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	<title>चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>वरिष्ठ पत्रकार एस.एन. अशोक कुमार का निधनः 40 वर्षों तक गोम्मटवाणी के सम्पादक के रूप में सेवाएं दी </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Feb 2025 14:09:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रवणबेलगोला निवासी एस.एन. अशोक कुमार का बीमारी के कारण निधन हो गया। वे वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और पत्रकारिता, साहित्य, संस्कृति और स्थानीय भाषा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्व थे। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वे अस्पताल में भर्ती थे। लेकिन उपचार अप्रभावी रहा और उनकी मृत्यु हो गई। श्रीयुत ने श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला स्थित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला निवासी एस.एन. अशोक कुमार का बीमारी के कारण निधन हो गया। वे वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और पत्रकारिता, साहित्य, संस्कृति और स्थानीय भाषा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्व थे। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वे अस्पताल में भर्ती थे। लेकिन उपचार अप्रभावी रहा और उनकी मृत्यु हो गई। श्रीयुत ने श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला स्थित श्री दिगम्बर जैन महासंस्थान मठ के संचालक मंडल के सदस्य के रूप में लम्बे समय तक कार्य किया था, तथा मठ द्वारा प्रकाशित पाक्षिक समाचार पत्र गोम्मटवाणी के सम्पादक के रूप में लगभग 40 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रवणबेलगोला की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला।</strong> वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और पत्रकारिता, साहित्य, संस्कृति और स्थानीय भाषा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले श्रवणबेलगोला निवासी एस.एन. अशोक कुमार (80) का शनिवार को आयु संबंधी बीमारी के कारण निधन हो गया। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें हासन के के.आर.पुरम स्थित राजीव अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन उपचार अप्रभावी रहा और उनकी मृत्यु हो गई। श्रीयुत ने श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला स्थित श्री दिगम्बर जैन महासंस्थान मठ के संचालक मंडल के सदस्य के रूप में लम्बे समय तक कार्य किया था, तथा मठ द्वारा प्रकाशित पाक्षिक समाचार पत्र गोम्मटवाणी के सम्पादक के रूप में लगभग 40 वर्षों तक अविस्मरणीय दायित्व का निर्वहन किया था।</p>
<p><strong>युवा पत्रकारों के मार्गदर्शक रहें </strong></p>
<p>उन्होंने चन्नरायपटना तालुका वर्किंग जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के साथ-साथ जिला कार्यकारी समिति और राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य किया और दर्जनों युवा पत्रकारों के मार्गदर्शक थे। श्रीमत्त और पत्रकारिता की सेवा के अलावा, उन्होंने कन्नड़ साहित्य संघ और बाल साहित्य संघ के पदाधिकारी के रूप में भी कार्य किया, जिससे देश, भाषा, साहित्य और संस्कृति के लिए योगदान मिला।</p>
<p><strong>भरापूरा परिवार व रिश्तेदारों का समूह</strong></p>
<p>उनके परिवार में हसन के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. एस. ए. नितिन, तीन बेटे, पोते-पोतियां और सचिन सहित रिश्तेदारों का एक बड़ा समूह है। उनका अंतिम संस्कार शनिवार शाम को श्रवणबेलगोला में किया गया। इससे पहले पार्थिव शरीर को राजीव अस्पताल, चन्नारायपट्टा पत्रकार भवन परिसर और श्रवणबेलगोला स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया।</p>
<p><strong>गोम्मटवाणी समाचार पत्र के संपादक रहें</strong></p>
<p>एस.एन. अशोक कुमार ने लगभग 40 वर्षों तक श्रीमत्त की शासी संस्था के सदस्य के रूप में तथा परम पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी के मार्गदर्शन में श्रीक्षेत्र से प्रकाशित गोम्मटवाणी समाचार पत्र के संपादक के रूप में कार्य किया। वे डाक विभाग में पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत थे। श्रीक्षेत्र में सेवा करने की इच्छा से उन्होंने सरकारी सेवा से स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली थी।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74111" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0027.jpg" alt="" width="853" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0027.jpg 853w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0027-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0027-682x1024.jpg 682w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0027-768x1152.jpg 768w" sizes="(max-width: 853px) 100vw, 853px" />कला, साहित्य, संस्कृति और धार्मिक सेवा पर जोर </strong></p>
<p>धार्मिक एवं सामाजिक सेवा में लग गए थे। उन्होंने कला, साहित्य, संस्कृति और धार्मिक सेवा पर बहुत जोर दिया, विशेष रूप से प्राचीन इतिहास अनुसंधान पर जोर दिया और अगली पीढ़ी के लिए एक आदर्श बन गए। श्रीयुत के निधन से समाज को अपार दुःख पहुंचा है तथा हम भगवान श्री बाहुबली स्वामी से प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।</p>
<p><strong>कर्नाटक वर्किंग जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा शोक व्यक्त</strong></p>
