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	<title>जन्म &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्ति और ज्ञान का अनूठा संगम: डडूका में बच्चों ने मनाया भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व </title>
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		<pubDate>Sun, 17 May 2026 05:47:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अध्यात्म और संस्कारों की पावन भूमि बांसवाड़ा के डडूका क्षेत्र में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर देव, देवाधिदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व अपूर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। बांसवाड़ा से पढ़िए, अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट&#8230; बांसवाड़ा (राजस्थान)। अध्यात्म और संस्कारों की पावन भूमि बांसवाड़ा के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अध्यात्म और संस्कारों की पावन भूमि बांसवाड़ा के डडूका क्षेत्र में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर देव, देवाधिदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व अपूर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। <span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा से पढ़िए, अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा (राजस्थान)।</strong> अध्यात्म और संस्कारों की पावन भूमि बांसवाड़ा के डडूका क्षेत्र में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर देव, देवाधिदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक पर्व अपूर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। दिगंबर जैन पाठशाला डडूका के तत्वावधान में आयोजित इस पावन प्रसंग पर संपूर्ण वातावरण जिनेंद्र प्रभु की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। उत्सव का शुभारंभ प्रातः काल की पावन बेला में हुआ। पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने परम विशुद्धि के साथ जिनालय (जैन मंदिर) में प्रवेश किया। बालकों ने पूरी विधि-विधान और पावन मंत्रोच्चार के बीच श्री जी (भगवान शांतिनाथ) का मंगल जलाभिषेक किया। छोटे-छोटे हाथों से भगवान का अभिषेक होते देख उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं का हृदय भी अहोभाव और भक्ति से भर उठा। बच्चों की इस क्रिया ने सभी को संस्कारों की महत्ता का अहसास कराया।</p>
<p><strong>सायं काल ज्ञानवर्धन और रोचक प्रश्नमंच</strong></p>
<p>दिनभर के भक्तिमय माहौल के बाद, शाम को पाठशाला परिसर में एक विशेष ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। पाठशाला के प्रेरकों के मार्गदर्शन में भगवान शांतिनाथ के तीनों कल्याणकों (जन्म, तप और मोक्ष) पर आधारित एक अत्यंत रोचक प्रश्नमंच (क्विज) प्रतियोगिता हुई। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी धार्मिक बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।</p>
<p><strong>पांच कल्याणकों की मंगलमय देशना</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान पाठशाला प्रेरकों ने बच्चों को जैन दर्शन के अनुसार तीर्थंकर भगवंतों के जीवन से जुड़े सभी पांचों कल्याणकों गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष के बारे में विस्तार से मंगलमय जानकारियां साझा कीं। बच्चों को बताया गया कि किस तरह तीर्थंकर प्रभु का जीवन हमें त्याग, संयम और आत्म-कल्याण का मार्ग दिखाता है। इस पूरे आयोजन में 22 नौनिहालों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेकर धर्म लाभ लिया।</p>
<p><strong>वार्षिक परीक्षा की घोषणा</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर बच्चों के ज्ञान के मूल्यांकन के लिए आगामी धार्मिक गतिविधियों की घोषणा भी की गई। प्रेरकों ने सभी विद्यार्थियों को सूचित किया कि पाठशाला की ग्रीष्मकालीन वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन आगामी 1 से 5 जून के मध्य किया जाएगा। सभी बच्चों को इसके लिए अभी से लगन पूर्वक तैयारी करने की प्रेरणा दी गई।</p>
