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	<title>जैन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<item>
		<title>श्री पदमप्रभु जिनालय का शिलान्यास समारोह में लगे प्रभु के जयकारे : भूमि जागरण एवं भक्तामर विधान में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:15:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शहर के बाहुबली कॉलोनी में पदमप्रभु भगवान के नवीन जिनालय हेतु शिलान्यास समारोह का आयोजन किया गया।बांसवाड़ा से सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर पढ़िए&#8230; बांसवाडा। शहर के बाहुबली कॉलोनी में पदमप्रभु भगवान के नवीन जिनालय हेतु शिलान्यास समारोह का आयोजन किया गया। कमेटीअध्यक्ष संजय गांधी व प्रवक्ता संकेत जैन ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शहर के बाहुबली कॉलोनी में पदमप्रभु भगवान के नवीन जिनालय हेतु शिलान्यास समारोह का आयोजन किया गया।<span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा से सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाडा।</strong> शहर के बाहुबली कॉलोनी में पदमप्रभु भगवान के नवीन जिनालय हेतु शिलान्यास समारोह का आयोजन किया गया। कमेटीअध्यक्ष संजय गांधी व प्रवक्ता संकेत जैन ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद तथा मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज के परम आशीर्वाद व प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया &#8220;सुयश&#8221; अशोकनगर के सानिध्य में सानंद शिलान्यास समारोह हुआ। प्रात: 9 बजे प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में भूमि जागरण एवं भक्तामर विधान का आयोजन किया गया। जिसके उपरांत बडी संख्या् में उपस्थित वागड के श्रद्धालुओं के समक्ष प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया जी ने शिलान्यास के पुण्यार्जक के लिए बोली लगाना प्रारंभ की तो बढचढ कर भक्तों ने बोली को आगे बढाया। जिसके बाद भरडा परिवार से संकेत भरडा पुत्र चंद्रपाल भरडा, मगनलाल भरडा बाहुबली कॉलोनी का शिलान्यासकर्ता के रूप चयन किया गया। शिलान्यास समारोह के मुख्य पात्र संकेत पुत्र चंद्रपाल भरडा परिवार ने भैयाजी के निर्देशन में विधि विधान पूर्वक भगवान प्रदमप्रभु के नवीन जिनालय की प्रथम शिला रखी तो चारों ओर से जयकारा लगने लगा।</p>
<p>नींव में ताम्र शिला 135, रजत शिला 23, स्वर्ण शिला 30 तथा प्रदमप्रभु जिनालय कमेटी के समाज के 85 परिवार व अन्य श्रद्धालुओं ने 108 रिम बिजमंत्र शिला रखी। समाज के प्रवक्ता ने बताया कि बहुमंजीला पदमप्रभु जिनलाय 7650 वर्गफुट जमीन पर बनेगा जिसका कार्य आज से प्रारंभ कर दिया है । संचालन हेमेन्द्र कुमार जैन व डा लोकेश शाह ने किया। प्रातःकालीन शिलान्यास भूमि पर यंत्रजी पर शांतिधारा और अभिषेक का सौभाग्य राजकुमार शांतिलाल भरड़ा परिवार को मिला । मैना देवी धर्मपत्नी धनपाल खोडणिया परिवार बड़ोदिया ने फावडा, संगीता धर्म पत्नी दिलीप शाह परिवार हाउसिंग बोर्ड ने तसला व नरेश कोठारी पुत्र मणिलाल कोठारी परिवार ने कन्नी का पुण्यार्जन प्राप्त किया।</p>
<p>मुख्य शिला के चारों कोनो ओर मध्य में शिला के लाभार्थी हुकमीचंद शांतिलाल शाह हाउसिंग बोर्ड, प्रमोद तोलाचंद शाह परिवार, कल्पेश जीतमल शाह परिवार, अशोक बदामीलाल कोठिया ओर प्रद्युम्न केसरीमल शाह परिवार बाहुबली कॉलोनी को मिला।</p>
<p>बाहुबली कॉलोनी में जहां शिलान्यास हो रहा था वही पर एलईडी के माध्यम से मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने मुंगावली से प्रवचन में आशीर्वाद देते हुए उपस्थित 72 गांवों के पंचो, प्रतिनिधियों को मुख्य प्रेरणा दी कि जिंदगी में एक मंदिर बनाकर जरूर मरना,नहीं मिले तो एक वेदी,नहीं मिले तो मंदिर की फर्श लगाकर या मंदिर का शिखर, किवाड लगा कर और कुछ नहीं मिले तो जब कही आसपास शिलान्यास हो तो एक ईट लगाकर मरना इससे सस्ता और कुछ नही हो सकता। अतिथियों का स्&#x200d;वागत कमेटी द्वारा किया गया।</p>