<p>कर्नाटक वर्किंग जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने अशोक कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। केयूडब्ल्यूजे के राज्य अध्यक्ष शिवानंद तगदूर ने याद किया कि अशोक कुमार के मार्गदर्शन में श्रवणबेलगोला में पत्रकारों का जिला सम्मेलन, राज्य सम्मेलन और राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था और प्रार्थना की कि मृतकों की आत्मा को शांति मिले और भगवान उन्हें दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।</p>
<p><strong>मदनगौड़ा की भावुक प्रतिक्रिया </strong></p>
<p>पूर्व जिला कसापा अध्यक्ष एच.बी. मदनगौड़ा, जो तीन दशक से अधिक समय से अशोक कुमार के साथ जुड़े थे, ने उनके निधन पर भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यद्यपि अशोक कुमार एक पुजारी थे, फिर भी उन्होंने स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली और एक तरह से स्वयं को पूरी तरह श्रवणबेलगोला श्री मठ की सेवा में समर्पित कर दिया।</p>
<p><strong>चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी की आर्थिक मदद की </strong></p>
<p>परम पूज्य स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी को स्मरण आया कि उन्होंने उनकी इच्छानुसार कार्य किया था। 2004 में जब से मैं श्रीमत्त में शामिल हुआ हूँं, तब से उन्होंने मुझे हर तरह का मार्गदर्शन दिया है। परम पूज्य कर्मयोगी चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी एवं अशोक कुमार के सहयोग एवं मार्गदर्शन से हासन जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन का सुचारू रूप से आयोजन संभव हो सका। इन सबके साथ ही उन्होंने कहा, ‘जब मैंने विशाल माध्यम अखबार शुरू किया तो अशोक कुमार ने मुझे जो आर्थिक मदद दी थी, उसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।‘</p>
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		<title>गद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का 74वां अवतरण दिवस : अनुशासन, कर्त्तव्यनिष्ठा, दृढ़ संकल्प और विनम्रता की अद्भुत मिसाल थे स्वामीजी </title>
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		<pubDate>Wed, 03 May 2023 10:32:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी तीन मई, 2023 को 74वां जन्म मनाया जा रहा है। पढ़िए ऐसे महान कर्मयोगी के बारे में इस विशेष आलेख में &#8230; श्रवणबेलगोला। कर्मशील, सौम्य, मौन संत, जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी का जन्म 3 मई, 1949 को सिद्धक्षेत्र वारंगा में हुआ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी तीन मई, 2023 को 74वां जन्म मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए ऐसे महान कर्मयोगी के बारे में इस विशेष आलेख में &#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला।</strong> कर्मशील, सौम्य, मौन संत, जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी का जन्म 3 मई, 1949 को सिद्धक्षेत्र वारंगा में हुआ था। उनका जीवन एक खुली किताब रहा, जिसमें अनुशासन, कर्त्तव्यनिष्ठा, दृढ़ संकल्प और विनम्रता की सुरभि से हर पन्ना महका। उनके जीवन चरित्र के ये पन्ने आज हर आम व खास व्यक्ति को सहज ही आकर्षित करते हैं, तभी तो आज देश के हर कोने में उनके हजारों-लाखों अनुयायी हैं।</p>
<p>उनके व्यक्तित्व की पहचान उनके कार्य हैं और यही उनका परिचय भी। श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में उनके द्वारा किए गए विकास कार्य किसी से छिपे नहीं है और न ही उनके भट्टारक बनने से पूर्व यहां की दशा। विगत 51 सालों में उन्होंने श्रीक्षेत्र ही नहीं, कर्नाटक प्रदेश के जैन समाज को संगठित रखकर दिशा देने के लिए जो भी कार्य किए, वे काबिले तारीफ हैं। श्रवणबेलगोला की विकास प्रक्रिया और ख्याति को उच्चतम सोपान पर पहुंचाने के लिए किए गए प्रयासों की बानगी को देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि स्वामीजी वर्तमान श्रवणबेलगोला के कुशल चितेरे रहे।</p>
<p><strong>श्रीस्वामी जी का जीवन परिचय</strong></p>
<p>जन्म- सिद्धक्षेत्र वारंगा,</p>
<p>पिता- चंद्रराज जी इंद्र,</p>
<p>माता- श्रीमती कान्तेजी</p>
<p>जन्म तारीख- 3 मई सन् 1949,</p>
<p>जन्म नाम- रत्न वर्मा जी</p>
<p>संन्यास दीक्षा:- 12 दिसंबर 1969</p>
<p>19 अप्रैल महावीर जयंती पर 1970 में श्रवणबेलगोला मठ में पट्टाभिषेक कर इनका पीठाधिकारी स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी नाम पड़ा। तब से वे श्री क्षेत्र की अभिवृद्धि, श्रुत संवर्धन, समाज कल्याण और बच्चों के लिए शिक्षा सुविधा के कार्यों में जुटे रहे।</p>
<p><strong>हिंदी और संस्कृत साहित्य विशारद, कई भाषाओं के ज्ञाता</strong></p>
<p>परम पूज्य स्वामीजी की जीवनयात्रा की ओर दृष्टिनिक्षेप करें तो पाएंगे कि संन्यास से पूर्व उनका नाम रत्नवर्मा था। सही मायने में वह कर्नाटक ही नहीं, समस्त जैन समाज के अनमोल रत्न रहे। जिनके मार्गदर्शन में आज कई संगठन और तीर्थक्षेत्रों का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है। उनका जन्म 3 मई, 1949 को हुआ और 20 साल बाद 12 दिसंबर, 1969 को उन्होंने संन्यास दीक्षा ग्रहण की। तभी से वे सतत क्रियाशील रहे। दीक्षा के चार माह बाद ही उन्होंने 19 अप्रैल 1970 को श्रवणबेलगोला मठ की बागडोर संभाल ली। उन्होंने मैसूर से इतिहास में एम.ए., बैंगलोर विद्यापीठ से तत्वज्ञान में एम.ए. जैनागम का विशेष अध्ययन किया। उन्होंने हिंदी साहित्य विशारद और संस्कृत साहित्य विशारद किया। वे कन्नड़, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के ज्ञाता थे।</p>