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		<title>108 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाकर किया भक्ति भाव प्रकट: शांतिनाथ भगवान का जन्म,तप एवं मोक्ष कल्याणक दिवस पर हुए अभिषेक और शांतिधारा के कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Sat, 16 May 2026 08:12:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक पर अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया गया। आगरा से पढ़िए, रोहित जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक पर अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, रोहित जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक पर अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसके बाद नित्य नियम पूजा एवं शांतिनाथ भगवान की पूजा की गई। बोली के माध्यम से मनोज जैन, अनमोल जैन, अमित जैन तहसील, सतेंद्रकुमार जैन, सतेंद्रकुमार जैन एसबीआई परिवार, विवेक जैन, माया जैन, शिखा जैन, प्रीति जैन, प्रेमलता जैन, अशोक जैन परिवार ने 21 किलो का लाडू चढ़ाया गया। मोक्ष कल्याणक महोत्सव के तहत भगवान शांतिनाथ को 108 किलो का निर्वाण लाडू भक्ति भाव से श्रद्धालुओं में चढ़ाया। श्री शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महामहोत्सव अत्यंत भक्तिपूर्ण, शांतिपूर्ण एवं हर्षाेल्लास के साथ श्रद्धा और भक्ति भावपूर्वक मनाया गया।</p>
<p><strong>महोत्सव में यह समाजजन मौजूद रहे </strong></p>
<p>इस मौके पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन टीचर, कोषाध्यक्ष मगन कुमार जैन, प्रवीण जैन, महेशचंद जैन, राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, अरुण जैन, सुशील जैन, संजीव जैन, हेमा जैन ,दिलीप जैन, अनिल जैन बुरे वाले, मनोज जैन, विपुल जैन, आलोक जैन, सिद्धार्थ जैन, मोहित जैन, अमित जैन तहसील, प्रशांत जैन, वैभव जैन, दीपक जैन, आदिश जैन, प्रशांत जैन, विकास जैन, गौरव जैन, आदर्श जैन, दिपेश जैन, संजय जैन, शुभम जैन, घनश्याम जैन, आशीष जैन, विशाल जैन, अभिषेक जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन सकल जैन समाज मौजूद थे।</p>
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		<title>शांतिनाथ भगवान के निर्वाण लाडू के साथ त्रय कल्याणक महोत्सव पूर्ण : शहर धार्मिक आभा से सराबोर रहा </title>
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		<pubDate>Sat, 16 May 2026 04:59:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। 15 मई को मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष इन तीनों कल्याणक के अवसर पर अनेक धार्मिक आयोजन किए गए। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। श्री शांतिनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। 15 मई को मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष इन तीनों कल्याणक के अवसर पर अनेक धार्मिक आयोजन किए गए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। 15 मई को मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष इन तीनों कल्याणक के अवसर पर अनेक धार्मिक आयोजन किए गए। इस आयोजन ने पूरे शहर को धार्मिक आभा से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर प्रातः काल में श्रीजी को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर इंद्रो द्वारा कलशों से अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इसके बाद शांतिनाथ विधान मंडल का आयोजन किया गया। जिसमे नगर के सभी मंदिरों के लोगों ने विधान में बढ़ चढ़कर भाग लिया एवं विधान मंडल की पूजन की।</p>
<p><strong>भगवान का पालना झुलाया</strong></p>
<p>शाम को आरती और शास्त्रसभा के बाद भगवान को पालना झुलाया गया। इस पावन अवसर पर महिला मंडल, बालिका मंडल, धर्मसागर पाठशाला और शांतिधारा परिवार के सदस्यों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम की सफलता में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को श्री शांतिनाथ विधान मंडल का आयोजन पंडित मनोज शास्त्री बागरोही के सानिध्य में भोपाल से पधारे केशव एंड पार्टी के मधुर वाणी से बड़ा तख्ता मंदिर में किया गया। इसमें बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया एवं अत्यंत भक्ति भाव ओर श्रद्धा के साथ झूमते नाचते हुए भगवान की भक्ति की इसके पश्चात निर्वाण कांड बोलकर भगवान के सम्मुख 16 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया । इस अवसर पर पारस सर्राफ, कमल आंडरा, एंजे दाखिया, कमल सर्राफ, अनिल सर्राफ, अम्मू छामुनिया, विनोद सर्राफ, प्रकाश सेठी, संजय संघी, कन्हैया लाल बरवास, धर्मचंद पतल दोना, ज्ञान संघी सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सिंहोनिया में 108 कलशों से भगवान शांतिनाथ का हुआ महामस्तकाभिषेक : अंबाह में हुए धार्मिक आयोजन में उमड़े समाज जन। </title>