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		<title>प्राचीन जैन धरोहरों का जीर्णाेद्धार अद्भुत और अनुकरणीय : मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने महासभा के कार्यों की सराहना की  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:32:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वैभव नगर स्थित श्री पद्मप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा के दौरान अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज ने भारत वर्षीय दिगंबर जैन महासभा एवं तीर्थ संरक्षिणी महासभा के कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230; इंदौर। वैभव नगर स्थित श्री पद्मप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वैभव नगर स्थित श्री पद्मप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा के दौरान अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज ने भारत वर्षीय दिगंबर जैन महासभा एवं तीर्थ संरक्षिणी महासभा के कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> वैभव नगर स्थित श्री पद्मप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा के दौरान अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज ने भारत वर्षीय दिगंबर जैन महासभा एवं तीर्थ संरक्षिणी महासभा के कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। मुनि श्री ने कहा कि महासभा ने देश-विदेश में सैकड़ों प्राचीन जैन मंदिरों की खोज और उनके जीर्णाेद्धार का जो अविस्मरणीय कार्य किया है, वह पूरी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुए मुनि श्री ने मार्गदर्शन दिया कि वर्तमान समय में धर्म की रक्षा के लिए अर्थ (धन) से अधिक कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आप केवल निस्वार्थ कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर ध्यान दें, संसाधन जुटाने वाले लोग समाज में बहुत हैं। मुनि श्री ने अध्यक्ष देवेंद्र सेठी और उनकी टीम द्वारा किए जा रहे पुरातत्व संरक्षण के कार्यों को अद्भुत की संज्ञा दी।</p>
<p><strong>महासभा की सक्रियता और सदस्यता अभियान</strong></p>
<p>इस अवसर पर महासभा के राष्ट्रीय और प्रादेशिक पदाधिकारियों ने मुनि श्री के चरणों में नमोस्तु निवेदित किया। टीके वैद (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) उपस्थित जनसमूह को महासभा द्वारा संचालित विभिन्न राष्ट्रीय प्रकल्पों और उपलब्धियों से अवगत कराया। तल्लीन बड़जात्या (प्रदेश कार्याध्यक्ष) ने संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए चलाए जा रहे क्षेत्रीय सदस्यता अभियान की विस्तृत जानकारी साझा की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इनकी उपस्थिति भी रही सराहनीय</p>
<p>इस गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सेठी, कोषाध्यक्ष राकेश पाटनी, इंदौर क्षेत्र अध्यक्ष पवन पाटोदी और पुरातत्व संयोजक ओम पाटोदी (निर्ग्रन्थ सेंटर ऑफ आर्कियोलॉजी) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। साथ ही श्रीपाल जैन, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेके जैन, कमलेश जैन और विनोद जैन सहित अनेक गणमान्य समाजजन मौजूद रहे। महासभा का संकल्प है कि प्राचीन विरासतों को सहेजना और नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति से जोड़ना ही महासभा का मूल लक्ष्य है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री पुलक सागर महाराज ससंघ का सागवाड़ा में मंगल प्रवेश : संतों का नगर प्रवेश आम बात है, संत का हृदय प्रवेश मुख्य है </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 09:29:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[आचार्य पुलक सागरजी महाराज ससंघ का रविवार को सागवाड़ा मे प्रवेश हुआ। आचार्य संघ का वर्धमान सोसायटी मडकोला से पद विहार कर गोल  चौराहा पहुंचे। सागवाड़ा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; &#160; सागवाड़ा। आचार्य पुलक सागरजी महाराज ससंघ का रविवार को सागवाड़ा मे प्रवेश हुआ। आचार्य संघ का वर्धमान सोसायटी मडकोला से पद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य पुलक सागरजी महाराज ससंघ का रविवार को सागवाड़ा मे प्रवेश हुआ। आचार्य संघ का वर्धमान सोसायटी मडकोला से पद विहार कर गोल </strong></p>
<p><strong>चौराहा पहुंचे। <span style="color: #ff0000">सागवाड़ा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> आचार्य पुलक सागरजी महाराज ससंघ का रविवार को सागवाड़ा मे प्रवेश हुआ। आचार्य संघ का वर्धमान सोसायटी मडकोला से पद विहार कर गोल</p>
<p>चौराहा पहुंचे। जहां सकल दिगम्बर जैन सागवाड़ा द्वारा आचार्य पुलकसागर जी का पाद प्रक्षालन कर पुष्पवर्षा कर बैंडबाजों के साथ अगवानी की गई। फिर शोभायात्रा के रूप मे नया बाजार मांडवी चौक होते हुए आचार्य संघ ने श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन जूना मंदिर में पहुंचकर जिन प्रतिमाओं के दर्शन किए।</p>
