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	<title>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जगत कल्याण की कामना के लिए हुईं महाशांतिधारा :  दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में जारी है असीम क़ालीन भक्तामर विधान  </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 07:26:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंचल के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ के दरबार में भक्तों द्वारा भगवान का कलशाभिषेक किया गया। इस दौरान आज जगत कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। अशोकनगर से राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोक नगर। अंचल के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंचल के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ के दरबार में भक्तों द्वारा भगवान का कलशाभिषेक किया गया। इस दौरान आज जगत कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> अंचल के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ के दरबार में भक्तों द्वारा भगवान का कलशाभिषेक किया गया। इस दौरान आज जगत कल्याण की कामना के लिए महा शांतिधारा की गई। जिसका सौभाग्य सौधर्म इन्द्र बनकर जैन समाज अशोकनगर के मंत्री विजय धुर्रा, इंसान इन्द्र दर्शनोदय थूवोनजी के मंत्री शैलेन्द्र दद्दा, सनत इन्द्र मंत्री प्रदीप जैन, रानी पिपरई, महेन्द्र इन्द्र बनकर सुमित जैन ने सौभाग्य प्राप्त किया। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने इस तीर्थ के उद्धार के लिए इस अंचल के भक्तो से जोड़ा अब रोज रोज भक्तों के समूह पिपरई, मुंगावली,शाढ़ौरा, अशोक नगर से भक्तों के समूह आते हैं और जगत कल्याण की कामना करते हुए भगवान के चरणों में जगत के सुख शांति समृद्धि की कामना करते हुए भगवान की भक्ति से अपने आप को जोड़ते हैं। यहां असीम क़ालीन भक्तामर विधान का सौभाग्य हम सबको मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद से मिल रहा है। जिसे यह शुभ अवसर प्राप्त करना हो वह अपने नाम कमेटी तक पहुंच कर सौभाग्य प्राप्त कर सकता है।</p>
<p><strong>मन्दिर निर्माण में शिला स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त करें</strong></p>
<p>इस दौरान क्षेत्र कमेटी के पूर्व महामंत्री विपिन सिंघई ने कहा कि दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के संरक्षक परम संरक्षक बनकर हर व्यक्ति जुड़ सकता है। इसके लिए एक निश्चित राशि तीर्थ की सेवा में समर्पित कर भक्त ये सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं। इस तीर्थ पर मन्दिरों की श्रृंखला तैयार हो रही है। इसमें भी भक्तों को शिला स्थापित करने का सौभाग्य मिला सकता है। यहां सामान्य शिला के साथ बीज अक्षर शिला और पंच बीज अक्षर शिला स्थापित की जा रही है। इस दौरान कमेटी की ओर से सभी पुण्यर्जकों का सम्मान स्मृति चिन्ह भेंटकर किया गया। इस दौरान संजय मोदी, मोनू जैन, सुमित जैन उपस्थित थे।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी को शाढ़ौरा समाज ने किए श्रीफल भेंट: परम संरक्षक बनकर तीर्थ क्षेत्र कमेटी को मजबूत करें  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:49:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। थूवोनजी से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> इस संसार में एक भी स्थान नहीं है, जहां सिर्फ धर्मात्मा ही रहेंगे। पापियों के लिए सारा संसार पड़ा है। चारों ओर पापियों का राज है। ऐसा कोई स्थान नहीं है। जहां सिर्फ धर्मात्मा रहेंगे। कोई पापी नहीं रह सकता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने धर्मात्माओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित किया ही नहीं है। संसार ऐसा ही है जब किसी को संत बनने की प्रेरणा देते हैं तो सब असार बताते हैं। संसार में कुछ नहीं रखा सब छोड़ दें। भक्त ने वैराग्य धारण कर लिया फिर गुरु मौन हो गए। जय श्री राम हो गया। अब तो सिर्फ मौन हो गए। दुनिया में कैसे जीना है। इसकी कला सिखाई गई है। कदम चले कदम चिठ्ठे कदम भूंजे जा भांजे मैं कैसे चलू कैसे खाऊं कैसे रहूं। ये सब मैं कुछ करुंगा मुझे पाप का बंध नहीं होना चाहिए। कीचड़ में तो रहूंगा लेकिन, जंग नहीं लगना चाहिए।</p>