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		<pubDate>Fri, 15 May 2026 11:46:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंबाह। प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र सिंहोनिया में शुक्रवार को भगवान शांतिनाथ, अरहनाथ एवं कुंथुनाथ की प्राचीन प्रतिमाओं का भव्य महामस्तकाभिषेक श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में अंबाह, मुरैना, ग्वालियर, मुरार, आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अंबाह</strong>। प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र सिंहोनिया में शुक्रवार को भगवान शांतिनाथ, अरहनाथ एवं कुंथुनाथ की प्राचीन प्रतिमाओं का भव्य महामस्तकाभिषेक श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में अंबाह, मुरैना, ग्वालियर, मुरार, आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। प्रातःकाल पंडित संजय शास्त्री के निर्देशन में नित्य नियम पूजन, शांति विधान, शांतिधारा एवं यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद 108 कलशों से भगवान शांतिनाथ की 21 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक किया गया। पवित्र जल से हुए अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू अर्पित कर पुण्यार्जन किया।</p>
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<p><strong>संयम और वैराग्य का संदेश देने वाला महापर्व</strong></p>
<p>कमेटी प्रमुख जिनेश जैन ने कहा कि महामस्तकाभिषेक आत्मशुद्धि, संयम और वैराग्य का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने बताया कि भगवान शांतिनाथ के जीवन से मनुष्य को अहिंसा, क्षमा और आत्मानुशासन की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धा से किया गया अभिषेक आत्मा को निर्मल बनाने का प्रतीक है। आयोजन में रविंद्र जैन टिल्लू, संजय जैन, नीलेश जैन, रवि जैन, संजू जैन, डॉबी जैन, पिंटू जैन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>शांतिनाथ भगवान का विशेष अभिषेक</strong></p>
<p>उधर, अंबाह नगर के बड़ा जैन मंदिर में भी भगवान शांतिनाथ का विशेष अभिषेक किया गया। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के सदस्यों ने सामूहिक रूप से भगवान का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात शांतिधारा की गई, जिसमें समाजजनों ने विश्वशांति और आत्मकल्याण की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।</p>
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		<title>शांतिनाथ भगवान के त्रय कल्याणक महोत्सव में श्रद्धा का सैलाब : पंचामृत अभिषेक और भजन संध्या में भावविभोर हुआ टोंक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 13:56:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। गुरुवार को हुए पंचामृत अभिषेक और भव्य भजन संध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। गुरुवार को हुए पंचामृत अभिषेक और भव्य भजन संध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, बड़ा तख्ता टोंक में बुधवार से शुरू हुआ त्रय कल्याणक महोत्सव अब अपने धार्मिक शिखर की ओर अग्रसर है। गुरुवार को हुए पंचामृत अभिषेक और भव्य भजन संध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष इन तीनों कल्याणकों की स्मृति में आयोजित इस आयोजन ने पूरे शहर को धार्मिक आभा से सराबोर कर दिया।</p>
<p><strong>पंचामृत से हुआ विशेष अभिषेक</strong></p>
<p>14 मई को सुबह भगवान शांतिनाथ का विशेष पंचामृत अभिषेक हुआ, जिसमें 25 प्रकार के पवित्र रसों से अभिषेक कर पूजा अर्चना की गई। यह दृश्य अत्यंत दिव्य और अलौकिक रहा, जब भक्ति रस में भीगे श्रद्धालु शांतिनाथ भगवान की आराधना में लीन दिखे। अभिषेक के दौरान जयकारों से मंदिर परिसर गूँज उठा।</p>
<p><strong>संध्या बनी संगीतमय</strong></p>
<p>शाम को आरती और शास्त्रसभा के बाद हुई भजन संध्या में भोपाल से पधारे केशव एंड पार्टी के कलाकारों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में डुबो दिया। भजन संध्या के दौरान वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया और श्रद्धालु देर रात तक भावविभोर होकर झूमते रहे।</p>
<p><strong>समाजजनों की सराहनीय भागीदारी</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर महिला मंडल, बालिका मंडल, धर्मसागर पाठशाला और शांतिधारा परिवार के सदस्यों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम की सफलता में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि 15 मई को श्री शांतिनाथ विधान मंडल का आयोजन बड़े मंदिर में किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों के आने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>प्रमुख समाजसेवियों की उपस्थिति</strong></p>
