जी महाराज के जीवनी की प्रदान की।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह भी रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, कमल आंडरा, राजेश सर्राफ, राजेश बोरदा, धर्मचंद पासरोटियां, सुरेश मलारना, सुरेश संघी, कमल सर्राफ, रोनित श्यामपुरा, नीटू छामुनिया, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, एंजे दाखिया, अंशुल आरटी, अम्मू छामुनिया, विनायक कल्ली, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>जब धर्म पथ पर बढ़ो, तो दुख का स्वागत करो: मुनिश्री सुधासागर जी ने अशोकनगर में दी देशना  </title>
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		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 10:19:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जब-जब तुम धर्म करने आओ, यह तय मानो कि जीवन में कष्टों की बाढ़ आ जाएगी।यह उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी ने अशोकनगर प्रवास के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे। अशोकनगर से पढ़िए राजीव सिंघई मोनू और शुभम जैन की यह खबर&#8230; अशोकनगर। जब-जब तुम धर्म करने आओ, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जब-जब तुम धर्म करने आओ, यह तय मानो कि जीवन में कष्टों की बाढ़ आ जाएगी।यह उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी ने अशोकनगर प्रवास के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए राजीव सिंघई मोनू और शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> जब-जब तुम धर्म करने आओ, यह तय मानो कि जीवन में कष्टों की बाढ़ आ जाएगी।यह उद्गार मुनि श्री सुधासागर जी ने अशोकनगर प्रवास के दौरान व्यक्त किए। मुनिश्री ने अपने प्रबोधन में कहा कि सुख यदि सतत मिले तो उसका मूल्य समाप्त हो जाएगा। जैसे रात के बिना प्रातः का सौंदर्य अधूरा है, वैसे ही दुःख के बिना जीवन की पूर्णता नहीं। मुनिश्री ने जीवन की कठोर सच्चाई को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा-जो गाली देता है, उसे निंदक नहीं, बल्कि हमारे धैर्य का परीक्षक मानो। निंदा अज्ञानी करेगा, लेकिन प्रशंसा ज्ञानी करेगा।</p>
<p><strong>राम नहीं बनते अगर दुख न सहते</strong></p>
<p>मुनिश्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि श्रीराम के जीवन में वनवास, वियोग और संघर्ष न आते तो वे पूज्य नहीं होते। दुःख ही उन्हें राम बना गया। उन्होंने कहा कि “सच्चा भक्त वही है, जो भगवान या गुरु के जीवन को अपने जीवन में ढाल ले। माता-पिता, भाई-बहन और जीवनसाथी के सुख-दुःख को स्वयं का मानने वाला ही सच्चा रिश्तेदार होता है।</p>
<p><strong>धर्म से सुख नहीं, सहनशीलता आती है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने साफ शब्दों में कहा कि धर्म से सुख नहीं मिलता, दुख सहने की शक्ति मिलती है। तुम अच्छे साधु बनना चाहते हो तो पहले खुद को दुख झेलने के लिए तैयार करो। उन्होंने कहा कि साधु वह नहीं जो कष्टों से भागे, बल्कि वह है जो कष्टों को समता से झेले। प्रवचन में मुनिश्री ने समाज को एक नई सोच दी कि जब सुख मिले, तब प्रभु को कुछ लौटाओ। दुःख में तो सभी मंदिर आते हैं, लेकिन सुख में प्रभु के द्वार जाना, यह सच्ची श्रद्धा है। ऐसा जीवन बनाओ कि तुम्हारे स्पर्श, दर्शन, शब्द और स्मरण से लोगों का कष्ट मिटे। यही है साधुता। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने मुनिश्री के उद्बोधनों को श्रवण कर जीवन के नए दृष्टिकोण प्राप्त किए।</p>