<p><strong>कोई भी व्यक्ति थूवोनजी का ट्रस्टी बन सकता है</strong></p>
<p>इस अवसर पर क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से इस तीर्थ को देशभर के ही नहीं दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हमारे जैन बंधु दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के ट्रस्टी बनकर कमेटी से जुड़ सकते हैं। आज भी ललितपुर जैन समाज के स्तंभ राजेंद्रकुमार लल्लू भैया परम संरक्षक बन रहे हैं। इस दौरान जैन समाज शाढ़ौरा ने मुनि श्री को श्री फल भेंट किए। इनका सम्मान दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ.जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने किया।</p>
<p><strong>दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा</strong></p>
<p>दुनिया में यदि खोटा है तो चोखा होगा ही होगा। अपन कहें इतने साल धर्म करते हुए हो गए। कोई शांति नहीं मिली। वर्षाे से मंदिर जा रहे हैं। कुछ नहीं हुआ गुरुओं के पास गया कुछ भी नहीं मिला तो भी थकना नहीं है। कितना ही थक जाओ। थककर बैठना नहीं है। फिर उठो और खोज करने में लग जाओ। एक संकल्प कर लो मैं सत्य को खोजकर रहूंगा। हीरा कहां मिलता है, कोयला की खान से निकाला जाता ह।ै जहां काला ही काला कोयला भरा पड़ा ह।ै उसके बीच में एकदम चमकदार हीरा मिला। वह सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसा सब चीजों में समझना।</p>
<p><strong>&#8230;जहां भगवान बनने वाली आत्मा रहती है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि ये शरीर कैसा है इस शरीर में मल मूत्र भरा पड़ा है। कैसे गंदे स्थान पर आत्मा को रख दिया। सबसे अच्छा शरीर देवताओं का होता है और संसार में सबसे गंदा शरीर मनुष्य का होता है। लकड़ी जल कोयला भई कोयला जल भई राख। राख से जग अपनी गंदगी को दूर कर लेता है। इसमें आत्मा को रखा गया, जो भगवान बन सकती हैं। इसके लिए खोज जारी रखना पड़ेगा। हम धर्म करते हुए थक रहे हैं। दया करने में थक गए। हिंसा करने वाले भी सुबह उठते ही फिर युद्ध करने चले जाते हैं और तुम धर्म करने-करते थक गए। नहीं थकना नहीं हम एक जीव को भी नहीं बचा पाए तो भी नहीं थकंेगे। पारसनाथ स्वामी अवधि ज्ञानी थे। सब जानते थे। ये नाग नागिन इतने जल चुके थे कि ये बचेंगे नहीं फिर भी बचाने में लगे रहे। डॉक्टरों को भी यही कह गया कि अंतिम श्वास तक प्रयास करता रहता है। यदि डॉक्टर एक मिनट पहले भी मरीज़ को भगा दे तो एफआईआर हो सकती है। डॉ. अंतिम समय तक प्रयास करता रहता है, इसलिए हमें थकान नहीं है।</p>
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		<title>नव दीक्षित साधुओ की आहार चर्या देखने भक्तों की उमड़ी भीड़ : प्रतिदिन होगा श्री भक्तावर महा मंडल विधान  </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 08:11:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधा सागरजी ने कहा कि तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो। वही विजय धुर्रा ने कहा कि असीम क़ालीन भक्तावर के रूप में भक्तों को एक रक्षा कवच मिला है। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; थूवोनजी। तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री सुधा सागरजी ने कहा कि तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो। वही विजय धुर्रा ने कहा कि असीम क़ालीन भक्तावर के रूप में भक्तों को एक रक्षा कवच मिला है। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो मेरा भक्त होकर ग़रीब है। भगवान इसकी कैसे भी गरीबी दूर करो। कुछ तो पुण्य का उदय रहता है कि छोटा सा बालक है अभी तो गोदी में ही है और उसे महाराज के दर्शन करने तुम लेकर आ गए तो मैं बहुत खुश होता हूं। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सोचता हूं कि ये जन्म-जन्म का धर्मात्मा है, अभी पैदा ही हुआ है और परिवार वाले तीर्थ क्षेत्र के दर्शन कराने ले आए गुरु महाराज के चरणों में लाकर समर्पित कर दिया। ऐसा सहयोग भी बहुत पुण्य के योग से मिलता है। धर्म कराने के तरीके हैं जिस-जिस के दान के पीछे पड़ूं तो समझ लेना कि उसका पैसा पुण्य के उदय से आया है। ड़ाकू और साधु की एक ही जाति है ड़ाकू को पता चले कि सेठ पर माल है ऐसे ही साधु को पता चले तो वह उसे दान के लिए प्रेरित करने लगता है साधु सोचते हैं कि मेरा भक्त इतना पुण्य आत्मा है सब कुछ करके भी दो पैसे बचे हैं तो आगे भी उसका भला होता रहें, इसलिए उसको दान की प्रेरणा दे देता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95302" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0015.jpg" alt="" width="642" height="839" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0015.jpg 642w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0015-230x300.jpg 230w" sizes="(max-width: 642px) 100vw, 642px" />विश्व शांति महायज्ञ प्रतिदिन होंगी आहुतियां </strong></p>
<p>इस दौरान क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी आने वाले भक्तों के लिए असीम क़ालीन भक्तामर के रूप में एक ऐसा रक्षा कवच प्रदान किया है, जो आपकी रक्षा घर के बाहर रहने पर करेगा। गुरु ने कहा था कि जब आप घर से बाहर रहते हैं तो ये जो विधान कर रहे हैं। यही आपके लिए सुरक्षा चक्र का कार्य करेगा। ऐसे असीम क़ालीन भक्तामर महामंडल विधान का महा मंगल कलश अजयकुमार विजयकुमार कटारिया जयपुर एवं विधान कलश श्राविका शिरोमणि सुशीला पाटनी आरके मार्वल किशनगढ़ ने स्थापित किया।</p>
<p><strong>प्रमुख पात्र बनकर भक्तों ने की शांतिधारा</strong></p>
<p>इस दौरान जगत कल्याण की कामना के लिए शांतिधारा के पात्रों का चयन प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भइया ने करते हुए कहा कि दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के खड़े बाबा का महाभिषेक करने वाले पात्रों को एक साथ चार लाभ मिल रहे हैं। ऐसे परिवार का नाम गुरु मुख से होगा। परिवार जनों के नाम शांतिधारा में आ रहे हैं। उन्हें गंधोदक से परिपूर्णित रजत कलश एवं खड़े बाबा का विशाल चित्र सम्मान स्वरूप कमेटी द्वारा भेंट किया जा रहा है। महा शांतिधारा करने का सौभाग्य संदीप गोधा मकराना, संजय जैन नेयेडा, शीला विनोदकुमार मुज्जफरनगर, ज्ञानेंद्र गदिया, सूरज सहित अन्य भक्तों को मिला। इनका सम्मान थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजीत बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार सहित अन्य प्रमुखजनों ने अभिनंदन किया।</p>
<p><strong>बचें हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि बचे हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें, ये जो पैसा बचा है, जो किसी ना किसी धर्म के वृक्ष पर लगा हुआ फल है। बचे हुए पैसे से पाप मत करना। वो तुम्हारे महान पुण्य का फल है। जाओ ये तुम्हारे जन्म-जन्म के पुण्य का फल है। मेरे भक्त के पास पैसा बढ़ता है। मेरे भक्त का व्यापार बढ़ता है तो मेरा सीना छप्पन इंच का हो जाता है। ये जन्म-जन्म का पुण्यात्मा है तो आज संपन्नता की जिंदगी जी रहे। अब आपको आगे इसे आगे बनाए रखने के लिए सतत् पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।</p>