<p><strong>करते रहे जैन साहित्य को संरक्षित</strong></p>
<p>परम पूज्य स्वामीजी ने जैन साहित्य के प्रचार-प्रसार और उनके संरक्षण के प्रयासों को भी बड़ी रुचि के साथ किया। जैन साहित्य उनकी विद्वत्ता और समर्पित प्रयासों के कारण यहां फल-फूल रहा है। आने वाले समय में स्वामी जी यहां प्राकृत विश्वविद्यालय खोलने के इच्छुक थे।</p>
<p><strong>साधना, ध्यान, अध्ययन को बनाया था जीवन का लक्ष्य</strong></p>
<p>दिगंबर जैन समाज की लगभग सभी संस्थाएं स्वामी जी के पास मार्गदर्शन हेतु आती थीं और उन्हीं के अनुसार कार्य करती थीं। बीजापुर सहस्त्रफणी पार्श्वनाथ मंदिर, नल्लुर समवशरण मंदिर, मकुर्ल आदिनाथ मंदिर, शालीग्राम भक्तामर मंदिर, आर्सिकेरी सहस्त्रकूट जिनालय व मायसंद्रा मंदिर के वे गौरव अध्यक्ष रहे थे। जहां के सभी कार्य उन्हीं के मार्गदर्शन में होते रहे हैं। परम पूज्य स्वामी ने 1997 से अपनी चर्या में चातुर्मास चर्या को शामिल किया था। तब से अब तक आप 16 चातुर्मास कर चुके। सामाजिक कार्यों व मठ के दायित्वों को निभाते हुए उन्होंने आध्यात्मिक और आत्मिक साधना को भी पूरा समय दिया। प्रतिवर्ष मौन साधना, ध्यान, अध्ययन, स्वाध्याय नियमित तौर पर करते थे। तप और त्याग भी साथ-साथ चलता रहता खा।</p>
<p><strong>करते थे पद विहार</strong></p>
<p>वर्ष 1997 के बाद से उन्होंने गाड़ी का प्रयोग कम किया और 2002 से 2009 तक तो उन्होंने पद विहार ही किया। स्वामी जी के गाड़ी त्याग के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण था। इस दौरान उनके मार्गदर्शन में विद्वानों ने धवला, जयधवला और महाधवला के 40 भागों का कन्नड़ में अनुवाद किया। स्वामी जी ने इन सभी का संपादन किया है। इसमें से 21 का प्रकाशन हो चुका है और बाकी प्रकाशन की प्रक्रिया में है। कार्य पूर्ण होने के बाद भी वह केवल अत्यावश्यक कार्यों के लिए बाहर जाने पर ही गाड़ी का प्रयोग करते थे अन्यथा यहां तो पदविहार ही करते थे।</p>
<p><strong>फोन का किया था त्याग</strong></p>
<p>वर्ष 2001 से फोन पर बात करने का उन्होंने त्याग किया था। इतने व्यस्त कार्यक्रमों और इतनी बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने के बावजूद फोन के बिना सभी कार्य सुचारू रूप से चलाना अपने आप में एक विलक्षण गुण है। ऐसे बहुमुखी प्रतिभावान, गुणी और विनम्र भट्टारक जी के ही कारण श्रीक्षेत्र की पहचान आज चहुंओर है। यहां आने वाले अतिथि, यात्री, त्यागी व संत सभी इनके आत्मीय स्वागत और उत्तम व्यवस्थाओं से अभिभूत होकर प्रसन्नचित्त लौटते हैं। मठाधिपति के पद पर आसीन होकर विनम्रता का भाव लिए यह सहज व्यक्तित्व हर आम और खास के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। हम सभी को स्वामी जी से समर्पण, श्रद्घा, लगन और निष्ठा सीखनी होगी, तभी तो समाज को एक माला में पिरोकर धर्म रक्षा, तीर्थ रक्षा, संत रक्षा और देश रक्षा का फर्ज पूरा कर सकेंगे। विश्व शांति के लिए कार्य करने पर 2017 में कर्नाटक सरकार ने स्वामी जी को महावीर शांति पुरस्कार से नवाजा था। इसके तहत 10 लाख रुपए, प्रशस्ति, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया था।</p>
<p><strong>समाज सेवा में रहते थे अग्रणी</strong></p>
<p>&#8211; 2006 के महामस्तकाभिषेक के समय स्वामीजी ने पूरे गांव में सरकार व प्रशासन के सहयोग से शौचालय निर्माण का कार्य पूरा कराया</p>
<p>&#8211; आसपास के सभी गांवों के बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य लाभ हेतु मोबाइल चिकित्सालय का संचालन किया</p>
<p>&#8211; जैन मठ से जैन-जैनेतर लोगों को हर माह नकद राशि का सहयोग किया</p>
<p>&#8211; बाहुबली बाल चिकित्सालय में 100 बेड और 100 बेड के जनरल अस्पताल का संचालन किया जा रहा है</p>
<p>&#8211; कर्नाटक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राशन, कपड़े, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई</p>
<p>&#8211; बच्चों को संस्कारित करने के लिए ब्रह्मचर्य आश्रम का संचालन, जिसमें धार्मिक और लौकिक दोनों प्रकार की शिक्षा प्रदान की जाती है</p>
<p>&#8211; नर्सरी से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालन किया जा रहा है</p>
<p>&#8211; जैन साहित्य और अन्य साहित्यों के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक साहित्यकारों, विद्वानों और पत्रकारों को प्रतिवर्ष पुरस्कार प्रदान किया जाता है और सम्मेलनों का आयोजन होता है</p>
<p>&#8211; आर्थिक दृष्टि से पिछड़े समुदाय के व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधा के साथ असहाय, मंदबुद्धि को 1100 रुपये प्रतिमाह सदस्यता राशि प्रदान की जाती है</p>
<p>&#8211; 1981 में पूरे देश में जनमंगल कलश का भ्रमण करवाया</p>
<p>&#8211; प्राचीन साहित्य के प्रकाशन के लिए अक्षर कलश योजना प्रारंभ की गई</p>
<p>&#8211; 6000 से अधिक पांडुलिपियां सुरक्षित की गईं</p>
<p>&#8211; साधुओं की सेवा के लिए त्यागी सेवा समिति अलग से बनाई गई</p>
<p>स्वामीजी ने 53 वर्षों में जो कुछ किया है, वह समाज के लिए प्रेरणास्पद है। सभी तरह के मठों, संस्थाओं और मंदिरों का संचालन धार्मिक क्रियाकलापों के साथ सामाजिक कार्यों के संचालन किया जा सका है।</p>
