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	<title>णमोकार महामंत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का हुआ शुभारंभ : बच्चों को बताएंगे णमोकार महामंत्र की महिमा और अर्थ  </title>
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		<pubDate>Mon, 18 May 2026 13:51:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन मिलन अरिहंत की ओर से श्री दिगंबर जैन श्रवण संस्कृति संस्थान सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, पुराना हलवाई खाना में 8 दिवसीय श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर लगाया गया है। इसका संचालन 24 मई तक किया जाएगा। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; भिंड। जैन मिलन अरिहंत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन मिलन अरिहंत की ओर से श्री दिगंबर जैन श्रवण संस्कृति संस्थान सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, पुराना हलवाई खाना में 8 दिवसीय श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर लगाया गया है। इसका संचालन 24 मई तक किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> जैन मिलन अरिहंत की ओर से श्री दिगंबर जैन श्रवण संस्कृति संस्थान सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, पुराना हलवाई खाना में 8 दिवसीय श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर लगाया गया है। इसका संचालन 24 मई तक किया जाएगा। इसका संचालन सांगानेर संस्थान के पंडित अंशुल जैन और पंडित चेतन जैन शास्त्री कर रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर अध्यक्ष संजीव जैन बल्लू ने ध्वजारोहन से किया और चित्र अनावरण मंदिर के गणमान्य लोगों ने किया तथा दीप प्रज्वलन मंत्री अशोक जैन पेंटर ने किया। कार्यक्रम का संचालन निकेत जैन निक्की ने किया। उन्होने बताया कि नगर के मंदिरों में गर्मियों की छुट्टियों में धार्मिक शिक्षण शिविर का आयोजन कई वर्षों से चलता आ रहा है। विद्वान छोटे-छोटे बच्चों को जैन धर्म के 24 तीर्थकर भगवानों की गौरवशाली इतिहास की जानकारी के साथ ही बच्चों को अनादि कल से चले आ रहे पावन णमोकार महामंत्र की महिमा और अर्थ बताएंगे। विद्वानों ने प्रातः बच्चों को भगवान के पूजन अभिषेक की क्रियाएं बताई गई। साथ ही दोपहर और शाम को महिलाओं को धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कराया जाएगा। मनुष्य के जीवन में संस्कारों का विशेष महत्व होता है। संस्कारों के बिना मनुष्य जीवन में नैतिक मूल्यों का पतन हो जाता है। संस्कारों और संयम के बिना जीवन की गाड़ी बिना ब्रेक की होती है। जिससे मानव जीवन गलत और अनैतिक कार्यों में लगने लगता है। शिक्षण शिविरों के माध्यम से बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण किया जाएगा। आज बच्चों के ने मंदिर में रैली निकालकर जैन धर्म के जयकारे लगाए। धार्मिक शिक्षण शिविरों के माध्यम से बच्चों में संस्कारों के साथ-साथ धर्म, नैतिकता, अनुशासन, सदाचार और राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत होती है। शिविर में बच्चों को प्रतिदिन स्वल्पाहार का भी वितरण किया जा रहा है। इसी क्रम में आज का स्वल्पाहार वितरण रेखा जैन, अशोक जैन पेंटर ने किया। इस अवसर पर जैन मिलन के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अतिवीर सुनील जैन मेडिकल, अरिहंत भिंड के अध्यक्ष मुकेश जैन राजू, मंत्री मनोज जैन, पूर्व अध्यक्ष अजित जैन सोनू रहे।</p>
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		<title>अंबाह में अपार भक्तिपूर्वक गूंजा णमोकार महामंत्र: सामूहिक जाप में उमड़ा जैन समाज, विश्व शांति की कामना की </title>
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		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 08:51:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व णमोकार महामंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थित जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा सामूहिक जाप का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर णमोकार महामंत्र का जाप किया और विश्व शांति, आत्मशांति तथा सद्भावना की कामना की। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230; अंबाह। विश्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व णमोकार महामंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थित जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा सामूहिक जाप का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर णमोकार महामंत्र का जाप किया और विश्व शांति, आत्मशांति तथा सद्भावना की कामना की। