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	<title>देवदर्शन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>देवदर्शन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सिद्धक्षेत्र सोनागिरजी का वार्षिक मेला 4 से 8 मार्च तक : मेले में होंगे विभिन्न धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 07:27:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ सोनागिरजी में वार्षिक मेले का आयोजन 4 से 8 मार्च तक होने जा रहा है। मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। क्षेत्र पर आने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो। कमेटी ने चाकचौबंद व्यवस्थाएं की हैं। मुरैना/सोनागिर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ सोनागिरजी में वार्षिक मेले का आयोजन 4 से 8 मार्च तक होने जा रहा है। मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। क्षेत्र पर आने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो। कमेटी ने चाकचौबंद व्यवस्थाएं की हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना/सोनागिर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/सोनागिर।</strong> जैन समाज के विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ सोनागिरजी में वार्षिक मेले का आयोजन 4 से 8 मार्च तक होने जा रहा है। श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र संरक्षिणी कमेटी (न्यास) सोनागिर दतिया के अध्यक्ष योगेश जैन खतौली एवं मंत्री बालचंद जैन ग्वालियर ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सिद्धक्षेत्र सोनागिरजी का पांच दिवसीय वार्षिक मेला चैत्र कृष्ण एकम बुधवार 4 मार्च से चैत्र कृष्ण पंचमी रविवार 8 मार्च तक होने जा रहा है। इस वार्षिक मेले में संपूर्ण भारतवर्ष से हजारों की संख्या में जैन धर्मावलंबियों का क्षेत्र पर आगमन होता है। क्षेत्र कमेटी द्वारा मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। क्षेत्र पर आने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो इसके लिए कमेटी ने चाकचौबंद व्यवस्थाएं की हैं। मेले में आने वाले दर्शनार्थियों के लिए आवास, परिवहन, सुरक्षा, भोजनादि की सम्पूर्ण व्यवस्थाएं पूर्णता की ओर हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100409" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260222-WA0005-300x260.jpg" alt="" width="300" height="260" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260222-WA0005-300x260.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260222-WA0005-1024x887.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260222-WA0005-768x665.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260222-WA0005-990x858.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260222-WA0005.jpg 1069w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>वार्षिक मेले के मुख्य आकर्षण </strong></p>
<p>वार्षिक मेले के प्रमुख क्रार्यक्रमों में प्रतिदिन प्रातः देवदर्शन, पर्वत की वंदना, दोपहर में तलहटी में विद्यमान जिनालयों की रथ यात्रा, शास्त्र प्रवचन, सम्मेलन एवं कलशाभिषेक, सांयकाल पर्वत की परिक्रमा, रात्रि को पर्वतराज पर महाआरती एवं भक्ति एवं मेला स्थल चन्द्रनगर पाण्डाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, धार्मिक नाट्य प्रस्तुति, भजन संध्या एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। वार्षिक मेले के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रमुख अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में सम्मिलित होने के लिये केन्द्रीय एवं प्रान्तीय शासन के माननीय मंत्रीगण, वरिष्ठ शासनाधिकारी, नेतागण एवं विद्यतजनों को आमंत्रित किया गया है। जो निर्धारित तिथियों को कार्यक्रमों में पधारेंगे।</p>
<p><strong>सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी एक नजर में </strong></p>