<p>परमपूज्य चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी ने अपने सिद्धहस्त करकमलों से 9 भट्टारक स्वामीजी को दीक्षा प्रदान कर अपना शिष्यत्व प्रदान किया है, जो अलग-अलग मठों की बागडोर संभाते हुए उन क्षेत्रों के विकास हेतु प्रतिबद्ध हैं-</p>
<p>1. स्वस्ति श्री ललित कीर्ति भट्टारक स्वामी- कारकल मठ</p>
<p>2. स्वस्ति श्री भुवनकीर्ति स्वामी &#8211; कनकगिरि मठ</p>
<p>3. स्वस्ति श्री भानुकीर्ति भट्टारक स्वामी- कम्ब्दहली मठ</p>
<p>4. स्वस्ति श्री धवलकीर्ति स्वामी जी &#8211; अर्हंतगिरि मठ</p>
<p>5. स्वस्ति श्री चारुकीर्ति स्वामी- मूडबिद्री जैन मठ</p>
<p>6. स्वस्ति श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी (धर्मकीर्ति स्वामि) &#8211; हुमचा पद्मावती मठ</p>
<p>7. स्वस्ति श्री लक्ष्मीसेन स्वामी जी &#8211; नरसिंहराजपुर मठ (ज्वालामालिनी) मठ</p>
<p>8. स्वस्ति श्री भट्टाकलंक भट्टारक स्वामी जी &#8211; सौन्दा मठ</p>
<p>9. अरतिपुर के पट्ट विचारक क्षुल्लक सिद्धांतकीर्ति स्वामी जी</p>
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		<title>अजातशत्रुता चारुकीर्ति जी महाराज के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा अलंकरण: आचार्य श्री सुविधि सागर महाराज ने व्यक्त किए विचार  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Apr 2023 02:30:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[एक संघनायक की जिस प्रकार सल्लेखना होती है, ठीक उसी प्रकार चारुकीर्ति जी की सल्लेखना हुई। श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वतिश्री चारुकीर्ति जी महाराज की संल्लेखना समाधि के विषय में परम्पराचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त किए। पढ़िए विशेष रिपोर्ट&#8230; श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वतिश्री चारुकीर्ति जी महाराज की संल्लेखना समाधि के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>एक संघनायक की जिस प्रकार सल्लेखना होती है, ठीक उसी प्रकार चारुकीर्ति जी की सल्लेखना हुई। श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वतिश्री चारुकीर्ति जी महाराज की संल्लेखना समाधि के विषय में परम्पराचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वतिश्री चारुकीर्ति जी महाराज की संल्लेखना समाधि के विषय में परम्पराचार्य श्री सुविधिसागर जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि एक संघनायक की जिस प्रकार सल्लेखना होती है, ठीक उसी प्रकार चारुकीर्ति जी की सल्लेखना हुई, इस बारे में चर्चा भट्टारक प्रवर धवल कीर्ति जी महाराज के साथ मेरी हुई, उसी बारे में आपको बताने के लिए प्रस्तुत हूं।</p>
<p><strong>बोले, मेरी जवाबदारी पूरी हुई </strong></p>
<p>भट्टारक प्रवर ने कहा कि आज से कुछ दिनों पूर्व उन्होंने मुझे बुलाया, चूंकि मैं 15 माह से यहां हूं, इसलिए एक-एक घटना मुझे पता है। अचानक चारुकीर्ति जी महाराज का फोन आता है कि आप तत्काल यहां आइये। जाने के बाद चारुकीर्ति महाराज ने कहा कि आप मुझे निवेदन पत्र लिखिए। (जैसा कि भट्टारक परम्परा के नियम हैं) कि आप अपने पद पर किसी को आरूढ़ करें। इन्होंने निवेदन पत्र लिखा। उसके बाद कनकगिरी के भट्टारक भुवन कीर्ति जी महाराज को बुलाया। उनको बुलाकर कहा कि आप इस पर अनुमोदना पत्र लिखें। उसके बाद कमंडल, पिंची और दंड को बाहर रखकर पूरी व्यवस्था पर ताले लगवाए। विचार पट्ट पर आगम कीर्ति जी महाराज को स्थापित किया। उसके बाद जिस दिन उनकी सल्लेखना हुई। सुबह जिनालय से आकर वंदना कर कुछ लोगों को बुलाया। उनमें से चार लोगों को खड़ा किया और आगम कीर्ति जी महाराज को चाबी देकर कहा कि मेरी जवाबदारी पूरी हुई।</p>
<p><strong>नमोकार मंत्र सुनते हुए प्राण ज्योति का विलय</strong></p>
<p>उनके पैरों में जो 2018 से अब तक दर्द था, न उन्होंने चिकित्सा कराई न किसी तरह का शिथिलाचार किया। बल्कि अन्न का त्याग कर तपस्या कर रहे थे। ऐसी परिस्थिति में मंदिर से आते समय जैसे ही उनका पैर मुड़ा और थोड़ी चोट लगी। तो उन्होंने सबसे पहले नमोकार मंत्र बोलते हुए अपने वस्त्र निकाल दिया, केवल अधोवस्त्र पास रखा। कहने का तात्पर्य है कि हमारे यहां अहलक अवस्था की व्यवस्था है, उसे दीक्षा नहीं कहेंगे क्योंकि वह गुरु के व्रत संस्कार के बाद होती है। जिस प्रकार के जीवन की उन्होंने कल्पना की कि मेरे द्वारा मुनि पद धारण करने के बाद ही सल्लेखना हो, लेकिन जब उन्होंने देखा कि अब समयावली शेष नहीं है तो उन्होंने अपने वस्त्र निकालने के बाद वहां खड़े लोगों को नमोकार मंत्र सुनाने को कहा। नमोकार मंत्र सुनते हुए उन्होंने सुबह के समय अपनी प्राण ज्योति का विलय किया। भट्टारक परम्परा में इस प्रकार की सल्लेखना अद्भुत है।</p>
<p><strong>उनके काम सभी संघों का करेंगे मार्गदर्शन </strong></p>
<p>उनके माध्यम से 48 मंदिरों का संचालन होता था। प्रतिदिन 48 मंदिरों को गाजे-बाजे के साथ द्र्व्य जाना और त्रिकाल पूजा होना उनके माध्यम से होता था। शास्त्र की बात करें तो अक्षराअभिेषेक के नाम पर 108 ग्रंथ प्रकाशित हुए। उसके अतिरिक्त धवला का पूर्ण प्रकाशन उन्होंने कन्नड़ में किया और सभी संघों में पहुंचा। कई ग्रंथों का प्रकाशन किया। उसके बाद गुरुओं की बात करें तो भारत का एक भी संघ ऐसा नहीं है जो यह कहे कि चारुकीर्ति महाराज ने हमारे संघ सेवा नहीं की। राष्ट्रीय बात करें तो भगवान बाहुबली के अभिषेक के बाद सैनिक कोष में दान राशि दी। 2019 में कर्नाटक में जब बाढ़ आई तो लोगों के खाने व रहने की व्यवस्था अपने मठ के माध्यम से की। औषधालय, गुरुकुल हर क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उनके आदर्श समस्त संघों के लिए मागदर्शन करें। अजातशत्रुता उनके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा अलकंरण रहा। मेरे ध्यान में 100-150 वर्ष के पहले पिच्छीधारी हैं जिनकी समाधि के उपरांत राष्ट्रीय सत्कार करते हुए सलामी दी गई। इस प्रकार के गौरव को उन्होंने प्राप्त किया।</p>