<p><strong>मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया</strong></p>
<p>ऋषभ वाटिका में आयोजित धर्मसभा का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सभा को संबोधित करते हुए आचार्य पुलक सागरजी महाराज ने कहा कि मैं सागवाड़ा मे दूसरी बार आया हूं। आप सभी मुझे अपनी नजर से देख रहे तो लेकिन, मैं आपके नजरिये को देख रहा हूं। अगर मेरे प्रवचनों से आपका नजरिया बदलता है तो मेरा यहा आना सार्थक है। स्वयं को पहचानना बहुत कठिन है। सांयकाल जैन बोर्डिंग परिसर में आनंद यात्रा एवं आरती के आयोजन हुए। विहार के पूर्व रविवार प्रातः वर्धमान सोसायटी में मूल नायक महावीर स्वामी एवं संघस्थ चैत्यालय के मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक और शांतिधारा की गई।</p>
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		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ससंघ का निवाई में हुआ मंगल प्रवेश : समाजजनों ने बैंडबाजों के साथ कि भव्य अगवानी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 05:23:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[ प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य मऺगल प्रवेश किया। निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230; निवाई। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य मऺगल प्रवेश किया। </strong><span style="color: #ff0000"><strong>निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230;</strong></span></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य महा मऺगल प्रवेश किया। अश्व, बग्घी, हाथी, डीजे कई बैंडबाजे, आचार्य श्री पर ड्रोन कैमरे से पुष्प वृष्टि, 57 रजत थालियों में दूध केशर, पुष्प रत्नों से चरण प्रक्षालन ,3 किमी की रांगोली, 76 से अधिक स्वागतद्वार नगर के अनेक सामाजिक, धार्मिक मंडलों सहित नगर के सभी धर्मों की सहभागिता आकर्षण का केंद्र रही। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने निवाई नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 32 साधुओं सहित नगर गौरव आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी एवं अन्य साधुओं की जन्म नगरी निवाई में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य संघ के आगे श्रीजी शोभायात्रा में विराजित रहे निवाई की धरती का कण-कण आज इठला रहा था क्योंकि, धरती के भगवान के चरण आज उसकी धरती पर पड़ रहे थे।</p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर महाराज की पंचम पट्टाधीश को अपनी भूमि पर 3 वर्ष बाद एक बार फिर पाकर निवाई वासियों का रोम-रोम पुलकित हो रहा था। रविवार प्रातः काल की बेला से ही से ही भक्तों का विभिन्न स्थानों से भक्तो आगमन प्रारम्भ हो चुका था। धर्म नगरी निवाई का बच्चा-बच्चा श्री सऺघ एव मेहमानो की अगवानी के लिए पूर्णतया तैयार था। दोपहर से ही सभी जनों के चेहरे पर उभरे खुशी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे। निवाई वासियों के 3 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी होने जा रही थी। संघ का भव्य स्वागत करने हेतु निवाई प्रवेश की जगह पर भव्य तोरण द्वार बनवाया गया था। कदम-कदम पर आचार्य श्री के मंगल प्रवेश और अभिनंदन के होर्डिंग्स नजर आ रहे थे।</p>
<p>निवाई पूरी तरह से केशरिया रंग में रंगी थी। दोपहर 12 बजे से आस पास के गांवों से श्रद्धालुओं की अपार संख्या गुरु भक्ति के लिए प्रवेश द्वार पर पहुंचने लगीं और देखते ही देखते हजारों का अपार समूह जयकारों के उद्घोष से गूंजने लगा।  चारों और स्त्री पुरुष अगवानी करते नजर आ रहे थे। जिले की सभी समाज के सभी जन भव्य अगवानी हेतु उपस्थित थे। 2 बजे आचार्य श्री ने संघ सहित निवाई की सीमा में अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में प्रवेश कर मूल नायक भगवान के दर्शन किए।शेष संघ के 26 साधुओं ने अगवानी की प्रथमाचार्य श्री शान्ति सागर जी व आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन हुए। राजस्थान शासन के राजकीय अतिथि बनने के बाद निवाई में प्रथम बार प्रवेश हुआ। फिर प्रारम्भ हुई शोभायात्रा। आगे-आगे घोड़े, ऊंट, तरह-तरह के बैंड बाजे, साथ में विभिन्न पोशाकों में स्थानीय समाज जन। स्थानीय महिलाएं मस्तक पर कलश धारण कर चल रही थी। भक्तिभाव से युवाओं ने बैंड वादन किया।  