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		<title>आचार्य निर्भय सागर का कथन अहंकारी नहीं भक्त बनो : आचार्यश्री ने समाज के विभिन्न रूपों से करवाया परिचय                   </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Jun 2025 14:31:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत आचार्यश्री निर्भय सागरजी संघ का सहित बडे़ मंदिर महरौनी में 10 दिवसीय प्रवास रहा। प्रतिदिन प्रातः आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम संयोजित किया गया। शुक्रवार को भी यहां धर्म सभा हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उनकी देशना सुन धर्मलाभ अर्जित किया। महरौनी से राजीव सिंघई की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत आचार्यश्री निर्भय सागरजी संघ का सहित बडे़ मंदिर महरौनी में 10 दिवसीय प्रवास रहा। प्रतिदिन प्रातः आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम संयोजित किया गया। शुक्रवार को भी यहां धर्म सभा हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उनकी देशना सुन धर्मलाभ अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> आचार्यश्री निर्भय सागरजी संघ का सहित बडे़ मंदिर महरौनी में 10 दिवसीय प्रवास रहा। प्रतिदिन प्रातः आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम संयोजित किया गया। शुक्रवार को भी यहां धर्म सभा हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उनकी देशना सुन धर्मलाभ अर्जित किया। आचार्यश्री निर्भयसागरजी ने धर्मसभा में उपदेश देते हुए कहा कि समाज अनेक प्रकार के होते हैं। जैसे स्वार्थी समाज, परमार्थी समाज, स्वस्थ समाज, धार्मिक समाज, भक्त समाज, व्यसनी सम, हिंसक समाज, अहिंसक समाज और उपकारी समाज। हमें उपकारी, अहिंसक, स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। यही जैन धर्म का मूल उद्देश्य है। जैन समाज स्वयं परमार्थी, उपकारी, धार्मिक और अहिंसक समाज है। परस्पर उपकार करने वाला समाज स्वस्थ समाज कहलाता है। परस्परता के सूत्र में बंध जाने पर परोपकार की भावना पैदा होती है और संघर्ष समाप्त हो जाता है। जो समाज भगवान की भक्ति करता है, परिवार और समाज की सेवा में लीन रहता है। वह भक्त समाज कहलाता है।</p>
<p><strong>विनय को मोक्ष का द्वार कहा है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने धर्मसभा में कहा कि भक्ति रूपी चाबी से मुक्ति महल में लगा ताला खुल जाता है। विनय करने से मोक्ष महल में लगा हुआ दरवाजा खुलता है, इसलिए विनय को मोक्ष का द्वार कहा है। भक्त और भगवान के बीच संबंध जोड़ने में भक्ति सेतु का काम करती है, भक्ति आत्म उत्थान का सूत्र है। परोपकार समाज उत्थान का सूत्र है। सेवा परिवार के उत्थान का सूत्र है। आचार्य श्री ने कहा कि जिस व्यक्ति के अंदर भक्ति की हवा भरी होती है। वह वालीबाल के समान होता है। उसे लोग गिरने नहीं देते बल्कि हाथों हाथों में लिए रहते हैं, लेकिन जिसके अंदर अहंकार की हवा भरी होती है। वह फुटबाल के समान होता है उसे कोई हाथ नहीं लगाता है। फुटबाल के समान अहंकारी व्यक्ति का स्थान पैरों के नीचे होता है। वह संसार की ठोकर खाता रहता है।</p>
<p><strong>ललितपुर तब तक ना छोड़िए जब तक ना हो उद्धार</strong></p>
<p>अपने जीवन को फुटबाल नहीं वालीबाल बनाना चाहिए। तभी समाज में इज्जत होगी और स्वर्ग की ओर आत्मा की गति होगी। संसारी प्रत्येक मानव को जन्म जरा मृत्यु रोग अनादि काल से लगे हुए है। प्रत्येक संसारी प्राणी आहार, भय, मैथुन और अपरिग्रह संज्ञा से पीड़ित है। इस पीड़ा को धर्म रूप औषधि से दूर किया जा सकता है। आचार्य श्री ने बुंदेलखंड में चलने वाली कहावत के अनुसार कहा कि झांसी गले की फांसी, दतिया गले का हार, ललितपुर तब तक ना छोड़िए जब तक ना हो उद्धार। पूजा, भक्ति एवं आरती की परंपरा अनादि कालीन है। प्रातः काल देवकी पूजा करना चाहिए। दोपहर में गुरु को आहार दान रूपी भक्ति करना चाहिए और शाम को संध्याकाल में धर्मशास्त्र की आरती करना चाहिए। यही त्रिकाल वंदना है। भक्ति है और पूजा है। इसको करने वाला तीन लोक का नाथ बन जाता है। प्रवचन के बाद आचार्य संघ की आहार चर्या हुई। सामायिक करने के बाद आचार्य संघ का ललितपुर की ओर चातुर्मास के लिए मंगल विहार हुआ।</p>
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		<title>काबिल व्यक्ति अपने कर्मों से बोलता है: पंच कल्याणक में मुनिश्री की देशना से हो रही धर्म प्रभावना </title>
