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	<title>जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मरने के बाद की बनावटी संवेदनाएं, जीते जी सच्ची उपेक्षा: असली त्याग के लिए कोई आगे नहीं आता  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:21:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंसान के मरने के बाद अक्सर एक अजीब सा दृश्य देखने को मिलता है। हर रिश्तेदार, हर परिचित बड़ी सहजता से कहता है कि रोटी हमारी तरफ से होगी, व्यवस्था हम करेंगे। संवेदनाओं को झकझोरता यह आलेख पढ़िए, नितिन जैन की कलम से&#8230; पलवल (हरियाणा)। इंसान के मरने के बाद अक्सर एक अजीब सा दृश्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंसान के मरने के बाद अक्सर एक अजीब सा दृश्य देखने को मिलता है। हर रिश्तेदार, हर परिचित बड़ी सहजता से कहता है कि रोटी हमारी तरफ से होगी, व्यवस्था हम करेंगे। <span style="color: #ff0000">संवेदनाओं को झकझोरता यह आलेख पढ़िए, नितिन जैन की कलम से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल (हरियाणा)।</strong> इंसान के मरने के बाद अक्सर एक अजीब सा दृश्य देखने को मिलता है। हर रिश्तेदार, हर परिचित बड़ी सहजता से कहता है कि रोटी हमारी तरफ से होगी, व्यवस्था हम करेंगे, कोई कमी नहीं रहने देंगे। उस समय मानो संवेदनाओं की बाढ़ आ जाती है पर यही लोग तब कहीं नजर नहीं आते जब वही इंसान ज़िंदा होता है, दर्द में होता है, बीमारी से जूझ रहा होता है। जब वह अस्पताल के चक्कर काट रहा होता है, दवाइयों के लिए पैसे जोड़ रहा होता है, मन से टूटा हुआ होता है, तब कोई यह नहीं कहता कि दवाई मेरी तरफ से होगी, इलाज की चिंता मत करो, मैं साथ खड़ा हूं। उस समय रिश्तों की असली परीक्षा होती है और दुर्भाग्य से अधिकांश रिश्ते वहीं फेल हो जाते हैं। आज समाज में एक खतरनाक प्रवृत्ति विकसित हो गई ह ैकि जीते जी साथ देने से बचना और मरने के बाद दिखावा करना क्योंकि, जीते जी मदद करने में त्याग करना पड़ता है, समय देना पड़ता है, पैसा खर्च करना पड़ता है और सबसे बड़ी बात कि दिल से जुड़ना पड़ता है जबकि, मृत्यु के बाद की व्यवस्थाओं में केवल समाज को दिखाने का अवसर होता है, जहां संवेदना कम और प्रदर्शन अधिक होता है। यह कटु सत्य है कि आज रिश्ते भावनाओं से नहीं, अवसरों और दिखावे से संचालित हो रहे हैं। किसी के दुःख में उसके साथ खड़ा होना कठिन लगता है, पर उसके जाने के बाद अपनी उपस्थिति दर्ज कराना आसान लगता है। यही कारण है कि समाज में संवेदनशीलता धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।</p>
<p>हमें यह समझना होगा कि असली धर्म, असली मानवता और असली रिश्ते वही हैं जो किसी के बुरे समय में काम आएं। अंतिम संस्कार में रोटी देने से कहीं बड़ा पुण्य उस समय होता है जब आप किसी की बीमारी में उसका सहारा बनते हैं, उसकी दवाई का खर्च उठाते हैं, उसे मानसिक बल देते हैं। जरूरत इस बात की है कि हम अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। दिखावे की इस परंपरा को तोड़ें और सच्चे अर्थों में रिश्तों को निभाएं। किसी के जाने के बाद नहीं, बल्कि उसके जीते जी उसके काम आएं। क्योंकि मरने के बाद की रोटी से ज्यादा मूल्यवान जीते जी की दवाई होती है, और दिखावे की भीड़ से ज्यादा कीमती एक सच्चा साथ होता है। यदि हम सच में समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगीकृदिखावे से हटकर संवेदनाओं की ओर, औपचारिकता से हटकर वास्तविकता की ओर।</p>
<p>संयोजक-जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम,</p>
<p>जिलाध्यक्ष-अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन, पलवल</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक पर पलवल में आध्यात्मिक उल्लास : तीर्थ परिसर में भक्तों का तांता लगा </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:41:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पलवल से पढ़िए, यह खबर&#8230; पलवल। जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">पलवल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल</strong>। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तीर्थ परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण भक्ति तथा धर्ममय भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दिया। जन्म कल्याणक के इस पावन अवसर पर तीर्थ परिसर में विराजमान भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का विधिवत मंगल अभिषेक श्रद्धालुओं द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न किया गया। शुद्ध जल और पवित्र द्रव्यों से सम्पन्न इस अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए मंगलमय प्रार्थनाएँ कीं। अभिषेक के समय मंदिर परिसर में भक्ति की अनूठी अनुभूति देखने को मिली और श्रद्धालुओं के हृदय भगवान के प्रति समर्पण और श्रद्धा से भर उठे।</p>
