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	<title>चारुकीर्ति स्वामी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>चारुकीर्ति स्वामी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का दीक्षा दिवस : महान व्यक्तितव के धनी थे स्वामी जी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Dec 2023 17:26:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का आज दीक्षा दिवस है। इसी वर्ष 23 मार्च 2023 को स्वामी जी की समाधि हुई थी। चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी महान व्यक्तितव के धनी थे उन्होंने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ को महामस्तकाभिषेक से नई उंचाइयों पर पहुंचाया। चारुकीर्ति स्वामी जी श्रमण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का आज दीक्षा दिवस है। इसी वर्ष 23 मार्च 2023 को स्वामी जी की समाधि हुई थी। चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी महान व्यक्तितव के धनी थे उन्होंने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ को महामस्तकाभिषेक से नई उंचाइयों पर पहुंचाया। चारुकीर्ति स्वामी जी श्रमण संस्कृति के रक्षक थे उन्होंने श्रमण संस्कृति और धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और श्रवणबेलगोला के विकास में अपना योगदान दिया। आज जिस श्रीफल जैन न्यूज वेबसाइट पर आप ये आलेख पढ़ रहे हैं इसे भी स्वामी जी ने ही ये नाम दिया था। <span style="color: #ff0000;">स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के दीक्षा दिवस पर उनके जीवन पर ये आलेख पढ़िए।</span></strong></p>
<hr />
<p>कर्मशील, सौम्य, मौन संत, जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का 19 अप्रैल महावीर जयंती पर 1970 में श्रवणबेलगोला मठ में पट्टाभिषेक कर इनका पीठाधिकारी स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी नाम पड़ा। तब से वे श्री क्षेत्र की अभिवृद्धि, श्रुत संवर्धन, समाज कल्याण और बच्चों के लिए शिक्षा सुविधा के कार्यों में जुटे रहे। श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला का नवतर रूप, 40 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार, साफ-सुथरे विंध्यगिरि, चंद्रगिरि एवं गांव के सभी मंदिर, जिनमें एक ही साथ होती अभिषेक-पूजन को अनमोल मार्गदर्शन एवं व्यवस्था शक्ति का द्योतक थे। उन्होंने मैसूर से इतिहास में एमए बैंगलोर विद्यापीठ के तत्वाधान में एमए जैनागम में विशेष अध्यापन किया। हिंदी और संस्कृत साहित्य में विशारद किया। कन्नड़, अंग्रेजी, संस्कृत तथा हिंदी भाषा पर असाधारण प्रभुत्व सरल आकर्षक व्यक्तित्व पाश्चात्य दर्शनों के अध्ययन से अमेरिका, अफ्रीका, इंग्लैंड, बर्मा, थाईलैंड आदि अनेक देशों में अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए। सन् 1988 में इंग्लैंड के लेस्टर शहर में भगवान श्री बाहुबली स्वामी जी की 7 फीट ऊंची प्रतिमा का प्रतिष्ठापन उनके मार्गदर्शन में संपन्न हुआ था। कारकल, कनकगिरि, कम्मदहल्ली अर्हत्सुगिरि मठ, मूडबिद्री मठ आदि के धर्म प्रभावी कार्यों में तथा बहुआयामी कार्यों में उनका कौशल निखरा हुआ था। भट्टारक चारुकीर्ति महास्वामी भगवान महावीर स्वामी के 2500वें निर्वाण महोत्सव के शुभ प्रसंग पर, भगवान गोम्मटेश्वर सहस्राब्दी महोत्सव के मुख्य प्रेरणा स्रोत रहे।</p>
<p><strong>विराट महोत्सवों का सहज आयोजन</strong></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52838" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001.jpg" alt="" width="844" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001.jpg 844w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-158x300.jpg 158w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-540x1024.jpg 540w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-768x1456.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0001-810x1536.jpg 810w" sizes="(max-width: 844px) 100vw, 844px" /></p>
