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	<title>दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र ऊन तीर्थ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र ऊन तीर्थ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान की तीन श्राविकाएं शील्ड से होंगी सम्मानित : जिनवाणी के सेवा अभियान में अनुपम सहयोग किया प्रदान  </title>
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		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 06:17:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान के तहत देश व देशांतर की 4 हजार संयोजिका एवं संयोजकों को सम्मिलित कर दिगंबर जैन मंदिर जी तथा अतिशय क्षेत्र आदि में माँ जिनवाणी को सुरक्षित , सज्जित एवं व्यवस्थित कर सातिशय पुण्य का अर्जन कर रहे हैं। सहारनपुर से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230; सहारनपुर (उतरप्रदेश)। जिनवाणी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान के तहत देश व देशांतर की 4 हजार संयोजिका एवं संयोजकों को सम्मिलित कर दिगंबर जैन मंदिर जी तथा अतिशय क्षेत्र आदि में माँ जिनवाणी को सुरक्षित , सज्जित एवं व्यवस्थित कर सातिशय पुण्य का अर्जन कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर (उतरप्रदेश)</strong>। जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान के तहत देश व देशांतर की 4 हजार संयोजिका एवं संयोजकों को सम्मिलित कर दिगंबर जैन मंदिर जी तथा अतिशय क्षेत्र आदि में माँ जिनवाणी को सुरक्षित , सज्जित एवं व्यवस्थित कर सातिशय पुण्य का अर्जन कर रहे हैं। इस अभियान में 288 श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, तीर्थ क्षेत्र व अतिशय क्षेत्र तथा 24 प्रदेशों के दिगंबर जिनालय समाहित हो चुके हैं। पारस जैन पार्श्वमणि कोटा ने बताया कि वर्ष 2025 में भी 439 नई संयोजिका जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान में मनोनीत हुईं । वर्ष 2025 में सबसे अधिक संयोजिकाएं बनाने वाली प्रथम विजेता मप्र की क्षेत्रीय संयोजिका संगीता सिंघई सिहोरा जबलपुर ने 79 संयोजिका मनोनीत की। द्वितीय विजेता के रूप में मप्र दमोह की मुख्य संयोजिका मीना जैन सेठ, पटेरा ने 59 संयोजिका के संपर्क सूत्र प्रदान किए तथा तृतीय विजेता मप्र छतरपुर की मुख्य संयोजिका शोभा जैन ने 47 संयोजिका बनाकर माँ जिनवाणी के सेवा अभियान में अनुपम सहयोग प्रदान किया। सबसे अधिक संयोजिका बनाने वाली तीनों विजेताओं को श्रुत पंचमी पर्व पर आयोजित अखिल भारतीय जिनवाणी सज्जा प्रतियोगिता की। 15 विजेता बहनों के साथ ही प्रतिवर्ष की भांति भूषण स्वरूप मुकेश कुमार जैन चैरिटेबल ट्रस्ट मेरठ के सौजन्य से शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2025 में102 संयोजिकाओं के अतुलनीय सहयोग से भी 439 संयोजिका बनाने में सफलता प्राप्त हुई ।</p>
<p>उन सभी पुण्यात्माओं को भी श्रुत संवर्धन के प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। यदि माँ जिनवाणी के सेवा कार्य में सभी का इसी प्रकार अविस्मरणीय सहयोग प्राप्त होता रहा तो वह दिन दूर नही जब भारतवर्ष एवं विदेश का प्रत्येक दिगंबर जिनालय इस जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान में सम्मिलित होगा तथा प्रत्येक जिनालय की माँ जिनवाणी सुरक्षित, सज्जित तथा व्यवस्थित होगी। आप भी माँ जिनवाणी के प्रति सेवा भावना से अभिभूत होकर शेष दिगंबर जिनालयों और क्षेत्र की संयोजिका बनकर अथवा बनवाकर सातिशय महान पुण्य का अर्जन करें।यह जानकारी डॉ. रेणु जैन ने जानकारी दी।</p>