<p><strong>दिव्य शिक्षाएं मानव समाज को सत्य, अहिंसा, संयम की प्रेरणा </strong></p>
<p>अभिषेक के उपरांत भगवान आदिनाथ के चरणों में शांतिधारा का पावन अनुष्ठान भी अत्यंत विधिपूर्वक किया गया। शांतिधारा के माध्यम से समस्त विश्व में शांति, करुणा, सद्भाव और धर्म के प्रसार की मंगल कामना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान से प्रार्थना की कि उनकी दिव्य शिक्षाएं मानव समाज को सत्य, अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहें। जैन परंपरा के अनुसार भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) केवल जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के प्रथम प्रवर्तक भी माने जाते हैं। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि आदिनाथ भगवान ने उस समय मानव समाज को जीवन की मूलभूत व्यवस्थाएँ सिखाईं जब समाज असंगठित और अव्यवस्थित अवस्था में था। उन्होंने मानव को कृषि करना, व्यापार करना, लिपि और गणना का ज्ञान, कला और शिल्प की विधाएँ तथा सामाजिक जीवन की मर्यादाएं सिखाकर सभ्यता को संगठित रूप प्रदान किया।</p>
<p><strong>आध्यात्मिकता की नई ऊर्जा का संचार किया</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को यह भी सिखाया कि सच्चा सुख बाहरी भौतिक वैभव में नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक उन्नति में निहित है। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मकल्याण का महान संदेश देता है। यही कारण है कि जैन समाज में उनका जन्मकल्याणक अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज के इस पावन अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में सम्पन्न हुए अभिषेक और शांतिधारा कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के हृदय में धर्म, आस्था और आध्यात्मिकता की नई ऊर्जा का संचार किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में अहिंसा, सत्य, संयम तथा नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।</p>
<p><strong>संयम और करुणा के सिद्धांतों को अपनाया जाए</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ के जन्मकल्याणक का यह पावन पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि यदि मानव जीवन में धर्म, संयम और करुणा के सिद्धांतों को अपनाया जाए तो समाज में शांति, समरसता और सद्भाव की स्थापना संभव है। इसी संदेश के साथ जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम में मनाया गया यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।</p>
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		<title>बाबा क्षेत्रपाल न्याय और सत्य के देवता: जैन धर्म में उनकी भूमिका अग्रणी मानी जाती है </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 May 2025 12:57:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाबा क्षेत्रपाल जी को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है। जैन धर्म में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है, विशेषकर जब बात आती है तीर्थों की रक्षा, समाज की सुरक्षा और धर्म की मर्यादा की रक्षा करने की। बाबा क्षेत्रपाल जी के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु उनकी महिमा के अनेक चमत्कारिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बाबा क्षेत्रपाल जी को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है। जैन धर्म में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है, विशेषकर जब बात आती है तीर्थों की रक्षा, समाज की सुरक्षा और धर्म की मर्यादा की रक्षा करने की। बाबा क्षेत्रपाल जी के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु उनकी महिमा के अनेक चमत्कारिक अनुभवों को सुनाते हैं। <span style="color: #ff0000">पलवल से पढ़िए, बाबा क्षेत्रपाल जी के चमत्कारों और महिमा पर विस्तृत लेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल।</strong> बाबा क्षेत्रपाल जी को न्याय और सत्य का देवता माना जाता है। जैन धर्म में उनकी विशेष भूमिका मानी जाती है, विशेषकर जब बात आती है तीर्थों की रक्षा, समाज की सुरक्षा और धर्म की मर्यादा की रक्षा करने की। बाबा क्षेत्रपाल जी के प्रति अपार श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालु उनकी महिमा के अनेक चमत्कारिक अनुभवों को सुनाते हैं, जिनका प्रत्यक्ष प्रमाण जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल है। पलवल स्थित श्री पार्श्व पद्मावती धाम में खनन कार्य के दौरान अनेक चमत्कारी घटनाएँ घटीं। जब इस भूमि में खुदाई की गई, तब वहाँ से केवल तीर्थंकरों और देवी पद्मावती माँ की ही नहीं, बल्कि बाबा क्षेत्रपाल जी की भी दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमाएँ प्राप्त हुईं। यह घटना स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान विशेष रूप से चमत्कारी और शक्तिशाली है।</p>
