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	<title>ज्ञान गंगा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>ज्ञान गंगा महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मित्र आइने की तरह है, हमेशा सच्चा ईमानदार मित्र बनाओ: ज्ञान गंगा महोत्सव का समापन </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 08:44:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के आखिरी दिन प्रवचन सभा को आचार्य श्री पुलक सागर जी ने संबोधित किया। उन्होंने मित्रतापूर्ण व्यवहार पर जोर दिया। वे धरियावद से विहार कर नंदनवन पहुंचे। धरियावद से पढ़िए, श्रीफल साथी अशोक कुमार जेतावत की खबर&#8230; धरियावद। गृहस्थ के जीवन में तीन चीजों का बड़ा महत्व होता है। पहला- [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के आखिरी दिन प्रवचन सभा को आचार्य श्री पुलक सागर जी ने संबोधित किया। उन्होंने मित्रतापूर्ण व्यवहार पर जोर दिया। वे धरियावद से विहार कर नंदनवन पहुंचे। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए, श्रीफल साथी अशोक कुमार जेतावत की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> गृहस्थ के जीवन में तीन चीजों का बड़ा महत्व होता है। पहला- पत्नी, दूसरा- बच्चे और तीसरा दोस्त इन तीनों के बगैर जिंदगी बेकार होती है। अच्छी पत्नी किस्मत से मिलती है, संतान प्रकृति की देन है। मगर मित्र बनाने में ना नसीब काम करता है, ना प्रकृति का हाथ होता है। यह सब मनुष्य खुद बनाया करता है। उक्त विचार राष्ट्रसंत दिगंबर जैनाचार्य प्रखर वक्ता आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में मंगलवार को पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के आखिरी दिन प्रवचन सभा में व्यक्त किए।</p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि मित्र वह होता है, जिससे हमारे विचार मिलते हैं। मित्र का चयन हमेशा सोच समझकर करना चाहिए। पत्नी अगर अच्छी मिल जाती है तो 60 प्रतिशत दुखों से बचा सकती है। वह गृहलक्ष्मी होती है, जो घर को संवारती है। लेकिन जीवन में अगर मित्र अच्छा मिल जाता है, तो वह 80 प्रतिशत तक दुखों को दूर कर सकता है। अगर दोस्त बुरा मिल जाता है, तो सात जन्मों का रिश्ता बिगड़ जाता है। संसार में सबकुछ मिल जाए पर मित्र नहीं मिले तो जीवन बेकार है।</p>
<p><strong>खुद ही वफादार मित्र बन जाया करें</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि पति-पत्नी के बीच मित्रता का रिश्ता होना चाहिए। अगर ऐसा हो गया तो निश्चित रूप से दांपत्य जीवन सुखी हो जाता है। पत्नी जीवन साथी कहलाती है और उम्र भर साथ देती है। पत्नी से भी आपस में दो बोल प्रेम के बोल देने चाहिए, कभी-कभार पत्नी की भी प्रशंसा कर देनी चाहिए। इससे जीवन का सफर आसान हो जाता है। मित्रता में आनंद है। प्राणी मात्र से मित्रता का व्यवहार रखेंगे तो जीवन आनंद से भर जाएगा। आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने कहा कि वफादार मित्र की तलाश मत करिए। खुद ही वफादार मित्र बन जाया करें। फेसबुक पर हजारों मित्र बनाने से अच्छा है, एक ईमानदार मित्र बनाएं। पड़ोसी को मित्र बनाएं। आज पड़ोसी दुश्मन पालते हैं और फेसबुक पर मित्र बनाते हैं।</p>
<p><strong>बिगड़े हुए हैं, वही गलत दोस्ती करते हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे कहा कि अच्छा मित्र आइने की तरह होता है। आइना जैसा हम करते हैं। वैसा ही दिखलाता है। उसी तरह सच्चा मित्र भी वही करता है। जो बिगड़े हुए हैं, वही गलत दोस्ती करते हैं। जो सुधरे हुए हैं वे गलत दोस्ती नहीं करते हैं। महाभारत काल में दुशासन ने परिवार की कुलवधू द्रौपदी का चीरहरण किया था क्योंकि, वह स्वयं बिगड़ा हुआ था।</p>
<p><strong>आचार्य श्री ने नंदन वन में प्रवेश किया</strong></p>
<p>प्रातःकालीन प्रवचन सभा में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन ने परिवार सहित आचार्य संघ से श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन और कन्या महाविद्यालय हिमवन क्षेत्र में पधारने की विनती की। हंसमुख जैन प्रतिष्ठा पितामह और मूर्धन्य विद्वान के रूप में देश भर में प्रसिद्ध हैं। वह खुद एक शिक्षाविद हैं और समंतभद्र शिक्षण संस्थान के संस्थापक एवं संचालक भी हैं। आचार्य श्री ने उनके निवेदन को स्वीकार करते हुए मंगलवार शाम को धरियावद से नगर से विहार कर नंदन वन में प्रवेश किया। यहां हंसमुख जैन, पत्नी अंजना देवी सहित समंतभद्र परिवार ने आचार्य श्री की अगुवानी की।</p>