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		<title>भरत कुसुम मोदी आहार कक्ष यात्री निवास का हुआ शिलान्यास: आर्यिका विदूषी श्री ससंघ का मिला सानिध्य  </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 13:07:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका विदुषी श्री माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में मांगलिक मंत्रोच्चार और क्रियाओं के बीच भूमि पूजन एवं शिलान्यास हुआ। दानवीर सेठ भरत कुसुम मोदी द्वारा पंडित मौसम शास्त्री के मुखारबिंद से यह कार्य संपन्न किया। धामनोद से दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। विश्व के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी जो कई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका विदुषी श्री माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में मांगलिक मंत्रोच्चार और क्रियाओं के बीच भूमि पूजन एवं शिलान्यास हुआ। दानवीर सेठ भरत कुसुम मोदी द्वारा पंडित मौसम शास्त्री के मुखारबिंद से यह कार्य संपन्न किया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> विश्व के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी जो कई साधु संतों की तपस्थली है और कई मुनियों की और सिद्धों की मोक्ष स्थली है। जहां से इंद्रजीत कुंभकर्ण और कई करोड़ों मुनियों ने तपस्या कर के मोक्ष को प्राप्त किया। ऐसी तप स्थली पर गुरुवार को गणचार्य विराग सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका विदुषी श्री माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में मांगलिक मंत्रोच्चार और क्रियाओं के बीच भूमि पूजन एवं शिलान्यास हुआ। कई संस्थाओं के संरक्षक देव शास्त्र गुरु भक्त तीर्थ रक्षा, संरक्षण, संवर्धन के लिए हमेशा तत्पर दानवीर सेठ भरत कुसुम मोदी द्वारा पंडित मौसम शास्त्री के मुखारबिंद से यह कार्य संपन्न किया। अतिथियों का सम्मान कार्यक्रम ट्रस्ट कमेटी द्वारा किया गया। जिसमें आर्यिका संघ को मंचासीन किया गया तथा हरसुख दिगंबर जैन छात्रावास के बच्चों द्वारा संगीतमय मंगलाचरण किया गया। अतिथि भरत कुसुम मोदी एवं अन्य अतिथियों द्वारा भगवान आदिनाथ, आचार्य विराग सागर जी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया। मास्टर मोक्ष द्वारा ये कार्य मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न करवाया। अतिथियों का सम्मान माला पचरंग के अंग वस्त्र तिलक लगाकर ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी और ट्रस्ट सदस्यों ने किया। विनोद दोशी ने बताया कि 2008 में जो मेला संपन्न हुआ तब भी मूर्ति का जीर्णाेद्धार भरत कुसुम मोदी द्वारा ही करवाया गया था।</p>
<p><strong>इन्होंने किया कार्यक्रम में सहयोग </strong></p>
<p>इस अवसर पर इंदौर से संजय पाटोदी, अशोक पाटोदी, अशोक चौधरी, राहुल सेठी भी साथ पधारे। सभा का संचालन एवं अतिथि परिचय विपुल गंगवाल ने दिया और स्वागत भाषण ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद दोशी ने प्रस्तुत किया और मोदी द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए कृतज्ञता ज्ञापित की गई। नरेश पहाड़िया सुसारी द्वारा अतिथि सम्मान में कविता पढ़ी गई। इस अवसर पर मोदी के साथ पधारे संजय पाटोदी और अशोक पाटोदी इंदौर द्वारा भरत कुसुम द्वारा तीर्थ रक्षा, तीर्थ उद्धार, जिन शासन की रक्षा के लिए दिए गए योगदान को रेखांकित किया गया और उनकी सहृदयता सरलता, प्रेम, वात्सल्य और सहयोग के बारे में उपस्थित समुदाय को अवगत करवाया गया।</p>
<p><strong>मोदी ने दिया सहयोग का आश्वासन </strong></p>
