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	<title>दीपावली &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्ति और समर्पण में कोई विकल्प नहीं होता : मुनिश्री संभवसागरजी ने प्रवचन में भक्ति समर्पण और भक्त की मनःस्थिति का सटीक वर्णन किया  </title>
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					<description><![CDATA[भक्ति में सिर्फ समर्पण होता है। उसमें कोई विकल्प नहीं होता। जितना आपका भगवान और गुरु के प्रति अनुराग और समर्पण होगा। उतने ही आपके परिणाम निर्मल होंगे और कर्म अपने आप दूर होते चले जाएंगे। यह उदगार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने मंगलवार को प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भक्ति में सिर्फ समर्पण होता है। उसमें कोई विकल्प नहीं होता। जितना आपका भगवान और गुरु के प्रति अनुराग और समर्पण होगा। उतने ही आपके परिणाम निर्मल होंगे और कर्म अपने आप दूर होते चले जाएंगे। यह उदगार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने मंगलवार को प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> भक्ति में सिर्फ समर्पण होता है। उसमें कोई विकल्प नहीं होता। जितना आपका भगवान और गुरु के प्रति अनुराग और समर्पण होगा। उतने ही आपके परिणाम निर्मल होंगे और कर्म अपने आप दूर होते चले जाएंगे। यह उदगार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने मंगलवार को प्रातः प्रवचन सभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि जिनके प्रति हमारा राग होता है, उनसे कभी कोई गिला सिकवा नहीं होता। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन 9 बजे से श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में चल रहे हैं। मुनिश्री ने फिरोजाबाद की नसिया का एक उत्कृष्ट संस्मरण सुनाते हुए कहा कि बात 1975 की है जब आचार्य श्रीविद्यासागरजी महाराज फिरोजाबाद पहुंचे तो वह नए-नए साधु थे और कोई उनका नाम भी नहीं जानता था। नसिया जी के मैनेजर ने जब यह जानकारी सेठ छदामीलाल जी को दी कि कोई युवा आचार्य पधारे हैं और उनके साथ एक क्षुल्लक जी है तो उनके माथे पर बल पड़ गए कि चातुर्मास का समय है। यदि महाराज रूक गये तो? लेकिन जैसे ही उनको यह जानकारी मिली कि यह तो चतुर्थ कालीन चर्या के धारी आचार्य विद्यासागरजी महाराज है तो वह प्रोफेसर नरेंद्र प्रकाश के साथ वहां आए। उन्होंने आचार्य गुरुदेव की चर्या को देखा और उनसे प्रभावित हुए तथा उनसे चातुर्मास के लिए निवेदन कर दिया। चातुर्मास प्रारंभ हो गया तो उनके प्रवचनों से प्रभावित होकर पांडाल भी छोटे पड़ने लगे और प्रतिदिन गुरुदेव की प्रभावना संपूर्ण फिरोजाबाद में फैल गई।</p>
<p><strong> भगवान भी भक्त के धैर्य की परीक्षा लेते हैं</strong></p>
<p>सेठ छदामीलाल जी प्रतिदिन गुरुदेव के पड़गाहन के लिए पहले दिन से ही खड़े होते थे लेकिन, गुरुदेव उनकी ओर देखते तथा मुस्कुराते हुए नसिया जी से बाहर लगभग दो किमी दूर शहर की ओर निकल जाते। ऐसा करके एक माह, दो माह, तीन माह निकल गए, लेकिन सेठजी को पड़गाहन नहीं मिला। कहते हैं कि भगवान भी भक्त के धैर्य की परीक्षा लेते हैं। चातुर्मास समापन होने को आया लेकिन, सेठजी विल्कुल भी आकुल-व्याकुल नहीं थे। उनके धैर्य की परीक्षा थी और उस धैर्य में ऐसे पास हुए कि भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक महोत्सव दीपावली के दिन उन्होंने पड़गाहन कर गुरुदेव को आहार कराया। मुनि श्री ने कहा कि है आप लोगों को इतना धैर्य ? दो तीन दिन होते हैं तो आप लोगों का धैर्य जबाव देने लगता है और तो और गुरुजी पर आरोप लगाने से भी नहीं चूकते, फौरन मुंह से निकल जाता है कि महाराज जी तो चिन्ह-चिन्ह कर जाते हैं, लेकिन सेठजी पहले दिन से ही खड़े हैं लेकिन, परिणामों में कोई आकुलता-व्याकुलता नहीं और भक्ति भाव से खड़े रहे। यही होती है परिणामों की निर्मलता और भक्त की भगवान के प्रति परीक्षा और इसी को कहते है भक्ति भाव और गुरु के प्रति जब समर्पण।</p>
<p><strong>कार्यक्रम की संयोजना समग्र पाठशाला समिति कर रही </strong></p>
