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	<title>दशलक्षण व्रत &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जयपुर में रविवार को दशलक्षण व्रत तपस्वियों का अभिनंदन : त्यागी व्रतियों का जुलूस निकाला जाएगा, अनुमोदना और सम्मान समारोह होगा  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 14:04:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान जैन सभा जयपुर के तत्वावधान में गुलाबी नगरी जयपुर के रामलीला मैदान में रविवार को शहर सहित जहां-जहां शाखा है वहां भाद्रपद मास में एक माह, 16 दिवस, दस उपवास कर धर्म प्रभावना-आराधना में अपनी महत्वपूर्ण योगदान देने वाले यशस्वी श्रावक-श्राविकाओं और तपस्वियों का आचार्य, मुनिराज, आर्यिका, माताजी के पावन सानिध्य में अभिनंदन किया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजस्थान जैन सभा जयपुर के तत्वावधान में गुलाबी नगरी जयपुर के रामलीला मैदान में रविवार को शहर सहित जहां-जहां शाखा है वहां भाद्रपद मास में एक माह, 16 दिवस, दस उपवास कर धर्म प्रभावना-आराधना में अपनी महत्वपूर्ण योगदान देने वाले यशस्वी श्रावक-श्राविकाओं और तपस्वियों का आचार्य, मुनिराज, आर्यिका, माताजी के पावन सानिध्य में अभिनंदन किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामनसिटी।</strong> राजस्थान जैन सभा जयपुर के तत्वावधान में गुलाबी नगरी जयपुर के रामलीला मैदान में रविवार को शहर सहित जहां-जहां शाखा है वहां भाद्रपद मास में एक माह, 16 दिवस, दस उपवास कर धर्म प्रभावना-आराधना में अपनी महत्वपूर्ण योगदान देने वाले यशस्वी श्रावक-श्राविकाओं और तपस्वियों का आचार्य, मुनिराज, आर्यिका, माताजी के पावन सानिध्य में अभिनंदन किया जाएगा। साथ ही त्यागी व्रती तपस्यियों की तप की अनुमोदना भी की जाएगी। राजस्थान जैन सभा शाखा कुचामन के महामंत्री सुभाष पहाडिया और यक्ष सौभागमल गंगवाल ने बताया कि त्यागी व्रतियों (तपस्वी )का सुबह 7.30 बजे जुलूस बड़ी चौपड़ से शुरू होकर रामलीला मैदान मे प्रवेश करेगा। 9 बजे सामूहिक क्षमापन पर्व, धर्मसभा एवं सम्मान समारोह होगा।</p>
<p>कोषाध्यक्ष देवेंद्र पहाड़िया ने बतायाकि कुचामन शाखा के दशलक्षण व्रत उपवास करने वाले श्रावक श्राविकाओं में सुशीला देवी जैन धर्मपत्नी विमलचंद पहाडिया, राखी जैन धर्मपत्नी विशाल पाटोदी, दीपिका जैन धर्मपत्नी कैलाशचंद बड़जात्या, अमन जैन पुत्र अजयपाटोदी, नमन पुत्र जैन निर्मल काला, अमन जैन पुत्र मनोज पाटनी, रेखा जैन धर्मपत्नी भागचंद काला का जयपुर में राजस्थान जैन सभा अध्यक्ष सुभाषचंद जैन, महामंत्री मनीष वेद, कोषाध्यक्ष अमरचंद जैन दीवान, मुख्य संयोजक यश कमल अजमेरा, मुख्य समन्वयक प्रदीप जैन लाला की टीम के नेतृत्व में सम्मान किया जाएगा।</p>
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		<title>युवाओं में शील संयम और सदाचार के प्रति भटकाव : मुनि श्री प्रमाण सागर ने ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या कर संयम की शिक्षा दी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Sep 2025 10:49:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण व्रत के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किये। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; भोपाल (अवधपुरी)। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण व्रत के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किये। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)</strong>। अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण व्रत के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातःकालीन सभा में व्यक्त किये। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया श्रावक संस्कार शिविर के अंतिम दिवस प्रवचन के उपरांत सभी शिविरार्थियों के साथ चैनल पर सुन रहे सभी समाज बंधुओं से यौन सदाचार व्रत पालन करने एवं सभी युवक युवतियों को विवाहेत्तर संबंध का पूर्ण रुपेण त्याग करने और गर्भपात जैसा कुकृत्य न करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में रिलेशनशिप के कारण आज के युवा शीलऔर संयम को अर्थ हीन समझने लगे है। उसके कारण उन्मुक्त यौनाचार को बढ़ावा मिला है। जिसके परिणाम बहुत ही विकृत और विभत्स आ रहे हैं। यह बहुत चिंता का विषय है।इस तरह कि व्यव्स्थाओं ने हमारी पूरी सामाजिक परंपरा निष्ठा को छिन्न भिन्न कर दिया है। इसके के परिणाम से युवक-युवतियों में शील, संयमऔर सदाचार के प्रति भटकाव आया है, जो कतई स्वीकार योग्य नहीं है</p>
<p><strong>पति-पत्नी के संबंध कपड़े की तरह हो गये</strong></p>