<p>महोत्सव में भागचंद फुलेता, धर्मचंद दाखिया, कमल सर्राफ, विकास अत्तार, सुनील सर्राफ, कमल आंडरा, सुरेश मलारना, पुनीत जागीरदार, सोनू पासरोटिया, जिवेंद्र आंडरा, प्रदीप आंडरा, अंकित आंडरा, मनीष अत्तार, आकाश बोरदा और नरेंद्र अत्तार सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भगवान शांतिनाथ के तीन कल्याणक का महासंगम : इंदौर सहित देशभर के जिनालयों में 15 मई मनेगा भगवान का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 12:55:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230; इंदौर। जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मालवा की पावन धरा इंदौर सहित देशभर के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों, जिनालयों और चैत्यालयों में इस पावन अवसर पर विशेष अनुष्ठान, महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा और विश्वशांति महायज्ञ विधान आयोजित किए जाएंगे। सकल जैन समाज ने इस त्रिकल्याणक महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।</p>
<p><strong>एक ही पावन तिथि पर तीन कल्याणक का संयोग</strong></p>
<p>जैन पुराणों के अनुसार जेठ कृष्ण चतुर्दशी की पावन तिथि भगवान शांतिनाथ के जीवन में अद्भुत महत्व रखती है। इसी तिथि को उनका दीक्षा (तप) कल्याणक और मोक्ष कल्याणक हुआ था। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष उनका जन्म कल्याणक पर्व भी इसी समय के साथ जुड़कर त्रिकल्याणक महामहोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>भगवान शांतिनाथ का जीवन वृत्त और तीनों कल्याणक </strong></p>
<p>गर्भ एवं जन्म कल्याणक- हस्तिनापुर के इक्ष्वाकु वंशीय राजा विश्वसेन और माता ऐरादेवी (अचिरा) के आंगन में प्रभु का जन्म हुआ था। उनके गर्भ में आते ही पूरे राज्य में शांति की लहर दौड़ गई थी, इसलिए उनका नाम ‘शांतिनाथ’ रखा गया। वे 16वें तीर्थंकर होने के साथ-साथ तीन खंड के अधिपति पंचम चक्रवर्ती और कामदेव भी थे।</p>
<p>दीक्षा (तप) कल्याणक- राजसी वैभव, अटूट संपदा और चक्रवर्ती के सुखों का भोग करने के बाद एक दिन दर्पण में अपना रूप देखते समय भगवान को वैराग्य उत्पन्न हुआ। उन्होंने संसार की असारता को समझा और जेठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हस्तिनापुर के सहस्राम्र वन में दीक्षा धारण कर ली। वे आत्म-साधना और कठिन तपस्या में लीन हो गए।</p>
<p>मोक्ष कल्याणक- कठिन तप और ध्यान के बल पर प्रभु ने केवलज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ हिल) की पावन टोंक से जेठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही भगवान शांतिनाथ ने समस्त कर्मों का क्षय कर मोक्ष (निर्वाण) पद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>इंदौर सहित देश भर में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम</strong></p>
<p>इस महापर्व के अवसर पर इंदौर के कांच मंदिर, गोमटगिरी, दिगंबर जैन उदासीन आश्रम सहित सभी उपनगरीय जिनालयों में सुबह की वेला में देव-शास्त्र-गुरु पूजन होगा।</p>
<p>महामस्तकाभिषेक व शांतिधारा- स्वर्ण और रजत कलशों से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। विश्वशांति महायज्ञ-विश्व में सुख, समृद्धि और शांति की कामना के लिए विशेष आहुतियां दी जाएंगी। लाडू समर्पणरू निर्वाण लाडू चढ़ाकर भक्त प्रभु के मोक्ष कल्याणक की खुशियां मनाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमरू संध्याकाल में महाआरती, भक्तांबर पाठ और जिनेंद्र भक्ति के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संत समाज और विद्वानों के अनुसार भगवान शांतिनाथ की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट, रोग, शोक और मानसिक अशांति दूर होती है। समस्त जैन समाज इस पावन दिवस पर उपवास, एकासन और सामायिक कर आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।</p>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन में श्री शांतिनाथ भगवान को चढ़ाया जाएगा निर्वाण लाडू : बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की है संभावना  </title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 08:19:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खरगोन जिले में स्थित पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पहाड़ी पर विशाल मंदिर बना है। जहां श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ भगवान् और अरहनाथ भगवान की 17 फीट की प्राचीन प्रतिमा है। 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक भी है। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>खरगोन जिले में स्थित पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पहाड़ी पर विशाल मंदिर बना है। जहां श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ भगवान् और अरहनाथ भगवान की 17 फीट की प्राचीन प्रतिमा है। 