<p>इस अवसर पर भरत कुसुम मोदी ने अति संक्षिप्त में आहार कक्ष और यात्री निवास के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की। साथ ही विश्व की अद्वितीय सबसे प्राचीन 84 फिट उत्तुंग भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के जीर्णाेद्धार के लिए भी स्वीकृति प्रदान की और ट्रस्ट कमेटी को निर्देशित किया कि ये काम शीघ्र करवाओ ताकि शीघ्रता से पंच कल्याणक एवं महा मस्तकाभिषेक हो सके। मोदी को सभी ट्रस्टियों ने अभिनंदन पत्र प्रदान किया। जिसका वाचन ट्रस्टी निलेश रावका ने किया।</p>
<p><strong>  आर्यिका विदुषी श्री माताजी ने की अनुमोदना </strong></p>
<p>इस अवसर के लिए आज प्रातः आर्यिका विदुषी श्री माताजी का संघ सहित मंगल प्रवेश हुआ और अपने उद्बोधन में पूरी ट्रस्ट कमेटी को आशीर्वाद दिया। साथ ही भरत कुसुम मोदी के इस पुनीत कार्य की खूब अनुमोदना सराहना कर खूब आशीर्वाद दिया। साथ ही आगे भी इसी तरह देव, शास्त्र,गुरु के लिए सहयोग के लिए कहा गया। साथ ही वी माताजी ने हिदायत भी दी कि किसी भी तीर्थ को पंथ वाद और संत वाद में मत बांटना और आप यह पुण्य कार्य यह दान और उत्कृष्ट कार्य पिछले पुण्य से कर रहे हो। अतः इस जीवन में ये पुण्य कार्य करोगे तो अगले भव में सुखों को प्राप्त करोगे।</p>
<p><strong>धर्म की प्रभावना कर खूब सेवा करें</strong></p>
<p>माताजी ने चिड़िया के आग बुझाने वाला दृष्टांत देते हुए बताया। चिड़िया ने बोला कि जब भी इतिहास लिखा जाएगा मेरा नाम आग बुझाने वालों में लिखा जाएगा। अतः आप अच्छे कार्य करने वालो में अपना नाम दर्ज करवाए और संत वाद पंथ वाद से खुद भी दूर रहें और तीर्थ क्षेत्र को भी दूर रखें।,तीर्थ कमेटी दान लेते वक्त पंथ नहीं पूछते और साधु संत आते हैं तब पंथ और संत वाद करते हो। हमंे समाज को जोड़ना हैं। आप खूब क्षेत्र पर विकास कार्य करे और धर्म की प्रभावना कर खूब सेवा करें आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर ट्रस्ट कमेटी के जितेंद्र गोधा, मनोज गोधा, अंजड़, नरेंद्र भाई धामनोद ,संजय भाई, धामनोद, चक्रेश पहाड़िया, जिनेंद्र दोषी बड़वानी समाज अध्यक्ष, अशोक दोशी बड़वानी, निमाड़ मालवा के श्रावक श्राविकाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। आभार ट्रस्टी धर्मेंद्र जैन अंजड़ ने माना। यह जानकारी मीडिया प्रभारी मनीष जैन ने प्रदान की।</p>
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		<title>आहार कक्ष यात्री निवास का शिलान्यास 20 नवंबर को: भामाशाह भरत कुसुम मोदी के आतिथ्य में होगा भूमिपूजन समारोह  </title>
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		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 10:10:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बावनगजा में आर्यिका विदुषी श्री माताजी और संघस्थ 4 माताजी के सान्निध्य में भामाशाह भरत कुसुम मोदी आहार कक्ष और यात्री निवास का शिलान्यास कर भूमि पूजन करेंगे। यह आयोजन 20 नवंबर को होगा। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान और मनीष जैन की यह खबर&#8230; धामनोद। विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बावनगजा में आर्यिका विदुषी श्री माताजी और संघस्थ 4 माताजी के सान्निध्य में भामाशाह भरत कुसुम मोदी आहार कक्ष और यात्री निवास का शिलान्यास कर भूमि पूजन करेंगे। यह आयोजन 20 नवंबर को होगा। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान और मनीष जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में 20 नवंबर को गणाचार्य विरागसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका विदुषी श्री माताजी और संघस्थ 4 माताजी के सान्निध्य में दानवीर सेठ भामाशाह भरत कुसुम मोदी द्वारा आहार कक्ष और यात्री निवास का शिलान्यास कर भूमि पूजन किया जाएगा। इस अवसर पर सुबह 7 बजे भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, 9 बजे आर्यिका संघ की आहारचर्या, 10.30 बजे सम्मान समारोह तथा 11.45 पर शिलान्यास एवं भूमि पूजन होगा।