<p>जहां पर सिर्फ भक्ति होती है लेकिन, कोई गिला सिकवा नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब भी कोई समस्या आए तो णमोकार महामंत्र का स्मरण कर लिया करो। यह महामंत्र आपकी सभी समस्याओं का टूल है तथा णमोकार महामंत्र को आप किसी भी समय पर किसी भी हालत में पड़ सकते हैं। मुनि श्री ने कहा कि ‘षठखंडागम ग्रंथ’ को साक्षात भगवान की दिव्यध्वनि का अंग माना जाता है और इसमें आचार्य पुष्पदंत ने मंगलाचरण के रूप में सबसे पहले णमोकार महामंत्र लिखा है। अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कार्यक्रम की संयोजना समग्र पाठशाला समिति द्वारा की जा रही है। मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज द्वारा प्रवचन के अंत में प्रश्नमंच का कार्यक्रम प्रतिदिन किया जाता है। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कृत किया जा रहा है।</p>
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		<title>भिंड दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी ने किया भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम : समाजजनों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर कार्यक्रम को रोचक बनाया  </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 12:33:17 +0000</pubDate>
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<p><strong>दीपावली के अवसर पर भिंड दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी द्वारा पारिवारिक मिलन समारोह के रूप में दीपोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के तीर्थ स्थल के दिगंबर जैन कीर्ति स्तंभ मंदिर परिसर में 22 अक्टूबर को आयोजित किया गया। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड</strong>। दीपावली के अवसर पर भिंड दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी द्वारा पारिवारिक मिलन समारोह के रूप में दीपोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के तीर्थ स्थल के दिगंबर जैन कीर्ति स्तंभ मंदिर परिसर में 22 अक्टूबर को आयोजित किया गया। भिंड दीपोत्सव में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप सिटी के समस्त दांपत्य सदस्यों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत स्वल्पाहार, डांस, कई तरीके के गेम भोजन एवं भगवान की आरती का आनंद लिया गया। दीपोत्सव मुख्य रूप से कार्यक्रम संयोजक ज्योति अतुल जैन, बरखा प्रशांत जैन, प्रेक्षा मुकेश जैन एवं सोनम रिषभ जैन के संयोजन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अशोक जया जैन द्वारा मंडप उद्घाटन एवं डॉ.जितेंद्र ज्योति जैन द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मंगलाचरण निष्ठा संजीव गीता जैन एवं मंगलाचरण की भव्य प्रस्तुति बरखा प्रशांत जैन द्वारा की गई। इसके बाद वहां पधारे हुए सभी दान पात्र सदस्यों का तिलक बंधन एवं पट्टिका पहनाकर स्वागत किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम में प्रत्येक वर्ग का ध्यान रखा गया। बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस, बड़े बच्चों के लिए गेम्स एवं दांपत्य सदस्यों के लिए भी विभिन्न गेम्स का आयोजन किया गया एवं तंबोला गेम एक नए अंदाज में दीपावली की सफाई के रूप में खेला गया। सभी विजय प्रतियोगियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। बीच-बीच में कार्यक्रम पोस्ट द्वारा विभिन्न विषयों पर रोचक प्रश्नोत्तरी भी की गई। जिसमें सभी ने बहुत ही उल्लास पूर्वक अपनी सहभागिता प्रदान की। कार्यक्रम की होस्टिंग सोनम रिषभ जैन एवं दर्शी अंशुल आयशा जैन द्वारा की गई। दीपोत्सव में लगभग 170 सदस्यों द्वारा अपनी सहभागिता प्रदान की गई। कीर्ति स्तंभ मंदिर में भगवान की भव्य आरती की गई। सभी दांपत्य सदस्यों द्वारा कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई और संस्था के अध्यक्ष शैलेंद्र पूनम जैन एवं सचिव अंशुल आयशा जैन द्वारा कीर्ति स्तंभ मंदिर कमेटी सहित सभी का आभार व्यक्त किया गया।</p>
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		<title>निप्र अंतर्राष्ट्रीय दिगंबर जैन पोरवाड़ सामाजिक मंच ने रंगोली और लड्डू सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया : दीपावली के पावन अवसर पर समाज की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए महिला प्रकोष्ठ ने किया यह विशेष कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 14:39:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सनावद में निप्र अंतर्राष्ट्रीय दिगंबर जैन पोरवाड़ सामाजिक मंच की महिला प्रकोष्ठ ने दीपावली पर रंगोली और लड्डू सजाओ प्रतियोगिता आयोजित की। प्रतिभागियों को घर पर बनाई गई रंगोली और सजाए गए लड्डू का वीडियो और फोटो भेजना था। 23 अक्टूबर तक प्रस्तुतियों का चयन किया जाएगा। प्रतियोगिता में समाज के सभी वर्गों से अधिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सनावद में निप्र अंतर्राष्ट्रीय दिगंबर जैन पोरवाड़ सामाजिक मंच की महिला प्रकोष्ठ ने दीपावली पर रंगोली और लड्डू सजाओ प्रतियोगिता आयोजित की। प्रतिभागियों को घर पर बनाई गई रंगोली और सजाए गए लड्डू का वीडियो और फोटो भेजना था। 23 अक्टूबर तक प्रस्तुतियों का चयन किया जाएगा। प्रतियोगिता में समाज के सभी वर्गों से अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद</strong>। निप्र अंतर्राष्ट्रीय दिगंबर जैन पोरवाड़ सामाजिक मंच द्वारा समाज की प्रतिभाओं को निखारने के लिए दीपावली के पावन अवसर पर रंगोली और लड्डू सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।</p>
