<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>छहढाला &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%9B%E0%A4%B9%E0%A4%A2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 23 Jul 2025 14:50:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>छहढाला &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मन का दुरुपयोग न करें अच्छा सोचें, अच्छा बोले अच्छे कार्य करें: आर्यिका सिद्ध श्री माताजी के प्रवचन में मन की गति का रहस्य  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/dont_misuse_your_mind_think_good_speak_good_and_do_good_deeds/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/dont_misuse_your_mind_think_good_speak_good_and_do_good_deeds/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Jul 2025 14:50:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Siddha Shri Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Chhadhaala]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ससंघ]]></category>
		<category><![CDATA[छहढाला]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85819</guid>

					<description><![CDATA[84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव पर्याय प्राप्त हुई है और सबसे बड़ी बात की मन मिला है। पंडित दौलत राम जी अपने छहढाला ग्रंथ में कहते हैं कि मन हर प्राणी के पास नहीं होता है, सिर्फ सेनी पंचेन्द्री जीव और मनुष्य के पास ही मन की शक्ति होती है। सर्वज्ञ देव की दिव्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव पर्याय प्राप्त हुई है और सबसे बड़ी बात की मन मिला है। पंडित दौलत राम जी अपने छहढाला ग्रंथ में कहते हैं कि मन हर प्राणी के पास नहीं होता है, सिर्फ सेनी पंचेन्द्री जीव और मनुष्य के पास ही मन की शक्ति होती है। सर्वज्ञ देव की दिव्य ध्वनि के माध्यम से जो श्रुत ज्ञान जैनाचार्यों ने प्राप्त किया। यह प्रबोधन आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ने दिया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> 84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव पर्याय प्राप्त हुई है और सबसे बड़ी बात की मन मिला है। पंडित दौलत राम जी अपने छहढाला ग्रंथ में कहते हैं कि मन हर प्राणी के पास नहीं होता है, सिर्फ सेनी पंचेन्द्री जीव और मनुष्य के पास ही मन की शक्ति होती है। सर्वज्ञ देव की दिव्य ध्वनि के माध्यम से जो श्रुत ज्ञान जैनाचार्यों ने प्राप्त किया उसके अनुसार मनुष्य गति में मन के माध्यम से सोचने समझने की योग्यता प्राप्त हुई है और उसके अनुसार कार्य करने का बल भी मिला हैं। अतः हमें मन का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। जोड़ने को तीन लोक और छोड़ने को तीन चीजें। यह बातें श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर समर्थ सिटी में आर्यिका मां सिद्ध श्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहीं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जोड़ने को तो हमारे पास पूरे तीन लोक की धन संपदा और द्रव्य सामग्री है, जिसे प्राप्त करने के बाद भी शायद हमारा मन संतुष्ट नहीं हो पायेगा और पाने की लालसा बनी रहेगी परंतु, मानव के पास छोड़ने की मात्रा तीन वस्तु ही है राग, द्वेष और मोह। यदि हमने मात्र इन तीन चीजों को छोड़कर धैर्य धारण करके मन की पवित्रता को बनाते हुए अपने चंचल मन को अच्छे कार्यों में प्रवृत्त कर दिया तो हमारा मानव जीवन लेना सफल हो जाएगा अन्यथा हमें पुनः 84 लाख योनियों में भयंकर दुःख सहने के लिए जाना ही पड़ेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/dont_misuse_your_mind_think_good_speak_good_and_do_good_deeds/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोह रूपी नशे का त्याग जरूरी जल्द नहीं उतरता: आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ने छहढाला ग्रंथ के सारत्व बताए  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_not_necessary_to_give_up_the_intoxication_of_attachment_it_does_not_go_away_quickly/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_not_necessary_to_give_up_the_intoxication_of_attachment_it_does_not_go_away_quickly/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Jul 2025 07:10:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Arihant Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Siddha Shri Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Chhadhaala]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Nigodiya Jiv]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अरिहंत भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ससंघ]]></category>
