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	<title>जैन अटा मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>झूठे लोगों के रिश्ते रूठे और टूटे बिना नहीं रहते: आचार्य निर्भय सागर जी ने रयणसार ग्रंथ पर प्रवचन में वाणी संयम पर दिया जोर </title>
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		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 13:19:36 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्यश्री निर्भयसागर महाराज ने धर्मसभा में करते हुए कहा कि मधुर वाणी हर प्राणी से मधुर संबंध बनाती है इसलिए हमेशा मधुर वाणी बोलना चाहिए। आदर सत्कार क्षमा और विनय ज्ञानियों के द्वारा दी जाने वाली सबसे बड़ी गिफ्ट है। अच्छी रिश्तों से फरिश्ते भी प्रसन्न होते हैं। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> ललितपुर।</strong> आचार्यश्री निर्भयसागर महाराज ने धर्मसभा में करते हुए कहा कि मधुर वाणी हर प्राणी से मधुर संबंध बनाती है इसलिए हमेशा मधुर वाणी बोलना चाहिए। आदर सत्कार क्षमा और विनय ज्ञानियों के द्वारा दी जाने वाली सबसे बड़ी गिफ्ट है। अच्छी रिश्तों से फरिश्ते भी प्रसन्न होते हैं। अहम् का दफन करने वालों की अहमियत बढ़ जाती है। अहम् करने वालों की हैसियत काम हो जाती है। जैन अटा मंदिर में चल रही धर्म सभा में आचार्य श्री ने कहा निस्वार्थ की गई भलाई दूध की मलाई की तरह ऊपर आती है।</p>
<p>अच्छे लोगों का साथ बुरे लोग भी चाहते हैं। विश्वास ही विश्व की सांस है। झूठे लोगों के रिश्ते रूठे और टूटे बिना नहीं रहते हैं। आशा और निराशा दोनों दुखदाई है। समय पर प्राप्त होने वाली वस्तु का मूल्य पड़ जाता है। उन्होंने कहा इस कलिकाल की संजीवन बूटी चाय है। इस चाय की चाह से बच्चों की शक्ति को भी आघात पहुंचा है।</p>
<p>चाय एक धीमा जहर है, जिसमें कैफीन नाम का जहर होता है, जो आदमी को आदि बना देता है। सच्चे आस्थावान धर्मात्मा जुगनू के समान बहुत कम कहीं-कहीं दिखते हैं और रागी दोषी मोही मच्छरों की तरह सारी दुनिया में भरे पड़े हैं। आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ सहित अटा मंदिर में विराजित होकर प्रतिदिन रयणसार ग्रंथ पर मार्मिक प्रवचन कर रहे हैं।</p>
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		<title>चुप रहना विद्वानों की निशानी : आचार्य निर्भय सागर ने शांति के उपायों से कराया परिचित </title>
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		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 08:09:53 +0000</pubDate>
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<p><strong>सावरकर चौक स्थित जैन अटा मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री निर्भय महाराज ने कहा कि हमें आपस की लडाई झगड़े से बचना चाहिए और मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> सावरकर चौक स्थित जैन अटा मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री निर्भय महाराज ने कहा कि हमें आपस की लडाई झगड़े से बचना चाहिए और मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए। हितकारी मीठे कम और धीरे बोलना चाहिए चुप रहना विद्वानों की निशानी है। घर गृहस्थी में शांति का सबसे सरल उपाय है। तेज आवाज से बोलने पर अनेक प्रकार की शारीरिक हानि होती है अधिक बोलने से और झूठ बोलने से तनाव बढ़ता है। डिप्रेशन की समस्या आती है मूड ऑफ हो जाता है घर में मन मुटाव होता है। बोलने और सुनने वाले के अंदर उदासीनता और अरुचि पैदा होती है। इसलिए अधिक बोलने में हानि ज्यादा और फायदा कम होता है।</p>
<p><strong>भक्ति करने से स्वास्थ्य लाभ भी होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा विद्वान वही है जो कम बोलता है। आचार्य श्री ने कहा मंदिर में घंटा झालर बजाने से उत्पन्न हुई तरंगों से मंदिर से रोगाणु एवं वायरस निष्कासित हो जाते हैं और वातावरण पवित्र बना रहता है। ऐसी भक्ति करने से स्वास्थ्य लाभ भी होता है इस बात को डॉक्टर रॉबर्ट एवं डॉक्टर डि ब्राइन इत्यादि वैज्ञानिकों ने ध्वनि चिकित्सा के माध्यम से उपचार करना प्रारंभ किया है और उसे अनेक रोगियों को ठीक किया है। आचार्यश्री ने कहा संकट महापुरुषों के जीवन में आता है कायरों के नहीं। ग्रहण सूर्य चन्द्र को लगता है सितारों को नहीं मत कहो कि दिन खराब आए हैं। काॅंटो से घिर गए समझो गुलाब आज हैं।</p>