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक भी है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> खरगोन जिले में स्थित पावागिरी उन सिद्ध क्षेत्र में पहाड़ी पर विशाल मंदिर बना है। जहां श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ भगवान् और अरहनाथ भगवान की 17 फीट की प्राचीन प्रतिमा है। 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक भी है। कमेटी के महामंत्री अशोक झांझरी और मंत्री अतुल कासलीवाल ने बताया कि कमेटी ने देशभर के श्रद्धालुओं के लिए निर्वाण दिवस के दिन एक लाडू की राशि 500 रुपए रखी है। जिनके भी भाव हों या वह खुद आकर लाडू श्री चरणों में अर्पित कर सकते हैं या जो क्षेत्र खाते में राशि भेजकर लाडू चढ़ाकर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इसके लिए खाते में राशि डालकर लाभ लेकर क्षेत्र के कार्य में सहयोग प्रदान किया जा सकता है।</p>
<p>यह जानकारी ट्रस्टी मनीष जैन बड़वानी व प्रचार मंत्री आशीष जैन ने दी। सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन सिद्ध क्षेत्र खरगोन में 15 मई को तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के शुभ अवसर पर पावागिरी जी ऊन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन जुटने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जिन्हें निर्वाण लाडू अर्पित करना है या करवाना है वे बुकिंग राशि कार्यालय में जमा करवा सकता है। विेशेष जानकारी के लिए पदाधिकारियों से मोबाइल पर संपर्क किया जा सकता है।</p>
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		<title>तीर्थंकर कुंथुनाथ जी शांति और संयम के प्रतीक: जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक की पावन गाथा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 05:54:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की श्रेणी में 17वें तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ जी का व्यक्तित्व अत्यंत विलक्षण और प्रेरणादायी है। 18 अप्रैल (वैशाख शुक्ल प्रतिपदा) का दिन जैन समाज के लिए एक महामहोत्सव के समान है, क्योंकि इसी पावन तिथि को प्रभु के जन्म, तप और मोक्ष इन तीन महान कल्याणकों का त्रिवेणी संगम होता [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की श्रेणी में 17वें तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ जी का व्यक्तित्व अत्यंत विलक्षण और प्रेरणादायी है। 18 अप्रैल (वैशाख शुक्ल प्रतिपदा) का दिन जैन समाज के लिए एक महामहोत्सव के समान है, क्योंकि इसी पावन तिथि को प्रभु के जन्म, तप और मोक्ष इन तीन महान कल्याणकों का त्रिवेणी संगम होता है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल का यह संपादित आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की श्रेणी में 17वें तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ जी का व्यक्तित्व अत्यंत विलक्षण और प्रेरणादायी है। 18 अप्रैल (वैशाख शुक्ल प्रतिपदा) का दिन जैन समाज के लिए एक महामहोत्सव के समान है, क्योंकि इसी पावन तिथि को प्रभु के जन्म, तप और मोक्ष इन तीन महान कल्याणकों का त्रिवेणी संगम होता है। यह दिन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का है, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने और संयम के मार्ग पर चलने का संदेश भी देता है।</p>
<p><strong>हस्तिनापुर की पावन धरा पर अवतरण (जन्म कल्याणक)</strong></p>
<p>भगवान कुंथुनाथ जी का जन्म कुरुवंश की ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में हुआ था। उनके पिता राजा सूर्यसेन और माता महारानी श्रीकांता थीं। वैशाख शुक्ल प्रतिपदा के दिन जब प्रभु का जन्म हुआ, तब संपूर्ण देवलोक हर्षित हो उठा। जैन आगमों के अनुसार तीर्थंकर के जन्म के समय इंद्रों ने सुमेरु पर्वत पर ले जाकर उनका जन्माभिषेक किया था। कुंथुनाथ जी का व्यक्तित्व दोहरे उत्तरदायित्वों का संगम था। वे न केवल एक तीर्थंकर थे, बल्कि वे छठे चक्रवर्ती भी थे। इसका अर्थ है कि उन्होंने एक विशाल साम्राज्य पर धर्मपूर्वक शासन किया, किंतु उनका हृदय सदैव कमल के समान संसार रूपी जल से निर्लिप्त रहा।</p>
<p><strong>वैराग्य और कठोर साधना (तप कल्याणक)</strong></p>