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		<pubDate>Thu, 05 Jun 2025 14:16:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल पंच कल्याणक में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज के प्रवचन जारी हैं। पंच कल्याणक में मुनिश्री की देशना से धर्म प्रभावना हो रही है। बड़ी संख्या में समाजजन उनके प्रवचन सुनने के लिए आ रहे हैं। भोपाल से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230; भोपाल। भोपाल पंच कल्याणक में मुनि श्री सर्वार्थ सागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भोपाल पंच कल्याणक में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज के प्रवचन जारी हैं। पंच कल्याणक में मुनिश्री की देशना से धर्म प्रभावना हो रही है। बड़ी संख्या में समाजजन उनके प्रवचन सुनने के लिए आ रहे हैं। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> भोपाल पंच कल्याणक में मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज के प्रवचन जारी हैं। उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम उस गहराई को समझने का प्रयास करें, जो इस साधारण सी पंक्ति में छिपी है। ‘काबिल लोग न तो किसी को दबाते हैं और न ही किसी से दबते हैं’। उन्होंने कहा कि हम इस संसार में बहुत से लोगों को देखते हैं। कुछ अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं तो कुछ दूसरों के भय से खुद को छोटा समझने लगते हैं परंतु, जो वास्तव में काबिल होते हैं, उनकी पहचान कुछ और होती है।</p>
<p>काबिलियत का अर्थ केवल डिग्री या पद से नहीं होता। वह आत्मविश्वास से आती है, वह धैर्य और विनम्रता से आती है। काबिल व्यक्ति अपने कर्मों से बोलता है, न की शोर से। वह किसी को नीचा दिखाकर खुद ऊंचा नहीं बनना चाहता क्योंकि उसे पता है, जो दीपक दूसरों को जलाता है, वो खुद भी जलता है। मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज कहते हैं कि याद रखिए, जो दूसरों को दबाता है, वह असल में भीतर से डरा होता है।</p>
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		<title>14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान एवं मोक्ष कल्याणकः इस बार तिथि के अनुसार 29 मार्च को आ रहा है  </title>
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		<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 06:11:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक चैत्र कृष्ण अमावस के दिन आ रहा है। यह तिथि इस बार 29 मार्च शनिवार को आ रही है। इस भगवान की आराधना, पूजा और अभिषेक आदि के कार्यक्रम पूरे विधान के अनुसार किए जाएंगे। जिनालयों में भगवान का ज्ञान और मोक्ष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक चैत्र कृष्ण अमावस के दिन आ रहा है। यह तिथि इस बार 29 मार्च शनिवार को आ रही है। इस भगवान की आराधना, पूजा और अभिषेक आदि के कार्यक्रम पूरे विधान के अनुसार किए जाएंगे। जिनालयों में भगवान का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंखला में आज पढ़िए उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संयोजित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के अनुयायियों को सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देने वाले और जीवनपर्यन्त सत्य और अहिंसा के पथ पर अग्रसर रहने वाले 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का 29 मार्च को ज्ञान और मोक्ष कल्याणक महोत्सव आ रहा है। तीर्थंकर भगवानों में अनंतनाथ जी का स्थान भी बहुत अहम रहा है। उन्होंने धर्म उपदेशों के माध्यम से तीर्थ की रचना की और तीर्थंकर कहलाए। भगवान अनंतनाथ जी चैत्र कृष्ण अमावस के दिन खड़गासन अवस्था में सम्मेदशिखर पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। भगवान अनंतनाथ जी को कैवल्य ज्ञान भी चैत्र कृष्ण अमावस के दिन ही प्राप्त हुआ था। इसलिए इस दिन भगवान अनंतनाथ की ज्ञान और मोक्ष कल्याणक एक साथ मनाया जाता है। जैन धर्म ग्रंथों में वर्णित जानकारी के आधार पर श्री अनंतनाथ भगवान वर्तमान काल चक्र के 14वें तीर्थंकर थे। उनकी ऊंचाई 50 धनुष थी। भगवान श्री अनंतनाथ का प्रतीक बाज़ है। पाताल यक्ष देव और अंकुश यक्षिणी देवी क्रमशः उनके शासन देव और शासन देवी हैं। घातकी