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	<title>दीक्षा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>संयम ने संसार त्यागकर धारण किया साधु जीवन : बने युगादिचंद्र सागर महाराज हजारों श्रद्धालुओं ने दी भावभीनी अनुमोदना </title>
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		<pubDate>Thu, 07 May 2026 06:36:25 +0000</pubDate>
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<p><strong>शहर में हुए भव्य दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को दीक्षार्थी संयम मेहता ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन साधु दीक्षा ग्रहण की और युगादिचंद्र सागर महाराज के रूप में नवजीवन प्रारंभ किया। इस ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के साक्षी बनने हेतु राजस्थान एवं मध्यप्रदेश सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>रामगंजमंडी। शहर में हुए भव्य दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को दीक्षार्थी संयम मेहता ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन साधु दीक्षा ग्रहण की और युगादिचंद्र सागर महाराज के रूप में नवजीवन प्रारंभ किया। इस ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के साक्षी बनने हेतु राजस्थान एवं मध्यप्रदेश सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। खैराबाद रोड स्थित कंचन सिटी में निर्मित अगमोद्वारक नगरी में आयोजित इस भव्य समारोह में आचार्यश्री आनंदचंद्र सागर सूरी जी के सानिध्य में धर्मसभा हुई। दीक्षार्थी संयम मेहता के रजोहरण ग्रहण करते ही पूरा पंडाल जिन शासन के जयकारों से गूंज उठा। दीक्षा से पूर्व प्रातः 7.30 बजे संयम मेहता के निवास से भव्य शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों के साथ प्रारंभ हुई, जो दीक्षा स्थल पहुंची। यहां उनका विजय तिलक किया गया। दीक्षार्थी ने सांसारिक आभूषणों एवं वस्तुओं का त्यागकर परिवारजनों को सौंप दिया। श्रीजी पूजन के बाद आचार्य श्री द्वारा रजोहरण प्रदान किया गया। इसके बाद वेश परिवर्तन बाद जब संयम मेहता साधु वेश में सभा मंडप में पहुंचे तो श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। पूरे वातावरण में हर्ष और भावुकता का अद्भुत संगम देखने को मिला, अनेक श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। आचार्य आनंदचंद्र सागर महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिक संपदा से व्यक्ति ऊंचाई प्राप्त कर सकता है, लेकिन आध्यात्मिक संपदा के समक्ष हर व्यक्ति नतमस्तक होता है। उन्होंने कहा कि पानी से नहाने वाले लिबास बदलते हैं, पसीने से नहाने वाले इतिहास बदलते हैं। उन्होंने मेहता परिवार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जिन शासन की सेवा में अपना कुलदीपक समर्पित कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।</p>
<p><strong>लाभार्थी परिवारों की सहभागिता</strong></p>
<p>दीक्षा महोत्सव में विभिन्न धार्मिक उपकरणों के अर्पण का लाभ अनेक परिवारों द्वारा लिया गया। नामकरण का लाभ दिनेश कुमार फाफरिया परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलावा कांबली, दांडी, दंडासन, आसन, संथारा, उत्तर पट्टा, गोचरी पात्र, तरपणी, स्वाध्याय पोथी एवं पूजनी आदि के लाभ विभिन्न परिवारों द्वारा ग्रहण किए गए।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों ने की सराहना</strong></p>
<p>कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जैन समाज का युवा जब संसार त्यागकर धर्म मार्ग अपनाता है, तो यह समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक होता है। उन्होंने मेहता परिवार को साधुवाद दिया। पूर्व विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि यह आध्यात्मिकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कोटा, बूंदी, झालावाड़, इंदौर सहित अनेक शहरों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे।</p>
<p><strong>भावुक विदाई कार्यक्रम</strong></p>
<p>दीक्षा की पूर्व संध्या पर आयोजित “संसार विदाई कार्यक्रम” अत्यंत भावुक रहा। दीक्षार्थी संयम मेहता ने अपने उद्बोधन में दीक्षा का श्रेय साध्वी युगादिप्रिया श्रीजी को देते हुए कहा कि वे ममता के बंधनों को त्यागकर वैराग्य पथ पर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने सभी जीवों से क्षमा याचना की। परिवारजनों से आज्ञा लेने के दौरान पूरे पंडाल में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा और सभी की आंखें नम हो गईं।</p>
<p><strong>दान एवं संकल्प की प्रेरणा</strong></p>
<p>प्रवक्ता वीरेंद्र जैन के अनुसार, पूज्य आचार्य की प्रेरणा से नवदीक्षित महाराज ने तीन माह का मौन व्रत धारण किया, वहीं माता-पिता ने आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लिया।</p>