		<category><![CDATA[छहढाला]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[निगोदिया जीव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85750</guid>

					<description><![CDATA[आर्यिका सिद्ध श्री माताजी इंदौर में विराजित होकर धर्म प्रभावना की ऐसी धारा प्रवाहित कर रही हैं। जिसमें सभी भक्तजन गोते लगा रहे हैं। उन्होंने छहढाला की चर्चा करते हुए इंद्रीय सुख और दुख का विश्लेषण करते हुए मोह त्यागने पर जोर दिया। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230; इंदौर। संसार के सब [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आर्यिका सिद्ध श्री माताजी इंदौर में विराजित होकर धर्म प्रभावना की ऐसी धारा प्रवाहित कर रही हैं। जिसमें सभी भक्तजन गोते लगा रहे हैं। उन्होंने छहढाला की चर्चा करते हुए इंद्रीय सुख और दुख का विश्लेषण करते हुए मोह त्यागने पर जोर दिया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> संसार के सब जीव सुख को चाहते हैं और दुख से हमेशा भयाक्रांत रहते हैं परंतु, दुख के कारण को समझने का प्रयास नहीं करते। पंडित दौलत राम अपने छहढाला ग्रंथ के प्रारंभ में कर रहे हैं। यदि मनुष्य को अपना कल्याण करना है तो हमारे गुरु (अरिहंत भगवान) ने जो शिक्षा प्रदान की है, उसे एकाग्रचित होकर सुनो और उस पर अनुसरण करना चाहिए। माताजी ने आगे कहा कि पंडित जी बता रहे हैं कि जो मनुष्य पर्याय हमें प्राप्त हुई है, यह अत्यंत ही दुर्लभ है। जिस प्रकार की एक चिंतामणि रत्न को प्राप्त करना महा दुर्लभ होता है। इस जीव ने निगोद से लेकर एक इंद्री, दो इंद्री, तीन इंद्री, चार इंद्री, पांच इंद्री आदि शरीर को धारण किया है और बहुत दुख सहे हैं। हमारी यात्रा निगोदिया जीव से प्रारंभ होती है। जहां इस जीव को एक सांस लेने में जितना समय लगता है, उस समय में जन्म और मरण को प्राप्त करने का महा दुख सह कर हम पुण्य योग से पेड़ पौधे बने, फिर लट इल्ली, कैचूआ बने कुछ संयोग पाकर चिंटी, मकोड़े, खटमल आदि शरीर को धारण किया। फिर मक्खी, भौंरा, पतंगा आदि असैनी पंचेंद्री जीव भी बने और असहाय होकर अन्य जीवों द्वारा सताए गए, मारे गए बहुत ही पुण्य के आश्रय से मनुष्य भव प्राप्त हुआ है।</p>
<p>उसमें भी उच्च कुल जिनेंद्र भगवान की वाणी सुनने का, उसके समझने का अवसर प्राप्त हुआ है। यदि फिर भी हम लोग ने इसका सदुपयोग नहीं किया तो जिस प्रकार अनंत काल से हम भयंकर दुःख भोगते हुए आएं हैं। पुनः उन दुःखांे को भोगने के लिए तैयार हो जाना पड़ेगा। माताजी ने आगे कहा कि उक्त सभी दुःख से छुटने का एक ही उपाय है कि हमनें जो मोह रूपी मदिरा की आदत डाल रखी है, उसे छोड़ना होगा, क्योंकि शराब का नशा तो दो चार घंटे में या ज्यादा से ज्यादा एक दिन में उतर जाता है परन्तु, मोह रुपी मदिरा का नशा इतना तेज नशा है कि उतरने कि नाम ही नहीं लेता है। इस नरभव रूपी पर्याय में आपको यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। अतः इसका सदुपयोग करें।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_not_necessary_to_give_up_the_intoxication_of_attachment_it_does_not_go_away_quickly/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अकाट्य श्रद्धा से परमात्मा बनना संभव: क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने धर्मसभा में बताया श्रद्धा का महत्व  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_possible_to_become_god_with_irrefutable_faith/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_possible_to_become_god_with_irrefutable_faith/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 08:57:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Chhadhaala]]></category>