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		<title>अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में इतिहास रचने को तैयार : 23 नवंबर को मुनिश्री सुधासागरजी देंगे 14 जैनेश्वरी दीक्षाएं </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 13:24:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। दर्शनोदय तीर्थ के हजार वर्ष पुराने इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन में ससंघ क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागरजी महाराज एवं क्षुल्लक श्री विदेह सागरजी महाराज को भी जैनेश्वरी दीक्षा मिलेगी। इस ऐतिहासिक पलों को लेकर समूचे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह की लहर है। जैन समाज अशोक नगर के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि यह वह क्षण है, जब दर्शनोदय तीर्थ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज सबसे पहले क्षुल्लक वरिष्ठ सागरजी एवं क्षुल्लक विदेह सागरजी को दीक्षा देंगे। इसके साथ ही संघ के 12 बाल ब्रह्मचारी भी इस अवसर पर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक पर्व में उपस्थिति का आग्रह </strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी की समिति अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगलदीप, मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद एवं अन्य सदस्यों ने सभी से इस अद्वितीय आध्यात्मिक पर्व में उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।</p>
<p><strong>विश्वास हो तो जीवन चलता है, पर किसी पर विश्वास करना नहीं</strong></p>
<p>दर्शन-सत्संग के दौरान मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में विश्वास अनिवार्य है, पर विश्वास किसी दूसरे पर करना उचित नहीं। जहां दो विरोधी तत्व साथ विद्यमान हों, वहां अनेकांत का धर्म अपनाना आवश्यक है। जैसे आंख और कान के कार्य अलग-अलग हैं, वैसे ही ज्ञान और दर्शन भी एक-दूसरे का काम नहीं कर सकते। संसार की हर व्यवस्था परस्पर विरोधों से संचालित होती है। सुख-दुःख, लाभ-हानि, आसाता-साता। ज्ञानी पुरुष दुःख को भी दुःख नहीं मानता, क्योंकि साधु के लिए इंद्रिय भोग विष-मिश्रित पकवान के समान हैं।</p>
<p><strong>जिनकी होगी जैनेश्वरी दीक्षा-एक नजर में</strong></p>
<p>ब्र. अक्षय जैन (छोटू) दमोह (मऊ), बीए, बीएड, एमए, श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर</p>
<p>आजीवन व्रत 26 अप्रैल 2025, संघ प्रवेश, 10 मई 2025, कार्य मुरैना छात्रावास अधीक्षक,</p>
<p>ब्र. अतिशय जैन (वासु) सागर (म.प्र.), बीए संस्कृत एमए आचार्य, शिक्षक, महावीर पब्लिक स्कूल, जयपुर, आजीवन व्रत 14 जनवरी 2019, संघ प्रवेश 23 मई 2024, ब्र. विवेक जैन मानोरिया ललितपुर (उ.प्र.), बीटेक, एमबीए फाइनेंस, एमए इकोनॉमिक्स, गुड़गांव एमएनसी में 12 वर्ष सेवा, आजीवन व्रत मई 2011, संघ प्रवेश 8 जुलाई 2024, ब्र. कमलेशकुमार जैन अजमेर, एमए बीएड शिक्षक (12 वर्ष), आजीवन व्रत 2016 कुंडलपुर, संघ प्रवेश आगामी दीक्षा, ब्र. आशु जैन जबलपुर, बीए इकोनॉमिक्स, आजीवन व्रत एवं संघ प्रवेश 19 अगस्त 2024, ब्र. अंकुर जैन असम (धुबड़ी), सिविल इंजीनियर</p>
<p>रक्षा मंत्रालय लेखा विभाग (6 वर्ष), आजीवन व्रत 17 अगस्त 2024, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2024, ब्र. मोनू जैन, जबलपुर, सीए, बीएड, एमएड, आजीवन व्रत 2014, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2024, ब्र. सोनू जैन जबलपुर, शिक्षक (16 वर्ष सेवा), आजीवन व्रत 2006, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2014, ब्र. संयम जैन (ओजी) अहमदाबाद, बीटेक मैकेनिकल, टाटा मोटर्स में जूनियर इंजीनियर, आजीवन व्रत 20 सितंबर 2024, संघ प्रवेश 7 अक्टूबर 2024, ब्र. अंकित जैन, सागर, एमबीबीएस, मेडिकल ऑफिसर, आजीवन व्रत 11 अक्टूबर 2025, संघ प्रवेश 13 अक्टूबर 2025, सात प्रतिमा 1 नवंबर 2025, ब्र. राहुल जैन टोंक (राजस्थान), बीए मेडिकल व्यवसाय, आजीवन व्रत 3 अगस्त 2015, संघ प्रवेश फरवरी 2025 (कटनी), ब्र. सुयश जैन राहतगढ़ (सागर), बीएससी, पीसीएम, व्यवसाय, जैन ट्रेडर्स, आजीवन व्रत 7 दिसंबर 2020, संघ प्रवेश 14 फरवरी 2018, सात प्रतिमा 18 फरवरी 2025 को दीक्षा प्रदान की जाएगी।