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	<title>ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र बाजार रहेगा गुलजार : दो दिन बाजार में जमकर होगी खरीदारी, उम्मीदें उफान पर  </title>
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		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 13:02:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र इस साल मंगलवार 14 और बुधवार 15 अक्टूबर को आ रहा है। यह नक्षत्र खरीदारी के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, खासकर सोना, चांदी, वाहन और संपत्ति खरीदने के लिए।</p>
<p>जैन ने बताया इस नक्षत्र में की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। डॉ. जैन ने पुष्य नक्षत्र का महत्व बताते हुए कहा कि पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है और यह धन और समृद्धि का प्रतीक भी। इस नक्षत्र में की गई खरीदारी लंबे समय तक उपयोग में रहती है और इससे घर में बरकत आती है। पुष्य नक्षत्र का संबंध देवी लक्ष्मी से है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजन से पहले वाला पुष्य नक्षत्र विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>पुष्य नक्षत्र के दौरान खरीदारी के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। 14 अक्टूबर मंगलवार को प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत की चौघड़िया) सुबह 9.15 से दोपहर 1.33 बजे तक। अपराह्न मुहूर्त (शुभ) दोपहर 3 से शाम 4.26 बजे तक, सायाह्न मुहूर्त (लाभ) शाम 7.26 से रात 9 बजे तक। रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)। रात 10.33 से सुबह 3.14 बजे तक, 15 अक्टूबर बुधवार को शुभ की चौघड़िया प्रातः 10.41 बजे से 12.07 बजे तक। चार एवं लाभ की चौघड़िया दोपहर 2.58 बजे से 5.50 बजे शाम तक रात्रि में शुभ, अमृत एवं चर की चौघड़िया शाम 7.24 से 12.07 बजे रात्रि तक।</p>
<p><strong>पुष्य नक्षत्र में खरीदने योग्य वस्तुएं</strong></p>
<p>जैन ने कहा इस नक्षत्र में आप निम्नलिखित वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं ’सोना और चांदी’। धन और समृद्धि का प्रतीक वाहन। नए वाहन की खरीदारी के लिए शुभ संपत्तिः जमीन या मकान खरीदने के लिए उत्तम। बहीखाता। नए बहीखाते शुरू करने के लिए शुभ, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटमः घर के लिए आवश्यक वस्तुएं पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। इसलिए, दीपावली से पहले आने वाले इस नक्षत्र का लाभ उठाएं और अपनी जरूरत की चीजें खरीदें।</p>
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		<title>18 सितंबर को मनाया जायेगा क्षमावाणी पर्व : दशलक्षण महापर्व आज से 17 सितंबर तक मनाए जाएंगे </title>
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		<pubDate>Sun, 08 Sep 2024 07:03:13 +0000</pubDate>
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<p><strong>दशलक्षण महापर्व 08 सितंबर से प्रारंभ होंगे, जो 17 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन पूर्ण होंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी देते हुए कहा कि ऋषि पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक जैन धर्माब्लमी प्रातः हर दिन जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक,नित्तनियम पूजन , दशलक्षण धर्म के प्रत्येक दिन के अनुसार क्रमशः उत्तम क्षमा,उत्तम मार्दव ,उत्तम आर्जव,उत्तम शौच,उत्तम सत्य,उत्तम संयम,उत्तम तप,उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य, उत्तम ब्रह्मचर्य के उपवास, व्रत रख कर पूर्ण भक्ति भाव से पूजन करते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दशलक्षण महापर्व 08 सितंबर से प्रारंभ होंगे, जो 17 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन पूर्ण होंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी देते हुए कहा कि ऋषि पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक जैन धर्माब्लमी प्रातः हर दिन जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक,नित्तनियम पूजन , दशलक्षण धर्म के प्रत्येक दिन के अनुसार क्रमशः उत्तम क्षमा,उत्तम मार्दव ,उत्तम आर्जव,उत्तम शौच,उत्तम सत्य,उत्तम संयम,उत्तम तप,उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य, उत्तम ब्रह्मचर्य के उपवास, व्रत रख कर पूर्ण भक्ति भाव से पूजन करते हैं।</p>
