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	<title>जैन समाचार जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>जैन समाचार जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का दीक्षा दिवस : महान व्यक्तितव के धनी थे स्वामी जी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Dec 2023 17:26:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का आज दीक्षा दिवस है। इसी वर्ष 23 मार्च 2023 को स्वामी जी की समाधि हुई थी। चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी महान व्यक्तितव के धनी थे उन्होंने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ को महामस्तकाभिषेक से नई उंचाइयों पर पहुंचाया। चारुकीर्ति स्वामी जी श्रमण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का आज दीक्षा दिवस है। इसी वर्ष 23 मार्च 2023 को स्वामी जी की समाधि हुई थी। चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी महान व्यक्तितव के धनी थे उन्होंने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ को महामस्तकाभिषेक से नई उंचाइयों पर पहुंचाया। चारुकीर्ति स्वामी जी श्रमण संस्कृति के रक्षक थे उन्होंने श्रमण संस्कृति और धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और श्रवणबेलगोला के विकास में अपना योगदान दिया। आज जिस श्रीफल जैन न्यूज वेबसाइट पर आप ये आलेख पढ़ रहे हैं इसे भी स्वामी जी ने ही ये नाम दिया था। <span style="color: #ff0000;">स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के दीक्षा दिवस पर उनके जीवन पर ये आलेख पढ़िए।</span></strong></p>
<hr />
<p>कर्मशील, सौम्य, मौन संत, जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का 19 अप्रैल महावीर जयंती पर 1970 में श्रवणबेलगोला मठ में पट्टाभिषेक कर इनका पीठाधिकारी स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी नाम पड़ा। तब से वे श्री क्षेत्र की अभिवृद्धि, श्रुत संवर्धन, समाज कल्याण और बच्चों के लिए शिक्षा सुविधा के कार्यों में जुटे रहे। श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला का नवतर रूप, 40 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार, साफ-सुथरे विंध्यगिरि, चंद्रगिरि एवं गांव के सभी मंदिर, जिनमें एक ही साथ होती अभिषेक-पूजन को अनमोल मार्गदर्शन एवं व्यवस्था शक्ति का द्योतक थे। उन्होंने मैसूर से इतिहास में एमए बैंगलोर विद्यापीठ के तत्वाधान में एमए जैनागम में विशेष अध्यापन किया। हिंदी और संस्कृत साहित्य में विशारद किया। कन्नड़, अंग्रेजी, संस्कृत तथा हिंदी भाषा पर असाधारण प्रभुत्व सरल आकर्षक व्यक्तित्व पाश्चात्य दर्शनों के अध्ययन से अमेरिका, अफ्रीका, इंग्लैंड, बर्मा, थाईलैंड आदि अनेक देशों में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए। सन् 1988 में इंग्लैंड के लेस्टर शहर में भगवान श्री बाहुबली स्वामी जी की 7 फीट ऊंची प्रतिमा का प्रतिष्ठापन उनके मार्गदर्शन में संपन्न हुआ था। कारकल, कनकगिरि, कम्मदहल्ली अर्हत्सुगिरि मठ, मूडबिद्री मठ आदि के धर्म प्रभावी कार्यों में तथा बहुआयामी कार्यों में उनका कौशल निखरा हुआ था। भट्टारक चारुकीर्ति महास्वामी भगवान महावीर स्वामी के 2500वें निर्वाण महोत्सव के शुभ प्रसंग पर, भगवान गोम्मटेश्वर सहस्राब्दी महोत्सव के मुख्य प्रेरणा स्रोत रहे।</p>
<p><strong>विराट महोत्सवों का सहज आयोजन</strong></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52838" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001.jpg" alt="" width="844" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001.jpg 844w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-158x300.jpg 158w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-540x1024.jpg 540w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-768x1456.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-810x1536.jpg 810w" sizes="(max-width: 844px) 100vw, 844px" /></p>