		<category><![CDATA[class teaching]]></category>
		<category><![CDATA[Dhariavad]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Ishtopadesh Granth]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jal Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Kshullak Shri Sir Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrit abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[इष्टोपदेश ग्रंथ]]></category>
		<category><![CDATA[कक्षा शिक्षण]]></category>
		<category><![CDATA[क्षुल्लक श्री महोदय सागर]]></category>
		<category><![CDATA[छहढाला]]></category>
		<category><![CDATA[जलाभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धरियावद]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पंचामृत अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[महा शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85564</guid>

					<description><![CDATA[क्षुल्लक द्वय श्री महोदय सागर जी, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक पंचामृत अभिषेक, महा शांतिधारा छहढाला कक्षा शिक्षण, इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन, सायंकल श्रीजी देव शास्त्र गुरु की आरती, भक्ति, जिनदर्शन क्यों? कैसे! पर विवेचना, प्रश्नमंच, पुरस्कार वितरण के कार्यक्रम प्रतिदिन हो रहे हैं। धरियावद से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>क्षुल्लक द्वय श्री महोदय सागर जी, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक पंचामृत अभिषेक, महा शांतिधारा छहढाला कक्षा शिक्षण, इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन, सायंकल श्रीजी देव शास्त्र गुरु की आरती, भक्ति, जिनदर्शन क्यों? कैसे! पर विवेचना, प्रश्नमंच, पुरस्कार वितरण के कार्यक्रम प्रतिदिन हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए, श्रीफल साथी अशोककुमार जेतावत की यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> श्रद्धा वह है, जो कभी देखा न हो, सुना न हो, फिर भी विश्वास किया जाता है। श्रद्धा की भाषा, परिभाषा, बोल कुछ नहीं होते हैं, वह तो हमारे हृदय से प्रगट होती है। श्रद्धा देखी नहीं है, सुनी होती है पर वर्तमान में हमारी तो श्रद्धा तो कांच के प्याले की तरह होती है। थोड़ा सा धक्का लगे तो टूट जाती है। यह प्रबोधन क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ने रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया। क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने कहा कि आप मंदिर में वेदी पर द्रव्य चढ़ाते हैं, पर अपने मन के श्रद्धा की वेदी पर द्रव्य न चढ़ाने से वह अनमोल नहीं बन पाता है, वह निष्फल ही रहता है। अतः अकाट्य श्रद्धा का होना जरूरी है, तभी वह द्रव्य चढ़ाना सार्थक हो पता है। प्रभु के दरबार में पहले विश्वास करो फिर इस्तेमाल करो वाला फॉर्मूला (सिद्धांत) चलता है, न कि पहले इस्तेमाल करो फिर विश्वास करो वाला।</p>
<p><strong>दुनिया के सारे काम में दिखावा करें तो चलेगा </strong></p>
<p>क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने कहा कि जिसने अपने जीवन में श्रद्धा रूपी स्टैंड डाल दिया तो चाहे उसका जीवन रहे ना रहे, पर धर्म सदा जीवित रहेगा। श्रद्धा और श्रद्धेय के बीच में कोई तत्व नहीं रहता है। श्रद्धा किसी के वास्ते नहीं रहती है, वह अपना रास्ता स्वयं बना लेती है। उसे किसी माइल स्टोन की आवश्यकता नहीं रहती है। आजकल मंदिरों भीड़ बढ़ रही है, पर श्रद्धा घट रही है। मंदिर में प्रतिमाएं बढ़ रही है, पर भक्त कम हो रहे हैं। हमारे अंतरंग में निश्चल, दृढ़ निर्मल होकर अकाट्य श्रद्धा करने से परमात्मा तक बन सकते हैं। हमें भक्तिपूर्वक, भावपूर्वक जिनेंद्र भगवान के जिन मंदिर में आना चाहिए। दिखावे के लिए नहीं आना चाहिए। दुनिया के सारे काम में दिखावा करें तो चलेगा पर जिनेंद्र भगवान के दरबार में आकर दिखावा करने वालों को फूटी कौड़ी भी मिलने वाली नहीं है। अतः हमारे अंतरंग में श्रद्धा का अकाट्य श्रीफल चढ़ाना चाहिए।</p>
<p><strong>धार्मिक प्रश्नोत्तरी क्विज प्रतियोगिता जारी </strong></p>