<p>विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल 57 फीट ऊंची विशालकाय श्रीगोम्मटेश बाहुबली स्वामी प्रतिमा का बारह वर्षों पश्चात् होने वाले महामस्तकाभिषेक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने श्रीस्वामी जी को &#8216;कर्मयोगी&#8217; की उपाधि से अलंकृत किया था। 2017 में कर्नाटक सरकार ने महावीर शान्ति पुरस्कार प्रदान किया, जिसमें 10 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र, शॉल, श्रीफल, माला पहनकर सम्मानित किया था।</p>
<p><strong>धरियावद को मिला सानिध्य</strong></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52840" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000.jpg" alt="" width="894" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000.jpg 894w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-168x300.jpg 168w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-572x1024.jpg 572w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-768x1374.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231212-WA0000-858x1536.jpg 858w" sizes="(max-width: 894px) 100vw, 894px" /></p>
<p>12 वर्षों के अंतराल पर नियमित होने वाले गोम्मटेश भगवान बाहुबली स्वामी के विश्वस्तरीय महामस्तकाभिषेक वर्ष 1981, 1993, 2006 और 2018 के वर्षों में वात्सल्य वारिधि दिगंबर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन (धरियावद) के कुशल निर्देशन में आपने चारों विराट आयोजन धर्म प्रभावनापूर्वक सफलतापूर्वक संपन्न किए। अप्रैल 2001 में विश्व के सबसे छोटे सर्वांग हेमवंत श्री चंद्रप्रभु जिनालय नंदनवन के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में आपका प्रवास धरियावद नगर को प्राप्त हुआ और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में सानिध्य और मार्गदर्शन प्रदान हुआ था। आप अप्रैल 1970 से मार्च 2023 तक लगातार आजीवन श्रवणबेलगोला मठ के पीठाधीश स्वामी रहकर जैन धर्म को विश्वस्तर पर नित नई पहचान और ऊंचाइयां दिलाईं।</p>
<p><strong>समाज सेवा में सतत् अग्रणी रहे</strong></p>
<p>&#8211; 2006 के महामस्तकाभिषेक के समय स्वामीजी ने पूरे गांव में सरकार व प्रशासन के सहयोग से शौचालय निर्माण का कार्य पूरा कराया</p>
<p>&#8211; आसपास के सभी गांवों के बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य लाभ हेतु मोबाइल चिकित्सालय का संचालन किया</p>
<p>&#8211; जैन मठ से जैन-जैनेतर लोगों को हर माह नकद राशि का सहयोग किया</p>
<p>&#8211; बाहुबली बाल चिकित्सालय में 100 बेड और 100 बेड के जनरल अस्पताल का संचालन किया जा रहा है</p>
<p>&#8211; कर्नाटक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राशन, कपड़े, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई</p>
<p>&#8211; बच्चों को संस्कारित करने के लिए ब्रह्मचर्य आश्रम का संचालन, जिसमें धार्मिक और लौकिक दोनों प्रकार की शिक्षा प्रदान की जाती है</p>
<p>&#8211; नर्सरी से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालन किया जा रहा है</p>
<p>&#8211; जैन साहित्य और अन्य साहित्यों के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक साहित्यकारों, विद्वानों और पत्रकारों को प्रतिवर्ष पुरस्कार प्रदान किया जाता है और सम्मेलनों का आयोजन होता है</p>
<p>&#8211; आर्थिक दृष्टि से पिछड़े समुदाय के व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधा के साथ असहाय, मंदबुद्धि को 1100 रुपये प्रतिमाह सदस्यता राशि प्रदान की जाती है</p>
<p>&#8211; 1981 में पूरे देश में जनमंगल कलश का भ्रमण करवाया</p>
<p>&#8211; प्राचीन साहित्य के प्रकाशन के लिए अक्षर कलश योजना प्रारंभ की गई</p>
<p>&#8211; 6000 से अधिक पांडुलिपियां सुरक्षित की गईं</p>
<p>&#8211; साधुओं की सेवा के लिए त्यागी सेवा समिति अलग से बनाई गई</p>
<p>स्वामीजी ने 53 वर्षों में जो कुछ किया है, वह समाज के लिए प्रेरणास्पद है। सभी तरह के मठों, संस्थाओं और मंदिरों का संचालन धार्मिक क्रियाकलापों के साथ सामाजिक कार्यों के संचालन किया जा सका है।</p>
<p><strong>साधना, ध्यान, अध्ययन को बनाया था जीवन का लक्ष्य</strong></p>