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी ने शांतिनाथ मंदिर के जीर्णाेद्धार की शिला रखी : 23 नवंबर को मिलेगा गुरु मुख से रक्षा कवच, होगा असीम क़ालीन विधान का शुभारंभ  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 08:35:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंधई मोनू की यह खबर&#8230; थूवोनजी। जिसको देखकर ऐसा भाव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंधई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> जिसको देखकर ऐसा भाव आए कि इसकी शरण में जाकर सबकुछ समर्पित कर दूं, वहां तुम्हारा हित होगा। जिसके मन में ये भाव आ जाएं कि मैं इनकी शरण में चला जाऊं। जिसको देखकर ऐसा भाव आ जाए बस उसकी शरण चले जाना। किसका है किसके लिए है इन बातों से अलग हटकर अपने आप को समर्पित कर देना। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।</p>
<p>तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि 23 नवंबर की तारीख इस अंचल के भक्तों के लिए एक नई सौगात लेकर आई रही है। इस दिन मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज असीम क़ालीन भक्तावर मंडल विधान के रूप में एक रक्षा कवच इस अंचल के ही नहीं देशभर से आ रहे भक्तों को देने जा रहे हैं। इस दिन प्रातः काल की बेला में दर्शनोदय के खड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी के दरबार में रजत मांडने पर असीम क़ालीन भक्तामर मंडल विधान के कलशों की स्थापना होगी। इस के लिए एक बार भक्त को 111 श्रीफल की राशि भेंट करनी होगी। इसके आजीवन विधान का सौभाग्य आपको प्राप्त होता रहेगा। प्रति वर्ष क्षेत्र कमेटी आपको एक चांदी की मुद्रा एवं नंद्यावर्त देती रहेगी, जो वर्ष भर बड़े बाबा के दरबार में मंत्री हो आपको अपने घर ले जाने का सौभाग्य प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>इन्होंने किया विधान में शामिल होने का आग्रह </strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन महामंत्री, मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ.जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद ने इसमें भाग लेने का आग्रह किया है।</p>
<p><strong> जो तुम्हारी दृष्टि में मंगल हो वह तुम्हारे जीवन का मंगल करेगा</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जो तुम्हारी दृष्टि में मंगल हो, वह तुम्हारे जीवन का मंगल करेगा। अभी तुम्हारी दृष्टि में कोई मंगल था ही नहीं लेकिन, जैसे ही तुम ने अपना भला करने वाले का ध्यान किया। तुम्हारे लिए लगने लगा कि इस दुनिया में कोई तो हमारा है, तुम मेरी नकल मत करना। तुम तो मेरी अक्ल से चलना, मेरी अक्ल अपने जीवन को अच्छा बनने के लिए ले लेना, सफलता मिल जाएगी।</p>
<p>संसार में आपकी दृष्टि में सबसे श्रेष्ठ मंगल कौन से हैं फिर आगम से तुलना कर अपने गुरु से विचार-विमर्श करना। जो मैंने उत्तम माना है वह आगम से गुरु जनों ने भी जिसे श्रेष्ठ माना है। अब उसे आगे कर देना तुम्हारा मंगल ही मंगल होगा।</p>
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		<title>मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज बोले – “रोटी साधु के पीछे घूम रही है, मनुष्य को अपनी सोच बदलनी होगी : दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि श्री के प्रवचनों से गूंजी आत्मजागरण की भावना </title>
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		<pubDate>Wed, 12 Nov 2025 15:17:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रही प्रवचनमालाओं में आज उन्होंने जीवन की गूढ़ सच्चाइयों पर प्रकाश डाला। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य रोटी के पीछे नहीं, बल्कि सत्य और त्याग के मार्ग पर चले तो संसार स्वयं उसके चरणों में आ जाता है। पढ़िए राजीव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रही प्रवचनमालाओं में आज उन्होंने जीवन की गूढ़ सच्चाइयों पर प्रकाश डाला। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य रोटी के पीछे नहीं, बल्कि सत्य और त्याग के मार्ग पर चले तो संसार स्वयं उसके चरणों में आ जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जिस दिशा में सोचता है, उसी दिशा में जीवन चलता है। “यदि तुम भीड़ के पीछे चलते हो तो गुलामी का प्रतीक है, पर यदि भीड़ तुम्हारे पीछे चले, तो वही बादशाहत है।” उन्होंने कहा कि संसार को जो त्याग देता है, संसार उसी के पीछे चलता है।</p>
