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	<title>जैन पांडुलिपियां &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>जैन पांडुलिपियां &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत : शिवपुरी जिले के जैन मंदिरों से 940 महत्वपूर्ण हस्तलिखित पांडुलिपियां हुई पंजीकृत </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 09:29:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत शिवपुरी जिले के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों से 940 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का पंजीयन किया गया है। यह कार्य भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट। मुरैना/शिवपुरी। भारत सरकार द्वारा संचालित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत शिवपुरी जिले के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों से 940 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का पंजीयन किया गया है। यह कार्य भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/शिवपुरी</strong>। भारत सरकार द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत शिवपुरी जिले के नरवर, करैरा, खनियाधाना, शिवपुरी, सेसई मगरोनी, अमोल पठा और गूडर स्थित दिगंबर जैन मंदिरों से 940 हस्तलिखित ग्रंथों का सफलतापूर्वक पंजीयन किया गया है। यह कार्य भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन, अभिलेखीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>सर्वाधिक पांडुलिपियां मगरोनी से</strong></p>
<p>मिशन के अंतर्गत सर्वाधिक 410 हस्तलिखित ग्रंथ मगरोनी के पांच प्राचीन दिगंबर जैन मंदिरों से प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त नरवर, अमोल पठा, सेसई, गूडर, करैरा, खनियाधाना और शिवपुरी के विभिन्न जैन मंदिरों से भी बड़ी संख्या में दुर्लभ ग्रंथों का पंजीयन किया गया।</p>
<p><strong>संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि</strong></p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार शिवपुरी जिला जैन धर्म, इतिहास और पांडुलिपि लेखन परंपरा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इन पांडुलिपियों का पंजीयन जिले की धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।</p>
<p><strong>पुरातत्वविदों ने किया दस्तावेजीकरण</strong></p>
<p>यह कार्य मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के पुरातत्वविद डॉ. नवनीत कुमार जैन, नूर इस्तियाक एवं बसीम खान के तीन सदस्यीय दल द्वारा संपन्न किया गया। दल ने विभिन्न मंदिरों में संरक्षित ग्रंथों का परीक्षण, अभिलेखीकरण और पंजीयन किया।</p>
<p><strong>16वीं से 20वीं शताब्दी की धरोहर</strong></p>
<p>संस्कृत, प्राकृत एवं हिंदी भाषाओं में लिखित ये पांडुलिपियां 16वीं से 20वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य की हैं। इनमें धर्म, दर्शन, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री संरक्षित है, जो शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।</p>
<p><strong>डिजिटलीकरण से बढ़ेगी पहुंच</strong></p>
<p>ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से इन पांडुलिपियों का डिजिटल अभिलेखीकरण किया जा रहा है, जिससे देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रह सकेगी और शोध एवं अध्ययन के लिए व्यापक स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी। यह पहल भारतीय ज्ञान-संपदा को वैश्विक पहचान दिलाने में भी सहायक बनेगी।</p>
<p><strong>मंदिर पदाधिकारियों का मिला सहयोग</strong></p>
<p>इस कार्य में शिवपुरी जिले के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों के पदाधिकारियों और समाजजनों का विशेष सहयोग रहा। विशेष रूप से राजेन्द्र कुमार जैन, विमल कुमार, अतुल कुमार जैन, अरविन्द कुमार जैन, वेद प्रकाश जैन, वाई.के. जैन, दीपक जैन शास्त्री, सुनील सरल, रविन्द्र जैन, सुरेन्द्र जैन एवं शिवम जैन शास्त्री सहित अनेक समाजजन इस अभियान से जुड़े रहे।</p>
<p><strong>समृद्ध ज्ञान परंपरा का संरक्षण</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इन दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का संरक्षण केवल धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखने का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान और संस्कृति के अमूल्य स्रोतों को संरक्षित करने का भी महत्वपूर्ण प्रयास है। ज्ञान भारतम् मिशन इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रहा है।</p>
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