</p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य भूमिका संजय पाटोदी, अशोक दोशी, ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी, निलेश रावका, धर्मेंद्र जैन की रही। ट्रस्ट कमेटी ने समाज के सभी सदस्यों से इसमें शामिल होने की अपील की है। बाहर से आए अतिथियों का वात्सल्य भोज ट्रस्ट कमेटी की ओर से रखा गया है।</p>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में पर्वराज पर्युषण पर भक्ति भाव से हुए धार्मिक अनुष्ठान : आर्यिका आगममति जी का मिल रहा सानिध्य   </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 13:12:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म की पूजन, विधान किया गया। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान धामनोद की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>बड़वानी।</strong> जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म की पूजन, विधान किया गया। साथ ही क्षेत्र पर विराजित आर्यिका आगममति जी माताजी के मुखारबिंद से शांतिधारा और पूजन विधान हुआ। माताजी ने आर्जव धर्म के बारे में बताया और दोपहर में तत्व चर्चा, शाम को ध्यान, प्रतिक्रमण, आरती, प्रवचन और धार्मिक गतिविधियां हुई। माताजी ने बताया कि उत्तम मार्दव धर्म जैन धर्म के दस धर्मों में से एक प्रमुख धर्म है, जो आत्मा की शुद्धि और अहिंसक जीवनशैली का आधार है। मार्दव का अर्थ है कोमलता, विनम्रता और अहंकार का पूर्ण त्याग। यह धर्म व्यक्ति को मन, वचन और कर्म में नम्रता अपनाने की प्रेरणा देता है। जिससे वह स्वयं और दूसरों को श्रेष्ठ या हीन मानने की भावना से मुक्त हो जाता है। यह आत्मिक उन्नति और सामाजिक समरसता का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>
<p><strong>जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता वह मार्दव धर्म का सच्चा अनुयायी</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि मार्दव धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति अभिमान, क्रोध, ईर्ष्या और घमंड जैसे मानसिक दोषों को नियंत्रित करता है। वह सभी प्राणियों के प्रति करुणा, समानता और दया का भाव रखता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति दूसरों की भूलों को क्षमा करता है और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता, तो वह मार्दव धर्म का सच्चा अनुयायी है। उन्होंने कहा कि यह धर्म सिखाता है कि अहंकार आत्मा को बंधन में डालता है, जबकि विनम्रता उसे मुक्ति की ओर ले जाती है। मार्दव धर्म का अभ्यास आत्म-निरीक्षण, ध्यान और दूसरों के प्रति सहानुभूति के माध्यम से किया जा सकता है। यह व्यक्ति को न केवल आंतरिक शांति प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक संबंधों में भी प्रेम और विश्वास को बढ़ावा देता है। जैन ग्रंथों में इसे आत्मा की शुद्धि का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। इस प्रकार, उत्तम मार्दव धर्म व्यक्ति को नम्र, दयालु और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जो आत्मिक और सामाजिक उन्नति का आधार है। यह जानकारी मनीष जैन ने प्रदान की।</p>
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		<title>पावागिरी ऊन में पंच कल्याणक महोत्सव में जन्म कल्याणक मनाया: आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि नवीनता ही आनंद है </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 13:11:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और ंतीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। गुरुवार को दीक्षाएं होंगी। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और ंतीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। गुरुवार को दीक्षाएं होंगी। <span style="color: #ff0000">ऊन खरगोन से दीपक प्रधान की यह खबर पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