<p>पर्व के बीच 13 सितम्बर शुक्रवार को सुगंध दशमी व्रत बड़े ही उत्साह धूम धाम से मनाया जाता है। जैन समाज के हर नर नारी ,बच्चे सभी प्रातः जिनेन्द्र भगवान जी का अभिषेक, पूजन पाठ करते हैं दोपहर बाद शहर के सभी जैन मंदिरों में दर्शन करते हुए धूप खेते है। दशमी के दिन महिलाएं खास तौर से व्रत उपवास रखती हुई भगवान की भक्ति करके धूप खेती है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-65586" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240908-WA0008.jpg" alt="" width="560" height="672" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240908-WA0008.jpg 560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240908-WA0008-250x300.jpg 250w" sizes="(max-width: 560px) 100vw, 560px" /> अनंत चतुर्दशी को उपवास के उपरांत फिर क्षमा वाणी कार्य क्रम प्रारंभ होते हैं जो क्षमावाणी पर्व मुख्य रूप से 18 सितंबर बुधवार को है। और क्षमा वाणी का ये कार्यक्रम फिर कुछ दिन चलता रहता है समाज के लोग पूरे वर्ष भर में की गई गलती के लिए एक दूसरे से विनम्रता पूर्वक क्षमा मांगते हैं।</p>
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		<title>चार माह शुभ कार्यों पर लगेगा विराम : देवशयनी एकादशी 16 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि ,अमृत सिद्धि, शुक्ल योग में </title>
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		<pubDate>Wed, 17 Jul 2024 05:53:57 +0000</pubDate>
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<p><strong>ऋतु चक्र ऐसा चक्र माना जाता है जो व्यक्ति को कब क्या किस ढंग से कार्य करना चाहिए, यह ज्ञान कराता है। चातुर्मास काल के चार महीने भी व्यक्ति को यही ज्ञान कराने के होते हैं। हर माह एकादशी तिथि एक माह में दो बार आती है पर कुछ एकादशी तिथि के व्रत विशेष बन जाते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> ऋतु चक्र ऐसा चक्र माना जाता है जो व्यक्ति को कब क्या किस ढंग से कार्य करना चाहिए, यह ज्ञान कराता है। चातुर्मास काल के चार महीने भी व्यक्ति को यही ज्ञान कराने के होते हैं। हर माह एकादशी तिथि एक माह में दो बार आती है पर कुछ एकादशी तिथि के व्रत विशेष बन जाते हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि देव शयनी एकादशी तिथि से प्रसिद्ध है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया इस वार की देव शयनी एकादशी तिथि का आरंभ 16 जुलाई को रात 8 बजकर 33 मिनट से होगा।</p>
<p>एकादशी तिथि का समापन 17 जुलाई को रात 9 बजकर 2 मिनट पर होगा। देवशयनी एकादशी का व्रत 17 जुलाई 2024, बुधवार को रखा जाएगा। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद 18 जुलाई को सुबह 5 बजकर 35 मिनट से सुबह 8 बजकर 20 मिनट के बीच रहेगा। जैन ने बताया कि इस बार की देव शयनी एकादशी सर्वार्थ सिद्धि ,अमृत सिद्धि एवं शुक्ल योग में पड़ने से विशेष शुभ रहेगी। देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान श्री विष्णु विश्राम के लिए क्षीर सागर में चले जाते है और पूरे चार महीनों तक वहीं पर रहेंगे।</p>
<p>भगवान श्री हरि के शयनकाल के इन चार महीनों को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। इन चार महीनों में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल हैं। चातुर्मास के आरंभ होने के साथ ही अगले चार महीनों तक विवाह, नवीन ग्रह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा, कूप /वोरिंग खनन, मुंडन, दुरागमन आदि सभी शुभ कार्य करना वर्जित है। हालाकि सिंध, पंजाब, हरियाणा, कश्मीर, हिमाचल आदि कुछ प्रांतों में और विशेष धर्म संप्रदाय में ये कार्य किए जाते हैं।</p>
<p>जैन के अनुसार भूमि पूजन/ नीव, सगाई, मंत्र गृहण, व्यापार आरंभ, मकान, भूमि, संपत्ति, वाहन खरीदना &#8211; बेचना, प्रतिमा निर्माण, मंदिर निर्माण जैसे कार्य पर इस समय में कोई रोक नहीं है। देवशयनी एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि बनी रहती है। 12 नवम्बर कार्तिक शुक्ल एकादशी मंगलवार के दिन देवउठान एकादशी को यह देव शयन काल समाप्त हो जायेगा।</p>