खंड के प्राग्विदेह क्षेत्र में स्थित ऐरावत विजय की अरिष्ट नगरी में राजा पद्मरथ थे। उन्होंने सांसारिक जीवन में राज सिंहासन प्राप्त करने के बाद दीक्षा ली। बड़ी भक्ति से उन्होंने तीर्थंकर गोत्र का बंधन किया और देवलोक में पुनर्जन्म लिया। दिव्य जीवन पूर्ण करने के बाद तीर्थंकर भगवान श्री अनंतनाथ ने भरत क्षेत्र की अयोध्या नगरी में राजा सिंहसेन एवं रानी सुयशा के घर जन्म लिया। तभी राजा सिंह सेन ने शत्रुओं की असीम शक्ति पर विजय प्राप्त की और तभी से भगवान का नाम ‘अनंतनाथ’ पड़ा। युवावस्था में ही उनका विवाह हुआ और फिर वे राज सिंहासन पर बैठे। कुछ समय बाद देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने दीक्षा ले ली। तीन वर्षों तक श्री अनंतनाथ भगवान एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते रहे। दीक्षा लेने के तीन वर्ष बाद उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई। भगवान को केवल ज्ञान प्राप्त होने पर देव गणों ने एक समवसरण बनाया। जहां से भगवान ने देशना दी।</p>
<p><strong>भगवान की देशना के अनुसार मोक्ष दो चरणों में है</strong></p>
<p>भगवान अनंतनाथ जी ने बताया कि मोक्ष की पहली अवस्था, जिसका अनुभव हम यहीं जीवित रहते हुए करते हैं, उसे मुक्ति की अवस्था कहते हैं। सभी दुखों से मुक्ति ही मोक्ष की पहली अवस्था है। मोक्ष की दूसरी अवस्था में हमारे सारे कर्म, सारी आसक्ति समाप्त हो जाती है। सारे परमाणु ( निर्जीव पदार्थ के कण जो शुद्ध रूप में नहीं हैं) समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति केवल परम आत्मा की अवस्था में आता है। उसके बाद जब अंतिम आयुष्य कर्म (जीवन-काल निर्धारित करने वाला कर्म) समाप्त हो जाता है तो व्यक्ति मोक्ष में चला जाता है। यह परम मोक्ष है। सभी आत्माएं सिद्ध क्षेत्र में विराजमान हैं। भगवान अनंतनाथ की देशना सुनकर लोगों के हृदय परिवर्तित हो गए। तीर्थंकर की वाणी इतनी शक्तिशाली होती है कि वह श्रोता के भीतर के सभी कर्मों के आवरणों को चीरकर सीधे उसकी आत्मा तक पहुंच जाती है। उस वाणी को सुनकर अनेक लोग जीवन-मृत्यु के भवसागर से पार होकर मोक्ष को प्राप्त हुए हैं। वह ‘स्याद्वाद वाणी’ (जिससे किसी भी जीव के अहंकार को किंचित भी ठेस न पहुंचे) वह देशना इस संसार में कहीं भी देखने को नहीं मिलती।</p>
<p><strong>श्री अनंतनाथ भगवान निर्वाण</strong></p>
<p>भगवान श्री अनंतनाथ ने अपना शेष जीवन देशना में बिताया। उनके संघ में 50 गणधर (तीर्थंकर के मुख्य शिष्य) थे। लाखों लोगों ने भगवान की वाणी का लाभ उठाया और दीक्षा लेकर मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़े। पुरुषोत्तम वासुदेव और सुप्रभ बलदेव भी अनंतनाथ भगवान के पास गए और उनके शक्तिशाली वचनों को सुनकर सही दृष्टि प्राप्त की। सुप्रभ बलदेव उनके शिष्य बन गए और अपने सभी कर्मों को साफ करने के बाद मोक्ष प्राप्त किया। अनंतनाथ भगवान हजारों साधुओं, साध्वियों और केवलियों के साथ शिखरजी पर्वत से मोक्ष की ओर चले गए।</p>
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		<title>भाव पूर्वक की गई प्रभु भक्ति से दु:ख तनाव दूर होता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संयम, तप और साधना का दिया संदेश </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Mar 2025 17:21:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में धरियावद के श्री चंद्रप्रभु जिनालय में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान पंचामृत अभिषेक पूजन किए जा रहे हैं। यहां वे धर्मसभा में देशना भी दे रहे हैं। प्रातः कालीन सभा में आचार्य श्री ने उपदेश भी दिए। पढ़िए धरियावद से यह खबर&#8230;  धरियावद। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 52 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में धरियावद के श्री चंद्रप्रभु जिनालय में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान पंचामृत अभिषेक पूजन किए जा रहे हैं। यहां वे धर्मसभा में देशना भी दे रहे हैं। प्रातः कालीन सभा में आचार्य श्री ने उपदेश भी दिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> धरियावद।