<p>मंच मीडिया प्रभारी आशीष जैन लोनारा एवं जोन मीडिया प्रभारी सन्मति काका ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को घर पर बनाई गई रंगोली और सजाए गए लड्डू का वीडियो एवं फोटो मंच को भेजना होगा।</p>
<p>महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष नीना जैन, सचिव ऋतु जैन और सांस्कृतिक सचिव आयुषी जैन ने बताया कि रंगोली का विषय प्राकृतिक चित्र और दीपावली फूल डिजाइन रहेगा। 23 अक्टूबर तक प्राप्त प्रस्तुतियों पर विजेताओं का चयन किया जाएगा</p>
<p>इसके साथ ही महावीर स्वामी निर्वाण महोत्सव के अंतर्गत लड्डू सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है, जिसमें लड्डू की सुंदर प्रस्तुति के आधार पर विजेताओं का चयन किया जाएगा।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय पोरवाड़ सामाजिक मंच के अध्यक्ष समीर जैन एवं सचिव सन्मति जैन ने अधिक से अधिक समाज जनों से भाग लेने की अपील की है।</p>
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		<title>जरूरतमंद परिवारों को राशन किट, मिठाई और शर्ट वितरित कर दीपावली पर्व मनाया : आदिब्रम्हा आदिनाथ फाउंडेशन ने पांचवें वर्ष मनाया दीपोत्सव, जरूरतमंदों को दी खुशियां </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 14:38:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उदयपुर व आसपास के क्षेत्रों में आदिब्रम्हा आदिनाथ फाउंडेशन ने दीपावली पर्व के अवसर पर जरूरतमंद परिवारों को राशन किट, मिठाई और शर्ट वितरित कर खुशियां बांटी। इस कार्यक्रम में समाज सेवा और भाईचारे का संदेश फैलाया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य सुनील सागरजी महाराज की मंगल प्रेरणा से लगातार पांचवें वर्ष आदिब्रम्हा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उदयपुर व आसपास के क्षेत्रों में आदिब्रम्हा आदिनाथ फाउंडेशन ने दीपावली पर्व के अवसर पर जरूरतमंद परिवारों को राशन किट, मिठाई और शर्ट वितरित कर खुशियां बांटी। इस कार्यक्रम में समाज सेवा और भाईचारे का संदेश फैलाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य सुनील सागरजी महाराज की मंगल प्रेरणा से लगातार पांचवें वर्ष आदिब्रम्हा आदिनाथ फाउंडेशन, भींडर (रजि.) ने 20 से 22 अक्टूबर तक दीपावली पर्व हर्षोल्लास से मनाया। फाउंडेशन की टीम ने गुलाब नगर, खेरोदा, वल्लभनगर, भटेवर रोड, भिंडर, डाबियों का खेड़ा, हींता और बड़गांव सहित रोड किनारे झुग्गी-झोपड़ियों और बस्तियों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री किट, मिठाई पैकेट और शर्ट वितरित किए।</p>
<p>संस्था निदेशक अनिल स्वर्णकार ने बताया कि दीपावली पर्व भगवान श्रीराम के वनवास उपरांत अयोध्या आगमन और भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक का महान दिन है। भगवान महावीर के सिद्धांत और उपदेश मानव कल्याण के लिए हैं। जरूरतमंदों की मदद करना और खुशियां बांटना ही पर्व की सार्थकता है। फाउंडेशन ने सभी को व्यसन मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए दीपावली और महावीर निर्वाण कल्याणक की शुभकामनाएं दीं।</p>
<p>इस अवसर पर संस्था निदेशक अनिल स्वर्णकार, ईश्वर प्रजापत और श्रवण जणवा उपस्थित रहे। संस्था महामंत्री जेपी जैन, सूरत ने बताया कि अभियान के तहत भींडर, वल्लभनगर और कानोड़ तहसील क्षेत्र में विभिन्न बस्तियों में रहने वाले 20 जरूरतमंद परिवारों को राशन किट, 270 परिवारों को मिठाई पैकेट और 60 बच्चों को शर्ट वितरित किए गए। इस कार्यक्रम के माध्यम से फाउंडेशन ने समाज में भाईचारा और सेवा का संदेश फैलाया।</p>