मोसम भी अपनी मंद सुहानी धूप से आचार्य श्री की अगवानी कर रहा था ।निवाई का प्रत्येक नागरिक आज आचार्य संघ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने को आतुर था। श्रद्धालुओं के हुजूम के मध्य आचार्य संघ मानो किसी सिंह की भांति चल रहे थे। निवाई नगरी आज उत्साह और भावों की धरा नजर आ रही थी। दो किलोमीटर रंगोली युक्त नगर में सभी जिनालयों के भक्ति सिद्ध भक्ति सहित दर्शन किए मन्दिर जी मे दर्शन के उपरांत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री दिगंबर नसिया शांतिनाथ मंदिर के दर्शन कर आचार्य श्री सऺघ सहित मऺचासीन होने पर सर्वप्रथम श्री और आचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्रों समक्ष दीप प्रवज्जलन श्री दामोदर प्रसाद श्री हनुमानप्रसाद सिंघल परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन श्री महावीर प्रसाद,श्रीमती पिस्तौल देवी,जितेंद्र,गजेंद्र परिवार ने किया जिनवाणी श्री नेमीचंद मधुबाला संजय अंकित सिरस वाले परिवार निवाई ने भेंट की। नृत्य मंगलाचरण महिला मंडल ने किया तत्पश्चात आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज एवं पट्ट परंपरा के आचार्य वृन्द को अर्घ समर्पित किया गया। स्थानीय लोगो के सहयोग और समिति के मार्गदर्शन से गुरु प्रवेश के अवसर को एक ऐतिहासिक स्मृति बनाने में समाज के युवाओ ने श्रावकों ने अहम भूमिका निभाई। सकल दिगम्बर समाज द्वारा संघ की आहार बिहार व्यवस्था में तन,मन,धन ,से सहयोगियों का समाज ने कृतज्ञतापूर्वक सम्मान तिलक,माला,श्रीफल, स्मृति चिन्ह से किया ।इस अवसर पर आसपास के गांवों से जन समूह आचार्य संघ की अगवानी हेत निवाई आये। , जयपुर , किशनगढ़, कोटा , टोंक ,पीपल्दा लावा,डिग्गी टोडारायसिंह देवली,पिपलु,उनियारा, मालपुरा इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, और अन्य अनेक शहरों से श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।हजारो जन समूह के भावों से भरी निवाई आज सच मे धर्म नगरी लग रही थी। शाम को संपूर्ण जैन समाज को वात्सल्य भोजन प्रसाद के पुण्यार्जक फूलचंद, महावीर प्रसाद निवाई रहे। 57वर्षों का विहार आपका, दिग्विजय सा लगता है। जहां पहुंच जाते है गुरुवर, समवशरण वहीं लगता है, तेरी चर्या से गुंजित गर्जित गर्वित हो गया गगन।</p>
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		<title>छोटी नसिया पर भक्तामर दीपार्चना आयोजित : आचार्य शांतिसागर महाराज छाणी एवं आर्यिका विचित्रा माताजी को अर्घ अर्पित </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 03:16:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागवाड़ा नगर के आसपुर रोड स्थित आचार्य शांतिसागर महाराज छाणी की समाधि स्थली छोटी नसिया पर शनिवार को भक्तामर दीपार्चना का आयोजन किया गया। आर्यिका विचित्रा माताजी के अग्नि संस्कार स्थल पर नव निर्मित चबूतरे पर खोडनिया परिवार की ओर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया “विरल” के तत्वावधान में यह धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। समाजजनोंने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सागवाड़ा नगर के आसपुर रोड स्थित आचार्य शांतिसागर महाराज छाणी की समाधि स्थली छोटी नसिया पर शनिवार को भक्तामर दीपार्चना का आयोजन किया गया। आर्यिका विचित्रा माताजी के अग्नि संस्कार स्थल पर नव निर्मित चबूतरे पर खोडनिया परिवार की ओर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया “विरल” के तत्वावधान में यह धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। समाजजनोंने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ दीप प्रज्वलित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> नगर के आसपुर रोड स्थित आचार्य शांतिसागर महाराज छाणी की समाधि स्थली छोटी नसिया पर शनिवार को प्रातः सकल दिगम्बर जैन समाज सागवाड़ा के संयोजन में आर्यिका विचित्रा श्री माताजी के अग्नि संस्कार स्थल पर समाधि का एक माह पूर्ण होने पर नव निर्मित चबूतरे पर खोडनिया परिवार की ओर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया “विरल” के तत्वावधान में समाजजनों द्वारा भक्तामर दीपार्चना की गई।</p>