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		<title>लाइव वीडियो : श्रवणबेलगोला मठ  के नए भट्टारक स्वस्तिश्री आगमकीर्ति स्वामी जी का पट्टाभिषेक कार्यक्रम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Mar 2023 02:51:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लिंक पर क्लिक करें  https://youtube.com/live/Q5I6bWDyVCM?feature=share &#160; यह कार्यक्रम रहेंगे । दिनांक: 27-03-2023, सोमवार प्रात: 05-00 बजे सुप्रभात, पूज्य आगमकीर्ति स्वामीजी का मंगल स्नान, प्रातः 06-30 बजे : भगवान श्री चन्द्रप्रभु स्वामी का नवकलशाभिषेक पूजा, सभी मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजा क्षेत्र की अधिदेवता मा. कूषांडिनीदेवी का षोडशोपचार पूजा प्रातः 09-00 बजे पट्टाभिषेक पूर्व विधि, सिंहासन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लिंक पर क्लिक करें </strong></p>
<p><a href="https://youtube.com/live/Q5I6bWDyVCM?feature=share">https://youtube.com/live/Q5I6bWDyVCM?feature=share</a></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>यह कार्यक्रम रहेंगे ।</strong></p>
<p>दिनांक: 27-03-2023, सोमवार</p>
<p>प्रात: 05-00 बजे</p>
<p>सुप्रभात, पूज्य आगमकीर्ति स्वामीजी का मंगल स्नान,</p>
<p>प्रातः 06-30 बजे : भगवान श्री चन्द्रप्रभु स्वामी का नवकलशाभिषेक पूजा, सभी मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजा क्षेत्र की अधिदेवता मा. कूषांडिनीदेवी का षोडशोपचार पूजा</p>
<p>प्रातः 09-00 बजे पट्टाभिषेक पूर्व विधि, सिंहासन पूजा</p>
<p>प्रातः 09-21 बजे : वृषभ लग्न में सिंहासनारोहण पूर्वक पट्टाभिषेक महोत्सव प्रारंभ, परंपरागत मुद्राधारण, स्वर्ण पिच्छिका ग्रहण, स्वर्णपादुका, आदि समर्पण, अभिनव पूज्यश्रीजी की पादपूजा, भक्ति गौरव समर्पण, धर्मोपदेश, शुभाशीर्वाद</p>
<p>दोपहर 03-00 बजे : अभिनव भट्टारक स्वामीजी का पालकी में शोभा यात्रा</p>
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		<title>सभी जैन मठों के स्वामी जी रहेंगे उपस्थित : श्रवणबेलगोला मठ के नए स्वामी आगमकीर्ति का होगा पट्टाभिषेक </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Mar 2023 13:06:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रवणबेलगोला। श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला के प्रातः स्मरणीय परमपूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी का &#8220;समाधिमरण होने से पूज्य स्वामीजी के द्वारा ही विचारपट्टे क्षुल्लक दीक्षित स्वस्तिश्री आगमकीर्ति स्वामीजी का पट्टाभिषेक महोत्सव कार्यक्रम समस्त जैन मठों के पूज्य स्वस्तिश्री भट्टारक स्वामीजियों के पावन सानिध्य में 27 मार्च, 2023 को सोमवार महावीर शक 2549 शोभकृत संवत्सर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>श्रवणबेलगोला।</strong> श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला के प्रातः स्मरणीय परमपूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी का &#8220;समाधिमरण होने से पूज्य स्वामीजी के द्वारा ही विचारपट्टे क्षुल्लक दीक्षित स्वस्तिश्री आगमकीर्ति स्वामीजी का पट्टाभिषेक महोत्सव कार्यक्रम समस्त जैन मठों के पूज्य स्वस्तिश्री भट्टारक स्वामीजियों के पावन सानिध्य में 27 मार्च, 2023 को सोमवार महावीर शक 2549 शोभकृत संवत्सर चैत्रसुदि षष्ठी प्रातः 9-21 में गुरुदेवतानुग्रहपूर्वक श्री क्षेत्र के भ. श्री चंद्रप्रभु तीर्थंकर के दिव्य सानिध्य में संपन्न होने जा रहा है।</p>
<p><strong>यह कार्यक्रम निम्नानुसार होगा :</strong></p>
<p>दिनांक: 26-03-2023, रविवार</p>
<p>प्रातः 11-00 बजे जैन मठ मंदिर में गणधर वलय विधान</p>
<p>दिनांक: 27-03-2023, सोमवार</p>
<p>प्रात: 05-00 बजे</p>
<p>सुप्रभात, पूज्य आगमकीर्ति स्वामीजी का मंगल स्नान,</p>
<p>प्रातः 06-30 बजे : भगवान श्री चन्द्रप्रभु स्वामी का नवकलशाभिषेक पूजा, सभी मंदिरों में विशेष अभिषेक पूजा क्षेत्र की अधिदेवता मा. कूषांडिनीदेवी का षोडशोपचार पूजा</p>
<p>प्रातः 09-00 बजे पट्टाभिषेक पूर्व विधि, सिंहासन पूजा</p>
<p>प्रातः 09-21 बजे : वृषभ लग्न में सिंहासनारोहण पूर्वक पट्टाभिषेक महोत्सव प्रारंभ, परंपरागत मुद्राधारण, स्वर्ण पिच्छिका ग्रहण, स्वर्णपादुका, आदि समर्पण, अभिनव पूज्यश्रीजी की पादपूजा, भक्ति गौरव समर्पण, धर्मोपदेश, शुभाशीर्वाद</p>
<p>दोपहर 03-00 बजे : अभिनव भट्टारक स्वामीजी का पालकी में शोभा यात्रा</p>
<p>कार्यक्रम श्री दिगंबर जैन समाज, अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी श्रवणबेलगोला पट्टाभिषेक महोत्सव समिति की ओर से आयोजित होगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40796" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0015-1.jpg" alt="" width="934" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0015-1.jpg 934w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0015-1-219x300.jpg 219w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0015-1-747x1024.jpg 747w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0015-1-768x1053.jpg 768w" sizes="(max-width: 934px) 100vw, 934px" /></p>