<p>संसार का वैभव, छः खंडों का साम्राज्य और अतुलनीय शक्ति होने के बाद भी कुंथुनाथ जी का मन आत्मिक शांति की खोज में था। एक दिन संसार की अनित्यता को जानकर उन्होंने दिगंबर दीक्षा धारण करने का संकल्प लिया। हस्तिनापुर के श्सहेतुकश् वन में उन्होंने वैशाख शुक्ल प्रतिपदा के ही दिन दीक्षा ग्रहण की। उनके तप कल्याणक की यह विशेषता है कि उन्होंने घोर तपस्या के माध्यम से इंद्रियों पर विजय प्राप्त की। उनका जीवन हमें सिखाता है कि संयम ही वास्तविक शक्ति है। आज के भागदौड़ भरे युग में, जहां मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है, भगवान कुंथुनाथ का तप हमें एकाग्रता और त्याग की महत्ता समझाता है।</p>
<p><strong>अनंत सुख की प्राप्ति (मोक्ष कल्याणक)</strong></p>
<p>कठोर तप और ध्यान के बल पर प्रभु ने पहले ‘केवलज्ञान’ (संपूर्ण ज्ञान) प्राप्त किया और फिर सम्मेद शिखरजी की पावन पहाड़ियों से वैशाख शुक्ल प्रतिपदा के ही दिन ही निर्वाण प्राप्त कर सिद्ध पद को प्राप्त हुए। एक ही तिथि पर जन्म, दीक्षा और मोक्ष का होना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p><strong>जैन मंदिरों में भक्ति का उल्लास-पूजन और विधान</strong></p>
<p>18 अप्रैल को देश-दुनिया के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में भक्ति की बयार बहेगी। इस विशेष अवसर पर भक्तगण निम्नलिखित धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे। प्रभु के चरणों में पवित्र जल से अभिषेक कर विश्व शांति की कामना की जाएगी। मोक्ष कल्याणक के प्रतीक स्वरूप मंदिरों में भव्य निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा, जो आत्मा की पूर्णता का प्रतीक है। भक्ति भाव के साथ निर्वाण कांड का पाठ किया जाएगा, जिसमें सिद्धक्षेत्रों की वंदना होती है। अष्ट द्रव्यों (जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल) से प्रभु की सामूहिक आराधना की जाएगी।</p>
<p><strong>आज के परिप्रेक्ष्य में भगवान कुंथुनाथ की शिक्षाएं</strong></p>
<p>भगवान कुंथुनाथ जी का जीवन जियो और जीने दो के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है। उनके नाम में ‘कुंथु’ शब्द छोटे जीवों की रक्षा की ओर भी संकेत करता है, जो अहिंसा के सूक्ष्म पालन को दर्शाता है। उनके कल्याणक हमें सिखाते हैं कि इच्छाओं पर नियंत्रण ही सुखी जीवन की कुंजी है। जिस प्रकार उन्होंने तप में एकाग्रता दिखाई, वैसे ही हमें अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित होना चाहिए। संचय से अधिक सुख विसर्जन और त्याग में है। भगवान कुंथुनाथ जी का यह त्रिकल्याणक महोत्सव संपूर्ण मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्ग प्रशस्त करे, इसी मंगल भावना के साथ समस्त जैन समाज इस गौरवशाली दिवस को उल्लासपूर्वक मनाता है।</p>
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		<title>भगवान पार्श्वनाथ और भगवान चंद्रप्रभ का जन्म, तप कल्याणक इस बार 15 दिसंबर को: दोनों तीर्थंकरों ने मोक्ष का मार्ग दिखाया </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 12:49:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान की यात्रा है। पौष कृष्ण एकादशी को जन्म और तप कल्याणक आता है। अंबाह से पढ़िए, इंजीनियर सौरभ जैन की यह संकलित प्रस्तुति&#8230; अंबाह। पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान की यात्रा है। पौष कृष्ण एकादशी को जन्म और तप कल्याणक आता है। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए, इंजीनियर सौरभ जैन की यह संकलित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> पार्श्वनाथ (23वें तीर्थंकर) और चंद्रप्रभु (8वें तीर्थंकर) दोनों के जीवन में वैराग्य, तपस्या और आध्यात्मिक ज्ञान की यात्रा है। पौष कृष्ण एकादशी को जन्म और तप कल्याणक आता है। जहां पार्श्वनाथ ने सर्प के उद्धार से ज्ञान पाया और कमठ के प्रतिशोध से मुक्ति पाई जबकि, चंद्रप्रभु ने राजसी सुख त्याग कर केवल ज्ञान प्राप्त किया और शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाया। दोनों के निर्वाण स्थल सम्मेद शिखर (पारसनाथ पहाड़ी) हैं, जो जैन धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं।</p>
<p><strong>पार्श्वनाथ भगवान की कहानी</strong></p>
<p>जन्म और दीक्षा- पार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी में हुआ था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु तक सांसारिक जीवन बिताया और दीक्षा लेने के 84 दिन बाद ही केवल ज्ञान प्राप्त किया।</p>
<p>प्रमुख घटना: एक बार उन्होंने एक तपस्वी की अग्नि से एक नाग (जो बाद में कमठ बना) को बचाया, जिसने बाद में तूफान से उनकी रक्षा की थी।</p>
<p>प्रतिशोध- उनका मुख्य संघर्ष कमठ से था, जो नौ जन्मों तक उनके पीछे रहा और उन्हें परेशान करता रहा। अंततः, पूर्ण वैराग्य प्राप्त करने के बाद यह प्रतिशोध समाप्त हुआ।</p>
<p>निर्वाण- उन्होंने सम्मेद शिखर (पारसनाथ पहाड़ी) पर निर्वाण प्राप्त किया।</p>