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 52 साधु सहित धरियावद श्री चंद्रप्रभु जिनालय में विराजित हैं। आचार्य श्री के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान पंचामृत अभिषेक पूजन किए जा रहे हैं। प्रातः कालीन सभा में आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि जैन धर्म अनादिनिधन धर्म है। संसार में रहने वाला प्राणी धन ऐश्वर्य चाहता है। इसके लिए पुरुषार्थ कर धन अर्जित करता है। भौतिक अर्जित संपदा से दान देकर पुण्य कमाना चाहिए। चक्रवर्ती जो कि 6 खंडों के अधिपति होते हैं। महान पुरुष शलाका पुरुषों ने भी ऐश्वर्य,धन, दौलत, परिवार राज्य को छोड़कर संन्यास दीक्षा धारण की। आचार्य, साधु, परमेष्ठी पीड़ा, कष्ट, रोग दूर करने का उपाय बताते हैं। रत्नत्रय धर्म रूपी औषधि से कुष्ठ रोग सहित, पीड़ा, तनाव कष्ट दूर होते हैं। यह धर्म देशना पंचम पता आदेश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में प्रकट की। ब्रह्मचारी वीणा दीदी, गजुभैया, राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में आगे कह कि रोग,पीड़ा होने पर बुद्धि और धैर्य के साथ भाव सहित किए धर्म कार्यों से रोग संकट दूर होते हैं।</p>
<p><strong>मनुष्य जीवन सार्थक करने का पुरुषार्थ करें</strong></p>
<p>पंडित विशाल के अनुसार आचार्य श्री सहित 52 साधुओं के सानिध्य में 7 से 14 मार्च तक सिद्धचक्र महामंडल विधान चयनित सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा सिद्ध भगवान का पूजन उनके गुणों की आराधना की जाएगी। आचार्य श्री ने उपदेश में आत्महत्या करने, गर्भपात कराने का परिणाम बताया कि इससे अगले जीवन में आयु कम प्राप्त होती है। इसलिए धैर्य और बुद्धि पूर्वक धर्म का आश्रय लेकर दुर्लभ मानव पर्याय जैन कुल में समय का सदुपयोग कर दीक्षा, संयम, तप से मनुष्य जीवन सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए।</p>
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		<title>मुंगाना में आचार्यश्री वर्धमान सागर जी का मंगल प्रवेश : धर्म सभा में अपनी देशना में प्रकट की </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Feb 2025 16:57:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पारसोला से विहार करते हुए संघ सहित मुंगाना 8 फरवरी को भव्य मंगल प्रवेश किया। यहां संघ ने नगर प्रवेश के साथ मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान और अजीतनाथ भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन किए। भक्तों ने अगवानी की। पढ़िए मुंगाना से यह खबर&#8230; मुंगाना। आचार्य श्री शांति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पारसोला से विहार करते हुए संघ सहित मुंगाना 8 फरवरी को भव्य मंगल प्रवेश किया। यहां संघ ने नगर प्रवेश के साथ मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान और अजीतनाथ भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन किए। भक्तों ने अगवानी की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुंगाना से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगाना।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का पारसोला से विहार कर संघ सहित मुंगाना 8 फरवरी को भव्य मंगल प्रवेश हुआ । सब्र का फल मीठा होता है। बहुत प्रतीक्षा के बाद वर्षों के पुण्य से आपको यह लाभ मिला है। काफी वर्षों के बाद संघ का आगमन यहां हुआ है। इसके पूर्व हमारे दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ आए थे। आचार्यश्री शिवसागर जी भी यहां आ चुके हैं। साधु समागम कठिनता से प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>शुभ कार्य से पुण्य का उदय होता है</strong></p>
<p>जैन धर्म कर्म प्रधान धर्म है। हमारे कर्म शुभ-अशुभ जैसे होगे। वैसे ही हमें पुण्य या पाप मिलता है। शुभ कार्य से पुण्य का उदय होता है। योग-संयोग अब बने नगर के प्राचीन मंदिर के मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान है और नवनिर्मित मंदिर में श्री अजित नाथ भगवान की प्रतिष्ठा हुई है। सम्मेद शिखर से श्रीअजीत नाथ भगवान पहले मोक्ष गए हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मुंगाना नगर में आयोजित धर्म सभा में अपनी देशना में प्रकट की।</p>
