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	<title>त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जैन मंदिर में महावीराचार्य पुरस्कार समर्पण समारोह हुआ : डॉ. अनुपम जैन-इंदौर को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 10:11:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ चुनाव सम्पन्न हुए। श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज, बड़ी मूर्ति, अयोध्या में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् जैन सम्मेलन के अन्तर्गत आज दिवस दिवस प्रात:काल पुरस्कार समर्पण समारोह किया गया। अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230; अयोध्या। तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ चुनाव सम्पन्न हुए। श्री ऋषभदेव दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ चुनाव सम्पन्न हुए। श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज, बड़ी मूर्ति, अयोध्या में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् जैन सम्मेलन के अन्तर्गत आज दिवस दिवस प्रात:काल पुरस्कार समर्पण समारोह किया गया। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ चुनाव सम्पन्न हुए। श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज, बड़ी मूर्ति, अयोध्या में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् जैन सम्मेलन के अन्तर्गत आज दिवस दिवस प्रात:काल पुरस्कार समर्पण समारोह किया गया। विजय कुमार जैन ने कहा कि इसमें प्रो. सरोज जैन-बीना को चंदारानी जैन स्मृति विद्वत् महासंघ पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। इसी क्रम में युवा विद्वान् डॉ. संजीव जैन सराफ-वाराणसी को प्रो. चन्द्रवीर जैन-शिकोहाबाद स्मृति विद्वत् महासंघ पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। सत्र के शुभारंभ में महासंघ की वार्षिक रिपोर्ट महामंत्री श्री विजय कुमार जैन के द्वारा विस्तृत सम्पन्न की गयी, जिसमें उन्होंने बताया कि सन 1998 में 6 अक्टूबर को गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के सान्निध्य में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर स्थल पर तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ की स्थापना की गयी। तब से लेकर आज तक यह विद्वानों की एक शीर्षस्थ स्तर की संस्था है, जिसमें लगभग 346 देश के ख्याति प्राप्त विद्वान् पदाधिकारी व सदस्य हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-103908" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012-1320x879.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260404-WA0012.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>डॉ. अनुपम पुनः मनोनीत</strong></p>
<p>वर्तमान में प्रो. डॉ. अनुपम जैन-इंदौर इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विजय कुमार जैन-जम्बूद्वीप राष्ट्रीय महामंत्री वर्तमान में हैं। पुरानी कार्यकारिणी को भंग करते हुए परम्परानुसार गौरव अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी को नवीन कार्यकारिणी की सर्वसम्मति से अधिकार प्रदान किए गए। जिसमें उन्होंने नवीन कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए कहा कि आगामी 3 वर्ष के लिए पुन: सर्वसम्मति से डॉ. अनुपम जैन-इंदौर को राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विजय कुमार जैन-जम्बूद्वीप (वर्तमान में अयोध्या) को राष्ट्रीय महामंत्री सर्वसम्मति से चुना गया और वे अपनी कमेटी का स्वयं विस्तारीकरण समयानुसार, योग्यतानुसार करेंगे। दोनों पदाधिकारियों का पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी द्वारा तिलक लगाकर एवं पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया। इसी के साथ चुनाव की प्रक्रिया हुई।</p>
<p><strong>. प्रगति जैन-इंदौर को पुरस्कार</strong></p>