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		<title>सुखोदय तीर्थ पर दीपावली के अवसर पर भव्य निर्वाण महोत्सव मेला : मुनि श्री विनम्र सागर जी के मंगल प्रवचन और लाडू अर्पण से मंदिर परिसर में उमड़ा भक्तों का समर्पण </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 14:37:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दीपावली पर सुखोदय तीर्थ में निर्वाण महोत्सव मेला आयोजित किया गया। मुनि श्री विनम्र सागर जी के मंगल प्रवचन, अष्ट द्रव्य अर्पण और जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भक्तों ने भक्ति भाव से भाग लिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बागीदौरा। दीपावली पर्व पर सुखोदय तीर्थ पर निर्वाण महोत्सव मेले का आयोजन किया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दीपावली पर सुखोदय तीर्थ में निर्वाण महोत्सव मेला आयोजित किया गया। मुनि श्री विनम्र सागर जी के मंगल प्रवचन, अष्ट द्रव्य अर्पण और जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भक्तों ने भक्ति भाव से भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बागीदौरा।</strong> दीपावली पर्व पर सुखोदय तीर्थ पर निर्वाण महोत्सव मेले का आयोजन किया गया। प्रातः बागीदौरा नगर में विराजमान मुनि श्री विनम्र सागर जी संघ सहित नौगामा नगर में भव्य मंगल प्रवेश के बाद तीर्थ क्षेत्र पर सुबह 8:00 बजे ध्वजारोण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।</p>
<p>अतिथियों का स्वागत किया गया और भगवान महावीर स्वामी की पूजन विधि बड़े भक्ति भाव से की गई। गीतकार के मधुर स्वर में भजन गाए गए और अष्ट द्रव्य के थाल सजाकर अर्घ चढ़ाई गई। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय, जिला प्रमुख रेशम मालवीया, प्रधान सुभाष, भारतीय जनता पार्टी ब्लॉक अध्यक्ष ओम प्रकाश सुथार और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया।</p>
<p>मुनि श्री के मंगल प्रवचन के बाद मुख्य मंदिर, मानस स्तंभ, जल मंदिर और भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा के सामने निर्वाण लाडू बड़े भक्ति भाव से चढ़ाया गया। जैन पाठशाला के छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और पधारे हुए सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के लिए वात्सल्य भोजन की व्यवस्था की गई। इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के बीच उत्साह, भक्ति और एकता का संदेश फैलाया।</p>
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		<title>त्याग और तपस्या का महापर्व है दीपावली : भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अखंड ज्योति जलाने का दिवस है दिवाली </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 14:43:50 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मुनि श्री गुरुदत्त सागर एवं मुनि श्री मेघ दत्त सागर ने रविवार को अजितनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली जैन धर्म में त्याग और तपस्या का महापर्व है। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मुनि श्री गुरुदत्त सागर एवं मुनि श्री मेघ दत्त सागर ने रविवार को अजितनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली जैन धर्म में त्याग और तपस्या का महापर्व है। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं, को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। साथ ही अमावस्या की सांझ के समय उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसलिए यह पर्व आत्म ज्योति प्रज्ज्वलित करने का प्रतीक है। मुनि श्री ने बताया कि दीपावली के अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, लाडू चढ़ाते हैं और सायंकाल घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर खुशी मनाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त कर 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करने के बाद अयोध्या लौटकर प्रजाजनों के साथ हर्षोल्लास से दीप जलाए थे।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, इसी दिन राजा विक्रमादित्य का राजाभिषेक हुआ था, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और महाभारत काल में पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के बाद हस्तिनापुर लौटकर दीपोत्सव मनाया था। मुनि श्री ने कहा कि दीपावली केवल बाहरी दीपक जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अखंड ज्योति जलाने का दिवस है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं। जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को अजितनाथ जैन मंदिर में चातुर्मास समापन एवं क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।</p>