<p>समाज के ट्रस्टी अश्विन बोबडा ने बताया कि इस अवसर पर प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान, शांतिनाथ भगवान, चौबीस भगवान, आचार्य शांतिसागर महाराज छाणी एवं आर्यिका विचित्रा माताजी को अष्ट द्रव्य युक्त अर्घ अर्पित किया गया। इसके बाद उपस्थित समाजजनों द्वारा समाधि चबूतरे की चारों दिशा में आचार्य मानतुंग रचित भक्तामर स्तोत्र के 48 काव्य का उच्चारण करते हुए 48 दीप प्रज्वलित कर स्थापित किए गए।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में णमोकार महामंत्र उच्चारण के साथ योगिंद्रागिरी के मूलनायक आदिनाथ भगवान की आरती उतारी गई।</p>
<p><strong>यह</strong> <strong>रहे</strong> <strong>उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर सेठ महेश नोगमिया, ट्रस्टी संतोष खोडनिया, पूर्व पालिकाध्यक्ष नरेन्द्र खोड़निया, पवन कुमार गोवाडिया, बदामी लाल खोडनिया, डॉ. विपिन शाह, भावेश गांधी, नटवर लाल गलालिया, केसरीमल शाह, जयन्ति लाल सारगिया, अशोक शाह, गजेन्द्र गोवाडिया, प्रतीक शाह, राजेन्द्र डेचिया, चेतन दोसी, निलेश मुन्शी, विनय सेठ, हितेन्द्र शाह, हिमांशु हिरेन खोडनिया, साधना कोठारी, पूजा पगारिया, रेखा पंचोरी, दीपिका शाह, नयना सारगिया, उषा, निर्मला, अरुणा खोडनिया, लीना सारगिया समेत अनेक समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>महरौनी में दशलक्षण महापर्व का भव्य समापन : दस धर्मों की साधना और भक्ति से गूंजा नगर </title>
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		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 08:38:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महरौनी के श्री अजित नाथ बड़ा जैन मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पंचमी से शुरू हुआ दशलक्षण महापर्व आज ब्रह्मचर्य धर्म के साथ सम्पन्न हुआ। दस दिनों तक नगर में भक्ति, संयम और धर्म-भावना का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने दसों धर्मों की साधना में भाग लिया और जीवन में इन्हें अपनाने का संकल्प [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महरौनी के श्री अजित नाथ बड़ा जैन मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पंचमी से शुरू हुआ दशलक्षण महापर्व आज ब्रह्मचर्य धर्म के साथ सम्पन्न हुआ। दस दिनों तक नगर में भक्ति, संयम और धर्म-भावना का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने दसों धर्मों की साधना में भाग लिया और जीवन में इन्हें अपनाने का संकल्प लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> श्री अजित नाथ बड़ा जैन मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पंचमी से आरंभ हुआ दशलक्षण महापर्व आज ब्रह्मचर्य धर्म के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। दस दिनों तक नगर में भक्ति, संयम और धर्म-भावना का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। मंदिर प्रांगणों में प्रतिदिन प्रातःकालीन पूजन, सामूहिक प्रतिक्रमण और प्रवचन का आयोजन हुआ, जिससे श्रद्धालुओं ने आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के पथ का अनुभव किया।</p>
<p>समापन अवसर पर मुनिश्री गुरूदत्तसागर जी महाराज एवं मुनिश्री मेघदत्तसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि दशलक्षण महापर्व केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति और साधना का माध्यम है। उन्होंने बताया कि दसों धर्म आपस में जुड़े हुए हैं और क्रमिक रूप से आत्मा को पवित्र बनाते हैं।</p>
<p>दस धर्मों में क्षमा धर्म वैर और द्वेष को मिटाकर मन में शांति और सौहार्द की नींव रखता है। मार्दव धर्म अहंकार को गलाकर विनम्रता और नम्रता का संदेश देता है। आर्जव धर्म जीवन में सीधापन और सच्चाई स्थापित कर आत्मा को निर्मल बनाता है। शौच धर्म बाहरी और अंतरंग पवित्रता से मन और शरीर दोनों को शुद्ध करता है। सत्य धर्म वाणी और व्यवहार में सच्चाई का पालन कर जीवन को आधार प्रदान करता है। संयम धर्म इंद्रियों पर नियंत्रण और इच्छाओं का संयम कर आत्मबल और मानसिक स्थिरता देता है। तप धर्म कठोर साधना और आत्मसंयम से कर्मों का क्षय कर आत्मा को शक्तिशाली बनाता है। त्याग धर्म लोभ और आसक्ति को त्याग कर उदारता और दान की भावना जगाता है। आकिंचन्य धर्म वस्तुओं के मोह और लालसा से मुक्ति दिलाकर आत्मा को स्वतंत्र बनाता है। और अंततः ब्रह्मचर्य धर्म इंद्रियों और मन की विजय कर आत्मा को परम पवित्रता और मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।</p>
<p><strong>जीवन में धर्मों को अपनाने का संकल्प </strong></p>