<p><strong>समाधान का कार्यक्रम निरन्तर</strong></p>
<p>गौरतलब रहे आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ सहित ललितपुर अटा मन्दिर में‌ विराजमान है । प्रतिदिन प्रातः आचार्य श्री द्वारा 8:30बजे से रयणसार ग्रंथ की वाचना दोपहर में 3:00बजे गोमट्टसार जीवकाण्ड विषय पर शिक्षण एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम निरन्तर चल रहा है । श्रावकों के लिए अलग अलग समय पर संघस्थ सभी मुनि राजों के द्वारा धार्मिक शिक्षण दिया जा रहा है। जिससे नगर में अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही है।</p>
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		<title>जीवन में धर्म ध्यान ही पुण्य का कारण: जैन अटा मंदिर में सिद्धचक महामंडल विधान आरंभ  </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 08:03:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धचक महामंडल विधान में सिद्धों की आराधना करने का पुण्यार्जन कैलाशचन्द्र मोहित जैन बडेरा ललित रेडियो परिवार को प्राप्त हुआ। विधान के शुभारंभ पर श्रावक-श्राविकाओं ने घटयात्रा निकाली। जिसमें महिलाए मंगल कलश लेकर प्रभावना कर रही थी। ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धचक महामंडल विधान में सिद्धों की आराधना करने का पुण्यार्जन कैलाशचन्द्र मोहित जैन बडेरा ललित रेडियो परिवार को प्राप्त हुआ। विधान के शुभारंभ पर श्रावक-श्राविकाओं ने घटयात्रा निकाली। जिसमें महिलाए मंगल कलश लेकर प्रभावना कर रही थी। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> जैन अटामंदिर में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि हमें अपनी आत्मा की पवित्र बनाना चाहिए। जिससे परमात्मा अपनी आत्मा में प्रकट हो सके। उन्हांेने सिद्धों की अराधना की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में धर्म ध्यान ही पुण्य का कारण है। जहां बोलने से धर्म की रक्षा होती हो, प्राणियों का उपकार होता हो, वहां बिना पूछे ही बोलना और जहां आपका का हित नहीं हो वहां मौन ही रहना उचित कहा है। उन्होंने कहा हमंे मानव पर्याय झाडू के समान मिली है। इससे हमें अपनी आत्मा रूपी घर में पड़ी ईर्ष्या नफरत मोह माया जाल और विषय कषाय रूपी कचरा को बाहर फेंकना होगा। उन्होने कहा जो व्यक्ति दूसरों की निंदा आलोचना करता है वह दूसरों की आत्मा रूपी घर को तो साफ कर रहा है लेकिन, अपनी आत्मा रुपी घर में सारा कचरा भर रहा है। जैन अटा मंदिर में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धचक महामंडल विधान में सिद्धों की आराधना करने का पुण्यार्जन कैलाशचन्द्र मोहित जैन बडेरा ललित रेडियो परिवार को प्राप्त हुआ। विधान के शुभारंभ पर श्रावक-श्राविकाओं ने घटयात्रा निकाली। जिसमें महिलाए मंगल कलश लेकर प्रभावना कर रही थी। नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए यह यात्रा विधान स्थल पर पहुंची।</p>
<p><strong>घटयात्रा में यह समाजजन शामिल रहे। </strong></p>
<p>जहां आचार्य श्री के सानिध्य में विधानाचार्य पं संतोष जैन अमृत ने पात्र शुद्धि कर प्रमुख पात्र सौधर्म इंद्र मोहित-नीलम जैन, कुवेर ललित सुभाला जैन, महायज्ञनायक प्रमोद सीमा जैन, ईशान इन्द्र राजेन्द्र सरिता जैन, सातन इन्द्र इन्द्रसेन शिप्रा जैन, माहेन्द्र इन्द्र अनंत श्वेता जैन, श्रीपाल मैनासुन्दरी आलोक सोनम जैन रहे। इस मौके पर प्रमुख रूम से जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन, कैप्टन राजकुमार जैन सनत जैन खजुरिया, शीलचन्द अनौरा, अखिलेश गदयाना, कपूरचंद लागौन, मंदिर प्रबंधक अजय जैन मनोज जैन बबीना, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, अमित सराफ, सुरेश बडेरा सिद्धेश्वर जमौरिया, आनंद जैन साइकिल, सुमत बडेरा आदि रहे।</p>
<p><strong>आचार्य श्री ने किया केशलोच</strong></p>