<p><strong>बाबा क्षेत्रपाल जी के चमत्कार</strong></p>
<p>1.सत्य और न्याय की रक्षा-</p>
<p>ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ बाबा क्षेत्रपाल जी की शरण में आने वालों को न्याय मिला। जिन लोगों के साथ अन्याय हुआ, जिन्होंने अपनी सच्चाई बाबा के सामने रखी, उनके मामले चमत्कारी रूप से सुलझे। जो लोग झूठ और छल करते थे, उनके झूठ खुद-ब-खुद उजागर हो गए।</p>
<p>2.भक्तों की सुरक्षा-</p>
<p>कई भक्त बताते हैं कि जब वे कठिन परिस्थितियों में फँसे, जब कोई रास्ता नज़र नहीं आया, तब बाबा की प्रार्थना करने से उन्हें आश्चर्यजनक मदद मिली। चाहे व्यापार में नुकसान हो, कानूनी विवाद हों या पारिवारिक संकट, बाबा के दरबार में आकर मार्गदर्शन माँगने पर अनेक भक्तों ने सकारात्मक परिणाम देखे हैं।</p>
<p>3.स्वप्न में दर्शन-</p>
<p>कई श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने बाबा क्षेत्रपाल जी को स्वप्न में देखा, जहाँ बाबा ने उन्हें किसी संकट का पूर्वाभास दिया या सही निर्णय लेने की प्रेरणा दी। कुछ लोगों ने स्वप्न में मिले संदेशों के आधार पर अपनी योजनाएँ बदलीं और विपत्ति से बच पाए।</p>
<p>4. तीर्थ की रक्षा-</p>
<p>पलवल स्थित तीर्थस्थल पर कई बार प्राकृतिक आपदाओं या अन्य संकटों का खतरा आया, परंतु बाबा क्षेत्रपाल जी की कृपा से तीर्थस्थल सुरक्षित रहा। स्थानीय लोगों और तीर्थ के संयोजकों का मानना है कि यह सब बाबा की दिव्य शक्ति का परिणाम है।</p>
<p><strong>बाबा के प्रति श्रद्धा-</strong></p>
<p>जैन समाज में बाबा क्षेत्रपाल जी को केवल एक रक्षक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक माना जाता है। लोग उनके दरबार में अपनी समस्याओं का समाधान खोजते हैं, और सच्चे मन से प्रार्थना करने पर उन्हें समाधान अवश्य मिलता है।</p>
<p><strong>श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल का विशेष महत्व</strong></p>
<p>संयोजक नितिन जैन के नेतृत्व में इस तीर्थस्थल का निरंतर विकास और संरक्षण किया जा रहा है। यह तीर्थ स्थल उन सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलना चाहते हैं। यहाँ नियमित पूजन, अनुष्ठान और भक्तों की सेवा के कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनमें हजारों लोग शामिल होते हैं।</p>
<p>निष्कर्ष- बाबा क्षेत्रपाल जी की महिमा अनंत है। उनकी कृपा से न केवल जैन समाज, बल्कि सभी धर्मों के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल इस चमत्कारिक शक्ति का जीवंत उदाहरण है। यह स्थान उन सभी के लिए खुला है, जो सच्चे मन से बाबा की शरण में आकर सत्य और न्याय की राह पर चलना चाहते हैं।</p>
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		<title>जैन समाज के चुनाव में विनोद जैन गुट सिरमौर: विजय जैन चुनाव जीते, समाजजनों ने दी बधाई </title>
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		<pubDate>Mon, 26 May 2025 06:22:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज पलवल के अगले प्रधान पद के लिए चुनाव सर्वाेदय तीर्थ पलवल में संपन्न हुए। एक गुट की तरफ से पूर्व प्रधान राकेश जैन और दूसरे गुट की ओर से विजय जैन चुनाव मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी लेकिन, चुनावों में विजय जैन ने राकेश जैन को 69 वोटों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज पलवल के अगले प्रधान पद के लिए चुनाव सर्वाेदय तीर्थ पलवल में संपन्न हुए। एक गुट की तरफ से पूर्व प्रधान राकेश जैन और दूसरे गुट की ओर से विजय जैन चुनाव मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी लेकिन, चुनावों में विजय जैन ने राकेश जैन को 69 वोटों से पराजित कर दिया। <span style="color: #ff0000">पलवल से पढ़िए, बलराम की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>पलवल।