<p>विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल 57 फीट ऊंची विशालकाय श्रीगोम्मटेश बाहुबली स्वामी प्रतिमा का बारह वर्षों पश्चात् होने वाले महामस्तकाभिषेक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने श्रीस्वामी जी को &#8216;कर्मयोगी&#8217; की उपाधि से अलंकृत किया था। 2017 में कर्नाटक सरकार ने महावीर शान्ति पुरस्कार प्रदान किया, जिसमें 10 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र, शॉल, श्रीफल, माला पहनकर सम्मानित किया था।</p>
<p><strong>धरियावद को मिला सानिध्य</strong></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52840" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000.jpg" alt="" width="894" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000.jpg 894w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-168x300.jpg 168w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-572x1024.jpg 572w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-768x1374.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-858x1536.jpg 858w" sizes="(max-width: 894px) 100vw, 894px" /></p>
<p>12 वर्षों के अंतराल पर नियमित होने वाले गोम्मटेश भगवान बाहुबली स्वामी के विश्वस्तरीय महामस्तकाभिषेक वर्ष 1981, 1993, 2006 और 2018 के वर्षों में वात्सल्य वारिधि दिगंबर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन (धरियावद) के कुशल निर्देशन में आपने चारों विराट आयोजन धर्म प्रभावनापूर्वक सफलतापूर्वक संपन्न किए। अप्रैल 2001 में विश्व के सबसे छोटे सर्वांग हेमवंत श्री चंद्रप्रभु जिनालय नंदनवन के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में आपका प्रवास धरियावद नगर को प्राप्त हुआ और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में सानिध्य और मार्गदर्शन प्रदान हुआ था। आप अप्रैल 1970 से मार्च 2023 तक लगातार आजीवन श्रवणबेलगोला मठ के पीठाधीश स्वामी रहकर जैन धर्म को विश्वस्तर पर नित नई पहचान और ऊंचाइयां दिलाईं।</p>
<p><strong>समाज सेवा में सतत् अग्रणी रहे</strong></p>
<p>&#8211; 2006 के महामस्तकाभिषेक के समय स्वामीजी ने पूरे गांव में सरकार व प्रशासन के सहयोग से शौचालय निर्माण का कार्य पूरा कराया</p>
<p>&#8211; आसपास के सभी गांवों के बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य लाभ हेतु मोबाइल चिकित्सालय का संचालन किया</p>
<p>&#8211; जैन मठ से जैन-जैनेतर लोगों को हर माह नकद राशि का सहयोग किया</p>
<p>&#8211; बाहुबली बाल चिकित्सालय में 100 बेड और 100 बेड के जनरल अस्पताल का संचालन किया जा रहा है</p>
<p>&#8211; कर्नाटक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राशन, कपड़े, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई</p>
<p>&#8211; बच्चों को संस्कारित करने के लिए ब्रह्मचर्य आश्रम का संचालन, जिसमें धार्मिक और लौकिक दोनों प्रकार की शिक्षा प्रदान की जाती है</p>
<p>&#8211; नर्सरी से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालन किया जा रहा है</p>
<p>&#8211; जैन साहित्य और अन्य साहित्यों के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक साहित्यकारों, विद्वानों और पत्रकारों को प्रतिवर्ष पुरस्कार प्रदान किया जाता है और सम्मेलनों का आयोजन होता है</p>
<p>&#8211; आर्थिक दृष्टि से पिछड़े समुदाय के व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधा के साथ असहाय, मंदबुद्धि को 1100 रुपये प्रतिमाह सदस्यता राशि प्रदान की जाती है</p>
