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	<title>जैन संस्कृत विद्यालय &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर डाला प्रकाश : गोपालदास वरैया की 160वीं जन्म जयंती मनाई गई </title>
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		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:41:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन दर्शन के प्रकांड विद्वान पंडित गोपालदास वरैया की 160वीं जन्म जयंती महोत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। जैन संस्कृत विद्यालय के संयुक्त मंत्री सुरेशचंद जैन ‘बाबूजी’, इंदौर द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, गुरुनाम गुरु पंडित गोपालदास जी वरैया ने आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व मुरैना नगर में जैन संस्कृत विद्यालय की स्थापना की थी। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन दर्शन के प्रकांड विद्वान पंडित गोपालदास वरैया की 160वीं जन्म जयंती महोत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। जैन संस्कृत विद्यालय के संयुक्त मंत्री सुरेशचंद जैन ‘बाबूजी’, इंदौर द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, गुरुनाम गुरु पंडित गोपालदास जी वरैया ने आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व मुरैना नगर में जैन संस्कृत विद्यालय की स्थापना की थी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन दर्शन के प्रकांड विद्वान पंडित गोपालदास वरैया की 160वीं जन्म जयंती महोत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। जैन संस्कृत विद्यालय के संयुक्त मंत्री सुरेशचंद जैन ‘बाबूजी’, इंदौर द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, गुरुनाम गुरु पंडित गोपालदास जी वरैया ने आज से लगभग 125 वर्ष पूर्व मुरैना नगर में जैन संस्कृत विद्यालय की स्थापना की थी। उनके द्वारा स्थापित यह विद्यालय आज भी उनकी गौरवगाथा का गुणगान कर रहा है। बरैया जी की 160वीं जन्म जयंती समारोह के पावन अवसर पर विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी जैन संस्कृत विद्यालय, मुरैना के सरस्वती हॉल में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा के दौरान विद्यालय के पूर्व स्नातक पंडित डॉ. कमलेश जैन शास्त्री (दलपतपुर), वाराणसी का विद्यालय परिवार द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर जैन छात्रावास के छात्रों द्वारा लघु नाटिका का मंचन किया गया, जिसकी उपस्थित सभी बंधुओं ने सराहना एवं प्रशंसा की।</p>
<p><strong>जीवनगाथा से कराया परिचित</strong></p>
<p>विद्वान कमलेश शास्त्री सहित सभी वक्ताओं ने गुरुनाम गुरु पंडित गोपालदास वरैया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी जीवनगाथा से सभी को परिचित कराया। कार्यक्रम के शुभारंभ में छात्रों द्वारा मंगलाचरण किया गया। पधारे हुए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेमचन्द्र जैन ने की। कार्यक्रम में मनोज जैन बरेह, सुनील जैन भंडारी, पंकज जैन, सुरेशचंद जैन बाबूजी, राजकुमार जैन ‘राजू’, निर्मल भंडारी, वैद्य राजेन्द्र जैन, दिलीप गंगवाल, रविन्द्र जैन, अनिल जैन अम्बाह, प्राचार्य पंडित चक्रेश शास्त्री, पंडित नवनीत जैन शास्त्री, पंडित अभिषेक शास्त्री, विद्यालय के सभी छात्र, श्रीमती मुन्नीदेवी साहुला, समस्त महिला मंडल एवं समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सांसारिक इच्छाओं, आसक्तियों का त्याग मोक्ष का कारक है-मुनिश्री विलोकसागर: मुनिश्री ने जीवन में त्याग की भावना को सर्वोपरि बताया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:45:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है। त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है। जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो साधकों को आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करती है। यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है। त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है। जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो साधकों को आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करती है। यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों और अहंकार का भी त्याग है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर जी ने धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है । त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है । जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो साधकों को आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करती है। यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों और अहंकार का भी त्याग है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि त्याग के माध्यम से, व्यक्ति सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर शांति और आनंद का अनुभव कर सकता है। जैन धर्म में त्याग का अर्थ है सांसारिक इच्छाओं और आसक्तियों का स्वेच्छा से परित्याग करना, जो आध्यात्मिक विकास और मुक्ति (मोक्ष) की प्राप्ति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों के प्रति आसक्ति और अहंकार का भी त्याग है।</p>
<p>जैन धर्म में त्याग को एक महत्वपूर्ण गुण माना गया है, जो साधकों को सांसारिक बंधनों से मुक्त होने में मदद करता है। मुनिश्री ने बताया कि त्याग का अर्थ है सभी प्रकार के मोहों से उत्पन्न पापकर्मों से पूर्णतः विरक्त हो जाना। ऐसा व्यक्ति पापपूर्ण विचार नहीं रखता, पापपूर्ण वचन नहीं बोलता और अपने शरीर, मन और आत्मा से कोई पापकर्म नहीं करता। वह न केवल सभी प्रकार के पापों से पूर्णतः विरत रहता है, बल्कि दूसरों द्वारा किए जाने वाले पाप का भी समर्थक नहीं बनता। इसलिए एक मनुष्य को मूल दुख अर्थात मोह का त्याग कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि, जो व्यक्ति मोह अर्थात धन, वासना इत्यादि का त्याग कर देता है। वह सदैव सुखी जीवन व्यतीत करता है।</p>
<p><strong>जैन संस्कृत विद्यालय में चल रहा है शांतिनाथ विधान</strong></p>
<p>परम पूज्य युगल मुनिराजश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के ओवन सान्निध्य में जैन संस्कृत महाविद्यालय में सावन माह के शुक्ल पक्ष में सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान 25 जुलाई से 09 अगस्त तक सुचारू रूप से चल रहा है। विधान की समस्त धार्मिक क्रियाएं विधानाचार्य चक्रेश जैन शास्त्री संपन्न करा रहे हैं। उक्त विधान में जैन संस्कृत विद्यालय के सभी छात्र पूर्ण तन्मयता, श्रद्धा एवं भक्ति के साथ प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन करते हुए भगवान शांतिनाथ स्वामी को अर्घ्य समर्पित कर रहे हैं। आज विधान आयोजन को दसवा दिन है, अभी तक रेखा संजय जैन, पंकज अरिहंत जैन मेडिकल, रवींद्र जैन गोसपुर, विशंभर दयाल अनूप जैन, जितेंद्र जैन बंटी, कुसुम चक्रेश शास्त्री विधान के पुण्यार्जक बन चुके हैं। 09 अगस्त को विश्व शांति महायज्ञ के साथ विधान का समापन होगा।</p>
<p><strong>चल रहा है महामंत्र णमोकर लेखन कार्य</strong></p>
<p>नगर में चातुर्मासरत युगल मुनिराज लोगों को धर्म के प्रति जागरूक करने के लिए नित नित अनेकों प्रकार के आयोजन कर रहे है। अभी हाल ही में उन्होंने सभी श्रावकों को महामंत्र णमोकर के लेखन का कार्य करने के प्रति जागरूक किया है। पुण्यार्जक परिवार रेखा संजय जैन के सौजन्य से लगभग 300 पुस्तिकाएं वितरित की गई हैं। सर्वाधिक संख्या में लेखन करने वालों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जायेगें। पुण्यार्जक परिवार महावीर प्रसाद, गंगाविशन, अशोक कुमार, कैलाशचंद जैन जौरा की ओर से पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।</p>
