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	<title>तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>आपको क्रिया में आनंद आया तब वह पुण्य में बदल जाएगा : मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में तप कल्याणक पर तीर्थाेदय में होगी जैनेश्वरी दीक्षा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 03:38:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोकनगर। क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान कहां है देवता उस मंदिर में जाते हैं जब भगवान सामने हो तो थोड़ा हंस लिया करें। अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बड़े आदमी को संभालना है। हंसने वाले को संभालना है ये नरक जाने वाले हैं। रावण के पास धन था बुद्धि थी, शरीर निरोगी मिला। धन मिले अय्याशी में लगा दिया। बुद्धि मिली उससे भगवान को कैलाश पर्वत सहित उठरकर फैंकने लगा। इन तीनों को संभालना। मैं जन्म-जन्म का बड़ा आदमी हूं। तुम्हें जो कुछ भी मिला है, अच्छे कर्म से मिला है ये तुम्हारे लिए अपने गुरु से मिलीं है। अब मेरा उपदेश नहीं मैं धनवान हूं बुद्धि मान निरोगी है तो अच्छा कर्म का परिणाम है। अब तुम्हारे लिए अपने आत्म की आवाज सुने। अब भविष्य में भी ऐसा ही चाहते हैं तो यही फार्मूला आगे लगाना है। आज अच्छा कर रहे हैं तो कल भी अच्छा होगा ये आत्मा की आवाज आएगी।</p>
<p><strong>23को जाएगा अशोक नगर जैन समाज द्रव्य भेंट करने गोलाकोट</strong></p>
<p>जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल ने बताया कि तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के श्री सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में ‘तप कल्याणक 23 जनवरी को प्रातः 7.30 बजे होगा। सुभाषगंज प्रांगण से श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी अशोकनगर के नेतृत्व में सभी संस्थाओं का प्रतिनिधि मंडल अपने अपने निजी वाहनों से ‘अष्ट मंगल द्रव्य’ लेकर जा रहा है। इस दौरान मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ को कमेटी श्रीफल करेगी। कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनोज रन्नौद, श्रेयांस घैला सहित अन्य प्रमुख जनों ने सभी से अनुरोध किया है।</p>
<p><strong>’तप कल्याणक पर होगी जैनेश्वरी दीक्षा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि इस दौरान महाराजा नाभी राय के दरबार का आयोजन होगा। आदि कुमार का राज्याभिषेक होगा। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा भेंट समर्पित की जायेगी। राज व्यवस्था अषि मषि कृषि विद्या वाणिज्य शिल्प का उपदेश दिया जाएगा। राज्य व्यवस्था के साथ कृषि क्रिया कार्य शिल्पा कला का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। इसके बाद नीलाजंना नृत्य नीलाजना का निधन और आदि कुमार का वैराग्य जैनेश्वरी दीक्षा मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज दी जायेगी।</p>
<p><strong>सब कुछ छोड़कर यदि जायेंगे तो आप भी सिद्ध बन सकते हैं’</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि सब कुछ छोड़कर यदि जायेगा तो आप भी सिद्ध शिला को प्राप्त कर सकते हैं। जैसे तारा का समूह स्वच्छ जल में स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही ज्ञानी को सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। ये मार्ग आनंद को देने वाला है। यहां मजा नहीं आया ये मजे से आगे आनंद देने वाले हैं। इन विकल्प जालों से आगे बढ़कर परम पद की आराधना करने का पुरूषार्थ करते रहना चाहिए। भेद विज्ञान से ही आराधना का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्ञान दर्शन चारित्र वीर्य चार को जान लिया शुद्ध आत्मा को जानने से हमें आगे कुछ भी नहीं बचा। जिसने अपने आत्म को जान लिया। भाग्यवानों के लिए है।</p>