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		<item>
		<title>स्वस्ति श्री चारुकीर्ति के महाप्रयाण पर उदासीन आश्रम द्रोणगिरी में श्रद्धांजलि सभा : स्वामी के स्थान को भरना असंभव, उनके कार्यों को हमेशा याद किया जाएगा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2023 11:47:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक जी स्वामी श्रवणबेलगोला के महाप्रयाण पर गुरूदत्तादि उदासीन आश्रम द्रोणागिरी जिला छतरपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें आश्रम समिति के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय समाज के लोग उपस्थित रहे। पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट&#8230; बड़ामलहरा। स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक जी स्वामी श्रवणबेलगोला के महाप्रयाण पर गुरूदत्तादि उदासीन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक जी स्वामी श्रवणबेलगोला के महाप्रयाण पर गुरूदत्तादि उदासीन आश्रम द्रोणागिरी जिला छतरपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें आश्रम समिति के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय समाज के लोग उपस्थित रहे। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ामलहरा।</strong> स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक जी स्वामी श्रवणबेलगोला के महाप्रयाण पर गुरूदत्तादि उदासीन आश्रम द्रोणागिरी जिला छतरपुर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें आश्रम समिति के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय समाज के लोग उपस्थित रहे। कर्नाटक में जन्मे पूज्य स्वामी जी के सानिध्य में श्रवणबेलगोला कर्नाटक के भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक के चार आयोजन सफलतापूवर्क संपन्न हुए । उदासीन आश्रम समिति के अधिष्ठाता भागचंद जैन पीली दुकान ने अपने विचारों में स्वामी जी द्वारा धार्मिक, सामाजिक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के विषय में बताया कि स्वामीजी समाधि के बाद उनके स्थान भरना असंभव है।</p>
<p>भारतवर्ष की जैन समाजस्वामी जी की समाधि के बाद से बहुत शोक में हैं। स्वामी जी के द्वारा किए गए कार्यों को हमेशा याद किया जाएगा। आश्रम समिति के अध्यक्ष संतोष जैन घड़ी ने कहा कि स्वामी जी युगपुरुष थे जिन्होंने 20 वर्ष की उम्र में श्रवणबेलगोला के इतने बड़े मट को समर्पित होकर संभाला। उनकी उदारता एवं सरलता से यह कार्य निरंतर प्रगति की ओर चलते रहे। स्वामी जी ने देश-विदेश में जैन धर्म की प्रभावना की। ट्रस्ट कमेटी के मंत्री महेंद्र जैन इंदौर ने कहा कि स्वामी जी जैसे व्यक्तित्व अगर जैन समाज को मिलते हैं, तो समाज हमेशा समृद्धि की ओर अग्रसर रहेगा एवं अनेक वक्ताओं ने अपने विचारों द्वारा स्वामी जी को श्रद्धांजलि भावांजलि, विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p>सनत कुटोरा, प्रमोद पाटन, निर्मल जैन वारा, कमल जैन, सुरजपुरा राजकुमार गुढा, कमल डेवडिया, पदम सेठ शाहगढ़, मुकेश जैन पूर्व सरपंच हीरापुर, प्रेमचंद बरेठी बंडा आदि ने अपनी भावांजलि दी। प्रभावना जन कल्याण परिषद रजि. के कोषाध्यक्ष मनीष विद्यार्थी सागर ने सभा का संचालन किया। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित नारायण दास फौजदार भगवां मंत्री महेंद्र जैन एलआई सी इंदौर शिखरचंद शास्त्री बड़ामलहरा जैनेंद्र कुमार रामटोरिया कमल कुमार शाहगढ़ भागचंद पीली दुकान पं. मुन्नालाल भगवां, शिवप्रसाद जी अमरमऊ, सेवक चंद्र बड़ामलहरा, गजेंद्र जैन मंडी बड़ामलहरा हरिशचंद जैन मुंगवारी, उत्तमचंद जैन गंज बड़ामलहरा, भागकुमार दोणगिरी श्रीमती रजनी जैन बड़ा मलहरा मनोज जैन पत्रकार दोणगिरी जर्नलिस्ट मनीष विद्यार्थी सागर, प्रकाश जैन पत्रकार शाहगढ़, रविंद्र जैन भगवां जिनेंद्र शास्त्री बड़ामलहरा, राहुल वीला, लोकेश जैन बड़ामलहरा, महेश शास्त्री बड़ा, मलहरा सोनू जैन गोरखपुर नरेंद्र कुमार मुंगवारी, प्रेमचंद बरेठी बण्डा, सुरेश डेवडिया बड़ामलहरा, चंद्र कुमार जी बड़ामलहरा, पं. लालचंद जी भगवां, कमल कुमार जी हटा, रविंद्र बजाज, मुन्ना लाल खतौरा वाले बंडा, राजेंद्र कुमार मंडी बड़ा मलहरा,दिनेश देवरान राजकुमार जैन गुढा शीतल जैन तिगोडा, गुलाबचंद जैन हीरापुर, मुकेश जैन पूर्व सरपंच हीरापुर, पदम सेठ शाहगढ़ शीलचंद उपस्थित रहे।</p>
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		<title>पट्टाभिषेक के बाद स्वामी आगम कीर्ति बनेंगे नए भट्टारक : जानते हैं कौन हैं श्रवणबेलगोला मठ की बागडोर संभालने वाले नए भट्टारक आगम कीर्ति स्वामी </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Mar 2023 08:29:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति स्वामी जी की असमय समाधि के बाद स्वामी आगमकीर्ति मठ के नए भट्टारक होंगे। उनका पट्टाभिषेक 27 मार्च, 2023 को सुबह नौ बजे धार्मिक अनुष्ठान के साथ होगा। पढ़िए दीपक जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230; अतिशय क्षेत्र श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति स्वामी जी की असमय समाधि जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति स्वामी जी की असमय समाधि के बाद स्वामी आगमकीर्ति मठ के नए भट्टारक होंगे। उनका पट्टाभिषेक 27 