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> विश्व णमोकार महामंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थित जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा सामूहिक जाप का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर णमोकार महामंत्र का जाप किया और विश्व शांति, आत्मशांति तथा सद्भावना की कामना की। मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान पार्श्वनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके पश्चात श्रद्धालु अनुशासनपूर्वक एक स्थान पर बैठकर लगभग डेढ़ घंटे तक एक स्वर में णमोकार महामंत्र का जाप करते रहे। इस दौरान पूरे परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस महामंत्र के जाप से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।</p>
<p><strong>100 से अधिक मेगा इवेंट्स हुए</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान महेशचंद जैन एमपीईबी ने बताया कि यह आयोजन विश्व शांति, आत्मिक संतुलन, सद्भावना और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) संस्था द्वारा वैश्विक स्तर पर आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के आयोजन में 180 से अधिक देशों के लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विश्वभर में 100 से अधिक मेगा इवेंट्स तथा 6000 से अधिक मंदिरों एवं विभिन्न स्थलों पर सामूहिक जाप किया गया, जो इस आध्यात्मिक अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।</p>
<p><strong>नियमित जाप से व्यक्ति के आभामंडल की शुद्धि होती है</strong></p>
<p>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष संतोष जैन ने बताया कि णमोकार महामंत्र केवल आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि अनुभव का भी विषय है। यह मंत्र आत्मा के गहनतम स्तर को स्पर्श करता है, जहां से चेतना की शुद्ध धारा प्रवाहित होती है। सामूहिक जाप के दौरान श्रद्धालुओं ने मानसिक शांति, स्थिरता और आंतरिक संतुलन का अनुभव किया। इससे तनाव, भय और अवसाद जैसी समस्याओं में कमी आती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है। अमित जैन टकसारी के अनुसार, इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति के आभामंडल की शुद्धि होती है, जिससे उसकी ऊर्जा सकारात्मक और प्रभावशाली बनती है। कई श्रद्धालुओं ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इसके प्रभाव से स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और विभिन्न रोगों में राहत मिली है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक कंपन शरीर की कोशिकाओं को संतुलित करते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</p>
<p><strong>यह मंत्र कर्म निर्जरा की प्रक्रिया को तेज करता है</strong></p>
<p>विकास जैन पाड़े ने कहा कि णमोकार महामंत्र संकल्प सिद्धि की शक्ति को भी बढ़ाता है। जब व्यक्ति शुभ संकल्प करता है, तो इस मंत्र के प्रभाव से वे संकल्प शीघ्र पूर्ण होने की दिशा में अग्रसर होते हैं। साथ ही, यह मंत्र कर्म निर्जरा की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है। उन्होंने कहा कि संसार में अनेक मंत्र हैं, किंतु विशेष रूप से गायत्री मंत्र और णमोकार महामंत्र को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। णमोकार मंत्र जैन धर्म का मूल मंत्र होने के साथ-साथ आत्मा की शुद्धि और चेतना के उत्कर्ष का सार्वभौमिक सूत्र है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उन सभी अरिहंतों और सिद्धों का स्मरण किया जाता है, जिन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है।</p>
<p><strong>मंत्र के प्रभाव से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि यह मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक और लोकोत्तर माना जाता है। जहां लौकिक मंत्र केवल सांसारिक लाभ तक सीमित रहते हैं, वहीं णमोकार महामंत्र लौकिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके नियमित स्मरण से भय, तनाव, दरिद्रता और विपत्तियों से मुक्ति के अनेक अनुभव सामने आए हैं। कई श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि इस मंत्र के प्रभाव से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें मानसिक बल प्राप्त हुआ है। ओपी जैन ने कहा कि णमोकार महामंत्र केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। यह “जिओ और जीने दो” के सिद्धांत को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।</p>