<p><strong>पुण्य का त्याग ही सच्ची साधना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि महावीर ने केवल पाप नहीं, बल्कि पुण्य से प्राप्त सुखों के त्याग की शिक्षा दी। भोग-विलास की वस्तुएँ भी अंततः दुःख देती हैं, अतः उनका त्याग ही मुक्ति का सच्चा मार्ग है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94299" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0014.jpg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0014.jpg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0014-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0014-768x1024.jpg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" />गगन विहारी भगवान की प्रतिमा का निर्माण</strong></p>
<p>तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि गगन विहारी भगवान की विशाल पाषाण प्रतिमा पंचमुखी जिनालय और सिंहद्वार के साथ निर्मित की जा रही है। इस दिव्य रचना में 225 कमलों की आकृतियाँ इंद्रों द्वारा सृजित होंगी। शिलान्यास 16 नवम्बर को प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में सम्पन्न होगा।</p>
<p><strong>108 इंद्रों द्वारा अभिषेक और शांति धारा</strong></p>
<p>वाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया ने कहा कि निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 108 इंद्रों द्वारा पूजित शांति धारा का आयोजन हो रहा है, जो चक्रवर्ती भगवान को समर्पित विधि के समान है।</p>
<p><strong>“तुम भोजन के लिए हो या भोजन तुम्हारे लिए”</strong></p>
<p>मुनि श्री ने गूढ़ प्रश्न पूछते हुए कहा कि विचार करो — धन तुम्हारे लिए है या तुम धन के लिए; भोजन तुम्हारे लिए है या तुम भोजन के लिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भोजन का दास बन जाता है, वह आत्मज्ञान से दूर हो जाता है, जबकि साधक भोजन का स्वामी होता है। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन (टींगू मिल), महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री राजेन्द्र हलवाई, प्रदीप जैन रानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य आत्मजागरण और जगत कल्याण की भावना को प्रबल करना रहा।</p>
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		<title>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी की बैठक में आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बनी : मुनिश्री ने रूपातीत ध्यान पर दिया मार्गदर्शन </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 16:07:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अशोकनगर में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने विशाल धर्मसभा में समयसार के चिंतन पर आधारित प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि आरस परंपरा में नमक का स्वाद अभाव में सदभाव का अनुभव करता है। मुनिश्री ने रूपातीत ध्यान, सद्भाव में अभाव की अनुभूति और जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक तत्वों को सरल शब्दों में समझाया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अशोकनगर में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने विशाल धर्मसभा में समयसार के चिंतन पर आधारित प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि आरस परंपरा में नमक का स्वाद अभाव में सदभाव का अनुभव करता है। मुनिश्री ने रूपातीत ध्यान, सद्भाव में अभाव की अनुभूति और जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक तत्वों को सरल शब्दों में समझाया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
