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	<title>दिगंबर जैन धर्मशाला &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का नहीं बल्कि चरित्र संस्कार का माध्यम : आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी का हुआ केशलोचन  </title>
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		<pubDate>Fri, 29 May 2026 09:36:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन धर्मशाला में प्रवचन करते हुए शुक्रवार को आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महा मुनिराज ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और आत्म संयम से ही जीवन का वास्तविक विकास है। महाराज श्री ने कहा कि आज के आधुनिक युग में शिक्षा को जीवन की सफलता का प्रमुख आधार माना जाता है। शामली से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन धर्मशाला में प्रवचन करते हुए शुक्रवार को आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महा मुनिराज ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और आत्म संयम से ही जीवन का वास्तविक विकास है। महाराज श्री ने कहा कि आज के आधुनिक युग में शिक्षा को जीवन की सफलता का प्रमुख आधार माना जाता है। <span style="color: #ff0000">शामली से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>शामली।</strong> दिगंबर जैन धर्मशाला में प्रवचन करते हुए शुक्रवार को आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महा मुनिराज ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और आत्म संयम से ही जीवन का वास्तविक विकास है। महाराज श्री ने कहा कि आज के आधुनिक युग में शिक्षा को जीवन की सफलता का प्रमुख आधार माना जाता है। प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चे शिक्षित होकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व का भी निर्माण करती है। इसलिए बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर देकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना समय की आवश्यकता है। प्राचीन काल में शिक्षा प्राप्त करना सरल नहीं था। विद्यार्थियों को घर-परिवार से दूर रहकर अध्ययन करना पड़ता था। उस समय शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिकता और जीवन मूल्यों पर विशेष बल दिया जाता था। यही कारण था कि शिक्षा व्यक्ति को केवल विद्वान ही नहीं, बल्कि संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक भी बनाती थी। मनुष्य का जीवन उसकी संगति, विचारों और व्यवहार से प्रभावित होता है। अच्छी संगति व्यक्ति को उन्नति के मार्ग पर ले जाती है जबकि, गलत संगति उसे पतन की ओर धकेल सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को विवेकपूर्ण जीवन जीते हुए अच्छे विचारों और श्रेष्ठ व्यक्तियों का साथ ग्रहण करना चाहिए। महाराज श्री ने कहा प्रेम, विश्वास और आपसी समझ से ही परिवार तथा समाज में सद्भाव बना रहता है। भारतीय संस्कृति का मूल आधार शुद्ध विचार, संयम और सदाचार है। संस्कृति केवल बाहरी परंपराओं का पालन करने का नाम नहीं, बल्कि जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने का नाम है। जब मनुष्य अपने विचारों को पवित्र बनाता है, तब उसका जीवन भी श्रेष्ठ बनता है। संसार की भौतिक वस्तुएं क्षणिक हैं जबकि, आत्मिक उन्नति और चरित्र की संपदा स्थायी होती है।</p>
<p><strong>जीवन में सफलता और शांति का आधार मन पर नियंत्रण </strong></p>
<p>महाराज श्री ने जीवन की सफलता के विषय में बताया और कहा कि</p>
<p>जीवन में सफलता और शांति का सबसे महत्वपूर्ण आधार मन पर नियंत्रण है। मनुष्य के सुख-दुःख का कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि उसका मन है। यदि मन संयमित और सकारात्मक हो तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति संतुलित रह सकता है। धार्मिक स्थल, सत्संग और गुरुजनों का सान्निध्य मन को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा के साथ संस्कार, आत्मचिंतन, संयम और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया जाए। जब शिक्षा, संस्कृति और आत्मसंयम का समन्वय होगा, तभी व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।</p>
<p><strong>महाराज श्री ने किया केशलोच </strong></p>
<p>शुक्रवार प्रातः कालीन बेला में आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कर्मांे की निर्जरा के लिए अपना स्वयं केशलोच किया। गुरुवार शाम शामली के भक्तों को सरूरपुर में होने वाले पंच कल्याणक में भगवान के माता-पिता बने पात्रों की गोद भराई करने का अवसर प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>आत्म साधना में गुरुओं का उपदेश, ध्यान, साधना आवश्यक : आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने धर्मसभा में जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से परिचित करवाया  </title>
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		<pubDate>Wed, 27 May 2026 13:20:48 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन धर्मशाला, शामली उप्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध स्वरूप माना गया है। यही आत्म स्वरूप व्यक्ति को जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगंबर जैन धर्मशाला, शामली उप्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध स्वरूप माना गया है। यही आत्म स्वरूप व्यक्ति को जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है। इसकी प्राप्ति सहज नहीं होती, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आत्मिक कल्याण और उन्नति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। गुरुजनों के उपदेश, साधना और ध्यान इस मार्ग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोई भी व्यक्ति जन्म से पूर्ण ज्ञान लेकर नहीं आता, बल्कि निरंतर अभ्यास और प्रयास के माध्यम से अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। मनुष्य सदैव सुख चाहता है और दुःख से दूर रहना चाहता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक योजनाएं बनाता है तथा सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने का प्रयास करता है लेकिन, कई बार मनुष्य यह चाहता है कि वह पाप कर्मों से जुड़ा रहे और उसे पुण्य का फल प्राप्त होता रहे, जबकि प्रकृति का नियम स्पष्ट है कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है। श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ किए गए कार्य व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।</p>