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		<title>भगवान महावीर स्वामी के 2552वें निर्वाणोत्सव पर विशेष : दीपावली से शुरू हुआ था भारत का सबसे प्राचीन संवत </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 03:10:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन परंपरा में दिवाली पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसके अगले दिन, कार्तिक शुक्ल एकम से जैन परंपरा में नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन परंपरा में दिवाली पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। इसके अगले दिन, कार्तिक शुक्ल एकम से जैन परंपरा में नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन दीपक जलाने की परंपरा भी जुड़ी हुई है। दीपक केवल बाहरी अंधकार को मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव अंतर में व्याप्त अज्ञान और निराशा को दूर कर जीवन में ज्ञान, आशा और आलोक का प्रतीक बनता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए डॉ. सुनील जैन संचय का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>भारत धर्मप्रधान देश है और अहिंसा प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। हमारे त्योहार संस्कृति एवं सभ्यता का दर्पण हैं और इनका संबंध प्राचीन महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा होता है। यहां पर धार्मिकता से जुड़े अनेक पर्व मनाए जाते हैं। दीपावली पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। अधिकतर धर्म-संप्रदायों में इस पर्व को मनाने का कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है।</p>
<p><strong>भारत में संवतों की विविधता</strong></p>
<p>भारत में वीर निर्वाण संवत, विक्रम संवत, शक संवत, शालिवाहन संवत, ईस्वी संवत, गुप्त संवत, हिजरी संवत आदि कई संवत प्रचलित हैं। इनमें से वीर निर्वाण संवत सबसे प्राचीन है। यह हिजरी, विक्रम, ईस्वी, शक आदि संवतों से भी अधिक पुराना है।</p>
<p><strong>जैन परंपरा में दीपावली</strong></p>
<p>जैन दर्शन में दीपावली पर्व का इतिहास अनूठा और तथ्यपरक है। यह पर्व भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा हुआ है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण अमावस्या को दीपावली के दिन ही भगवान महावीर का निर्वाण हुआ। इसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल एकम से भारत का सबसे प्राचीन संवत ‘वीर निर्वाण संवत’ प्रारंभ हुआ। जैन परंपरा में इसी दिन से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।</p>
<p><strong>वीर निर्वाण संवत का प्रमाण</strong></p>
<p>वीर निर्वाण संवत की प्रामाणिकता सुप्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने वर्ष 1912 में अजमेर जिले के बडली गाँव (भिनय तहसील, राजस्थान) से प्राप्त प्राचीन प्राकृत ब्राह्मी शिलालेख से सिद्ध की। इस शिलालेख में लिखा है “84 वीर संवत”, जो भगवान महावीर निर्वाण के 84 वर्ष बाद लिखा गया। यह शिलालेख अजमेर के राजपूताना संग्रहालय में सुरक्षित है।</p>
<p>शिलालेख की पहली पंक्ति में “वीर” शब्द भगवान महावीर स्वामी को संबोधित है और दूसरी पंक्ति में “निर्वाण से 84 वर्ष” अंकित है। ईसा से 527 वर्ष पूर्व निर्वाण से 84 वर्ष घटाने पर 443 वर्ष आता है, जो इस शिलालेख के लिखे जाने का वर्ष है।</p>
<p><strong>दीपावली और जीवन का आलोक</strong></p>
<p>दीपावली पर जलने वाले दीपकों की संख्या हजारों में होती है। यह बाहरी अंधकार को मिटाता है, लेकिन अंतर का अंधकार यथावत् रहता है। इस दीपावली पर एक दीपक इस अनुभूति के साथ जलाना चाहिए कि आत्मा की ज्योति मरणशील देह में मुस्कुराए।</p>
<p><strong>जैन परंपरा में नया वर्ष</strong></p>
<p>जैन परंपरा में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के अगले दिन से नए वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।</p>
<p>“यद्यपि युद्ध नहीं कियो, नाहिं रखे असि-तीर,</p>
<p>परम अहिंसक आचरण, तदपि बने महावीर।”</p>