<p><strong>विश्व में शांति, भाईचारे और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना </strong></p>
<p>अहिंसा, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए यह मंत्र मार्गदर्शक का कार्य करता है। वर्तमान समय में जब दुनिया अशांति और संघर्षों से जूझ रही है, ऐसे में यह महामंत्र शांति और संतुलन का सशक्त माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर शहर के विभिन्न जैन मंदिरों की समितियों, सामाजिक संगठनों और जैन समाज के पदाधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने देश और विश्व में शांति, भाईचारे और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मकता, एकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।</p>
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		<title>महाराज श्री का मंगल प्रवेश मनाया विश्व णमोकार दिवस: उपाध्याय विकसंत सागर जी ने महामंत्र की महत्ता बताई </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 13:23:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज की ओर से गुरुवार को प्रातः 7.15 बजे जवाहर स्कूल से उपाध्याय विकसंत सागर जी महाराज ससंघ की भव्य अगवानी की गई। जैन भवन तक शोभायात्रा में महिलाएं एक समान साड़ी में मंगल कलश धारणकर जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230;  कुचामनसिटी। जैन समाज की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज की ओर से गुरुवार को प्रातः 7.15 बजे जवाहर स्कूल से उपाध्याय विकसंत सागर जी महाराज ससंघ की भव्य अगवानी की गई। जैन भवन तक शोभायात्रा में महिलाएं एक समान साड़ी में मंगल कलश धारणकर जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> कुचामनसिटी।</strong> जैन समाज की ओर से गुरुवार को प्रातः 7.15 बजे जवाहर स्कूल से उपाध्याय विकसंत सागर जी महाराज ससंघ की भव्य अगवानी की गई। जैन भवन तक शोभायात्रा में महिलाएं एक समान साड़ी में मंगल कलश धारणकर जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया। जैन भवन में उपाध्यक्ष श्री ने णमोकार महामंत्र के महत्व को बताते हुए कहा कि इस महामंत्र में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्यक्ष और सर्व साधु की स्तुति की गई है।</p>
<p>इस मंत्र की आराधना सभी देवी देवता भी करते हैं। सुभाष रावका और मनोज पांडया ने बताया कि इस अवसर पर चित्र अनावरण व दीप प्रज्जलन के पुण्यार्जक नेहरी राजकुमार, सुमति पहाडिया परिवार रहे। पद प्रक्षालन के पुण्यार्जक पवनकुमार गोधा, रितुराज गोधा मारोठ वाले रहे। श्री जैन वीर मंडल के सौभागमल गंगवाल के अनुसार विश्व णमोकार दिवस पर समाज ने 11 हजार जाप किए। इसमें समाज के सभी श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।</p>
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		<title>सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के चरणों में गूंजा णमोकार महामंत्र: विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर विश्वशांति महायज्ञ का हुआ आयोजन </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 13:21:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व शांति एवं विश्व कल्याण की भावना से विश्व के देशों में एक साथ णमोकार महामंत्र का सामूहिक उच्चारण किया गया। णमोकार महामंत्र का जाप विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर प्रातः 8.01 पर प्रारंभ हुआ। कुंडलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह रिपोर्ट&#8230; कुंडलपुर दमोह। विश्व शांति एवं विश्व कल्याण की भावना से विश्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व शांति एवं विश्व कल्याण की भावना से विश्व के देशों में एक साथ णमोकार महामंत्र का सामूहिक उच्चारण किया गया। णमोकार महामंत्र का जाप विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर प्रातः 8.01 पर प्रारंभ हुआ। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> विश्व शांति एवं विश्व कल्याण की भावना से विश्व के देशों में एक साथ णमोकार महामंत्र का सामूहिक उच्चारण किया गया। णमोकार महामंत्र का जाप विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर प्रातः 8.01 पर प्रारंभ हुआ। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में भी पूरे विश्व की मंगल कामना, विश्व में शांति स्थापना की मंगल भावना के साथ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से सामूहिक णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। इस अवसर पर कुंडलपुर कार्यालय परिसर में कुंडलपुर स्टाफ ने सामूहिक णमोकार मंत्र का पाठ किया। प्रबंधक मोतीलाल जैन, उपप्रबंधक‌‌‌ एनके जैन के साथ संतोष जैन, रविंद्र जैन, जयकुमार जैन, राजेश जैन, प्राशुक, शशांक श्रेयांश, संदेश सहित समस्त स्टाफ की उपस्थिति रही। प्रचारमंत्री जयकुमार जलज ने बताया पूज्य बड़े बाबा मंदिर परिसर में भी पूज्य बड़े बाबा के चरणों में महामंत्र णमोकार का सामूहिक जाप किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों की उपस्थिति के साथ ब्र.अरुण भैया कटंगी, संजय भैया मुरैना, सचिन भैया, अनिल , रविंद्र, आदित्य ,विपिन, अनिकेत, लालचंद, अभिषेक, बालचंद पुजारी की उपस्थिति रही। प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य राजेशकुमार निखिल संध्या जैन परिवार वाराणसी, अशोक विक्की पहल जैन मकरोनिया सागर, कमलकुमार नीलेश नीतेश नेहानगर सागर, पवन कुमार पंकज जैन खुरई ,राहुल रश्मि जिनिषा परिवार कटक उड़ीसा, अतुल अमुल अंशुल भिलाई छत्तीसगढ़, संतोष सिंघई मीर सौरभ जैन गोटेगांव, पवन विनोद आदित्य जैन भोपाल अजय आयुष आकांक्षा परिवार लखनादौन, अशोक आनंद अरुण जबलपुर ,चंद्रकुमार संचित विनय जैन चिरमिरी(छग) ,देवेंद्रकुमार पारस जितेंद्र जैन कोटा के साथ श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक किया।</p>
<p>सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर बड़े बाबा महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ (हवन) का आयोजन के साथ विश्व में शांति स्थापना की भावना के साथ णमोकार महामंत्र का सामूहिक पाठ किया गया। सायंकाल पुनः सामूहिक णमोकार महामंत्र का पाठ, भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हुई।</p>
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		<title>मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में णमोकार महामंत्र का पाठ: हाईलिंक सिटी स्थित भगवान मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में हुआ आयोजन  </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 11:21:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति की महान परंपरा में णमोकार महामंत्र अतिशयकारी माना जाता है। इंदौर से पढ़िए, गिरीश रारा की यह रिपोर्ट&#8230; इंदौर। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति की महान परंपरा में णमोकार महामंत्र अतिशयकारी माना जाता है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, गिरीश रारा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति की महान परंपरा में णमोकार महामंत्र अतिशयकारी माना जाता है। एक अर्थ में यह केवल जैन समाज ही नहीं अपितु मानव मात्र के लिए कल्याणकारी माना जाता है। पंच परमेष्ठी का स्मरण और उनकी स्तुति के निमित्त यह महामंत्र सर्वधर्म समभाव की दृष्टि से भी लोक कल्याणकारी समझा जा सकता है। इसके अंतर्गत अरिहंत और सिद्ध से लेकर समस्त साधुजनों को विशुद्ध भाव से नमन किया जाता है। णमोकार महामंत्र के पाठ के चमत्कारिक स्वरूप का दर्शन विभिन्न धर्म शास्त्रों में भी उल्लेखित है। इसी तारतम्य में हाईलिंक सिटी स्थित भगवान मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में सैकड़ांे की संख्या में जैन समाज के महिला एवं पुरुष वर्ग ने प्रातः 8.30 से 9 बजे तक णमोकार महामंत्र का पाठ किया। इस अवसर पर सकल समाजजन श्रद्धाभक्ति के भाव से भरे हुए थे। उल्लेखनीय है कि उक्त जिनालय में समय-समय पर भाव भक्ति का अद्भुत दृश्य उपस्थित होता रहा है।</p>
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		<title>विश्व में शांति के लिए महामंत्र णमोकार सामूहिक जाप 9 को : प्रातः 8.15 से 9.15 बजे तक अभय प्रशाल में वृहद कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:22:25 +0000</pubDate>
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<p><strong>पूरे विश्व में शांति के लिए जैन समाज के जीतो, विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने ऐतिहासिक पहल की है। जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाईजेशन (जेआईटीओ) के आह्वान पर विश्व कल्याण के लिए णमोकार महामंत्र का जाप किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> वर्तमान में पूरे विश्व में अशांति का माहौल है। चाहे वह युद्ध हो, आतंकी हमला हो, कहीं पर शांति नहीं है। इससे पूरे विश्व में कई लोग दुःखी एवं हताहत है एवं कितने ही परिवार उजड़ गये हैं। बेघर हो गए हैं। इन सभी संकटो से बचने के लिए जैन समाज के जीतो, विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने ऐतिहासिक पहल की है कि संपूण विश्व