<p><strong>शुभ कर्म सुख और शांति देते हैं</strong></p>
<p>ध्यान का जीवन में विशेष महत्व है। व्यक्ति को अपने प्रत्येक कर्म के प्रति जागरूक रहना चाहिए, क्योंकि जो भी कर्म किए जाते हैं। उनका परिणाम अवश्य प्राप्त होता है। यदि हम हिंसा, झूठ, चोरी या अन्य अनुचित कार्य करते हैं तो उनके परिणाम भी हमें ही भोगने पड़ते हैं। शुभ कर्म सुख और शांति देते हैं, जबकि अशुभ कर्म दुःख और कष्ट का कारण बनते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन में अशुभ कर्मों को कम करने और शुभ कर्मों को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में किसी भी कार्य को करने से पहले सोच-विचार आवश्यक है। बिना विचार के किए गए कार्य कई बार समस्याओं और दुःख का कारण बन जाते हैं। अच्छे विचार, श्रेष्ठ आचरण और सत्कर्म ही जीवन को महान बनाते हैं। आज के समय में यह भी आवश्यक है कि व्यक्ति स्वयं विचार करे कि वह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। आधुनिक जीवन में लोग अपने मूल्यों और आत्मिक चेतना से दूर होकर मोबाइल तथा भौतिक आकर्षणों में अधिक उलझते जा रहे हैं। इसलिए जीवन में संतुलन, संयम और आत्मचिंतन को अपनाकर ही वास्तविक सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है।</p>
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		<title>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप की नई कार्यकारिणी घोषित: सर्वानुमति से संतोष जैन बने अध्यक्ष </title>
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		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 12:44:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परेड चौराहा स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक रखी गई। जिसमें ग्रुप की नई कार्यकारिणी वर्ष 2026 का सर्वानुमति से गठन किया गया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230; अंबाह। परेड चौराहा स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक रखी गई। जिसमें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>परेड चौराहा स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक रखी गई। जिसमें ग्रुप की नई कार्यकारिणी वर्ष 2026 का सर्वानुमति से गठन किया गया। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> परेड चौराहा स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक रखी गई। जिसमें ग्रुप की नई कार्यकारिणी वर्ष 2026 का सर्वानुमति से गठन किया गया। बैठक में ग्रुप के सभी सदस्यों की उपस्थिति रही और लोकतांत्रिक एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ सदस्य संजीव जैन ‘बिल्लू’ ने की, जबकि प्रमुख रूप से महेश जैन (एमपीईबी) एवं संस्थापक अध्यक्ष सुशील जैन एवं पूर्व अध्यक्ष ओपी जैन उपस्थित रहे। महेश जैन ने अध्यक्ष पद के लिए संतोष जैन रिठौना का नाम प्रस्तावित किया, जिसे उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। इसके बाद अन्य पदाधिकारियों का चयन भी आम सहमति से किया गया।</p>
<p><strong>यह है नई कार्यकारिणी </strong></p>
<p>नवीन कार्यकारिणी में अध्यक्ष संतोष जैन, महामंत्री विकास जैन पांडे, कोषाध्यक्ष नितिन जैन ‘लवली’, कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र जैन पटेल, उपाध्यक्ष मनोज जैन, कुलदीप जैन, राजकुमार जैन (चक्की वाले), मनीष जैन, सांस्कृतिक मंत्री श्रेयांस जैन, आकाश जैन, मीडिया प्रभारी कपिल जैन केपी, मंत्री संदीप जैन (चक्की वाले), पत्रकार पंकज जैन एवं ऑडिटर आकाश जैन पांडे, प्रचार मंत्री मोंटी जैन (लोहे वाले) को नियुक्त किया गया।</p>
<p><strong>भरोसा है नई कार्यकारिणी परंपरा को आगे बढ़ाएगी </strong></p>
<p>इस दौरान पूर्व अध्यक्ष अमित जैन टकसारी ने कहा कि दिगंबर जैन सोशल ग्रुप केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और समाजहित का मंच है। उन्होंने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि समूह ने स्वास्थ्य शिविर, सिविल अस्पताल में फल वितरण, भक्तामर पाठ, प्रतिभा सम्मान समारोह और समाज रत्न समारोहो जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाजसेवा की मजबूत परंपरा स्थापित की है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कार्यकारिणी इस परंपरा को और आगे बढ़ाएगी और युवाओं को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी।</p>
<p><strong>संगठन को समाजोन्मुखी बनाया जाएगा: संतोष जैन </strong></p>
<p>नव नियुक्त अध्यक्ष संतोष जैन ने सभी सदस्यों और वरिष्ठ समाजसेवियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दायित्व उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। संतोष जैन ने स्पष्ट किया कि संगठन को और अधिक सक्रिय, पारदर्शी और समाजोन्मुखी बनाया जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा सहभागिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को साथ लेकर समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जाएगा और प्रत्येक कार्यक्रम को योजना बद्ध एवं प्रभावी ढंग से संपन्न कराया जाएगा।</p>
<p><strong>सभी पदाधिकारियों का स्वागत समारोह हुआ </strong></p>
<p>बैठक के दौरान उपस्थित सदस्यों ने नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी और संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया। बैठक का समापन सामूहिक धन्यवाद ज्ञापन एवं सभी पदाधिकारियों का स्वागत समारोह के साथ हुआ। वरिष्ठ सदस्य, गणमान्य नागरिक और समाजसेवी सभी ने नई कार्यकारिणी को सफल बनाने और समूह के समाजहित कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता जताई। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप की यह नई कार्यकारिणी निश्चित रूप से संगठन को नई दिशा, युवा ऊर्जा और समाजसेवा के नए आयाम प्रदान करेगी।</p>
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