<p>दिगंबर जैन समाज की लगभग सभी संस्थाएं स्वामी जी के पास मार्गदर्शन हेतु आती थीं और उन्हीं के अनुसार कार्य करती थीं। बीजापुर सहस्त्रफणी पार्श्वनाथ मंदिर, नल्लुर समवशरण मंदिर, मकुर्ल आदिनाथ मंदिर, शालीग्राम भक्तामर मंदिर, आर्सिकेरी सहस्त्रकूट जिनालय व मायसंद्रा मंदिर के वे गौरव अध्यक्ष रहे थे। जहां के सभी कार्य उन्हीं के मार्गदर्शन में होते रहे हैं। परम पूज्य स्वामी ने 1997 से अपनी चर्या में चातुर्मास चर्या को शामिल किया था। तब से अब तक आप 16 चातुर्मास कर चुके। सामाजिक कार्यों व मठ के दायित्वों को निभाते हुए उन्होंने आध्यात्मिक और आत्मिक साधना को भी पूरा समय दिया। प्रतिवर्ष मौन साधना, ध्यान, अध्ययन, स्वाध्याय नियमित तौर पर करते थे। तप और त्याग भी साथ-साथ चलता रहता खा।</p>
<p><strong>करते थे पद विहार</strong></p>
<p>वर्ष 1997 के बाद से उन्होंने गाड़ी का प्रयोग कम किया और 2002 से 2009 तक तो उन्होंने पद विहार ही किया। स्वामी जी के गाड़ी त्याग के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण था। इस दौरान उनके मार्गदर्शन में विद्वानों ने धवला, जयधवला और महाधवला के 40 भागों का कन्नड़ में अनुवाद किया। स्वामी जी ने इन सभी का संपादन किया है। इसमें से 21 का प्रकाशन हो चुका है और बाकी प्रकाशन की प्रक्रिया में है। कार्य पूर्ण होने के बाद भी वह केवल अत्यावश्यक कार्यों के लिए बाहर जाने पर ही गाड़ी का प्रयोग करते थे अन्यथा यहां तो पदविहार ही करते थे।</p>
<p><strong>फोन का किया था त्याग</strong></p>
<p>वर्ष 2001 से फोन पर बात करने का उन्होंने त्याग किया था। इतने व्यस्त कार्यक्रमों और इतनी बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने के बावजूद फोन के बिना सभी कार्य सुचारू रूप से चलाना अपने आप में एक विलक्षण गुण है। ऐसे बहुमुखी प्रतिभावान, गुणी और विनम्र भट्टारक जी के ही कारण श्रीक्षेत्र की पहचान आज चहुंओर है। यहां आने वाले अतिथि, यात्री, त्यागी व संत सभी इनके आत्मीय स्वागत और उत्तम व्यवस्थाओं से अभिभूत होकर प्रसन्नचित्त लौटते हैं। मठाधिपति के पद पर आसीन होकर विनम्रता का भाव लिए यह सहज व्यक्तित्व हर आम और खास के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। हम सभी को स्वामी जी से समर्पण, श्रद्घा, लगन और निष्ठा सीखनी होगी, तभी तो समाज को एक माला में पिरोकर धर्म रक्षा, तीर्थ रक्षा, संत रक्षा और देश रक्षा का फर्ज पूरा कर सकेंगे।</p>
<p>विश्व शांति के लिए कार्य करने पर 2017 में कर्नाटक सरकार ने स्वामी जी को महावीर शांति पुरस्कार से नवाजा था। इसके तहत 10 लाख रुपए, प्रशस्ति, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया था।</p>
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		<title>22 वर्षीय युवा बने श्रवणबेलगोला के नए भट्टारक : पट्टाभिषेक के बाद चारुकीर्ति भट्टारक की जयकार के साथ निकली पालकी यात्रा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/charukirti_bhattarak_palanquin_journey_started_after_pattabhishek/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Apr 2023 17:40:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिला की सागर तहसील में श्रावक श्रेष्ठी अशोक इन्द्र व अनिता अशोक इन्द्र के घर 26 फरवरी, 2001 को जन्मे ‘आगम इन्द्र’ को पट्टाभिषेक के बाद श्रवणबेलगोला मठ का नया भट्टारक बनाया गया है। इन्हीं के बारे में पढ़िए श्रवणबेलगोला से हाल में लौटे राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ की विशेष रिपोर्ट&#8230; श्रवणबेलगोला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिला की सागर तहसील में श्रावक श्रेष्ठी अशोक इन्द्र व अनिता अशोक इन्द्र के घर 26 फरवरी, 2001 को जन्मे ‘आगम इन्द्र’ को पट्टाभिषेक के बाद श्रवणबेलगोला मठ का नया भट्टारक बनाया गया है। <span style="color: #ff0000;">इन्हीं के बारे में पढ़िए श्रवणबेलगोला से हाल में लौटे राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला / सनावद।