<p>प्रातःकाल जैन अटामंदिर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने अपनी सिर दाढ़ी और मूंछ के बालों को अपने हाथों से उखाडकर केशलोच किए। दिगंबर साधू की उत्कृष्ठ साधना के अन्तर्गत जैन साधु दो माह से 4 माह के मध्य में नियम से केशलोच करते हैं। इस दिन जैन साधु 48 घंटे का उपवास रखते है। केशलोच की प्रक्रिया के संबंध में आचार्य श्री बताते है कि महिला हो या पुरुष सभी को अपने बालों से मोह होता है। बाल अंगार की श्रेणी में आते हैं। इसलिए निर्माेही जैन बालों को नहीं रखते और उखाड़ देते हैं।</p>
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		<title>जीवन में संस्कारों की प्रधानता श्रेष्ठ:  मुनि श्री सौम्यसागर जी संघ का हुआ मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 07:11:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सौम्यसागर महाराज एवं मुनि जयेन्द्र सागर महाराज का नगर में प्रभावना पूर्वक प्रवेश हुआ। जैन अटा मंदिर में मुनिश्री ने धर्मसभा को संबोधित किया। मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया। अगवानी कर आरती उतारी। ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की , यह खबर&#8230; ललितपुर। आचार्य श्री विरागसागर जी के पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज के शिष्य मुनि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सौम्यसागर महाराज एवं मुनि जयेन्द्र सागर महाराज का नगर में प्रभावना पूर्वक प्रवेश हुआ। जैन अटा मंदिर में मुनिश्री ने धर्मसभा को संबोधित किया। मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया। अगवानी कर आरती उतारी। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की , यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री विरागसागर जी के पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज के शिष्य मुनि सौम्यसागर महाराज एवं मुनि जयेन्द्र सागर महाराज का नगर में प्रभावना पूर्वक प्रवेश हुआ। जैन अटा मंदिर में मुनिश्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए जीवन में संस्कारों की प्रधानता को श्रेष्ठ बताते हुए कहा आत्म शांति के लिए धर्म जरूरी है। उन्होंने कहा अधिक से अधिक समय धर्म के साथ श्रावकों को बिताना चाहिए। धर्म के बगैर कल्याण नहीं है। मंगलवार को प्रातःकाल दिगम्बर जैन पंचायत ने नगर के एम्बोशिया जैन मंदिर में विराजमान मुनि श्री सौम्य सागर महाराज एवं मुनि जयेन्द्र सागर महाराज को श्रीफल भेंट किया।</p>
<p><strong>मुनिश्री के पाद प्रक्षालन कर आरती की</strong></p>
<p>इसके उपरान्त श्रावक-श्राविकाओं ने गाजे बाजे के साथ मुनि श्री की जयकारों के साथ अगुवाई की। मार्ग में श्रावकों ने रंगोली सजाई और मुनिश्री के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। मुनिश्री कैलगुवा तिराहा से आजाद चौक होते हुए सावरकर चौक पहुंचे। जहां पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में मुनि श्री का मंगल प्रवेश कराया। इस मौके पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ.अक्षय टडिया, संयोजक सनत खजुरिया, कैप्टन राजकुमार जैन, मनोज जैन, बबीना अजय जैन गगचारी, प्रफुल्ल जैन, संजीव जैन लकी ने मुनिश्री से ललितपुर में प्रवास के लिए आग्रह किया।</p>
<p><strong>प्रस्तावित सिद्धचक विधान की जानकारी दी</strong><br />
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के सममुख दीप प्रज्वलित कर श्रावक श्रेष्ठियों ने किया। मुनि श्री के सानिध्य में पाठशाला स्थापना के 20 वर्ष पूर्ण होने पर प्रस्तावित सिद्धचक विधान की जानकारी विधानाचार्य ब्रह्मचारी मनोज भैया ने दी। विधान के प्रमुख चयनित पात्रों ने मुनि श्री का श्रीफल अर्पित कर आशीवाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री आकाश जैन ने किया। इस अवसर पर शीलचंद अनोरा, अखिलेश गदयाना, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, धार्मिक संयोजक प्रतीक इमलिया, अमित जैन सराफ शिक्षक पुष्पेन्द्र जैन धन्यकुमार जैन,वीणा जैन, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, अनंत सराफ, राजीव जैन खजरा आदि उपस्थित रहे।</p>
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