<p>मध्यान्ह सत्र में विद्वत् महासंघ एवं दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान का महावीराचार्य पुरस्कार समर्पण समारोह किया गया, जिसमें सत्र की अध्यक्षता प्रो. नीलेश कुमार जैन-आई.आई.टी.-इंदौर, मुख्य अतिथि प्रो. राजीव जैन, पूर्व कुलपति-जयपुर, विशेष अतिथि प्रो. रेनू जैन, पूर्व कुलगुरु-इंदौर, सारस्वत अतिथि प्रो. आनंद वर्धन शर्मा (निदेशक-एम.एम.टी.टी.सी.बीएचयू, वाराणसी), पुरस्कार के प्रायोजक डॉ. अनुपम जैन-इंदौर एवं पुरस्कार प्राप्तकर्ता डॉ. प्रगति जैन-इंदौर को पुरस्कार प्रदान किया गया। सत्र का संचालन श्री विजय कुमार जैन-जम्बूद्वीप द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>मंगल आशीर्वाद प्रदान किया</strong></p>
<p>प्रायोजक पुरस्कार प्रदानकर्ता डॉ. अनुपम जैन निशा जैन, पुत्रगण आयुष, अम्बुज, अनुज जैन-इंदौर परिवार द्वारा यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष विद्वत् महासंघ के द्वारा प्रदान किया जाता है। डॉ. प्रगति जैन के गणित के क्षेत्र में योगदान हेतु उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी, पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने डॉ. प्रगति को अपना-अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया।</p>
<p><strong>भक्ति एवं विद्वानों के आलेख वाचन हुए</strong></p>
<p>दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान,जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के सभी पदाधिकारियों ने मुख्यरूप से पूज्य स्वामी, डॉ. अनुपम जैन, विजय जैन, जीवन प्रकाश जैन एवं पधारे हुए विशेष अतिथियों के द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। डॉ. प्रगति जैन ने इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं संस्था की आभारी हूँ कि मुझे गणित के योगदान हेतु यह पुरस्कार भगवान महावीर के नाम का साक्षात् सरस्वती स्वरूपा ज्ञानमती माताजी ससंघ के सान्निध्य में मेरे गुरु डॉ. अनुपम जैन के द्वारा प्रदान किया गया। इस हेतु मैं अपने सौभाग्य की सराहना करती हूँ एवं आयोजकों को धन्यवाद देती हूँ। डॉ. अनुपम जैन-इंदौर ने अपना उद्बोधन दिया एवं इस पुरस्कार के महत्व को बताया एवं पुरस्कार की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने सभी विद्वानों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम में आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का कुशल मार्गदर्शन प्राप्त हुआ एवं पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के निर्देशन में सम्पूर्ण कार्यक्रम सम्पन्न हुए। सायं सत्र में भक्ति एवं विद्वानों के आलेख वाचन हुए।</p>
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		<title>द्रव्य पूजा की खींचतान में भावपूजा हो रही नष्ट: आचार्य श्री विमर्श सागर जी जैन समाज के विखंडन में मूल कारण अंतरंग भाव पूजा की कमी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:15:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अप्पोदया प्राकृत टीका पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने श्री योगसार प्राकृत संस्कृत ग्रंथ पर एक हजार पृष्ठीय प्राकृत टीका का सृजन किया है। जो ‘अयोध्या’ नामक ग्रंथ के रूप में जन-जन के कल्याण में निमित्त बन रही है। 26 से 28 सितंबर में विद्वानों की नगरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अप्पोदया प्राकृत टीका पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने श्री योगसार प्राकृत संस्कृत ग्रंथ पर एक हजार पृष्ठीय प्राकृत टीका का सृजन किया है। जो ‘अयोध्या’ नामक ग्रंथ के रूप में जन-जन के कल्याण में निमित्त बन रही है। 26 से 28 सितंबर में विद्वानों की नगरी देश के मूर्धन्य मनीषी विद्वानों ने स्वयं टीकाकर्ता आचार्य संघ के चरणों में बैठकर अप्पोट्या टीका के विभिन्न विषयों और पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। <span style="color: #ff0000">सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> अप्पोदया प्राकृत टीका पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने श्री योगसार प्राकृत संस्कृत ग्रंथ पर एक हजार पृष्ठीय प्राकृत टीका का सृजन किया है। जो ‘अयोध्या’ नामक ग्रंथ के रूप में जन-जन के कल्याण में निमित्त बन रही है। 26 से 28 सितंबर में विद्वानों की नगरी देश के मूर्धन्य मनीषी विद्वानों ने स्वयं टीकाकर्ता आचार्य संघ के चरणों में बैठकर अप्पोट्या टीका के विभिन्न विषयों और पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। अप्पोदया टीका संगोष्ठी मुख्य निदेशक सर्वाध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत रहे। संयोजक पं. विनोदकुमार जैन रजवास रहे।</p>