</strong> दिगम्बर जैन धर्म की यश कीर्ति के साथ 1040 वर्ष से विश्व को दिगम्बत्व के साथ अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति, ध्यान से सिद्धि का संदेश दे रहे गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली स्वामी के श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला को शून्य से शिखर व विश्व तीर्थ के रूप में स्थापित करने वाले ज्ञान सूर्य, जैन एकता के महानायक, अपूर्व वात्सल्य-प्रेम-स्नेह की त्रिवेणी, रत्नत्रय के मार्ग स्नेही, प्राणी मात्र के प्रति सद्भाव रखने वाले अनुपम व्यक्तित्व जन-जन में आस्था-श्रद्धा-विश्वास के उन्नयक परम पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्ति श्री चारुकीर्तिजी महास्वामी के बीते 23 मार्च को हुए महाप्रयाण के बाद हुई शून्यता को कोई नहीं भर सकता, लेकिन उन्हीं की दूरदर्शिता व भविष्य की संभावनाओं के साथ उनकी पारखी नजर से निकले ‘आगम इन्द्र’ को उन्होंने 2 दिसम्बर 2022 के शुभ मुहूर्त में विचार पट्ट क्षुल्लक आगमकीर्ति बनाकर अव्यक्त संदेश दे दिया था कि ये आगमकीर्ति ही भविष्य के चारुकीर्ति होंगे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41325" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1.jpg" alt="" width="1040" height="780" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1.jpg 1040w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0054-1-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1040px) 100vw, 1040px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>महाप्रयाण के बाद पट्टाभिषेक</strong></p>
<p>जैन दर्शन में शरीर की असारता से ग्रंथ भरे पड़े है लेकिन ‘शरीर माध्यं खलु धर्म साधनम्’ की बात भी हमने सुनी है। पूज्य स्वामीजी इतनी जल्दी महाप्रयाण कर जाएंगे, यह घटना सभी को स्तब्ध करने वाली थी। उनके महाप्रयाण के बाद 27 मार्च, 2023 को पट्टाभिषेक कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41326" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0052-1.jpg" alt="" width="1080" height="564" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0052-1.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0052-1-300x157.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0052-1-1024x535.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0052-1-768x401.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0052-1-990x517.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>स्वर्ण पिच्छिका, स्वर्ण पादुका की गई भेंट</strong></p>
<p>27 मार्च को प्रातः 5 बजे विचार पट्ट क्षुल्लकजी के मंगल स्नान के बाद भगवान श्री चंद्रप्रभजी की नव कलशाभिषेक पूजा, समस्त मंदिरों में विशेष पूजा के साथ क्षेत्र की अधिष्ठाता देवी माता कुष्मांडिनी की षोढशोपचार पूजा के बाद पट्टाभिषेक विधि, सिहांसन पूजा हुई। प्रातः 9.21 बजे से वृषभ लग्न में सिंहासनारोहण के साथ पट्टाभिषेक महोत्सव प्रारंभ हुआ। शुभ मुहूर्त में ठीक 9.33 मिनिट पर विचार पट्ट क्षुल्लक श्री आगमकीर्तिजी को उस पट्ट पर विराजित कराया गया, जिस पट्ट पर विगत 54 वर्षों से परम् पूज्य कर्मयोगी जगद्गुरु स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी महास्वामी विराजमान थे। पट्ट पर विराजमान होने के बाद उन्हें परम्परागत मुद्रा (अंगूठी) पहनाई गई। फिर स्वर्ण पिच्छिका, स्वर्ण पादुका आदि भेंट के बाद उनकी पाद पूजा की गई। इसके बाद जय-जयकार के साथ उनकी पालकी यात्रा निकाली गई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41327" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0049-1.jpg" alt="" width="468" height="1040" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0049-1.jpg 468w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0049-1-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0049-1-461x1024.jpg 461w" sizes="auto, (max-width: 468px) 100vw, 468px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>12 भट्टारक स्वामी बने पट्टाभिषेक के साक्षी</strong></p>