<p>&#8211; 1981 में पूरे देश में जनमंगल कलश का भ्रमण करवाया</p>
<p>&#8211; प्राचीन साहित्य के प्रकाशन के लिए अक्षर कलश योजना प्रारंभ की गई</p>
<p>&#8211; 6000 से अधिक पांडुलिपियां सुरक्षित की गईं</p>
<p>&#8211; साधुओं की सेवा के लिए त्यागी सेवा समिति अलग से बनाई गई</p>
<p>स्वामीजी ने 53 वर्षों में जो कुछ किया है, वह समाज के लिए प्रेरणास्पद है। सभी तरह के मठों, संस्थाओं और मंदिरों का संचालन धार्मिक क्रियाकलापों के साथ सामाजिक कार्यों के संचालन किया जा सका है।</p>
<p><strong>साधना, ध्यान, अध्ययन को बनाया था जीवन का लक्ष्य</strong></p>
<p>दिगंबर जैन समाज की लगभग सभी संस्थाएं स्वामी जी के पास मार्गदर्शन हेतु आती थीं और उन्हीं के अनुसार कार्य करती थीं। बीजापुर सहस्त्रफणी पार्श्वनाथ मंदिर, नल्लुर समवशरण मंदिर, मकुर्ल आदिनाथ मंदिर, शालीग्राम भक्तामर मंदिर, आर्सिकेरी सहस्त्रकूट जिनालय व मायसंद्रा मंदिर के वे गौरव अध्यक्ष रहे थे। जहां के सभी कार्य उन्हीं के मार्गदर्शन में होते रहे हैं। परम पूज्य स्वामी ने 1997 से अपनी चर्या में चातुर्मास चर्या को शामिल किया था। तब से अब तक आप 16 चातुर्मास कर चुके। सामाजिक कार्यों व मठ के दायित्वों को निभाते हुए उन्होंने आध्यात्मिक और आत्मिक साधना को भी पूरा समय दिया। प्रतिवर्ष मौन साधना, ध्यान, अध्ययन, स्वाध्याय नियमित तौर पर करते थे। तप और त्याग भी साथ-साथ चलता रहता खा।</p>
<p><strong>करते थे पद विहार</strong></p>
<p>वर्ष 1997 के बाद से उन्होंने गाड़ी का प्रयोग कम किया और 2002 से 2009 तक तो उन्होंने पद विहार ही किया। स्वामी जी के गाड़ी त्याग के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण था। इस दौरान उनके मार्गदर्शन में विद्वानों ने धवला, जयधवला और महाधवला के 40 भागों का कन्नड़ में अनुवाद किया। स्वामी जी ने इन सभी का संपादन किया है। इसमें से 21 का प्रकाशन हो चुका है और बाकी प्रकाशन की प्रक्रिया में है। कार्य पूर्ण होने के बाद भी वह केवल अत्यावश्यक कार्यों के लिए बाहर जाने पर ही गाड़ी का प्रयोग करते थे अन्यथा यहां तो पदविहार ही करते थे।</p>
<p><strong>फोन का किया था त्याग</strong></p>
<p>वर्ष 2001 से फोन पर बात करने का उन्होंने त्याग किया था। इतने व्यस्त कार्यक्रमों और इतनी बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने के बावजूद फोन के बिना सभी कार्य सुचारू रूप से चलाना अपने आप में एक विलक्षण गुण है। ऐसे बहुमुखी प्रतिभावान, गुणी और विनम्र भट्टारक जी के ही कारण श्रीक्षेत्र की पहचान आज चहुंओर है। यहां आने वाले अतिथि, यात्री, त्यागी व संत सभी इनके आत्मीय स्वागत और उत्तम व्यवस्थाओं से अभिभूत होकर प्रसन्नचित्त लौटते हैं। मठाधिपति के पद पर आसीन होकर विनम्रता का भाव लिए यह सहज व्यक्तित्व हर आम और खास के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। हम सभी को स्वामी जी से समर्पण, श्रद्घा, लगन और निष्ठा सीखनी होगी, तभी तो समाज को एक माला में पिरोकर धर्म रक्षा, तीर्थ रक्षा, संत रक्षा और देश रक्षा का फर्ज पूरा कर सकेंगे।</p>
<p>विश्व शांति के लिए कार्य करने पर 2017 में कर्नाटक सरकार ने स्वामी जी को महावीर शांति पुरस्कार से नवाजा था। इसके तहत 10 लाख रुपए, प्रशस्ति, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया था।</p>