में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाईजेशन (जेआईटीओ) के आह्वान पर विश्व कल्याण के लिए भारत सहित 108 देशों में समूचे विश्व को शांति एवं सदभावना का संदेश देने के लिए गुरुवार 9 अप्रैल सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया जाएगा। इंदौर शहर में प्रातः 8.15 से 9.15 बजे तक अभय प्रशाल में सामूहिक णमोकार महामंत्र का जाप किया जा रहा है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ जीतो के हंसमुख गांधी, मयंक जैन, राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सामूहिक णमोकार महामंत्र जाप का आयोजन समग्र जैन समाज एवं अहिंसा में विश्वास रखने वाले सभी समाज जन की उपस्थिति में किया जाएगा।</p>
<p>जाप समय में महिलाएं लाल चुनरी साड़ी एवं पुरुष वर्ग श्वेत वस्त्र में उपस्थित रहेंगे। इस महा आयोजन को सफल बनाने की अपील सकल जैन समाज, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, दिगंबर जैन समाज समाजिक संसद, महावीर ट्रस्ट, महिला परिषद् एवं समस्त सोशल ग्रुप महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, राकेश विनायका, सामाजिक सांसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, नवीन गोधा, टीके वेद, डॉ. जैनेंद्र जैन, सुशील पांड्या, भूपेंद्र जैन, अशोक मेहता, कांतिलाल बम एवं पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद् की अध्यक्ष मुक्ता जैन, रेखा जैन ने की है।</p>
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		<title>विश्व नवकार दिवस 9 अप्रैल पर विशेष : णमोकार महामंत्र: श्रद्धा, समता और आत्मशुद्धि का शाश्वत मंत्र </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:13:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समता और विनय का सार्वभौमिक संदेश है। नवकार दिवस पर पढ़िए श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र का विशेष आलेख&#8230; जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह केवल [&#8230;]]]></description>
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<p>जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समता और विनय का सार्वभौमिक संदेश है। <span style="color: #ff0000">नवकार दिवस पर पढ़िए श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र का विशेष आलेख&#8230;</span></p>
<hr />
<p>जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समता और विनय का सार्वभौमिक संदेश है। इसकी महिमा का उल्लेख प्राचीन जैन आगम ग्रंथ भगवती सूत्र के प्रारम्भ में महामंगल वाक्य के रूप में मिलता है.-</p>
<p>“णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं।”</p>
<p>यह मंत्र अनादि और अविनाशी माना गया है। सभी तीर्थंकरों ने इसकी महत्ता को स्वीकार किया है। इसे जैन धर्म का मूल मंत्र और जिनागम का सार कहा जाता है।</p>
<p><strong>गुण-पूजा का अद्वितीय संदेश</strong></p>
<p>णमोकार महामंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी व्यक्ति-विशेष या देवता की स्तुति नहीं की गई, बल्कि उनके गुणों को नमन किया गया है। यह व्यक्ति-पूजा नहीं, बल्कि गुण-पूजा का संदेश देता है। इसमें किसी प्रकार की याचना या कामना नहीं है, केवल निस्वार्थ श्रद्धा, समर्पण और आत्मशुद्धि का भाव है। यही कारण है कि यह मंत्र किसी एक संप्रदाय या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वभौमिक और सर्वग्राह्य है।</p>
<p>णमोकार महामंत्र में पांच पद है, 35 अक्षर है। इनमें 11 अक्षर लघु हैं, 24 गुरु हैं, 15 दीर्घ हैं और 20 हस्व हैं। 35 स्वर हैं और 34 व्यंजन हैं। यह एक अद्वितीय बीज संयोजना है। &#8216;णमो अरिहंताणं&#8217; में सात अक्षर है, &#8216;णमो सिद्धाणं&#8217; में पांच अक्षर हैं, &#8216;णमो आयरियाणं&#8217; में सात अक्षर हैं, &#8216;णमो उवज्झायाणं&#8217; में सात अक्षर है, &#8216;णमो लोए सव्व साहूणं&#8217; में नौ अक्षर हैं। इस प्रकार इस महामंत्र में कुल 35 अक्षर हैं। स्वर और व्यंजन का विश्लेषण करने पर &#8216;नमो अरिहंताणं&#8217; में 7 स्वर और 6 व्यंजन हैं, &#8216;नमो सिद्धाणं&#8217; में 5स्वर और 6 व्यंजन हैं, &#8216;नमो उवज्झायाणं&#8217; में 7 स्वर और 7 ही व्यंजन हैं। &#8216;नमो लोए सव्व साहूणं&#8217; में 6स्वर तथा 6 व्यंजन हैं। इस प्रकार नमोकार महामंत्र में 35 स्वर और 34 व्यंजन हैं। यह महामंत्र जैन आराधना और साधना का ध्रुव केन्द्र है, इसकी शक्ति अपरिमेय है। इस महामंत्र के वर्णों के संयोजन पर चिन्तन करें तो यह बड़ा अद्भुत और पूर्ण वैज्ञानिक है। इसके बीजाक्षरों को आधुनिक शब्द विज्ञान की कसौटी पर कसने पर साधक यह पाते हैं कि इसमें विलक्षण ऊर्जा है और शक्ति का भण्डार छिपा हुआ है। प्रत्येक अक्षर का विशिष्ट अर्थ है, प्रयोजन और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने की क्षमता है।</p>