<p>कंचन सिटी के चेयरपर्सन तेजमल सर्राफ ने जैन समाज की सुविधा हेतु 2000 वर्गफीट भूमि दान की।</p>
<p><strong>अभूतपूर्व उत्साह, पंडाल पड़ा छोटा</strong></p>
<p>दीक्षा महोत्सव में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। लगभग 5 घंटे तक श्रद्धालु अपलक कार्यक्रम देखते रहे। प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले कार्यक्रम में किसी ने भी बीच में उठना उचित नहीं समझा। पंडाल छोटा पड़ गया और बाहर भी बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। दीक्षा महोत्सव समिति के संरक्षक हुकुम बाफना ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>दीक्षार्थी संयम मेहता के दीक्षा महोत्सव में उत्सव जैसा माहौल : दीक्षार्थी की दूल्हे की तरह बिंदोरी निकालने के साथ हल्दी की हुई क्रिया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 May 2026 15:41:15 +0000</pubDate>
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<p><strong>नगर में इन दिनों भक्ति आस्था श्रद्धा समर्पण का संगम देखने को मिल रहा है एक और जहां परम पूज्य आनंद सागर महाराज आनंद के साथ पीयूष वाणी से धर्म रूपी आनंद की वर्षा कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी</strong> । नगर में इन दिनों भक्ति आस्था श्रद्धा समर्पण का संगम देखने को मिल रहा है एक और जहां आचार्य श्री आनंद सागर महाराज आनंद के साथ पीयूष वाणी से धर्म रूपी आनंद की वर्षा कर रहे हैं। नगर में स्थित कंचन सिटी धर्ममय बनी हुई है। प्रसंग है दीक्षार्थी संयम मेहता की दीक्षा का जो 6 मई को संसार की मोह माया से विरक्ति लेकर आचार्य श्री आनंद सागर महाराज के कर कमलों से दीक्षा लेंगे। रविवार की रात्रि की बेला में दीक्षार्थी संयम मेहता की घोड़ी पर बिठाकर दूल्हे की तरह ईनाणी निवास से नगर के प्रमुख मार्गो से बिनौली यात्रा निकाली गई। दीक्षा से पूर्व इन दृश्यों को देख नगर का वातावरण इन अनुपम क्षणों को देख गदगद है। एक दिन दीक्षा लूंगा मन में यह भाव के साथ वैराग्य भक्ति गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। दीक्षार्थी अमर रहे जैसे जयघोष सुनाई पढ़ रहे है। दीक्षा की किया से पूर्व सोमवार की दोपहर बेला में कंचन सिटी में दीक्षार्थी के हल्दी की क्रिया संपन्न हुई, जो बहुत ही भक्तिमय रही।</p>
<p><strong>मंगलवार को निकलेगी दीक्षार्थी की वर्षीदान यात्रा </strong></p>
<p>मंगलवार की बेला में नगर में दीक्षार्थी संयम मेहता की वर्षीदान यात्रा निकाली जाएगी। जिसमें सर्व समाज सम्मिलित होगी। यह दृश्य अपने आप में बहुत ही विहंगम होगा। जब संसार के संपूर्ण वैभव का त्याग करते हुए दीक्षार्थी नगर के प्रमुख मार्गो से गुजरेंगे।</p>
<p><strong> क्या होता है वर्षीदान ?</strong></p>
<p>वैराग्य की ओर बढ़ने वाला व्यक्तित्व संपूर्ण वैभव का त्याग करने के लिए अग्रसर रहता है लेकिन, तीन दर्शन में वर्षीदान की परंपरा दीक्षा से पूर्व बताई गई है। जैन परंपरा में दीक्षा से पूर्व वर्षीदान इसलिए किया जाता है ताकि संसार के प्रति मोह और संपत्ति का त्याग पूरी तरह हो सके और अंतिम समय में कोई आकांक्षा शेष न रहे। यह वैराग्य की सर्वोच्च भावना, करुणा और आत्मकल्याण का प्रतीक है। मुमुक्षु अपने सभी सांसारिक बंधनों को तोड़कर निस्पृह (बिना किसी इच्छा के) होना चाहता है, इसलिए धन, स्वर्ण, और संपत्ति को दान कर देता है, बताते हैं।</p>
<p>करुणा और उपकार: निर्धन और जरूरतमंदों की मदद करना, जो तप के मार्ग पर चलने से पहले एक अंतिम सामाजिक कर्तव्य है।</p>
<p>ऋण मुक्ति: माना जाता है कि ऐसा करने से सांसारिक ऋण चुकता हो जाता है और दीक्षा में कोई बाधा नहीं आती, यह तपस्या का मार्ग चुनने से पहले भौतिक दुनिया से पूर्ण विरक्ति का प्रतीक है।</p>
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		<title>तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर में दीक्षा महोत्सव का ऐतिहासिक क्षण : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रदान की तीन निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:44:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन मोक्ष मार्ग के पथिक साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। गिरीडीह से पढ़िए, यह खबर&#8230; गिरीडीह। तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन मोक्ष मार्ग के पथिक साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। <span style="color: #ff0000">गिरीडीह से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गिरीडीह।</strong> तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन मोक्ष मार्ग के पथिक साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। इस दीक्षा समारोह में ब्र. सारांश भैया मुनि श्री 108 सारसागर महाराज, क्षुल्लक समादर सागर मुनि श्री 108 समादरसागर महाराज तथा बाल ब्रह्मचारी रुपेश भैया मुनि श्री 108 रुपसागर महाराज बने। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि दीक्षा प्रदान करने के बाद मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नवदीक्षित मुनिराजों को संबोधित करते हुए कहा कि साधु बनने के बाद संसार के आकर्षण और विकार स्मरण आ सकते हैं, किंतु साधु का लक्ष्य इन सबसे ऊपर उठकर आत्मशुद्धि करना है। उन्होंने कहा कि मुनि बनने के बाद लोग पूजा करें, प्रशंसा करें, सम्मान दें या आलोचना करें-यह उनके भाव हैं, परंतु साधु का मार्ग इन सबसे परे होता है। ‘मैं साधु बना हूँ न पूजा पाने के लिए, न समाज से संरक्षण पाने के लिए, बल्कि अपने जीवन को पवित्र बनाने और मोक्ष-पथ को साधने के लिए।’</p>
<p><strong>एक अच्छा शिष्य अपने जीवन को गुरु के हाथों में रखता है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने भगवान महावीर से लेकर आचार्य कुंदकुंद तथा आचार्य विद्यासागर महाराज की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि साधु का लक्ष्य अपने अंतर्मन को निर्मल करना है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कोई नया कार्य नहीं किया, बल्कि वही जिम्मेदारी निभाई है, जो आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी ने सन् 2019 में नेमावर में सौंपी थी। दीक्षा से पूर्व इन युवाओं ने आचार्य गुरुदेव से ब्रह्मचर्य व्रत लिया और वर्ष 2020 से सतत साधना में रत रहकर अपने जीवन को तप एवं संयम से तपाया तथा दीक्षा के योग्य बने। मुनि श्री ने कहा कि साधु का आधार लोगों की प्रशंसा नहीं, बल्कि 28 मूलगुणों की रक्षा और पंचाचार का पालन है। एक अच्छा शिष्य अपने जीवन को गुरु के हाथों में बंसी के समान रख देता है-जहां से जो स्वर निकले वही उसकी साधना बन जाती है। उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि साधुओं का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनकी मर्यादा की रक्षा से होता है। साधु-संतों का निर्वाह करना समाज की जिम्मेदारी है। सेवा, विनय और साधना में सहयोग से ही धर्म का वातावरण सशक्त बनता है।</p>
<p><strong>दीक्षा पूर्व नवदीक्षार्थियों ने अपने भाव रखे</strong></p>
<p>गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 20 तीर्थंकरों की मोक्ष नगरी श्री सम्मेदशिखर में यह जैनेश्वरी दीक्षा विशेष ऐतिहासिक रही, क्योंकि एक मुनिराज द्वारा भावी मुनिराज को दीक्षा प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि यह कोई नई परंपरा नहीं है, इतिहास में इसके अनेक उदाहरण हैं। आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने भी मुनि विद्यासागर महाराज को मुनि अवस्था में ही दीक्षा प्रदान की थी। दीक्षा पूर्व नवदीक्षार्थियों ने अपने भाव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के समक्ष रखे। मुनि श्री ने परिवारजनों, उपस्थित मुनिराजों, आर्यिका संघ, समस्त त्यागी वृत्तियों, विद्वानों एवं समाज के गणमान्य लोगों की अनुमति के पश्चात धार्मिक विधि-विधानों के साथ पंचमुष्टि केशलोंच एवं पंचगुरु भक्ति के साथ दीक्षा संस्कार संपन्न कराए। वस्त्र त्याग का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण एवं पावन रहा। नवदीक्षित मुनिराजों को पिच्छिका, शास्त्र तथा शुद्धि हेतु कमंडल गुरुभक्त परिवारों द्वारा भेंट किए गए।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गुरु भक्ति की</strong></p>
<p>प्रातःकाल नवदीक्षार्थी मुनिराजों की बग्गी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गुरु भक्ति की। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया लिधोरा एवं अभय आदित्य ने किया। संघस्थ मुनि श्री संधान सागरजी ने नवदीक्षित मुनिराजों का जीवन परिचय प्रभावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का ध्वजारोहण देश के भामाशाह अशोक पाटनी एवं सुशीला पाटनी (आरके मार्बल) द्वारा किया गया। दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद प्रेमी, दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष गजेंद्र जैन पाटनी (कुनकुरी) सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>इन प्रदेशों के इन शहरों से आए श्रद्धालु</strong></p>
<p>इस अवसर पर मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि से तथा बेंगलुरु, दिल्ली, मुम्बई, इंदौर, दुर्गापुर, गोहाटी, सतना, फिरोजाबाद, औरंगाबाद, भोपाल, सागर, आगरा, कोलकाता, ग्वालियर, कन्नौज, जयपुर, बगसरिया, रतलाम, अहमदाबाद, कटनी, रांची, शामली, किशनगढ़ (राजस्थान), बांसा, अलवर, गन्नौर, जबलपुर, गुड़गांव, कोडरमा, ईसरी, हजारीबाग, गया, धूलियान, कोटा, विदिशा, पुणे, गाजियाबाद, लुधियाना, गोमिया, साड़म, चिरमरी, बुढार, राहतगढ़, खातेगांव, सिलवानी, वाराणसी, मुगलसराय से श्रद्धालु उपस्थित रहे। विदेशों से ह्यूस्टन (अमेरिका), बैंकॉक और सिंगापुर से भी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।</p>