<p>उन्होंने उन्मुक्त यौनाचार की वकालत करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उन्मुक्त यौनाचार के कारण विवाह संबंध लेट हो रहे हैं तथा जो हो रहे वह भी डिवोर्स के कगार पर हैं। आजकल पति-पत्नी के संबंध कपड़े की तरह हो गये हैं। एक से छूटा दूसरे से कर लो जब चाहे बदल लो? उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति नहीं। भारतीय संस्कृति में दो ही बातें है या तो विवाह करो या वैराग्य की ओर चलो। उन्होंने कहा कि आज के युवक और युवतियों में एन्जॉय के कारण कैरेक्टर में कमी आई है, जो धार्मिक प्रवृत्ति के हैं उनका उपहास उड़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि कहां जा रही है हमारी संस्कृति? इस पर ब्रेक लगना चाहिये और यह ब्रेक &#8220;सदगुरुओं की शरण में उनको जीवन की मर्यादा का पाठ पढ़ाकर ही लाया जा सकता है।</p>
<p><strong>आत्मा से दूरी ही ब्रह्म और भ्रम है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने चार शब्द भ्रम, ब्रह्म, मर्म, कर्म की गहराई में उतरते हुए कहा कि चर्म पर दृष्टि रखना ही हमारा भ्रम है,जो आत्मा के जितना निकट है,वह ही उतना बड़ा ब्रह्मचारी है,आत्मा के निकट और आत्मा से दूरी ही ब्रह्म और भ्रम है। मुनि श्री ने कहा आत्मा से दूरी बनाने में सबसे बड़ा योगदान उस छोटी सी डिबिया (मोबाइल) का है। जो आपकी जेब में है उस छोटी सी डिबिया में ही आपका सारा संसार सिमट गया है और वही छोटी सी डिबिया की युवा पीढ़ी को काम,भोग की लालसा में उलझाकर आत्मा से दूर कर रही है।</p>
<p><strong>अपनी आत्मा को जानना जरुरी है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिन्होंनेअपने काम,भोग और लालसा पर नियंत्रण किया उनकी वृति तथा प्रवृत्ति में लगाम लगी है, उन्होंने अंतर्मुखी होकर शील संयम और सदाचार का पालन किया है, उन्होंने कहा अंतर्मुखी होने के लिये सबसे पहले अपनी आत्मा को जानना जरुरी है। मैं कौन हूं, मेरा स्वरूप क्या है? मेरा गुणधर्म क्या है? मेरा स्वभाव क्या है? मुनि श्री ने कहा कि आत्मज्ञान ही हमारे जीवन के उत्कर्ष का आधार है,आत्मा को जाने विना कभी भी कल्याण नहीं हो सकता जिसको एक बार आत्मज्ञान हो जाता है,उसकी प्रवत्ती में स्वाभाविक सहजता आ जाती है,उसका भ्रम टूटता है,ब्रह्म के बोध से मर्म का निवारण होता है,भ्रम टूटने से मर्म की उपलव्धि और कर्म का निवारण होता है आचार्य कुंद कुंद कहते है कि आध्यात्मिक साधना का आधार अपने आपको जानना और पहचानना है कि मैं हूं कौन? जिस दिन तुम जीवन की सच्चाई को जान लोगे तेरा सारा व्यामोह दूर होकर जीवन की दशा और दिशा बदल जाएगी।</p>
<p><strong>अब भी संभल जाओ</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि क्षण मात्र के सुख के पीछे अपने संपूर्ण जीवन और अपनी संपूर्ण शक्ति को इस &#8220;काम भोग&#8221; की लालसा में खपा दिया, अब भी संभल जाओ। यह शरीर की खाज खुजाने के समान है, उसको खुजलाने में सुख नहीं उस पर मलहम लगाने में ही सार है। उसी प्रकार जिसको आत्मज्ञान हो जाता है,वह काम भोग की खुजली को खुजलाता नहीं उस खाज पर तत्वज्ञान की मलहम लगाकर उसे स्थाई रुप से ठीक करता है उन्होंने अयोध्या प्रसाद गोहिल की रचना में ब्रहमचारणी गायका उदाहरण देते हुये कहा कि संयम अकेले मनुष्य में ही नहीं होता यह पशु में भी घट जाता है,एक परिवार में एक गाय पलती थी उसने पांच सात बच्चों को जन्म दे दिया,उसके उपरांत उसे जब गर्भवती बनाने की अनेक चेष्टा की गई तो उस गाय ने घर की बिटिया को स्वप्न दिया कि अब मैंने ब्रह्मचर्य व्रत अपना लिया है। अतःअब मुझे गर्भवती बनाने का प्रयास किया तो मैं कुए में कूदकर अपनी जान दे दूंगी।</p>
<p>घर के लोगों ने महज इस सपना समझा और उस गाय को एक सांड से संपर्क कराया तो उस गाय ने अपने आपको रस्सी से छुड़ाकर सामने कुएं में छलांग लगा अपनी जान दे दी।</p>
<p><strong>भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण महोत्सव मनाया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण महोत्सव मनाते हुए निर्वाण लाडु चढ़ाया गया एवं अनंतनाथ भगवान का पूजन किया गया। अनेक शिविरार्थियों ने उपवास रखा तथा दोपहर में विद्याप्रमाण गुरुकुलम से जलयात्रा निकाली गई, जो कि संविद नगर जैन मंदिर से होती हुई वापस गुरुकुल प्रांगण में आई तथा भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ एवं श्री जी जिनालय में विराजमान किये गए। रविवार को पूर्णिमा के अवसर पर 55 मिनट की वृहद शांतिधारा एवं सभी उपासिओं की पारणा एवं सम्मान समारोह रखा गया है। मुनि श्री के सानिध्य में 14 सितंबर को संपूर्ण भोपाल की जैन समाज का क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा।</p>
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