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		<title>मिलेगा रवि पुष्य नक्षत्र योग का संयोग : गुप्त नवरात्रि नौ दिन की बजाय दस दिनों की मनेगी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/gupta_navratri_will_celebrated_for_ten_days_instead_of_nine_days/</link>
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		<pubDate>Fri, 05 Jul 2024 16:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ यूं तो हिंदू नववर्ष का आरम्भ ही चैत्र नवरात्रि से होता है। पूरे वर्ष में चार नवरात्रि ऋतुओं के बदलाव पर आते हैं। चैत्र माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारम्भ बसंत नवरात्रि आश्वनी माह में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि ओर माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> यूं तो हिंदू नववर्ष का आरम्भ ही चैत्र नवरात्रि से होता है। पूरे वर्ष में चार नवरात्रि ऋतुओं के बदलाव पर आते हैं। चैत्र माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारम्भ बसंत नवरात्रि आश्वनी माह में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि ओर माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि होती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> यूं तो हिंदू नववर्ष का आरम्भ ही चैत्र नवरात्रि से होता है। पूरे वर्ष में चार नवरात्रि ऋतुओं के बदलाव पर आते हैं। चैत्र माह शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारम्भ बसंत नवरात्रि आश्वनी माह में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि ओर माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि होती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि दो नवरात्रि को हर कोई जानता है लेकिन दो गुप्त नवरात्रि को हर कोई नहीं जानता। इस वार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि 06 जुलाई से 15 जुलाई तक रहेगी इस प्रकार नौ दिन की जगह 10 दिनों की नवरात्रि होंगी। 07 जुलाई को पूरे दिन रात रविपुष्य योग रहेगा।</p>
<p>जैन ने कहा गुप्त नवरात्रि में साधना को गुप्त रखा जाता है साधना को प्रकट रूप में उतना फल नहीं जितना गुप्त रूप से गुप्त नवरात्रि में मंत्र जप, साधना सात्विक रूप से रहकर करने से मिलता है। जितना गुप्त साधना होगी उतनी ही सिद्धि, मनोकामना की पूर्ति होती है इनमे मंत्र जप मानसिक ही करना चाहिए। इस बार तृतीय तिथि की वृद्धि होने के कारण गुप्त नवरात्रि नौ की जगह दस दिन की है ऐसे में साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है।</p>
<p>घट स्थापना मुहूर्त :- 06 जुलाई शनिवार सुबह 07:14 से 08:57 बजे तक शुभ की बेला में, दूसरा अभिजीत मुहूर्त 11:53 बजे से 12:48 बजे तक है।</p>
<p>इस बार शनिवार होने से घोड़े की सवारी पर विराजमान होकर माता रानी आएगी। इस से अति वर्षा, भूस्खलन ,बाढ़ से हानि के योग हैं।</p>
<p><strong> गुप्त नवरात्रि में जरूर करें ये साधारण उपाय</strong></p>
<p>1. सुबह-शाम दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।</p>
<p>2. दोनों वक्त लौंग और बताशे का भोग लगाएं।</p>
<p>3. माता को लाल फूल चढ़ाएं।</p>
<p>4. मां का मंत्र पढ़कर ध्यान लगाएं।</p>
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		<title>दिन में एक छण स्वयं की परछाई भी नहीं दिखेगी :  21 जून को सबसे बड़ा दिन और रात होगी सबसे छोटी </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Jun 2024 08:57:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[21 जून को रात्रि 02:20 बजे सूर्य सायन कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इससे सूर्य दक्षिणायन होंगे और वर्षा ऋतु का आरंभ होगा। यह जानकारी वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने देते हुए कहा कि 21 जून को सबसे बड़ा दिन का मान होगा और रात सबसे छोटी होगी। इस दिन के बाद दिन छोटे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>21 जून को रात्रि 02:20 बजे सूर्य सायन कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इससे सूर्य दक्षिणायन होंगे और वर्षा ऋतु का आरंभ होगा। यह जानकारी वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने देते हुए कहा कि 21 जून को सबसे बड़ा दिन का मान होगा और रात सबसे छोटी होगी। इस दिन के बाद दिन छोटे और राते बडी होती जाएंगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> 21 जून को रात्रि 02:20 बजे सूर्य सायन कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इससे सूर्य दक्षिणायन होंगे और वर्षा ऋतु का आरंभ होगा। यह जानकारी वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने देते हुए कहा कि 21 जून को सबसे बड़ा दिन का मान होगा और रात सबसे छोटी होगी। इस दिन के बाद दिन छोटे और राते बडी होती जाएंगी। जैन ने कहा कि उत्तरी गोलार्द्ध वाले सभी देशो में सबसे बड़ा दिन होगा सबसे छोटी रातें। वही 22 दिसम्बर को सबसे बड़ी रात और दिन छोटा होता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62307" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-21-at-1.07.03-PM.jpeg" alt="" width="480" height="260" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-21-at-1.07.03-PM.jpeg 480w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-21-at-1.07.03-PM-300x163.jpeg 300w" sizes="(max-width: 480px) 100vw, 480px" /> 23 सितंबर को पृथ्वी की भूमध्य रेखा बिल्कुल सूर्य के सामने पड़ती है जिससे दिन- रात बराबर होते हैं। 21 जून से दिन छोटे होते जाएंगे छोटे होते होते 09 घंटे 36 मिनिट के रह जाएंगे और रातें बड़ी होती जाएंगी 14 घंटे 24 मिनिट किन्ही स्थानों पर हो जाएंगी। 21 जून को दोपहर में एक छण ऐसा भी आएगा जिसमे स्वयं व्यक्ति अपनी परछाई भी नहीं देख पायेगा। जैन ने बताया कर्क रेखा मध्यप्रदेश के उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, शहडोल, छत्तीसगढ़ शहरों से राजस्थान, झारखंड, गुजरात, पश्चिम बंगाल राज्यों से गुजरती है। 21 जून से सूर्य सायन कर्क राशि से सायन धनु राशि तक छह माह दक्षिणायन रहेंगे।इस समय कुछ विशेष शुभ कार्यो के मुहूर्त भी नहीं होते।</p>
<p><strong>21 जून को दिन बड़ा क्यों होता है?</strong></p>
<p>जैन ने कहा पृथ्वी सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा के सापेक्ष 23.5 डिग्री झुकी हुई है। 21 जून को सूर्य पृथ्वी के नार्थ पोल मतलब उत्तरी गोलार्द्ध पर होता है। इसी बजह से सूर्य की रोशनी पूरे भारत के बीचोबीच से गुजरने वाली कर्क रेखा पर सीधी तौर ज्यादा समय तक पड़ती है, इससे सूर्य की किरणें अन्य दिनों की अपेक्षा इस दिन ज्यादा समय तक पृथ्वी पर रहती है इसी खगोलीय घटना के कारण 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन और रातें सबसे छोटी होती हैं।</p>
<p><strong>कहां कितने घंटे का दिन होगा</strong></p>
<p>-ग्वालियर 13 घण्टे 44 मिनिट का दिन रात्रि 10 घण्टे 16 मिनिट की<br />
-भोपाल 13 घण्टे 31 मिनिट का दिन रात 10 घण्टे 29 मिनिट की<br />
-उज्जैन 13 घण्टे 31 मिनिट रात 10 घण्टे 29 मिनिट<br />
-दिल्ली 13 घण्टे 58 मिनिट का दिन रात 10 घण्टे 02 मिनिट की होगी।</p>
<p>इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित सभी देशों में दिन अधिकतम बड़े होंगे और रातें अधिकतम छोटी होगी, वही सभी उत्तरी गोलार्द्ध बाले देशों में सबसे ज्यादा गर्मी रहेगी और दक्षिणी गोलार्द्ध वाले देशों में सबसे ज्यादा ठंडे रातें होगी।</p>
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		<title>कुछ राशियों पर रहेगी शनि की टेढ़ी दृष्टि :  सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, गर्मी, लू, हिंसा बढ़ेगी </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Apr 2024 09:46:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सूर्य का राशि परिवर्तन बड़ा असर करता है, व्यापार पर और व्यक्ति की राशियों पर भी। ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा व्यापारिक वस्तुओ पर इसका बड़ा उतार चढ़ाव भरा असर हो सकता है। दूध, घी, तेल, तिलहन, बादाम, सुपारी, सोना, चांदी में तेजी भड़क सकती है। गेहूं, चना, चावल में 15 दिन मंदी फिर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सूर्य का राशि परिवर्तन बड़ा असर करता है, व्यापार पर और व्यक्ति की राशियों पर भी। ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा व्यापारिक वस्तुओ पर इसका बड़ा उतार चढ़ाव भरा असर हो सकता है। दूध, घी, तेल, तिलहन, बादाम, सुपारी, सोना, चांदी में तेजी भड़क सकती है। गेहूं, चना, चावल में 15 दिन मंदी फिर तेजी हो सकती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> सभी ग्रहों में ग्रहों का राजा कहा जाने वाला सूर्य 13 अप्रेल को रात्रि 09:03 बजे मीन राशि बदलकर अपनी उच्च राशि मेष में पहुंच जाएगा। इस के साथ मल मास समाप्त हो जायेगा। यूं तो सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है । पूरे एक साल में सभी 12 राशियों में प्रवेश कर लेता है। सूर्य का राशि परिवर्तन बड़ा असर करता है, व्यापार पर और व्यक्ति की राशियों पर भी। ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा व्यापारिक वस्तुओ पर इसका बड़ा उतार चढ़ाव भरा असर हो सकता है। दूध, घी, तेल, तिलहन, बादाम, सुपारी, सोना, चांदी में तेजी भड़क सकती है। गेहूं, चना, चावल में 15 दिन मंदी फिर तेजी हो सकती है।</p>
<p>जैन ने अनुसार सूर्य पर शनि और मंगल ग्रह की युति की तृतीय पूर्ण दृष्टि भी रहेगी। अनेक स्थानों पर आग जनित घटना, तेज गर्मी, लू का प्रकोप, तेज आंधी &#8211; तूफान से हानि और भूकंप के झटके कहीं-कहीं देखने आ सकते हैं। चुनाव में आरोप प्रत्यारोप और कहीं हिंसा भड़क सकती है।</p>
<p><strong>राशियों पर प्रभाव &#8211;</strong><br />
मेष &#8211; सफलता, सम्मान, भाग्योदय<br />
वृष &#8211; कष्ट, रोग, भय<br />
मिथुन &#8211; धन लाभ, यश, कीर्ति<br />
कर्क- पद ,प्रतिष्ठा,सम्मान<br />
सिंह &#8211; यात्रा से लाभ, भाग्योदय, पिता से लाभ<br />
कन्या &#8211; रोग, भय, कष्ट<br />
तुला -पत्नी को कष्ट ,रोग,<br />
वृश्चिक &#8211; शत्रु ,रोग भय,हानि<br />
धनु &#8211; धन लाभ, यश, सम्मान<br />
मकर &#8211; क्लेश, स्थान परिवर्तन<br />
कुंभ &#8211; यात्रा से लाभ पराक्रम वृद्धि<br />
मीन &#8211; धन लाभ, परिवार में शुभ कार्य होंगे।</p>
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		<title>एक माह तक रहेगा मंगल कार्यों पर विराम : इस साल विवाह के लिए केवल 10 शुभ मुहूर्त बाकी </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Mar 2024 10:19:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि 12 मार्च को फुलेरा दोज पर विवाह का अबूझ मुहूर्त था। अब 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस वजह से मीन मल मास एक महीने तक यानी 13 अप्रेल तक रहेगा। इस से विवाह आदि शुभ कार्य नहीं होंगे। पढ़िए मनोज जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<hr />
<p><strong>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि 12 मार्च को फुलेरा दोज पर विवाह का अबूझ मुहूर्त था। अब 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस वजह से मीन मल मास एक महीने तक यानी 13 अप्रेल तक रहेगा। इस से विवाह आदि शुभ कार्य नहीं होंगे।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ग्वालियर।</strong> सगाई, विवाह, गृह प्रवेश, मुण्डन आदि संस्कार को शुभ मुहूर्त में करना आज भी भारतीय परंपरा में कायम है। चाहे इस के लिए समय का कितना भी इंतजार क्यों न करना पड़े। इस बार विवाह और गृह प्रवेश जैसे मंगल कार्यों के लिए यही होने वाला है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि 12 मार्च को फुलेरा दोज पर विवाह का अबूझ मुहूर्त था।</p>
<p>अब 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस वजह से मीन मल मास एक महीने तक यानी 13 अप्रेल तक रहेगा। इस से विवाह आदि शुभ कार्य नहीं होंगे। साथ में 17 मार्च से 24 मार्च तक होलाष्टक रहेंगे, इस वजह से विराम रहेगा। वैशाख कृष्ण पंचमी सोमवार 29 अप्रैल को शुक्र तारा पूर्व में अस्त हो जायेगा जो आषाढ़ कृष्ण अमावस्या शुक्रवार 05 जुलाई को पश्चिम दिशा में उदय होगा। जैन ने बताया शुक्र तारा अस्त से तीन दिन पहले से तीन दिनों बाद तक के विवाह आदि शुभ मुहूर्त नहीं होते। वैशाख कृष्ण चतुर्दशी मंगलवार 07 मई को गुरु तारा पश्चिम दिशा में अस्त होकर ज्येष्ठ कृष्ण नवमी शनिवार 01 जून को पूर्व दिशा में उदय होगा।</p>
<p>गुरु अस्त से तीन दिन पूर्व उदय के तीन दिन बाद तक भी शुभ कार्य नहीं होते। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र भौतिक सुख साधनों, संंपनता और पत्नी से आपसी प्रेम, दाम्पत्य सुखों को देता है अगर अस्त या निर्बल रहते समय विवाह किया तो दाम्पत्य जीवन में सुखों की कमी रहती हैं। इसी प्रकार गुरु को ज्ञान, शिक्षा, दीक्षा, सम्मान और पति सुखों का कारक गृह कहा गया है। इसके अस्त, निर्बल काल में भी विवाह मुहूर्त नहीं होते।</p>