<p><strong>पत्थर की नाव हमें डुबो देती है</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने अपने देशना में आगे बताया कि मनुष्य गति, त्रियंच देव गति को धर्म देशना सुनने का सौभाग्य मिलता है। मनुष्य जन्म और उसमें भी उच्च कुल असीम पुण्य से प्राप्त होता है । हमारे भगवान सर्वज्ञ वितरागी और हितोपदेशी हैं । उनकी वाणी मंगलमय होती है। इनकी शरण मंगलकारी होती है। आचार्यश्री ने पत्थर और लकड़ी की नाव के उदाहरण के माध्यम से बताया कि रत्नत्रय दिव्य देशना लकड़ी की नौका है। जिससे इस किनारे से उस किनारे हम रत्नत्रय धारण कर सिद्धालय को प्राप्त सकते हैं जबकि, पत्थर की नाव हमें डुबो देती है। इसलिए धर्म को समझने का प्रयास कर अपने मानव जीवन को सार्थक करने का प्रयास सभी ने करना चाहिए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74131" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0037.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0037.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0037-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0037-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0037-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0037-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />भक्तों ने की अगवानी</strong></p>
<p>दशा हुमड दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष करण सेठ सहित हजारों भक्तों ने आचार्य श्री संघ की भव्य अगवानी की। संघ ने नगर प्रवेश के साथ मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान और अजीतनाथ भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन किए।</p>
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		<title>बड़े हित पाने लिए छोटे हितों को त्यागना जरूरीः कालानी नगर में मुनिश्री प्रमाण सागरजी ने धर्मसभा संबोधित की  </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Jan 2025 17:03:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कालानी नगर के त्रिमूर्ति जैन मंदिर परिसर में मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। अपने प्रवचन के माध्यम से उन्होंने समाजजनों को संयम, सादगी और सहनशीलता रखने का संदेश दिया। इस अवसर पर मुनिश्री निर्वेग सागर जी ने भी संबोधित किया। धर्मसभा के उपरांत मुनिसंघ ने आदिनाथ बाग रामचंद्रनगर की ओर विहार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कालानी नगर के त्रिमूर्ति जैन मंदिर परिसर में मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। अपने प्रवचन के माध्यम से उन्होंने समाजजनों को संयम, सादगी और सहनशीलता रखने का संदेश दिया। इस अवसर पर मुनिश्री निर्वेग सागर जी ने भी संबोधित किया। धर्मसभा के उपरांत मुनिसंघ ने आदिनाथ बाग रामचंद्रनगर की ओर विहार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> कालानी नगर त्रिमूर्ति दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने अपनी मंगल देशना में कहा कि दीर्घकालिक सुख के लिए अल्पकालिक सुख को त्यागना पड़ता है। जिन बातों से अप्रसन्नता होती है। उन बातों को नजरअंदाज करो। थोड़ा सा सह लोगे तो आप सुखी रह सकते हो। सुखी और संपन्न होंने के लिए उन बातों को इग्नोर करो, जो आपको असहज करती है। जितना सहजता से जिओगे अपने आपको सुखी महसूस करोगे। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने कालानी नगर व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि ‘धैर्य रखो और त्वरित प्रक्रिया से बचो’ चवन्नी खोजने में अठन्नी का तेल मत जलाओ। छोटी-मोटी बातों को नजरअंदाज करोगे तो आपके संबंध कभी खराब नहीं होंगे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72021" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0023-1.jpg" alt="" width="1280" height="700" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0023-1.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0023-1-300x164.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0023-1-1024x560.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0023-1-768x420.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0023-1-990x541.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />मुनिश्री ने दिया उद्योगपति बिड़ला का उदाहरण</strong></p>