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		<title>दीपावली: अहिंसा और प्रकाश का पर्व, पटाखों से नहीं दीपों से सजाएँ : स्वस्थ, सादगीपूर्ण और मंगलकारी दीपावली के लिए पटाखों को कहें “न” </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 11:28:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत में दीपावली का पर्व प्रकाश, सादगी और अहिंसा का प्रतीक है। पटाखों की बजाय दीपक जलाकर हम स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। व्याकरणाचार्य आकाश जैन ने अपने लेख में बताया कि दीपावली का असली अर्थ है ज्ञान और शांति का प्रकाश फैलाना, न कि विस्फोट और प्रदूषण। पढ़िए व्याकरणाचार्य आकाश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत में दीपावली का पर्व प्रकाश, सादगी और अहिंसा का प्रतीक है। पटाखों की बजाय दीपक जलाकर हम स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। व्याकरणाचार्य आकाश जैन ने अपने लेख में बताया कि दीपावली का असली अर्थ है ज्ञान और शांति का प्रकाश फैलाना, न कि विस्फोट और प्रदूषण। <span style="color: #ff0000">पढ़िए व्याकरणाचार्य आकाश जैन, चिरगांव, जिला झांसी (उत्तर प्रदेश) की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>भारत की सांस्कृतिक परंपरा में दीपावली का स्थान अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण है। यह पर्व हर भारतीय हृदय में उत्साह, श्रद्धा और उमंग का संचार करता है। दीपावली का संबंध भगवान श्रीरामचंद्र और भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा है। श्रीराम के अयोध्या लौटने का उल्लास और महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस की श्रद्धा, दोनों ही मानवता और आत्म-विजय का प्रतीक हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पटाखों का चलन भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं से आया दासत्व का प्रतीक है। इसके अलावा, बारूद स्वास्थ्य, पर्यावरण और पशु-पक्षियों के लिए हानिकारक है। ध्वनि और धुएँ से नवजात शिशु, गर्भवती महिलाओं और वयस्कों तक प्रभावित होते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>व्याकरणाचार्य आकाश जैन का कहना है कि दीपावली का वास्तविक अर्थ अहिंसा, करुणा और प्रकाश का उत्सव है। दीपक का शांत प्रकाश अधिक स्थायी और मंगलकारी है, जबकि पटाखे अस्थायी चमक और प्रदूषण फैलाते हैं। हमें बच्चों को भी यह सिखाना चाहिए कि दीपावली का आनंद प्रकाश और सादगी में है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस दीपावली, आइए हम सब मिलकर पटाखों को “न” कहें और दीपक जलाकर अपने घर, समाज और पर्यावरण को सुरक्षित एवं मंगलमय बनाएँ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1fa94.png" alt="🪔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2728.png" alt="✨" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> अहिंसा की दीपावली मनाएँ — बारूद नहीं, प्रकाश जलाएँ! <img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2728.png" alt="✨" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/1fa94.png" alt="🪔" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /></p>
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		<title>दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र बाजार रहेगा गुलजार : दो दिन बाजार में जमकर होगी खरीदारी, उम्मीदें उफान पर  </title>
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		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 13:02:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र इस साल मंगलवार 14 और बुधवार 15 अक्टूबर को आ रहा है। यह नक्षत्र खरीदारी के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, खासकर सोना, चांदी, वाहन और संपत्ति खरीदने के लिए।</p>
<p>जैन ने बताया इस नक्षत्र में की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। डॉ. जैन ने पुष्य नक्षत्र का महत्व बताते हुए कहा कि पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है और यह धन और समृद्धि का प्रतीक भी। इस नक्षत्र में की गई खरीदारी लंबे समय तक उपयोग में रहती है और इससे घर में बरकत आती है। पुष्य नक्षत्र का संबंध देवी लक्ष्मी से है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजन से पहले वाला पुष्य नक्षत्र विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>पुष्य नक्षत्र के दौरान खरीदारी के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। 14 अक्टूबर मंगलवार को प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत की चौघड़िया) सुबह 9.15 से दोपहर 1.33 बजे तक। अपराह्न मुहूर्त (शुभ) दोपहर 3 से शाम 4.26 बजे तक, सायाह्न मुहूर्त (लाभ) शाम 7.26 से रात 9 बजे तक। रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)। रात 10.33 से सुबह 3.14 बजे तक, 15 अक्टूबर बुधवार को शुभ की चौघड़िया प्रातः 10.41 बजे से 12.07 बजे तक। चार एवं लाभ की चौघड़िया दोपहर 2.58 बजे से 5.50 बजे शाम तक रात्रि में शुभ, अमृत एवं चर की चौघड़िया शाम 7.24 से 12.07 बजे रात्रि तक।</p>