<p><strong>आगे विवाह मुहूर्त </strong><br />
<strong>अप्रैल 18,21,22,23,26</strong></p>
<p><strong>मई और जून में कोई भी नहीं है।</strong></p>
<p><strong>जुलाई 09,11,15</strong></p>
<p><strong>नवंबर में 22</strong></p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>दिन बड़े और रात होने लगेंगी छोटी :  मकर संक्रांति पुण्य पर्व काल 15 को मनाया जायेगा </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jan 2024 11:07:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि सूर्य का मकर और कर्क राशियों के संक्रमण का अन्य राशियों से धर्म ग्रंथों में अधिक महत्व है। इस में भी मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। पढ़िए मनोज नायक की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि सूर्य का मकर और कर्क राशियों के संक्रमण का अन्य राशियों से धर्म ग्रंथों में अधिक महत्व है। इस में भी मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> यूं तो सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इस तरह पंचांग में 12 राशियां होती हैं। सूर्य एक के बाद एक हर राशि में एक माह रहता है। इसके एक से दूसरी राशि में प्रवेश अर्थात संक्रमण को ही संक्रांति कहा जाता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि सूर्य का मकर और कर्क राशियों के संक्रमण का अन्य राशियों से धर्म ग्रंथों में अधिक महत्व है। इस में भी मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।</p>
<p>इस दिन गंगा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। यह त्योहार जनवरी माह में 14 या 15 जनवरी के दिन ही पड़ता है। जब 13 जनवरी की रात सूर्य का मकर राशि में रात्रि 12 बजे के बाद से 14 के दिन रहते तक प्रवेश हो तो उस साल 14 जनवरी के दिन पुण्य पर्व काल यानी मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है और जिस साल 14 जनवरी को रात्रि 12 बजे बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करे तो फिर दूसरे दिन यानी 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर मनाया जाता है। इस बार 14 जनवरी की रात्रि 02:42 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहा है इसलिए 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाया जायेगा।</p>
<p><strong>सौर केलेंडर से होती है गणना</strong></p>
<p>जैन ने बताया कि यह ऐसा हिंदू त्योहार है जो चंद्रमा की विभिन्न स्थितियों के आधार पर मनाए जाने वाले अन्य हिंदू त्योहारों में से एक है। चंद्र कैलेंडर के बजाय सौर कैलेंडर के अनुसार इसकी गणना की जाती है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं जबकि रातें छोटी होने लगती हैं।<br />
मकर संक्रांति पुण्यकाल कब? &#8211; 15 जनवरी प्रातः 07:07 मिनट से सायं 05:47 बजे तक मकर संक्रांति पुण्य काल रहेगा अर्थात पूरे दिन पर्व रहेगा।<br />
महापुण्यकाल -प्रातः 07:07 बजे से प्रातः 08: 53 बजे तक सर्व श्रेष्ठ रहेगा।</p>
<p><strong>मकर संक्रांति पर्व विधि</strong></p>
<p>15 जनवरी को इस बार मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले उठकर साफ- सफाई कर लें। इसके बाद अगर संभव हो तो आसपास किसी पवित्र नदी तालाब कुआं आदि में स्नान करें। यदि ऐसा न कर पाएं तो घर में ही गंगाजल मिलकर स्नान करके खुद को शुद्ध कर लें। इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, तो पीले वस्त्र धारण कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। अंत में आरती करें और दान करें। दान में गर्म कपड़े, तिल युक्त वस्तुओ को जरूर दान करना चाहिए।</p>
<p><strong>दान करने का खास महत्व</strong></p>
<p>जैन ने कहा इस दिन से मलमास इसके साथ समाप्त होगा। धनु मल मास भी सूर्य के मकर में प्रवेश के साथ समाप्त हो जायेगा और विवाह, ग्रह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा आदि अन्य शुभ कार्य भी फिर से शुरू होंगे। आगे के छह महीने सूर्य उत्तरायण रहने से देवताओं के दिन माने गए हैं। इन दिनों में दिन धीरे धीरे बड़े और राते छोटी होती जायेंगी। गर्मी का अहसास भी धीरे-धीरे बढ़ेगा। कहते है महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्याग करने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था।</p>