<p>मुनिश्रियों ने कहा कि ये सभी धर्म अलग-अलग प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और मिलकर आत्मा को पूर्णता की ओर ले जाते हैं। भक्तिभाव और प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने जीवन में इन धर्मों को अपनाने का संकल्प लिया।</p>
<p>समापन अवसर पर क्षमाबाणी मनाया गया, मंगलाचरण गूंजा और सामूहिक संकल्प लिया गया कि अहिंसा, संयम, सत्य और सदाचार को जीवन में अपनाया जाएगा। नगर के वरिष्ठजनों और कार्यकर्ताओं ने आयोजन की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया। सांध्यकालीन वेला में जलविहार शोभायात्रा निकाली गयी, जिसका समापन बड़ा जैन मंदिर में हुआ। यहां भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक एवं शांति धारा हुई। पांडुशिला पर भगवान जिनेन्द्र की स्थापना करने का सौभाग्य ऋषभ कठरया, कोमल जैन, राजेश पाय और नीलेश सराफ को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य सुनील गढोली, अंकित चौधरी और राहुल जैन सागर को प्राप्त हुआ। चमर ढुलाने का सौभाग्य राहुल जैन आनंद सराफ और महाआरती का सौभाग्य अंगूरी लौडुआ और अशोक पाय को प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>भक्ति-उत्साह संग पंचामृत अभिषेक: आचार्य श्री विशदसागर जी ने दिया आगम पंथी अनुशासन का संदेश </title>
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		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 09:50:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज के संघ सानिध्य में इंदौर के आदिनाथ चेत्यालय स्कीम नंबर 71 में नर-नारियों द्वारा पंचामृत अभिषेक उत्साह और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। आचार्य श्री ने जैन आगम परंपरा के अनुसार सच्चे श्रावकों को भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजन, भक्ति और स्वाध्याय करने का उपदेश दिया। पढ़िए की ख़ास रिपोर्ट…  [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज के संघ सानिध्य में इंदौर के आदिनाथ चेत्यालय स्कीम नंबर 71 में नर-नारियों द्वारा पंचामृत अभिषेक उत्साह और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">आचार्य श्री ने जैन आगम परंपरा के अनुसार सच्चे श्रावकों को भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजन, भक्ति और स्वाध्याय करने का उपदेश दिया। पढ़िए की ख़ास रिपोर्ट… </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री विरागसागर जी के शिष्य, समाधिस्थ आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज अपने वर्षायोग के दौरान सुदामा नगर जैन मंदिर में हैं। संरक्षक श्रीमती आरती सनत जैन के अनुसार भक्तों के आग्रह पर आचार्य श्री के संघ के साथ आदिनाथ चेत्यालय स्कीम नंबर 71 में नर-नारियों द्वारा पंचामृत अभिषेक उत्साह, भक्ति और आनंद के साथ संपन्न हुआ। आचार्य श्री ने इस अवसर पर धर्म उपदेश देते हुए बताया कि जैन आगम परंपरा के अनुसार सच्चे श्रावक को शास्त्रों में वर्णित सामग्री देव, शास्त्र और गुरु के समक्ष अर्पित करनी चाहिए। भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजन, भक्ति, आराधना एवं स्वाध्याय आगम शास्त्र के अनुकूल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मंदिरों में संतवाद और पंथवाद की गलत प्रवृत्तियों को त्यागना चाहिए और केवल आगम पंथी व्यवस्था का पालन होना चाहिए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-87393" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250811-WA0010-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />पंचामृत अभिषेक से प्रतिमा में स्थायित्व आता है </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि साधु का स्वभाव समन्वयवादी होता है और पंचामृत अभिषेक से प्रतिमा में स्थायित्व आता है जिससे उसका क्षरण नहीं होता। समाधिस्थ दीक्षागुरु आचार्य श्री विरागसागर जी भी इसी मार्ग पर चलने का उपदेश देते थे। इस धार्मिक आयोजन में समाज के गणमान्य एवं भक्तजन उपस्थित रहे। राजेश पंचोलिया ने बताया कि यह आयोजन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए प्रेरणादायक एवं धार्मिक अनुशासन का उदाहरण है।</p>