<p><strong>पुष्य नक्षत्र में खरीदने योग्य वस्तुएं</strong></p>
<p>जैन ने कहा इस नक्षत्र में आप निम्नलिखित वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं ’सोना और चांदी’। धन और समृद्धि का प्रतीक वाहन। नए वाहन की खरीदारी के लिए शुभ संपत्तिः जमीन या मकान खरीदने के लिए उत्तम। बहीखाता। नए बहीखाते शुरू करने के लिए शुभ, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटमः घर के लिए आवश्यक वस्तुएं पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। इसलिए, दीपावली से पहले आने वाले इस नक्षत्र का लाभ उठाएं और अपनी जरूरत की चीजें खरीदें।</p>
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		<title>लोकनायक 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याणक: तिथि के अनुसार चैत्र शुक्ल तेरस के दिन आता है जन्म कल्याण, इस बार यह 10 अप्रैल को  </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 13:47:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याण इस बार 10 अप्रैल को देश ही नहीं समूचे विश्व में धूमधाम से मनाया जाएगा। 2623 वर्ष पूर्व क्रांति की मशाल थामे भगवान महावीर का जन्म वैशाली गणराज्य के कुंड गांव में पिता सिद्धार्थ के यहां चैत्र शुक्ल तेरस के दिन माता त्रिशला के गर्भ से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याण इस बार 10 अप्रैल को देश ही नहीं समूचे विश्व में धूमधाम से मनाया जाएगा। 2623 वर्ष पूर्व क्रांति की मशाल थामे भगवान महावीर का जन्म वैशाली गणराज्य के कुंड गांव में पिता सिद्धार्थ के यहां चैत्र शुक्ल तेरस के दिन माता त्रिशला के गर्भ से हुआ था। भगवान महावीर जी के जन्म कल्याणक को लेकर देशभर में धार्मिक उल्लास का माहौल है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज उपसंपादक प्रीतम लखवाल के संकलन और संयोजन में पढ़िए यह खास पेशकश&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य का शंखनाद करने वाले लोकनायक जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याण इस बार 10 अप्रैल को देश ही नहीं समूचे विश्व में धूमधाम से मनाया जाएगा। 2623 वर्ष पूर्व क्रांति की मशाल थामे भगवान महावीर का जन्म वैशाली गणराज्य के कुंड गांव में पिता सिद्धार्थ के यहां चैत्र शुक्ल तेरस के दिन माता त्रिशला के गर्भ से हुआ था। भगवान महावीर जी के जन्म कल्याणक को लेकर देशभर में धार्मिक उल्लास का माहौल है। दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष रूप से तैयारियां की जा रही हैं। तीर्थंकर महावीर नामक महाकाव्य में वर्णित है कि लोक नायक या युग पुरुष की प्राप्ति के लिए युग को, समाज को सदियों तक साधना करनी होती है। तब जाकर सूर्य के समान तेजस्वी युग पुरुष क्रांति दूत के रूप में जन्म लेते हैं। अपने समकालीन सामंतशाही, रूढ़िवादिता, धर्मांधता, सामाजिक कुरीतियां, समाजद्रोही तत्वों का डटकर सामना करते हैं। तब देश में दिग्दिगंत में धर्म और शांति का विजय नाद अनुगूंजित हो उठता है। यही तथ्य भगवान महावीर के साथ भी चरितार्थ हुए। भगवान महावीर का समस्त जगत 2624वां जन्म कल्याणक मना रहा है। भगवान महावीर के रूप में ऐसा नक्षत्र उदित हुआ कि युग बीत गए। शताब्दियां व्यतीत हो गईं किन्तु वह नक्षत्र आज भी जाज्वल्य मान है। यहां यह कहना आवश्यक है कि जाति-पाति, भेदभाव के चलते मध्ययुगीन राजतंत्रात्मक शासन व्यवस्था एवं धार्मिक आडंबरों का बहुत योगदान रहा। इस युग में राजागण सांसारिक सुखों को पाने के लिए शरीर को अमर बना रहे थे और देव मंदिर सुरति क्रियारत स्त्री-पुरुषों के चित्रों से सज्जित हो रहे थे। इन्हीं परिस्थितियों में भगवान महावीर ने प्राणि मात्र के कल्याण के लिए अपने प्रयत्नों से उच्चतम विकास कर सकने का आस्थापूर्ण मार्ग प्रशस्त कर अनेकांतवादी जीवन दृष्टि पर आधारित स्याद्वादवादी कथन प्रणाली से बहु धर्मों को प्रत्येक कोण, दृष्टि एवं संभावना से उसके वास्तविक रूप में जान पाने का मार्ग बदलकर सामाजिक जीवन की शांति के लिए अपरिग्रह और अहिंसा का संदेश दिया था। इतिहास प्रसिद्ध तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर का जीवन दर्शन आज भी समूचे विश्व में वंदनीय है और पूजनीय है।</p>
<p><strong>भगवान महावीर ने दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया </strong></p>