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		<title>नए साल 2024 का आगाज : 5 शुभ संयोग से कोई भी ग्रहण इस वर्ष नहीं लगेगा </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Dec 2023 07:23:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंग्रेजी वर्ष 01जनवरी 2024 से प्रारंभ होने के कारण ज्योतिष की दृष्टि में 5 शुभ संयोग बनने से साल 2024 का आगाज बेहद शुभ संयोग में हो रहा है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि नववर्ष 2024 भारत के लिए काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है, क्योंकि पहले दिन ही खास राजयोग बन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंग्रेजी वर्ष 01जनवरी 2024 से प्रारंभ होने के कारण ज्योतिष की दृष्टि में 5 शुभ संयोग बनने से साल 2024 का आगाज बेहद शुभ संयोग में हो रहा है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि नववर्ष 2024 भारत के लिए काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है, क्योंकि पहले दिन ही खास राजयोग बन रहे हैं।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> यूं तो हिंदू नव वर्ष संवत, 2081 की शुरुवात इस बार 9 अप्रैल, 2024 से होगी। किंतु अंग्रेजी वर्ष एक जनवरी 2024 से प्रारंभ होने के कारण ज्योतिष की दृष्टि में 5 शुभ संयोग बनने से साल 2024 का आगाज बेहद शुभ संयोग में हो रहा है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि नववर्ष 2024 भारत के लिए काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है, क्योंकि पहले दिन ही खास राजयोग बन रहे हैं और इस साल की दूसरी खास बात एक भी सूर्य और चंद्र ग्रहण कोई भी भारत में नहीं दिखेगा। जैन के अनुसार 1 जनवरी 2024 को सोमवार, आयुष्यमान योग, आदित्य मंगल योग, गजकेसरी योग और लक्ष्मी नारायण जैसे योगों का संयोग बन रहा है। इन 5 शुभ योग में नए साल की शुरुआत होना भारत के लिए और हर राशि बालो के लिए सुखद और पुण्य फलदायी बन सकती है। भारत धर्म ,अध्यात्म, उद्योग,विज्ञान के क्षेत्र मे अग्रणी बनेगा। विश्व के विकासशील देशों में भी अग्रणी स्थान पर रहेगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-53500" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-29-at-12.01.22-PM.jpeg" alt="" width="783" height="1024" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-29-at-12.01.22-PM.jpeg 783w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-29-at-12.01.22-PM-229x300.jpeg 229w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-29-at-12.01.22-PM-768x1004.jpeg 768w" sizes="(max-width: 783px) 100vw, 783px" /></p>
<p><strong>लक्ष्मी नारायण योग-</strong><br />
यह योग शुक्र-बुध ग्रह की युति से बनता है।<br />
1 जनवरी 2024 को शुक्र और बुध ग्रह वृश्चिक राशि में युति कर विराजमान होंगे, जिससे ये योग बनेगा। लक्ष्मी नारायण योग से उद्योग,व्यापार के नए क्षेत्र विकशित होने से धन, संपदा के साथ आपसी भाई चारा बढ़ता है। ये योग आरोग्य और संपन्नता भी प्रदान करते हैं।<br />
<strong>आदित्य मंगल योग &#8211;</strong><br />
1 जनवरी 2024 को सूर्य और मंगल धनु राशि में विराजमान रहेंगे, इन दोनों ग्रहों की युति से आदित्य मंगल योग का निर्माण होगा। आदित्य मंगल योग के प्रभाव से भारत पाश्चात्य देशों में युद्ध,आतंकवाद के खात्मे में अपनी कारगर भूमिका निभा कर विश्व में सफल रहेगा। देश को केंद्र में वर्तमान राजा पुनः प्राप्त हो सकता है और राजनैतिक कार्यक्षेत्र में अच्छी उपलब्धि प्राप्त होगी।<br />
<strong>गजकेसरी योग &#8211;</strong><br />
1 जनवरी 2024 को चंद्रमा सिंह राशि में होंगे, वहीं 31 दिसंबर को मेष राशि में गुरु मार्गी होंगे। साल की शुरुआत में गुरु की पांचवी दृष्टि सिंह राशि पर पड़ेगी, जहां चंद्रमा के होने की वजह से गजकेसरी योग बनेगा। अपने नाम स्वरूप गजकेसरी योग गज यानी हाथी के समान बल और धन-दौलत प्रदान कराता है।गजकेसरी योग के प्रभाव से देश की उपलब्धियों का अनुसरण अन्य देश-दुनिया करना चाहेगी। देश में लाभ कमाने की दृष्टि से नए नए उद्योग,व्यापार,संचालित होकर आधुनिक वस्तुओ का निर्माण होगा।<br />
<strong>आयुष्मान योग &#8211;</strong><br />