<p>सायंकाल 4 से 5 बजे तक शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपने प्रश्न रखे और गुरुदेव से समाधान प्राप्त किया। समारोह में अपार जनसमूह की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से ओतप्रोत बना दिया।</p>
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		<title>संयम पथ की ओर बढ़ते कदम मुमुक्षु शीतल जैन का भव्य बहुमान : 22 फरवरी को कमोल में होगा दीक्षा महोत्सव </title>
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		<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 14:48:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सांसारिक सुखों का परित्याग कर आत्म-कल्याण की राह चुनने वाली मुमुक्षु शीतल जैन का आज श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार ने अभिनंदन किया। श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार के विशेष समारोह में मुमुक्षु शीतल का बहुमान कर उनके वैराग्य भाव की अनुमोदना की गई। उदयपुर से पढ़िए, रमेश खोखावत की यह खबर&#8230; उदयपुर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सांसारिक सुखों का परित्याग कर आत्म-कल्याण की राह चुनने वाली मुमुक्षु शीतल जैन का आज श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार ने अभिनंदन किया। श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार के विशेष समारोह में मुमुक्षु शीतल का बहुमान कर उनके वैराग्य भाव की अनुमोदना की गई। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, रमेश खोखावत की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> सांसारिक सुखों का परित्याग कर आत्म-कल्याण की राह चुनने वाली मुमुक्षु शीतल जैन का आज श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार द्वारा भावभीना अभिनंदन किया गया। श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार द्वारा आयोजित विशेष समारोह में मुमुक्षु शीतल का गौरवशाली बहुमान कर उनके वैराग्य भाव की अनुमोदना की गई। इस आध्यात्मिक उत्सव कार्यक्रम श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिसर में स्थित उपाध्याय पुष्कर मुनि जी महाराज के पावन स्मृति स्थल पुष्कर गुरु पावन धाम स्मारक पर किया गया। इस अवसर पर वातावरण उस समय पूर्णतः धर्ममय हो गया। जब उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने मुमुक्षु के साथ सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया। जाप के पश्चात ग्रंथालय परिवार के सदस्यों ने मुमुक्षु शीतल जैन को श्रीफल भेंट किया, माला पहनाई और शॉल ओढ़ाकर उनका भावभीना स्वागत किया।</p>
<p>श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय के महामंत्री रमेश खोखावत, कोषाध्यक्ष विजयसिंह छाजेड़, मंत्री निर्मल पोखरणा, जयप्रकाश भंडारी, राजेंद्र लोढा, लहरसिंह छाजेड, महासती सोहन कुंवर महिला मंडल अध्यक्ष सुमित्रा सिंघवी, मंत्री नीता छाजेड, जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा राजस्थान प्रांत की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा जैन, श्री तारक गुरु जैन मित्र मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र बाबेल, नरेंद्र सिंघवी, अनिल सिंयाल, दर्शन सिंघवी, दिनेश हरकावत, भूरीबाई सिंघवी, अरुण सिंयाल की उपस्थिति रही।</p>
<p><strong>उच्च शिक्षा और वैराग्य का अद्भुत संगम</strong></p>
<p>मूलतः उदयपुर जिले के कमोल गांव में जन्मी 36 वर्षीय शीतल जैन आज के शिक्षित युवाओं के लिए एक मिसाल पेश कर रही हैं। उन्होंने जैनोलॉजी (जैन दर्शन) में एमए की उपाधि प्राप्त की है। अपनी शैक्षणिक योग्यता के माध्यम से जैन सिद्धांतों को गहराई से समझने के बाद उन्होंने संयम पथ पर चलने का दृढ़ निश्चय किया। समाज जनों का कहना है कि शीतल जैन ने यह सिद्ध कर दिया है कि वास्तविक ज्ञान वही है जो व्यक्ति को मुक्ति के मार्ग की ओर ले जाए।</p>
<p><strong>साध्वी संयमलता जी के सानिध्य में ग्रहण करेंगी दीक्षा</strong></p>
<p>मुमुक्षु शीतल जैन का भागवती दीक्षा महोत्सव आगामी 22 फरवरी को उनके जन्मस्थान कमोल गांव में किया जाएगा। वे साध्वी श्री संयमलता जी मसा के सानिध्य में विधिवत दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक संबंधों का त्याग करेंगी और श्रमणी संघ की मर्यादाओं में बंधकर प्रभु महावीर के मार्ग पर आगे बढ़ेंगी। श्री तारक गुरु जैन ग्रंथालय परिवार ने मुमुक्षु के उज्ज्वल संयमी जीवन की मंगल कामना प्रेषित की।</p>
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		<title>जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव में सात दीक्षार्थियों ने अपनाया संयम मार्ग : भिक्षु जीवन लेने का नहीं, बल्कि देने का मार्ग है- आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज </title>