मार्च, 2023 को सुबह नौ बजे धार्मिक अनुष्ठान के साथ होगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए दीपक जैन की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>अतिशय क्षेत्र श्रवणबेलगोला मठ के भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति स्वामी जी की असमय समाधि जैन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति है। श्रवणबेलगोला में भव्य मूर्ति का मस्तकाभिषेक आयोजित कर विश्व पटल का ध्यान इस जगह खींचने वाले चारुकीर्ति स्वामी थे। स्वामी जी की समाधि के बाद स्वामी आगमकीर्ति मठ के नए भट्टारक होंगे। उनका पट्टाभिषेक 27 मार्च, 2023 को सुबह नौ बजे धार्मिक अनुष्ठान के साथ होगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40736" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008.jpg" alt="" width="990" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008-768x433.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0008-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 990px) 100vw, 990px" /></p>
<p><strong>कौन हैं स्वस्तिश्री आगम कीर्ति भट्टारक स्वामी</strong></p>
<p>स्वामी जी का जन्म 26 फरवरी, 2001 में कर्नाटक के शिमोगा जिले के सागर नगर में हुआ था। इनके लौकिक पिता का नाम अशोक कुमार इंद्र और माता का नाम अनीता है। इनकी प्राथमिक शिक्षा सागर के वरिष्ठ प्राथमिक विद्यालय से हुई। इसके बाद आपने माध्यमिक शिक्षा एमजेएन पाई हाई स्कूल से पूरी की। आप एसडीएमपीयू कॉलेज, उजिरे से स्नातक की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं। आपके पास एलएलबी की डिग्री भी है। आपके पास एनसीसी का बी और सी सर्टिफिकेट भी है। आपको कम्प्यूटर का भी है। आपको कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी भाषाएं आती हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40737" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009.jpg" alt="" width="990" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009-768x433.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0009-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 990px) 100vw, 990px" /></p>
<p><strong>करते थे बसदी में सेवा</strong></p>
<p>आपके माता-पिता जैन बसदी में सेवा-पूजा का कार्य करते थे। जनसेवा में लगे रहना स्वामी जी का अनोखा गुण है। आपने अपने पिता अशोक कुमार इंद्र और पंडित मोहन कुमार सहित कई अन्य लोगों के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए हैं। आप आठ बार रक्तदान भी कर चुके हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40738" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012.jpg" alt="" width="990" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012-768x433.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0012-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 990px) 100vw, 990px" /></p>
<p><strong>इसलिए शुरू हुई भट्टारक परंपरा</strong></p>
<p>जब अधर्मी जैन धर्म को नुकसान पहुंचाने लगे तो उसे बचाने भट्टारक ही आगे आए थे। जब धर्म राज्यों पर आश्रित होने लगा था तो धर्म को जानने के लिए राजा मंदिर, शास्त्र और गुरु पर अपना शासन समझने लगे। उन्हें अधीन रहने को मजबूर करने लगे। हुआ कुछ यूं को कि नंगन चर्या का पालन करने वाले मुनियों के लिए खुद की सुरक्षा कठिन होने लगी। मुनि और श्रावक के बीच इसी कठिनाई को पाटने कड़ी बने भट्टारक, 12 वीं सदी से पहले भट्टारक नग्न होते थे लेकिन बाद में भट्टारकों ने वस्त्र अपनाए क्योंकि मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा और व्यवस्था नंगन चर्या के साथ असंभव थी। जिन जैन मुनियों के मन में संस्कृति बचाने का राग था, उन्होंने वस्त्रों के साथ खुद को बतौर भट्टारक स्वीकार किया। एक समय ऐसा भी आया जब अधर्मी जैन मंदिरों को नुकसान पहुंचाने लगे, साधुओं की तपस्या भंग करने लगे। यही नहीं संस्कृति की इबारत करने वाले ताड़पत्र और शास्त्रों के भंडारों को जलाया जाने लगा। हालात ऐसे की जैनियों के लिए जैन कहलाना भी मुश्किल हो गया। जैन साधुओं को घाणी में पेरा जाने लगा या गर्म तेल की कढ़ाई में डाला जाने लगा। हजारों सालों तक दुर्भाग्य का यह चक्र चलता रहा। श्रावक परिवार और संपत्ति को बचाने में व्यस्त थे तो ऐसे वक्त में संस्कृति की सुरक्षा और समाज को संगठित करने का दारोमदार भट्टारकों ने अपने जिम्मे लिया। उस समय देश में अलग-अलग स्थानों पर भट्टारक पीठों की स्थापना हुई। हमारी संस्कृति अक्षुण है और आज भी जीवित है इसका श्रेय उन्हीं को जाता है। वर्तमान में दक्षिण के अलावा किसी भी पीठ में भट्टारक विराजमान नहीं हैं। कर्नाटक में 15 पीठ, जहां भट्टारक स्वामी विराजमान हैं और धर्म सुरक्षा को अपना कर्तव्य समझते हैं। यह सिर्फ सामाजिक कार्य नहीं बल्कि आत्म साधना के लिए भी काम करते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-40739" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010.jpg" alt="" width="990" height="558" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010-768x433.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230325-WA0010-414x232.jpg 414w" sizes="auto, (max-width: 990px) 100vw, 990px" /></p>
<p><strong>इन 15 जगहों पर हैं भट्टारक पीठ</strong></p>