<p>परम पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक महास्वामी के शिष्यों की एक लंबी परंपरा है। उसी परम्परा के योग्य शिष्य अपने-अपने तीर्थों का समुन्नत विकास कर रहे हैं। पट्टाभिषेक समारोह में स्वस्तिश्री भुवनकीर्तिजी (कनकगिरी), स्वस्तिश्री धवलकीर्तिजी (अरिहंतगिरि), स्वस्तिश्री भानुकीर्तिजी (कम्बदहल्ली), स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य (मूडबद्री), स्वस्तिश्री लक्ष्मीसेन (जिनकांची), स्वस्तिश्री धर्मसेनजी (वरुर), स्वस्तिश्री देवेन्द्रकीर्तिजी (हुमचा), स्वस्तिश्री भट्टाकंलकजी (सौन्दा), स्वस्तिश्री लक्ष्मीसेनजी (नरसिंह राजपुर), स्वस्तिश्री वृषभसेनजी (लक्कवल्ली), स्वस्तिश्री जिनसेनजी (नांदिणी), स्वस्तिश्री सिद्धांतकीर्तिजी (आरतीपुरम्), स्वस्तिश्री लक्ष्मीसेनजी (कोल्हापुर) इस भव्य आयोजन के साक्षी बने।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41328" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0047.jpg" alt="" width="468" height="645" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0047.jpg 468w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0047-218x300.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 468px) 100vw, 468px" /></p>
<p>इन्होंने संपूर्ण क्रियाएं संपन्न कराईं। क्षेत्र परिवार के श्री एस.ए.सुदर्शन, पं.नंदकुमारजी शास्त्री भी सहयोगी बने। इस अवसर पर विशेष रूप से मुनिश्री आदिसागरजी महाराज, आर्यिका माताजी, क्षुल्लक प्रमेयसागरजी (तपोभूमि उज्जैन), क्षुल्लक दर्शनकीर्तिजी भी उपस्थित थे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41329" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0050.jpg" alt="" width="468" height="1040" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0050.jpg 468w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0050-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0050-461x1024.jpg 461w" sizes="auto, (max-width: 468px) 100vw, 468px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>गौरव अभिनंदन सभा में हुआ गुणगान</strong></p>
<p>इस अवसर पर हुए नामकरण में पट्टाभिषेक के बाद विचार पट्ट क्षुल्लक आगमकीर्ति को ‘‘पूज्य जगद्गुरु स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक स्वामी’’ नाम दिया गया। पट्टाभिषेक के बाद चामुण्डराय मण्डप में हुई गौरव अभिनंदन सभा में देशभर से आए श्रावक, श्राविकाओं व अनेकों संस्थाओं के प्रमुखों ने पट्ट पर विराजित स्वामीजी का अभूतपूर्व सम्मान किया। उन्होंने सभी को आशीर्वाद स्वरूप मंत्राक्षत फल भेंट किए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41330" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0051-1.jpg" alt="" width="1040" height="468" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0051-1.jpg 1040w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0051-1-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0051-1-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0051-1-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0051-1-990x446.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1040px) 100vw, 1040px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर धर्मस्थल तीर्थ के जैन गौरव पद्म विभूषण डाॅ.डी.धर्माधिकारी वीरेन्द्र हेगडे़जी का संदेश लेकर आए उनके अनुज सुरेन्द्र हेगड़े, श्रवणबेलगोला विधायक बालकृष्णा, कर्नाटक जैन एसोसिएशन के प्रसन्नैया, पूर्व मंत्री अभयचंद्र (मूडबिद्री), राष्ट्रीय प्राकृत संस्थान के निदेशक प्रो.जयकुमार उपाध्ये, तीर्थक्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंघई, कटनी, पूर्व महापौर सुरेश पाटील सांगली, विनोद दोडडनवार बेलगांवी, सोशल ग्रुप फेडरेशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हसमुख जैन गांधी, कर्नाटक तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष विनोद बाकलीवाल मैसूर, भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अशोक सेठी बेंगलुरु, निहालचंद ठोल्या, विमुक्त जैन, वाय.