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		<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 06:00:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी में सोमवार को आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव का दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। सात मुमुक्षुओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम, भक्ति और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ते हुए दीक्षा ग्रहण की। जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और अध्यात्म की ओर बढ़ने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी में सोमवार को आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव का दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। सात मुमुक्षुओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम, भक्ति और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ते हुए दीक्षा ग्रहण की। जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और अध्यात्म की ओर बढ़ने का प्रेरणास्रोत बन गया, जिसने हर उपस्थित व्यक्ति के मन में संयम और करुणा की ज्योति प्रज्वलित कर दी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी में सोमवार को आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव का दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। सात मुमुक्षुओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम, भक्ति और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ते हुए दीक्षा ग्रहण की। इस दिव्य क्षण का साक्षी बनने पहुंचे हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। जब दीक्षार्थियों के केश लोचन का पवित्र क्षण आया, तो पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं और हाथ जोड़कर श्रद्धा से झुके हुए थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>महोत्सव में दिगंबर जैन आचार्य सुंदर सागर, आचार्य शशांक सागर सहित सात संघों की 38 पिच्छिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का आयोजन भव्य रूप में हुआ, जहां सुबह जिनाभिषेक और पूजा-अर्चना के बाद बैंड-बाजों के साथ दीक्षार्थियों की विदाई शोभायात्रा निकाली गई।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93669" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251104-WA0011.jpg" alt="" width="1275" height="426" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251104-WA0011.jpg 1275w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251104-WA0011-300x100.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251104-WA0011-1024x342.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251104-WA0011-768x257.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251104-WA0011-990x331.jpg 990w" sizes="(max-width: 1275px) 100vw, 1275px" />कार्यक्रम के गौरव अध्यक्ष राजीव जैन और अध्यक्ष अशोक बोहरा ने बताया कि सबसे पहले आचार्य सुंदर सागर ने सातों दीक्षार्थियों को दीक्षा संस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर सभी ने पूर्व की गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हुए दीक्षा ग्रहण की अनुमति मांगी। आचार्य ने प्रवचन में कहा—</p>
<p>“इस कलिकाल में वैराग्य की भावना बहुत दुर्लभ है। भिक्षु जीवन लेने का नहीं, बल्कि देने का मार्ग है।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसके पश्चात आचार्य ने चतुरविध संघ, त्यागी व्रती, विद्वान और श्रद्धालुओं की स्वीकृति के बाद पंच मुट्ठी केश लोचन संपन्न किया। शांति मंत्र के साथ सभी के सिर पर गंधोदक छिड़का गया और वर्धमान मंत्र के बाद श्रींकार लेखन किया गया।</p>
<p><strong>नए नामों के साथ आरंभ हुआ संयम जीवन</strong></p>
<p>मुनि दीक्षा के 28 मूल गुण और क्षुल्लक दीक्षा के 11 प्रतिमा संस्कार पूरे करने के बाद नामकरण संस्कार हुआ।</p>
<p><strong>इस अवसर पर </strong></p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारी विकास बने मुनि सुयोग सागर</p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारी उमंग बने मुनि श्रुतांश सागर</p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारी पंकज बने मुनि सुधैर्य सागर</p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारी प्रकाश बने क्षुल्लक सुधीर सागर</p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारिणी किरण बनीं आर्यिका सुस्थिरमति</p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारिणी मंजू बनीं क्षुल्लिका सुस्थितमति</p>