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<p>ऊन (खरगोन)। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और तीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। कुबेर ने रत्नों की वृष्टि की। प्रातः आचार्य संघ तलहटी मंदिर के दर्शन कर बैंडबाजों के साथ मंचासीन हुए। आर्यिका विशिष्टमति जी माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया और आचार्य श्री विराग सागर जी को याद करते हुए भाव विह्वल हो गईं। होने वाले आचार्य के पट्टशिष्य आचार्य श्री से निवेदन किया कि हमें और हमारे पूरे संघ को अब आप ही संभालना। आप ही सिखाना। अब आप ही हमारे गुरु, हमारे पिता ,हमारी माता आप ही हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि मुनि राज क्यों मुस्कुराते हैं ? आचार्य श्री ने बताया के मुनि इस लिए मुस्कुराते है कि वो रोज नवीनता लिए होते हैं। रोज नया प्राप्त करते है मुनिराज को रोज नया घर, नया मोहल्ला, नया नगर, नया श्रावक मिलता है जो कि आहार, निहार, विहार करवाता है। अतः नवीनता ही आनंद है। पुराना उनको देखना अच्छा नहीं लगता जो नवीन को देखना ही नहीं चाहते। नया तो नया ही है।</p>
<p><strong>सब्जी, दाल नहीं तो पानी से ही रोटी खा लेना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने आगे कहा कि आपको अपने जीवन में भोजन में भी रोटी अवश्य खाना ही चाहिए और साधु को तो कम से कम छः रोटी खाना चाहिए। सब्जी, दाल नहीं तो पानी से ही रोटी खा लेना। यदि आप फलों और रसों पर रहोगे तो गोली खाना ही पड़ेगी। आपको बल भोजन से ही मिलेगा और रोटी का अभिप्राय समझिए भोजन सिर्फ बल देता है और आप आत्मा के आश्रित वीर हो ,और यदि वीर नहीं हो तो बल कुछ नहीं कर सकता ,जिन शासन के श्रावक को अपने जिन शासन के मौसम का त्याग नहीं करना चाहिए ।आप में यदि उत्साह शक्ति नहीं है तो हम भगवान केसे बन सकते है ,आगे बताया कि इस पंच कल्याणक कार्यक्रम को प्रतिष्ठाचार्य सम्पन्न कराता है और कब किस वस्तु की आवश्यकता है वो प्रतिष्ठाचार्य ही व्यवस्था करवाता है अतः प्रतिष्ठाचार्य को समीकदृष्टि होना चाहिए इस कार्यक्रम में नमक की डली से लेकर सांप की बामी की मिट्टी अन्य मिट्टी वनस्पति, औषधि आदि लगती है। याने किसी भी चीज का अभिप्राय आने से वस्तु बदल जाती है जैसे खेत की मिट्टी को देख कर कुंभकार, किसान,वैद्य,हाकिम, व्यापारी की दृष्टि बदल जाती है।</p>
<p><strong>विधायक ने श्रीफल किया भेंट </strong></p>
<p>ट्रस्ट के प्रचार मंत्री आशीष जैन एवं मनीष दोषी ने बताया कि आज आचार्य के दर्शनार्थ पंधाना विधायक छाया मोरे और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तोताराम महाजन ने श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। ट्रस्ट कमेटी ने अतिथियों का सम्मान किया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन अर्पित अशोक कासलीवाल ने किया जबकि जन्मभिषेक का प्रथम अभिषेक हेमचंद झंझरी इंदौर ने किया। पश्चात सौधर्म इंद्र शची इंद्राणी अशोक चंदा झांझरी और अन्य इंद्र कुबेर और श्रावक श्राविकाओं ने तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक पर विशाल शोभा यात्रा निकाली जो कि पांडुक शीला पर तीर्थंकर बालक के जन्माभिषेक किए और खूब आनंद भक्ति उल्लास के साथ नृत्य कर के चल रहे थे। मुनि संघ की आहार चर्या के बाद दोपहर को बाल क्रीड़ा, दीक्षार्थी की मेंहदी, गोद भराई हुई, तीर्थंकर बालक को पालने में झुलाने का कार्यक्रम आरती हुई।</p>
<p><strong>दो दीक्षाएं संपन्न होगी</strong></p>