<p>मुनिश्री ने प्रसिद्ध उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एक दिन वह अपनी ओरियंटल पेपर मिल में पहुंचे तो लोगों ने कहा कि आपकी इस फैक्ट्री में बहूत अनिमियताएं हैं तो उन्होंने सबकी बात सुनीं और कहा कि मेरी 200 फैक्ट्री है मैं कहां-कहां देखूंगा? मैं तो फाइनल बैलेंस सीट को देखता हूं। यदि कंपनी ग्रोथ कर रही है तो मैं छोटी-मोटी बातों को नजरअंदाज कर देता हूं।</p>
<p><strong>पॉजिटिव सोच सफल करती है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि घर हो या दुकान अथवा आंफिस यदि आपका घर से ही मूड खराब करके जाओगे तो क्या आपका दिन अच्छा निकल सकता है? जीवन को यदि आनंद से भरना चाहते हो उन बातों को इग्नोर करोगे तो आपके सभी काम हो जाएंगे। मुनिश्री ने कहा कि जो व्यक्ति आपके व्यापार में घाटा देता है उसे तो आप इग्नोर कर लेते हो, कभी घर-परिवार में कोई बात हो उन बातों को भी इग्नोर करो। जिसकी सोच पॉजिटिव होती है, वह हर क्षेत्र में सफल होता है। सुखी होंने के लिए अपना व्यवहार ठीक करो और समृद्ध होने के लिए व्यापार ठीक से करोगे तो कभी असफल नहीं होगे।</p>
<p><strong>एडजस्टमेंट की कला सीख लो</strong></p>
<p>किसी भी कार्य में अड़ो मत सभी से तालमेल बनाकर चलोगे तो जीवन में कभी उलझोगे नहीं ,यदि एडजस्टमेंट की कला सीख लोगे तो कभी किसी से कोई विवाद नहीं होगा। व्यापार व्यवसाय हो या जीवन व्यवहार में धैर्य रखना चाहिए। जो धैर्यवान होते हैं वह हर मुश्किल की घड़ी में अपनी समस्याओं को हल कर लेते हैं।</p>
<p><strong>समाज की सुरक्षा सुसंस्कारित पाठशाला से</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्रीनिर्वेग सागर महाराज ने कहा कि यदि आपने आने वाली पीढ़ी को संस्कार दे दिए तो आपका छोटे नगर से महानगर में आना सार्थक हो जाएगा। उन्होंने पाठशालाओं को व्यवस्थित रखने की बात करते हुए कहा कि समाज की सुरक्षा सु संस्कारित पाठशालाओं से है। इस अवसर पर मुनिश्री संधान सागरजी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक महाराज मंचासीन थे।</p>
<p><strong>यह रहे सभा में उपस्थित </strong></p>
<p>इस अवसर पर धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष अशोक डोसी अविनाश जैन, प्रदीप बल्ला राकेश चेतक दिनेश जैन, अखिलेश जैन मनीष फंटुस, नवीन केवलारी एवं उषा पाटनी, मुक्ता जैन आदि समाज जन उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन बाल ब्रह्मचारी अभय भैया ने किया।</p>
<p><strong>मुनिसंघ ने आदिनाथ बाग की ओर किया विहार</strong></p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि दोपहर में मुनिसंघ का विहार आदिनाथ बाग रामचंद्र नगर की ओर हुआ। सांयकालीन शंका समाधान कार्यक्रम होगा एवं रात्रि विश्राम यहीं रहेगा तथा रविवार को प्रातः प्रवचन एवं आहारचर्या यहीं से संपन्न होगी। सभी समाजजन से निवेदन है कि सही समय पर पहुंचकर धर्म लाभ लें।</p>
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		<title>मुनिश्री प्रमाण सागर जी संसघ का कालानी नगर में मंगल प्रवेश: युवा मंडल और महिला मंडल ने की भव्य अगवानी  </title>