के.जैन, सोनिया-अजय जैन, आशा जैन, विकास-शालू जैन, अजय पाटनी, जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जैन गजट के सह संपादक राजेन्द्र जैन महावीर, प्रमुख ट्रस्टी अशोककुमार एच.पी. व शांतिसागर फाउण्डेशन के पदाधिकारी, गोम्मटवाणी के संपादक अशोक कुमार श्रवणबेलगोला, बाहुबली विद्यापीठ के पूर्व निदेशक जीवंधर होतपेटे, प्रो.शुभचंद्र मैसूर, श्रवणबेलगोला समाज अध्यक्ष पद्मकुमार, जिनेन्द्रवाणी के संपादक शांतिनाथ होतपेटे उपस्थित थे। संचालन वृषभदास शास्त्री व राजेश शास्त्री श्रवणबेलगोला ने किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-41331" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0046.jpg" alt="" width="1280" height="1185" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0046.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0046-300x278.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0046-1024x948.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0046-768x711.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/04/IMG-20230401-WA0046-990x917.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
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		<title>जानिए श्रवणबेलगोला मठ के नवनियुक्त भट्टारक श्री चारुकीर्तिजी स्वामी के बारे में : धार्मिक संस्कारों के साथ राष्ट्र की सेवा करने की भावना देखर महास्वामी जी ने दी थी भट्टारक दीक्षा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Apr 2023 17:35:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिला की सागर तहसील में श्रावक श्रेष्ठी अशोक इन्द्र व अनिता अशोक इन्द्र के घर 26 फरवरी, 2001 को जन्मे ‘आगम इन्द्र’ को पट्टाभिषेक के बाद श्रवणबेलगोला मठ का नया भट्टारक बनाया गया है। इन्हीं के बारे में पढ़िए राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ की विशेष रिपोर्ट&#8230; श्रवणबेलगोला / सनावद। कर्नाटक राज्य के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिला की सागर तहसील में श्रावक श्रेष्ठी अशोक इन्द्र व अनिता अशोक इन्द्र के घर 26 फरवरी, 2001 को जन्मे ‘आगम इन्द्र’ को पट्टाभिषेक के बाद श्रवणबेलगोला मठ का नया भट्टारक बनाया गया है। <span style="color: #ff0000;">इन्हीं के बारे में पढ़िए राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला / सनावद।</strong> कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिला की सागर तहसील में श्रावक श्रेष्ठी अशोक इन्द्र व अनिता अशोक इन्द्र के घर 26 फरवरी, 2001 को एक प्रतिभा संपन्न बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम ‘आगम इन्द्र’ रखा गया । आपके दादाजी श्रावक श्रेष्ठी आदप्प इन्द्र तथा दादी श्राविका श्रेष्ठ नागम्मा हैं, जो सागर तहसील के करुरु ग्राम के निवासी रहे हैं।</p>
<p><strong>गर्भ से ही भक्ति भाव</strong></p>
<p>शरीर व मानसिक बल से परिपूर्ण इस प्रतिभाशाली पुत्र को गर्भ से ही धार्मिक संस्कार व देव-शास्त्र-गुरु के प्रति भक्ति का भाव आरोहित किया गया। सागर में हाईस्कूल तक फिर उजिरे से हायर सेकंडरी के बाद आपने कम्प्यूटर शिक्षा के साथ महाविद्यालय से बेसिक ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स सहित कई भाषाओं को सीखा। कन्नड़ के साथ हिन्दी, अंग्रेजी में परिपूर्ण आपने राष्ट्रीय केडेट कोर(एनसीसी) में बी सर्टिफिकेट प्राप्त किया, जो आपकी शारीरिक व मानसिक प्रतिभा का परिचायक है। आप भारतीय सेना में सम्मिलित होकर राष्ट्र भक्ति में अपना जीवन देना चाहते थे। इसके साथ ही बचपन में एक कुशल उद्यमी बनकर अनेकों लोगों को रोजगार देना चाहते थे। आपके बड़े भाई का नाम अक्षर इन्द्र है।</p>
<p><strong>स्वामी जी ने दी भट्टारक दीक्षा</strong></p>