<p><strong>चंद्रप्रभु भगवान की कहानी</strong></p>
<p>जन्म और दीक्षा- चंद्रप्रभु का जन्म चंद्रपुरी (काशी) में राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा के यहां हुआ। उनका रंग चंद्रमा जैसा सफेद था, इसलिए नाम चंद्रप्रभु पड़ा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ज्ञान प्राप्ति- 25 वर्ष की आयु में राजसी सुख त्याग कर उन्होंने तपस्या की और पारिजात वृक्ष के नीचे केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शिक्षा- उन्होंने सत्य, अहिंसा और संयम का उपदेश दिया और मोक्ष का मार्ग दिखाया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>निर्वाण- उन्होंने भी सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त किया।</p>
<p><strong>दोनों के बीच संबंध</strong></p>
<p>तीर्थंकर- दोनों जैन धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थंकर हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक मार्ग दिखाया।</p>
<p>सम्मेद शिखर- दोनों का निर्वाण स्थल एक ही है, जो जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।</p>
<p>सांसारिक जीवन से वैराग्य- दोनों ने सांसारिक सुखों को त्याग कर आत्म-ज्ञान और मोक्ष प्राप्त किया।</p>
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		<title>सूरी मंत्रोच्चार से प्रतिमाएं पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित कर पूजनीय होती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान के बारे में बताया  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 16:34:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> भगवान के अभिषेक के बिना पूजन अधूरी होती है। आगम में पुरुष और महिला दोनों को अभिषेक का अधिकार है। श्रावकाचार ग्रंथ पुरुष और महिला दोनों के लिए एक जैसा है। आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि धर्म से नाता, अवलंबन से मनुष्य जीवन में उन्नति होती है। श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान आदि श्रावकों के मुख्य कर्तव्यों में है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में आगे बताया कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ टोंक नगर में चातुर्मास किया था। बाद में पंचकल्याणक हुआ था। इसकी सुखद पुनरावृत्ति सन 2025 में हो रही है। पहले यहां वर्षायोग किया इसके बाद नवंबर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होगी।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं </strong></p>
<p>जैन समाज द्वारा जिन मंदिर में नूतन प्रतिमा स्थापित करने के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य भगवान के सानिध्य में सूरी मंत्रोच्चार के माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा कराई जाती है। इन धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण मनोभाव से करने और देखने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। इन पांच दिवसीय कार्यक्रम में भगवान के जन्म, गर्भकल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक की धार्मिक क्रियाएं होती है। जिसमें ज्ञान और मोक्ष कल्याणक पर भगवान को सूरी मंत्र द्वारा प्रतिष्ठित किया जाता है। णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं साधु, उपाध्याय, आचार्य, अरिहंत और सिद्ध भगवान जो वैराग्य धारण कर तप संयम से कर्मों की क्षय निर्जरा करते हुए सिद्धालय पर विराजित होते हैं।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92413" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg" alt="" width="1200" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg 1200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-990x1320.jpg 990w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन </strong></p>
<p>सुनील सराफ, पवन कंटान के अनुसार अनुसार आदिनाथ जिनालय से श्री शांतिनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगह-जगह समाजजनों ने आचार्य श्री की आरती कर चरण प्रक्षालन किए। विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल रस, विभिन्न फलों के रस, शर्करा, धी, दूध, दही, सर्व औषधि; केशर लाल चंदन सफेद चंदन पुष्प हल्दी,सुगंधित जल आदि से किया। श्रीजी की शांतिधारा हुई। आचार्य श्री संघ सानिध्य में होने वाले पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन समाज के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री सानिध्य में किया। सोमवार को आर्यिका श्री महायश मति जी के केश लोचन हुए।</p>
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