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		<title>साधुओं से यह जानो आत्मा का कल्याण कैसे हो?: आचार्य पुलक सागर जी की धर्मसभा में आत्म कल्याण की सीख  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 08:41:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[धरियावद में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिन धर्मसभा हुई। इसमें आचार्यश्री पुलकसागर जी ने श्रावकों को आत्म कल्याण और ज्ञान के बारे में बहुमूल्य वचनों से उपकृत किया। महोत्सव का विराम मंगलवार को होगा। धरियावद से पढ़िए, अशोक कुमार जेतावत की यह खबर&#8230; धरियावद। साधुओं के सामने जाएं तो हमेशा जिंदा प्रश्न [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धरियावद में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिन धर्मसभा हुई। इसमें आचार्यश्री पुलकसागर जी ने श्रावकों को आत्म कल्याण और ज्ञान के बारे में बहुमूल्य वचनों से उपकृत किया। महोत्सव का विराम मंगलवार को होगा। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए, अशोक कुमार जेतावत की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद</strong>। साधुओं के सामने जाएं तो हमेशा जिंदा प्रश्न पूछें। जिनसे जीवन का कायाकल्प हो सके, जीवन में परिवर्तन हो सके। साधुओं से पूछना आपका रत्नत्रय कैसा, आपका स्वास्थ्य कैसा है, आपका आहार कैसा हुआ? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका कोई सार नहीं है, कोई सार्थकता नहीं है। यह विचार आचार्य पुलक सागर जी ने चंद्रप्रभ उद्यान के आनंद सभागार में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिन सोमवार को प्रकट किए। आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में हमेशा ऐसे प्रश्न करो कि क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे कषाय कैसे दूर किए जा सकते हैं। आत्मा का कल्याण कैसे हो? महाराज जी ने कहा कि आज ज्ञान गंगा महोत्सव के 4 दिन हो गए हैं। लोगों ने इन चार दिनों में ज्ञान का बहुत कुछ सुना है। ज्ञान रूपी गंगा में डूबकी भी लगाई है तो आपके जीवन में परिवर्तन अवश्य आना चाहिए। अगर आप कौआ बनकर आए थे तो हंस बनकर जाओ और अगर हंस बनकर आए थे तो परमहंस बनकर जाओ, जीवन में ऐसा परिवर्तन आना चाहिए।</p>
<p><strong>राग-द्वेष, गुस्से का त्याग करना सीख लो</strong></p>
<p>आचार्य श्री पुलक सागर जी ने कहा कि जिंदगी को अगर सत्यम, शिवम, सुंदरम बनाना है तो अपनी भूल को कबूल करना सीख लो और अपने मन में कोई शूल नहीं रखना सीख लो। किसी की कहीं कोई दो बात सहन करना सीख लो, इससे बड़ा कोई उपवास नहीं हो सकता है। आप अन्न-जल छोड़कर उपवास कर सकें, या नहीं कर सकें तो कोई बात नहीं, आपने कुछ समय के लिए मोबाइल फोन को छोड़ने, क्रोध, लालच, बुराई, ईर्ष्या आदि नहीं करने और इन दुष्प्रवृत्तियों को छोड़ने का प्रयास किया तो यह भी कोई उपवास से कम नहीं होता है। राग-द्वेष, गुस्से का त्याग करना सीख लो। आचार्य श्री ने कहा कि आपको करना ही है तो दिल में लव फैक्ट्री लगाओ, दिमाग में आइस फैक्ट्री लगाओ और जुबान पर शुगर फैक्ट्री लगाओ, तुम्हारा जीवन सफल हो जाएगा। जीवन में शांति और आराम से जीना सीख लो। हर कोई आदमी स्वर्ग जाने को तैयार है, पर स्वर्गीय कोई नहीं होना चाहता है। जाना स्वर्ग चाहते हैं, पर काम नरक के करते हैं। आप स्वर्ग जा सको या नहीं जा सको, कोई फर्क नहीं पड़ता है। पर काम ऐसे करो कि हर घर स्वर्ग बन जाए। स्वर्ग को जमीन पर लाने का पुरुषार्थ करो। जीवन को नरक मत बनाओ, स्वर्ग बनाने का प्रयास करो। दीपावली पर घर पर शुभ-लाभ भले ही नहीं लिख पाओ, लेकिन घर में हमेशा स्वर्ग का निर्माण करो। जो जीवन को स्वर्ग बनाता है, वह मरने के बाद अवश्य स्वर्ग को प्राप्त करता है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज के आगामी संभावित कार्यक्रम</strong></p>
<p>धरियावद में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव का मंगलवार को 24 जून को विराम होगा। आचार्य श्री का श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन-हिमवन की ओर विहार होगा और रात्रि विश्राम वहीं पर होगा। इसके अगले दिन बुधवार को आचार्य संघ की आहार्यचर्या नंदन में और सायंकाल बांसी मार्ग होते हुए भींडर की ओर मंगल विहार संभावित है।</p>
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