<p><strong>पंच परमेष्ठियों का वंदन</strong></p>
<p>इस मंत्र में पंच परमेष्ठियों को नमस्कार किया गया हैकृअरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु।</p>
<p>अरिहंत वे हैं जिन्होंने अपने आंतरिक शत्रुओंकृराग, द्वेष, मोह और वासनाओं पर विजय प्राप्त कर सर्वज्ञता को उपलब्ध किया।</p>
<p>सिद्ध वे मुक्त आत्माएँ हैं जो जन्म-मृत्यु के चक्र से परे मोक्ष में स्थित हैं।</p>
<p>आचार्य संघ के आध्यात्मिक पथप्रदर्शक हैं।</p>
<p>उपाध्याय शास्त्रों के ज्ञाता एवं अध्यापक हैं।</p>
<p>साधु वे तपस्वी आत्माएँ हैं जो आत्मकल्याण और लोककल्याण हेतु धर्म का आचरण करती हैं।</p>
<p>जैन दर्शन के अनुसार आध्यात्मिक उत्कर्ष में न तो वेष बाधक है और न ही लिंग। स्त्री हो या पुरुष, सभी आत्मिक उन्नति के अधिकारी हैं।</p>
<p><strong>साधना और मानसिक शांति</strong></p>
<p>श्रद्धा, शुद्ध उच्चारण और एकाग्र भाव से णमोकार महामंत्र का जप मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। शास्त्रों में इसे “सर्व पापों का नाश करने वाला और परम मंगलकारी” कहा गया है। प्रत्येक अक्षर स्वयं में मंत्रस्वरूप है और इसका जप किसी भी क्रम में किया जा सकता है। ध्यानपूर्वक जप करने से चित्त की चंचलता कम होती है और साधक आत्मस्वरूप के निकट पहुँचता है। यह मंत्र हमें भीतर की पवित्र चेतना से जोड़ता है।</p>
<p><strong>भाषिक एवं वैज्ञानिक संरचना</strong></p>
<p>णमोकार महामंत्र प्राकृत भाषा में रचित है और इसकी रचना आर्या छंद में की गई है। इसके पाँच मुख्य पदों में कुल 35 अक्षर माने गए हैं। ध्वनि-विज्ञान की दृष्टि से इसमें लघु-गुरु, ह्रस्व-दीर्घ वर्णों का संतुलित संयोजन है। स्वर और व्यंजन की विशिष्ट व्यवस्था इसे अद्वितीय बीज-संरचना प्रदान करती है।</p>
<p>आधुनिक ध्वनि-विज्ञान के अनुसार, मंत्रोच्चारण से उत्पन्न कंपन मानसिक और शारीरिक संतुलन में सहायक होते हैं। प्रत्येक अक्षर में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मजागरण की क्षमता निहित है।</p>
<p><strong>आत्मजागरण का मार्ग</strong></p>
<p>णमोकार महामंत्र बाह्य आडंबरों से हटाकर साधक को आत्मा के शुद्ध स्वरूप की ओर ले जाता है। इसमें भौतिक उपलब्धियों की कामना नहीं, बल्कि आत्मोन्नति का मार्ग निहित है। यह समता, विनय और करुणा का संदेश देता है।</p>
<p>वास्तव में, णमोकार महामंत्र केवल जैन धर्म का मूल मंत्र नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आत्मजागरण का शाश्वत उद्घोष है। गुणों की आराधना ही आत्मा को परम शांति और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करती है, और यही इस महामंत्र का सार है।</p>
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		<title>जिनधर्म रक्षक के सदस्य पर्व जैन विहान जैन सेठिया ने &#039;सर्वधर्म प्रार्थना&#039; में किया&#039; का प्रतिनिधित्व : शास्त्रीय भाषा प्राकृत में &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; का सस्वर वाचन किया </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 16:32:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गांधी स्मृति,तीस जनवरी मार्ग के कीर्ति मंडपम् में गिल्ड फार सर्विस एवं वार विंडो एसोसिएशन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर &#8216;सर्वधर्म प्रार्थना एवं भजन संध्या&#8217; का आयोजन हुआ। नईदिल्ली से पढ़िए, इंदु जैन की यह खबर&#8230; नईदिल्ली। गांधी स्मृति,तीस जनवरी मार्ग के कीर्ति मंडपम् में गिल्ड फार सर्विस एवं वार विंडो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गांधी स्मृति,तीस जनवरी मार्ग के कीर्ति मंडपम् में गिल्ड फार सर्विस एवं वार विंडो एसोसिएशन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर &#8216;सर्वधर्म प्रार्थना एवं भजन संध्या&#8217; का आयोजन हुआ। <span style="color: #ff0000">नईदिल्ली से पढ़िए, इंदु जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नईदिल्ली।