<p><strong>आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे दरवाजे रोते हुए आये गरीब ना आवे रोगी ना आवे आ गया तो उनको भी ठीक कर दूंगा ये पंच कल्याणक भाग्यवानों के लिए हैं। ये मंदिर भाग्यवानांे के लिए है। भाग्यहीनो के लिए नहीं है। ये धर्म भाग् वानो के लिए है ये धर्म उनके लिए है। जिनके मन और तन सुखी है जैन कुल में उनका हुआ है, जो जन्म-जन्म के पुण्यवान हैं । इस पंचम काल का सबसे बड़ा दोष है कि यहां गरीबांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं। आज मंदिर में परेशान दःुखी और गरीब लोगांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिरों में देने वाले कम लेने ज्यादा आ रहे हो।</p>
<p><strong>जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो, उसी से अतिशय बढ़ता है</strong></p>
<p>कुछ लोग मंदिर में ख़ाली हाथ इसलिए जाते हैं कि भगवान को पता चले कि भक्त के पास कुछ नहीं है जैनी मंदिर में थाल भर-भर कर लेकर जाता है और खाली हाथ आता है। भगवान कहते हैं क्या बात है तू दूखी तो नहीं है। भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए अभी तक इतना दिया है कि तेरे लिए भी लेकर आया हूं मन्दिर कभी खाली हाथ नहीं जाना जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो। उसी से अतिशय बढ़ता है। उससे अतिशय बढ़ता चला जाता है। जितना भाग्यशाली बनकर पुण्यवान कर जिनालय की वंदना करने जाना मैं भाग्यवान हूं जो भगवान के पंच कल्याणक देखने आया हूं।</p>
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		<title>संगठन की शक्ति से समाज की उन्नति और संपन्नता : जिन शासन एकता संघ के संभागीय सम्मेलन में समाजजनों की सहभागिता सराहनीय    </title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 10:10:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में जिन शासन एकता संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद जिले की सीमा पर स्थित तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में क्षेत्रीय सम्मेलन किया गया। इसकी अध्यक्षता दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी शांतकुमार ने की। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोक नगर। नगर में जिन शासन एकता संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद जिले [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में जिन शासन एकता संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद जिले की सीमा पर स्थित तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में क्षेत्रीय सम्मेलन किया गया। इसकी अध्यक्षता दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी शांतकुमार ने की। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> नगर में जिन शासन एकता संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद जिले की सीमा पर स्थित तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में क्षेत्रीय सम्मेलन किया गया। इसकी अध्यक्षता दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी शांतकुमार ने की। सम्मेलन में अशोकनगर मुंगावली, शाढ़ौरा, पिपरई, चंदेरी, ईसागढ़, कदवया सहित पूरे जिले से एकता संघ के कार्यवाहक विपिन सिंघई जैन, समाज महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। सम्मेलन में गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर ललितपुर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। जिला सम्मेलन में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में एकता को जीवन का मूलमंत्र बताते हुए कहा कि एकता ही बल है। परमार्थ हो या संसार, हर क्षेत्र में एकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की भावना थी कि ये देश भरत का भारत बने। उन्हीं की भावनाओं के अनुरूप यह संघ बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्मे भी एकता संघ, मरे भी एकता संघ, यह शगुन बने, मंगल बने और जीवन का अभिन्न अंग बने।</p>