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		<title>श्रीराम के जैन चरित्र पर आधारित महामुनि राम नाटिका का मंचन : 1008 दीपों से बड़े बाबा प्रभु महावीर की मंगल आरती की </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Sep 2024 15:47:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को जैन समाज द्वारा दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म एवं अनंत चतुर्दशी पर संगीतमय 1008 दीपों से बड़े बाबा प्रभु महावीर की मंगल आरती की गई। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट  आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को जैन समाज द्वारा दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म एवं अनंत चतुर्दशी पर संगीतमय 1008 दीपों से बड़े बाबा प्रभु महावीर की मंगल आरती की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट </span></strong></p>
<hr />
<p>आगरा के कमला नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को जैन समाज द्वारा दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म एवं अनंत चतुर्दशी पर संगीतमय 1008 दीपों से बड़े बाबा प्रभु महावीर की मंगल आरती की गई। इसके बाद जगदीश प्रसाद जैन अभिषेक जैन एवं ऋचा जैन परिवार की ओर से पद्म पुराण पर आधारित श्री राम का जैन चरित्र महामुनि राम नामक लघु नाटिका का मंचन किया गया, जिसमें दिखाया गया कि राम को जैन परंपरा के अनुसार कैसे वैराग्य हुआ। देवों ने उनकी परीक्षा ली और वे उस परीक्षा में सफल हुए व मोक्ष प्राप्त किया</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66747" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240918-WA0043-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />नाटिका का डायरेक्शन मुकेश रपरिया और अनिल जी अहिंसा ने किया राम का मुख्य पात्र निशांत जैन ने किया। लक्ष्मण का किरदार सम्यक् जैन ने निभाया। सूत्रधार समकित जैन, विधुषक दीपक जैन, मंगलाचरण स्वस्ति बहू मण्डल के द्वारा किया गया। नृत्यांगना झंकार जैन रहे। मंच संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया।</p>
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		<title>जन जन तक भगवान महावीर की वाणी पहुंचाएं: हर व्यक्ति को पांच सिद्धांतों का करना चाहिए पालन </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Mar 2023 07:50:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस बार 3 अप्रैल 2023 को भगवान महावीर का जन्म कल्याणक (जयंती) मनाया जाएगा। भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया। जैन धर्म का समुदाय इस पर्व को बड़ी ही धूम-धाम से एक उत्सव की तरह मनाते हैं। पढ़िए नीति सौरभ जैन की रिपोर्ट&#8230; अंबाह। इस बार 3 अप्रैल 2023 को भगवान महावीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस बार 3 अप्रैल 2023 को भगवान महावीर का जन्म कल्याणक (जयंती) मनाया जाएगा। भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया। जैन धर्म का समुदाय इस पर्व को बड़ी ही धूम-धाम से एक उत्सव की तरह मनाते हैं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए नीति सौरभ जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> इस बार 3 अप्रैल 2023 को भगवान महावीर का जन्म कल्याणक (जयंती) मनाया जाएगा। भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया। जैन धर्म का समुदाय इस पर्व को बड़ी ही धूम-धाम से एक उत्सव की तरह मनाते हैं। स्वामी महावीर को जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर माना जाता है। भगवान महावीर के सिद्धांत सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य हैं। भगवान महावीर का कहना था कि हर व्यक्ति को इन 5 सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।</p>
<p>भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। इनका जन्म 599 ईसा पूर्व में हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। भगवान महावीर नें तीस वर्ष की उम्र में वैभव और विलासिता पूर्ण जीवन को त्याग कर बारह वर्ष की मौन तपस्या के बाद &#8216;केवलज्ञान &#8216; प्राप्त किया था । केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद तीस वर्ष तक महावीर ने जनकल्याण के लिए समाज में जमी कुरीतियों और अंधविश्वासों की दूर करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।</p>
<p><strong>सुखी रहने के लिए भगवान महावीर के सूत्र</strong></p>
<p>&#8211; भगवान महावीर हमें स्वयं से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं- स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना?</p>
<p>&#8211; जो प्राणी स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेगा उसे सभी सुखों की प्राप्ति होगी। अपने आप पर विजय प्राप्त करना अनेकों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।</p>