<p>&#8211; ब्रह्मचारिणी नत्थी बनीं क्षुल्लिका सुस्थानमति</p>
<p>नामकरण के साथ ही पूरा सभागार भगवान महावीर के जयकारों से गूंज उठा। इसके उपरांत सभी नवदीक्षित संतों और आर्यिकाओं को पिच्छिका, कमंडल और जाप्यमाला भेंट किए गए।</p>
<p><strong>भक्ति रस में डूबी शाम</strong></p>
<p>महामंत्री ओमप्रकाश कटारिया ने बताया कि भजन संध्या में प्रसिद्ध गायक विक्की डी. पारीख ने “भक्ति की है रात बाबा आज थान आनो है…” और “बाबा का दरबार सुहाना लगता है…” जैसे भावपूर्ण भजनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। नवयुवक मंडल अध्यक्ष एडवोकेट सुरेन्द्र सोगानी ने बताया कि मंगलवार को नवदीक्षित साधु, आर्यिका, क्षुल्लक और क्षुल्लिका के रूप में प्रथम आहारचर्या संपन्न होगी। मुख्य संयोजक सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री गौतम दक, पं. सुरेश मिश्रा, श्रीप्रकाश तिवाड़ी, सुभाषचंद जैन, डा. कुणाल शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।</p>
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		<title>वैराग्य की राह पर अग्रसर — सागवाड़ा के बाल ब्रह्मचारी उंमग भैया और पंकज भैया को मिलेगी मुनि दीक्षा : वागड से पहुंचे 500 से अधिक श्रद्धालु, जयपुर में होगा भव्य दिगम्बर मुनि दीक्षा समारोह </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Nov 2025 12:53:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागवाड़ा जैन समाज के गौरव, बाल ब्रह्मचारी उंमग भैया और ब्रह्मचारी पंकज भैया शाह को 3 नवम्बर को जयपुर में आचार्य सुंदर सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में दिगम्बर मुनि दीक्षा दी जाएगी। कार्यक्रम में सागवाड़ा और वागड क्षेत्र के 500 से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जयपुर। शहर के सांगानेर रोड [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सागवाड़ा जैन समाज के गौरव, बाल ब्रह्मचारी उंमग भैया और ब्रह्मचारी पंकज भैया शाह को 3 नवम्बर को जयपुर में आचार्य सुंदर सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में दिगम्बर मुनि दीक्षा दी जाएगी। कार्यक्रम में सागवाड़ा और वागड क्षेत्र के 500 से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> शहर के सांगानेर रोड स्थित चित्रकूट नगर में विराजित आचार्य सुंदर सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सोमवार, 3 नवम्बर को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह का आयोजन होगा। इस अवसर पर सागवाड़ा के बाल ब्रह्मचारी उंमग भैया (आयु 23 वर्ष) और ब्रह्मचारी पंकज भैया शाह (आयु 65 वर्ष) को मुनि दीक्षा दी जाएगी। दीक्षा स्थल कंवर का बाग, चित्रकूट नगर में विशाल पांडाल में तैयार किया गया है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93489" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251101-WA0029.jpg" alt="" width="269" height="401" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251101-WA0029.jpg 269w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251101-WA0029-201x300.jpg 201w" sizes="(max-width: 269px) 100vw, 269px" />प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ‘विरल’ ने बताया कि सुबह दीक्षार्थियों की बिंदौली बैंड-बाजों के साथ निकाली जाएगी। मंगलाष्टक चौक पूराई के बाद केश लोचन और वस्त्र त्याग विधि होगी। तत्पश्चात आचार्य सुंदर सागर जी महाराज लौंग से दीक्षा संस्कार कर संयम उपकरण — नवीन पिच्छिका और कमंडल प्रदान करेंगे।</p>
<p>इस अवसर पर 18,000 दशा हूमड दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष दिनेश खोड़निया तथा वागड क्षेत्र से 500 से अधिक श्रद्धालु जयपुर पहुंच चुके हैं।</p>
<p><strong>दीक्षार्थी परिचय:</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी उंमग भैया: पिता देवीलाल पालविया, माता सीमा पालविया, जन्म 2001, शिक्षा बी.कॉम., 2019 में प्रथम बार केश लोचन किया।</p>
<p>ब्रह्मचारी पंकज भैया: पिता गुलाबचंद शाह, माता आनंदी देवी शाह, जन्म 5 जनवरी 1961, शिक्षा एम.ए., बी.एड., सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक। इन्होंने 2021 में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया था। इनकी धर्मपत्नी ने भी आचार्य सुंदर सागर जी से दीक्षा लेकर समाधि प्राप्त की थी।</p>