<p>भगवान महावीर जैन धर्म के चौंबीसवें तीर्थंकर थे। भगवान महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व वैशाली गणराज्य के क्षत्रिय कुंड में क्षत्रिय परिवार हुआ था। 30 वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्म कल्याण के पथ पर निकल गए। 12 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया। 72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने। जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज द्वारा महावीर स्वामी के जन्म दिवस को महावीर-जयंती तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल एकम को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता हैं। जैन ग्रंथों के अनुसार समय-समय पर धर्म तीर्थ के प्रवर्तन के लिए तीर्थंकरों का जन्म होता है। जो सभी जीवों को आत्मिक सुख प्राप्ति का उपाय बताते हैं। तीर्थंकरों की संख्या चौबीस ही कही गई है। भगवान महावीर वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे और हिंसा, पशुबलि, जात-पात का भेदभाव जिस युग में बढ़ गया। उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया।</p>
<p><strong>भगवान महावीर के पंचशील सिद्धांत </strong></p>
<p>तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया। उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए। जो हैं अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) ,ब्रह्मचर्य। उन्होंने अनेकांतवाद, स्याद्वादवाद और अपरिग्रह जैसे अद्भुत महाव्रती सिद्धांत दिए। महावीर के सर्वाेदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएं नहीं थीं। भगवान महावीर का आत्म धर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं। इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें, जो हमें स्वयं को पसंद हो। यही महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत है।</p>
<p><strong>भगवान महावीर का जन्म</strong></p>
<p>भगवन महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के कुंडग्राम में इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहां चैत्र शुक्ल तेरस को हुआ था। ग्रंथों के अनुसार उनके जन्म के बाद राज्य में उन्नति होने से उनका नाम वर्द्धमान रखा गया था। जैन ग्रंथों के अनुसार 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 250 वर्ष बाद भगवान महावीर का जन्म हुआ था।</p>
<p><strong>भगवान महावीर का विवाह</strong></p>
<p>भगवान महावीर का विवाह यशोदा नामक सुकन्या के साथ हुआ था और कालांतर में प्रियदर्शिनी नाम की कन्या उत्पन्न हुई। जिसके युवा होने पर राजकुमार जमाली के साथ विवाह हुआ।</p>
<p><strong>भगवान महावीर का साधना काल</strong></p>
<p>भगवान महावीर का साधना काल 12 वर्ष का था। दीक्षा लेने के बाद भगवान महावीर ने जिनकल्पी श्रमण की कठिन चर्या को अंगीकार किया। श्वेतांबर संप्रदाय जिसमें साधु श्वेत वस्त्र धारण करते हैं के अनुसार भी महावीर दीक्षा के बाद कुछ समय छोड़कर निर्वस्त्र रहे और उन्होंने केवल ज्ञान की प्राप्ति भी। जिन कल्पी अवस्था में ही की। अपने पूरे साधना काल के दौरान महावीर ने कठिन तपस्या की और मौन रहे। इन वर्षों में उन पर कई उपसर्ग भी हुए। जिनका उल्लेख कई प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है।</p>
<p><strong>केवल ज्ञान और उपदेश</strong></p>
<p>जैन ग्रन्थों के अनुसार केवल ज्ञान प्राप्ति के बाद, भगवान महावीर ने उपदेश दिया। उनके 11 गणधर (मुख्य शिष्य) थे। जिनमें प्रथम इंद्रभूति थे।</p>
<p><strong>भगवान महावीर ने बताए पांच व्रत</strong></p>
<p>सत्य:- सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ। जो बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।</p>
<p>अहिंसा:- इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पांच इंद्रियों वाले जीव) हैं। उनकी हिंसा मत कर। उनको उनके पथ पर जाने से न रोको। उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो। उनकी रक्षा करो। यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं।</p>
<p>अचौर्य &#8211; दूसरे की वस्तु बिना उसके दिए हुए ग्रहण करना जैन ग्रंथों में चोरी कहा गया है।</p>
<p>अपरिग्रह:- आवश्यक चीजों का उपयोग ही किया जाए।</p>
<p>ब्रह्मचर्य:- महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। जैन मुनि, जैन साध्वी इन्हें पूर्ण रूप से पालन करते हैं, इसलिए उनके महाव्रत होते हैं और श्रावक, श्राविका इनका एक देश पालन करते हैं। इसलिए उनके अणुव्रत कहे जाते हैं।</p>
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