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		<title>बच्चों ने दिये पर्यावरण सहेजने के संदेश :  जेसीआई मुरैना ने रखी प्रतियोगिता, विजेताओं को दिए पुरस्कार </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Jun 2023 12:59:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बच्चों में पर्यावरण की समझ बढ़ाने और इसे संतुलित रखने की प्रेरणा देने के लिए जेसीआई मुरैना जागृति ने जैन संस्कृत विद्यालय में ड्राइंग व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। पर्यावरण दिवस पर जेसीआई मुरैना जाग्रति ने पर्यावरण सहेजने हेतु प्रयोगिताओं का आयोजन किया और विजेताओं को पुरस्कार वितरित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बच्चों में पर्यावरण की समझ बढ़ाने और इसे संतुलित रखने की प्रेरणा देने के लिए जेसीआई मुरैना जागृति ने जैन संस्कृत विद्यालय में ड्राइंग व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> पर्यावरण दिवस पर जेसीआई मुरैना जाग्रति ने पर्यावरण सहेजने हेतु प्रयोगिताओं का आयोजन किया और विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये। बच्चों में पर्यावरण की समझ बढ़ाने और इसे संतुलित रखने की प्रेरणा देने के लिए जेसीआई मुरैना जागृति ने जैन संस्कृत विद्यालय में ड्राइंग व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रतियोगिता में भागीदारी करने वाले बच्चों ने शानदार स्लोगन और चित्र बनाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय दिया। प्रतियोगिता में विजयी रहे बच्चों को जेसीआई की ओर से पुरस्कार प्रदान किये गए। इस अवसर पर जेसीआई मेम्बर्स के अलावा विद्यालय के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। बच्चों द्वारा स्लोगन व ड्रॉइंग तैयार किये जाने से पहले जेसीआई मेम्बर्स ने उन्हें पर्यावरण की सामान्य जानकारी दी और मानव जीवन के लिए इसके महत्व से अवगत कराया।</p>
<p><strong>पर्यावरण का करें सहयोग</strong></p>
<p>जेसीआई की मेंटर एवं मां स्वास्ति इंटरनेशनल स्कूल की डायरेक्टर भावना जैन ने कहा कि हमारे चारों तरफ का प्राकृतिक आवरण जो हमें सरलता पूर्वक जीवन यापन करने में सहायक होता है, पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण से ही हमें जीने के लिए सभी संसाधन प्राप्त होते हैं। इसलिए हमारा पर्यावरण भी हमसे कुछ सहयोग की अपेक्षा रखता है। जेसीआई की अध्यक्ष ज्योति मोदी ने कहा कि तकनीक के अंधाधुंध उपयोग की वजह से दिन प्रतिदिन हम अपने पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए पर्यावरण की वास्तविकता को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। प्रतियोगिता के बाद जूरी मेम्बर्स नीतू भोला और शुभि जैन ने विजेता बच्चों के नाम तय किये। अंत में बड़े बच्चों के ग्रुप से अतिशय जैन को प्रथम, अभिषेक जैन को द्वितीय एवं छोटे बच्चों के ग्रुप से अनिमेष जैन को प्रथम पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम में जेसीआई की सचिव सारिका सिंघल, कोषाध्यक्ष बीनू अग्रवाल सहित अन्य मेम्बर्स उपस्थित रहीं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45761" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-08-at-6.23.18-PM.jpeg" alt="" width="1024" height="839" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-08-at-6.23.18-PM.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-08-at-6.23.18-PM-300x246.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-08-at-6.23.18-PM-768x629.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-08-at-6.23.18-PM-990x811.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><strong>महिलाओं ने किया पौधारोपण</strong></p>
<p>इस अवसर पर महिलाओं ने पौधरोपण भी किया। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में जेसीआई मुरैना जागृति की सदस्यों ने अपने-अपने घरों के अलावा आसपास स्थित पार्क व अन्य स्थानों पर जाकर पौधरोपण भी किया। उन्होंने वृक्षों के देखभाल की जिम्मेदारी भी ली, ताकि वे सुरक्षित रहें। जेसीआई मेम्बर्स ने संकल्प लिया कि इस वर्ष पूरे मानसून के दौरान वे विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण करेंगी और लोगों को इस मुहिम से जुड़ने की प्रेरणा देंगी। ताकि हमारा पर्यावरण सुरक्षित रह सके। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 500 से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।</p>
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