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		<pubDate>Fri, 03 Jan 2025 10:32:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का मंगल प्रवेश शुक्रवार सुबह कालानी नगर में हुआ। यहां जैन समाज की महिलाओं और पुरुषों के साथ युवाओं ने मुनिश्री की भव्य मंगल अगवानी की। विद्यासागर मंडप में मुनिश्री ने देशना दी। शाम को शंका समाधान होगा।  इंदौर। आचार्य भगवन् 108 श्री विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार आचार्य श्री समयसागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज का मंगल प्रवेश शुक्रवार सुबह कालानी नगर में हुआ। यहां जैन समाज की महिलाओं और पुरुषों के साथ युवाओं ने मुनिश्री की भव्य मंगल अगवानी की। विद्यासागर मंडप में मुनिश्री ने देशना दी। शाम को शंका समाधान होगा। </strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य भगवन् 108 श्री विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन शुक्रवार को सुबह श्रीशांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर कालानी नगर में हुआ। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कालानी नगर समाज ने मुनिश्री की भव्य मंगल अगवानी की।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71946" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022.jpg" alt="" width="1280" height="852" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250103-WA0022-990x659.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />इन्होंने की मुनिश्री की अगवानी</strong></p>
<p>इस अवसर पर राकेश चेतक, प्रदीप बल्ला, प्रवीण केवलारी, युवा मंडल और महिला मंडल ने भव्य अगवानी की। इसके बाद मुनिश्री की मंगल दिव्य देशना कालानीनगर विद्यासागर मंडप में हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाज जन शामिल हुए। पार्षद शिखा संदीप दुबे भी मुख्य अतिथि के साथ उपस्थित रहे। मुनिश्री की आहार चर्या कालानी नगर में हुई।</p>
<p><strong>शंका समाधान शाम को</strong></p>
<p>शुक्रवार का शंका समाधान कार्यक्रम शाम 5.45 बजे पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर कालानीनगर से ही होगा। शनिवार को सुबह के मंगल प्रवचन प्रातः 8.40 बजे से कालानी नगर में ही होंगे।</p>
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		<title>प्रातः होगा मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ससंघ मंगल विहार: मुनि श्री सुमती धाम गोधा स्टेट से कालानी नगर की ओर करेंगे विहार  </title>
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		<pubDate>Fri, 03 Jan 2025 05:30:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ शुक्रवार सुबह सुमतिधाम से मंगल विहार करेंगे। कालानी नगर में मंगल प्रवेश होगा। यहां मुनिश्री की देशना होगी। शाम को शंका समाधान किया जाएगा। पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230; इंदौर। आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य गुणायतन प्रणेता, भावना योग प्रवर्तक शंका समाधान के जनक मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज, मुनिश्री निर्वेगसागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ शुक्रवार सुबह सुमतिधाम से मंगल विहार करेंगे। कालानी नगर में मंगल प्रवेश होगा। यहां मुनिश्री की देशना होगी। शाम को शंका समाधान किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य गुणायतन प्रणेता, भावना योग प्रवर्तक शंका समाधान के जनक मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज, मुनिश्री निर्वेगसागर महाराज, मुनिश्री संधानसागर जी महाराज ससंघ का प्रातः काल मंगल विहार तीर्थ स्वरूप सुमतिधाम जिनालय से कालानी नगर के लिए होगा।</p>
<p><strong>एरोड्रम पुलिस स्टेशन से निकलेगा जुलूस</strong></p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कालानी नगर जैन समाज मुनि संसघ की मंगल अगवानी एरोड्रम पुलिस स्टेशन से शुक्रवार को सुबह 7.45 से कालानी नगर के समाज जन मंगल अगवानी जुलूस निकालकर करेंगे। मुनिश्री की कालानी नगर जैन मंदिर में प्रवेश करने के बाद मंगल देशना सुबह 9 बजे से होगी।</p>
<p><strong>शंका समाधान शाम 5.45 बजे होगा</strong></p>
<p>इसके बाद मुनि संसघ की आहारचर्या कालानी नगर में ही संपन्न होगी। सांयकालीन बहुचर्चित कार्यक्रम शंकासमाधान 5ः45 से होगा।</p>
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