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	<title>तीर्थंकर दिवस जन कल्याण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>तीर्थंकर दिवस जन कल्याण और अध्यात्म मय करने में सहभागी : ऋषभदेव दिवस भारतीय संस्कृति सभ्यता-संस्कार का शंखनाद </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 09:02:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर पर जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग,सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया, विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा ‘‘जीवन निर्वाह एवं जीवन निर्माण के सूत्रधार तीर्थंकर ऋषभदेव‘‘ पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया। उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; उदयपुर। राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर पर जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग,सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया, विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा ‘‘जीवन निर्वाह एवं जीवन निर्माण के सूत्रधार तीर्थंकर ऋषभदेव‘‘ पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया। <span style="color: #ff0000">उदयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर।</strong> राजस्थान सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल तीर्थंकर दिवस(ऋषभ नवमी) के अवसर पर जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग,सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय, मोहनलाल सुखाड़िया, विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा ‘‘जीवन निर्वाह एवं जीवन निर्माण के सूत्रधार तीर्थंकर ऋषभदेव‘‘ पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के लिए प्रो. बी.पी. सारस्वत, कुलगुरु मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर ने अपना संरक्षण तथा प्रो. एम.एस राठौड, अधिष्ठाता आर्ट्स महाविद्यालय ने अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ तीर्थंकर ऋषभदेव के मधुर मंगलगान से हुआ। इसके बाद प्रभारी अध्यक्ष डॉ. सुमतकुमार जैन ने समागत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह तीर्थंकर ऋषभदेव दिवस भारतीय संस्कृति-सभ्यता-संस्कार का शंखनाद है,जिससे आज जन-जन प्रभावित हो रहा है क्योंकि, तीर्थंकर ऋषभदेव ने समाज को निर्वाह करने के साथ अपने सम्यक् जीवन-विकास की प्रेरणा प्रदान कर अध्यात्म की ओर सन्मुख होने का मार्गदर्शन किया। मुख्य वक्ता प्रो.प्रेम सुमन जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि जैनधर्म के प्रवर्त्तक तीर्थंकर ऋषभदेव रहे और उसके व्याख्याकार भगवान् महावीर थे,न कि प्रवर्त्तक।</p>
<p><strong>नारी-शिक्षा का सर्व प्रथम सूत्रपात किया</strong></p>
<p>मुख्य अतिथि डॉ.देव कोठारी ने कहा कि ऋषभदेव ने प्राचीनता और ऐतिहासिक दृष्टि से ब्रह्मी और सुन्दरी के माध्यम से नारी-शिक्षा का सर्व प्रथम सूत्रपात किया था। विशिष्ट अतिथि डा. नवीन नंदवाना ने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि तीर्थंकर महापुरुषों ने आत्मानुशासन, इन्द्रिय संयम,रिश्तों में सामंजस्य जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षों को जीवन-निर्वाह के लिए अनिवार्य बताया है। प्रो. पारसमल अग्रवाल ने अपने वक्तव्य देते हुए विवेचित किया कि तीर्थंकर ऋषभदेव द्वारा स्थापित क्षमा व्यक्ति और समाज के सम्यक् जीवन-निर्वाह और जीवन-निर्माण में महत्त्वपूर्ण है। उपस्थित सभी वरिष्ठ मनीषियों ने राजस्थान सरकार के प्रति हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया और कहा कि सरकार की इस पहल से विद्यार्थी, शोधार्थी एवं जन-सामान्य निश्चित ही लाभान्वित हुए हैं और होगें,इस तरह के समाज हितकारी आयोजन सरकार के माध्यम से होते रहना चाहिए। साथ ही सभी उपस्थित विद्वानों ने भी राजस्थान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि सरकार ने तीर्थंकर दिवस प्रदेश भर में आयोजन करने का महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है और सुखाडिया विश्वविद्यालय ने इस तीर्थंकर ऋषभदेव जन्म एवं दीक्षा कल्याणक मना कर उस आदेश की परिपालना की है।</p>
<p><strong>यह मौजूद रहे</strong></p>
<p>अंत में डॉ. ज्योतिबाबू जैन ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया एवं संचालन धर्णेन्द्र जैन किया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के संकाय सदस्य डॉ.सतीश अग्रवाल, डॉ. सुरेश सालवी,डॉ.मुकेश मीणा, डॉ.मनीष मलयकेतु डॉ.सरोज जैन आदि उपस्थित रहे तथा विभाग के शोधार्थी डा.पुष्पा कोठारी, डॉ.रेखा जैन, डॉ.सीमा जैन, डॉ.निर्मला बैनाडा आदि के साथ अनेक विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया।</p>
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