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		<title>गोमटगिरी में दीक्षार्थियों की पत्रिका विमोचन एवं खोल भराई का भव्य आयोजन : आचार्य विभव सागर जी के सानिध्य में 2 नवंबर को 10 दीक्षाओं की होगी पावन परिणति </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 17:21:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गोमटगिरी में आज आचार्य गुरुवर विभव सागर जी महाराज के सानिध्य में 2 नवंबर को होने वाली दीक्षाओं के पूर्व पत्रिका विमोचन एवं दीक्षार्थी भाई-बहनों की खोल भराई का भावपूर्ण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रावक समाज ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… गोमटगिरी में आज प्रातः पंच लश्करी गोठ ट्रस्ट रामशाह मंदिर, मोदी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गोमटगिरी में आज आचार्य गुरुवर विभव सागर जी महाराज के सानिध्य में 2 नवंबर को होने वाली दीक्षाओं के पूर्व पत्रिका विमोचन एवं दीक्षार्थी भाई-बहनों की खोल भराई का भावपूर्ण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रावक समाज ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>गोमटगिरी में आज प्रातः पंच लश्करी गोठ ट्रस्ट रामशाह मंदिर, मोदी जी का नासिया एवं वीहर्ष भक्त मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आचार्य गुरुवर विभव सागर जी महाराज की निश्छल आध्यात्मिक उपस्थिति में आगामी 2 नवंबर को होने वाली 10 दिव्य दीक्षाओं के पूर्व पत्रिका विमोचन एवं दीक्षार्थी भाई-बहनों की खोल भराई का भावपूर्ण एवं मंगलमय आयोजन सम्पन्न हुआ।</p>
<p>आचार्य श्री ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि जन्म तब ही सार्थक होता है जब वह संयम मार्ग को अपनाने और मोक्षमार्ग को प्राप्त करने का माध्यम बने। उन्होंने जीवन के वास्तविक कल्याण हेतु दीक्षा को सर्वोत्तम साधन बताया।</p>
<p>इस अवसर पर सूरत से पधारे अजमेरा परिवार द्वारा मुनिराजों को पिच्छि एवं शास्त्र भेंट किए गए। कार्यक्रम में ट्रस्ट प्रतिनिधि श्री योगेंद्र काला, हेमंत सेठी, सुरेंद्र मोदी, नीरज मोदी, पारस पंड्या, मनोज काला सहित सुनील गोधा, जयदीप जैन, दिनेश गोधा, पवन पटौदी, पुष्पेंद्र सोनू, राजेश गंगवाल, आकाश पंड्या, संजय बाकलीवाल, अशोक काला, आशीष गंगवाल, महिला मंडल एवं वीहर्ष भक्त मंडल की गरिमामयी उपस्थिति रही।</p>
<p>समस्त आयोजन का कुशल संचालन कमल काला द्वारा किया गया। आगामी 2 नवंबर को होने वाली 10 दीक्षाओं के पावन अवसर को लेकर संपूर्ण जैन समाज में श्रद्धा, उत्साह एवं आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है।</p>
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		<title>परम पूज्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस उज्जैन में मनाया जाएगा : श्रद्धा और भक्ति के साथ होगा 12वां दीक्षा दिवस समारोह </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Oct 2025 08:37:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[6 अक्टूबर 2025, सोमवार को उज्जैन स्थित महावीर मंदिर लक्ष्मी नगर के विशुद्ध देशना मंडप में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणुत सागर जी महाराज का 12वां दीक्षा दिवस अत्यंत हर्ष और भक्ति भावना के साथ मनाया जाएगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट… इंदौर। श्रमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य परम पूज्य मुनि श्री 108 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>6 अक्टूबर 2025, सोमवार को उज्जैन स्थित महावीर मंदिर लक्ष्मी नगर के विशुद्ध देशना मंडप में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणुत सागर जी महाराज का 12वां दीक्षा दिवस अत्यंत हर्ष और भक्ति भावना के साथ मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। श्रमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य परम पूज्य मुनि श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य प्रसन्न मनः मुनि श्री 108 प्रणुत सागर जी का 12वां दीक्षा दिवस उज्जैन में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पावन अवसर सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को विशुद्ध देशना मंडप, महावीर मंदिर लक्ष्मी नगर, उज्जैन में प्रातः 8 बजे से आरंभ होगा।</p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने मुनि श्री प्रणुत सागर जी को दीक्षा प्रदान कर न केवल उनका कल्याण किया, बल्कि समस्त समाज पर अनंत उपकार किया है। आज पूज्य मुनि श्री अपने अद्भुत तप, साधना, ज्ञान और धर्म प्रभावना से असंख्य आत्माओं का मार्ग आलोकित कर रहे हैं तथा नमोस्तु शासन को जयवंत बना रहे हैं।</p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने पूज्य मुनि श्री के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करेंगे। आयोजन स्थल पर विविध धार्मिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई है। आइए, हम सभी इस पावन दीक्षा दिवस पर उपस्थिति देकर अपने जीवन को धन्य बनाएं और धर्म लाभ प्राप्त करें।</p>