<p>क्षुल्लक द्वय श्री महोदय सागर जी, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक पंचामृत अभिषेक, महा शांतिधारा छहढाला कक्षा शिक्षण, इष्टोपदेश ग्रंथ पर प्रवचन, सायंकल श्रीजी देव शास्त्र गुरु की आरती, भक्ति, जिनदर्शन क्यों? कैसे! पर विवेचना, प्रश्नमंच, पुरस्कार वितरण के कार्यक्रम प्रतिदिन हो रहे हैं। साथ ही प्रत्येक रविवार को रात्रि 8 बजे से एंड्रॉयड मोबाइल पर कंप्यूटराइज्ड धार्मिक प्रश्नोत्तरी क्विज प्रतियोगिता भी हो रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/it_is_possible_to_become_god_with_irrefutable_faith/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्वाध्याय मुक्ति के द्वार तक पहुंचाने में सहायक : मुनिराज श्रावकों को करा रहे हैं स्वाध्याय </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/self_study_helps_in_reaching_the_door_of_liberation/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/self_study_helps_in_reaching_the_door_of_liberation/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Jul 2025 04:36:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaktamar  श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chhadhaala]]></category>
		<category><![CDATA[Dharmasabha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Viloksagarji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Rayanasar Granth]]></category>
		<category><![CDATA[Right Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[Samaysaar Granth]]></category>
		<category><![CDATA[Self Study]]></category>
		<category><![CDATA[Self-purification]]></category>
		<category><![CDATA[Shreefal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Virtue]]></category>
		<category><![CDATA[आत्म शुद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[छहढाला]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[भक्तामर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[रयणसार ग्रन्थ]]></category>
		<category><![CDATA[सदाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समयसार ग्रन्थ]]></category>
		<category><![CDATA[सम्यक् ज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[स्वाध्याय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85036</guid>

					<description><![CDATA[मुनिश्री विलोकसागर महाराजजी ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा में स्वाध्याय के बारे में बता रहे हैं। नित्य सुबह ग्रंथों के माध्यम से महत्व समझा रहे हैं। रविवार को भी मुनि श्री ने श्रावकों को प्रबोधन दिया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर&#8230; मुरैना। भौतिकवादी आधुनिक युग में श्रावक स्वाध्याय से दूर होते [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री विलोकसागर महाराजजी ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा में स्वाध्याय के बारे में बता रहे हैं। नित्य सुबह ग्रंथों के माध्यम से महत्व समझा रहे हैं। रविवार को भी मुनि श्री ने श्रावकों को प्रबोधन दिया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> भौतिकवादी आधुनिक युग में श्रावक स्वाध्याय से दूर होते जा रहे हैं जबकि, स्वाध्याय श्रावक के लिए परम आवश्यक है। स्वाध्याय जीवन के विकास की एक अनिवार्य आवश्यकता होते हुए संयम की साधना में सहायक होता है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय से मिलने वाला ज्ञान सुरक्षित रहता है तथा श्रावक के ज्ञानकोष में निरंतर वृद्धि होती रहती है। मानव जीवन में सुख की वृद्धि स्वाध्याय से ही होती है। अतः कहा जा सकता है कि स्वाध्याय एक ऐसी साधना है, जो साधक को मुक्ति के द्वार तक पहुंचा देता है।</p>