</strong> गांधी स्मृति,तीस जनवरी मार्ग के कीर्ति मंडपम् में गिल्ड फार सर्विस एवं वार विंडो एसोसिएशन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर &#8216;सर्वधर्म प्रार्थना एवं भजन संध्या&#8217; का आयोजन हुआ। भारत के अनेक विशिष्ट व्यक्तियों के सानिध्य में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना में जैनधर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए &#8216;जिनधर्म रक्षक&#8217; के पर्व जैन ने संस्कृत भाषा के भक्तामर स्तोत्र एवं सभी की मंगल कामना करते हुए &#8216;मेरी भावना&#8217; का सस्वर वाचन किया। पर्व ने जैन प्रार्थना के प्रारंभ में &#8216;णमो जिणाणं-जय जिनेन्द्र&#8217; कहकर सभी का अभिनंदन किया और कहा कि &#8220;जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत जिनके नाम से अपने देश का नाम भारत पड़ा। ऐसी भारत भूमि को मैं नमन करता हूं। इसके बाद उसने ओजस्वी स्वर में जैन प्रार्थना की। विश्व में शांति की स्थापना हो इस भावना से पर्व एवं विहान ने सभी भाषाओं की जननी, भारत की शास्त्रीय भाषा प्राकृत में &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; का सस्वर वाचन किया।</p>
<p><strong>सभी को अत्यंत गौरव की अनुभूति हुई</strong></p>
<p>जैनधर्म की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि,अल्पसंख्यक आयोग की विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य तथा जिनधर्म रक्षक की ओर से इस आयोजन की जैन संयोजिका डॉ. इंदु जैन राष्ट्र गौरव ने बताया कि विशिष्ट अतिथियों एवं दर्शकों के समक्ष विशाल सभागार में जब बच्चे जैन प्रार्थना कर रहे थे तो सभी को अत्यंत गौरव की अनुभूति हो रही थी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की धर्मपत्नी गुरशरण कौर, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल, &#8216;द गिल्ड फार सर्विस&#8217; की अध्यक्षा मीरा खन्ना,&#8217;वार विंडोज एसोसिएशन&#8217; की अध्यक्षा दमयंती ताम्बे आदि विशिष्ट अतिथियों ने &#8220;जिनधर्म रक्षक&#8221; के सदस्य, दोनों बच्चों की सुंदर प्रस्तुति के लिए आशीर्वाद देते हुए उन्हें सम्मानित किया। जिनधर्म रक्षक की ओर से डॉ. इंदु जैन ने भी पर्व एवं विहान को पुरस्कार दिए। सर्वधर्म प्रार्थना में जैन, हिन्दू, मुस्लिम,सिख, ईसाई, बहाई, पारसी आदि सभी धर्म के बाल प्रतिनिधियों ने अपने-अपने धर्म की प्रार्थनाएं प्रस्तुत कीं एवं बाद में प्रसिद्ध गायिका रानीता डे ने भजनों की भावपूर्ण शास्त्रीय प्रस्तुति दी।</p>
<p><strong>  उपलब्धि पर लगा बधाइयों का तांता</strong></p>
<p>जैन समाज के प्रसिद्ध समाजसेवी सुखराज सेठिया के पौत्र एवं सुनील-सुरुचि के पुत्र विहान सेठिया एवं देव-शास्त्र-गुरु के प्रति समर्पित, इग्नू के प्रोफेसर प्रवीण जैन एवं समाजसेविका सुमन जैन के पुत्र पर्व जैन ने जैनधर्म का प्रतिनिधित्व करके जैन समाज को गौरवान्वित किया है। इस विशेष उपलब्धि के लिए दोनों बालकों एवं उनके परिवारजन को जैन समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने बधाइयां दीं।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति हुई विराजमान: गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजी के चरण स्थापित </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:35:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस बीच आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति का आगमन जयजयकार के साथ हुआ तथा गुरु उपकार भवन में सिंहासन पर प्रतिकृति विराजमान की गई। इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने कहा कि नगर के प्रत्येक भक्त के हृदय में गुरुदेव विराजमान है और यहां पर जितने भी कार्यक्रम हुए हैं और चल रहे हैं। वह सभी अभूतपूर्व हुए तथा ऊंचाइयों को प्राप्त हो रहे हैं। यह सब गुरुदेव की वरदानी छांव का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने अपने सभी शिष्यों को ऐसी घुट्टी पिलाई है कि उसके पास आशीर्वाद की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने गुरुदेव के हायकू को सुनाते हुए कहा कि ‘गुरु अंक में पले बड़े हम, अंक भी वही देंगे’ अर्थात उनकी गोद में रहकर हमने जो शिक्षा प्राप्त की उसका परिणाम भी उनके ही द्वारा हम सभी मुनिराजों को प्राप्त हो रहा है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संभवसागरजी ने सुनाए अपने संस्मरण </strong></p>
<p>मुनि श्री ने 17 फरवरी 2024 को स्मरण करते हुए कहा कि आज के दिन पूरे देश की नजर चंद्रगिरी डोंगरगढ़ की ओर थी। भारत ही नहीं विश्व का प्रत्येक भक्त जाप, भक्तामर, शांतिविधान या णमोकार महामंत्र का पाठ कर रहा था कि आज कोई चमत्कार घटित हो जाए और पूज्य गुरुदेव उठकर बैठ जाएं लेकिन, कोई चमत्कार घटित न हो सका। सभी की आंख गीली थी। सभी के मुख से एक ही उच्चारण था। ‘सबकुछ दिया है तुमने हमको हम कुछ भी न दे पाए’ हमारे और गुरुदेव के बीच अभी भी पचास किमी का फासला था। प्रातःकाल से हम लोग संध्या काल तक चालीस किमी चले और मात्र 10 किमी की दूरी शेष रह गई थी लेकिन, आप लोग सभी पुण्यशाली हो कि हमारे बाजू में बैठे मुनिराज निस्सीम सागर जी पिछले एक हफ्ता से गुरुजी के पास सेवा में दिनरात तत्पर थे।</p>
