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	<title>दीक्षा तप कल्याणक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री चंद्रप्रभु के दीक्षा तप कल्याणक पर आहार चर्या: समवशरण से दिव्य देशना हुई, भामाशाह अशोक पाटनी ने दिया प्रथम आहार </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Dec 2025 11:05:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीमद जिनेंद्र पंच कल्याणक समिति द्वारा सकल दिगंबर जैन समाज के सहयोग से आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन केवल ज्ञान कल्याणक पर श्री चंद्रप्रभु महामुनिराज को प्रथम आहार देने का सौभाग्य भामाशाह अशोक पाटनी, राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद परिवार को प्राप्त हुआ। पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पीपल्दा (सवाईमाधोपुर)। आचार्यश्री वर्धमान सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रीमद जिनेंद्र पंच कल्याणक समिति द्वारा सकल दिगंबर जैन समाज के सहयोग से आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन केवल ज्ञान कल्याणक पर श्री चंद्रप्रभु महामुनिराज को प्रथम आहार देने का सौभाग्य भामाशाह अशोक पाटनी, राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद परिवार को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा (सवाईमाधोपुर)।</strong> आचार्यश्री वर्धमान सागर ससंघ के सान्निध्य पंच कल्याणक कार्यक्रम में हेलीकाप्टर से भामाशाह अशोक पाटनी आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ एवं राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद प्रभु और गुरु दर्शन के लिए परिवार सहित पधारे। श्रीमद जिनेंद्र पंच कल्याणक समिति द्वारा सकल दिगंबर जैन समाज के सहयोग से आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन केवल ज्ञान कल्याणक पर श्री चंद्रप्रभु महामुनिराज को प्रथम आहार देने का सौभाग्य भामाशाह अशोक पाटनी, राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद परिवार को प्राप्त हुआ। अनेक पुण्यशाली समाजजनों का आहार देने का सौभाग्य मिला। इस अवसर पर देवकृत रत्नवर्षा, पुष्पवर्षा, गंधोदक वृष्टि, शीतल मंद सुगंधित वायु प्रवाह, दुंदुभी बाजे पंचाश्चर्य होते हैं। इस अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि श्री चंद्रप्रभु भगवान को केवलज्ञान होने पर धर्म तीर्थ का प्रवर्तन स्थान-स्थान पर होने से समवशरण में धर्म देशना दी। भारत की अनेक नगरों में जिनालयों का निर्माण कर भगवान की प्रतिमा विराजित की जाती है। प्रतिमा और भगवान में यह अंतर है कि आचार्य साधु परमेष्ठी प्रतिष्ठाचार्य के माध्यम से प्रतिमा में भगवान के गुणों का आरोपण सूरी मंत्रोच्चार से देते हैं तब वह प्रतिमा भगवान बनकर पूजनीय हो जाती है। सौधर्म इंद्र और अन्य इंद्र परिवार ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में भाग लिया है। इंदौर जैसे महानगर में रहने वाले समर कंठाली छोटे से ग्राम के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा में सौधर्मइंद्र बने हैं। उनके साथ अनेक राज्यों, नगरों के भी इंद्र बने हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि आहार दान की पात्रता श्रेष्ठ पुण्यशाली मनुष्यों को होती है। देवताओं को आहार देने की पात्रता नहीं होती है। सौधर्म इंद्र रत्नों जड़ित भव्य समवशरण की रचना करेंगे। जिसमें महामुनि श्री चंद्रप्रभु दिव्य देशना से धर्म तीर्थ का प्रवर्तन करेंगे। मनुष्य जीवन में आपने कितना धर्म धारण कर पालन किया है। इसका स्वयं मूल्यांकन कीजिए। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने प्रवचन में पाटनी और कटारिया परिवार की देव शास्त्र और गुरुओं के प्रति चारों दान की प्रशंसा की।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95735" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251201-WA0015-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />आगामी 5 वर्षों में जैनेश्वरी दीक्षा का संकल्प लिया</strong></p>
<p>जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड़ सकता है। संसार में रह कर प्राणी संसार को तज सकता है। इन पंक्तियों को चरितार्थ किया सनावद मप्र के गुरु भक्त 56 वर्षीय अजय पंचोलिया ने। उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से वर्ष 2030 श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को श्रीफल भेंट कर दीक्षा लेने का संकल्प लिया। अजय गृहस्थ अवस्था के पिता मुनि चरित्र सागर जी के पुत्र, आर्यिका श्री महायश मति जी के चाचा और आर्यिका श्री निर्माेह मति जी के भाई हैं।</p>
<p><strong>समवशरण में आचार्य गणधर बने </strong></p>