<p><strong>कर्मों के बंधन से मुक्त होने में मदद करता है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि स्वाध्याय आत्म-शुद्धि का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह व्यक्ति को अपने कुविचारों और दुर्गुणों को दूर करने में मदद करता है, जिससे वह शुद्ध और पवित्र बनता है। जैन धर्म में स्वाध्याय को मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। यह श्रावक को कर्मों के बंधन से मुक्त होने में मदद करता है। स्वाध्याय व्यक्ति को मिथ्या विचारों और दुराग्रहों से छुटकारा पाने में मदद करता है। मुनिश्री ने कहा कि जैन धर्म में स्वाध्याय करना श्रावकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है क्योंकि, यह ज्ञान, सम्यक् ज्ञान, सदाचार और आत्म-शुद्धि की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है। स्वाध्याय के माध्यम से व्यक्ति अपने कुविचारों को दूर कर सकता है। सही और गलत का ज्ञान प्राप्त कर सकता है और जीवन को बेहतर ढंग से जीने की प्रेरणा पा सकता है।</p>
<p><strong>स्वाध्याय व्यक्ति को सदाचारी बनाता है</strong></p>
<p>स्वाध्याय ज्ञान का भंडार है और इसके माध्यम से व्यक्ति नए-नए ज्ञान प्राप्त कर सकता है। यह ज्ञान, चाहे वह सांसारिक हो या आध्यात्मिक जीवन को बेहतर बनाने में मदद करता है। स्वाध्याय सही और गलत का भेद करने में मदद करता है। यह व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने और गलत आदतों से दूर रहने के लिए प्रेरित करता है। स्वाध्याय व्यक्ति को सदाचारी बनाता है। यह उसे अच्छे कर्म करने और बुरे कर्मों से बचने के लिए प्रेरित करता है। स्वाध्याय व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाता है, जिससे वह जीवन को बेहतर ढंग से जी सकता है ।</p>
<p><strong>आत्मा को निर्मल रखने के लिए</strong></p>
<p>स्वाध्याय व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास में मदद करता है। यह उसे आत्म-साक्षात्कार और आत्म-ज्ञान की ओर ले जाता है। स्वाध्याय जैन धर्म का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो ज्ञान, सदाचार, आत्म-शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करता है। इसलिए श्रावकों को ज्ञान प्राप्ति के लिए, आत्मा को निर्मल रखने के लिए, संयम की साधना के लिए, यहां तक कि मोक्ष प्राप्ति के लिए सदैव पूर्वाचार्यों द्वारा रचित ग्रंथों का अपनी योग्यता के अनुसार सदैव स्वाध्याय करते रहना चाहिए।</p>
<p><strong>इस तरह हो रहा है स्वाध्याय</strong></p>
<p>मुनिश्री विलोक सागर महाराज प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक समयसार ग्रन्थ, 9 से 9.45 बजे तक रयणसार ग्रन्थ की कथाओं के माध्यम से श्रावकों को स्वाध्याय करा रहे हैं। शाम के समय मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज विशेष कक्षाएं लेकर बच्चों को छहढाला एवं भक्तामर का अध्ययन करा रहे हैं। मुनिराज ने बहुत से नन्हे मुन्ने बच्चों को संस्कृत भक्तामर के अनेकों श्लोकों को कंठस्थ करा दिया है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/self_study_helps_in_reaching_the_door_of_liberation/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ज्ञान एक ऐसी वस्तु है, जो हमें इंसान बनाती है: संस्कार शिक्षण शिविर के प्रथम दिन दी धार्मिक शिक्षा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/knowledge_is_something_that_makes_us_human/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/knowledge_is_something_that_makes_us_human/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 May 2025 13:33:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Bal Bodh First]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaktamar]]></category>
		<category><![CDATA[Chhadhaala]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Dravya Sangrah]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Viloksagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ratnakaran Shravakachar]]></category>
		<category><![CDATA[Sanskar Teaching Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Second]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tattvartha Sutra]]></category>
		<category><![CDATA[छहढाला]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तत्त्वार्थ सूत्र]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्रव्य संग्रह]]></category>
		<category><![CDATA[द्वितीय]]></category>
		<category><![CDATA[बाल बोध प्रथम]]></category>