</strong> विनोद जैन और सालों से प्रधान रहे राकेश जैन की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके जैन समाज पलवल के अगले प्रधान पद के लिए चुनाव सर्वाेदय तीर्थ पलवल में संपन्न हुए। एक गुट की तरफ से पूर्व प्रधान राकेश जैन और दूसरे गुट की ओर से विजय जैन चुनाव मैदान में थे। दोनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर थी लेकिन, चुनावों में विजय जैन ने राकेश जैन को 69 वोटों से पराजित कर दिया। इस तरह विजय जैन अगले 2 साल के लिए जैन समाज के प्रधान चुने गए। उल्लेखनीय है कि राकेश जैन और विजय जैन पिछले दो महीने से अपने-अपने उम्मीदवारों के हक में बैठक कर रहे थे। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का भी सिलसिला चलता रहा। राकेश जैन ने पिछले 18 सालों के कार्यकाल के दौरान किए समाज भलाई के कार्यों का हवाला देते हुए समाज के लोगों से वोट मांगे लेकिन, समाज ने विजय जैन को भारी वोटों से विजय बना दिया।</p>
<p>चुनाव जीतने के बाद विनोद जैन और विजय जैन को उनके समर्थकों ने नोटों के हार पहनाकर कंधों पर उठा लिया। जीत का जश्न मनाते हुए समर्थकों ने खूब भंगड़ा नृत्य किया। इस मौके पर शीतल जैन, अन्नू जैन, विमल जैन, पदम जैन, अनुज जैन, अमित जैन, रॉबिन जैन, मोहित जैन, पारस जैन, संजय जैन, सुबोध जैन, चंद्र सैन जैन, अरुण जैन, राजेंद्र प्रसाद जैन, प्रमोद जैन, विजेंद्र जैन ने भी ढोल की थाप पर नाचते हुए जीत का जश्न मनाया। कुल 277वोटों में से 269 वोट डाले गए। नव निर्वाचित प्रधान विजय जैन को 169 और राकेश जैन को 100 वोट प्राप्त हुए। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 3 बजे तक हुई पोलिंग हुई। चुनाव अधिकारियों ने 69 वोटों से विजय जैन को विजई घोषित कर दिया।</p>
<p><strong>जीत के लिए समाज बधाई का पात्र: विनोद जैन</strong></p>
<p>व्यापारी नेता और कई सालों से समाज की सेवा करते आ रहे विनोद जैन ने कहा कि जीत के लिए पूरा जैन समाज बधाई का हकदार है। समाज ने विकास और ईमानदारी पर मोहर लगाई है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि समाज एक परिवार की तरह है। इसकी बागडोर किसी के हाथों में सौंपने के लिए चुनाव नहीं करवाए जाने चाहिए लेकिन, समाज के कुछ लोग चुनाव करवाने के पक्ष में ही थे। उन्होंने नवनियुक्त प्रधान विजय जैन को बधाई देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>पुलिस प्रशासन की भूमिका रही अहम</strong></p>
<p>जैन समाज के चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न करवाने में पुलिस प्रशासन की भूमिका भी अहम रही। पोलिंग के दौरान पुलिस ने पूरी सख्ती की हुई थी। पुलिस कर्मचारी बार-बार मौके पर आते जाते रहे। चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हुआ।</p>
<p><strong>एक और डाला जा रहा था भंगड़ा, दूसरी ओर छाई मायूसी</strong></p>
<p>चुनाव प्रक्रिया के चलते जैन मंदिर के बाहर दिनभर दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। विजय जैन के चुनाव जीतने की सूचना मिलते ही उनके समर्थकों ने बड़े जोश से ढोल की थाप पर भंगड़ा डालना शुरू कर दिया जबकि, सामने खड़े दूसरे गुट के लोगों में मायूसी छा गई।</p>
<p><strong>लोगों की उम्मीदों पर उतरूंगा खरा: विजय जैन</strong></p>
<p>जैन समाज के नवनियुक्त प्रधान विजय जैन ने कहा कि समाज के लोगों ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उस पर खरा उतरने और सब को साथ लेकर चलने का प्रयास करेंगे तथा चलती आ रही विकास की कड़ी को पूर्ववत बरकरार रखेंगे। वह जल्द ही अपनी वर्किंग कमेटी और नॉमिनेट सदस्यों की घोषणा करेंगे। समाज के एकता के सूत्र में बांधने का प्रयास करेंगे।</p>
<p><strong>समाज का फैसला सर्वमान्य: राकेश जैन</strong></p>
<p>विजय जैन से 69 वोटों से पीछे रहे विनोद जैन ने कहा कि समाज का फैसला सर्वमान्य है। चुनाव के बाद उन्होंने विजय जैन और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल के संयोजक नितिन जैन ने इस जीत को पूरी जैन समाज की जीत बताया। उन्होंने पलवल के जैन समाज का आभार व्यक्त किया कि समाज ने 18 वर्षों के कुशासन का अंत कर एक नई शुरुआत की है। नितिन जैन ने समाज से आग्रह किया कि अब सभी एकजुट होकर समाज की सेवा में आगे आएं और अपने गौरव, पलवल जैन समाज की शान जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, जहां से जिनेंद्र देव और शासन रक्षक देवी-देवताओं की अनेक प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। उसके संरक्षण और विकास के लिए सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विजय जैन की जीत बाबा क्षेत्रपाल के आशीर्वाद का परिणाम है।</p>
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