<p>&#8211; आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु अपने भीतर रहते हैं वे शत्रु हैं- लालच, द्वेष, क्रोध, घमंड ,आसक्ति और नफरत इनसे मनुष्य को सदैव बचना चाहिए।</p>
<p>&#8211; मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतियां ही है, जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वहीं मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है। कठिन परिस्थितियों में भी मन को विचलित नहीं करना चाहिए।</p>
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		<title>अजमेर की जैन बेटी ने बढ़ाया मान, अमेरिका की रिसर्च टीम के साथ मिलकर बनाई ब्रेस्ट कैंसर वैक्सीन</title>
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		<pubDate>Sun, 02 Jan 2022 00:31:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8211;छवि जैन के माता-पिता भी हैं डॉक्टर अजमेर । भारत की जैन बेटी ने देश ही नहीं, विदेशों में भी नाम रोशन किया है। मूल रूप से अजमेर की रहने वालीं डॉक्टर छवि जैन ने अमेरिका की रिसर्च टीम के साथ मिलकर महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की वैक्सीन तैयार की है। इस वैक्सीन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000">&#8211;<strong>छवि जैन के माता-पिता भी हैं डॉक्टर</strong></span></p>
<p><strong>अजमेर । </strong>भारत की जैन बेटी ने देश ही नहीं, विदेशों में भी नाम रोशन किया है। मूल रूप से अजमेर की रहने वालीं डॉक्टर छवि जैन ने अमेरिका की रिसर्च टीम के साथ मिलकर महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की वैक्सीन तैयार की है। इस वैक्सीन का अमेरिका में जानवरों पर ट्रायल सफल रहा है। अब ये वैक्सीन महिलाओं पर क्लीनिकल ट्रायल के रूप में शुरू की जाएगी। क्लिनिकल ट्रायल के पहले चरण में ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर से प्रभावित 18-24 साल की महिलाओं में दो हफ्ते के अंतर से तीन डोज दी जाएंगी बताया जा रहा है कि यह वैक्सीन अल्फा लेक्टलब्यूमिन नामक ब्रेस्ट कैंसर प्रोटीन पर प्रहार करती है। ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में अल्फा लेक्टलब्यूमिन नामक ब्रेस्ट कैंसर प्रोटीन बनता है और ये वैक्सीन इसी प्रोटीन खत्म करने का काम करेगी. छवि अमेरिकन कैंसर सोसायटी की फीमेल रिसर्च एंबेसडर भी हैं। वर्तमान में डॉक्टर छवि अमेरिका के लर्निंग इंस्टीट्यूट क्लीवलैंड क्लीनिक में साइंटिस्ट हैं।</p>
<p><strong>माता-पिता हैं डॉक्टर</strong><br />
डॉ. छवि जैन के माता पिता भी डॉक्टर हैं। अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में पिता शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और मां डॉक्टर नीना जैन भी इसी अस्पताल में एनेस्थीसिया विभाग में सीनियर प्रोफेसर हैं। अजमेर की सोफिया और मयूर स्कूल से अपनी आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाली छवि ने पुणे के इंस्टीट्यूट ऑफ बायो इन्फोर्मेटिक्स एंड बायो टेक्नोलॉजी से एमटेक किया। इसके बाद पीएचडी के लिए वह स्विट्रजरलैंड की स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी गईं। छवि ने लर्नर रीसर्च इंस्टीट्यूट में 2018 से जून 2021 तक काम किया। यहीं से वह डॉ. थामस बड और डॉ. विनसेंट टूही की रिसर्च पर आधारित कैंसर वैक्सीन की ट्रायल टीम में शामिल हुईं।</p>
<p><strong>इंजीनियर बनना चाहती थीं</strong><br />
छवि हमेशा से अपने कजिन की तरह इंजीनियर बनना चाहती थीं लेकिन फिर एक दिन उनकी ये सोच बदल गई। मयूर स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने 11वीं में मैथ्स सब्जेक्ट लिया था, लेकिन एक दिन के लिए बायो की क्लास अटेंड की। इसी एक क्लास ने उनके भविष्य को बदल कर रख दिया। इसके बाद उन्होंने बायलोजी में आगे बढ़ने का मन बना लिया।</p>
<p><strong>मिले हैं कई अवॉर्ड</strong><br />
छवि को क्लीवलैंड क्लिनिक के शीर्ष नेतृत्व की ओर से एप्रीसिएशन एंड एक्सिलेन्स अवार्ड और एम्पलॉई ऑफ द क्वार्टर अवॉर्ड मिला है। केसवेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी से फेलोशिप भी हासिल हुई। छवि को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मनुष्यों पर पहले अध्ययन की मंजूरी हासिल कराने में सफलता मिली है।</p>
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