<p>महामुनिराज श्री चंद्र प्रभु के दिव्य समवशरण में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने गणधर रूप में भगवान की दिव्य देशना प्रसारित कर सौधर्म, मुख्य श्रोता और श्रावक श्राविकाओं की अनेक जिज्ञासा का आगम सम्मत समाधान किया। महामुनि को मनपर्यय, ज्ञान दीक्षा लेते होता हैं। केवल ज्ञान होने पर 10 अतिशय के धारी होते हैं। बजरंगलाल एवं मनोज जैन सोगानी ने बताया कि श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के ज्ञान कल्याणक के चौथे दिन विमान शुद्धि कलश यात्रा निकाली गई। प्रतिष्ठाचार्य मनोजकुमार के निर्देशन में महायज्ञनायक दीपक प्रधान सहित सभी इंद्र द्वारा मंदिर वेदी वास्तु और हवन का आयोजन किया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ससंघ की मौजूदगी में केवलज्ञान संस्कार क्रिया, अधिवासना, मुखोद्घाटन, नयनोन्मिलन, सूरीमंत्र, गुणारोपण, केवल ज्ञान पूजा, हवन, पद्दोद्घाटन, समवसरण दर्शन और 46 दीप से आरती, दिव्य ध्वनि का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों जैन समाज के लोगों ने भगवान श्री चंद्रप्रभु एवं आचार्य श्री वर्धमानसागर महाराज के जयकारों से पांडाल को गूंजा दिया। आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में दीप प्रज्वलन और चित्र अनावरण तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ एवं राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद ने परिवार की। सांयकालीन आरती करने के सौभाग्यशाली परिवार के लोग वर्धमान सभागार पहुंचे। जहां पर श्रीजी की महाआरती की गई। शास्त्र सभा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए।</p>
<p><strong>2 दिसंबर को होगा मोक्ष कल्याणक</strong></p>
<p>श्री चंद्रप्रभु भगवान आयु के अंत में योग निरोध करते हैं। विहार और धर्म उपदेश बंद हो जाता है। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव अंतिम संस्कार करते हैं और मोक्ष कल्याणक का पूजन किया जाता है। इस प्रकार तीर्थंकर बालक के गर्भ में आते ही गर्भ सवाई माधोपुर, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक के रूप में पांच कल्याणक मनाए जाते हैं।</p>
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		<title>तीर्थंकर दीक्षा लेते ही मन पर्याय ज्ञान के धारी होते हैं : श्रीमदजिनेंद्र पंच कल्याणक के तृतीय दिवस दीक्षा तप कल्याणक मनाया </title>
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		<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 18:04:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है संसारी प्राणी की भांति जरा बुढ़ापा और मृत्यु नहीं होती वैराग्य दीक्षा तप से मोक्ष जाते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह बात कही। पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;. पीपल्दा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्रीमदजिनेंद्र पंच कल्याणक के तृतीय दिवस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है संसारी प्राणी की भांति जरा बुढ़ापा और मृत्यु नहीं होती वैराग्य दीक्षा तप से मोक्ष जाते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह बात कही। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्रीमदजिनेंद्र पंच कल्याणक के तृतीय दिवस दीक्षा तप कल्याणक मनाया गया धर्म सभा में आचार्य श्री ने बताया कि सभी को धर्म के प्रति अनुराग होना चाहिए। श्री आदिनाथ से लेकर श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों, महान आत्माओं ने धर्म के प्रति अनुराग रखकर मोक्ष प्राप्त किया। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री चंदनाथ महामुनिराज के तप कल्याणक के अवसर पर पीपल्दा की धर्म सभा में प्रगट की। उन्होंने कहा कि सभी को तीर्थंकरों की धर्मदेशना उपदेश से सृजित जिनवाणी को श्रवण कर, चिंतन, मनन ,और अनुसरण करने का पुरुषार्थ करना चाहिए भगवान की दिव्य ध्वनि से प्रसारित रत्नत्रय धर्म सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र को जीवन में धारण कर अभिन्न अंग बनाने से जीवन बनता है। धर्म के बिना जीवन अधूरा होता है। श्री चंद्रनाथ भगवान आठवें तीर्थंकर है। इन्होंने रत्नत्रय धर्म से परम पद को प्राप्त किया है। णमोकार मंत्र का जीवन में बहुत महत्व है। सभी को हर क्रिया में पंच परमेष्ठि का स्मरण करने से कष्ट, विपत्ति आपदा दूर होती है। पीपल्दा ग्राम में जिनालय विशाल मंदिर बनाने से यह शहर हो गया। तीर्थंकर का जन्म होता हैं किंतु जरा, बुढ़ापा और मरण नहीं होता। वह दीक्षा संयम वैराग्य धारण कर तप से उन्हें मोक्ष होता है।</p>