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		<title>बदनावर में दीक्षा महोत्सव में हुई दो दीक्षाएं: यशस्वीजी मसा की बड़ी दीक्षा 11 जून को  </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Jun 2025 13:29:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में आचार्य उमेशमुनि जी के आशीष से धर्मदास गण नायक प्रवर्तक जिनेंद्र मुनिजी आदि ठाना 21 और महासती मधुबाला जी, संयम प्रभाजी, पुण्यशीला जी आदि ठाणा 26 के सानिध्य में भगवती दीक्षा महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें गौरव जाट एवं अदिति वोरा की जैन भगवती दीक्षा विधि संपन्न हुई। नव दीक्षित गौरव जाट का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में आचार्य उमेशमुनि जी के आशीष से धर्मदास गण नायक प्रवर्तक जिनेंद्र मुनिजी आदि ठाना 21 और महासती मधुबाला जी, संयम प्रभाजी, पुण्यशीला जी आदि ठाणा 26 के सानिध्य में भगवती दीक्षा महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें गौरव जाट एवं अदिति वोरा की जैन भगवती दीक्षा विधि संपन्न हुई। नव दीक्षित गौरव जाट का नाम गौरव मुनि एवं नव दीक्षित अदिति वोरा का नाम आदिशाजी मसा रखा गया। <span style="color: #ff0000">बदनावर से पढ़िए, विष्णु बाथम की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर।</strong> नगर में आचार्य उमेशमुनि जी के आशीष से धर्मदास गण नायक प्रवर्तक जिनेंद्र मुनिजी आदि ठाना 21 और महासती मधुबाला जी, संयम प्रभाजी, पुण्यशीला जी आदि ठाणा 26 के सानिध्य में भगवती दीक्षा महोत्सव आयोजित किया गया। जिनेंद्रमुनिजी के मुखारबिंद से धर्मदासगण में 45 वीं दीक्षा हुई।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-82382" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250606-WA0023.jpg" alt="" width="860" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250606-WA0023.jpg 860w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250606-WA0023-269x300.jpg 269w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250606-WA0023-768x857.jpg 768w" sizes="(max-width: 860px) 100vw, 860px" />इसमें गौरव जाट एवं अदिति वोरा की जैन भगवती दीक्षा विधि संपन्न हुई। नव दीक्षित गौरव जाट का नाम गौरव मुनि एवं नव दीक्षित अदिति वोरा का नाम आदिशाजी मसा रखा गया। गौरव मुनि प्रवर्तकश्री के शिष्य तथा आदिशाजी महासती संयमप्रभाजी की शिष्या के रूप में रहेगी। दोनों के साथ ही यशस्वीजी मसा की बड़ी दीक्षा 11 जून को मुलथान गांव में होगी।</p>
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		<title>जीवन में गुरु अवश्य बनाएं क्योंकि, गुरु के बिना जीवन शुरू नहीं होता:  मुनिश्री अरहसागर जी का दीक्षा महोत्सव मनाया </title>
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		<pubDate>Sun, 04 May 2025 07:44:48 +0000</pubDate>
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<p><strong>कोटा नगर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज क़े शिष्य मुनिश्री अरहसागर जी महाराज का 26 वां दीक्षा महावीर नगर प्रथम क़े श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलमय वातावरण में मनाया। इस अवसर पर आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का संगीतमय पूजन किया गया। मुनिश्री का पादप्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किया गया।<span style="color: #ff0000"> कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> राणा प्रताप, मीरा पन्नाधाय, हाड़ी रानी के तप, त्याग और साधना की पावन वसुंधरा राजस्थान प्रांत की प्राण नगरी कोटा नगर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज क़े शिष्य मुनिश्री अरहसागर जी महाराज का 26 वां दीक्षा महावीर नगर प्रथम क़े श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलमय वातावरण में मनाया। इस अवसर पर आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का संगीतमय पूजन किया गया। मुनिश्री का पादप्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किया गया। मुनिश्री ने अपने आशीष वचन में सभी को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। अपने गुरु क़े प्रति उपकारी वचनों क़े माध्यम से वंदना की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु अवश्य बनाएं क्योंकि, गुरु के बिना जीवन शुरू नहीं होता ‘गु’ अर्थात अंधकार ’र’ अर्थात प्रकाश जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए। नर से नारायण की ओर ले जाए, पाषाण से परमात्मा की ओर ले जाए, तीतर से तीर्थंकर की यात्रा करवा दे। वही वास्तव में सदगुरु कहलाता है। इस अवसर समिति क़े अध्यक्ष गुलाब लुहाड़िया, पूर्व अध्यक्ष इंद्रमल गोधा, संजय निर्माण, बीना गोधा, मनीषा लुहाड़िया सहित बाल ब्रह्मचारी दीपक भैया,विद्वत् अक्षत जैन शास्त्री एवं बड़ी संख्या में समाज बंधु उपस्थित रहे।</p>
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