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		<title>समाज में सुधार की दृष्टि से नए नियम : सकल दिगंबर जैन समाज ने किए नए नियम लागू </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 16:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[सकल दिगंबर जैन समाज, पिड़ावा ने समाज सुधार के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसमें शादी समारोह में दो ही स्वागत किए जाएंगे। इसके साथ ही आतिशबाजी और फूलमाला का प्रयोग पूरी तरह से बंद रहेगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; पिड़ावा। सकल दिगंबर जैन समाज, पिड़ावा ने समाज सुधार के लिए नए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सकल दिगंबर जैन समाज, पिड़ावा ने समाज सुधार के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसमें शादी समारोह में दो ही स्वागत किए जाएंगे। इसके साथ ही आतिशबाजी और फूलमाला का प्रयोग पूरी तरह से बंद रहेगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पिड़ावा।</strong> सकल दिगंबर जैन समाज, पिड़ावा ने समाज सुधार के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसमें शादी समारोह में दो ही स्वागत किए जाएंगे। इसके साथ ही आतिशबाजी और फूलमाला का प्रयोग पूरी तरह से बंद रहेगा। समाज ने फैसला लिया है कि परोसगारी जूते-चप्पल पहन कर नहीं की जाएगी और प्री वेडिंग शूट पर पूर्णतया प्रतिबन्ध रहेगा। इसके साथ ही महिला संगीत में कोरियो ग्राफर नहीं बुलाया जाएगा। सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष अनिल चेलावत, श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिरजी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह जैन, मुमुझू मंडल के अध्यक्ष अमोलकचंद जैन, श्रीभक्तामर विश्वधाम डोला के अध्यक्ष प्रकाश जैन, श्री पुष्पदंत दिगंबर जैन लाल मंदिर जी के अध्यक्ष मनसुख जैन, दिगंबर जैन मंदिरजी के अध्यक्ष प्रमोद जैन, दिगंबर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी के अध्यक्ष राजेंद्र जैन ने बताया कि अब मंदिरजी का बुलावा के अतिरिक्त सभी बुलावा पर प्रतिबन्ध है, पताशे या नारियल बांंट सकते हैं। समाज के अनुसार अब समाज के भोजन में अधिक व्यंजन बनाने के नाम पर अभक्ष्य नहीं परोसा जाएगा, जो धर्म के अनुरूप ना हो। जैसे- द्विदल, दही बड़ा, सब्जी में मावा, नूडल्स, चाऊमीन, पनीर, मटर पनीर, टमेटो सॉस एवं जमीकन्द पदार्थ आदि।</p>
<p>इसके अलावा समाज का भोजन सुबह का ही रहे तो बहुत अच्छा है, विशेष परिस्थिति में शाम को रख सकते हैं। शाम के भोजन में व्यवहारी का भोजन पृथक से रखना होगा। समाज ने फैसला लिया है कि होली और दशहरा हमारे पर्व नहीं है, इनसे जितना बचें अच्छा है। अब से सभी बहनें अपने वस्त्रों का चयन अपनी संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप करेंगी। बेचलर पार्टियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। डी.जे. पर पहले की तरह प्रतिबन्ध है, साथ ही महिलाओं का अपने घर के सामने के अतिरिक्त सड़को पर नाचने पर प्रतिबन्ध है तथा शादीयों में अधिकतम 4 ढोल ही करेंगे।</p>
<p><strong>निर्णय का स्वागत</strong></p>
<p>इंदौर के दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद और दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।</p>
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		<title>सृष्टि भूषण माता जी के जन्म जयंती समारोह : सन्मति भक्त मंडल ने किया भंडारे का आयोजन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 13:33:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[जैन समाज की साध्वी सृष्टि भूषण माताजी के जन्म जयंती महोत्सव पर जैन समाज अम्बाह द्वारा अनेक सेवा कार्य किए गए। इस अवसर पर महिलाओं का सम्मान भी किया गया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230; अम्बाह। जनसेवा के प्रति समर्पित जैन समाज की साध्वी सृष्टि भूषण माताजी के जन्म जयंती महोत्सव पर जैन समाज अम्बाह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन समाज की साध्वी सृष्टि भूषण माताजी के जन्म जयंती महोत्सव पर जैन समाज अम्बाह द्वारा अनेक सेवा कार्य किए गए। इस अवसर पर महिलाओं का सम्मान भी किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह।</strong> जनसेवा के प्रति समर्पित जैन समाज की साध्वी सृष्टि भूषण माताजी के जन्म जयंती महोत्सव पर जैन समाज अम्बाह द्वारा अनेक सेवा कार्य किए गए। इस मौके पर दिन भर धार्मिक, सामाजिक और परोपकारी कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। परेड चौराहा स्थित जैन मंदिर में प्रातः काल श्री सन्मति भक्त मंडल द्वारा विशाल सार्वजनिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग ढाई हजार लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। इसी तरह दोपहर में सृष्टि मंगलम परिवार भारत वर्ष द्वारा लगभग 500 सर्व जातीय कामकाजी महिलाओं का सम्मान कराया गया एवं उन्हें उपहार भेंट किये गए।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40695" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040.jpg" alt="" width="1080" height="742" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040-300x206.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040-1024x704.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040-768x528.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040-990x680.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230324-WA0040-379x259.jpg 379w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p><strong>स्वकल्याण के साथ लोक कल्याण</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन साध्वी विश्वयश मती माताजी ने कहा कि समाधि सम्राट संत सन्मति सागर महाराज की लोक कल्याण की परंपरा को पूज्य मां सृष्टि भूषण द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। महिलाओं एवं बेटियों को आगे बढ़ाने, पढ़ाने और समाज की मुख्यधारा में शामिल रखने में इस तरह के सामाजिक आयोजन आवश्यक हैं उन्होंने कहा कि श्री सृष्टि भूषण माताजी लोक कल्याण के लिए साधना कर रही है और उनके जीवन का लक्ष्य स्व कल्याण के साथ-साथ लोक कल्याण है यही वजह है कि उनके जन्म जयंती के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और उनमें सद्भाव का भाव बढ़ाने में महिला सम्मान का यह आयोजन महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कार, संस्कृति और सद्भाव का संगम यह कार्यक्रम है। सृष्टि भूषण माताजी ने कहा कि मातृशक्ति का स्वयं के परिवार के साथ-साथ समाज व देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रसर हैं। पूज्य माताजी ने कहा कि महिलाएं देवी रूप हैं। महिलाएं कभी भी अबला नहीं हो सकतीं, महिलाएं सबला है और शक्तिपुंज हैं। इसलिए सभी महिलाओं का सम्मान करके सृष्टि मंगलम परिवार गौरवान्वित है। इस अवसर पर पूज्य माताजी ने सभी महिलाओं को आशीर्वाद भी प्रदान किया। आयोजन में मौजूद बच्चों को भी वस्त्र एवं सभी को भोजन के डिब्बे प्रदान किए गए।</p>
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		<title>श्रवणबेलगोला के विकास में योगदान को किया याद : कर्मयोगी चारुकीर्ति भट्टारक जी के समाधिमरण पर विनयांजली </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 12:24:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर महाराज ने समाधि में असमय लीन हुए श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट.. महरौनी(ललितपुर)। मुनिश्री सुधासागर महाराज की उपस्थिति में यशोदय तीर्थ कमेटी और दिगम्बर जैन पंचायत समिति ने तीर्थक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति के समाधिमरण पर विनयांजली अर्पित की। मुनिश्री सुधासागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागर महाराज ने समाधि में असमय लीन हुए श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट..</span></strong></p>
