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	<title>तेरापंथी साधु &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>भाईचारे का उदाहरण साधुओं को भी प्रस्तुत करना होगा: आचार्य प्रज्ञासागर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jun 2022 03:33:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[रिपोर्टर- महेंद्रकुमार जैन इन्दौर। समाज में, जनता में भाईचारा स्थापित करने के लिए पहले साधुओं को उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। हम जब भी भाईचारे की बात करें, वह तभी प्रभावकारी होगी जब साधु समाज स्वयं भाईचारे की नजीर प्रस्तुत करेगा। देश में अलग अलग पंथों के लगभग सोलह सौ दिगम्बर जैन साधु हैं। लगभग इतने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;">रिपोर्टर- महेंद्रकुमार जैन</span></p>
<p><strong>इन्दौर।</strong> समाज में, जनता में भाईचारा स्थापित करने के लिए पहले साधुओं को उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। हम जब भी भाईचारे की बात करें, वह तभी प्रभावकारी होगी जब साधु समाज स्वयं भाईचारे की नजीर प्रस्तुत करेगा। देश में अलग अलग पंथों के लगभग सोलह सौ दिगम्बर जैन साधु हैं। लगभग इतने ही अन्य जैन परम्परा के साधु हैं। सभी अपने-अपने प्रवचनों में समाज में भाईचारे की बात करते हैं, किन्तु कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है कि जहां एक पंथ-परम्परा के साधु होते हैं तो दूसरे पंथ-परम्परा के साधु पास से ही कन्नी काटकर अन्यत्र चले जाते हैं। निकट में होते हुए भी आपस में मिलते नहीं हैं। समाज में भाईचारा स्थापित करने के लिए साधु-संतों को भी साधु-संस्था में भाईचारा सथापित करना होगा।</p>
<p>ये विचार रविवार को इन्दौर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर प्रांगण में एक धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए आचार्य पुष्पदंत सागर मुनिमहाराज के शिष्य अचार्य प्रज्ञासागर जी मुनिमहाराज ने अपने प्रवचनों में प्रस्तुत किये। इस दौरान आचार्यश्री ने कहा कि,- &#8220;वे श्रवणबेलगोला के महामस्तकाभिषेक के अवसर पर गोम्मटेश बाहुबली गये थे। वहां 380 जैन साधु थे। वहां किसी पंथ की विचारधारा का कोई भेदभाव प्रतीत नहीं हुआ। जो जहां विधि मिली वहां आहार के लिए चले गये। बीसपंथी साधु तेरापंथी चैके में, तेरापंथी साधु बीसपंथी चैके में आहार के लिए चले जाते थे। कहीं कोई भेद-भाव दृष्टिगत नहीं हुआ। उसी तरह देश में सभी पंथों, उपपंथों के साधुओं को करना चाहिए।“</p>
<p>इस दौरान उन्होंने कहा,- “जब साधु ही भाईचारे का अनुपालन नहीं करेंगे तब शिष्यों-श्रावकों, समाज को कैसे भाईचारे का उपदेश दे पायेंगे। साधु एक हैं तो समाज एक है। साधुओं में दुराव है, तो समाज में दुराव होगा होगा। समाज को व्यक्तिगत रूप से भी सोचना होगा कि साधु संस्था के दुराव में कहीं उनकी संलग्नता तो नहीं है। विद्वत् परिषद् के महामंत्री डॉ. महेन्द्रकुमर जैन ‘मनुज’ ने बताया कि, आचार्य प्रज्ञासागर मुनि महाराज से पूर्व आचार्य विशुद्धसागर मुनि महाराज के शिष्य आदित्य सागर मुनि महाराज ने इसी धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, “गुरुसान्निध्य में कुछ बात और थी और अब बिना गुरु के वे तीन साधुओं के साथ भ्रमण कर रहे हैं, यह बात अलग है। किन्तु आचार्य प्रज्ञासागर मुनि महाराज से मिलने के उपरान्त इनसे भी हमें अपने गुरु के समतुल्य स्नेह मिल रहा है।“ उक्त दोनों प्रवचनकर्ता गुरुवर्यों ने कहा कि, मिलन दूध में पानी जैसा होना चाहिए। जब दोनों मिलें तो एकमेक हो जायें।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि आचार्य प्रज्ञासागर जी और मुनि श्री आदित्यसागर जी ससंघ का प्रवास इन्दौर की विभिन्न कॉलोनियों में चल रहा है। रविवार को दोनों संघों का मिलन शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मल्हारगंज में हुआ। इसी अवसर पर दोनों संघों के प्रमुखों ने जनता को अपने प्रवचनों द्वारा संबोधित किया।</p>
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