		<category><![CDATA[भक्तामर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री विलोकसागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[रत्नकरण श्रावकाचार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कार शिक्षण शिविर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=81688</guid>

					<description><![CDATA[शिक्षण शिविर के प्रथम दिन शिविरार्थियों में भारी उत्साह दिखाई दिया। प्रातःकालीन वेला में सभी बंधुओं, युवाओं एवं बच्चों को सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक पूजन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से आए हुए विद्वानों ने बाल बोध प्रथम, द्वितीय, भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, छहढाला, द्रव्य संग्रह, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शिक्षण शिविर के प्रथम दिन शिविरार्थियों में भारी उत्साह दिखाई दिया। प्रातःकालीन वेला में सभी बंधुओं, युवाओं एवं बच्चों को सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक पूजन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से आए हुए विद्वानों ने बाल बोध प्रथम, द्वितीय, भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, छहढाला, द्रव्य संग्रह, रत्नकरण श्रावकाचार की विषयवार कक्षाओं में शिविरार्थियों को विषयवार शिक्षा प्रदान की गई। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> ज्ञान एक ऐसी वस्तु है जो हमें इंसान बना देती है। यदि हम थोड़ा थोड़ा भी अध्ययन करें, स्वाध्याय करें तो भी हम एक दिन ज्ञानवान बन सकते हैं। थोड़ा थोड़ा संयम धारण करने वाला व्यक्ति भी एक दिन संयमी पुरुष बन जाता है। थोड़ा-थोड़ा संचय करने वाला भी एक दिन धनवान बन जाता है। बूंद-बूंद से भी घड़ा भर जाता है। इसी प्रकार एक-एक गुण को धारण करने वाला व्यक्ति गुणवान बन जाता है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर में शिवरार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समय का महत्व नहीं समझते, अपने अमूल्य समय को यंू ही बर्बाद करते हैं वे जीवन में कभी भी सफल नहीं होते। बिना परिश्रम के विद्या प्राप्त नहीं होती, यदि बिना परिश्रम के विद्या प्राप्त हो भी जाए तो वो अधिक समय तक रुकती नहीं हैं।</p>
<p>आने वाले समय में ऐसी विद्या नष्ट हो जाती है। परिश्रम और संघर्ष के साथ जो विद्या प्राप्त होती है, वहीं हमें सही ज्ञान प्रदान करती है। समय का सम्मान करिए, समय का सम्मान करने वालों को विद्या विद्या तुरंत प्राप्त होती है। इसलिए कठिन परिश्रम के साथ संघर्षों में हमें विद्या अर्जन करना चाहिए। विद्या का, ज्ञान का सृजन करना ही हमारे मानव जीवन का लक्ष्य होना चाहिए, तभी हमारा मानव जीवन सार्थक होगा। आत्मा की विशुद्धि के लिए प्रभु आराधना आवश्यक है। मुनिश्री ने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए विशुद्धि की आवश्यकता होती है। उसी विशुद्धि को बनाए रखने के लिए प्रभु की भक्ति, प्रभु की आराधना की आवश्यकता होती है और यह आवश्यकता तब तक बनी रहना चाहिए तब तक हमें निर्वाण की प्राप्ति नहीं हो जाती। हमें आत्मा की विशुद्धि के लिए सतत ज्ञान की आराधना परम आवश्यक है।</p>
<p>क्योंकि ज्ञान प्राप्त करना बहुत दुर्लभ है। हमें मानव जीवन मिला है। कब यह शरीर हमारा साथ छोड़ दे, किसी को नहीं मालूम। जीवन बहुत कम है, थोड़ा है। हमें इस थोड़े से जीवन में ज्ञान प्राप्ति के लिए सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए। विद्या और ज्ञान से हमारा जीवन सहज और सरल हो जाता है। यही हमारे जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिक्षण शिविर का प्रथम दिन शिविरार्थियों में उत्साह </strong></p>
<p>शिक्षण शिविर के प्रथम दिन शिविरार्थियों में भारी उत्साह दिखाई दिया। प्रातःकालीन वेला में सभी बंधुओं, युवाओं एवं बच्चों को सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक पूजन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से आए हुए विद्वानों ने बाल बोध प्रथम, द्वितीय, भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, छहढाला, द्रव्य संग्रह, रत्नकरण श्रावकाचार की विषयवार कक्षाओं में शिविरार्थियों को विषयवार शिक्षा प्रदान की गई। स्वयं मुनिश्री विबोध सागर महाराज ने रत्नकरण श्रावकाचार की कक्षा का संचालन करते हुए शिक्षण प्रदान किया। शाम को मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम में लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।</p>