<p>गणिनी आर्यिका विशिष्ट मति माताजी एवं आचार्य श्री के सानिध्य में जयश्री दीदी छतरपुर एवं क्षुल्लिका विपथ श्री माताजी की दीक्षा संस्कार विधि दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। सुबह केशलोच क्रिया होगी। गुरुवार को दीक्षा कल्याण के अंतर्गत सुबह अन्नप्राशन विधि, तीर्थंकर बाल क्रीड़ा, दोपहर में विवाह ,राज दरबार 32 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट, राज्याभिषेक, नीलांजना का नृत्य वैराग्य एवं दीक्षा कल्याणक की समस्त क्रियाएं होंगी।</p>
<p><strong>दीक्षार्थीयो का परिचय</strong></p>
<p>1- पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत पावागिरी ऊन के इतिहास में पहली बार महावीर जयंती के दिन हो रही भव्य जैनेश्वरी दीक्षा ले रही दीक्षार्थी जयश्री दीदी का अदभुत संयोग है कि उनका जन्म 60 वर्ष पूर्व महावीर जयंती के दिन हुआ था और महावीर स्वामी के दरबार में महावीर जयंती के दिन ही जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा होने जा रही है। संपन्न परिवार से संबंध रखने वाली दीदी का भरा पूरा परिवार है। तीन बच्चों की मां होने के बाद अपने गृहस्थ परिवार का पालन करने के बाद संसार की असारता को देखते हुए 2014 में आचार्य विराग सागर जी से व्रत प्रतिमा के नियम ले लिए। तब ही से निरंतर वैराग्य पथ पर अग्रसर होती जा रही हैं। विशेष बात यह है कि जयश्री दीदी तीन बार भाजपा की जिला महामंत्री पद पर रह चुकी हैं। साथ ही नगर पालिका छतरपुर की पार्षद रहने के साथ ही खजुराहो जैन समाज की मंत्री भी रह चुकी हैं। इतने सब पदों पर रहकर भी भरा पूरा परिवार छोड़कर दीक्षा की राह अपना रही हैं।</p>
<p>2- दूसरी दीक्षार्थी क्षुल्लिका विपथ श्री माताजी का गृहस्थ नाम पुष्पा जैन था। यह बृजपुर जिला पन्ना की रहने वाली हैं। मात्र 5 वीं तक शिक्षा प्राप्त क्षुल्लिका के पति भी संघ में क्षुल्लक विश्वतीर्ण सागरजी के नाम से साधनारत हैं।सात भाई बहन एवं दो पुत्रों को छोड़कर 2013 में विराग सागर जी से वीरागोदय क्षेत्र में क्षुल्लिका दीक्षा 13 फरवरी को हुई थी, ऐसी दीक्षार्थी को क्षुल्लिका से आर्यिका दीक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
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		<title>जैन तीर्थ ऊन के कार्याध्यक्ष बने हंसमुख गांधी: विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों की संस्थाओं के सक्रिय पदाधिकारी है हंसमुख गांधी </title>
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		<pubDate>Sat, 27 Apr 2024 15:45:09 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज के राष्ट्रीय नेता एवं कई धार्मिक, सामाजिक एवं विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों की संस्थाओं के सक्रिय पदाधिकारी हंसमुख जैन गांधी इंदौर, दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र ऊन तीर्थ के कार्याध्यक्ष मनोनीत हुए।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट ………. </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर ।</strong>दिगंबर जैन समाज के राष्ट्रीय नेता एवं कई धार्मिक, सामाजिक एवं विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों की संस्थाओं के सक्रिय पदाधिकारी हंसमुख जैन गांधी इंदौर, दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र ऊन तीर्थ के कार्याध्यक्ष मनोनीत हुए। इस मनोनयन पर दिगंबर जैन समाज के राजकुमार पाटौदी, अमित कासलीवाल, हेमचंद झांझरी , आजाद जैन,सुशील पांड्या ,राकेश विनायका, अशोक खासगीवाला ,टी के वेद, डॉ अनुपम जैन, विपिन गांधी, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, राजेश जैन दद्दू, राजीव जैन आदि ने गांधी को बधाई दी।</p>
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