<p>दतिया जिले में स्थित सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर बुन्देलखण्ड अंचल में सुरम्य पर्वतराज पर स्थित है । यहां आठवें तीर्थकर श्री चन्द्रप्रभु भगवान के भव्य समवशरण के पदार्पण की गौरवपूर्ण स्मृति को अंतः स्थल में संजोये हुए है। सिद्धक्षेत्र सोनागिरजी से नंग-अनंग कुमार सहित साढ़े पांच करोड़ मुनिराज मुक्तिपथ को प्राप्त हुए हैं। अतः यह पावन स्थल मुक्तिपथ (सिद्ध दशा) हेतु अग्रसर मुनिवृन्दों की साधना स्थली है। श्री सोनागिरिजी पर्वतराज पर 72 भव्य जिनालयों के साथ ही नव निर्मित नंदीश्वर द्वीप शोभायमान है। जिनालय एवं उनमें विराजमान जिनबिंब विभिन्न युगों की उत्कृष्ठ एवं मनोहर वास्तुकला के प्रतीक है। क्षेत्र के पावन पवित्र पर्वत पर स्थापित मुख्य जिनालय क्रमांक 57 में विक्रम संवत् 335 में प्रतिष्ठित भगवान श्री चन्द्रप्रभु जी की चमत्कारी खड्गासन प्रतिमा विराजमान है। पर्वतराज की तलहटी में विशाल एवं अनुपम जिनालय विद्यमान है। जिनके दर्शन मात्र से भव भव के पापों का क्षय होता है।</p>
<p><strong>मेले पर सिद्धक्षेत्र सोनागिर में रुकेगी विशेष ट्रेन</strong></p>
<p>जैन तीर्थ सोनागिरजी दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर स्थित है। मेले के अवसर पर प्रमुख मेल एवं एक्सप्रेस गाड़ियों जैसे बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस, खजुराहो इंटर सिटी एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, चम्बल एक्सप्रेस, बरौनी मेल, विशेष रूप 1 से 10 मार्च तक रुकेगी । सोनागिर में आगरा-झांसी मेमो एवं पैसेंजर एवं छतीसगढ़ एक्सप्रेस स्थायी रूप से रुकती है। मप्र के सभी डिपो की बस, सोनागिर तिराहे पर यात्रियों को छोड़ती हैं। श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर कमेटी ने सभी दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों से अधिकाधिक संख्या में वार्षिक मेले में सम्मिलित होने की अपील की है ।</p>
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		<title>स्व को जानने और जगाने का पर्वाधिराज है पर्युषण : तप, संयम और धर्म रक्षा के संकल्प को पूरा करते हैं श्रावक-श्राविकाएं  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Aug 2025 07:34:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण को लेकर समाजजनों में धार्मिक उल्लास तो है ही, साथ ही इस उत्साह के साथ इसका इंतजार किया जा रहा है कि अब यह वह समय है जब हम स्व को जान सकें। अंतरआत्मा को जगाकर संयम मार्ग की ओर कदम बढ़ाएं। यह विदित है कि पयुर्षण पर्व श्वेतांबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p>जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण को लेकर समाजजनों में धार्मिक <strong>उल्लास तो है ही, साथ ही इस उत्साह के साथ इसका इंतजार किया जा रहा है कि अब यह वह समय है जब हम स्व को जान सकें। अंतरआत्मा को जगाकर संयम मार्ग की ओर कदम बढ़ाएं। यह विदित है कि पयुर्षण पर्व श्वेतांबर जैन समाज 20 अगस्त से मनाना आरंभ करेंगे तो दिगंबर जैन समाज के पर्युषण 28 अगस्त से शुरू होंगे। श्रीफल जैन न्यूज के साथ हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि पर्युषण आखिर है क्या? क्यों मनाया जाता है? और इसका महत्व क्या है? <span style="color: #ff0000">उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति आज पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भारतीय संस्कृति में पर्वों का बहुत महत्व है। पर्व का नाम सुनते ही परिग्रह, राग, द्वेष, खानपान की ही कल्पना करते हैं अथवा खुश होते हैं, लेकिन दशलक्षण धर्म पर्युषण पर्व आने और बल्कि आने से भी पहले श्रावकों के मन में अति उत्साह रहता है। सबसे बड़ी बात यह उत्साह खाना-पीना छोड़ने के प्रति रहता है और इस दौरान एक कंपीटिशन सा रहता है कि किसका त्याग अधिक है। इन दिनों छोटे से छोटे बच्चे तक व्रत,उपवास, संयम तथा स्वाध्याय करते हैं। सभी प्रातः देवदर्शन, पूजन, व्रत, उपवास, एकासन्न आदि करते हैं। दिल्ली की नीति जैन कहती हैं कि कितने श्रावक दस दिनों तक निर्जल उपवास भी करते हैं तथा अपने कर्मों की निर्जरा करते हैं। दशलक्षण पर्युषण महापर्व पर धर्मात्मा बंधु आत्मा के दस धर्मों की विशेष आराधना करते हैं। उत्तम, क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य आत्मा के स्वाभाविक धर्म है, लेकिन अशुम कर्मों के उदय से इन धर्मों की आराधना भले ही जैन श्रावक ही करते हैं, जो आत्मा के अस्तित्व को स्वीकारते हैं। दस दिनों तक इन दस धर्मों की भावपूर्वक आराधना करने वाला शीध्र ही आत्मा की अनुमति को प्राप्त करता है और मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकते हैं। ये दस धर्म आत्मा को शुद्ध बनाते हैं।</p>