<p><strong>यदि सत्य नहीं बोल सकते तो मौन रहो</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि अपने आप को सोना बना लो, संसार का कीचड़ तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। गंदगी हटाने में समय खराब मत करो, अपने बचाव पर ध्यान दो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैन धर्म हिंसा का मार्ग नहीं सिखाता, बल्कि आत्मरक्षा और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। अपने घर से शुरुआत करो, मन-वचन-काय को एक करो। मन में कुछ और वचन में कुछ ऐसी मायाचारी नहीं होनी चाहिए। यदि सत्य नहीं बोल सकते तो मौन रहो, लेकिन झूठ मत बोलो। मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि “मां, पिता और पुत्रकृयदि इनका संगठन एक हो जाए तो वह भी शक्ति बन जाता है। मन, वचन और काय, इन तीन में से यदि दो भी एक हो जाएं तो व्यक्ति शक्तिमान बन जाता है। उन्होंने कहा कि परमार्थ के लिए भी संगठन आवश्यक है। जब तक मन-वचन-काय एक नहीं होंगे, तब तक सिद्धि प्रकट नहीं होगी। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र, जब तक अभेद नहीं होंगे तब तक मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं।</p>
<p><strong>रत्नत्रय की वंदना करें </strong></p>
<p>जिन शासन एकता संघ की सभा शुरू होने के पहले रत्नत्रय की वंदना करें। मुनिश्री ने रत्नत्रय की वंदना का भाव समझाते हुए कहा कि वंदे सम्यक दर्शनम, सबसे पहले हाथ जोड़ें, वंदे सम्यक ज्ञानम, हाथ जोड़ते हुए गर्दन झुकाएं, वंदे सम्यक चारित्रम, हाथ जोड़ते हुए, गर्दन झूकाएं बस हो गया, इस तरह से कर सकते हैं।</p>
<p><strong>जैन समाज कि आबादी घट रही है सावधान रहें- पूर्व डीजीपी</strong></p>
<p>सम्मेलन में उपस्थित पूर्व डीजीपी एसके जैन ने समाज को चेताते हुए कहा कि जागो, चेतो। जैन समाज की बर्बादी का एक बड़ा कारण अधिक उम्र में विवाह है। 21 वर्ष के बाद बच्चों के विवाह को लेकर गंभीर होना चाहिए। उन्होंने जनगणना में उपजाति के स्थान पर ‘जैन’ लिखने की अपील की। साथ ही कहा कि जैन समाज भाषाई रूप से समृद्ध है। प्रत्येक जैन को कम से कम चार भाषाओं का ज्ञान होता है। संस्कृत और प्राकृत तो हर जैनी पढ़ता है। णमोकार मंत्र, भक्तामर स्तोत्र इसका प्रमाण हैं। उन्होंने मांग की कि हर विश्वविद्यालय में प्राकृत भाषा का कोर्स शुरू होना चाहिए।</p>
<p><strong>ध्वज स्थापना में इनकी रही सहभागिता </strong></p>
<p>इस दौरान सर्वप्रथम ध्वज स्थापना पूर्व डीजीपी शांतकुमार, सरकार्यवाह राकेश गोयल, भोपाल विपिन सिंघई कीर्ति जैन महेंद्र भइया, एसके जैन गुना सहित अन्य प्रमुख जनांे ने किया। वहीं दीप प्रज्वलन महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा, सांसद प्रतिनिधि संजीव भारल्लिय, जिला कोषाध्यक्ष मनोज रन्नौद, संजय के अलावा मुंगावली, भोपाल, ग्वालियर, सागर, ललितपुर के प्रतिनिधियों ने सहभागिता दी।</p>
<p><strong>कार्यकर्ता सम्मेलन पहुंच उपस्थिति दर्ज कर रहे </strong></p>
<p>यह सम्मेलन अशोकनगर और शिवपुरी जिले के संगठन को मजबूती देने के लिए विशेष रूप से किया गया था। समाज के महामंत्री राकेश अमरोद, सुनील अखाई, विपिन सिंघई, शैलेन्द्र दद्दा, संजीव भारल्लिय, मनोज रन्नौद, हेमंत टडैया, अशीष बजरंगी, मनीष सिघई के अलावा मुंगावली, ईसागढ़, चंदेरी, शाढ़ौरा आदि स्थानों से समाजजन आ रहे हैं। इस दौरान प्रमुख कार्य वाहक राकेश गोहिल भोपाल ने कहा कि हम छोटी-छोटी इकाइयों से इस संगठन को मजबूती दे रहे हैं। संगठन की शक्ति से हम समाज को आगे बढ़ाएं, ये सम्मलेन अशोक नगर, शिवपुरी, गुना के संगठन विस्तार के लिए किया गया। इस अवसर सोमवार को ललितपुर-ग्वालियर संभाग, सागर, भोपाल संभाग की विशेष उपस्थिति हो रही है।</p>
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