<p>श्रवणबेलगोला, कोल्हापुर, हुम्चा, नांदनी, मूड़बद्री, कारकल, स्वादी, सौंदा, नरसिंहराजपुरा, जिनकांची, अरिहंतगिरि, कनकगिरि, कम्बदहल्ली, वरुर, अरतिपुर।</p>
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		<title>स्वामी जी के जीवन कृतित्व पर डाला प्रकाश : चारुकीर्ति स्वामी जी ने बहुत पहले से अपनी साधना को शुरू कर रखा था &#8211; श्री वर्धमान सागर महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2023 08:16:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ के समाधि लीन हुए भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त श्री चारूकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के समाधि मरण का समाचार सुनकर के पूरा पिछला इतिहास स्मृति पटल पर घूमने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ के समाधि लीन हुए भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त श्री चारूकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के समाधि मरण का समाचार सुनकर के पूरा पिछला इतिहास स्मृति पटल पर घूमने लगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ के समाधि लीन हुए भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त श्री चारूकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के समाधि मरण का समाचार सुनकर के पूरा पिछला इतिहास स्मृति पटल पर घूमने लगा। उन्होंने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की परम्परा को जो सम्मान दिया, उसी सम्मान पूर्वक उन्होंने वर्ष 1993, 2006, 2018 में महामस्तकाभिषेक अपने सानिध्य में सम्पन्न कराया। उनका समाधिमरण होना सारे समाज के लिए दुखदाई है। ऐसी उम्मीद नहीं थी।</p>
<p><strong>जिनधर्म की प्रभावना की</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि स्वामी जी मठ को महामस्तकाभिषेक से नई उंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने सन् 1981 में एलाचार्य श्री विद्यानंदी जी महाराज के सानिध्य में सहस्त्र शताब्दी महोत्सव सम्पन्न कराया। यह उनके जीवन की बड़ी भारी उपलब्धि कही जा सकती है। उन्होंने मस्तकाभिषेक को सम्पन्न कराके जिनधर्म की, भगवान बाहुबली स्वामी की जो प्रभावना की, उसे भुलाया नहीं जा सकता। पूज्य श्री ने कहा कि वह स्वामीजी के लिए भगवान् श्री बाहुबली से प्रार्थना करते हैं। उन्होंने श्रवणबेलगोला तीर्थ को विश्व प्रसिद्द ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रबल पुरुषार्थ किया।</p>
<p>उनकी भावना भी थी कि मैं मुनि दीक्षा लेकर भगवान बाहुबली जैसी साधना कर सकूं, ऐसा मुझे आशीर्वाद दीजिये। वह संभव नहीं हो सका। लेकिन हमको जहां तक ध्यान है, उन्होंने अपनी साधनाओं को बहुत पहले से शुरू कर रखा था और साधना के बल पर उन्होंने शांत अंतिम मरण को पाया। आचार्य श्री ने जैन मठ श्री श्रवणबेलगोला के मनोनीत नूतन भट्टारक स्वामी को भी आशीर्वाद दिया।</p>
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		<title>आगमकीर्ति स्वामी जी: होंगे श्रावणबेलगोला मठ के नए भट्टारक </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 13:29:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी,के असमय समाधि में लीन होने के बाद श्रावणबेलगोला मठ की जिम्मेदारी 27 मार्च, 2023 को स्वामी जी के शिष्य स्वस्तिश्री भट्टारक आगमकीर्ति स्वामी जी को धार्मिक अनुष्ठान के साथ सौंपी जाएगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी,के असमय समाधि में लीन होने के बाद श्रावणबेलगोला मठ की जिम्मेदारी 27 मार्च, 2023 को स्वामी जी के शिष्य स्वस्तिश्री भट्टारक आगमकीर्ति स्वामी जी को धार्मिक अनुष्ठान के साथ सौंपी जाएगी।</p>
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		<title>स्वामी जी को समर्पित कविता : क्या लिखूं&#8230; </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 10:33:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयपुर के अजित जैन जगद्गुरु स्वामी चारुकीर्ति भट्टारक जी के असमय समाधि में लीन होने उद्वेलित हैं। उन्होंने लिखा है कि आज मन में यही सवाल है। शब्द पंगु लग रहे हैं। व्यक्ति का व्यकितत्व जब शब्दों की सीमा से परे हो जाये तो खामोशी बोलती है। और चारु कीर्ति स्वामी जी तो खामोशी से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जयपुर के अजित जैन जगद्गुरु स्वामी चारुकीर्ति भट्टारक जी के असमय समाधि में लीन होने उद्वेलित हैं। उन्होंने लिखा है कि </strong><strong>आज मन में यही सवाल है। शब्द पंगु लग रहे हैं। व्यक्ति का व्यकितत्व जब शब्दों की सीमा से परे हो जाये तो खामोशी बोलती है। </strong><strong>और चारु कीर्ति स्वामी जी तो खामोशी से बोलने में सिद्ध थे। कल बेलगोला भी मानो खामोश सा था। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए उनकी यह कविता&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>एक सूनापन</p>
<p>दिल दिमाग में है &#8211; सभी के।</p>
<p>चारु कीर्ति भट्टारक महास्वामी जी ने अपने विचार और आचरण से न सिर्फ परम्परा का गौरव बढ़ाया अपितु समाज को जुड़कर रहना सिखाया।</p>
<p>जैन धर्म की कीर्ति को</p>
<p>चारो ओर फैलाने वाले</p>
<p>युग नायक</p>
<p>कर्म नायक</p>
<p>धर्म नायक</p>
<p>मुनि भक्त नायक</p>
<p>लोक नायक</p>
<p>अनुशासन नायक</p>
<p>वात्सल्य नायक</p>
<p>भाषा नायक</p>
<p>वैचारिक नायक</p>
<p>योजना नायक</p>
<p>साधना साधक</p>
<p>को सदैव समर्पित</p>
<p>शीश&#8230;</p>
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