<p><strong>इसलिए महत्व है 10 लक्षण पर्व यानि पर्युषण का </strong></p>
<p>जैन धर्म मंे 10 लक्षण पर्वका बहुत महत्व है। इस पर्व मैं जिनालयों में धर्म की प्रभावना की जाती है। यह पर्व आध्यात्मिक पर्व है। इस पर्व में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन, ब्रह्मचर्य आदि जीवन मूल्य की आराधना होती है। यह पर्व तीर्थंकरों की पूजा का नहीं या अन्य आराध्य की पूजा का नहीं, बल्कि गुणों की आराधना उपासना का पर्व है। इस पर्व में व्यक्ति शक्ति और सामर्थ्य अनुसार व्रत औैर उपवास करते हैं। यह पर्व जीवन में सुख एवं शांति के लिए मनाया जाता है। इस समय अधिक से अधिक समय धर्म में लगाया जाता है।</p>
<p><strong>यह है जैन धर्म में 10 लक्षण धर्म </strong></p>
<p>उत्तम क्षमा, क्रोध छोड़कर सबको क्षमा कर सकूं तथा सबसे क्षमा मांग सकूं, उत्तम मार्दव, मान नहीं करना घमंड छोड़ना, उत्तम आर्जव, कपट नहीं करना सरलता लाना, उत्तम शौच, लोभ का त्याग करना, उत्तम सत्य, सत्य वचन ही बोलना, उत्तम संयम, इंद्रिय व मन को बश मे करना, उत्तम तप, इच्छाओं को रोकना तथा तप धारण करना, उत्तम त्याग, चार प्रकार का दान आदि देना, उत्तम आकिंचन, ममत्त्व का त्याग करना उत्तम ब्रह्मचर्य, विषय सेवन को छोड़ कर अपनी आत्मा मंे लीन होना। इन दिनों में तत्वार्थ सूत्र के अध्याय का व्याख्यान किया जाता है। तिथि दसवीं के दिन सुगंध दशमी या धूप दशमी के रूप में मनाया जाता है तथा अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी के रूप मे मनाया जाता है।</p>
<p><strong>‘पर्वों का राजा’ आत्म-चिंतन, पश्चाताप और क्षमा का पर्व</strong></p>
<p>पर्युषण पर्व जैन धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे ‘पर्वों का राजा’ भी कहा जाता है। यह पर्व आत्म-चिंतन, पश्चाताप और क्षमा का समय होता है। यह भाद्रपद मास में मनाया जाता है और जैन धर्मावलंबी इसे बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाते हैं। श्वेतांबर जैन इसे 8 दिनों तक मनाते हैं, जिसे अष्टान्हिका कहा जाता है और दिगंबर जैन 10 दिनों तक मनाते हैं, जिसे दसलक्षण पर्व कहते हैं। पर्युषण पर्व जैनियों को अपने कर्मों का आत्मनिरीक्षण करने और पिछले किए गए गलतियों के लिए पश्चाताप करने का अवसर प्रदान करता है। इस पर्व में, लोग एक दूसरे से क्षमा मांगते हैं और दूसरों को क्षमा करते हैं। यह ‘क्षमापना’ के रूप में मनाया जाता है, जहां लोग एक दूसरे को ‘खामेमि सव्वे जीवा, सव्वे जीवा खमंतु मे’ (मैं सभी जीवों को क्षमा करता हूं, सभी जीव मुझे क्षमा करें) कहकर क्षमा करते हैं। पर्युषण पर्व अहिंसा (अहिंसा परमो धर्मः) और प्रेम के सिद्धांतों पर जोर देता है। जैन धर्म में अहिंसा का अर्थ है किसी भी जीव को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाना। यह पर्व जैनियों को अपनी आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है। वे उपवास, ध्यान, और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। पर्युषण पर्व को मोक्ष प्राप्ति (मुक्ति) के मार्ग में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p><strong>पर्युषण पर्व कैसे मनाया जाता है?</strong></p>
<p>जैन धर्मावलंबी पर्युषण पर्व के दौरान उपवास करते हैं और अपनी भौतिक आवश्यकताओं को कम करते हैं। वे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं, मंदिरों में जाते हैं, और धार्मिक प्रवचन सुनते हैं। वे एक दूसरे से क्षमा मांगते हैं और दूसरों को क्षमा करते हैं। वे गरीबों और जरूरतमंदों को दान देते हैं। वे अहिंसक जीवनशैली जीने का संकल्प लेते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करते हैं। इन दिनों में तत्वार्थ सूत्र के अध्याय का व्याख्यान किया जाता है। तिथि दसवीं के दिन सुगंध दशमी य धूप दशमी के रूप में मनाया जाता है तथा अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।</p>
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