<p><strong>गुरुदेव की स्मृतियां उभर रही: मुनिश्री </strong></p>
<p>गुरुदेव की शेष स्मृति को आप लोग उनके ही मुख से कल सुनेंगे। मुनि श्री ने कहा कि विदिशा वालों को जो कुछ भी गुरुदेव ने दिया। वह ‘भूतो न भविष्यति’। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अरिहंत विहार का यह विशाल परिसर हो या शीतलधाम का विशाल समवशरण, गुरुदेव की स्मृतियां स्मृति पटल पर एक के बाद एक उभरकर सामने आ रही है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री समयसागरजी 23 मुनि दीक्षा देंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 18 फरवरी को शाम 6 बजे नगर से मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र के लिए 6 बस तथा कई चार पहिया वाहनों से भक्तगण रवाना होंगे। ‘मुक्तागिरी’ मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ प्रकृति का अनुपम स्थान है। जहां से अनंतानंत मुनिराजों ने साधना की एवं मोक्ष को गए हैं। ऐसे स्थान पर पहली बार आचार्य श्री समयसागर महाराज 19 फरवरी को 23 जैनेश्वरी मुनि दीक्षा देंगे। जिसमें विदिशा नगर गौरव ऐलक कैवल्य सागर एवं ऐलक गरिष्ठ सागर महाराज, ऐलक गौरव सागर महाराज सहित अन्य मुनिसंघों के संघस्थ ऐलक एवं क्षुल्लक शामिल हैं तथा कई नए ब्रह्मचारी भी दीक्षित हो सकते हैं।</p>
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		<title>जो णमोकार महामंत्र जप ले उसका उद्धार होता है : मुनि श्री प्रमाण सागर जी का कुंडलपुर से हुआ विहार </title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 16:21:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। कुंडलपुर (दमोह)से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर (दमोह)। विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर (दमोह)से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। प्रचार मंत्री जयकुमार जलज ने बताया कि आज भी पूज्य बड़े बाबा के चरणों में अभिषेक करने श्रद्धालु भक्तों का ताता लगा रहा। मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने पूज्य बड़े बाबा की पावन नगरी, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की साधना स्थली में संत निवास के सामने प्रकृति की सुंदर छटा युक्त प्रांगण में बहुचर्चित शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्तों की शंकाओं का समाधान देते हुए कहा कि बार-बार व्रत की भावना भाना चाहिए, व्रत का स्मरण सदैव करना चाहिए। एक ब्रह्मचारिणी दीदी ने शंका रखी कि मुनि श्री आपने बड़े बाबा की इतनी एनर्जी कैसे पाई। मुनिश्री ने समाधान देते हुए कहा अपने आप को बड़े बाबा के चरणों में अर्पित कर दिया, वहां जो बरस रहा था आत्मसात कर लिया। णमोकार मंत्र के विषय में की गई शंका का समाधान करते हुए मुनि श्री ने कहा यह स्वयं सिद्ध मंत्र है। सिद्ध नहीं करना पड़ता, मंत्र जपना होता है ।जप लिया तो काम बन गया। इसमें कोई भी बीजाक्षर नहीं सीधा-साधा मंत्र है। इसे सीधा पढ़ो या उल्टा पढ़ो जैसे पढ़ना हो पढ़ो किसी भी स्थिति में पढ़ो मारण उच्चारण में इसका कोई प्रयोग नहीं।</p>
<p><strong>एक बार मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय</strong></p>
<p>इस मंत्र के एक अक्षर पढ़ने से 60 सागर के कर्म का क्षय होता। एक बार णमोकर मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय हो जाता है। जो णमोकर मंत्र जप ले उसका उद्धार होता है। एक और ब्रह्मचारिणी दीदी ने मुनि श्री से निवेदन किया कि गुरुदेव कुंडलपुर आकर आपको इतना तो समय देना चाहिए। जिससे हम सारी बहनें संतुष्ट हो सके। मुनि श्री उपस्थित जनसमूह से ही पूछ बैठे। यह लोग क्या कभी संतुष्ट हो जाएंगे। मुनिश्री ने कहा कभी संतुष्ट होना नहीं। मुनि श्री ने बताया कि गुरुदेव ने कहा था लोगों को संतुष्ट करने कभी मत जाओ। उनकी प्यास जगाने जाओ। धर्म क्षेत्र में धर्म हेतु निष्ठा आवश्यक है धर्म भावना जगाओ। निष्ठा गहरी कीजिए बच्चों में भी कर्तव्य बोध जगाइए।</p>
<p><strong>मुनिश्री का विहार बांदकपुर की ओर</strong></p>
<p>पांच दिवसीय बड़े बाबा के चरणों में प्रवास के उपरांत मुनि श्री संघ का विहार बांदकपुर की ओर हो गया। रात्रि विश्राम देव डोगड़ा ग्राम में हो रहा। संभवतः मुनि श्री संस्कारधानी जबलपुर की ओर बढ़ रहे हैं। जहां 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है।</p>
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