1 जनवरी 2024 को प्रात: 03.31 से अगले दिन 2 जनवरी 2024 को सुबह 04.36 तक आयुष्मान योग रहेगा। आयुष्मान योग इस योग से भारत में राम मंदिर प्राप्ति के साथ कृष्ण और शिव मंदिरों की खोज साकार होकर निर्माण कार्य के लिए आगे आयेगी। देश के लोगो को इस योग से कोई बड़ी बीमारी से हानि नहीं पहुंचेगी। इस योग से दीर्धायु का वरदान मिलता है साथ ही सौभाग्य की प्राप्त होती है।</p>
<p>सोमवार &#8211; साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी 2024 को सोमवार का दिन पड़ रहा है। सोमवार से नए सप्ताह की शुरुआत होती है। सोमवार के दिन से नए साल का आरंभ समृद्धिदायक और सुख प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<p><strong>क्या कहती हैं राशियों पर सितारों की चाल ?</strong><br />
जैन ने कहा कि मकर, कुंभ और मीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव वर्ष में रहेगा। कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर शनि की ढैया चल रहा है। यह थोड़ा देरी से श्रम से फलों को देगा।<br />
मेष &#8211; गुरु और शनि ग्रह हर तरह का लाभ और मनोकना पूरी करेंगे।<br />
वृष &#8211; श्रम, विवेक से कार्य करने से आर्थिक लाभ होगा।<br />
मिथुन &#8211; गुरु एवं राहु की वजह से कार्य वृद्धि,सफलता, बड़ों का आशीर्वाद रहेगा।<br />
कर्क &#8211; गुरु एवं केतु शुभता प्रदान कर धन, मान सम्मान,प्रतिष्ठा प्रदान करेंगे।<br />
सिंह &#8211; अचानक धन,पद वृद्धि संतान उन्नति होगी।कन्या &#8211; शनि , राहू की कृपा से पारिवारिक सुख समृद्धि आर्थिक वृद्धि होगी।<br />
तुला &#8211; सुख ,धन संपदा,आर्थिक स्थिति में वृद्धि से सुख सुविधाएं बढ़ेंगी।<br />
वृश्चिक &#8211; स्थान परिवर्तन असंतोष के बाद अचानक धन &#8211; लाभ होता रहेगा।<br />
धनु &#8211; शनि के प्रभाव से पराक्रम आरोग्य,धन वृद्धि के संयोग है।<br />
मकर &#8211; विद्या, विवेक से आत्मविश्वास बढ़ेगा, मित्रों की मदद आगे बढ़ाएगी।<br />
कुंभ &#8211; धैर्य और संयम से काम करना होगा। जरा सी लापरवाही से बड़ी हानि, चिंता रहेगी।<br />
मीन &#8211; परिवार की सुख मांगलिक कार्यों पर धन खर्च होगा। फिर भी श्रम संघर्ष रहेगा।</p>
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		<title>जाते हुए साल में विवाह के केवल पांच मुहूर्त :    देवठान एकादशी से फिर बजेगी शहनाई </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Nov 2023 10:57:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया इस साल 2023 में दो श्रावण मास होने से चातुर्मास काल चार माह की जगह पांच माह रहने से पिछले 23 जून से 27 नवम्बर तक विवाह के कोई भी मुहूर्त नहीं है। 23 नवम्बर को कार्तिक शुक्ल देवथान एकादशी है शहनाई बजेगी फिर से विवाह मुहूर्त प्रारंभ [&#8230;]]]></description>
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<p>वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया इस साल 2023 में दो श्रावण मास होने से चातुर्मास काल चार माह की जगह पांच माह रहने से पिछले 23 जून से 27 नवम्बर तक विवाह के कोई भी मुहूर्त नहीं है। 23 नवम्बर को कार्तिक शुक्ल देवथान एकादशी है शहनाई बजेगी फिर से विवाह मुहूर्त प्रारंभ हो जायेंगे।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;.</span></p>
<hr />
<p>मुरैना। समय कितना भी बदल चला हो। बदले समय में अभी भी युवक- युवती ज्योतिष मुहूर्त में विवाह का इंतजार करते हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया इस साल 2023 में दो श्रावण मास होने से चातुर्मास काल चार माह की जगह पांच माह रहने से पिछले 23 जून से 27 नवम्बर तक विवाह के कोई भी मुहूर्त नहीं है। 23 नवम्बर को कार्तिक शुक्ल देवथान एकादशी है शहनाई बजेगी फिर से विवाह मुहूर्त प्रारंभ हो जायेंगे । 23 नवम्बर को देवठान एकादशी के दिन अबूझ विवाह मुहूर्त है। हालाकि पंचांग में इस दिन विवाह का शुद्ध मुहूर्त नहीं है। फिर भी लोकाचार की दृष्टि से इस दिन अधिक से अधिक शादी की जाती हैं। वर्ष 2023 में नवम्बर से दिसंबर तक केवल पांच मुहूर्त ही बनेंगे। नवम्बर में 27, 28, 29 को मुहूर्त है। दिसंबर में 07 और 15 केवल दो ही शुद्ध विवाह मुहूर्त हैं। फिर अगले साल 2024 में 15 जनवरी के बाद ही विवाह के शुभ मुहूर्त बनेंगे क्योंकि 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक धनु मलमास होने से एक माह का विराम रहेगा।</p>
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