<p><strong>कार्यों की सफलता के लिए उमंग और उत्साह चाहिए</strong></p>
<p>सांसारिक जीवन में कोई भी कार्य बगैर विघ्न के पूरा नहीं होता है। अनुशासन एवं विधि विधान से किए गए सभी कार्य सफल होते है। सभी कार्यों की सफलता के लिए समर्पण, उत्साह और उमंग की आवश्यकता होती है। उमंग और उत्साह के साथ किए गए सभी कार्य सफल होते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/knowledge_is_something_that_makes_us_human/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जैन मंदिरों में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ: शिविर में सांगानेर संस्थान के विद्वान करा रहे धर्म बोध </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shramana_culture_and_rituals_teaching_camp_started_in_jain_temples/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/shramana_culture_and_rituals_teaching_camp_started_in_jain_temples/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 May 2025 12:33:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhinandanoday Tirtha]]></category>
		<category><![CDATA[Adinath Chaityalay]]></category>
		<category><![CDATA[Adinath Jain Temple New Basti]]></category>
		<category><![CDATA[Alaap Method]]></category>
		<category><![CDATA[Bahubali Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Bal Bodh First Half]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Dodaghat]]></category>
		<category><![CDATA[Ishtopadesh Dravyasangraha Tattvarthasutra]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Big Temple]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jeevkand]]></category>
		<category><![CDATA[Parsvnath Colony]]></category>
		<category><![CDATA[Parsvnath Jain Atmandir]]></category>
		<category><![CDATA[Sanganer Institute]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvarthasiddhi]]></category>
		<category><![CDATA[Second Half]]></category>
		<category><![CDATA[Shantinath Jain Temple New Basti]]></category>
		<category><![CDATA[Shramana Culture Sanskar Teaching Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Shravakacharya]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Sixth]]></category>
		<category><![CDATA[अभिनंदनोदय तीर्थ]]></category>
		<category><![CDATA[आदिनाथ चैत्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[आदिनाथ जैनमंदिर नई बस्ती]]></category>
		<category><![CDATA[आलाप पद्धति]]></category>
		<category><![CDATA[इष्टोपदेश द्रव्यसंग्रह तत्वार्थसूत्र]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरार्द्ध]]></category>
		<category><![CDATA[छहढाला]]></category>
		<category><![CDATA[जीवकांड]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन बडा मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[डोडाघाट]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पार्श्वनाथ कॉलोनी]]></category>
		<category><![CDATA[पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[बाल बोध पूर्वार्द्ध]]></category>
		<category><![CDATA[बाहुबलि नगर]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिनाथ जैन मंदिर नईबस्ती]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रावकाचार्य]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सर्वार्थसिद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[सांगानेर संस्थान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=81477</guid>