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<p><strong>अशोकनगर।</strong> सुभाषगंज मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि “आरस परंपरा में नमक का स्वाद अभाव में सद्भाव का अनुभव करता है। अभाव में सद्भाव का अनुभव करना तो सरल है, लेकिन सद्भाव में अभाव का अनुभव करना अत्यंत कठिन है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य नहीं होने की अनुभूति लाना बहुत कठिन है। जो पद, प्रतिष्ठा और सम्मान हमारे पास हैं, उन्हें भूल जाना ही आत्मानुभूति की दिशा में पहला कदम है। ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान को भूलने को तैयार नहीं होता, जबकि अज्ञानी व्यक्ति ज्ञान का अनुभव कर सकता है। यदि व्यक्ति स्वयं को भूलकर आत्मस्वरूप में स्थित हो जाए तो वही अवस्था ‘सद्भाव में अभाव’ कहलाती है।</p>
<p><strong>गरीब अमीरी की अनुभूति कर सकता, अमीर गरीबी की करें तो जाने</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि “गरीब आदमी अमीरी की अनुभूति कर सकता है, लेकिन अमीर व्यक्ति गरीबी की अनुभूति करे तो यह अत्यंत कठिन कार्य है।” उन्होंने कहा कि रूपातीत ध्यान का अर्थ है अपने शरीर का अभाव देखना। जैसे अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश तो कर गया लेकिन बाहर निकलने का मार्ग नहीं जानता था, वैसे ही अनेक साधक निश्चय के मार्ग में तो प्रविष्ट हो जाते हैं लेकिन कर्मबंधन से मुक्ति का मार्ग नहीं जानते।</p>
<p><strong>सद्भाव में अभाव की अनुभूति सर्वोच्च साधना</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि “भोजन में नमक नहीं है तो अभाव का अनुभव तुरंत हो जाता है, परंतु जब भोजन में नमक है और फिर भी उसका स्वाद न महसूस हो, यही सर्वोच्च साधना है।”</p>
<p>उन्होंने बताया कि यही “सद्भाव में अभाव” की अनुभूति है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने स्वभाव को बदलना चाहिए, क्योंकि क्रोध, मान और मोह में डूबा व्यक्ति आत्मज्ञान से दूर हो जाता है।</p>
<p><strong>उदाहरणों से दिया गूढ़ दर्शन का संदेश</strong></p>
<p>अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि “नारी को युद्ध की बात पसंद नहीं आती, वह सौंदर्य और श्रंगार की बातों को अधिक महत्व देती है। अर्जुन की गलती यह थी कि उसने बिना पात्रता देखे शिक्षा दी। शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है, उसे समझना और अनुभव करना आवश्यक है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमें अपने अहंकार और अभिमान को त्यागकर आत्मा की पहचान करनी चाहिए।</p>
<p><strong>थूवोनजी कमेटी की बैठक में कार्यक्रम तैयारियों पर चर्चा</strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में होने वाले आगामी कार्यक्रम को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता थूवोनजी कमेटी अध्यक्ष अशोक जैन (टींगू मिल) ने की।</p>
<p>इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p>अध्यक्ष अशोक जैन टींगू मिल ने कहा कि “चातुर्मास की सफलता के साथ-साथ अब दर्शनोदय तीर्थ में भी हम उत्कृष्ट व्यवस्था करेंगे। शहर से तीस किलोमीटर दूर तक बेहतर प्रबंधन के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।”</p>
<p>राकेश कासंल ने कहा कि “महाराज की कृपा से अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुके हैं, अब हमें उन्हें अमल में लाना है।”</p>
<p>विजय धुर्रा ने कहा कि “प्रतीष्ठाचार्य प्रदीप भइया के निर्देशन में हम सब मिलकर हर कार्य को आगे बढ़ाएँगे।”</p>
<p><strong>एकता और सहयोग से सफलता की ओर कदम</strong></p>
<p>बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज के सभी संगठन मिलकर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से पूरा करेंगे।</p>
<p>मुनिश्री के प्रवचन और समिति की योजनाओं से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और सहयोग की भावना व्याप्त रही। थूवोनजी समिति के सभी सदस्य इस पावन आयोजन को सफल बनाने के लिए एकजुटता के साथ संकल्पित दिखाई दिए।</p>
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