<p>आपका सरल, सहज, मधुर व्यवहार व धार्मिक संस्कारों के साथ राष्ट्र की सेवा करने की भावना व आपकी कुण्डली में दिख रहे उत्कृष्ट भविष्य को देखकर परम् पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक महास्वामी ने 2 दिसम्बर, 2022 को आपको भट्टारक दीक्षा प्रदान कर विचार पट्ट क्षुल्लक आगमकीर्ति नाम दिया। विगत चार माह से स्वामीजी ने आपको क्षेत्र की परम्पराओं से परिचित कराकर परिपूर्ण किया। परिवार में द्वितीय पुत्र आगम इन्द्र अद्वितीय प्रतिभा के साथ कुशल वक्ता व समर्थ व्यक्तित्व के धनी हैं। मात्र 22 वर्ष की आयु में विश्व तीर्थ श्रवणबेलगोला की बागडोर अपने हाथ में लेने वाले आप अब अपने गुरु की गरिमा को बनाये रखकर उनके शेष रहे कार्यों को पूर्ण करने की इच्छा के साथ उत्कृष्ट भाव रखते हैं।</p>
<p><strong>आगमकीर्ति बने चारुकीर्ति</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि जब परम् पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक महास्वामी ने 12 दिसम्बर, 1969 को दीक्षा ली थी, तब उनकी आयु भी मात्र 20 वर्ष थी। संपूर्ण देश के प्रमुख गणमान्य जन व त्यागी आचार्यों का आशीर्वाद आपको ऊंचाइयां प्रदान करेगा। विचार पट्ट क्षुल्लक श्री आगमकीर्तिजी को परम् पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक महास्वामी के 23 मार्च, 2023 को महाप्रयाण हो जाने से 27 मार्च, 2023 को पट्टाभिषेक कर संपूर्ण विधि विधान के साथ श्रवणबेलगोला के भट्टारक पीठ पर विराजमान किया गया। जिसमें बारह पीठों के भट्टारक महास्वामी सहित संपूर्ण देशभर के हजारों श्रावक-श्राविकाएं सम्मिलित हुए। अब 27 मार्च, 2023 से उनका नाम पूज्य जगद्गुरु स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक स्वामी हो गया है।</p>
<p><strong>व्यक्त की भावनाएं </strong></p>
<p>तीन बार गोम्मटेश भगवान बाहुबली स्वामी के महामस्तकाभिषेक में प्रमुख सान्निध्य प्रदाता प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांतिसागरजी महाराज की पट्ट परम्परा के पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागरजी महाराज ससंघ सहित अनेक आचार्यों, मुनिराजों, त्यागीवृन्दों ने भी आपको अपना आशीर्वाद भेजकर क्षेत्र की परम्पराओं के निर्वहन हेतु शुभ भावना व्यक्त की है।</p>
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		<title>श्रवणबेलगोला के विकास में योगदान को किया याद : कर्मयोगी चारुकीर्ति भट्टारक जी के समाधिमरण पर विनयांजली </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 12:24:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर महाराज ने समाधि में असमय लीन हुए श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट.. महरौनी(ललितपुर)। मुनिश्री सुधासागर महाराज की उपस्थिति में यशोदय तीर्थ कमेटी और दिगम्बर जैन पंचायत समिति ने तीर्थक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति के समाधिमरण पर विनयांजली अर्पित की। मुनिश्री सुधासागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागर महाराज ने समाधि में असमय लीन हुए श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति स्वामी जी को श्रद्धांजलि दी। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी(ललितपुर)।</strong> मुनिश्री सुधासागर महाराज की उपस्थिति में यशोदय तीर्थ कमेटी और दिगम्बर जैन पंचायत समिति ने तीर्थक्षेत्र श्रवणबेलगोला के भट्टारक कर्मयोगी चारूकीर्ति के समाधिमरण पर विनयांजली अर्पित की। मुनिश्री सुधासागर महाराज ने उन्हें श्रमण संस्कृति का रक्षक बताते हुए कहा कि चारुकीर्ति स्वामी जी ने श्रमण संस्कृति और धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और श्रवणबेलगोला के विकास में अपना योगदान दिया।</p>
<p>उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत को जोड़ने का काम किया। उन्होंने चारुकीर्ति भटटारक जी के सद्कार्यों के लिए मंगल आशीर्वाद दिया। वहीं यशोदय तीर्थ के अध्यक्ष राजा चौधरी ने कर्मयोगी चारुकीर्ति भटटारक जी के समाधिमरण होने पर विनयांजली अर्पित की और अपने भाव रखे। मंत्री राजेश मलैया ने भट्टारक जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले पचास वर्षों से भट्टारक जी ने तीर्थ क्षेत्र श्रवणबेलगोला से जुड़कर इस तीर्थ के विकास में अपना अहम योगदान दिया और इस तीर्थ को विश्वपटल पर पहचान दिलाई।</p>
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