<p>साथ ही प्रो. श्रीयांस जैन जयपुर, प्रो. नलिन के. शास्त्री दिल्ली, डॉ. राजकुमार उपाध्ये दिनी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. आशीष जैन, डॉ. सुनील जैन संचय, डॉ. बाहुबली जैन रजवाँस, डॉ. ज्योति बाबू उदयपुर, डॉ. आशीष जैन बम्हौरी आदि विद्वानों के साथ स्थानीय विद्वानों ने भी ज्ञान के महायज्ञ में अपनी आलेखों की प्रस्तुति दी। विद्वान बोले- भगवान महावीर स्वामी के बाद हमने संस्कृत ग्रंथों पर संस्कृत टीकाएं देखी हैं। हमने प्राकृत ग्रंथों पर संस्कृत टीकाएं बहुत देखी है किन्तु यह पहला अवसर है जब किसी जैनाचार्य द्वारा संस्कृत ग्रंथ पर प्राकृत भाषा में 1 हजार पृष्ठीय प्राकृत टीका का लेखन किया गया हो और इस महनीय श्रुत संवर्धन को अंजाम देने वाले हैं भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज।</p>
<p><strong>अधिक से अधिक शोध कार्य होंगे </strong></p>
<p>डॉ. राजकुमार उपाध्ये दिल्ली ने कहा कि पूज्यश्री द्वारा रचित यह अप्पोदया टीका सामान्य नहीं है। यह मात्र जैन समाज तक ही सीमित न रहे। यह जन-जन तक पहुंचनी चाहिए। यह जन-जन के हितार्थ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल होनी चाहिए और ऐसा मैं कर सकूंगा मुझे विश्वास है। अप्योदया टीका से प्रभावित होकर विद्वानों ने कहा- पूज्यश्री द्वारा सृजित इस ग्रंथ में बहुतायत शोध के विषय हैं, जिन पर आगामी समय में बड़ी श्रृंखला में विद्वत्‌वर्ग के शोधकार्य (पीएचडी) हम सबके समक्ष उपस्थित होंगे। वर्तमान में डॉ. शैलेन्द्र शास्त्री भेलसी द्वारा (पीएचडी) पूर्णता की ओर है, जो जल्द ही हम सबके समक्ष उपस्थित होगी। आचार्य श्री की संघस्थ आर्यिका श्री विमर्शिता श्री माताजी द्वारा किया गया विनय भरा मंगलात्चरण, सुनकर डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत अभी दीक्षा को एक वर्ष भी पूर्ण नहीं हुआ और पूज्य माताजी की एक प्रस्तुति ने ही यह बतला दिया कि वे भविष्य में जैन धर्म की महानता करेंगी। इन सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।</p>
<p><strong>रयणोदय भाग-3 का किया गया भव्य विमोचन</strong></p>
<p>राजधानी दिल्ली कृष्णानगर की महिला जैन समाज के सौजन्य से प्रकाशित कराया गया ‘रयणोदय ग्रंथ’ का आगत सम्पूर्ण विद्वानों द्वारा भव्य विमोचन किया गया। ग्रंथ के संपादक डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने कहा कि श्री रयणसार ग्रंथ पर आचार्य श्री की यह प्रवचन वृत्ति जन सामान्य के कल्याण में निमित्त बन रही है। विद्वत् वर्ग को आचार्य श्री ने संबोधित करते हुए कहा कि आज आत्मोन्नति के उपाय रूप में संगोष्ठी जगह-जगह की जा रही हैं। इसके साथ आज समाजोन्नति पर भी विचार करने की महती आवश्यकता है। आज मंदिरों में द्रव्य पूजा को मुख्य करके समाज में विखंडन देखा जा रहा है, आज आवश्यकता है कि द्रव्य पूजा को गौण करके अर्थात जिसकी जैसी पद्धति है। वह उसे करने दें और भाव पूजा को मुख्यता प्रदान करें ताकि समाज में एकता, सौहाद्र का वातावरण निर्मित हो सके। द्रव्यपूजा में खींचतान के कारण आज जो मुख्य है अर्थात अंतरंग भाव पूजा नष्ट होती जा रही है। जहां भावपूजा खंडित हो गयी वहां आपकी द्रव्य पूजा आपको क्या फल प्रदान करेगी। इसीलिए मैं कहता हूँ गौण करके हमें भाव पूजा अर्थात भाव शुद्धि को ही महत्वता देनी होगी आज जैन समाज की हानि का मुख्य कारण है ‘विखंडन’। विखंडन में हमें भाव पूजा ही बचाने में समर्थ है।</p>
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