<p><strong>  राज्याभिषेक दीक्षा विधि संस्कार का भी मंचन </strong></p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से आयोजित श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक के वर्धमान सभागार में आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान के माता-पिता ने प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का राज्याभिषेक करवाया गया। बाद में वैराग्य दर्शन और गृह त्याग का मंचन किया गया। बजरंगलाल महाजन, मनोज जैन सोगानी ने बताया कि आचार्य श्री के सान्निध्य में दीक्षाविधि संस्कार, तप कल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया। दीक्षा के दौरान पांडाल में मौजूद हजारों जैन समाज के लोगों ने श्री चंद्र महामुनि एवं आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज के जयकारों से पंडाल जिनालय गुंजायमान किया। कार्यक्रम स्थल चंद्रपुरी नगरी में विभिन्न कार्यक्रम हुए। वर्धमान सभागार में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन , शास्त्र भेंट और पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य डॉ. अशोक बोली जयपुर, कमल बाबू जयपुर, प्रफुल्ल किशनगढ़ को मिला।</p>
<p><strong>1 दिसंबर को होगी केवल ज्ञान की क्रिया</strong></p>
<p>प्रातः अभिषेक पूजन आचार्य श्री के प्रवचन के बाद महामुनिराज की आहार चर्या, पंच आश्चर्य, विमान शुद्धि, मंदिर वेदी शुद्धि हवन के बाद दोपहर को केवल ज्ञान के संस्कार और भगवान को सूरी मंत्र दिए जाएंगे।समवशरण में आचार्य श्री की दिव्य देशना होगी। रात्रि में श्री जी और आचार्य श्री की आरती ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
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		<title>सूरी मंत्रोच्चार से प्रतिमाएं पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित कर पूजनीय होती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान के बारे में बताया  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 16:34:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>टोंक।</strong> भगवान के अभिषेक के बिना पूजन अधूरी होती है। आगम में पुरुष और महिला दोनों को अभिषेक का अधिकार है। श्रावकाचार ग्रंथ पुरुष और महिला दोनों के लिए एक जैसा है। आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि धर्म से नाता, अवलंबन से मनुष्य जीवन में उन्नति होती है। श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान आदि श्रावकों के मुख्य कर्तव्यों में है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में आगे बताया कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ टोंक नगर में चातुर्मास किया था। बाद में पंचकल्याणक हुआ था। इसकी सुखद पुनरावृत्ति सन 2025 में हो रही है। पहले यहां वर्षायोग किया इसके बाद नवंबर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होगी।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं </strong></p>
<p>जैन समाज द्वारा जिन मंदिर में नूतन प्रतिमा स्थापित करने के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य भगवान के सानिध्य में सूरी मंत्रोच्चार के माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा कराई जाती है। इन धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण मनोभाव से करने और देखने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। इन पांच दिवसीय कार्यक्रम में भगवान के जन्म, गर्भकल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक की धार्मिक क्रियाएं होती है। जिसमें ज्ञान और मोक्ष कल्याणक पर भगवान को सूरी मंत्र द्वारा प्रतिष्ठित किया जाता है। णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं साधु, उपाध्याय, आचार्य, अरिहंत और सिद्ध भगवान जो वैराग्य धारण कर तप संयम से कर्मों की क्षय निर्जरा करते हुए सिद्धालय पर विराजित होते हैं।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92413" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg" alt="" width="1200" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg 1200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-990x1320.jpg 990w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन </strong></p>
<p>सुनील सराफ, पवन कंटान के अनुसार अनुसार आदिनाथ जिनालय से श्री शांतिनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगह-जगह समाजजनों ने आचार्य श्री की आरती कर चरण प्रक्षालन किए। विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल रस, विभिन्न फलों के रस, शर्करा, धी, दूध, दही, सर्व औषधि; केशर लाल चंदन सफेद चंदन पुष्प हल्दी,सुगंधित जल आदि से किया। श्रीजी की शांतिधारा हुई। आचार्य श्री संघ सानिध्य में होने वाले पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन समाज के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री सानिध्य में किया। सोमवार को आर्यिका श्री महायश मति जी के केश लोचन हुए।</p>
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