					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर-जयपुर के संयोजन एवं दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में नगर के जैन मंदिरो में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। शिविर में पुण्यार्जक परिवारों ने मंगल कलश की स्थापना की और शिविरार्थियों को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई। शिविर शुभारंभ पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज, आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर-जयपुर के संयोजन एवं दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में नगर के जैन मंदिरो में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। शिविर में पुण्यार्जक परिवारों ने मंगल कलश की स्थापना की और शिविरार्थियों को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई। शिविर शुभारंभ पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज, आचार्य श्री समय सागरजी महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित किया गया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> ललितपुर।</strong> श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर-जयपुर के संयोजन एवं दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में नगर के जैन मंदिरो में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। शिविर में पुण्यार्जक परिवारों ने मंगल कलश की स्थापना की और शिविरार्थियों को शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई। शिविर शुभारंभ पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज, आचार्य श्री समय सागरजी महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित किया गया। शिविर संयोजक पं. आलोक मोदी एवं मुकेश शास्त्री के अनुसार शिविर में बाल बोध पूर्वार्द्ध, उत्तरार्द्ध, छहढाला, इष्टोपदेश द्रव्यसंग्रह तत्वार्थसूत्र, श्रावकाचार्य, सर्वार्थसिद्धि, आलाप पद्धति, जीवकांड आदि द्वादशवर्षीय पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों का शिक्षण सांगानेर के विद्वानों द्वारा नगर के पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर, अभिनंदनोदय तीर्थ, जैन, बडा मंदिर, पार्श्वनाथ कॉलोनी, डोडाघाट, बाहुबलि नगर, आदिनाथ चैत्यालय, शांतिनाथ जैन मंदिर नईबस्ती, आदिनाथ जेन मंदिर नई बस्ती, एम्ब्रोशिया कॉलोनी में कराया जा रहा है। शिविर में मंगल कलश स्थापना अभिनंदनोदव तीर्थ में पूर्व पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, अटामंदिर में पूर्व प्रबंधक कपूरचंद लागौन, पार्श्वनाथ कॉलोनी कमलाबाई मनोज जैन छप्पनभोग परिवार, आदिनाथ मंदिर नईबस्ती में तरसचंद घिसोली परिवार, जैन बडामंदिर में सुरेशचन्द्र राजीव जैन मिठ्या परिवार, डोडाघाट जैन मंदिर में प्रकाशचंद अभय जैन ग्राफिक्स परिवार द्वारा की गई। शिविर में सांगानेर के विद्वान राजेश जैन भगवा, विनीत जैन केलगुवा, सचिन जैन, शुभम जैन, निखिल जैन दमोह, प्रिया जैन, इंद्र जैन मंडला, सुमनेश जैन, आर्यन जैन, आकाश जैन मोहली, विवेक जैन, अर्पित जैन, अभिशेक जैन, सर्वज्ञ जैन, पीयूष जैन, कमलेश जैन, मोहित जैन, सौरभ जैन, श्रयांस जैन मनोज जैन, अतिशय जैन प्रशिक्षण दे रहे हैं।</p>
<p><strong>शिविर में इनकी सहभागिता भी सराहनीय रही </strong></p>
<p>इस मौके पर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष डॉ अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन भारत गैस, सनत जैन खजुरिया, प्रतीक जैन इमलिया, राकेश जैन रिकू, अमित सराफ सीए सौरभ जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, मंदिर प्रबंधक अजय जैन गंगचारी, मनोज जैन बबीना, मोदी पंकज जैन, अशोक जैन दैलवारा, सतीश जैन बंटी बजाज, जितेंद्र जैन, आनंद जैन भावनगर, अजित जैन गदयाना, प्रमोद जैन पाय, वीरचंद सराफ, अभय जैन केलगुवा, विकास जैन सौरई, आनंद जैन पंचमनगर, संजय जैन ककडारी, राकेश जैन बछरावनी, विमल जैन पाय, शुभेंद्र मोदी, रसिया जितेंद्र जैन, वीणा जैन, अनूप जैन कैरू मौजूद रहे। शिविर में स्टेशनरी का पुण्यार्जन सोमचंद, संजीव जैन लकी परिवार द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>ग्रामीण अंचलों में हुआ शिविर का शुभारंभ</strong></p>
<p>ललितपुर नगर के महरौनी, तालबेहट, सैदपुर जखोरा में शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। जहां सांगानेर के विद्वान स्थानीय जैन समाज के पदाधिकारियों के संयोजन में शिक्षण कार्य शिविरार्थियों को करा रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/shramana_culture_and_rituals_teaching_camp_started_in_jain_temples/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