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<p><strong>महरौनी(ललितपुर)।</strong> मुनिश्री सुधासागर महाराज की उपस्थिति में यशोदय तीर्थ कमेटी और दिगम्बर जैन पंचायत समिति ने तीर्थक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति के समाधिमरण पर विनयांजली अर्पित की। मुनिश्री सुधासागर महाराज ने उन्हें श्रमण संस्कृति का रक्षक बताते हुए कहा कि चारुकीर्ति स्वामी जी ने श्रमण संस्कृति और धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और श्रवणबेलगोला के विकास में अपना योगदान दिया।</p>
<p>उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत को जोड़ने का काम किया। उन्होंने चारुकीर्ति भटटारक जी के सद्कार्यों के लिए मंगल आशीर्वाद दिया। वहीं यशोदय तीर्थ के अध्यक्ष राजा चौधरी ने कर्मयोगी चारुकीर्ति भटटारक जी के समाधिमरण होने पर विनयांजली अर्पित की और अपने भाव रखे। मंत्री राजेश मलैया ने भट्टारक जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले पचास वर्षों से भट्टारक जी ने तीर्थ क्षेत्र श्रवणबेलगोला से जुड़कर इस तीर्थ के विकास में अपना अहम योगदान दिया और इस तीर्थ को विश्वपटल पर पहचान दिलाई।</p>
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		<title>भगवान के माता-पिता बने आनंद सराफ-स्नेहलता : तीर्थ क्षेत्र की माटी ही अतिशय कारी है &#8211; मुनि सुधासागर महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 12:19:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तीर्थ कहीं भी हो, सबका होता है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट.. महरौनी(ललितपुर)। सोना कहीं भी हो, वह सोना ही रहता है। ऐसे ही तीर्थ कहीं भी हो, वह सबका होता है। तीर्थ क्षेत्र की माटी ही अतिशयकारी होती है। ये मंगल वचन मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तीर्थ कहीं भी हो, सबका होता है। </strong><span style="color: #ff0000;"><strong>पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट.</strong>.</span></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी(ललितपुर)। </strong>सोना कहीं भी हो, वह सोना ही रहता है। ऐसे ही तीर्थ कहीं भी हो, वह सबका होता है। तीर्थ क्षेत्र की माटी ही अतिशयकारी होती है। ये मंगल वचन मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित हुऐ कहे। उन्होंने कहा कि अर्जुन सत्य था तो एकलव्य सत्य से ऊपर था। सब कुछ समर्पण के बाद भी भक्त अपना अहोभाग्य माने, वही भक्ति है। प्रभु भक्ति से हस्तरेखा भी परिवर्तित हो जाती है। भक्त का और प्रभु का संबंध उसी प्रभात के सूर्य और कमल के समान है। आगम कहता है कि भगवान नहीं सुनते पर भक्त कहता है कि भगवान सुनते हैं। सत्य से ऊपर उठना ही भक्ति है।सत्य के प्रभाव से मन के विश्वास से सर्प भी हार में परिवर्तित हो जाता है।</p>
<p>इससे पहले यशोदय तीर्थ में प्रातःकालीन बेला में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई, जिसका सौभाग्य चक्रेश चौधरी,कविता जबलपुर,डां रश्मि जैन दिल्ली, ऋषभ जैन कोटा और सुभाष साढूमर को प्राप्त हुआ। मुनिश्री सुधासागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य सौभाग्य निशांत जैन वरगया और क्षुल्लक गम्भीर सागर को आहार सुभाष साढूमल को प्राप्त हुआ। यशोदय तीर्थ में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समोशरण विधान में माता-पिता बनने का सौभाग्य आनंद सराफ और स्नेहलता सराफ को प्राप्त हुआ।शाम को मुनिश्री द्वारा भक्तों की जिज्ञासा का समाधान किया गया और श्रावकजनों ने मुनिश्री की मंगल आरती की।</p>
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